Friday, August 31, 2007
परमाणु ऊर्जा के लिए एक देश पर निर्भरता नहीं
उन्होंने ज़ोर देते हुए कहा कि भारत जैसे एक अरब से ज़्यादा की आबादी वाले देश की ऊर्जा की ज़रूरतों को दरकिनार नहीं किया जा सकता और इसके लिए परमाणु ऊर्जा को अपनाना एक बेहतर विकल्प है.
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह शुक्रवार को अपनी एक अहम यात्रा पर महाराष्ट्र गए हुए हैं जहाँ उन्होंने थाणे ज़िले के तारापुर परमाणु केंद्र में दो नए रिएक्टर देश को समर्पित किए.
उन्होंने इस मौके पर कहा, "हम जिस जनसंख्या और विकास दर के साथ आगे बढ़ रहे हैं उसमें ऐसे ऊर्जा विकल्पों को अपनाने की ज़रूरत है जो आर्थिक ही नहीं, बल्कि पर्यावरण की दृष्टि से भी हमारे लिए सुगम हों."
प्रधानमंत्री ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु एजेंसी (आईएईए) से सहमति मिलने के बाद भारत अमरीका, रूस, जापान और फ्रांस जैसे देशों सहित परमाणु आपूर्ति समूह (एनएसजी) के सभी 45 सदस्य देशों से सहयोग ले सकेगा.
उन्होंने कहा, "एनएसजी से सहयोग तभी मिल सकेगा जब हमें आईएईए से सहमति मिल जाएगी. इसके बाद परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में हम अंतरराष्ट्रीय समुदाय में अछूत बने रहने की स्थिति से उबर पाएंगे."
नए रिएक्टर
दोनों रिएक्टर, यूनिट-3 और युनिट-4 राज्य के थाणे ज़िले में स्थित तारापुर नाभिकीय ऊर्जा केंद्र में स्थि हैं. इन दोनों रिएक्टरों में से प्रत्येक की ऊर्जा क्षमता 540 मेगावाट तक है.
बताया जा रहा है कि ये रिएक्टर अंतरराष्ट्रीय परमाणु एजेंसी (आईएईए) की भारत की ओर से प्रस्तावित रिएक्टरों की सूची में शामिल नहीं हैं.
ग़ौरतलब है कि भारत की ओर से परमाणु रिएक्टरों की एक सूची आईएईए को प्रस्तावित की गई है जिनकी सुरक्षा जाँच का काम एजेंसी की देखरेख में होगा.
इस दौरान प्रधानमंत्री भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र में स्नातक छात्रों को संबोधित करेंगे और संस्थान के अव्वल छात्रों को होमी भाभा स्वर्ण पदक से सम्मानित भी करेंगे.
किसानों की सुध
स्थानीय बीबीसी संवाददाता ने बताया कि इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री राज्य में कृषि और किसानों की स्थिति से संबंधित जानकारी भी राज्य सरकार
पिछले वर्ष प्रधानमंत्री ने महाराष्ट्र में किसानों की सबसे ज़्यादा आत्महत्याओं के मामले वाले विदर्भ क्षेत्र का दौरा किया था और इसके बाद एक बड़े आर्थिक पैकेज की घोषणा की थी.
जानकारी के मुताबिक अपनी इस यात्रा में रिएक्टरों को राष्ट्र को समर्पित करने के बाद प्रधानमंत्री राज्य के मुख्यमंत्री से यह जानकारी लेंगे कि किसानों के लिए दिए गए राहत पैकेज का क्या हुआ.
यह भी कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री बिलासराव देशमुख इसे लेकर थोड़ा-सा दबाव भी महसूस कर रहे हैं और उन्होंने प्रधानमंत्री के राहत पैकेज से संबंधित व्यय आदि का पूरे ब्यौरे पर एक मोटी रिपोर्ट तैयार कर रखी है जिसे वो प्रधानमंत्री को सौंपने वाले हैं.
पिछले वर्ष विदर्भ क्षेत्र की यात्रा के बाद वहाँ के किसानों की बदहाल स्थिति को सुधारने के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 37 अरब 50 करोड़ रूपए के पैकेज की घोषणा की थी. इस राहत पैकेज के बावजूद किसानों की आत्महत्या के मामले सामने आते रहे हैं.
Thursday, August 30, 2007
परमाणु समझौते पर आज अहम बैठक
वामपंथी दल एक ऐसी समिति के गठन की मांग कर रहे हैं जिसमें दोनों पक्ष के लोग हों और इस समिति की रिपोर्ट के आने से पहले सरकार अमरीका के साथ परमाणु समझौते पर आगे न बढ़े.
संभावना है कि गुरुवार को होने वाली बैठक में इस समिति के गठन और इसकी कार्यप्रणाली पर ठोस चर्चा हो.
हालांकि सरकार ने ऐसी किसी समिति के गठन के लिए हामी नहीं भरी है लेकिन वामपंथी नेता मान रहे हैं कि बैठक में सरकार इस बारे में अपने निर्णय से अवगत करवाएगी.
समाचार एजेंसी पीटीआई ने सीपीएम नेता सीताराम येचुरी के हवाले से कहा है, "संभावना है कि सरकार के निर्णय से गुरुवार को हमें औपचारिक रुप से अवगत करवाया जाएगा."
तीन वामपंथी दल सीपीएम, सीपीआई और फॉरवर्ड ब्लॉक कह चुके हैं कि वे ऐसी किसी समिति के गठन होने की स्थिति में उसमें शामिल होने के लिए तैयार हैं.
अभी सिर्फ़ आरएसपी ने स्वीकृति नहीं दी है लेकिन माना जा रहा है कि वह भी इसके लिए राज़ी हो जाएगा.
सरकार चाहती है कि पाँच और छह सितंबर को संसद में परमाणु समझौते पर होने वाली चर्चा से पहले कोई रास्ता निकाल लिया जाए.
एक संयुक्त समिति के गठन को इसके रास्ते के रुप में देखा जा रहा है.
हालांकि मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी इस तरह की समिति के गठन के ख़िलाफ़ है. उसका कहना है कि यह सरकार और वामपंथी दलों भर का मामला नहीं है और इसके लिए संयुक्त संसदीय समिति का गठन होना चाहिए.
Wednesday, August 29, 2007
हैदराबाद धमाकों पर संसद में स्थगन प्रस्ताव
मुख्य विपक्षी दल भाजपा नेताओं का कहना है कि पार्टी दोनों सदनों में प्रश्नकाल को स्थगित कर आंतरिक सुरक्षा के मुद्दे पर चर्चा करने के लिए ज़ोर देगी.
भाजपा संसदीय दल के प्रवक्ता विजय कुमार मल्होत्रा का कहना था कि विपक्ष की तरफ से लोक सभा अध्यक्ष को कार्यस्थगन का नोटिस दिया जा चुका है.
उनका कहना था कि देश की सुरक्षा पर छाए गंभीर संकट पर चर्चा से ज्यादा महत्वपूर्ण कुछ नहीं हो सकता, इसलिए प्रश्नकाल को स्थगित किया जाना चाहिए.आंतरिक सुरक्षा
भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नक़वी ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि आंतरिक सुरक्षा देश के सामने सबसे महत्वपूर्ण सवाल बनकर उभरा है और इसे लेकर पूरे देश में चिंता है।
उनका कहना था कि देश में बढ़ती चरमपंथी गतिविधियों के लिए सरकार को जवाब देना होगा.
इसके पहले सोमवार को भारतीय जनता पार्टी ने आंध्र प्रदेश बंद का आहवान किया था.
बंद के कारण हैदराबाद में आम जीवन प्रभावित हुआ था और आम लोगों ने अपनी दुकानें बंद रखकर हैदराबाद धमाकों के ख़िलाफ़ अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की थी.
ग़ौरतलब है कि हैदराबाद में हुए बम धमाकों में 43 लोगों की मौत हो गई थी और 60 से अधिक घायल हो गए थे.
इन धमाकों के सिलसिले में पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है. लेकिन इस बारे में पुलिस बहुत खुलकर कुछ नहीं कह रही है.
Monday, August 27, 2007
धमाकों की जाँच जारी, बंद का आह्वान
शनिवार को हैदराबाद में दो जगहों पर हुए बम धमाकों में 42 लोग मारे गए थे और 60 से अधिक घायल हुए थे जिनमें कइयों का इलाज़ अभी भी चल रहा है।
हैदराबाद के पुलिस आयुक्त बलविंदर सिंह ने बीबीसी को बताया है कि जाँच सही दिशा में आगे बढ़ रही है।
उन्होंने बताया कि अभी तक इस मामले में किसी की गिरफ़्तारी नहीं हुई है।
उनका कहना था, "हम अपनी तरफ़ से पूरी कोशिश कर रहे हैं। मुझे विश्वास है कि जिन लोगों ने ये हरकत किया है, उन्हें हम पकड़ पाने में सफल होंगे।"
'बाहरी साजिश'
मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी का कहना है कि अभी तक मिले सबूतों से धमाकों के पीछे बांग्लादेश या पाकिस्तान के संगठनों का हाथ होने की बात सामने आती है।
पुलिस आयुक्त बलविंद सिंह का कहना है कि मुख्यमंत्री ने जो बयान दिया है, उसके पीछे आधार तो है ही।
उन्होंने बताया कि बरामद किए गए ज़िंदा बमों से पता चलता है कि ये नागपुर से लाए गए थे।
वो कहते हैं, "यह एक ऐसा विस्फोटक है जिसका इस्तेमाल खदानों और निर्माण कार्यों में होता है। हम तुरंत तो किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुँच सकते लेकिन इनका रासायनिक परीक्षण किया जा रहा है।"
हैदराबाद बंद
इस बीच विपक्षा पार्टी भाजपा ने सोमवार को हैदराबाद बंद का आह्वान किया है।
भाजपा ने आरोप लगाया है कि बम धमाकों के लिए केंद्र सरकार की लचर आंतरिक सुरक्षा नीति ज़िम्मेदार है।
बंद के मद्देनज़र पूरे शहर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। सुरक्षा अधिकारियों के जेहन में इसी वर्ष मक्का मस्जिद में हुए धमाके के बाद का वाकया याद है जब विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस फ़ायरिंग हुई थी और कई लोग मारे गए थे।
रविवार को केंद्रीय गृहमंत्री शिवराज पाटिल ने हैदराबाद पहुँच कर स्थिति का जायज़ा लिया। उन्होंने कहा कि बम धमाकों की घटना से दुख पहुँचा है, लेकिन हम इनसे डरने वाले नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि हमारी कोशिश रहेगी कि इस तरह की घटनाएँ कम हों या उनको पूरी तरह से ख़त्म किया जा सके।
Saturday, August 25, 2007
आज हो सकती है सलमान की गिरफ़्तारी
जोधपुर सत्र न्यायालय ने शुक्रवार को अभिनेता सलमान ख़ान की अपील ठुकराते हुए उनकी पाँच साल की सज़ा को बरक़रार रखा.
जोधपुर पुलिस की एक टीम सलमान की गिरफ़्तारी के लिए मुंबई रवाना हो चुकी है.
अभियोजन पक्ष के वकील महिपाल बिश्नोई ने बताया कि फ़ैसले के समय सलमान ख़ान के अदालत में मौजूद न रहने का संज्ञान लेते हुए अदालत ने उनके ख़िलाफ़ गिरफ़्तारी का वारंट जारी कर दिया.
ये वारंट मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के पास भेजा गया. जोधपुर के पुलिस अधीक्षक हवा सिंह ने बीबीसी को बताया, "वारंट हमें मिल गया है और जोधपुर पुलिस की एक टीम शनिवार सुबह मुंबई जाएगी और वहाँ की पुलिस के सहयोग से इस वारंट की तामील की जाएगी."
इस मामले में सलमान ख़ान को अग्रिम ज़मानत नहीं मिल सकती. उन्हें पहले अदालत में आत्मसमर्पण करना होगा.
मामला
जोधपुर की निचली अदालत ने पिछले साल अप्रैल में सलमान ख़ान को हिरण की दुर्लभ प्रजाति चिंकारा के शिकार का दोषी क़रार देते हुए पाँच साल की जेल और 25 हज़ार रुपए के जुर्माने की सज़ा सुनाई थी.
वारंट हमें मिल गया है और संभवत: जोधपुर पुलिस की एक टीम शनिवार सुबह मुंबई जाएगी और वहाँ की पुलिस के सहयोग से इसकी तामील की जाएगी
जोधपुर पुलिस अधीक्षक
अदालत ने जब फ़ैसला सुनाया, उस समय सलमान ख़ान अदालत में मौजूद नहीं थे. उनके वकीलों ने पहले ये तर्क दिया कि वे जोधपुर आने के लिए हवाई जहाज़ नहीं पकड़ सके लेकिन बाद में ये कहा कि सलमान बीमार हैं.
अदालत ने सलमान ख़ान को समर्पण करने का निर्देश दिया है. सलमान ख़ान के वकीलों ने अदालत से मोहलत मांगी लेकिन अदालत ने इसे अस्वीकार कर दिया. संभावना ये है कि सलमान ख़ान के ख़िलाफ़ वारंट जारी कर दिया जाएगा.
कहा जा रहा है कि सोमवार को सलमान ख़ान अदालत में समर्पण कर देंगे. सलमान ख़ान के वकीलों ने स्वीकार किया कि इस फ़ैसले से उन्हें झटका लगा है.
यह बिश्नोई समाज की जीत है. अब तो उन्हें ऊपरी अदालत से ज़मानत मिलने में भी परेशानी आ सकती है क्योंकि वे ख़ुद आज अदालत में नहीं आए
महिपाल बिश्नोई
उनके वकील दीपेश मेहता ने बताया कि वे इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ हाई कोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दायर करेंगे. वे अभी अदालत के फ़ैसले की प्रतिलिपि का इंतज़ार कर रहे हैं.
फ़ैसले का स्वागत
लेकिन बिश्नोई समाज ने इस फ़ैसले का स्वागत किया है. उनका कहना है कि शिकारियों को ये संदेश जाएगा कि जीव हत्या न करें.
फ़ैसले के बाद अभियोजन पक्ष के वकील महिपाल बिश्नोई ने कहा, "यह बिश्नोई समाज की जीत है. अब तो उन्हें ऊपरी अदालत से ज़मानत मिलने में भी परेशानी आ सकती है क्योंकि वे ख़ुद आज अदालत में नहीं आए."
उन्होंने कहा कि सलमान ख़ान के ख़िलाफ़ शिकार के तीन मामले हैं जिनमें से एक में उन्हें एक साल की सज़ा हो चुकी है और इस मामले में उन्हें पाँच साल की सज़ा हुई थी जिसे सत्र न्यायालय ने बरक़रार रखा है.
चिंकारा के शिकार का मामला 1998 का है. सलमान पर आरोप है कि उन्होंने 1998 में फ़िल्म 'हम साथ साथ हैं' की शूटिंग के दौरान चिंकारा को मारा था.
इस मामले में जोधपुर के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत ने सलमान ख़ान को वन्य जीव संरक्षण क़ानून के तहत शिकार का दोषी क़रार देते हुए सज़ा सुनाई थी.
इससे जुड़ी ख़बरें
सलमान मामले पर फ़ैसला 24 अगस्त को
07 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस
सलमान ख़ान को पाँच साल की जेल
10 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस
सलमान ख़ान नई मुसीबत में फंसे
26 जून, 2006 | भारत और पड़ोस
जेल भेजने के फ़ैसले पर स्थगन आदेश
10 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस
सलमान को एक साल की जेल की सज़ा
17 फ़रवरी, 2006 | मनोरंजन एक्सप्रेस
'टेप में सलमान ख़ान की आवाज़ नहीं'
16 सितंबर, 2005 | मनोरंजन एक्सप्रेस
पुलिस ने सलमान के फ़ोन रिकॉर्ड किए थे
20 जुलाई, 2005 | मनोरंजन एक्सप्रेस
सलमान टेप की जाँच के आदेश
20 जुलाई, 2005 | भारत और पड़ोस
सुर्ख़ियो में
सरकार फिलहाल संकट में नहीं:माकपा
मुशर्रफ़ 'राजनीतिक मेल-मिलाप' के पक्ष में
आज हो सकती है सलमान की गिरफ़्तारी
उत्तराखंड में बस दुर्घटना, 15 मरे
इस मामले में सलमान ख़ान को अग्रिम ज़मानत नहीं मिल सकती. उन्हें पहले अदालत में आत्मसमर्पण करना होगा.
मामला
जोधपुर की निचली अदालत ने पिछले साल अप्रैल में सलमान ख़ान को हिरण की दुर्लभ प्रजाति चिंकारा के शिकार का दोषी क़रार देते हुए पाँच साल की जेल और 25 हज़ार रुपए के जुर्माने की सज़ा सुनाई थी.
वारंट हमें मिल गया है और संभवत: जोधपुर पुलिस की एक टीम शनिवार सुबह मुंबई जाएगी और वहाँ की पुलिस के सहयोग से इसकी तामील की जाएगी
जोधपुर पुलिस अधीक्षक
अदालत ने जब फ़ैसला सुनाया, उस समय सलमान ख़ान अदालत में मौजूद नहीं थे. उनके वकीलों ने पहले ये तर्क दिया कि वे जोधपुर आने के लिए हवाई जहाज़ नहीं पकड़ सके लेकिन बाद में ये कहा कि सलमान बीमार हैं.
अदालत ने सलमान ख़ान को समर्पण करने का निर्देश दिया है. सलमान ख़ान के वकीलों ने अदालत से मोहलत मांगी लेकिन अदालत ने इसे अस्वीकार कर दिया. संभावना ये है कि सलमान ख़ान के ख़िलाफ़ वारंट जारी कर दिया जाएगा.
कहा जा रहा है कि सोमवार को सलमान ख़ान अदालत में समर्पण कर देंगे. सलमान ख़ान के वकीलों ने स्वीकार किया कि इस फ़ैसले से उन्हें झटका लगा है.
यह बिश्नोई समाज की जीत है. अब तो उन्हें ऊपरी अदालत से ज़मानत मिलने में भी परेशानी आ सकती है क्योंकि वे ख़ुद आज अदालत में नहीं आए
महिपाल बिश्नोई
उनके वकील दीपेश मेहता ने बताया कि वे इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ हाई कोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दायर करेंगे. वे अभी अदालत के फ़ैसले की प्रतिलिपि का इंतज़ार कर रहे हैं.
फ़ैसले का स्वागत
लेकिन बिश्नोई समाज ने इस फ़ैसले का स्वागत किया है. उनका कहना है कि शिकारियों को ये संदेश जाएगा कि जीव हत्या न करें.
फ़ैसले के बाद अभियोजन पक्ष के वकील महिपाल बिश्नोई ने कहा, "यह बिश्नोई समाज की जीत है. अब तो उन्हें ऊपरी अदालत से ज़मानत मिलने में भी परेशानी आ सकती है क्योंकि वे ख़ुद आज अदालत में नहीं आए."
उन्होंने कहा कि सलमान ख़ान के ख़िलाफ़ शिकार के तीन मामले हैं जिनमें से एक में उन्हें एक साल की सज़ा हो चुकी है और इस मामले में उन्हें पाँच साल की सज़ा हुई थी जिसे सत्र न्यायालय ने बरक़रार रखा है.
चिंकारा के शिकार का मामला 1998 का है. सलमान पर आरोप है कि उन्होंने 1998 में फ़िल्म 'हम साथ साथ हैं' की शूटिंग के दौरान चिंकारा को मारा था.
इस मामले में जोधपुर के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत ने सलमान ख़ान को वन्य जीव संरक्षण क़ानून के तहत शिकार का दोषी क़रार देते हुए सज़ा सुनाई थी.
Friday, August 24, 2007
सलमान की अर्ज़ी ख़ारिज, सज़ा बरकरार
जोधपुर की निचली अदालत ने 10 अप्रैल, 2006 को सलमान ख़ान को हिरण की दुर्लभ प्रजाति चिंकारा के शिकार का दोषी क़रार देते हुए पाँच साल की जेल और 25 हज़ार रुपए के जुर्माने की सज़ा सुनाई थी.
स्थानीय बिश्नोई समुदाय ने सलमान ख़ान के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज कराया था.
इसी फ़ैसले के ख़िलाफ़ सलमान ख़ान ने सत्र न्यायालय में याचिका दायर की थी लेकिन जज ने उनकी दलीलों को अस्वीकार कर दिया.
इस फ़ैसले के बाद सलमान ख़ान को आत्मसमर्पण करना होगा. न्यायालय ने अदालत में सलमान ख़ान की ग़ैरमौजूदगी को भी गंभीरता से लिया और उन्हें अदालत के समक्ष जल्दी से जल्दी पेश होने को कहा है.
फ़ैसले के बाद अभियोजन पक्ष के वकील महिपाल बिश्नोई ने कहा, "यह बिश्नोई समाज की जीत है. अब तो उन्हें ऊपरी अदालत से ज़मानत मिलने में भी परेशानी आ सकती है क्योंकि वे ख़ुद आज अदालत में नहीं आए."
उन्होंने कहा कि सलमान ख़ान के ख़िलाफ़ शिकार के तीन मामले हैं जिनमें से एक में उन्हें एक साल की सज़ा हो चुकी है और इस मामले में उन्हें पाँच साल की सज़ा हुई थी जिसे सत्र न्यायालय ने बरकरार रखा है.
सलमान के वकील दीपेश मेहता ने कहा है कि फ़ैसले के ख़िलाफ़ वो हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दाखिल करेंगे.
चिंकारा के शिकार का मामला 1998 का है. सलमान पर आरोप है कि उन्होंने 1998 में फ़िल्म 'हम साथ साथ हैं' की शूटिंग के दौरान चिंकारा को मारा था.
इस मामले में जोधपुर के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत ने सलमान ख़ान को वन्य जीव संरक्षण क़ानून के तहत शिकार का दोषी क़रार देते हुए सज़ा सुनाई थी.
Thursday, August 23, 2007
इंतज़ार ख़त्म, संजय दत्त रिहा हुए
1993 के मुंबई धमाकों के मामले में अवैध हथियार रखने के दोषी पाए गए संयज दत्त को मुंबई की विशेष टाडा टाडा अदालत छह साल की सज़ा सुना चुकी है।
इसके ख़िलाफ़ संजय दत्त ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी जहाँ से उन्हें अंतरिम ज़मानत मिल गई।
सुप्रीम कोर्ट में ज़मानत याचिक पर सुनवाई ही नहीं हो सकी क्योंकि टाडा अदालत के फ़ैसले की प्रति नहीं मिली थी।
इसी को आधार मानते हुए सुप्रीम कोर्ट ने संजय दत्त और पाँच अन्य दोषियों को अंतरिम ज़मानत देने का आदेश दिया था।
इसके बाद अंतरिम ज़मानत का आदेश यरवदा जेल के अधिकारियों को मिलने में देरी हुई जिससे संजय दत्त को रिहाई के लिए तीन दिनों का इंतज़ार करना पड़ा।
शर्तें
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि उनकी यह ज़मानत टाडा अदालत के फ़ैसले की प्रति मिलने तक प्रभावी रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम ज़मानत देते हुए इन लोगों के लिए कई शर्तें भी निर्धारित की हैं।
अदालत ने कहा है कि जिस दिन फ़ैसले की प्रति मिलेगी, उस दिन संजय दत्त सहित इन सभी लोगों को आत्मसमर्पण करना होगा।
इन लोगों को सप्ताह में एक दिन मुंबई में सीबीआई के समक्ष पेश होना होगा।
मुख्य न्यायधीश केजी बालाकृष्णन की खंडपीठ ने कहा कि फ़ैसले की प्रति मिलने के बाद ये सभी लोग ज़मानत के लिए अपील कर सकते हैं जिस पर योग्यता के आधार पर फ़ैसला किया जाएगा।
Wednesday, August 22, 2007
जापान के प्रधानमंत्री का संसद को संबोधन
उन्होंने कहा कि दोनों देश लोकतांत्रिक हैं और दोनों इसके पक्षधर हैं।
आबे का कहना था कि जापान भारत के साथ व्यापार बढ़ाना चाहता है, यह हमारे बड़े व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल से साफ़ है।
भारतीय संसद को सन् 2000 के बाद संबोधिक करने वाले वो पहले नेता हैं। सन् 2000 में अमरीकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने संसद को संबोधित किया था।
संसद को संबोधित करने के बाद जापान के प्रधानमंत्री भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से बातचीत करेंगे। दोनों नेताओं के बीच विभिन्न मुद्दों पर बातचीत होगी।
अमरीका के साथ हुए असैनिक परमाणु समझौते पर वामपंथियों के विरोध के बावजूद दोनों नेताओं के बीच असैनिक परमाणु सहयोग पर भी बातचीत की संभावना है।
जापान के प्रधानमंत्री आबे मंगलवार को तीन दिन के दौरे पर भारत पहुँचे। उनके साथ लगभग 200 से भी अधिक लोगों का व्यापार प्रतिनिधिमंडल भी आया हुआ है।
आबे ने कहा कि जापान की कंपनियां भारत में निवेश की इच्छुक हैं।
उनका कहना था कि ये कंपनियां आर्थिक गतिविधियों के लिहाज से भारत में अनुकूल माहौल चाहती हैं।
आबे ने भारत जापान साझेदारी फोरम की शुरुआत की। इसमें दोनों देशों के उद्योग प्रतिनिधि शामिल हैं।
ये फोरम दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के जरिए सामरिक संबंधों को मजबूत करने के लिए काम करेगा।
मनमोहन सिंह ने जापान के व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल को संबोधित करते हुए उन्हें आश्वासन दिया कि भारत दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग के रास्ते की सभी बाधाओं को दूर करेगा।
महत्वपूर्ण यात्रा
जापान के प्रधानमंत्री की इस भारत यात्रा को कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसा पहली बार है जब जापान का कोई प्रधानमंत्री एक बड़ी तैयारी के साथ भारत आ रहा है।
भारत और जापान दोनों ही देश व्यापार में बढ़ोत्तरी चाहते हैं।
जापान के प्रधानमंत्री की इस यात्रा से इसके साफ़ संकेत भी मिल रहे हैं।
यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री शिंज़ो आबे के साथ 200 से ज़्यादा जापान के बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों के कई प्रमुख कार्यकारी और कुछ विश्वविद्यालयों के कुलपति भी आए हैं।
जानकार यह भी मानते हैं कि जापान और भारत एक-दूसरे की भूमिका को भी एक बड़े रूप में देख रहे हैं।
दोनों ही देश चीन के बढ़ते आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव के मद्देनज़र अपने संबंधों को मज़बूत करने का प्रयास कर रहे हैं।
हालांकि 1998 में भारत के परमाणु परीक्षणों की जापान ने तीखी आलोचना की थी पर अब जापान नागरिक क्षेत्र में परमाणु तकनीक को लेकर भारत के साथ सहयोग की ओर बढ़ रहा है।
Tuesday, August 21, 2007
हनीफ़ का वीज़ा बहाल करने का आदेश
ब्रिस्बेन की एक अदालत ने डॉक्टर हनीफ़ की अपील पर वीज़ा बहाल करने का फ़ैसला सुनाया।
ग़ौरतलब है कि हनीफ़ को ब्रिटेन में विफल कार बम धमाकों के सिलसिले में ऑस्ट्रेलिया में हिरासत में ले लिया गया था।
उन्हें इस मामले में मदद करने के संदेह में लगभग एक महीने तक जेल में रखा गया। लेकिन बाद में सबूत न मिलने के कारण उन्हें छोड़ना पड़ा था और उसके बाद वो भारत वापस आ गए थे।
मोहम्मद हनीफ़ के वकील पीटर रूसो ने अदालत के फ़ैसले के बाद कहा कि इस फ़ैसले से उनके मुवक्किल का जीवन और कैरियर पटरी पर आ सकेगा।
साथ ही उन्होंने आव्रजन मंत्री केविन एंड्र्यू से फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील न करने का अनुरोध किया।
समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार पीटर रूसो का कहना था,'' मैं उम्मीद करता हूँ कि मंत्री अदालत के फ़ैसले को गरिमापूर्ण तरीके से स्वीकार करेंगे और डॉक्टर हनीफ़ के ऑस्ट्रेलिया में काम पर वापस आने का रास्ता साफ़ होगा।''
हनीफ़ की अपील
उल्लेखनीय है कि ऑस्ट्रेलिया में मोहम्मद हनीफ़ का वीज़ा रद्द करने संबंधी फ़ैसले के ख़िलाफ़ उनके वकीलों ने ब्रिस्बेन में अपील दायर की थी।
हनीफ़ को तीन सप्ताह तक ऑस्ट्रेलिया में जेल में रखा गया था। बाद में उनके ख़िलाफ़ चरमपंथियों का सहयोग करने संबंधी आरोप हटा लिए गए थे।
लेकिन उसके बाद ऑस्ट्रेलिया के आव्रजन मंत्री केविन एंड्रयू ने उनका वीज़ा रद्द कर दिया था।
डॉक्टर हनीफ़ फिलहाल भारत में हैं। डॉक्टर हनीफ़ चाहते हैं कि काम के लिए ऑस्ट्रेलिया लौटने का विकल्प उन्हें मिलना चाहिए।
इसके पहले ब्रिस्बेन की एक अदालत ने हनीफ़ को ज़मानत दे दी थी, लेकिन इसके आव्रजन विभाग ने उनका वीज़ा रद्द कर दिया और हनीफ़ को फिर से हिरासत में ले लिया गया था।
लंदन और ग्लासगो में जून के आखिर में हुए नाकाम बम हमलों के संबंध में उनके ख़िलाफ़ लगे आरोप हटा दिए जाने के बावजूद आव्रजन विभाग वीज़ा निरस्त करने के अपने विवादास्पद फ़ैसले पर कायम था।
ऑस्ट्रेलियाई पुलिस ने कहा था कि हनीफ़ का दिया हुआ मोबाइल सिम कार्ड उस जीप से बरामद हुआ था, जिसे ग्लासगो हवाई अड्डे पर हमले में इस्तेमाल किया गया था।
लेकिन बाद में ये पता चला कि ग्लासगो से काफ़ी दूर लीवरपूल से ये सिम कार्ड मिला था।
Monday, August 20, 2007
परमाणु गतिरोध पर वामपंथी दलों की बैठक
इसके पहले वामपंथी दलों के रुख़ के कारण संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार पर आए संकट को टालने के लिए रविवार शाम प्रधानमंत्री निवास पर यूपीए के घटक दलों की बैठक हुई।
ख़बरें हैं कि सरकार ने वामपंथी दलों की चिंताओं को दूर करने के आश्वासन के साथ ही एक समिति का प्रस्ताव रखा है जिसमें वैज्ञानिक, राजनयिक और राजनीतिज्ञों को रखने का प्रस्ताव है।
चर्चा ये है की परमाणु समझौते पर प्रधानमंत्री के विशेष दूत की भूमिका निभा रहे पूर्व विदेश सचिव श्याम सरन इस समिति का नेतृत्व करेंगे।
प्रेक्षकों का मानना है कि ये क़दम संकट को समाप्त करने का प्रयास कम और इसे टालने की कोशिश अधिक नज़र आता है।
इसके पहले वामपंथी पार्टियों ने सरकार को इस मुद्दे पर चेतावनी देते हुए स्पष्ट कर दिया था कि भारत अमरीका परमाणु समझौते पर आगे न बढ़ा जाए।
वामपंथी पार्टियां चाहती हैं कि पहले अमरीका के हाइड एक्ट के संदर्भ में इस समझौते की समीक्षा हो और तब तक के लिए अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के साथ होने वाली चर्चा को भी रोक दिया जाए।
वामपंथी पार्टियों का कहना है कि अमरीका के क़ानून के तहत ये प्रावधान है कि अगर भारत भविष्य मे परमाणु परीक्षण करता है, तो ये समझौता रद्द हो जाएगा और भारत को की जानेवाली परमाणु ईंधन की आपूर्ति पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा।
ऐसी स्थिति में परमाणु ईंधन की आपूर्ति करने वाले देशों से भी भारत को परमाणु ईंधन मिलने में कठनाई आएगी।
सरकार का रुख़
दूसरी ओर केंद्र सरकार का कहना है कि इस समझौते में ऐसे प्रावधान हैं जिसके कारण भारत के राष्ट्रीय हित सुरक्षित हैं और भारत की संप्रभुता पर इस समझौते का कोई असर नहीं पड़ेगा।
सरकार की तरफ़ से वामपंथी पार्टियों के साथ चल रहे गतिरोध को तोड़ने की ज़िम्मेदारी प्रणव मुखर्जी को सौंपी गई है।
इस कोशिश में उन्होंने रविवार को एक बार फिर सीपीएम नेता सीताराम येचुरी से मंत्रणा की और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य से फ़ोन पर बातचीत की।
सोमवार को वामपंथी पार्टियों की बैठक में उनके प्रस्ताव पर चर्चा हो सकती है।
हालांकि वरिष्ठ वामपंथी नेताओं में उदारवादी नेता कहे जाने वाले भी अब ये कहने लगे हैं कि यूपीए और वामदलों के रिश्तों में इतनी कड़वाहट आ गई है की अब ये रिश्ता लंबा चलना मुश्किल होगा।
लेकिन यूपीए सरकार बचेगी या जाएगी इस सवाल का साफ़ जवाब 22 और 23 अगस्त को सीपीएम की केंद्रीय समिति की बैठक के बाद ही मिल सकेगा।
Saturday, August 18, 2007
वामदलों की बैठक का दूसरा दिन, नरमी के संकेत
शनिवार को इस बैठक की समाप्ति के बाद भारतीय समयानुसार शाम साढ़े चार बजे तक पार्टी की ओर से बयान जारी किया जा सकता है जिससे यूपीए सरकार से वामदलों के संबंध में बदलाव भी हो सकते हैं।
हालाँकि सरकार के साथ वामदलों के तनाव में नरमी आने के संकेत मिल रहे हैं और जानकारों का कहना है कि ऐसी स्थिति पैदा होने की आशंका कम ही है कि वामपंथी सरकार से समर्थन वापसी की घोषणा करें।
ग़ौरतलब है कि भारत और अमरीका के बीच हो रहे परमाणु समझौते पर यूपीए सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे वामदलों ने अपनी आपत्ति जताई थी।
वामदलों का कहना है कि जहाँ एक ओर अमरीका से ऐसा समझौता करना भारत के सामरिक हितों को नुकसान पहुँचाएगा वहीं दूसरी ओर अमरीका जैसे देश से भारत की निकटता का असर देश की विदेश नीति पर भी पड़ेगा।
नरमी के संकेत
हनीमून ख़त्म हुआ माना जा सकता है लेकिन शादी जारी रह सकती है
माकपा महासचिव प्रकाश कारत
शुक्रवार की सुबह शुरू हुई इस बैठक का पहला दिन बेनतीजा रहा। इस बीच माकपा के वरिष्ठ नेता और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बुद्धदेब भट्टाचार्य ने शुक्रवार रात प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाक़ात की थी।
माकपा महासचिव प्रकाश कारत ने पोलित ब्यूरो की बैठक शुरू होने से कुछ देर पहले यूपीए सरकार के साथ रिश्तों के बारे में टिप्पणी करते हुए कहा था, "हनीमून ख़त्म हुआ माना जा सकता है लेकिन शादी जारी रह सकती है।"
पहले दिन की बैठक से क्या निकलकर सामने आया, इस बारे में माकपा नेताओं की ओर से कोई बयान नहीं दिया गया है।
उधर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने भी न केवल परमाणु समझौता बल्कि अमरीका के साथ साझा सैनिक अभ्यास जैसे मुद्दों पर भी आपत्ति जताई।
Friday, August 17, 2007
'पाक के सभी दलों से बात की जा रही है'
लेकिन अमरीका ने उन रिपोर्टों पर कोई टिप्पणी नहीं की जिनमें ये कहा जा रहा है कि अमरीका चाहता है कि आने वाले चुनाव से पहले मुशर्रफ़ और बेनज़ीर हाथ मिला लें।
अक्सर कहा जाता है कि पाकिस्तान को तीन ताकतें चलाती हैं- अल्लाह, आर्मी और अमरीका।
इस बार ये सवाल उठाया जा रहा है कि क्या अमरीका की मध्यस्थता पर ही पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) की नेता बेनज़ीर भुट्टो मुशर्रफ़ सरकार के साथ हाथ मिलाने के लिए आगे बढ़ी है।
वॉशिंगटन से बीबीसी संवाददाता जोनाथन बील कहते हैं कि जब ये सीधा सवाल पत्रकारों ने अमरीकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता शॉन मेकॉर्मैक से पूछा तो वो इसे टाल गए।
लेकिन अमरीकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इतना माना कि अमरीका पाकिस्तान में सभी महत्वपूर्ण राजनीतिक दलों से बातचीत कर रहा है।
उनका कहना था,'' हमारी ये कोशिश है कि हम पाकिस्तान में उदारवादियों के हाथ मज़बूत करें। हम ये चाहते हैं कि वो सब मिलकर उदारवादी केंद्र को इतना मज़बूत बना सकें कि वो चरमपंथियों का मुक़ाबला कर सके।''
पिछले हफ़्ते अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने फ़ोन कर राष्ट्रपति मुशर्रफ़ से बात की थी और कहा कि वो यथासंभव देश में आपातकाल लागू न करें।
अमरीका की सलाह
अमरीका के प्रतिष्ठित अख़बार न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा है कि उसी समय कोंडोलीज़ा राइस ने ये बात भी की थी कि पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो के साथ मुशर्रफ़ कैसे आगे बढ़ सकते हैं।
इतना ही नहीं न्यूयॉर्क टाइम्स ने ये भी लिखा है कि वरिष्ठ अमरीकी कूटनीतिज्ञ बेनज़ीर भुट्टो से भी लगातार बातचीत कर रहे हैं.
ऐसे में पाकिस्तान के सूचना उपमंत्री तारिक़ अज़ीम ख़ान ने कहा है कि उन्हें अपेक्षा है कि पाकिस्तान के दोस्त पाकिस्तान के अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेंगे। ज़ाहिर है उनका इशारा अमरीका की ओर था।
हालांकि अमरीका इस आलोचना से बचना चाहता है, तो फिर वो इतनी जद्दोजहद क्यों कर रहा है।
बीबीसी संवाददाता जोनाथन बील का कहना है कि दरअसल अमरीका पाकिस्तान के घटनाक्रम को लेकर चिंतित है।
अगर आने वाले चुनावों में राष्ट्रपति मुशर्रफ़ को कोई बड़ा झटका लगता है तो वो बुश प्रशासन को भी एक ज़बर्दस्त झटका होगा।
Thursday, August 16, 2007
पेरू में तेज़ भूकंप, कई लोग हताहत
भारतीय समयानुसार सुबह लगभग पाँच बज कर 10 मिनट पर आए इस भूकंप का केंद्र पेरू की राजधानी लीमा से 160 किलोमीटर दूर था। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 7।7 आँकी गई।
चार देशों में सूनामी की चेतावनी जारी की गई थी जिसे वापस ले लिया गया है.
इस भूकंप का असर सबसे ज़्यादा समुद्र के आसपास के इलाक़ों में देखा गया है।
राजधानी पेरू में भी इस भूकंप के झटके कुछ मिनटों के लिए महसूस किए गए। लोग घबरा कर अपने दफ़्तरों और घरों से बाहर आ गए, यातायात रुक गया। पहले झटके के बाद बाद में भी झटके महसूस किए गए।
राजधानी से इमारतों और पेड़ों के गिरने के अलावा आग लगने की भी ख़बरें आ रही हैं। भूकंप के कारण टेलिफ़ोन लाइनें और बिजली की तारें टूट गई हैं।
राजधानी लीमा से दूर लेकिन भूकंप के केंद्र के पास के कम से कम एक और शहर से भूकंप के विनाश की ख़बरें आ रही हैं लेकिन टेलिफ़ोन लाइनों के बंद होने से जानकारी आने में परेशानियाँ पेश आ रही हैं।
लीमा में बीबीसी संवाददाता डैन कॉलिन्स एक बहुमंज़िली इमारत में थे जब ये भूकंप आया,“मैं अपने घर में था जो एक 19 मंज़िला इमारत में है। मैं इमारत के सबसे ऊपर वाली मंज़िल में था। इमारत अचानक ज़ोर से हिलने लगी, किताबें अल्मारी से गिरने लगीं, लैंपशेड गिर गया, दीवारों से फ़ोटो गिरने लगीं। मैं एक लिफ़्ट में बैठकर जल्दी से बाहर निकल आया। लेकिन एक बात ध्यान रखने की है। लीमा में भूकंप आते रहते हैं इसीलिए यहाँ इमारतें ये ध्यान में रखकर बनाई गई हैं लेकिन इस तरह की व्यवस्था सभी इलाकों में नहीं है, वहाँ के बारे में ज़्यादा चिंता है।”
अमरीका के हवाई द्वीप स्थित पेसिफ़िक सुनामी वॉर्निंग सेंटर के विक्टर सार्डीना ने बीबीसी की बताया कि ये भूकंप बड़ा है इसीलिए इससे काफ़ी नुकसान हुआ होगा।
सुनामी के बारे में उनका कहना था, “ दुखद सच्चाई ये है कि अगर इस भूकंप से सुनामी आई है, जैसा कि लगता है कि आई है, भले ही अभी वो छोटी लगती हो तो वो अब तक समुद्रतटीय इलाक़ों तक पहुँच चुकी होगी। ये भूकंप समुद्र के बहुत करीब आया है और ज़्यादा गहरा भी नहीं है। मुझे लगता है कि अगर सुनामी आई होगी तो वो 15 से बीस मिनिट में तटीय इलाक़ों तक पहुँच गई होगी।”
स्थानयी मीडिया के मुताबिक हीका शहर में एक इमारत गिरने से कम से कम 15 लोग मारे गए हैं और 70 अन्य घायल हुए हैं।
अमरीकी भूगर्भ विज्ञान विभाग का कहना है कि भूकंप का केंद्र ज़मीन से सिर्फ़ 18 किलोमीटर नीचे था जिसके कारण सूनामी की आशंका जताई जाने लगी थी लेकिन अब इस चेतावनी को वापस ले लिया गया है।
Tuesday, August 14, 2007
पाकिस्तान में आज़ादी की 60वीं वर्षगाँठ
पाकिस्तान के लिए यह आज़ादी ही नहीं, पाकिस्तान के निर्माण की भी 60वीं वर्षगाँठ है। इस अवसर पर देशभर में कई विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।
देश की आज़ादी की पूर्व संध्या पर राष्ट्रीय टेलीविज़न के एक सवाल-जवाब कार्यक्रम में राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा कि पाकिस्तान ने 60 बरसों के सफ़र में बहुत कुछ हासिल किया है पर देश को और ज़्यादा उपलब्धियाँ हासिल करनी चाहिए थीं।
बातचीत के इस कार्यक्रम में उन्होंने कहा, "पाकिस्तान के लोग प्रतिभावान, मेहनती और देशभक्त हैं पर देश में नेतृत्व की कमज़ोरी के चलते देश को उतना हासिल नहीं हुआ जितना होना चाहिए था।"
वर्दी और टाई-सूट से अलग राष्ट्रपति मुशर्रफ़ साधारण कपड़ों में लोगों से रूबरू हुए।
उन्होंने कहा कि वो हर बात को पाकिस्तान के नज़रिए से देखते हैं। ऐसा कहना कि वो किसी के नियंत्रण में हैं, उन्हें उनकी तौहीन लगता है क्योंकि वो किसी के हाथ की कठपुतली नहीं हैं।
ग़ौरतलब है कि पाकिस्तान अपनी आज़ादी की 60वीं वर्षगाँठ ऐसे समय में मना रहा है जब चरमपंथ और लोकतंत्र बहाली जैसे अहम सवाल देश के सामने हैं। राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के ऊपर भी इस बात को लेकर ज़बरदस्त दबाव है कि वो सेना प्रमुख रहें या देश के राष्ट्रपति।
आज़ादी का जश्न
देशभर में इस मौके पर कई सरकारी-ग़ैर सरकारी कार्यक्रमों का आयोजन हो रहा है। सरकारी और ऐतिहासिक महत्व की इमारतों को इस मौके पर विशेष रूप से सजाया गया है।
पाकिस्तान का निर्माण अब से 60 वर्ष पहले भारत के विभाजन से हुआ था। तब से लेकर अब तक दोनों देशों के बीच संबंधों में कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं।
इसबार आज़ादी की 60वीं वर्षगाँठ पर पाकिस्तान ने देश की जेलों में बंद 134 भारतीय बंधकों को रिहा किया है।
वहीं भारत की ओर से भी 100 से ज़्यादा पाकिस्तानी बंधकों को मंगलवार को रिहा कर दिया जाएगा।
जहाँ पाकिस्तान में सोमवार रात से ही आज़ादी के जलसे की शुरुआत हो गई वहीं भारत में मंगलवार की आधी रात से आज़ादी का पर्व मनाना शुरू होगा।
मंगलवार को पाकिस्तान में आज़ादी की 60वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय अवकाश है। राष्ट्रीय झंडा फहराने और 21 बंदूकों की सलामी के साथ आज़ादी का जलसा वहाँ मनाया जाएगा।
भारत में बुधवार को आज़ादी की 60वीं वर्षगाँठ मनाई जाएगी।
Monday, August 13, 2007
परमाणु संधि पर मनमोहन देंगे बयान
दोनों पक्षों के बीच 2005 में हुए परमाणु संधि को लागू करने के लिए पिछले दिनों हुए 123 समझौते के बाद संसद में प्रधानमंत्री का यह पहला बयान होगा।
मंत्रिमंडल ने 123 समझौते को मंज़ूरी दे दी है लेकिन वाम दल और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी ने इसकी कड़ी आलोचना की है।
ऐसा कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री अपने बयान से पहले वाम दलों के नेताओं से भी मुलाक़ात करेंगे।
कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री परमाणु संधि से जुड़ी विभिन्न मुद्दों पर व्यक्त की जा रही चिंताओं पर स्पष्टीकरण देंगे औऱ साथ ही इस बात पर ज़ोर देंगे कि संधि भारत के हित में है।
उल्लेखनीय है कि रविवार को माकपा नेता प्रकाश करात ने कहा था कि परमाणु संधि पर वाम दलों के विरोध से पीछे हटने का कोई सवाल ही नहीं है।
उन्होंने यहां तक कहा कि गठबंधन चलाना कांग्रेस की ज़िम्मेदारी है और ये कांग्रेस से पूछा जाए कि वो सरकार चलाना चाहते हैं या नहीं।
Saturday, August 11, 2007
असम में 12 हिंदीभाषियों की हत्या
भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम में शुक्रवार देर रात संदिग्ध चरमपंथियों ने 12 हिंदीभाषी लोगों की गोली मार कर हत्या कर दी। इस हफ़्ते हिंदीभाषियों पर हुआ यह दूसरा हमला है। इससे पहले बुधवार की रात कारबी आंगलांग ज़िले में चरमपंथियों ने आठ हिंदी भाषी लोगों की हत्या कर दी थी। ताज़ा हमला भी कारबी आंगलांग ज़िले में ही हुआ है। अधिकारियों के मुताबिक शुक्रवार देर रात 20 से 25 लोगों का हथियारबंद दस्ता बोकाजाम पुलिस थाने के डाला गाँव पहुँचा। इन संदिग्ध चरमपंथियों ने गाँव में रहने वाले हिंदीभाषी लोगों के घरों में पहले आग लगा दी और जब लोग घरों से निकल कर भागने लगे तो उन पर ताबड़तोड़ गोलियाँ चलाई। 12 हिंदीभाषी मौके पर ही मारे गए और 15 गंभीर रूप से घायल हैं जिनमें से कइयों की स्थिति गंभीर है। इसलिए आशंका है कि मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है। हमला स्वतंत्रता दिवस से महज कुछ दिनों पहले हुआ है। हर साल संदिग्ध चरमपंथी स्वतंत्रता दिवस से पहले इस तरह के हमले करते हैं। इस माह हिंदीभाषियों पर हुए हमले में 23 लोग मारे जा चुके हैं। इनमें से अधिकतर बिहार और उत्तर प्रदेश से आकर बसे मज़दूर हैं। चरमपंथियों की नई रणनीति पुलिस का कहना है कि दोनों हमलों में यूनाइटेड लिबरेशन फ़्रंट ऑफ़ असम (अल्फ़ा) की सहयोगी चरमपंथी संगठन काबरी नेशनल लिबरेशन फ़्रंट (केएनएलएफ़) का हाथ हो सकता है। ग़ौर करने वाली बात ये है कि पिछले कुछ समय में उन जगहों पर हिंदीभाषियों को निशाना बनाया गया है जहाँ उनकी संख्या कम है। पहले तिनसुकिया और डिब्रूगढ़ जैसे ज़िलों में हमले होते थे जहाँ हिंदीभाषियों की आबादी अधिक है। लेकिन राज्य सरकार ने इन ज़िलों में सुरक्षा में व्यापक इंतज़ाम किए हैं जिसके कारण चरमपंथियों ने भी रणनीति बदल ली है। अब वे कारबी जैसे पहाड़ी इलाक़ों में हमले कर रहे हैं जहाँ हिंदीभाषियों की छिटपुट संख्या है। पिछले साल सितंबर में अल्फ़ा और सरकार के बीच बातचीत टूट जाने के बाद चरमपंथी हमले तेज़ हुए हैं। उसके बाद से लेकर अब तक लगभग 150 हिंदीभाषी मारे गए हैं। | |||||
Friday, August 10, 2007
उपराष्ट्रपति पद के लिए मतदान शुरू
एनडीए की ओर से नज़मा हेपतुल्ला और तीसरे मोर्चे की ओर से रशीद मसूद अन्य उम्मीदवार हैं।
यूपीए-वाम मोर्चे के हामिद अंसारी को बहुजन समाजवादी पार्टी(बसपा) का भी समर्थन मिल रहा है।
तीसरे मोर्चे के नेता सार्वजनिक तौर पर स्वीकार कर चुके हैं कि वे केवल अपनी पहचान दर्ज कराने के लिए चुनाव लड़ रहे हैं। इस बीच जनता दल (सेक्युलर) ने मतदान में भाग नहीं लेने का फ़ैसला किया है।
एनडीए गठबंधन की अगुआई कर रही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की नेता सुषमा स्वराज का कहना है कि हार-जीत अलग बात है लेकिन यूपीए के लिए मैदान खाली नहीं छोड़ा जा सकता।
हालाँकि उपराष्ट्रपति चुनाव से भाजपा और शिवसेना की दूरियाँ कम हुई हैं। राष्ट्रपति चुनाव में शिवसेना ने एनडीए से अलग रूख कायम करते हुए यूपीए-वाम मोर्चे की उम्मीदावर प्रतिभा पाटिल को वोट दिया था।
लेकिन इस बार शिवसेना ने संकते दिए हैं कि उसके सांसद उपराष्ट्रपति चुनाव में एनडीए उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करेंगे।
राष्ट्रपति चुनाव के विपरीत उपराष्ट्रपति चुनाव के निर्वाचक मंडल में केवल सांसद शामिल होते हैं विधायक नहीं।
लोकसभा और राज्यसभा के 788 सदस्यों में बसपा को मिलाकर यूपीए-वाम मोर्चे के उम्मीदवार को 425 सांसदों का समर्थन प्राप्त है जबकि एनडीए को केवल 240 सांसदों समर्थन मिल रहा है।
Thursday, August 9, 2007
'पाकिस्तान में आपातकाल की संभावना'
पाकिस्तान के सूचना उपमंत्री तारिक अज़ीम का कहना है कि देश के उत्तर पश्चिमी इलाक़ों में बिगड़ती परिस्थितियों के मद्देनज़र आपातकाल लगाने की संभावना को नकारा नहीं जा सकता है। हालांकि संसदीय मामलों के मंत्री शेर अफगान नियाज़ी ने अभी आपातकाल लगाए जाने की संभावना से इंकार किया है। उन्होंने कहा कि ये अफवाह मीडिया की फैलाई हुई है। उल्लेखनीय है कि बुधवार को राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने क़ानून एवं व्यवस्था से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बैठकें की हैं जिसके बाद इस संबंध में कई अफ़वाहें चल रही हैं कि जल्दी ही देश में आपातकाल की घोषणा की जाने वाली है। इस संबंध में बीबीसी उर्दू सेवा को दिए एक इंटरव्यू में सूचना उपमंत्री तारिक़ अज़ीम ने कहा कि अफ़गानिस्तान से सटे सीमावर्ती इलाक़ों की ख़राब स्थिति को देखते हुए आपातकाल लगाने की संभावना है। उनका कहना था, "देखिए संविधान में आपातकाल लगाने का प्रावधान है। आतंक के ख़िलाफ युद्ध में सूबा सरहद मे स्थिति ख़राब है। अगर सरकार को लगा कि आपातकाल लगाने से स्थिति बेहतर हो सकती है तो इमरजेंसी लगाई जा सकती है।" उनका कहना था," देखिए सीमावर्ती इलाक़ों में अभी जैसे हालात हैं,वैसे कभी नहीं रहे हैं। लोग उम्मीद करते हैं कि सरकार इस पर नियंत्रण करने के लिए इमरजेंसी लगाए। इसकी संभावना है। इमरजेंसी एक विकल्प है।" यह पूछे जाने पर कि अगर इमरजेसीं लगाने का फ़ैसला लिया गया तो कब तक औपचारिक घोषणा होगी, तो उनका कहना था," अभी तो इस पर विचार ही हुआ है। स्थिति ख़राब है। कुछ मंत्री पहले भी कह चुके हैं कि आपातकाल लगना चाहिए। मैं इस संभावना से इंकार नहीं करता कि आपातकाल नहीं लगाया जाएगा। इसकी संभावना है क्योंकि हालात बहुत ख़राब हैं। सरकार इस पर विचार कर रही है।" उल्लेखनीय है कि सरहदी सूबे में अमरीका के साथ पाकिस्तान ने अल क़ायदा के ख़िलाफ अभियान छेड़ रखा है लेकिन इन इलाक़ों में पाकिस्तानी और अमरीकी सेना को ज़बर्दस्त विरोध का सामना करना पड़ रहा है और आए दिन आत्मघाती हमले भी हो रहे हैं। इन ख़बरों पर पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो और क्रिकेटर से नेता बने इमरान खान ने भी प्रतिक्रियाएं दी हैं। जहां बेनज़ीर ने उम्मीद जताई कि मुशर्रफ़ ऐसा कदम नहीं उठाएंगे वहीं इमरान खान ने कहा कि अगर सरकार ऐसा कुछ करती है तो वो सरकार की कमज़ोरी को ही दर्शाएगा। |
Wednesday, August 8, 2007
'बाढ़ प्रभावित इलाक़ों में महामारी का खतरा'
विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनीसेफ का कहना है कि रुका हुआ पानी मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियों का घर है और जल्दी ही ये बीमारियां फैल सकती है।
हालांकि बाढ़ प्रभावित इलाक़ों में भोजन, पानी और दवाईयां बांटी गई हैं लेकिन बाढ़ का प्रकोप इतना अधिक है कि राहत कार्य कम पड़ते जा रहे हैं।
भारत में यूनीसेफ के स्वास्थ्य प्रमुख मार्ज़ियो बाबिले का कहना है कि कई गांव अभी भी स्वास्थ्य सुविधाओं से दूर हैं।
उन्होंने कहा ' बाढ़ का रुका हुआ पानी डायरिया और अन्य बीमारियां पैदा करने का स्त्रोत है जो महामारी बन सकती है। '
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार भारत में बिहार, असम और उत्तर प्रदेश राज्य सबसे बुरी तरह प्रभावित हैं जहां प्रभावितों की संख्या दो करोड़ है।
उधर बांग्लादेश में 80 लाख और नेपाल में तीन लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं।
हालांकि कई इलाक़ों में अब बारिश बंद और पानी घट रहा है लेकिन अभी भी कई इलाक़ों में पानी भरा हुआ है।
गृह मंत्री का दौरा
भारत में गृह मंत्री शिवराज पाटिल और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने बाढ़ प्रभावित असम और बिहार राज्यों का दौरा किया है। बिहार में बाढ़ राहत और मदद न मिल पाने के कारण हज़ारों लोग नाराज़ बताए जाते हैं।
आँकड़ों के अनुसार अब तक 1428 लोग अपनी जानें गवाँ चुके हैं और पूरे देश के 192 ज़िलों से बाढ़ की ख़बरें मिल रहीं हैं।
बिहार के कई शहरों में पीने का पानी बड़ी भारी चुनौती बना हुआ है। शहरों में फिल्ट्रेशन प्लांट डूब गए हैं और गाँवों में कुएँ और हैंडपंप बेकार हो गए हैं।
गंदे पानी की वज़ह से मलेरिया,डेंगी और लेप्टोस्पाईरोसिस जैसी बीमारियों का ख़तरा बहुत ज़्यादा बढ़ गया है।
Tuesday, August 7, 2007
'तालेबान को समाप्त करने पर सहमति'
दोनों नेताओं के बीच अमरीकी राष्ट्रपति के आरामगाह कैंप डेविड में दो दिन तक बातचीत चली।
इसके बाद दोनों नेताओं ने एक साझा पत्रकारवार्ता को संबोधित किया। दोनों नेताओं का कहना था कि अफ़ग़ानिस्तान में काफ़ी प्रगति हुई है।
राष्ट्रपति करज़ई ने तालेबान के ख़तरे को बहुत कम कर आँका। उनका कहना था,'' तालेबान हारी हुई शक्ति हैं और इनसे मेरी सरकार को कोई ख़तरा नहीं है।''
लेकिन साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि सहयोगी देशों की यह ज़िम्मेदारी बनती है कि चरमपंथियों को पहाड़ों से उनके छुपने के स्थानों से निकालें क्योंकि वो आम नागरिकों के लिए गंभीर ख़तरा हैं।
राष्ट्रपति करज़ई ने अमरीकी और नैटो अभियान के दौरान आम नागरिकों के मारे जाने का मामला उठाया।
राष्ट्रपति बुश ने इसकी ज़िम्मेदारी तालेबान पर डाल दी। उनका कहना था कि वो अफ़ग़ान लोगों की पीड़ा समझते हैं लेकिन इसके लिए तालेबान ज़िम्मेदार हैं क्योंकि वे आम लोगों को ढाल की तरह इस्तेमाल करते हैं।
राष्ट्रपति बुश का कहना था कि अफ़ग़ानिस्तान में 50 लाख बच्चे अब स्कूल जाने लगे हैं, इनमें से एक तिहाई लड़कियाँ हैं।
हामिद करज़ई ने कहा कि तालेबान के सत्ता से बेदखल होने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हुआ है जिसकी वजह से पाँच साल से कम उम्र के 85 हज़ार बच्चे जीवित हैं।
राष्ट्रपति करज़ई की अमरीका यात्रा ऐसे समय हुई है जब अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान की सीमा से चरमपंथियों से ख़तरा बढ़ा है।
कोरियाई बंधक
करज़ई ने स्पष्ट किया कि अफ़ग़ानिस्तान में बंधक बनाए गए 21 दक्षिण कोरियाई नागरिकों की रिहाई के लिए तालेबान से कोई सौदेबाजी नहीं की जाएगी।
तालेबान ने दो दक्षिण कोरियाई लोगों की हत्या कर दी थी। उनकी माँग है कि इन बंधकों के बदले उनके नेताओं को रिहा किए जाए।
इसके पहले तालेबान के एक नेता ने बीबीसी से बातचीत में कहा था कि 'बंधकों का भविष्य इन नेताओं के हाथ में है।'
अमरीका ने भी इस सामूहिक अपहरण की कड़ी निंदा की है, उसके एक प्रवक्ता ने कहा कि "तालेबान अपने आतंकवादी तौर-तरीक़ों से बाज़ नहीं आ रहा है।"
ईरान के मामले पर दोनों नेताओं के बीच मतभेद नज़र आए। बुश ने इन्हें स्पष्ट भी कर दिया।
उनका कहना था कि वो राष्ट्रपति करज़ई के उस बयान से सहमत नहीं हैं जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान अफ़गानिस्तान के मामले में बाधा नहीं डाल रहा है बल्कि सहायता कर रहा है।
राष्ट्रपति बुश ने कहा कि ईरान भला देश नहीं है और अमरीका उसे अलग थलग करने की कोशिशें जारी रखेगा।
Monday, August 6, 2007
सलमान ख़ान जोधपुर की अदालत में पेश होंगे
उल्लेखनीय है कि राजस्थान में जोधपुर की एक अदालत ने 10 अप्रैल, 2006 को सलमान ख़ान को चिंकारा के शिकार के मामले में दोषी क़रार देते हुए पाँच साल की जेल और 25 हज़ार रुपए के जुर्माने की सज़ा सुनाई थी।
फ़ैसले के बाद अदालत ने जोधपुर केंद्रीय कारागार भेज दिया गया था जहाँ उन्होंने तीन रातें गुजारीं थीं। ज़मानत मिलने के बाद वो जेल से बाहर आ पाए थे।
उन्होंने निचली अदालत के फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील की है और कहा है कि वो निर्दोष हैं।
सलमान ख़ान के वकील एचएम सारस्वत का कहना था कि मामले की सोमवार को सुनवाई होगी और हम इस पर बहस के लिए तैयार हैं।
शिकार का मामला
चिंकारा के शिकार का मामला 1998 का है। सलमान पर आरोप है कि उन्होंने 1998 में फ़िल्म 'हम साथ साथ हैं' की शूटिंग के दौरान चिंकारा को मारा था।
इस मामले में जोधपुर के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत ने सलमान ख़ान को वन्य जीव संरक्षण क़ानून के तहत शिकार का दोषी क़रार देते हुए सज़ा सुनाई थी।
वन्य जीवन क़ानून की धारा 51 और 52 के तहत अधिकतम छह साल की सज़ा का प्रावधान है।
इससे पहले काले हिरण के शिकार के लिए एक अन्य मामले में सलमान ख़ान को एक साल की जेल और पाँच हज़ार रुपए जुर्माने की सज़ा सुनाई गई थी।
Saturday, August 4, 2007
बाढ़ पीड़ितों पर पुलिस फ़ायरिंग
ये लोग चकदह गाँव में जल जमाव हटाने के लिए बांध काटने की कोशिश कर रहे थे। घटना में पाँच अन्य लोग घायल हो गए।
बिहार सरकार ने पूरे मामले की जाँच के आदेश दे दिए हैं। मुधबनी ज़िला बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बाढ़ पीड़ितों तक राहत पहुँचाने के लिए वायुसेना से मदद माँगी है।
उन्होंने बताया कि शनिवार से वायुसेना के दो हेलिकॉप्टरों को इस काम में लगाया जाएगा।
मरे
उत्तरी भारत, नेपाल और बांग्लादेश में आई भीषण बाढ़ के कारण क़रीब दो करोड़ लोग विस्थापित हो गए हैं। सड़कें डूबी हुई हैं, सैकड़ों गाँवों का संपर्क टूट गया है और कई नदियाँ ख़तरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।
भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम में सेना राहत कार्य चला रही है लेकिन राहत कार्य काफ़ी नहीं हैं। बांग्लादेश में हज़ारों लोग अपना घर-बार छोड़कर सुरक्षित स्थानों की तलाश में भटक रहे हैं।
भारत में सरकारी आँकड़ों के मुताबिक़ कम से कम 200 लोगों की मौत हो गई है जबकि बांग्लादेश में 64 लोग मारे गए हैं। माना जा रहा है कि मरने वालों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो सकती है।
बाढ़ के कारण विस्थापित होने वालों में भारत के लगभग सवा से डेढ़ करोड़ लोग हैं, बांग्लादेश के लगभग 55 लाख लोग हैं और नेपाल के लगभग सवा लाख लोग हैं।
भारत में बिहार, असम, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। उत्तर प्रदेश में गोरखपुर और कुशीनगर हालात बहुत ख़राब हैं और सेना की मदद से 500 गाँव ख़ाली कराए गए हैं।
बिहार में स्थिति चिंताजनक
इनमें से बिहार सबसे ज़्यादा प्रभावित हुआ है जहाँ 16 ज़िलों में विस्थापितों की संख्या ग़ैरसरकारी आँकड़ों के अनुसार लगभग 80 लाख है।
बिहार के दरभंगा, मधुबनी और सीतामढ़ी ज़िलों का संपर्क देश के दूसरे हिस्सों से कटा हुआ है और वहाँ सड़क और रेल यातायात पूरी तरह से ठप्प है।
बिहार में राहतकार्यों पर भी राजनीति हो रही है और आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला हुआ है।
बिहार के आपदा प्रबंधन सचिव मनोज श्रीवास्तव ने बीबीसी को बताया कि इस बार ज़बरदस्त बारिश हुई है।
उनका कहना था, "लगभग बीस दिन से लगातार बारिश हो रही है। कई प्रभावित इलाक़ों में सामान्य बारिश के मुकाबले में ढ़ाई से तीन गुना बारिश हुई है और इसी कारण स्थिति इतनी गंभीर बनी हुई है।"
कोर्ट ने माँगा ब्योरा
उधर बीबीसी संवाददाता मणिकांत ठाकुर का कहना है कि सरकारी अधिकारी लीपापोती करने की कोशिश कर रहे हैं।मणिकांत ठाकुर का कहना है, "मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विदेश से लौटने के बाद हुई बैठक में फ़ैसला हुआ है कि हर प्रभावित ज़िले में विशेष ज़िलाधिकारी भेजे जा रहे हैं। हर ज़िले में एक मंत्री तैनात रहेंगे। शनिवार से हेलिकॉप्टरों के ज़रिए फ़ूड पैकेट यानि खाद्य पदार्थों को पैकेट प्रभावित लोगों तक पहुँचाए जाँएगे क्योंकि दरभंगा मधुबनी में बहुत ही गंभीर स्थिति बनी हुई है।"
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को कुछ ज़िलों का हवाई सर्वेक्षण करेंगे।
आपदा प्रबंधन सचिव मनोज श्रीवास्तव के अनुसार 121 राहत शिविर लगाए गए हैं और पशुओं के लिए 34 शिविर लगाए गए हैं।
बिहार और असम में कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं और इससे लोगों तक राहत पहुँचाने में मुश्किलें आ रही है।
Friday, August 3, 2007
दक्षिण एशिया में बाढ़ से दो करोड़ विस्थापित
भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम में सेना राहत कार्य चला रही है लेकिन बीबीसी संवाददाता का कहना है कि राहत कार्य काफ़ी नहीं हैं। बांग्लादेश में हज़ारों लोग अपना घर-बार छोड़कर सुरक्षित स्थानों की तलाश में भटक रहे हैं।
भारत में सरकारी आँकड़ों के मुताबिक़ कम से कम 125 लोगों की मौत हो गई है जबकि बांग्लादेश में 55 लोग मारे गए हैं। माना जा रहा है कि मरने वालों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो सकती है।
बाढ़ के कारण विस्थापित होने वालों में भारत के लगभग सवा से डेढ़ करोड़ लोग हैं, बांग्लादेश के लगभग 55 लाख लोग हैं और नेपाल के लगभग सवा लाख लोग हैं।
दक्षिण एशिया में बाढ़ से हाहाकार
भारत में बिहार, असम, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। उत्तर प्रदेश में गोरखपुर और कुशीनगर हालात बहुत ख़राब हैं और सेना की मदद से 500 गाँव ख़ाली कराए गए हैं।
एशिया में बाढ़ से लोग बेहाल
बिहार में स्थिति चिंताजनक
इनमें से बिहार सबसे ज़्यादा प्रभावित हुआ है जहाँ 16 ज़िलों में विस्थापितों की संख्या ग़ैरसरकारी आँकड़ों के अनुसार लगभग 80 लाख है।
लगभग बीस दिन से लगातार बारिश हो रही है। कई प्रभावित इलाक़ों में सामान्य बारिश के मुकाबले में ढ़ाई से तीन गुना बारिश हुई है और इसी कारण स्थिति इतनी गंभीर बनी हुई है
आपदा प्रबंधन सचिव, बिहार
बिहार के दरभंगा, मधुबनी और सीतामढ़ी ज़िलों का संपर्क देश के दूसरे हिस्सों से कटा हुआ है और वहाँ सड़क और रेल यातायात पूरी तरह से ठप्प है।
बिहार में बाढ़ से लोग बेहाल
बिहार में राहतकार्यों पर भी राजनीति हो रही है और आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला हुआ है।
बिहार के आपदा प्रबंधन सचिव मनोज श्रीवास्तव ने बीबीसी को बताया कि इस बार ज़बरदस्त बारिश हुई है।
उनका कहना था, "लगभग बीस दिन से लगातार बारिश हो रही है। कई प्रभावित इलाक़ों में सामान्य बारिश के मुकाबले में ढ़ाई से तीन गुना बारिश हुई है और इसी कारण स्थिति इतनी गंभीर बनी हुई है।"
कोर्ट ने माँगा ब्योरा
सरकारी अधिकारी लीपापोती करने की कोशिश कर रहे हैं।
मणिकांत ठाकुर का कहना है, "मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विदेश से लौटने के बाद हुई बैठक में फ़ैसला हुआ है कि हर प्रभावित ज़िले में विशेष ज़िलाधिकारी भेजे जा रहे हैं। हर ज़िले में एक मंत्री तैनात रहेंगे। शनिवार से हेलिकॉप्टरों के ज़रिए फ़ूड पैकेट यानि खाद्य पदार्थों को पैकेट प्रभावित लोगों तक पहुँचाए जाँएगे क्योंकि दरभंगा मधुबनी में बहुत ही गंभीर स्थिति बनी हुई है।"
बताया गया है कि शुक्रवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कुछ ज़िलों का हवाई सर्वेक्षण करेंगे।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विदेश से लौटने के बाद हुई बैठक में फ़ैसला हुआ है कि हर प्रभावित ज़िले में विशेष ज़िलाधिकारी भेजे जा रहे हैं। हर ज़िले में एक मंत्री तैनात रहेंगे. शनिवार से हेलिकॉप्टरों के ज़रिए फ़ूड पैकेट गिराए जाएँगे महत्वपूर्ण है कि शुक्रवार को ही बिहार के उच्च न्यायालय ने सरकार से इस बारे में जवाब तलब किया है कि प्रभावित ज़िलों पर कितनी मदद पहुँचाई गई है, इसका विस्तृत ब्योरा दिया जाए।
आपदा प्रबंधन सचिव मनोज श्रीवास्तव के अनुसार 121 राहत शिविर लगाए गए हैं और पशुओं के लिए 34 शिविर लगाए गए हैं।
बिहार और असम में कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं और इससे लोगों तक राहत पहुँचाने में मुश्किलें आ रही है।
Thursday, August 2, 2007
मीडिया के उकसावे पर' विकलांगों की मौत
वाराणसी में गुमटी यानी छोटी दुकान चलाने वाले 13 विकलांगों ने मंगलवार को टीवी कैमरों के सामने ज़हर खा लिया था। इन 13 में से पाँच लोगों की मौत हो गई है। इस सिलसिले में पुलिस ने एक एफ़आईआर दर्ज कर ली है और दो स्थानीय नेताओं को गिरफ़्तार कर लिया गया है। शहर के गुरुबाग इलाक़े के पास ये विकलांग दुकानें चलाते थे। पिछले दिनों नगर निगम की अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई के दौरान उन पर दबाव बनाया गया कि वे अपनी दुकानें हटा लें। इन लोगों ने अपनी दुकानें तो हटा लीं लेकिन इसके विरोध में धरना-प्रदर्शन के साथ पुनर्वास की भी माँग करते रहे। 'उकसावा' मंगलवार को कथित तौर से अपनी समस्या की ओर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए 13 विकलांगों ने ज़हर खा लिया, जब ये सब हुआ उस समय वहाँ आईबीएन-7 और स्टार न्यूज़ की कैमरा टीमें मौजूद थीं। इसके बाद वहाँ हड़कंप मच गया और अचेत लोगों को आनन-फानन में अस्पताल लाया गया। प्रारंभिक जांच में ही चिकित्सकों ने एक विकलांग राजेश मौर्य को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद चिकित्सा के दौरान त्रिभुवन, गुरुदेव, रामचंद्र और मंगरू प्रसाद की भी सांसें थम गईं। बाक़ी सात लोगों को इलाज़ के बाद घर भेज दिया गया है जबकि एक विकलांग अभी भी बेहोशी की हालत में है और उसका इलाज़ चल रहा है। उधर, ज़िला प्रशासन का कहना है कि इस घटना के लिए विकलांगों के दो नेता और दो टीवी चैनलों की भूमिका भी जाँच के दायरे में है। आश्रय अधिकार अभियान नाम की संस्था चलाने वाले राजीव का कहना है कि "यह एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना है, शासन की ज़िम्मेदारी थी कि वह ऐसी घटना को होने से रोकती, ये लोग ज़हर खाने पर मजबूर हो गए थे।" शहर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक यानी एसएसपी एसबी शिरडकर ने बीबीसी को बताया, ''पुलिस ने स्थानीय नेत नमो प्रसाद उपाध्याय और रविनाथ उर्फ रवि बनर्जी को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया है.'' उन्होंने कहा कि इन दोनों ने विकलांगो को ज़हर यह कहकर दिया कि इसे खाने से कुछ नहीं होगा और सिर्फ थोड़ी देर के लिए अचेत होंगे। बकौल एसएसपी, इन दोनों को ऐसा करते हुए फ़िल्माया गया वीडियो फ़िल्म भी पुलिस के पास है। मीडिया की भूमिका एसएसपी ने कहा कि स्टार न्यूज़ और और आइबीएन7 के पत्रकारों की भूमिका की भी जाँच की जा रही है। उनके अनुसार इन लोगों ने भी विकलांगों को ज़हर खाने के लिए उकसाया था। मीडिया की भूमिका के बारे में कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण ने कहा, "मानवता सबसे ऊपर है, और मीडिया के लोग भी मानव हैं। अगर कहीं अंदेशा है लोगों के जीवन पर ख़तरा है, तो पहले बीचबचाव करना चाहिए, न्यूज़ स्टोरी ज़रूर करनी चाहिए लेकिन इंसानी जानों की क़ीमत पर नहीं।" इससे पहले मंगलवार को ही वाराणसी की जिलाधिकारी श्रीमती वीणा ने मीडिया को बताया था कि 28 जुलाई को वार्ता के दौरान विकलांगों ने प्रशासन के पुनर्वास संबंधी प्रस्ताव पर सहमति जता दी थी। उन्होंने अस्पताल में भर्ती विकलांगों के हवाले से बताया था कि ज़हर देने वाले ने कहा था कि खा लो, यह नींद की मामूली दवा है। पटरी दुकानदारों के राष्ट्रीय एसोसिएशन के महासचिव गोकुल प्रसाद वाराणसी पहुँचे हैं, उन्होंने एक जाँच समिति बनाई है, उनका कहना है कि देश भर में दो करोड़ पटरी दुकानदार हैं जिनकी समस्याएँ बहुत गंभीर हैं। | ||||
Wednesday, August 1, 2007
संजय दत्त सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे
उनके वकील सतीश मानीशिंदे का कहना था, "हमें लगता है कि फ़ैसला बहुत सख़्त है। संजय दत्त मज़बूत इरादे वाले व्यक्ति हैं, वे हर मुसीबत से उबरे हैं। ये भी संकट का समय है। उनके लाखों प्रशंसक और परिवार के सदस्य संजय के लिए दुआ कर रहे हैं।"
उन्होंने ये भी कहा कि फ़िल्म निर्देशक और निर्माता भी संजय दत्त के साथ हैं और उन्होंने संजय से किसी फ़िल्म के लिए पैसे वापस नहीं माँगे हैं।
बतौर अभिनेता संजय दत्त पर लाखों रुपए दाँव पर लगे हुए हैं। फ़िल्म निर्देशक और संजय के दोस्त बंटी वालिया ने कहा, "जहाँ तक निर्माणाधीन फ़िल्मों की बात है, तो मुझे लगता है कि सुप्रीम कोर्ट उन्हें ज़मानत दे देगा और ज़्यादातर निर्माता उनके बाहर आने तक का इंतज़ार करेंगे।"
जब फ़ैसला आया तो अदालत के बाहर खड़े संजय दत्त के कई प्रशंसक भी उन्हें मिली सज़ा से हैरान थे।
उनके एक प्रशंसक का कहना था, "संजय अच्छे इनसान हैं,उन्हें सज़ा होनी चाहिए थी लेकिन छह साल की नहीं."
वहीं एक अन्य प्रशंसक ने अपनी निराशा कुछ यूँ जा़हिर की, "मैं मानता हूँ कि संजय दत्त से ग़लती हुई और उन्हें सज़ा होनी भी चाहिए थी। पर वे अपराधी नहीं है। छह साल की सज़ा देने की क्या ज़रूरत थी। वे पहले ही जेल में कुछ समय काट चुके हैं। एक और साल काफ़ी था।"
'एक साथ पिंक फ़्लॉयड सुनना चाहिए'
मुंबई बम धमाकों की सुनवाई के सिलसिले में जब फ़िल्म अभिनेता संजय दत्त मंगलवार को विशेष अदालत पहुँचे थे तो उन्होंने भी नहीं सोचा था कि उन्हें छह साल जेल की सज़ा होगी।
सफ़ेद कमीज़ और नीले रंग की जीन्स पहने संजय दत्त बॉलीवुड के अपने कई दोस्तों के साथ अदालत पहुँचे। वे अदालत में थोड़े घबराए हुए तो थे पर कुछ ख़ास परेशान नहीं नज़र आए।
अदालत जाने के रास्ते में जो लोग उन्हें शुभकामनाएँ दे रहे थे, उनमें से कुछ के साथ संजय दत्त ने हाथ मिलाया तो कुछ के गले भी लगे।
वहाँ जमा हुई भीड़ में संजय दत्त को जो चेहरा जाना-पहचाना नज़र आता, वो उससे बात करते।
मेरा चेहरा जब उन्होंने भीड़ में पहचाना तो मुझसे कहा, "हमें कभी एक साथ पिंक फ़्लॉयड सुनना चाहिए।"
दरअसल कुछ हफ़्ते पहले संजय दत्त मेरे समेत कई संवाददाताओं से बातचीत कर रहे थे और तब इस बात पर चर्चा हुई थी कि उन्हें रॉक ग्रुप को सुनना बेहद पसंद है।
संजय का अनुरोध
अदालत में जब जज पीडी कोडे ने संजय दत्त को जेल की सज़ा सुनाई तो वे सकते में आ गए।
सज़ा सुनाते हुए जज कोडे ने कहा, "देश के का़नून का आदर करना चाहिए। अगर आप क़ानूनों का आदर नहीं करते तो आपको नैतिक इनसान नहीं कहा जा सकता।"
जज ने कहा कि हांलाकि संजय दत्त को बम धमाकों से नहीं जोड़ा जा सकता लेकिन हमलावरों से हथियार ख़रीदने के लिए उन्हें जेल होनी चाहिए।
ये सुनने के बाद संजय दत्त का चेहरा लाल हो गया। सज़ा सुनते समय वे बमुश्किल अपने आँसुओं को रोक पाए।
इसके बाद संजय दत्त ने गुहार लगाई कि उन्हें अपने परिजनों से मिलने के लिए और वक़्त दिया जाए।
उन्होंने कहा, "यूअर ऑनर,मेरा अनुरोध है कि मेरे परिवार से बात करने का मुझे मौका दिया जाए। मेरी बहन गर्भवती है, मुझे लगा था कि मुझे प्रोबेशन मिल जाएगा इसलिए मैं तैयार नहीं हूँ। मुझे समय दीजिए ताकि मैं चीज़ों को समेट सकूँ।"
लेकिन जज ने संजय दत्त के इस अनुरोध को अस्वीकार करते हुए कहा कि वे ऐसा नहीं कर सकते।
फिर संजय दत्त ने जज से दरख़्वास्त की कि उनकी बेटी से बात करने की अनुमति दी जाए जो न्यूयॉर्क में पढ़ती है। जज ने संजय का ये अनुरोध मान लिया.
संजय दत्त लगातार अपने वकीलों से बात करते रहे और ऐसा लग रहा था कि वे इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि आगे क्या करना है।
उन्हें दो अगस्त तक आर्थर रोड जेल में रखा जाएगा।
