Thursday, May 31, 2007

राजस्थान: वार्ता शुरु पर स्थिति तनावपूर्ण

आरक्षण विवाद को सुलझाने के लिए राजस्थान सरकार और गूजर नेताओं के बीच पहले दौर की बातचीत पूरी हो गई है लेकिन तनाव अभी भी बरकरार है ।


आंदोलनकारियों से बातचीत के लिए गठित चार मंत्रियों की समिति ने बुधवार देर रात दौसा जाकर गूजर समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की। दूसरे दौर की बातचीत गुरुवार को होगी ।
इस बीच गूजर नेताओं ने शुक्रवार को राज्य के पाँच ज़िलों जयपुर, टोंक, अजमेर, करौली और चित्तौरगढ़ में बंद का आह्वान किया है ।
तनाव के मद्देनज़र राज्य सरकार ने प्री इंजीनियरिंग परीक्षा स्थगित कर दी है ।
पहले से ही अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में शामिल गूजर समुदाय की माँग है कि उन्हें अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिया जाए ।
इसी माँग को लेकर पुलिस और गूजर समुदाय के बीच मंगलवार को हुए संघर्ष में 14 लोगों की मौत हो गई थी और अनेक लोग घायल हुए थे ।
गूजर समुदाय का कहना है कि ओबीसी कोटे के तहत मिलने वाले आरक्षण से वे लाभान्वित नहीं हो रहे हैं ।


सेना सतर्क

भरतपुर के बयाना और जयपुर ज़िले के कोठपुतली में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प होने की ख़बरों के बाद सेना को सतर्क कर दिया गया है।
राज्य के कई इलाक़ों में अभी भी सड़क और रेल यातायात बाधित है ।
गूजर समुदाय ने कोटा शहर के लिए दूध की आपूर्ति रोक दी है। कोटा के कोचिंग संस्थानों में इंजीनियरिंग और मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए देश भर से छात्र आते हैं ।
इस बीच राजस्थान की राज्यपाल प्रतिभा पाटिल ने केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल से मुलाक़ात की है । माना जा रहा है कि राज्यपाल ने गृह मंत्री को राजस्थान की मौजूदा स्थिति से अवगत कराया है ।
इस बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर को जयपुर भेजने का फ़ैसला किया है ।
जयपुर से 115 किलोमीटर दूर दौसा ज़िले के पाटोली गांव में अब भी हज़ारों की संख्या में गूजर धरने पर बैठे हैं ।


राजनीति तेज़

गूजरों के विरोध ने अब राजनीतिक रंग लेना भी शुरु कर दिया है ।
राज्य की भाजपा सरकार के पांच गूजर विधायकों ने पार्टी नेतृत्व से इस्तीफ़ा देने की अनुमति मांगी है। इनमें ग्रामीण विकास मंत्री कालूलाल गूजर भी शामिल है ।
उन्होंने कहा कि मंगलवार की घटना से वो व्यथित हैं इसलिए चाहते हैं कि पार्टी उन्हें इस्तीफ़ा देने की अनुमति दे दे। भाजपा अपने विधायकों को मनाने का प्रयास कर रही है ।
इस बीच, कांग्रेस नेता सत्यव्रत चतुर्वेदी के नेतृत्व में दौसा जा रहे पाँच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। हालाँकि बाद में उन्हें छोड़ दिया गया ।
बूंदी के पाटोली और पीपलखेड़ा में बड़ी संख्या में लोग पुलिस फ़ायरिंग में मारे गए छह लोगों के शवों के साथ सड़क पर धरना दे रहे हैं ।

Wednesday, May 30, 2007

राजस्थान में तनाव, सेना का फ़्लैग मार्च

राजस्थान में गूजर समुदाय के लोगों पर पुलिस गोलीबारी के बाद कई ज़िलों में तनाव है। बूंदी और दौसा में सेना फ़्लैग मार्च कर रही है ।


पुलिस और गूजर समुदाय के बीच मंगलवार को हुए संघर्ष में कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई और अनेक लोग घायल हुए हैं ।
मारे गए लोगों में 12 आम नागरिक हैं और दो पुलिसकर्मी हैं। लोगों की मौत पुलिस फ़ायरिंग से हुई ।
पहले से ही अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में शामिल गूजर समुदाय ख़ुद को अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में शामिल करने की माँग कर रहा है ।
इस बीच बूंदी के पाटोली और पीपलखेड़ा में भारी संख्या में लोग पुलिस फ़ायरिंग में मारे गए छह लोगों के शवों के साथ सड़क पर धरना दे रहे हैं ।
उनका कहना है कि जब तक सरकार सीधे उनसे बात नहीं करती तब तक मारे गए लोगों का दाह संस्कार नहीं किया जाएगा ।
गूजर संगठनों ने बुधवार को भीलवाड़ा ज़िले में बंद का आह्वान किया है ।


तनाव

बुधवार को भी राज्य के कई हिस्सों में तनाव कायम है। उत्तर प्रदेश से सटे भरतपुर में ख़ुद पुलसकर्मी एहतिआती तौर पर वाहनों को रोक रहे हैं और उन्हें आगे नहीं जाने की सलाह दे रहे हैं ।
इसके लिए कई जगहों पर पेड़ गिराकर सड़क मार्ग अवरूद्ध किया गया है ।
इस बीच मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया की अध्यक्षता में मंगलवार रात राज्य कैबिनेट की आपात बैठक हुई ।
बैठक के बाद सरकार ने जो कुछ कहा कि उसमें सांत्वना कम तल्ख़ी ज़्यादा झलक रही थी। राज्य सरकार का कहना है कि जो लोग शांति भंग करने की कोशिश करेंगे उन्हें बख़्शा नहीं जाएगा ।
इस घटना के बाद राज्य में कई स्थानों पर स्थिति गंभीर हो गई है और इसके मद्देनज़र सेना और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की जा रही है ।


सरकार निशाने पर

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को इस मामले पर अपनी ही पार्टी (भारतीय जनता पार्टी) के कुछ नेताओं के विरोध का सामना करना पड़ रहा है।
गूजर महासभा के अध्यक्ष और भाजपा नेता रामगोपाल ने पूरी घटना के लिए राज्य सरकार को ज़िम्मेदार ठहराते हुए एक मंत्री से इस्तीफ़े की माँग की है ।
गूजर समुदाय के एक अन्य नेता और कांग्रेस सांसद अवतार सिंह भड़ाना ने आशंका व्यक्त की है कि अगर राज्य सरकार ने लोगों की माँगों पर ध्यान नहीं दिया तो स्थिति विस्फोटक हो सकती है ।
उन्होंने केंद्र सरकार से राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की भी माँग की है ।
भड़ाना का कहना है, "वसुंधरा सरकार ने आश्वस्त किया था कि गूजरों को आरक्षण दिया जाएगा। अब राज्य सरकार को आरक्षण की सिफ़ारिश करने में क्या दिक्कत है । "


टकराव की आशंका

गूजर बहुल इलाक़ों में आरक्षण का मामला अब संगठित आंदोलन का स्वरूप अख़्तियार कर रहा है।
सरकार और आंदोलनकारियों की भाषा में कोई ख़ास फ़र्क नहीं दिखाई दे रहा है और दोनों अपने अपने रूख़ पर कायम हैं ।
इस बीच अनुसूचित जनजाति में शामिल मीणा समुदाय की भी अगले कुछ दिनों में बैठक होने वाली है और वे भी संगठित हो रहे हैं ।
ऐसे में जातीय टकराव की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता है ।

Tuesday, May 29, 2007

माफ़ी पर सिख धार्मिक नेताओं की बैठक

डेरा सच्चा सौदा के माफ़ीनामे पर विचार के लिए सिख धार्मिक नेताओं की मंगलवार को अमृतसर में बैठक आयोजित की गई है। दूसरी ओर पंजाब में पुलिस सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।

अकाल तख़्त के जत्थेदार जोगिंदर सिंह वेदांती ने बताया कि सिंह साहिबान की बैठक में माफ़ीनामे सहित सभी मुद्दों पर विचार किया जाएगा।

इधर इस मामले में मध्यस्थता कर रहे स्वामी अग्निवेश ने अकाल तख़्त से माफ़ीनामा स्वीकार करने की अपील की है।

दूसरी ओर पुलिस उप महानिरीक्षक ईश्वर सिंह का कहना था कि सभी डेरों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है.

इसके पहले रविवार को डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख बाबा गुरमीत राम रहीम सिंह ने गुरु गोविंद सिंह से माफ़ी मांग ली थी।

एक संक्षिप्त बयान में उन्होंने कहा था कि गुरु गोविंद सिंह के जैसा दिखने या उनकी नकल करने की उनकी कोई मंशा नहीं थी।

बयान में कहा गया था कि उन्होंने इस मामले पर हुई घटनाओं पर पहले ही खेद व्यक्त कर दिया था लेकिन लोगों के हित और शांति के लिए वे गुरु गोविंद सिंह से माफ़ी मांगते हैं।

विवाद

दरअसल सच्चा सौदा के प्रमुख बाबा गुरमीत राम रहीम सिंह के कथित रूप से गुरु गोविंद सिंह जैसा लिबास पहनने को लेकर विवाद शुरू हुआ था।

पंजाब में इसके विरोध में उग्र प्रदर्शन हुए तो डेरा सच्चा सौदा के अनुयायी भी सड़कों पर उतर आए। कई जगह दोनों गुटों के बीच हिंसक झड़पें हुई।

विवाद के ज़ोर पकड़ने के बाद 17 मई को तलवंडी में सिख समुदाय की एक बड़ी सभा में हुक्मनामा जारी किया गया था कि डेरा सच्चा सौदा का सामाजिक-राजनीतिक और धार्मिक बहिष्कार किया जाए।

भठिंडा में तो गुरमीत बाबा राम रहीम सिंह के ख़िलाफ़ भारतीय दंड संहिता की धारा 295-ए के तहत मामला भी दर्ज किया गया है।

उन पर किसी धर्म विशेष की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के इरादे का आरोप लगाया गया है।

लेकिन 20 मई को अमृतसर में अकाल तख़्त की बैठक में माँग की गई कि 27 मई तक राज्य में डेरा सच्चा सौदा की सब शाखाएँ बंद कर दी जाएँ।

Monday, May 28, 2007

वार्ता से पहले ईरान का औपचारिक विरोध

ईरान के विदेश मंत्रालय ने तेहरान में अमरीका मामलों की देख रेख करने वाले स्विटज़रलैंड के राजदूत फिलिप वेल्टी से देश में अमरीकी जासूसी नेटवर्क के बारे में औपचारिक विरोध दर्ज़ कराया है ।


ईरान ने यह कदम ऐसे समय में उठाया है जब अमरीका और ईरान के बीच इराक के मुद्दे पर कुछ ही घंटों में बातचीत शुरु होने वाली है ।
बगदाद में दोनों देशों के उच्च स्तरीय अधिकारियों के बीच पिछले तीस वर्षों में यह पहली औपचारिक वार्ता होगी। इस बातचीत के दौरान इराक़ी प्रतिनिधि भी मौजूद होंगे ।
बातचीत मुख्य रुप से इराक़ की सुरक्षा स्थिति से जुड़ी होनी है ।
इराक़ के विदेश मंत्री होश्यार ज़ेबारी ने इस बातचीत को एक महत्वपूर्ण क़दम करार दिया लेकिन साथ ही कहा कि उन्हें वार्ता के दौरान किसी चमत्कार की उम्मीद नहीं है ।
संवाददाताओ का कहना है कि ईरान और अमरीका के बीच विभिन्न मुद्दों पर जिस तरह का तनाव चल रहा है उसे देखते हुए दोनों पक्षों के बीच बातचीत का आयोजन भी महत्वपूर्ण माना जाना चाहिए ।


तीन दशक बाद


ईरान-अमरीका वार्ता को इन मायनों में ऐतिहासिक कहा जा सकता है कि दोनों देश कोई तीन दशक बाद आपस में किसी विषय पर चर्चा करने जा रहे हैं ।
जैसा कि ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी इरना ने कहा है इस वार्ता में इराक़ की सुरक्षा व्यवस्था का मसला अहम रहेगा ।
एजेंसी का कहना है कि इराक़ से अमरीकी फ़ौजों की वापसी के कार्यक्रम पर और इराक़ के पुनर्निर्माण में ईरान की भूमिका पर चर्चा होगी।
इसके अलावा ईरान के विपक्षी गुट पीपुल्स मुजाहिदीन की इराक़ में उपस्थिति पर भी चर्चा होगी ।
दोनों देशों के राजदूत अपने प्रतिनिधि मंडलों के साथ इस बैठक में भाग लेंगे ।
हालांकि बैठक का मुद्दा इराक़ ही होगा लेकिन कई विश्लेषकों का कहना है कि इससे यह साफ़ हो जाएगा कि दोनों के बीच बातचीत संभव है ।


विरोध


ईरानी मामलों के विश्लेषक सादिक़ सबा का कहना है कि वार्ता का फ़ैसला दोनों देशों के लिए आसान नहीं रहा है क्योंकि इसके लिए दोनों देशों को अपनी घोषित नीतियाँ बदलनी पड़ी हैं ।
उनका कहना है कि ईरान के कट्टरपंथी कहते हैं कि अमरीका के साथ वार्ता करना वैसा ही जैसा कि भेड़िए के साथ नाचना या फिर शैतान से हाथ मिलाना ।
लेकिन ईरान के नेतृत्व को लगता है कि अमरीका से सीधी बात करना ऐसे समय में अच्छा ही है जब अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर ईरान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बहुत ज़्यादा है ।
अमरीकी प्रशासन ने अनिच्छा पूर्वक इस वार्ता के लिए हामी भरी है। इस उम्मीद के साथ कि शायद इससे इराक़ में शांति-व्यवस्था क़ायम करने में सफलता मिले ।

Saturday, May 26, 2007

सद्र की शांति योजना का स्वागत

इराक़ के उपराष्ट्रपति तारिक़ अल-हाशिमी ने शिया नेता मुक़्तदा अल सद्र के सुन्नी गुटों के साथ शांति स्थापित करने की योजना का समर्थन किया है ।


लंबे समय बाद मुक़्तदा अल सद्र शुक्रवार की नमाज़ के दौरान कूफ़ा में सार्वजनिक रूप से सामने आए थे।
अपनी सुरक्षा पर ख़तरे को देखते हुए मुक़्तदा अल सद्र ने इराक़ छोड़ दिया था और पिछले कुछ दिनों पहले ही वे इराक़ लौटे हैं। इस दौरान उन्होंने ईरान का भी दौरा किया ।
उधर इराक़ के उपराष्ट्रपति तारिक़ अल-हाशिमी ने बताया कि वे मानते हैं कि मुक़्तदा अल-सद्र इराक़ के मेंहदी आर्मी के सबसे प्रभावशाली शिया नेता हैं ।
लेकिन साथ ही उन्होंने आशंका जताई है कि सद्र शिया लड़ाकों पर पूरी तरह से नियंत्रण रख सकते हैं ।
उल्लेखनीय है कि सद्र ने के वरिष्ठ सहयोगी अब्द अल महदी अल मुतैरी ने बताया कि उनके संगठन ने कुछ उदारवादी सुन्नी नेताओं से बात की है जो अल क़ायदा के ख़िलाफ़ हैं और इराक़ के भविष्य को लेकर जिनके विचार उनसे मिलते हैं ।
उन्होंने बताया कि स्वतंत्र एकीकृत इराक़ की प्रतिबद्धता को लेकर एक चार्टर पर हस्ताक्षर भी किए गए हैं। इस चार्टर में कहा गया है कि स्वतंत्र और एकीकृत इराक़ किसी विदेशी एजेंडे के तहत नहीं होगा और इसी चार्टर के आधार पर अन्य इराक़ी गुटों से समझौता होगा ।
मुक़्तदा अल सद्र मेहदी सेना के प्रमुख हैं। इस गुट को इराक़ में जातीय हिंसा के लिए भी ज़िम्मेदार कहा जाता है। हाल के महीनों में मुक़्तदा अल सद्र के संगठन को इराक़ी सेना ने अपना निशाना बनाया है ।

Friday, May 25, 2007

इराक़ युद्ध के लिए नए बजट को मंज़ूरी

अमरीकी कांग्रेस के दोनों सदनों ने इराक़ और अफ़गानिस्तान में युद्ध को जारी रखने के लिए 120 अरब डॉलर की राशि मुहैया कराने संबंधी विधेयक को मंज़ूरी दे दी है ।


इस विधेयक में कुछ फेर बदलाव किया गया है और अब इसमें इराक़ से सैनिकों को वापस बुलाने के लिए कोई समय सीमा तय नहीं की गई है ।
सैनिकों को वापस बुलाने संबंधी समयसीमा पर राष्ट्रपति बुश ने वीटो कर दिया था और डेमोक्रेट सांसदों के पास इस वीटो के ख़िलाफ़ पर्याप्त वोट नहीं थे जिसके कारण उन्हें विधेयक में से समयसीमा संबंधी शर्त हटानी पड़ी है ।
इससे पहले राष्ट्रपति बुश ने कहा था कि अमरीकी सेनाएं इराक़ में जो त्याग और बलिदान कर रही हैं उसके एवज़ में इराक़ी सरकार को ज़मीन पर प्रगति करने की ज़रुरत है ।
बुश का यह भी कहना था कि इराक़ में सैन्य नीति अगले कुछ महीनों में बहुत महत्वपूर्ण होगी और गर्मी के महीनों में चरमपंथी गतिविधियों में भी बढ़ोतरी होगी ।

बुश की चेतावनी

व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए राष्ट्रपति बुश ने कहा कि अमरीकी सैनिकों की नई खेप का अंतिम हिस्सा जून के अंत में बग़दाद पहुँचेगा ।
उनका कहना था कि इस समय तक इराक़ में भारी हिंसा का दौर जारी रह सकता है ।
राष्ट्रपति बुश ने डेमोक्रेट्स के साथ हुई उस सहमति का भी स्वागत किया जिसमें उन्होंने इराक़ में चल रही लड़ाई को बिना शर्त समर्थन देना स्वीकार कर लिया है।
राष्ट्रपति बुश ने पत्रकारों से कहा, "अगले कुछ हफ़्ते और महीने भारी लड़ाई होने की संभावना दिखती है और हो सकता है कि इसमें इराक़ियों और अमरीकियों की जानें जाएँ ।"
उनका कहना था कि लेकिन फ़ौजों को आक्रामक बने रहना होगा ।
राष्ट्रपति बुश का कहना है था कि वे चाहेंगे कि इराक़ में सेना की तैनाती दूसरी तरह से हो लेकिन यह तब तक संभव नहीं है जब तक कि बग़दाद सुरक्षित नहीं हो जाता ।
उनका कहना था कि नई तैनाती की अंतिम पाँच ब्रिगेड जून के अंत तक बग़दाद पहुँच जाएँगी। इसमें 30 हज़ार सैनिकों में से कोई 15 हज़ार सैनिक होंगे ।
उल्लेखनीय है कि अमरीका ने इसी साल फ़रवरी में इराक़ पर नई रणनीति तैयार की थी जिसके तहत 30 हज़ार अमरीकी सैनिकों को और भेजने का फ़ैसला किया गया था ।

Thursday, May 24, 2007

भारत-अमरीका के बीच परमाणु समझौते पर बातचीत

भारत और अमरीका के बीच हुए असैनिक परमाणु समझौते को जल्द लागू किए जाने की दिशा में दोनों देशों के अधिकारियों ने लंदन में बातचीत की है ।


भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नवतेज सरना ने पत्रकारों से बातचीत में जानकारी दी कि 21 और 22 मई को लंदन में अमरीका के साथ तकनीकी स्तर की बातचीत हुई है ।
उनका कहना था,'' बातचीत के दौरान हमने कुछ मुद्दों को स्पष्ट किया है लेकिन अब भी कुछ ऐसे मुद्दे हैं जिन पर सहमति बनाने की ज़रूरत है । ''
प्रवक्ता का कहना था कि दोनों पक्ष बातचीत जारी रखने के पक्षधर हैं ।
दूसरी ओर अमरीका के विदेश उपमंत्री निकोलस बर्न्स ने वाशिंगटन में कहा कि परमाणु समझौते को अंतिम रूप देने का 90 फ़ीसदी काम पूरा हो गया है।
उल्लेखनीय है कि निकोलस बर्न्स इस समझौते के लिए अमरीका की ओर से प्रमुख वार्ताकार हैं ।
उन्होंने हेरीटेज फाउंडेशन के एक कार्यक्रम में कहा,'' हमने बहुत प्रगति की है... 90 फ़ीसदी काम पूरा हो गया है । ''
बर्न्स ने कहा कि वो अगले एक दो सप्ताह में भारत का दौरा करेंगे और इस संबंध में बातचीत करेंगे ।

आशंका

दरअसल कुछ मसलों पर दोनों देशों के कठोर रुख के कारण समझौते को लेकर आशंका बनी हुई है ।
इससे पहले जॉर्ज बुश ने इस महीने की शुरुआत में मनमोहन सिंह से टेलीफ़ोन पर बातचीत की थी।
वाशिंगटन में भारतीय विदेश सचिव शिवशंकर मेनन और निकोलस ब‌र्न्स के बीच बातचीत भी हुई थी ।
बैठक में दोनों ने मई के अंत में मिलने पर रज़ामंदी जताई थी लेकिन अभी तक बातचीत की तारीख़ तय नहीं हो पाई है ।
ब‌र्न्स विदेश सचिव शिवशंकर मेनन के साथ समझौते से जुड़े कुछ मसलों पर बातचीत के लिए भारत आने वाले हैं ।
ग़ौरतलब है कि अगले महीने जर्मनी में जी-8 देशों की बैठक में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की मुलाक़ात अमरीकी राष्ट्रपति बुश से होगी और तब शायद परमाणु समझौते की प्रगति पर चर्चा होगी ।
भारत में ये मुद्दा जब तब संसद में उठता रहता है और सरकार को विपक्ष और अन्य सहयोगी देशों को बार-बार आश्वस्त करना पड़ता है कि सरकार देशहित और संप्रभुता के साथ कोई समझौता नहीं करेगी ।
दूसरी ओर अमरीकी संसद के कुछ सदस्य इस समझौते से सहमत नहीं हैं और वे इस पर सवाल उठाते रहते हैं ।

Wednesday, May 23, 2007

धमाकों के बाद सुरक्षा कड़ी की गई

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर में मंगलवार की रात हुए सिलसिलेवार धमाकों के बाद चौकसी बढ़ा दी गई है। दूसरी ओर केंद्र सरकार भी गोरखपुर की स्थिति पर नज़र रखे हुए है ।



समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार केंद्रीय गृह सचिव मधुकर गुप्ता ने इस संबंध में उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक से बात की और हालात के बारे में जानकारी हासिल की ।
गृह सचिव ने पुलिस महानिदेशक को सतर्कता बरतने की सलाह दी ताकि बम धमाकों के बाद कोई अप्रिय घटना न घटे ।
दूसरी ओर गोरखपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) राजेश कुमार राय ने बातचीत में कहा कि गोरखपुर को अतिरिक्त पुलिस बल की दो कंपनियाँ उपलब्ध कराईं गईं हैं ।
साथ ही उनका कहना था कि आसपास के सभी इलाक़ों में अतिरिक्त चौकसी बरती जा रही है ।
एसएसपी ने जानकारी दी कि इन धमाकों को उद्देश्य अफ़रातफ़री फैलाना था ।
उन्होंने बताया कि पुलिस के हाथ कुछ सुराग लगे हैं और जल्द ही धमाके के लिए ज़िम्मेदार लोगों को पकड़ लिया जाएगा।


सिलसिलेवार धमाके


गोरखपुर में मंगलवार की रात लगभग सात बजे एक के बाद एक तीन बम धमाके हुए थे। ये तीनों विस्फोट गोलघर इलाक़े के आसपास हुए ।
पुलिस का कहना है कि धमाकों में छह लोग घायल हुए हैं जिनमें से पाँच को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है ।
पहला विस्फोट जलकल भवन के पास सात बजकर पाँच मिनट पर हुआ। इसके दस मिनट बाद ही दूसरा विस्फोट 150 मीटर दूर बल्देव शॉपिंग प्लाज़ा के निकट हुआ। तीसरा विस्फोट इस शॉपिंग परिसर के कुछ दूर हुआ ।
सभी विस्फोट साइकिलों में रखे गए झोलों में हुए। पुलिस का कहना है कि धमाकों में देसी बमों का इस्तेमाल किया गया। ।
गोलघर गोरखपुर का सबसे व्यस्त इलाक़ा है और यहाँ के आसपास के बाजारों में काफ़ी भीड़ होती है ।
ख़ास बात ये है कि एक बम धमाका पेट्रोल पंप के पास और एक विस्फोट बिजली के ट्रांसफॉर्मर के पास हुआ ।
अधिकारियों का कहना है कि अगर पेट्रोल पंप और टांसफॉर्मर इसकी चपेट में आ जाते तो बड़ा हादसा हो सकता था ।

Tuesday, May 22, 2007

अकाल तख़्त का पंजाब बंद, सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम

पंजाब में अकाल तख़्त ने डेरा सच्चा सौदा के ख़िलाफ़ मंगलवार को राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया है। बंद को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं ।


सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी पंजाब सरकार को क़ानून व्यवस्था बनाए रखने की सलाह दी थी । केंद्र ने अर्धसैनिक बलों की 35 कंपनियों को स्थितियों से निपटने के लिए पंजाब भेजा है ।
दूसरी ओर पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने सोमवार को डेरा सच्चा सौदा से सिखों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के लिए माफ़ी माँगने को कहा।
बादल ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अगर डेरा सच्चा सौदा माफ़ी माँग ले तो पूरा मामला ख़त्म हो सकता है ।
उन्होंने कहा कि बंद के दौरान किसी भी व्यक्ति को शांति भंग करने की इजाज़त नहीं दी जाएगी ।
दरअसल, डेरा सच्चा सौदा और सिख संगठनों के बीच विवाद तब शुरू हुआ जब डेरा प्रमुख बाबा गुरमीत राम रहीम को कथित रूप से एक विज्ञापन में सिखों के 10वें गुरु गोविंद सिंह की वेशभूषा में दिखाया गया ।
इससे सिख समुदाय के कुछ लोगों ने भारी नाराज़गी जताई और राज्यभर में कई जगहों पर हिंसक झड़पें भी हुईं ।

अकाल तख़्त के तेवर

इसके पहले रविवार को जत्थेदारों की अहम एक बैठक के बाद अकाल तख़्त ने हुकुमनामा जारी किया था कि 27 मई तक पंजाब में डेरा सच्चा सौदा की सब शाखाएँ बंद कर दी जाएँ और डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख बाबा गुरमीत राम रहीम सिंह को गिरफ़्तार किया जाए।
अकाल तख़्त ने कहा है कि अगर उनकी माँगों पर अमल नहीं होता है तो 31 मई को एक और बैठक में स्थिति पर पुनर्विचार किया जाएगा ।
साथ ही ये भी कहा गया है कि अगर 31 मई तक उनकी माँगे नहीं मानी तो आनंदपुर साहिब से रोष मार्च निकाला जाएगा ।
अकाल तख़्त की इस चेतावनी पर डेरा सच्चा सौदा का कहना है कि पंजाब में स्थित डेरा केंद्रों को छोड़ने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता ।
इससे पहले शनिवार को डेरा प्रमुख बाबा गुरमीत राम रहीम सिंह की ओर से एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बीते सप्ताह के पूरे घटनाक्रम पर खेद जताया गया था ।

Monday, May 21, 2007

डेरा के ख़िलाफ़ सिख संगठनों के कड़े तेवर

डेरा सच्चा सौदा और सिख संगठनों के बीच पंजाब में एक सप्ताह पहले पैदा हुआ गतिरोध अभी भी ख़त्म होता नज़र नहीं आ रहा है ।


जहाँ एक ओर अकाल तख़्त ने माँग की है कि 27 मई तक राज्य में डेरा सच्चा सौदा की सब शाखाएँ बंद कर दी जाएँ और डेरा प्रमुख बाबा राम रहीम को गिरफ़्तार किया जाए वहीं डेरा अनुयायियों और समर्थकों ने साथ कर दिया है कि वे पंजाब में स्थित अपने केंद्र छोड़कर नहीं जाएंगे ।
हालत यह है कि अब यह गतिरोध सीमापार जाता भी नज़र आ रहा है। रविवार को ब्रिटेन में भी सिख फेडरेशन के समर्थकों सहित कुछ सिखों ने भारतीय वाणिज्य दूतावास के सामने विरोध-प्रदर्शन किया ।
दरअसल, पिछले सप्ताह समाचार पत्रों में छपे एक विज्ञापन के बाद डेरा सच्चा सौदा और सिख संगठनों के बीच विवाद शुरू हो गया था। इस विज्ञापन में डेरा प्रमुख बाबा राम रहीम को सिखों के गुरू गोविंद सिंह की तरह के वस्त्र पहने हुए दिखाया गया था ।
कुछ सिख संगठन इसे गुरु गोविंद सिंह के अपमान के तौर पर देख रहे हैं और उनका कहना है कि इससे सिख समुदाय की धार्मिक भावनाएँ आहत हुई हैं ।
इसके बाद राज्यभर में दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच हिंसक झड़पें हुईं और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए राज्य सरकार को बड़े पैमाने पर अर्धसैनिक बलों की तैनाती करनी पड़ी ।

'सिख संतुष्ट नहीं'

हालांकि डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख की ओर से शनिवार को ही एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करके इस पूरे घटनाक्रम पर खेद व्यक्त किया गया था पर सिख संगठन इससे संतुष्ट नहीं है।
रविवार को अमृतसर में अकाल तख़्त की बैठक में यह हुकुमनामा जारी किया गया है कि डेरा सच्चा सौदा के विरोध में 22 मई को राज्यव्यापी बंद रखा जाएगा । साथ ही डेरा प्रमुख की गिरफ़्तारी और पंजाब से डेरा के सभी केंद्र को बाहर करने के लिए राज्य सरकार को 27 मई तक का अल्टीमेटम भी दिया गया ।
अकाल तख्त की बैठक के बारे में खालसा महासचिव कंवलपाल सिंह ने बताया की , "अब हम डेरा प्रमुख से माफ़ी मांगने के लिए नहीं कहेंगे। हम चाहते हैं कि पंजाब सरकार डेरा प्रमुख को तत्काल गिरफ़्तार करे। राज्य सरकार यह दलील दे सकती है कि डेरा प्रमुख तो दूसरे राज्य हरियाणा में है पर ऐसी स्थिति में राज्य सरकार को केंद्र की मदद लेनी चाहिए । "
ग़ौरतलब है कि रविवार को ही डेरा प्रमुख बाबा राम रहीम के ख़िलाफ़ संप्रदाय विशेष की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप में एक प्राथमिकी भठिंडा में दर्ज की जा चुकी है ।
वहीं ब्रिटेन में सिख फ़ेडरेशन ने भी अकाल तख़्त के फैसले का समर्थन करते हुए डेरा प्रमुख को तत्काल गिरफ़्तार करने की माँग दोहराई ।
सिख फ़ेडरेशन के अध्यक्ष अमरीक सिंह ने बताया की , "इस पूरी स्थिति को नियंत्रित करने का एक ही तरीका है कि डेरा प्रमुख बाबा राम रहीम को तत्काल गिरफ़्तार किया जाए और इनके सभी केंद्रों को सील किया जाए । "

डेरा का भरोसा

डेरा सच्चा सौदा के प्रवक्ता डॉक्टर आदित्य इंसान ने इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि उन लोगों को भारत की न्यायिक व्यवस्था पर पूरा भरोसा है कि इंसाफ़ ज़रूर मिलेगा ।
उन्होंने कहा, "हम मानवता की सेवा और बढ़ चढ़ कर करेंगे। जहाँ तक बात खेद व्यक्त करने की है तो बाबा गुरमीत राम रहीम सिंह खेद जता चुके हैं, कोई माने न माने ये उन लोगों की मर्ज़ी है। हम जनता से, राष्ट्रपति महोदय से ये अपील करते हैं कि शांति कायम करवाएँ और हमें न्याय दिलवाएँ । जहाँ तक बंद का सवाल है तो क़ानून जाने और उसका काम जाने । "
इससे पहले पंजाब सरकार ने डेरा प्रमुख की सुरक्षा के लिए लगाए गए पंजाब पुलिस के चार जवानों को हटा लिया था ।
हालांकि इसके पीछे दलील दी गई है कि बाबा राम रहीम को पहले से ही हरियाणा सरकार की ओर से पर्याप्त सुरक्षा मिली हुई है ।

Saturday, May 19, 2007

हैदराबाद में आज बंद का आह्वान

हैदराबाद में शुक्रवार को मक्का मस्जिद में विस्फ़ोट के बाद शहर में कर्फ्यू जैसी स्थिति है और मुस्लिम संगठनों एवं वामपंथी दलों ने आज बंद का आह्वान किया है ।


मक्का मस्जिद में जुमे की नमाज़ के वक्त हुए विस्फ़ोट और उसके बाद पुलिस फायरिंग में में कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई है और दर्ज़नों घायल हो गए थे ।
उधर मुख्यमंत्री राजशेखर रेड्डी ने कहा है कि विस्फ़ोट के लिए ज़िम्मेदार लोगों के बारे में 24 घंटों में पता लगा लिया जाएगा ।
पूरे शहर में सुरक्षा व्यवस्था चौकस कर दी गई है जहां विस्फ़ोट के बाद लोगों ने ज़बर्दस्त विरोध प्रदर्शन किया ।
संवाददाताओ का कहना है कि मारे गए 13 लोगों में से कई ऐसे हैं जो विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस फायरिंग में मारे गए हैं ।
फायरिंग के कारण लोगों में बेहद नाराज़गी है और उनका कहना है कि पुलिस पूरे मामले में असफल रही और उसने बेगुनाह लोगों पर गोलियां चलाईं ।
मुख्यमंत्री ने भी माना कि पुलिस फायरिंग में एक दो लोगों की मौत हुई है ।
इत्तेहाद उल मुसलमीन ने आज बंद का आह्वान किया है जिसका कुछ वामपंथी दलों ने समर्थन किया है ।
पुलिस को आशंका है कि पुलिस फायरिंग में मौतों के कारण लोगों का रोष बंद के दौरान निकल सकता है ।
मारे गए लोगों के जनाज़े ले जाते समय भी माहौल तनावपूर्ण रहेगा और इसके लिए सुरक्षा इंतज़ाम कड़े किए जा रहे हैं ।
मुख्यमंत्री रेड्डी ने मारे गए लोगों के परिजनों को पांच पांच लाख रुपए मुआवज़ा देने की घोषणा की है और कहा है कि विस्फ़ोट के लिए ज़िम्मेदार लोगों के बारे मे चौबीस घंटे में पता लगा लिया जाएगा ।

शांति की अपील

17 वीं शताब्दी की मक्का मस्जिद हैदराबाद की सबसे बड़ी मस्जिद है और शहर के सबसे संवेदनशील इलाक़े में स्थित है ।
स्थानीय नेताओं का कहना है कि मालेगाँव और दिल्ली की जामा मस्जिद में हुए विस्फोट के बाद पुलिस से कहा गया था कि यहाँ सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दें लेकिन उन्होंने ध्यान नहीं दिया ।
जब विस्फोट हुआ तो आँध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री दिल्ली में थे। उन्होंने पत्रकारों को संबोधित करते कहा है कि असामाजिक तत्वों ने माहौल ख़राब करने के लिए यह विस्फोट किया गया है ।
उन्होंने कहा कि पिछले कोई ढाई महीने से केंद्रीय गृहमंत्रालय और राज्य की ख़ुफ़िया एजेंसियों से सूचनाएँ मिली थीं कि कुछ तत्व गड़बड़ी फैला सकते हैं ।
उन्होंने बताया कि केंद्रीय गृहमंत्री शिवराज पाटिल ने उनसे बात की है और केंद्र से हर संभव सहायता उपलब्ध करवाने का वादा किया है ।

Friday, May 18, 2007

पंजाब में तनाव, आज कैबिनेट की बैठक

पंजाब में 'डेरा सच्चा सौदा' के अनुयायियों और सिख समुदाय के बीच तनाव कायम है ।


स्थिति की समीक्षा के लिए शुक्रवार को मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने कैबिनेट की बैठक बुलाई है ।
इस बीच केंद्र सरकार के निर्देश पर रवाना हुए अर्धसैनिक बलों को राज्य के संवेदनशील इलाक़ों में तैनात किया जा रहा है ।
केंद्र सरकार ने डेरा सच्चा सौदा के सिरसा मुख्यालय की सुरक्षा के लिए भी अर्धसैनिक बल भेजे हैं ।
इस बीच संगरूर के सूनाम इलाक़े में गुरुवार रात डेरा समर्थकों और तलवंडी में सिख धार्मिक नेताओं की बैठक से लौट रहे लोगों के बीच हुई झड़प में एक व्यक्ति की गोली लगने से मौत हो गई ।
शुक्रवार को भी डेरा और सिख संगठनों की ओर से प्रदर्शन होने की आशंका जताई जा रही है ।

कैबिनेट की बैठक

पंजाब में जारी तनाव के बीच मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने शुक्रवार को कैबिनेट की बैठक बुलाई है ।
माना जा रहा है कि इसमें स्थिति से निपटने के उपायों पर चर्चा होगी। कैबिनेट के अलावा सत्तारूढ़ अकाली दल और विपक्षी पार्टी कांग्रेस की भी बैठक होगी जिसमें यह मामला छाए रहने की संभावना है ।
ग़ौरतलब है कि सिखों के पाँच वरिष्ठ धार्मिक नेताओं की गुरूवार को भटिंडा के तलवंडी सैबो में हुई अहम बैठक में डेरा सच्चा सौदा के अध्यक्ष गुरमीत राम रहीम सिंह को तीन दिनों के भीतर गिरफ़्तार करने की माँग की है ।
अकाल तख़्त के जत्थेदार जोगिंदर सिंह वेदांती की अध्यक्षता में हुई बैठक में पंजाब सरकार को चेतावनी दी गई है कि अगर डेरा के ख़िलाफ़ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वे ख़ुद कोई कार्रवाई करने को बाध्य होंगे ।

Thursday, May 17, 2007

50 साल बाद दोनों कोरिया के बीच ट्रेन

उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के बीच पचास साल में पहली बार ट्रेनों का आना-जाना शुरु हो रहा है ।


दोनों देशों की सीमा पर अभी भी सेना की भारी भरकम तैनाती है ।
ट्रेन उत्तर कोरिया से चलेगी और दूसरी दक्षिण कोरिया से और दोनों में 150 यात्री होंगे। सौ दक्षिण कोरियाई और पचास उत्तर कोरियाई ।
पाँच डिब्बों वाली ये ट्रेनें 25 किलोमीटर की दूरी तय करेंगी ।
दोनों देशों के बीच रेल संपर्क ऐसे समय में फिर से स्थापित हो रहा है जब दोनों के बीच तनाव अभी ख़त्म नहीं हुआ है ।
तकनीकी रुप से देखें तो दोनों के बीच युद्ध जारी है क्योंकि 1953 के कोरियाई युद्ध को लेकर औपचारिक युद्ध विराम अभी भी नहीं हुआ है ।
दक्षिण कोरिया के एकीकरण मंत्री ली जाए-जून ने कहा, "यह सिर्फ़ परीक्षण ट्रेनें नहीं हैं, यह रूकी हुई ख़ून की धारा को फिर से प्रवाहित करने जैसा है । "
उधर उत्तर कोरिया के अधिकारी क्वोन हो-उंग ने कहा कि दोनों देशों के बीच वार्ता को पटरी से नहीं उतरना चाहिए ।

रिश्ते में सुधार

दक्षिण कोरिया इस बीच उत्तर कोरिया से संबंध सुधारने के बहुत से प्रयास कर रहा है और रेल संपर्क को दक्षिण कोरिया में ऐसे ही एक प्रयास के रुप में देखा जा रहा है ।
हालांकि दक्षिण कोरिया ने सीमापार से कई बार ट्रेनों की आवाजाही का प्रस्ताव रखा था लेकिन फ़िलहाल उत्तर कोरिया सिर्फ़ परीक्षण के लिए तैयार हुआ है ।
ट्रेन उसी सीमा से पार होगी जिसमें अभी भी भारी संख्या में बारूदी सुरंग बिछी हुई है और जहाँ अक्सर दोनों देशों के बीच झड़पें हो जाया करती हैं ।
दोनों देशों के बीच चार किलोमीटर का क्षेत्र विसैन्यीकृत क्षेत्र है। हालांकि संयुक्त राष्ट्र की इस सीमा को उत्तर कोरिया नहीं मानता ।

फ़ायदे की उम्मीद

ट्रेनें दो अलग पटरियों पर दौड़ेंगी और इन दोनों की ही देखरेख दक्षिण कोरिया कर रहा है।
इनका निर्माण हाल ही में किया गया है ।
रेल संपर्क स्थापित करने के प्रयास इससे पहले भी हुए थे लेकिन वे असफल हो गए थे ।
उम्मीद की जा रही है कि रेल संपर्क स्थापित होने से दोनों देशों को फ़ायदा होगा ।
दक्षिण कोरिया को लगता है कि वह उत्तर कोरिया में उपलब्ध सस्ते मज़दूरों का उपयोग करके अपना उत्पादन बढ़ा सकता है और अपना निर्यात बढ़ा सकता है ।
उल्लेखनीय है कि दक्षिण कोरिया ने उत्तर कोरिया को इस रेल संपर्क के बदले आठ करोड़ डॉलर का ऐसा सामान देने का वादा किया है जिससे उत्तर कोरिया के छोटे उद्योंगों को फ़ायदा होगा ।

Wednesday, May 16, 2007

बोर्ड के सामने पेश हुए विश्व बैंक प्रमुख

विश्व बैंक का कार्यकारी बोर्ड बैंक के अध्यक्ष वुल्फ़ोवित्ज़ से पूछ रहा है कि अपनी प्रेमिका को पक्षपातपूर्ण तरीके से वेतन बढ़ोत्तरी देने के आरोप में उनसे इस्तीफ़ा क्यों न मांगा जाए।

कार्यकारी बोर्ड के 24 सदस्यों का पैनल इस मामले में बैंक प्रमुख से पूछताछ कर रहा है। यह पूछताछ बुधवार को भी जारी रहेगी । इससे पहले मंगलवार को विश्व बैंक की विशेष समिति ने माना था कि विश्व बैंक अध्यक्ष पॉल वुल्फ़ोवित्ज़ ने अपनी प्रेमिका को भारी वेतन बढ़ोत्तरी देकर आचार संहिता को तोड़ा है । हालांकि पहले व्हाइट हाउस ने स्पष्ट कर दिया था कि वो वुल्फ़ोवित्ज़ के साथ है पर ताज़ा ख़बरों के मुताबिक व्हाइट हाउस ने भी माना है कि विश्व बैंक प्रमुख से ग़लती हुई है । इस टिप्पणी को बैंक प्रमुख के लिए अच्छा नहीं माना जा रहा है क्योंकि व्हाइट हाउस ने इससे पहले इस बारे में कुछ नकारात्मक नहीं कहा था। बैंक प्रमुख व्हाइट हाउस के क़रीबी रहे हैं । विशेष समिति की रिपोर्ट को मंगलवार को विश्व बैंक के कार्यकारी बोर्ड के समक्ष रखा गया जिसके बाद बोर्ड ने बैंक अध्यक्ष को जवाब तलब किया है । दूसरी ओर पॉल वुल्फ़ोवित्ज़ इस्तीफ़ा देने से इनकार कर चुके हैं। उनका कहना है कि ऐसा उनके ख़िलाफ़ एक सोचे-समझे षडयंत्र के तहत हो रहा है ।

विवादों में बैंक प्रमुख

विश्व बैंक के अध्यक्ष पद के नामांकन के समय से ही वुल्फ़ोवित्ज़ विवादों में रहे हैं और बैंक में भी दो साल के कार्यकाल में उनकी कई मुद्दों पर बैंक के अन्य अधिकारियों के साथ नहीं बनी । अमरीका के उप रक्षामंत्री रह चुके वुल्फ़ोवित्ज़ को इराक़ युद्ध में अपनी भूमिका के लिए आलोचना का सामना करना पड़ा था । उन्होंने विश्व बैंक में आने के बाद अपनी प्रेमिका शाहा रिज़ा का वेतन बढ़ाया और उन्हें पदोन्नति भी दे दी । वुल्फ़ोवित्ज़ ने जब 2005 के मध्य में बैंक की बागडोर संभाली थी तो हितों के टकराव को रोकने के लिए रिज़ा का स्थानांतरण विदेश विभाग में कर दिया गया था । विश्व बैंक के कई पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों ने भी पॉल वुल्फ़ोवित्ज़ के इस्तीफ़े की माँग की थी वुल्फ़ोवित्ज़ ने इस मुद्दे पर माफ़ी मांगी थी लेकिन इस्तीफ़ा देने से इनकार कर दिया था ।

Tuesday, May 15, 2007

'फ़र्ज़ी मुठभेड़' की सीबीआई जाँच पर फ़ैसला

भारत की सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को गुजरात के फ़र्ज़ी मुठभेड़ मामले में सीबीआई जाँच करवाने की याचिका पर अपना फ़ैसला सुना सकती है ।

इसी महीने की तीन तारीख को सुप्रीम कोर्ट ने 'फ़र्ज़ी मुठभेड़' मामले में गुजरात पुलिस को दो हफ़्ते में अंतिम रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था ।

इस फ़ैसले के ठीक पहले यानी सोमवार को गुजरात सरकार ने अपनी गोपनीय रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी है ।

माना जा रहा है कि इस रिपोर्ट को देखने के बाद सुप्रीम कोर्ट की ओर से यह फ़ैसला लिया जा सकता है कि इस मामले की सीबीआई जाँच हो या नहीं ।

ग़ौरतलब है कि 26 नवंबर, 2005 को गुजरात पुलिस ने दावा किया था कि उनके आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) और राजस्थान पुलिस के संयुक्त अभियान में सोहराबुद्दीन नाम के एक व्यक्ति को मार दिया गया है जो कि एक चरमपंथी था और उसके चरमपंथी संगठनों से ताल्लुक थे ।

अपील

पुलिस की इस कार्रवाई को फ़र्ज़ी मुठभेड़ बताते हुए सोहराबुद्दीन के भाई ने सुप्रीम कोर्ट में न्याय की फ़रियाद की थी ।

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को अपने संज्ञान में लेते हुए इसकी जाँच के आदेश जारी कर दिए थे ।

जाँच के दौरान राज्य सीआईडी ने पुलिस की भूमिका को लेकर कुछ आपत्तियाँ भी जाहिर की थीं जिसके बाद तीन आईपीएस अधिकारियों डीजी वंजारा (उपमहानिरीक्षक, सीमा क्षेत्र, गुजरात), राजकुमार पांडियन (पुलिस अधीक्षक, इंटेलिजेंस ब्यूरो) और दिनेश एमएन (पुलिस अधीक्षक, अलवर, राजस्थान) को गिरफ़्तार कर लिया गया था ।

गुजरात सरकार ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट में पहले ही मान चुकी है कि कथित फ़र्जी मुठभेड़ में मारे गए सोहराबुद्दीन की पत्नी क़ौसर बी की भी हत्या हो चुकी है और उसके शव को जला दिया गया था ।

Monday, May 14, 2007

मारन ने मंत्रिमंडल से इस्तीफ़ा दिया

दयानिधि मारन ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफ़ा दे दिया है।

उनको केंद्रीय मंत्रिमंडल से हटाने के डीएमके के फ़ैसले के बाद उन्होंने रविवार की रात अपना इस्तीफ़ा प्रधानमंत्री को भेज दिया।
उल्लेखनीय है कि रविवार को ही डीएमके ने केंद्रीय मंत्री दयानिधि मारन को वापस बुलाने का फ़ैसला किया था।
अलावा उन्हें पार्टी की ओर से एक कारण बताओ नोटिस जारी करने का भी फ़ैसला किया गया कि क्यों न उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से बर्खास्त कर दिया जाए। पर आरोप है कि उन्होंने पार्टी अनुशासन का पालन नहीं किया और पार्टी को बदनाम किया।
पिछले कुछ दिनों से करुणानिधि और मारन परिवार के बीच चले आ रहे तनाव के बाद यह फ़ैसला लिया गया है।
केंद्र की यूपीए सरकार का एक प्रमुख घटक दल है

पार्टी के ख़िलाफ़ नहीं

अपना इस्तीफ़ा भेजने के बाद जारी एक बयान में दयानिधि मारन ने करुणानिधि के प्रति आभार जताते हुए कहा है कि उन्होंने तीन साल तक बतौर केंद्रीय मंत्री उन्हें देश की सेवा करने का मौक़ा दिया।
ऊटी में जारी एक बयान में उन्होंने कहा है, "मैंने पार्टी के ख़िलाफ़ कोई काम नहीं किया और न ही अपने नेता करुणानिधि के ख़िलाफ़। मैं आगे पार्टी विरोधी किसी गतिविधि में शामिल नहीं रहूँगा।"
उनका कहना था, " मैं अपने नेता (करुणानिधि) की सहायता से ही बड़ा हुआ हूँ और उन्होंने ही मुझे पद दिया। इसलिए मैं इससे ज़्यादा कुछ नहीं कहना चाहता।"

सर्वेक्षण का विवाद

41 वर्षीय दयानिधि मारन दिवंगत डीएमके नेता मुरासोली मारन के बेटे हैं और करुणानिधि के भतीजे भी ।
तनाव की शुरुआत मारन परिवार के अख़बार दिनकरण में प्रकाशित एक सर्वेक्षण के बाद हुई थी ।
डीएमके प्रमुख और मुख्यमंत्री करुणानिधि के उत्तराधिकार को लेकर किए गए एक सर्वेक्षण में कहा गया था कि 70 प्रतिशत लोग करुणानिधि के छोटे बेटे स्तालिन को उनका उत्तराधिकारी मानते हैं और 30 प्रतिशत लोग बड़े बेटे अलेगिरी को ।
इस सर्वेक्षण के प्रकाशित होने के बाद करुणानिधि के परिवार की अंदरूनी खींचतान सार्वजनिक हो गई है।
इस सर्वेक्षण के प्रकाशन के बाद अख़बार के दफ़्तर पर हमला किया गया और तोड़फोड़ की गई। इस हिंसा में तीन लोगों की जान भी चली गई ।
मुख्यमंत्री और डीएमके प्रमुख एम करुणानिधि ने इसकी सीबीआई जाँच करवाने की घोषणा की है ।
कहा जाता है कि करुणानिधि ने मारन परिवार से इस तरह का कोई सर्वेक्षण प्रकाशित न करने को कहा था क्योंकि उन्हें अपने उत्तराधिकार की चर्चा पसंद नहीं और वे कोई विवाद भी नहीं चाहते थे ।
रविवार को करुणानिधि की अध्यक्षता में हुई डीएमके की बैठक दो घंटे से भी अधिक समय तक चली ।
इस बैठक में एक प्रस्ताव पारित कर हाईप्रोफ़ाइल संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री दयानिधि मारन को वापस बुलाने का फ़ैसला किया गया ।
स्थानीय पत्रकार रशीदा भगत का कहना है कि पार्टी में बहुत दिनों से इस बात पर आपत्ति की जा रही थी कि राजनीतिक वज़न कम होने के बावजूद दयानिधि मारन को बहुत महत्व दिया जा रहा है ।
पार्टी के नेताओं को आपत्ति थी कि पार्टी के हर कार्यक्रम में दयानिधि मारन करुणानिधि के बगल में खड़े दिखाई पड़ते हैं।

Saturday, May 12, 2007

मायावती के नेता चुने जाने की संभावना

उत्तर प्रदेश में स्पष्ट बहुमत हासिल करने के बाद बहुजन समाज पार्टी (बसपा) विधायकों की आज संभावित बैठक में मायावती के नेता चुने जाने की संभावना है ।

उत्तर प्रदेश की 14वीं विधानसभा का कार्यकाल 13 मई की रात को ख़त्म हो रहा है, इसलिए प्रेक्षकों का अनुमान है नई सरकार का गठन रविवार तक हो जाएगा ।

इस बीच मायावती के निर्देश पर बसपा के नवनिर्वाचित विधायक लखनऊ पहुँच रहे हैं ।

चुनावी नतीजों से स्पष्ट है कि दलित-ब्राह्मण गठजोड़ की मायावती की रणनीति कारगर साबित हुई और संभावना है कि नए मंत्रिमंडल में अगड़ी जातियों को अच्छा प्रतिनिधित्व मिलेगा ।

उत्तर प्रदेश विधानसभा में 403 सीटें हैं लेकिन एक सीट पर चुनाव नहीं हुआ था। बाकी 402 सीटों में से लगभग सभी सीटों के परिणाम घोषित हो चुके हैं और इनमें से बसपा 205 सीटें जीत चुकी है ।

पिछले चुनाव में पार्टी को 99 सीटें मिली थीं ।

उधर मुख्यमंत्री मुलायम सिंह ने राज्यपाल टीवी राजेश्वर को अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया है जिसे राज्यपाल ने स्वीकार भी कर लिया है ।

विचारधारा की जीत

बसपा नेता मायावती ने पत्रकार सम्मेलन में पार्टी की सफलता को बसपा की विचारधारा की जीत बताया है ।

हालांकि मायावती ने चुनाव नहीं लड़ा था लेकिन उनके ये कहने से कि 'जब मुझे शपथ ग्रहण करने के लिए बुलाया जाएगा तो मीडिया को सूचित किया जाएगा' से स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री मायावती ही होंगी ।

उनका कहना था, "उत्तर प्रदेश की आम जनता ने साबित किया है कि उस लोकतंत्र में गहरा विश्वास है। पिछले 14 वर्षों में पहली बार किसी एक पार्टी ने पूर्ण बहुमत के आधार पर सरकार नहीं बनाई है। जनता ने जाति और धर्म से ऊपर उठकर मतदान किया है ।"

उन्होंने दलितों और पिछड़ों के साथ-साथ अगड़ी जातियों के सदस्यों और मुस्लिम समुदाय के सदस्यों का भी धन्यवाद किया।

मायावती का कहना था कि उत्तर प्रदेश को भयमुक्त और अपराधमुक्त बनाया जाएगा और लोकतांत्रिक शासन प्रदान किया जाएगा ।

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के ख़िलाफ़ जो शिकायतें आएँगे उनकी जाँच होगी लेकिन ये किसी तरह की दुश्मनी की भावना से नही होगा ।

उधर मुलायम सिंह का कहना था, "ये लोकतंत्र के लिए बहुत अशुभ है। चुनाव आयोग ने मनमानी की है और अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर सरकार चलाई है। सभी दलों को इस पर विचार करना चाहिए ।"

अब तक घोषित परिणामों में बहुजन समाज पार्टी को 205 सीटों पर जीत मिली है, समाजवादी पार्टी को 99 सीटें मिली हैं, भाजपा 51 सीटों पर विजयी रही है और कांग्रेस के खाते में 21 और अन्य दलों को 25 सीटें मिली हैं ।

Friday, May 11, 2007

शुरुआती रुझान में बसपा काफी आगे

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की मतगणना के शुरुआती रुझानों के मुताबिक बसपा सबसे बड़ी पार्टी के रुप में उभर रही है। सपा दूसरे और भाजपा तीसरे नंबर पर है ।

अब तक 306 सीटों के रुझान मिले हैं जिनमें बहुजन समाज पार्टी (बसपा) 147 सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं ।
समाजवादी पार्टी (सपा) 71 और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 44 सीटों पर आगे चल रही हैं। कांग्रेस सिर्फ़ 23 सीटों पर आगे चल रही है।राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) सात सीटों पर बढ़त बनाए हुए है ।
अन्य पार्टियाँ और निर्दलीय उम्मीदवार 14 सीटों पर आगे हैं ।
विधानसभा की कुल 403 सीटों में से 402 सीटों के लिए मतदान हुआ है। एक सीट पर उम्मीदवार की मौत के कारण चुनाव स्थगित कर दिए गए थे ।
मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव भरथना सीट से तो पीछे चल रहे हैं लेकिन गुन्नौर से आगे हैं ।
सपा के वरिष्ठ नेता आज़म ख़ान, विधानसभा उपाध्यक्ष राजेश अग्रवाल, राज्य सरकार में मंत्री नरेश अग्रवाल, कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रमोद तिवारी और भाजपा नेता लालजी टंडन आगे चल रहे हैं ।
दूसरी ओर कांग्रेसी नेता जगदंबिका पाल, अपना दल के नेता सोनेलाल पटेल, भाजपा नेता ओम प्रकाश सिंह, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष केशरीनाथ त्रिपाठी और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सलमान ख़ुर्शीद की पत्नी लुईस ख़ुर्शीद पीछे चल रहे हैं ।

राजनीतिक सरगर्मी तेज़

लखनऊ बताया गया कि बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने विधायकों को जीतने की घोषणा होते ही लखनऊ आने का निर्देश दिया है क्योंकि 13 मई की रात मौजूदा विधानसभा की अवधि ख़त्म हो रही है ।
उन्होंने बताया कि बसपा अगर बहुमत हासिल करने से थोड़ा पीछे रह जाती है तो उसे कांग्रेस का सहयोग मिल सकता है और इस बारे में दोनों दलों के बीच बातचीत चल रही है ।
इसलिए विधानसभा में सरकार बनाने के लिए किसी भी पार्टी या गठबंधन को कम से कम 202 सीटें चाहिए ।
आज शाम तक लगभग सभी नतीज़े मिल जाने की संभावना है ।
चुनाव आयोग ने मतगणना के लिए सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए हैं और पहली बार मतगणना के दौरान हर चरण की वीडियो रिकॉर्डिंग करवाने के निर्देश दिए गए हैं ।

Thursday, May 10, 2007

कनिष्क हादसा: 'उड़ान पूर्व तलाशी नहीं हुई'

कनिष्क विमान हादसे की जाँच में नया मोड़ आया है। कनाडा के एक पूर्व पुलिस अधिकारी ने कहा है कि उड़ान भरने से पहले विमान की तलाशी ठीक से नहीं हुई ।

जून 1985 में कनाडा से भारत आ रहे एयर इंडिया के कनिष्क विमान में बम विस्फोट हुआ था जिसमें 329 लोग मारे गए थे। उनमें से अधिकतर भारतीय मूल के कनाडाई नागरिक थे ।
कनिष्क विमान विस्फोट की दोबारा हो रही जाँच में सुनवाई के दौरान क्यूबेक प्रांत के पूर्व पुलिस प्रमुख सर्ज कैरिग्नन ने कहा कि मॉंट्रियल के माइराबेल हवाई अड्डे से उड़ान भरने से पहले अगर उन्हें यात्रियों के सामान की तलाशी खोजी कुत्तों से कराने का मौका मिल जाता तो हादसा टल सकता था ।
उन्होंने 'रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस' के उन दस्तावेज़ों से असहमति जताई जिनके मुताबिक उड़ान भरने से पहले कनिष्क विमान में रखे गए संदिग्ध सामान की तलाशी ली गई थी ।
कैरिग्नन ने कहा कि 22 जून 1985 की शाम उन्हें आपात संदेश मिला और उनसे कहा गया कि एक जंबो जेट और उसमें रखे गए यात्रियों के सामान की तलाशी लेनी है लेकिन जब तक वे हवाई अड्डे पर पहुँचते विमान उड़ान भर चुका था ।
उन्होंने कहा, "मैं हमेशा इस बात पर हैरान रहा कि अगर मुझे विमान की तलाशी लेने के लिए बुलाया गया था तो मेरे पहुँचने से पहले ही विमान को जाने की इजाज़त कैसे मिली ।"

चेतावनी

इससे पहले कनाडा के एक अधिकारी ने जाँच आयोग के सामने दावा किया था कि विमान में बम होने की चेतावनी पहले दे दी गई थी लेकिन अधिकारियों ने उस पर ध्यान नहीं दिया ।
इस सुनवाई में रिक क्रूक नामक एक पूर्व गुप्तचर की गवाही ली गई जो वेंकूवर पुलिस के सदस्य थे ।
उन्होंने गवाही में बताया था कि उनके पास इस बारे में निश्चित सूचना थी कि एयर इंडिया के कनिष्क विमान को निशाना बनाया जाएगा ।
उन्होंने कहा था कि उन्हें 1984 के अंत में एक ऐसे व्यक्ति से ये सूचना मिली जिसे ये उम्मीद थी कि पुलिस की मदद के बदले में उसे ज़मानत मिल जाएगी ।
उन्होंने कहा ये जानकारी मिलने के बाद उन्होंने कनाडा के गुप्तचर विभाग को सूचना बढ़ा दी लेकिन किसी ने भी उनसे इस बारे में कोई संपर्क नहीं किया ।
कनिष्क मामला कनाडा के इतिहास का सबसे लंबा और सबसे महँगा मुक़दमा है और इस मामले में दो ऐसे अभियुक्त बरी हो चुके हैं जिनपर इस हमले में मुख्य भूमिका निभाने का आरोप लगा था ।
लेकिन पीड़ितों के परिवारवालों ने ये आरोप लगाया कि पुलिस ने जाँच के काम में कोताही बरती जिसके बाद पिछले साल इस मामले को लेकर अधिकारियों के रवैये की जाँच शुरू की गई जिसपर कुछ महीनों में रिपोर्ट आ जाएगी ।

Wednesday, May 9, 2007

मुंबई धमाकों के मामले में सज़ा सुनाए जाने की संभावना

वर्ष 1993 में मुंबई में हुए बम धमाकों के मामले में दोषी ठहराए गए लोगों को मुंबई की विशेष अदालत बुधवार से सज़ा सुनाने की शुरुआत कर सकती है ।

विशेष न्यायाधीश पीडी कोडे ने इस मामले के सभी अभियुक्तों को बुधवार को अदालत में पेश होने को कहा है ।

मुंबई धमाकों की जाँच कर रही विशेष आतंकवाद निरोधक अदालत ने इस मामले में 100 लोगों को दोषी ठहराया था और 23 लोगों को बरी कर दिया था ।

सीबीआई ने अदालत से बम धमाकों के मामले में दोषी ठहराए गए 44 लोगों को मौत की सज़ा देने की माँग की थी ।

इसके अलावा नौ लोगों के लिए तीन से 10 साल तक की सज़ा की मांग की गई है ।

इन नौ लोगों में बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त भी शामिल हैं, जिन्हें आर्म्स एक्ट के तहत दोषी ठहराया गया है ।

बम धमाके

12 मार्च, 1993 को मुंबई में एक के बाद एक कई धमाके हुए थे, जिनमें 250 से ज़्यादा लोग मारे गए थे और लगभग एक हज़ार लोग घायल हो गए थे ।

माना जाता है कि 1992 में बाबरी मस्जिद गिराए जाने के बाद अंडरवर्ल्ड के इशारे पर ये धमाके हुए थे ।

माफ़िया सरगना दाऊद इब्राहिम पर बम धमाकों की साज़िश रचने का आरोप है, लेकिन वे अब भी फ़रार हैं ।

यह मुक़दमा इतना लंबा चला कि 12 अभियुक्तों की मौत हो गई और कई अभियुक्तों ने उतनी सज़ा काट ली है, जितनी उन्हें आजीवन क़ैद मिलने के बाद भुगतनी पड़ती ।


तेरह साल तक चले मुक़दमे के बाद पिछले साल सितंबर से अदालत ने अपना फ़ैसला सुनाना शुरू किया जो दिसंबर में पूरा हुआ अब सज़ा सुनाई जानी बाक़ी है ।


Tuesday, May 8, 2007

एमनेस्टी ने रूस, चीन पर गंभीर आरोप लगाए

लंदन स्थित मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने रूस और चीन पर आरोप लगाया है कि वे संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों के बावजूद सूडान की सरकार को हथियार भेज रहे हैं जिनका इस्तेमाल दारफ़ुर मे हो रहा ।
एमनेस्टी का कहना है कि कुवैत, सऊदी अरब और बेलारूस भी सूडान में हथियार भेज रहे हैं।
एमनेस्टी का आरोप है कि सूडान आम नागरिकों पर हवाई हमले कर रहा है। संगठन के अनुसार ऐसा जंजावीद लड़ाकुओं के समर्थन में और विद्रोही गुटों के ख़िलाफ़ किया जा रहा है।
हज़ारों आम नागरिक पिछले दो महीने में संघर्ष क्षेत्र से विस्थापित हुए हैं।
दारफ़ुर में वर्ष 2003 में शुरु हुए संघर्ष के बाद कम से कम दो लाख लोग मारे गए हैं और लगभग बीस लाख लोग अपने घरों से पलायन कर चुके हैं।
एमनेस्टी ने संयुक्त राष्ट्र से कहा है कि वह सूडान को हथियारों देने पर लगाए गए प्रतिबंध को लागू करने के लिए कदम उठाए।
सूडान ने इन आरोपों का खंडन किया है।
हाल में अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय के एक जाँचकर्ता ने कहा था कि कि सूडान के दारफ़ुर इलाक़े में हज़ारों नागरिकों की हत्या के सबूत इकट्ठे किए गए हैं।
मानवता के ख़िलाफ़ अपराध के आरोपों की जाँच कर रहे लुइस मारेनो ओकैंपो ने कहा था कि इनमें बड़ी संख्या में सामूहिक हत्याएँ और बलात्कार की सैकड़ों घटनाएँ शामिल हैं।

Monday, May 7, 2007

रविवार, 06 मई, 2007 को 22:50 GMT तक के समाचार

1857 के विद्रोह की 150 वीं वर्षगांठ पर मेरठ से दिल्ली तक की रैली शुरू हो गई है ।

सन् 1857 के प्रथम विद्रोह की 150वीं वर्षगांठ की स्मृति में भारत में व्यापक आयोजन किए जा रहे हैं। मेरठ के विक्टोरिया पार्क से शुरू हुई रैली इसी का एक हिस्सा है ।

इसमें देश भर से आए लगभग 10 हज़ार युवा हिस्सा ले रहे है ।

उत्तर प्रदेश के राज्यपाल टीवी राजेश्वर और युवा मामलों के मंत्री मणिशंकर अय्यर ने सोमवार सुबह रैली को हरी झंडी दिखाई। यह 11 मई को दिल्ली के लाल क़िले पर पहुँचेगी ।

उल्लेखनीय है कि 1857 में हिंदुस्तानी सैनिकों ने ईस्ट इंडिया कंपनी के ख़िलाफ़ मेरठ से बग़ावत की शुरुआत की थी ।

विद्रोह की जो चिंगारी मेरठ से उठी थी उसकी जद में पूरा देश में आ गया था ।

रविवार को केंद्रीय खेल और युवा मामलों के मंत्री मणिशंकर अय्यर और उत्तर प्रदेश के राज्यपाल टीवी राजेश्वर ने मेरठ में 'जंगे आज़ादी' के आयोजनों की शुरुआत की।

रैली के बारे में नेहरू युवा केंद्र के शकील अहमद ख़ान कहते हैं,'' इसमें अंडमान निकोबार से लेकर जम्मू कश्मीर तक के लोग हिस्सा ले रहे हैं ।''

11 मई को लाल क़िले में आयोजित होने वाले समारोह में राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम, उपराष्ट्रपति भैंरोंसिंह शेखावत, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी और यूपीए अध्यक्ष सोनिया गाँधी हिस्सा लेंगे ।

Saturday, May 5, 2007

अमरीकी सैनिकों के सर्वे में चौंकाने वाले तथ्य

इराक़ में तैनात अमरीकी सैनिकों के बीच किए गए एक सर्वेक्षण में दस में से एक सैनिक ने इराक़ी नागरिकों से दुर्व्यवहार की बात कबूली है जबकि एक तिहाई सैनिकों ने प्रताड़ना को सही ठहराया है ।

सेना की मानसिक स्वास्थ्य सलाहकार टीम ने यह सर्वेक्षण किया है जिसके तहत एक तिहाई सैनिक मानते हैं कि अगर किसी सैनिक की जान बचाने कि लिए किसी को प्रताड़ित किया जाता है तो वो बिल्कुल सही है ।

इतना ही नहीं सर्वे में यह बात भी सामने आई है कि अमरीकी सैनिकों के मनोबल को लेकर कई समस्याएं हैं ।

इस सर्वेक्षण में 1700 से अधिक सैनिकों और मरीन सैनिकों से प्रताड़ना और इराक़ी जनता के साथ व्यवहार से जुड़े सवाल पूछे गए थे ।

यह सर्वेक्षण पिछले साल अगस्त से अक्तूबर के बीच किए गए थे .

पेंटागन के इस सर्वे के अनुसार आधे से भी कम सैनिक यह मानते हैं कि इराक़ी जनता के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार किया जाना चाहिए ।

इतना ही नहीं एक तिहाई अमरीकी सैनिक किसी और सैनिक की जान बचाने या चरमपंथियों से जुडी जानकारी पाने के लिए प्रताडना के भी पक्ष में दिखे ।

सर्वेक्षण में शामिल दस प्रतिशत सैनिकों ने माना कि उन्होंने कभी न कभी इराक़ी जनता के साथ दुर्व्यवहार किया है ।

दुर्व्यवहार के तहत सैनिकों ने आम नागिरकों को मारा-पीटा या फिर उनकी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया वो भी तब जबकि ऐसा करने की कोई वजह नहीं थी ।

सर्वे के अनुसार इराक़ में तैनात सैनिकों में तनाव, चिंता और मानसिक अवसाद के लक्षण स्पष्ट रुप से देखे जा सकते हैं जो कि उनके बुरे व्यवहार का कारण बनता है ।

युद्ध क्षेत्र में उन सैनिकों का व्यवहार और भी ख़राब देखा गया जिसकी यूनिट का कोई सैनिक घायल हुआ हो या फिर मारा गया हो ।

इस सर्वेक्षण के बाद सिफारिश की गई है कि इराक़ में सैनिकों की तैनाती का समय कम किया जाए क्योंकि वहां छह महीने से अधिक समय तक तैनात सैनिकों में मानसिक समस्याएं अधिक देखी गई हैं ।

हालांकि इस समय अमरीकी सरकार इराक़ में सैनिकों की संख्या में न केवल लगातार बढ़ोतरी करने मे लगी है बल्कि वहां तैनात सैनिकों का कार्यकाल भी बढ़ाया जा रहा है ताकि चरमपंथी हिंसा पर काबू किया जा सके ।

Friday, May 4, 2007

जलवायु परिवर्तन पर तत्काल राजनीतिक पहल की ज़रूरत

जलवायु परिवर्तन से दुष्प्रभावों से निपटने के लिए ज़रूरी प्रयासों के एक मसौदे पर 120 देशों के विशेषज्ञों के बीच सहमति बनी है ।

थाइलैंड में संयुक्त राष्ट्र ने जलवायु परिवर्तन पर एक सम्मेलन का आयोजन किया जिसमें संयुक्त राष्ट्र के अंतरराष्ट्रीय पैनल ने कहा है कि इससे होने वाले नुकसानों से निपटने के लिए तत्काल राजनीतिक स्तर पर पहल की ज़रूरत है ।

संयुक्त राष्ट्र का यह पैनल नीति निर्धारकों के लिए सुझाव देने का काम करता है ।

इस दिशा में कुछ एहतियात सुझाते हुए कहा गया है कि पैट्रोलियम ईधन के इस्तेमाल में कटौती करके, वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के विकास और कृषि क्षेत्र को तरजीह देकर इस संकट से उबरने में मदद मिल सकती है ।

एक अनुमान के मुताबिक अगर दुनिया की कुल आमदनी का तीन प्रतिशत भी इन एहतियाती क़दमों के लिए इस्तेमाल होता है तो इससे 2030 तक तापमान वृद्धि को दो डिग्री सेल्सियस तक सीमित किया जा सकेगा ।

हालांकि चीन ने इसपर अपनी चिंता जताते हुए कहा है कि इसका असर आर्थिक विकस पर पड़ेगा ।

चिंता

थाइलैंड में इस मसले पर शुक्रवार को एक रिपोर्ट भी जारी की जानी है ।

वैज्ञानिक पहले ही यह चिंता व्यक्त कर चुके हैं कि अगर तुरंत कुछ नहीं किया गया तो दुनिया को बचाना बहुत ही मुश्किल हो जाएगा ।

चिंता इस बात को लेकर भी है कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो ऐसे परिवर्तन होने शुरू हो जाएँगे जिनको पलटा नहीं जा सकेगा ।

ग्रीनहाउस गैसों के प्रसार को रोकने के लिए हम आज चाहे जो कर लें, पूरी व्यवस्था में जो एक जड़ता समा चुकी है उससे जलवालु परिवर्तन का प्रभाव लंबे समय तक बना रहेगा ।

उदाहरण के तौर पर समुद्रों का जलस्तर बढ़ता रहेगा, दशकों तक नहीं बल्कि सदियों तक ।

Thursday, May 3, 2007

उत्तर प्रदेश में छठे चरण का मतदान शुरू

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में गुरुवार को छठे चरण का मतदान शुरू हो गया है । इस चरण में राज्य के नौ ज़िलों की 52 सीटों के लिए वोट डाले जा रहे हैं।

इन 52 सीटों पर 785 से अधिक उम्मीदवार हैं जिनके भाग्य का फ़ैसला इस चरण में होना है ।

इस चरण में कई विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं जो अतिसंवेदनशील घोषित किए जा चुके हैं इस लिहाज से यहाँ कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतदान हो रहा है ।

चुनाव के इस चरण में इलाहाबाद, ग़ाजीपुर, चंदौली, वाराणसी, जौनपुर, संत रविदास नगर, सोनभद्र, मिर्ज़ापुर और कौशांबी ज़िलों में मतदान हो रहा है ।

इन ज़िलों की क़रीब आठ विधानसभाएँ नक्सल प्रभावी मानी जाती हैं जिसे ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की गई है ।

इलाहाबाद में मतदान करने गए लोगों से जब हमने बातचीत की तो उन्होंने बताया कि इस बार वे बिना किसी दबाव के मतदान कर रहे हैं ।

मतदाताओं का कहना था कि मतदान इतने निष्पक्ष पहले नहीं हुए जितने कि इसबार हो रहे हैं ।

मतदान करने पहुँची एक मुस्लिम महिला ने बताया, "इस बार हम किसी भी तरह के दबाव में नहीं हैं और मतदान निष्पक्ष तरीके से हो रहे हैं ।"

गिरता मतदान

हालांकि गर्मी और उमस से लोगों के परेशान होने की वजह से आशंका जताई जा रही है कि दिन चढ़ने तक मतदान केंद्रों पर लोगों की तादाद में कमी आ सकती है ।

इसे लेकर राजनीतिक दलों में भी खासी चिंता है। पहले से ही ऐसे रुझान आते रहे हैं कि लोगों में इसबार चुनाव को लेकर उत्साह कुछ कम है ।

ऐसा अभी तक संपन्न हो चुके पाँच चरणों के मतदान प्रतिशत को देखते हुए भी कहा जा सकता है ।

इसके अलावा इस चरण में राज्य की दो लोकसभा सीटों, मिर्ज़ापुर और राबर्ट्सगंज के लिए भी वोट डाले जा रहे हैं ।

इस चरण में कई बड़े नेता भी मैदान में हैं जिनमें प्रमुख हैं बीजेपी के केसरी नाथ त्रिपाठी, अपना दल के प्रमुख सोनेलाल पटेल और कांग्रेस की रीता बहुगुणा जोशी ।

इन क्षेत्रों में भयमुक्त और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित कराने के लिए बड़ी संख्या में केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों को तैनात किया गया है । लगभग 64 हज़ार अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों को नियुक्त किया गया है।

चुनाव का अब एकमात्र और चरण शेष हैं जिसमें आठ मई को वोट डाले जाने हैं ।

वोट दो..वोट दो..

बसपा की मायावती, सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने इन ज़िलों में तूफानी दौरे किए।

मायावती ने अपनी सभाओं में सत्ता मिलने पर समतामूलक व्यवस्था के साथ भयमुक्त शासन देने का वादा किया और मुसलमान मतदाताओं पर प्रभाव डालने की पूरी कोशिश की ।

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सोमवार को इलाहाबाद में कहा कि गैर कांग्रेसी सरकारें नीतियों के मामले में दिवालिया हैं ।

जौनपुर में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री पद के दावेदार कल्याण सिंह ने कहा कि भाजपा ही उत्तर प्रदेश के गुंडाराज समाप्त कर सकती है ।

राज्य की 403 विधानसभा सीटों के लिए सात चरणों में मतदान हो रहा है। इन सीटों पर कुल 6086 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इनमें से सबसे अधिक 2587 निर्दलीय हैं ।

सभी चरणों में हुए मतदान के परिणाम 11 मई को घोषित होंगे ।

Wednesday, May 2, 2007

'परमाणु समझौते पर उल्लेखनीय प्रगति'

भारत और अमरीका ने कहा है कि परमाणु समझौते पर चली बातचीत में उल्लेखनीय प्रगति हुई है और हो सकता है कि एक माह के भीतर ही असहमति के मुद्दे सुलझा लिए जाएँ ।

अमरीकी विदेश विभाग के प्रवक्ता सीन मैक्कॉरमैक ने एक लिखित बयान में कहा, "बातचीत साकारात्मक रही और विभिन्न मुद्दों पर हुई प्रगति से अमरीका उत्साहित है । "
अमरीकी विदेश उपमंत्री निकोलस बर्न्स और भारतीय विदेश सचिव शिव शंकर मेनन के बीच दो दिनों तक चली बातचीत समझौते से जुड़े कई पहलुओं पर बातचीत हुई ।
ग़ौरतलब है कि 18 जुलाई 2005 को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के बीच असैनिक परमाणु समझौते पर सहमति बनी थी और इसी के अनुरूप जुलाई 2006 में भारत ने सैनिक-असैनिक परमाणु रिएक्टरों को अलग करने का खाका भी तैयार कर लिया था ।
इसके बावजूद परमाणु इंधन के दोबारा इस्तेमाल और परमाणु परीक्षण करने के अधिकार पर दोनों देशों के बीच मतभेद पैदा हो गए थे ।
लेकिन ताज़ा दौर की बातचीत के बाद निकोलस बर्न्स ने कहा, "हम कई मुद्दों पर आगे बढ़े। मैं उम्मीद करता हूँ कि बाकी मतभेद भी आने वाले हफ़्तों में दूर हो जाएंगी । मैं इस माह भारत जाकर फिर बातचीत करुंगा । "
उधर भारतीय विदेश सचिव शिवशंकर मेनन ने कहा, "जो हमारी बातचीत हुई है और जिस तरह हम क़रीब आए हैं, उससे जल्दी ही समझौता आगे बढ़ सकता है । "
यह पूछने पर कि परमाणु परीक्षण का अधिकार रखने के भारतीय रूख़ पर क्या हुआ, उनका कहना था, "अब भी संदेह जताने से कोई फ़ायदा नहीं है । "

समझौता

दोनों देशों के बीच जुलाई 2005 में परमाणु समझौता हुआ था लेकिन कुछ मुद्दों पर अब भी अंतिम फ़ैसला नहीं हुआ है ।
अमरीकी अधिकारियों ने कहा था कि बातचीत की गति को लेकर वे नाखुश हैं ।
इस समझौते के बाद भारत को अमरीका से असैनिक कार्यों के परमाणु तकनीक मिल सकेगी ।
भारत ने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं । कई विशलेषकों का कहना है कि इस संधि के चलते भारत के परमाणु हथियार कार्यक्रम को बढ़ावा मिलेगा।और ईरान जैसे देशों को ग़लत संदेश जा सकता है ।
भारत ने ये बात स्पष्ट कर दी है कि अंतिम समझौते के तहत उसे बाध्य नहीं किया जाना चाहिए कि वो ईरान पर अमरीकी नीति का समर्थन करे या उसके मिसाइल कार्यक्रम पर रोक लगाई जाए ।
पिछले वर्ष अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश की भारत यात्रा के दौरान परमाणु समझौते पर सहमति हुई थी ।
उसके बाद अमरीकी कांग्रेस ने भी इसे अपने मंज़ूरी दे दी है और जॉर्ज बुश के हस्ताक्षर के बाद ये क़ानून की शक्ल भी ले चुका है ।
लेकिन भारत सरकार को देश में इस बात को लेकर आलोचना झेलनी पड़ी है कि समझौते से परमाणु मुद्दों को लेकर भारत की स्वतंत्रा छिन जाएगी ।
एएफ़पी के मुताबिक समझौते के इस प्रावधान को लेकर मतभेद बना हुआ है कि अगर भारत ने परमाणु परीक्षण किया तो अमरीका ईंधन और उपकरणों की सप्लाई बंद कर सकता है ।

Tuesday, May 1, 2007

कनिष्क में विस्फोट की चेतावनी मिली थी

कनिष्क विमान विस्फोट की जाँच के दौरान कनाडा के एक अधिकारी ने दावा किया है कि हमले की चेतावनी पहले दे दी गई थी लेकिन अधिकारियों ने उस पर ध्यान नहीं दिया।
जून 1985 में कनाडा से भारत आ रहे एयर इंडिया के कनिष्क विमान में बम विस्फोट हुआ था जिसमें 329 लोग मारे गए थे और उनमें से अधिकतर भारतीय मूल के कनाडाई नागरिक थे।
इस मामले की सुनवाई के दौरान कनाडा के पूर्व अधिकारी ने ऐसा दावा किया है।
कनाडा के अधिकारी इस बात से इनकार करते रहे हैं कि उन्हें पहले से हमले की कोई जानकारी थी।
ये जाँच पिछले साल के अंत में शुरू की गई जब बम हमले का शिकार हुए एयर इंडिया विमान में मारे गए यात्रियों के परिजनों ने लंबा अभियान चलाया।
मंगलवार को इस जाँच की दूसरी और अंतिम सुनवाई हुई जिसमें गवाहियाँ ली गई हैं जिसके बाद न्यायाधीश चार-पाँच महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट पेश करेंगे।
पूर्व सूचना
इस सुनवाई में रिक क्रूक नामक एक पूर्व गुप्तचर की गवाही ली गई जो वेंकूवर पुलिस के सदस्य थे।
रिक क्रूक अब रॉयल कनेडियन माउंटेड पुलिस में एक आम कर्मचारी की तरह काम करते हैं।
उन्होंने गवाही में बताया है कि उनके पास इस बारे में निश्चित सूचना थी कि एयर इंडिया के कनिष्क विमान को निशाना बनाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि उन्हें 1984 के अंत में एक ऐसे व्यक्ति से ये सूचना मिली जिसे ये उम्मीद थी कि पुलिस की मदद के बदले में उसे ज़मानत मिल जाएगी।
उन्होंने कहा ये जानकारी मिलने के बाद उन्होंने कनाडा के गुप्तचर विभाग को सूचना बढ़ा दी लेकिन किसी ने भी उनसे इस बारे में कोई संपर्क नहीं किया।
23 जून 1985 को जब उन्होंने रेडियो पर विस्फोट की ख़बर सुनी तो उन्हें कोई आश्चर्य नहीं हुआ।
अटलांटिक महासागर के ऊपर इस विमान में हुए विस्फोट में उसपर सवार सभी 329 लोग मारे गए थे।
कनाडा की सुरक्षा सेवाओं ने हमेशा इस बात से इनकार किया है कि उन्हें हमले के बारे में किसी तरह की कोई चेतावनी मिली थी।
इस जाँच में पेश किए जानेवाले दस्तावेज़ों को देखनेवाले कुछ लोगों का कहना है कि सुनवाई के दौरान कई और गवाहियाँ होंगी जिनमें ये आरोप लगाया जाएगा कि कनाडा के अधिकारियों को हमले की चेतावनी मिली थी लेकिन उन्होंने कुछ नहीं किया।
कनिष्क मामला कनाडा के इतिहास का सबसे लंबा और सबसे महँगा मुक़दमा है और इस मामले में दो ऐसे अभियुक्त बरी हो चुके हैं जिनपर इस हमले में मुख्य भूमिका निभाने का आरोप लगा ।
लेकिन पीड़ितों के परिवारवालों ने ये आरोप लगाया कि पुलिस ने जाँच के काम में कोताही बरती जिसके बाद पिछले साल इस मामले को लेकर अधिकारियों के रवैये की जाँच शुरू की गई जिसपर कुछ महीनों में रिपोर्ट आ जाएगी।