Saturday, June 30, 2007
ग्वांतानामो मामले में बुश प्रशासन को झटका
इस बार सुप्रीम कोर्ट ने ग्वांतानामो बे के बंदियों की एक याचिका पर सुनवाई करना स्वीकार कर लिया है। इस याचिका में अनुरोध किया गया है कि उन्हें अमरीकी अदालतों में अपील करने का अधिकार दिया जाए ।
सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को स्वीकार करते हुए अप्रैल के अपने फ़ैसले को उलट दिया है ।
तब सुप्रीम कोर्ट ने कहा कहा था कि बंदियों को सामान्य अदालतों में अपील करने के अधिकार पर वह कोई फ़ैसला नहीं करना चाहता ।
अमरीकी सरकार चाहती है कि ग्वांतानामो बे के बंदियों के मामलों की सुनवाई सिर्फ़ विशेष सैन्य अदालतों में हो ।
उल्लेखनीय है कि ग्वांतानामो बे में क़ैदियों के साथ हो रहे बर्ताव का अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाएँ निंदा करती रही हैं। अमरीका के कई मित्र देश भी इसका विरोध करते रहे हैं ।
ग्वांतानामो बे में 2001 और 2002 में 'आतंक के ख़िलाफ़ युद्ध' के दौरान गिरफ़्तार किए गए लोगों को यहाँ रखा गया है। इस बंदीगृह से प्रताड़ना और दुर्व्यवहार की ख़बरें मिलती रही हैं ।
वकीलों का अनुरोध
बुश प्रशासन ने पिछले साल एक क़ानून बनाया था और इसे संसद से पारित करवाया था।
इसके तहत ग्वांतानामो बे के बंदियों को अमरीका की सामान्य अदालतों में अपील करने के अधिकार से वंचित कर दिया गया था।
इस क़ानून में प्रावधान है कि ग्वांतानामो बे के बंदियों की मामले सिर्फ़ विशेष सैन्य अदालत में सुने जाएँगे न कि अमरीका की सामान्य अदालतों में ।
इसी साल फ़रवरी में कोलंबिया की एक निचली अदालत ने इस क़ानून को दुरुस्त बताया था ।
बाद में अप्रैल में सुप्रीम कोर्ट ने कोलंबिया की अदालत के फ़ैसले के ख़िलाफ़ दायर याचिका की सुनवाई से इनकार कर दिया था ।
इसके बाद बंदियों के वकीलों की ओर से सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया था कि बंदियों की याचिका पर विचार न करना उनके अधिकारों का हनन होगा। और इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिका स्वीकार कर ली है ।
संभावना है कि इस याचिका पर सुनवाई अक्तूबर में शुरु होगी ।
उल्लेखनीय है कि अमरीका के सैन्य वकील भी ग्वांतानामो बे की विशेष सैन्य अदालत की आलोचना की जाती रही है। उनका मानना है कि ये अदालत बंदियों को सज़ा देने के लिए अक्षम हैं ।
लेकिन बुश प्रशासन के लोग ग्वांतानामो बे पर अपने रुख़ का बचाव करते हैं ।
Friday, June 29, 2007
अमरीका में 'आरक्षण' पर कोर्ट की रोक
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि 'अफ़र्मेटिव एक्शन' के नाम से जातीय विविधता को स्थान देने के लिए कई अमरीकी स्कूलों में चलाई जाने वाली यह योजना भेदभाव पैदा करने वाली है ।
यह 'अफ़र्मेटिव एक्शन' एक तरह से आरक्षण की सुविधा है जो जातीय अल्पसंख्यकों को स्कूलों में दाखिले का अधिकार देती है ।
माना जा रहा है कि हाल के समय में नागरिक अधिकारों को लेकर अमरीकी अदालत का यह सबसे अहम फ़ैसला है ।
इससे लाखों बच्चों पर असर होने के आसार हैं ।
कई राजनीतिज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले की निंदा की है ।
फ़ैसला
अमरीका में कोई आधी सदी पहले 'अफ़र्मेटिव एक्शन' की योजना तब बनी थी जब नागरिक अधिकारों की बात शुरु हुई थी ।
हालांकि अब 'अफ़र्मेटिव एक्शन' को स्कूलों में लागू करना अनिवार्य नहीं रह गया है लेकिन अमरीका में ऐसे सैकड़ों स्कूल हैं जो इसी के आधार पर भर्ती करते हैं ।
इस योजना के ख़िलाफ़ कुछ श्वेत अमरीकी अभिभावकों ने अपील की थी ।
उनकी शिकायत थी कि उनके बच्चों को, उनकी पसंद के स्कूलों में सिर्फ़ इसलिए दाखिला नहीं दिया गया क्योंकि इससे स्कूल में 'अश्वेत बच्चों के कोटे' पर असर पड़ रहा था ।
सुप्रीम कोर्ट के एक पीठ ने पाँच के मुक़ाबले चार के मतों से यह फ़ैसला दिया है ।
अपने फ़ैसले में जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने कहा है, "जातीय आधार पर भेदभाव रोकने का तरीक़ा यही है कि जातीय आधार पर भेदभाव को रोक दिया जाए।"
लेकिन उन चार जजों ने इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपना मत दिया है ।
जस्टिस स्टीफ़न ब्रेयर ने लिखा है, "यह ऐसा फ़ैसला है जिस पर अदालत और राष्ट्र को अफ़सोस होगा।"
विरोध करने वाले जजों का कहना था कि इस फ़ैसले से 1954 का ऐतिहासिक फ़ैसला उलट जाएगा ।
विरोध
सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले की कई राजनीतिज्ञों ने तीखी निंदा की है ।
सीनेट के नेता हैरी रीड ने कहा है कि अदालत का यह फ़ैसला भयावह है ।
सीनेट के एक और सदस्य बराक ओहामा, जो अमरीका के पहले अश्लेत राष्ट्रपति बनने की उम्मीद लगाए हुए हैं, ने कहा कि यह फ़ैसला ग़लत दिशा में दिया गया फ़ैसला है ।
कई सामाजिक संस्थाओं ने भी इस फ़ैसले का विरोध किया है ।
Thursday, June 28, 2007
ब्लेयर के दूत बनने से हमास नाख़ुश
मध्य-पूर्व में शांति प्रयासों में लगी चार प्रमुख शक्तियों--अमरीका, रूस, यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र ने टोनी ब्लेयर को अपना विशेष दूत नियुक्त किया है ।
ब्रितानी प्रधानमंत्री पद से इस्तीफ़ा देने के कुछ घंटों बाद ही यह घोषणा की गई है ।
लेकिन फ़लस्तीनी गुट हमास ने टोनी ब्लेयर की नियुक्ती की ओलोचना की है ।
हमास ने कहा है कि प्रधानमंत्री रहते हुए न तो टोनी ब्लेयर मध्य-पूर्व के प्रति ईमानदार रहे और न वे कोई आशा जगाते हैं ।
लेकिन टोनी ब्लेयर की नियुक्ति का इसराइल और फ़लस्तीनी प्रशासन ने स्वागत किया है। फ़लस्तीनी प्रशासन दूसरे फ़लस्तीनी गुट फ़तह के हाथों में है ।
संसद में प्रश्नों का आख़िरी बार उत्तर देते हुए टोनी ब्लेयर ने कहा है कि मध्य-पूर्व समस्या का हल संभव है लेकिन इसके लिए बहुत काम करना होगा ।
उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता इसराइल-फ़लस्तीनी समस्या को दो-राष्ट्र समझौते तक लाने की होगी । हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह काम आसान नहीं होगा क्योंकि एक तो टोनी ब्लेयर अब तक कुछ ख़ास नहीं कर सके हैं और दूसरे अमरीका ने पिछले कुछ बरसों में ऐसा कुछ प्रस्ताव नहीं दिया है जिससे समस्या हल होती दिखे ।
हमास का विरोध
हमास के प्रवक्ता ग़ाज़ी हमद ने कहा कि हमास में टोनी ब्लेयर की छवि अच्छी नहीं है ।
उन्होंने कहा, "हमारा अनुभव है कि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री की तरह वे मध्यपूर्व के प्रति ईमानदार नहीं थे और वे समस्या को सुलझाने के लिए उम्मीद भी नहीं जगाते।"
उनका कहना था कि ब्लेयर हमेशा अमरीका और इसराइल का पक्ष लेते रहे हैं ।
लेकिन फ़लस्तीनी प्रशासन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने कहा है कि नव नियुक्त दूत ने उन्हें 'आश्वासन दिया है' कि वे समस्या का दो राष्ट्र के आधार पर हल निकालने की दिशा में कार्य करेंगे।
इसलाइल ने भी ब्लेयर की नियुक्ति का स्वागत किया है। इसलाइली प्रधानमंत्री एहुद ओल्मर्ट के प्रवक्ता मिरी आइसिन कहा है, "ओल्मर्ट मानते हैं कि ब्लेयर की नियुक्ति का सकारात्मक प्रभाव पड़ेग । "
उधर अमरीकी राष्ट्रपति कार्यालय ने भी इस नियुक्ति का स्वागत किया है लेकिन उम्मीदों को लेकर उनका रुख़ बहुत उत्साहजनक नहीं था ।
व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने कहा, "वह कोई सुपरमैन नहीं हैं।"
उन्होंने कहा, "उन्हें सुपरमैन जैसा कोई काम भी नहीं करने को कहा गया है। उनका काम है कि वे अंतरराष्ट्रीय चौकड़ी और मध्य-पूर्व की शक्तियों के बीच मध्यस्थ का कार्य करें और मामले को उस दिशा में ले जाने की कोशिश करें जिधर हम उसे ले जाना चाहते हैं । "
हालांकि यह अंतराष्ट्रीय चौकड़ी पहले से ही टोनी ब्लेयर की नियुक्ति पर विचार कर रही थी लेकिन रूस के कारण उनकी नियुक्ति में देर हुई ।
उनसे पहले अमरीका के जेम्स वुल्फ़ेंसन इस चौकड़ी के दूत थे ।
जहाँ तक टोनी ब्लेयर का सवाल है, वह ख़ुद कई बार दोहरा चुके हैं कि इसराइल और फ़लस्तीनियों के बीच शांति स्थापना को लेकर वह प्रतिबद्ध हैं ।
लेकिन संवाददाताओ का कहना है कि टोनी ब्लेयर मध्यपूर्व के लिए एक विवादित नेता हैं और उनके लिए एक कड़ी चुनौती सामने खड़ी हुई है ।
उनका कहना है कि इसराइली नेता तो ब्लेयर के पद और उनके अनुभव से उत्साहित हैं लेकिन फ़लस्तीनियों को इसे लेकर शंकाएँ हैं कि वे वास्तव में कोई फ़र्क ला पाएँगे ।
Wednesday, June 27, 2007
ईरान में ईंधन राशनिंग के बाद झड़पें
ईरान सरकार ने केवल दो घंटे के नोटिस पर ये राशनिंग लागू की है ।
अब निजी वाहनचालक एक महीने में 100 लीटर ईंधन या हर रोज़ तीन लीटर ईंधन खरीद सकते हैं जबकि लोगों की ज़रूरत कहीं ज़्यादा है। इसे लेकर लोगों में ख़ासी नाराज़गी है ।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि तेहरान में कम से कम एक पेट्रोल स्टेशन को आग लगा दी गई है। ख़बरों के मुताबिक तीन लोग मारे गए हैं।
शहर भर में पेट्रोल स्टेशनों पर लंबी कतारें लगी हुई हैं और कई जगह वाहन चालकों के बीच झड़पें भी हुई हैं ।
प्रतिबंध की आशंका
सरकार के इस नए क़दम के बारे में संवाददाताओ का कहना है कि किसी भी चुनी हुई सरकार के लिए ये ख़तरनाक क़दम है, ख़ासकर ऐसे देश में जहाँ तेल की बहुतायत है और लोग मानते हैं कि सस्ती दरों पर ईंधन मिलना उनका अधिकार है ।
ईरान में तेल तो बहुत है लेकिन तेल शोधन की सुविधाएँ नहीं है। इस वजह से उसे पेट्रोल की कुल खपत में से 40 फ़ीसदी आयात करना पड़ता है ।
तेहरान में संवाददाताओ का कहना है कि सरकार पेट्रोल की खपत कम करने की कोशिश कर रही है क्योंकि उसे डर है कि अगर परमाणु मुद्दे को लेकर विवाद गहराता है तो उस पर पश्चिमी देश प्रतिबंध लगा सकते हैं।
ईरान सरकार को डर है कि पश्चिमी देश पेट्रोल के आयात पर रोक लगा सकते हैं जिससे उसकी अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा ।
वैसे ईरान में पेट्रोल काफ़ी सस्ती दरों पर उपलब्ध है- असल कीमत से लगभग 20 फ़ीसदी कम ।
अभी तक ये नहीं बताया गया है कि ईरानी नागरिक बाज़ार की असल कीमत पर ज़्यादा पेट्रोल खरीद सकते हैं या नहीं ।
Tuesday, June 26, 2007
बारिश-बाढ़ से भारत-पाकिस्तान में तबाही
उधर भारत के आँध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल और महाराष्ट्र में अब तक 150 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है ।
अफ़ग़ानिस्तान से भी कुछ मौतों की ख़बरें आ रही हैं ।
मौसम विभाग ने भारत और पाकिस्तान के तटीय इलाक़ों में चक्रवाती तूफ़ान और भारी बारिश की चेतावनी दी है ।
गुजरात में तूफ़ान
आंध्र प्रदेश, केरल, कर्नाटक और महाराष्ट्र सहित कुछ राज्यों में बारिश और बाढ़ की वजह से 150 से भी ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है ।
इन राज्यों के कई ज़िलों में सड़क और रेल यातायात बुरी तरह से प्रभावित हुआ है ।
दक्षिणी भारत के कुछ राज्यों में बारिश का असर कुछ कम हुआ दिखता है ।
आंध्र प्रदेश पिछले शुक्रवार से हो रही बारिश की वजह से अबतक कम से कम 37 लोगों के मारे जाने की ख़बर है।
वहीं केरल में मानसून आने के बाद से 59 लोगों की मौत हो चुकी हैं । इनमें से 39 लोग पिछले एक सप्ताह के दौरान मारे गए हैं ।
महाराष्ट्र मिली जानकारी के अनुसार राज्यभर में बारिश और बाढ़ के कारण अबतक 31 लोगों की मौत हो चुकी है ।
समाचार एजेंसियों के अनुसार मुंबई सहित महाराष्ट्र के तटीय इलाक़ों में तेज़ हवाएँ चलने और भारी से बहुत भारी बारिश होने की चेतावनी दी है ।
उधर गुजरात के जामनगर और कच्छ ज़िलों में तूफ़ान के साथ बारिश हुई है क्योंकि अरब सागर में कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ था ।
कराची में अफ़रातफ़री
अधिकारियों का कहना है कि सिर्फ़ उत्तर-पश्चिमी कराची में बारिश ने एक हज़ार से अधिक मकानों को नष्ट कर दिया है ।
हालांकि तूफ़ान और बारिश से तबाह हुए इलाक़ों के लिए राहत शिविर स्थापित किए गए हैं लेकिन लोग अपने नष्ट हुए मकानों को छोड़कर जाने के लिए तैयार नहीं हैं ।
कई इलाक़ों में पीने का पानी भी उपलब्ध नहीं है और शहर के बड़े इलाक़ों में अभी भी बिजली नहीं है ।
उल्लेखनीय है कि कराची में तूफ़ान और बारिश ने दो सौ से अधिक लोगों की जानें ली हैं ।
इस बीच गवर्नर ने आदेश दिए हैं कि आबादी वाले इलाक़ों से सभी बड़े होर्डिंग्स हटा दिए जाएँ. इन होर्डिंग्स के कारण कई लोगों की जानें गई हैं.
मौसम विभाग ने पाकिस्तान के तटीय इलाक़ों में और तूफ़ान की चेतावनी दी है.
Monday, June 25, 2007
आज नामांकन दाखिल करेंगे भैरोसिंह शेखावत
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए की प्रवक्ता सुषमा स्वराज ने बताया कि राष्ट्रपति चुनाव के लिए भैरोंसिंह शेखावत 25 जून को दिन में साढ़े 11 बजे अपना नामांकन दाखिल करेंगे।
उन्होंने कहा कि 25 जून की तारीख़ बहुत ही प्रासंगिक है क्योंकि इसी दिन वर्ष 1975 में देश में आपातकाल लगा था।
भले ही घोषित रूप से देश में आपातकाल न लगाया गया हो लेकिन परिस्थितियां वैसी ही हैं। राष्ट्रपति भवन में एक परिवार के वफादार को बैठाने की कोशिश हो रही है और शेखावत जी इसी सोच के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ रहे हैं
सुषमा स्वराज, एनडीए की प्रवक्ता
सुषमा स्वराज ने कहा, '' भले ही घोषित रूप से देश में आपातकाल न लगाया गया हो लेकिन परिस्थितियां वैसी ही हैं। राष्ट्रपति भवन में एक परिवार के वफादार को बैठाने की कोशिश हो रही है और शेखावत जी इसी सोच के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ रहे हैं। ''
इससे पहले शनिवार को संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन यानी यूपीए और वाम दलों की साझा उम्मीदवार प्रतिभा पाटिल ने अपना नामांकन पत्र दाखिल किया।
ग़ौरतलब है कि राष्ट्रपति अब्दुल कलाम के चुनाव लड़ने से इनकार करने के बाद 19 जुलाई को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में शेखावत और प्रतिभा पाटिल के बीच मुख्य मुकाबला रह गया है।
हालांकि आंकड़ों के लिहाज से प्रतिभा पाटिल का पलड़ा भारी दिख रहा है।
लेकिन सुषमा स्वराज ने कहा कि अभी चुनाव होने में तीन सप्ताह बाकी है और तब तक बहुत कुछ बदलेगा।
Saturday, June 23, 2007
उत्तर कोरिया परमाणु संयंत्र बंद करेगा
परमाणु मामलों के विशेष अमरीकी दूत क्रिस्टोफ़र हिल ने कहा है कि उत्तर कोरिया तीन सप्ताह में संयंत्र को बंद करने पर राज़ी हो गया है।
टोक्यो हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बातचीत में हिल ने कहा कि तीन सप्ताह की समय सीमा बीते शुक्रवार से शुरू हुई है।
क्रिस्टोफ़र हिल अचानक ही दो दिन की यात्रा पर उत्तर कोरिया पहुँच गए थे जहाँ उन्होंने वरिष्ठ नेताओं से परमाणु रिएक्टर के बारे में बातचीत शुरू की थी।
उत्तर कोरिया ने फ़रवरी महीने में ही संयंत्र को बंद कर देने की बात कही थी लेकिन विवादों का नया दौर शुरू हो जाने के कारण उत्तर कोरिया वादे से पीछे हट गया था।
विवाद
उत्तर कोरिया और अमरीका के बीच विवाद की असली वजह थी मकाऊ में जमा धनराशि जिसके निकाले जाने पर अमरीका ने दो वर्ष पहले रोक लगा दी थी।
उत्तर कोरिया धनराशि निकालने पर लगी पाबंदी उठाने की माँग करता रहा था।
अमरीका का आरोप था कि ये पैसा मादक पदार्थों की तस्करी से कमाया गया है जबकि उत्तर कोरिया इन आरोपों को ग़लत बताया था।
दो दिन पहले मकाऊ के सरकारी अधिकारियों ने कहा कि इस पैसे को अमरीकी केंद्रीय रिज़र्व में भेज दिया गया है।
अमरीका के विशेष दूत क्रिस्टोफ़र हिल ने बताया कि ये पैसा रूस भेज दिया गया है जहाँ से कुछ दिनों में ये एक उत्तर कोरियाई बैंक में डाल दिया जाएगा।
Friday, June 22, 2007
'विश्व व्यापार के मुद्दे पर समझौता संभव'
जर्मनी में भारत, ब्राज़ील, अमरीका और यूरोपीय संघ के नेताओं के बीच विश्व व्यापार के मुद्दे पर बातचीत विफल हो गई है। नेताओं में विभिन्न मुद्दों को लेकर कोई सहमति नहीं बन पाई।
ब्राज़ील और भारत ने आरोप लगाया है कि यूरोपीय संघ और अमरीका कृषि संबंधी मु्द्दों पर पर्याप्त रियायतें नहीं दे रहे हैं।
अमरीका और यूरोपीय संघ के रवैये में बदलाव की ज़रूरत है
कमलनाथ
भारत के वाणिज्य मंत्री कमलनाथ ने कहा कि अमरीका और यूरोपीय संघ के रवैये में बदलाव की ज़रूरत है।
जबकि यूरोपीय संघ और अमरीका का कहना है कि भारत और ब्राज़ील पश्चिमी देशों के उत्पादों के लिए अपना बाज़ार नहीं खोल रहे।
विश्व व्यापार संगठन की दोहा दौर की बातचीत में प्रगति के लिए जर्मनी में बातचीत चल रही थी.
फ़ायदेमंद नहीं
ब्राज़ील के विदेश मंत्री ने बताया कि ब्राज़ीली और भारतीय दल वार्ता से अलग हो रहा है क्योंकि बातचीत फ़ायदेमंद साबित नहीं हो रही है।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने कहा कि अमरीकी राष्ट्रपति इस बात को लेकर निराश हैं कि कुछ देश व्यापार बढ़ाने की कोशिशों में बाधा डाल रहे हैं।
व्यापार वार्ता में अमरीकी प्रतिनिधि का कहना था, "दोहा दौर में किए गए वादे पूरे करने के लिए विकसित और विकासशील देशों को अपना घरेलू बाज़ार कृषि और औद्योगिक उत्पादों और सेवाओं के लिए खोलना होगा। "
उधर पर्यावरण संगठन फ़्रेंड्स ऑफ़ अर्थ ने बातचीत विफल होने का स्वागत किया है। संगठन से जुड़े जोई ज़ाकून ने कहा, "इस बातचीत का विफल होना एक अच्छा मौका है जब कोई ऐसा तरीका निकाला जा सकता है जो पर्यावरण और विकासशील देशों दोनों के लिए अच्छा हो। "
दोहा वार्ता पिछले कई बार से विफल होती आई है। क़तर की राजधानी दोहा में 2001 में ये वार्ता शुरू हुई थी।
दिसंबर 2005 में हुई अहम बैठक में माना जा रहा था कि अंतिम सहमति बन जाएगी लेकिन वो भी विफल रही।
विश्व व्यापार संगठन के प्रमुख पास्कल लामी ने हाल ही में आगाह किया था कि अगल जल्द कोई समझौता नहीं हुआ तो दोहा वार्ता वर्षों तक खिंच सकती है।
समझौते को कांग्रेस के दख़ल के बगैर मंज़ूर करने का अमरीकी राष्ट्रपति का अधिकार एक जुलाई को समाप्त हो जाएगा और अगर तब तक समझौता नहीं हुआ तो मुश्किल हो सकती है।
Thursday, June 21, 2007
कलाम के लिए तीसरे मोर्चे की मुहिम
ग़ौरतलब है कि बुधवार को राष्ट्रपति कलाम ने तीसरे मोर्च के नेताओं से मुलाक़ात के दौरान कहा था कि वो दूसरे कार्यकाल के लिए तैयार हैं 'यदि यह सुनिश्चित हो'।
दूसरी ओर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने आठ दलों के संयुक्त राष्ट्रीय प्रगतिशील गठबंधन (यूएनपीए) यानी तीसरे मोर्चे के नेताओं से मिलने से इनकार करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि अब इस मुद्दे पर पुनर्विचार की कोई संभावना नहीं है।
कांग्रेस ने तीसरे मोर्चे और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) पर आरोप लगाया कि वे राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम को विवाद का विषय बना रहे हैं।
तीसरे मोर्चे ने अगले राष्ट्रपति चुनाव के लिए कलाम का नाम उछाल कर उन्हें अनावश्यक रूप से विवाद का विषय बना दिया है
जयंती नटराजन, कांग्रेस प्रवक्ता
कांग्रेस प्रवक्ता जयंती नटराजन का कहना था कि तीसरे मोर्चे ने अगले राष्ट्रपति चुनाव के लिए कलाम का नाम उछाल कर उन्हें अनावश्यक रूप से विवाद का विषय बना दिया है।
उनका कहना था कि डॉक्टर कलाम एक सफल और लोकप्रिय राष्ट्रपति रहे हैं और उन्हें विवाद में घसीटना दुर्भाग्यपूर्ण है।
राजनीति तेज़
जयंती नटराजन का कहना था कि यदि तीसरा मोर्चा यदि अब्दुल कलाम को फिर से राष्ट्रपति बनाने के प्रति गंभीर था तो उसे शुरू में ही यह बात कहनी चाहिए थी। लेकिन उसने इसके लिए ऐसा समय चुना है जब यूपीए और एनडीए ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है।
अगर डॉक्टर कलाम के नाम पर आम सहमति बन जाती है तो पूरा एनडीए उनको वोट देने के लिए तैयार है। लेकिन चुनाव होता है तो भैरोंसिंह शेखावत चुनाव लड़ेंगे।
मुख्तार अब्बास नक़वी, भाजपा नेता
दूसरी ओर एनडीए ने राष्ट्रपति अब्दुल कलाम के दोबारा राष्ट्रपति बनने की सशर्त सहमति व्यक्त किए जाने के बाद यूपीए के प्रमुख घटक डीएमके से अपनी स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
भाजपा प्रवक्ता सुषमा स्वराज ने यूपीए के घटक दलों से अपनी स्थिति स्पष्ट करने को कहा।
भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नक़वी का कहना था कि अगर डॉक्टर कलाम के नाम पर आम सहमति बन जाती है तो पूरा एनडीए उनको वोट देने के लिए तैयार है। लेकिन चुनाव होता है तो भैरोंसिंह शेखावत चुनाव लड़ेंगे।
उनका कहना था कि आम सहमति पर ही मौजूदा राष्ट्रपति के दोबारा चुनाव लड़ने की परंपरा रही है।
विश्लेषकों का कहना है कि ज़मीनी सच्चाई को देखें तो कलाम के नाम पर सर्वसम्मति बनने की संभावना न के बराबर दिखती है।
माना जा रहा है कि यदि चुनाव हुआ तो भैरोंसिंह शेखावत और प्रतिभा पाटिल के बीच ही होगा।
Wednesday, June 20, 2007
रुश्दी पर कूटनीतिक विवाद गहराया
सलमान रुश्दी की पुस्तक सैटानिक वर्सेस ने 1989 में ख़ासा विवाद खड़ा कर दिया था और दुनिया भर में विरोध प्रदर्शन हुए थे।
ईरान ने तो सलमान रुश्दी की मौत का फ़तवा जारी कर दिया था।
ईरान के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को ब्रिटेन के राजदूत को बुलाया और कहा कि रुश्दी को नाइटहुड दिया जाना एक ‘भड़कानेवाला क़दम’ है।
रुश्दी को नाइटहुड दिया जाना एक भड़कानेवाला क़दम है
ईरानी विदेश मंत्रालय
पाकिस्तान ने भी ऐसा ही विरोध व्यक्त किया। उसने भी ब्रिटेन के उच्चायुक्त रॉबर्ट ब्रिंकली को बुलाया और कहा कि यह ब्रितानी सरकार की ‘गहरी संवेदनहीनता’ को दर्शाता है।
ब्रिटेन ने इन आरोपों का खंडन किया है और कहा है कि रुश्दी को नाइटहुड दिया जाने का मकसद इस्लाम की तौहीन किया जाना नहीं था।
बयान पर चिंता
दूसरी ओर ब्रिटेन के उच्चायुक्त रॉबर्ट ब्रिंकली ने पाकिस्तान के एक मंत्री के बयान पर गहरी चिंता जताई है।
पाकिस्तान के धार्मिक मामलों के मंत्री मोहम्मद एजाज़ुल हक़ ने कहा था कि सलमान रुश्दी को यह सम्मान दिए जाने से आत्मघाती हमले बढ़ने की आशंका है।
सलमान रूश्दी को नाइडहुड दिए जाने का भारी विरोध हो रहा है
ब्रिटेन सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा कि " उच्चायुक्त ने इस बात को स्पष्ट कर दिया है कि पाकिस्तान के धार्मिक मामलों के मंत्री ने जो बयान दिया है उस पर ब्रिटेन सरकार बहुत चिंतित है। "
प्रवक्ता ने कहा, " ब्रिटेन सरकार इस बारे में बिल्कुल स्पष्ट मत रखती है कि कोई भी ऐसी बात नहीं है जिससे आत्मघाती हमलों को जायज़ ठहराया जा सके। "
ईरान में तो इस किताब के सामने आने के बाद सलमान रुश्दी की हत्या का फ़तवा जारी कर दिया गया था।
ईरान के विदेश मंत्रालय के निदेशक इब्राहिम रहीमपुर का बयान सरकारी समाचार एजेंसी इरना ने जारी किया है जिसमें कहा गया है, '' यह मुसलमानों और अन्य धर्मों के अनुयायियों के घाव को कुरेदने जैसा है। ''
उनका कहना था कि ईरान 'ब्रितानी सरकार और महारानी एलिज़ाबेथ-द्वितीय को इस भड़कानेवाली कार्रवाई के लिए ज़िम्मेदार मानता है। '
उच्चायुक्त तलब
इससे पहले रुश्दी को 'सर' की उपाधि दिए जाने पर विरोध प्रकट करने के लिए पाकिस्तान सरकार ने इस्लामाबाद में ब्रिटेन के उच्चायुक्त को तलब किया।
सोमवार को पाकिस्तान की संसद ने एक प्रस्ताव पारित कर सलमान रुश्दी को 'सर' का ख़िताब देने का विरोध किया था।
सलमान रुश्दी को नाइटहुड दिया जाना ब्रितानी सरकार की गहरी संवेदनहीनता को दर्शाता है
पाकिस्तान सरकार
संसद की ओर से पारित प्रस्ताव में माँग की गई थी कि सलमान रूश्दी को दिया गया सम्मान वापस ले लिया जाए।
प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि रुश्दी को सम्मानित करने से 'मुसलमानों की भावनाएँ आहत हुई हैं। '
दरअसल, पिछले सप्ताह ही सलमान रूश्दी को ब्रिटेन ने उनके लेखन के लिए नाइटहुड से सम्मानित किया था।
सम्मान की घोषणा के बाद ही इसका ईरान और पाकिस्तान में व्यापक विरोध शुरू हो गया था।
विवादित पुस्तक
सलमान के सम्मान पर विवाद ऐसे समय में हो रहा है जब उन्होंने मंगलवार यानी 19 जून को ही अपने जीवन के 60 वर्ष पूरे किए हैं।
सलमान रुश्दी की किताब सैटेनिक वर्सेस के बाद उनके ख़िलाफ़ फ़तवा जारी कर दिया गया था
सलमान रुश्दी का जन्म भारत में हुआ था।
सलमान रुश्दी में 1989 में लिखी गई 'सैटेनिक वर्सेस' नाम की किताब लिखी थी जिसका दुनिया के कई देशों में भारी विरोध हुआ था और भारत सहित कई देशों ने उस पर पाबंदी लगा दी थी।
उनकी चौथी किताब 'सैटानिक वर्सेस' में अच्छाई और बुराई के बीच की काल्पनिक लड़ाई दिखाई गई है जिसमें धर्म, इतिहास, दर्शन और फैंटसी का इस्तेमाल किया गया है।
सलमान रुश्दी ने इस सम्मान के लिए ब्रितानी सरकार के प्रति आभार प्रकट किया है और इसे अपनी लेखनी को मिली पहचान बताया है।
Tuesday, June 19, 2007
शेखावत पर शिव सेना आज फ़ैसला करेगी
शिव सेना राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का घटक दल है और एनडीए ने सोमवार को भैरोसिंह शेखावत को राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में समर्थन देने की घोषणा कर दी थी।
हालांकि उन्हें निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उतारने के निर्णय लिया गया है।
सोमवार को एनडीए के घटक दलों की दिल्ली में बैठक हुई जिसमें उनके नाम की घोषणा की गई।
इस बैठक में शिव सेना नेता मनोहर जोशी उपस्थित थे लेकिन उन्होंने शेखावत की उम्मीदवारी के समर्थन की घोषणा नहीं की थी।
शिव सेना ने राष्ट्रपति चुनाव के बारे में फ़ैसला करने का पूरा अधिकार पार्टी प्रमुख बाला साहेब ठाकरे को दे दिया है
मनोहर जोशी, शिव सेना के वरिष्ठ नेता
शिवसेना प्रमुख बाला ठाकरे मंगलवार को यह घोषणा करेंगे के उनकी पार्टी किस प्रत्याशी को समर्थन देगी।
दरअसल, यूपीए की ओर से राजस्थान की वर्तमान राज्यपाल प्रतिभा पाटिल का नाम घोषित किए जाने के बाद शिव सेना ने एक मराठी को राष्ट्रपति पद का प्रत्याशी बनाए जाने की प्रशंसा की थी।
शिव सेना इसी मुद्दे को लेकर असमंजस की स्थिति में है और पार्टी की ओर से अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि राष्ट्रपति पद के लिए वे किसकी दावेदारी का समर्थन करेंगे।
शिवसेना के वरिष्ठ नेता मनोहर जोशी ने कहा है कि पार्टी ने राष्ट्रपति चुनाव के बारे में फ़ैसला करने का पूरा अधिकार पार्टी प्रमुख बालासाहेब ठाकरे को दे दिया है।
हलचल तेज़
दूसरी ओर उप राष्ट्रपति भैरोसिंह शेखावत के एपीजे अब्दुल कलाम के समर्थन में हटने संबंधी बयान से राजनीतिक हलचल तेज़ हो गई है।
भैरोसिंह शेखावत निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में हैं
शेखावत ने सोमवार को संकेत दिए थे कि अगर राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में मौजूदा राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर सहमति बन जाती है तो वे अपनी दावेदारी छोड़ सकते हैं।
भैरोसिंह शेखावत का बयान ऐसे समय आया जब तीसरे मोर्चे ने कहा है कि उनकी पसंद एपीजे अब्दुल हैं।
तीसरे मोर्चे की घोषणा के कुछ घंटों बाद एक बयान जारी करके शेखावत ने कहा, "मुझे इससे बढ़कर संतोष नहीं मिल सकता कि राष्ट्रपति कलाम तैयार हो जाएँ। इसके लिए सभी पार्टियों की सहमति ज़रूरी है। अगर ऐसा हुआ तो मुझे बहुत ख़ुशी होगी। "
दूसरी ओर सत्ताधारी संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) और वामपंथी दलों ने राजस्थान की राज्यपाल प्रतिभा पाटिल को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया है।
Monday, June 18, 2007
राष्ट्रपति चुनाव: तीसरे मोर्चे की बैठक
उल्लेखनीय है कि अन्नाद्रमुक, तेलुगू देशम, समाजवादी पार्टी, असम गण परिषद, इंडियन नेशनल लोकदल, केरल कांग्रेस, झारखंड विकास मोर्चा और एमडीएमके ने हाल में मोर्चे का गठन किया है।
इसके पहले समाजवादी पार्टी ने राष्ट्रपति चुनाव पर पार्टी का रुख़ तय करने का जिम्मा मुलायम सिंह यादव को सौंपा दिया।
हालांकि समाजवादी पार्टी की कार्यकारिणी में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) से समान दूरी बनाए रखने के स्वर उभरे।
सपा नेता मोहन सिंह का कहना था कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने पार्टी प्रमुख को राष्ट्रपति चुनाव के बारे में निर्णय लेने के लिए अधिकृत किया है।
कोई उम्मीदवार उतारना है या नहीं, इस बारे में तीसरे मोर्चे के नेता सामूहिक निर्णय लेंगे
मोहन सिंह, सपा के वरिष्ठ नेता
यह पूछे जाने पर कि उनकी पार्टी क्या किसी को मैदान में उतारने पर विचार कर रही है, इस पर उनका कहना था कि तीसरे मोर्चे के नेता इस बारे में सामूहिक निर्णय लेंगे।
तीसरे मोर्चे में समाजवादी पार्टी के पास सबसे अधिक वोट हैं जबकि दूसरे नंबर पर तेलुगू देशम है।
प्रेक्षकों का कहना है कि तीसरे मोर्चे के दो घटक दलों की नेता अन्नाद्रमुक की जयललिता और इनेलो के ओमप्रकाश चौटाला भैंरोंसिंह शेखावत को समर्थन देने के पक्ष में है।
जबकि समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह और तेलुगू देशम के चंद्रबाबू नायडू शेखावत को समर्थन के सवाल पर असमंजम में हैं।
एनडीए की बैठक
दूसरी ओर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन नेताओं की भी सोमवार को बैठक हो रही है।
एनडीए भैरोंसिंह शेखावत की उम्मीदवारी के समर्थन की घोषणा कर सकता है
संभावना जताई जा रही है कि इस बैठक में भैरोंसिंह शेखावत का समर्थन करने का फ़ैसला किया जाएगा जो निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में यह चुनाव लड़ेंगे।
एनडीए के प्रमुख घटक दल शिवसेना और जनता दल-यू ने शेखावत की उम्मीदवारी को लेकर अभी तक अपना रुख़ स्पष्ट नहीं किया है।
शिवसेना का झुकाव 'मराठी' होने के कारण यूपीए उम्मीदवार प्रतिभा पाटिल की ओर है।
लेकिन भाजपा की नेता सुषमा स्वराज ने दावा किया कि राष्ट्रपति पद के चुनाव में उम्मीदवारी को लेकर एनडीए में दरार पड़ने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता।
उनका कहना कि इन दोनों दलों के नेता सोमवार को एनडीए नेताओं की बैठक में शामिल होंगे और बैठक में किए जाने वाले फ़ैसले का पूरा समर्थन करेंगे।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले यूपीए और वामपंथी दलों ने पिछले दिनों राजस्थान की राज्यपाल और महाराष्ट्र की वरिष्ठ कांग्रेसी नेता प्रतिभा पाटिल को अपना साझा उम्मीदवार घोषित किया था
Saturday, June 16, 2007
गाँधी जयंती अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस
बापू का जन्मदिन 2 अक्तूबर को मनाया जाता है।
अहिंसा की नीति के ज़रिए विश्व भर में शांति के संदेश को बढ़ावा देने के महात्मा गांधी के योगदान को सराहने के लिए ही इस दिन को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाने का फ़ैसला किया गया है।
इस सिलसिले में संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत के रखे गए प्रस्ताव का भरपूर समर्थन किया गया।
इस प्रस्ताव को भारी संख्या में सदस्य देशों का समर्थन मिलना विश्व में आज भी गांधी जी के प्रति सम्मान और उनकी अहिंसा की नीति की प्रासंगिकता को दर्शाता है
आनंद शर्मा
महासभा के कुल 191 सदस्य देशों में से 140 से भी ज़्यादा देशों ने इस प्रस्ताव को सह-प्रायोजित किया। इनमें अफ़गानिस्तान, नेपाल, श्रीलंका, बांग्लादेश, भूटान जैसे भारत के पड़ोसी देशों के अलावा अफ़्रीका और अमीरका महाद्वीप के कई देश भी शामिल हैं.
मौजूदा विश्व व्यवस्था में अहिंसा की सार्थकता को मानते हुए बिना वोटिंग के ही सर्वसम्मति से इस प्रस्ताव को पारित कर दिया गया।
गाँधी की प्रासंगिकता
भारत के विदेश राज्य मंत्री आनंद शर्मा ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रसताव पेश किया।
महासभा में अपने भाषण के दौरान मंत्री ने कहा, “इस प्रस्ताव को भारी संख्या में सदस्य देशों द्वारा सह-प्रायोजित किया जाना विश्व में आज भी गांधी जी के प्रति सम्मान और उनकी अहिंसा की नीति की प्रासंगिकता को दर्शाता है। ”
उनका कहना था कि महात्मा गांधी की इस नीति ने साम्राज्यवाद को भारत से उखाड़ फेंकने में अहम भूमिका निभाई थी और मार्टिन लूथर किंग, बादशाह खान और नेलसन मंडेला जैसे मानवाधिकार की लड़ाई लड़ने वालों ने गांधी जी की इस नीति से सीख ली थी।
इस साल 2 अक्तूबर का दिन पहली बार अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाएगा.
यह प्रस्ताव इस बात पर ज़ोर देता है कि अहिंसा का मतलब सभी के मानवाधिकारों और बुनियादी स्वतंत्रता का सम्मान करना है।
हमें बड़ी खुशी है कि संयुक्त राष्ट्र ने ऐसा महत्वूपर्ण निर्णय लिया है। इससे बढ़ कर और कोई उचित निर्णय नहीं हो सकता था निर्मला देशपांडे इस प्रस्ताव में संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों, गैर सरकारी संगठनों और आम लोगों को भी दावत दी गई है कि वह अहिंसा दिवस को धूमधाम से मनाएं और इस संदेश को शिक्षा और जनजागरण के ज़रिए लोगों में फैलाएं।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव से भी अनुरोध किया गया है कि वह ऐसे संसाधन मुहैया कराएँ जिससे संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न विभागों के ज़रिए सदस्य देशों को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस मनाने में आसानी हो।
सराहनीय फ़ैसला गाँधीवादी नेता निर्मला देशपांडे ने संयुक्त राष्ट्र के इस फ़ैसले पर खुशी जताई है।
उन्होंने कहा, "हमें बड़ी खुशी है कि संयुक्त राष्ट्र ने ऐसा महत्वूपर्ण निर्णय लिया है। इससे बढ़ कर और कोई उचित निर्णय नहीं हो सकता था. इस युग में वो न सिर्फ़ अहिंसा के महीसा हैं बल्कि अहिंसा में उन्होंने नई जान डाल दी है. "
उन्होंने कहा कि इस फ़ैसले से विश्व पटल पर भारत का कद भी बढ़ गया है।
निर्मला देशपांडे ने कहा कि सत्याग्रह के सौ साल पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम में ही बापू के जन्मदिन को अहिंसा दिवस के रुप में मनाने का प्रस्ताव आया था जिसे संयुक्त राष्ट्र ने स्वीकार कर लिया।
Friday, June 15, 2007
'गज़ा पर हमास का पूरा नियंत्रण'
वैसे तो हमास और फ़तह गुटों को फ़लस्तीनी साझा सरकार में होना चाहिए लेकिन दोनों लड़ रहे हैं और पिछले छह दिनों में इस संघर्ष में 110 से अधिक लोग मारे गए हैं।
एक ओर फ़तह के नेता और फ़लस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने हमास के नेतृत्ववाली तीन महीने पुरानी सरकार को बर्ख़ास्त कर दिया है और आपातकाल की घोषणा कर दी है।
लेकिन दूसरी ओर हमास के नेता और फ़लस्तीनी प्रधानमंत्री इस्माइल हानिया ने इस घोषणा को ख़ारिज करते हुए कहा है कि सरकार चलती रहेगी।
नियंत्रण
गुरुवार को दिन भर चली कार्रवाई में हमास ने फ़तह के सुरक्षा मुख्यालय पर कब्ज़ा कर लिया और इसके बाद उन्होंने 'गज़ा की आज़ादी' की घोषणा की।
गज़ा पट्टी फ़लस्तीनी गृहनगर का अविभाज्य हिस्सा है और यहाँ के लोग फ़लस्तीनियों से अलग नहीं किए जा सकते
इस्माइल हानिया, फ़लस्तीनी प्रधानमंत्री
रात ढलने के बाद हमास के लड़ाके राष्ट्रपति महमूद अब्बास के निवास पर प्रवेश कर गए। लेकिन फ़तह के सुरक्षाकर्मियों के भाग जाने के बाद ही अब्बास अपना निवास छोड़कर जा चुके थे.
फ़लस्तीनी सूचना मंत्री ने कहा है कि अब गज़ा पर हमास का पूरा नियंत्रण है।
यरुशलम में बीबीसी के संवाददाता मैथ्यू प्राइस का कहना है कि इस घटनाक्रम से विभाजन की परिस्थितियाँ बन गई हैं और अब गज़ा और पश्चिमी तट अलग-अलग हो जाएँगे।
गज़ा पर हमास का नियंत्रण रहेगा और पश्चिमी तट पर फ़तह का।
लेकिन हमास नेता और फ़लस्तीनी प्रधानमंत्री हानिया विभाजन को ख़ारिज करते हैं, "गज़ा पट्टी फ़लस्तीनी गृहनगर का अविभाज्य हिस्सा है और यहाँ के लोग फ़लस्तीनियों से अलग नहीं किए जा सकते।
सरकार का विवाद
महमूद अब्बास के सहयोगियों का कहना है कि राष्ट्रपति जल्द से जल्द चुनाव की घोषणा करेंगे ताकि ग़ज़ा में हमास और फ़तह के बीच चल रहे संघर्ष को रोका जा सके।
हमास ने इस पर तत्काल प्रतिक्रिया व्यक्त की और फ़ैसले को ख़ारिज कर दिया।
फ़लस्तीनी प्रधानमंत्री इस्माइल हानिया ने राष्ट्रपति अब्बास के उनकी सरकार को बर्ख़ास्त करने के फ़ैसले को जल्दबाजी में उठाया गया क़दम बताया है।
सरकार बर्खास्त करने और आपातकाल की घोषणा को हमास ने ख़ारिज कर दिया है
हमास के प्रवक्ता समी अबू ज़ुहरी का कहना था,'' व्यावहारिक रूप से ये फ़ैसले बेमतलब हैं। प्रधानमंत्री हानिया सरकार के मुखिया रहेंगे, भले ही राष्ट्रपति ने इसे भंग कर दिया हो. ''
लेकिन अब्बास के सहयोगियों का कहना है कि उन्होंने हमास के नेता और फ़लस्तीनी प्रधानमंत्री इस्माइल हानिया को बर्ख़ास्त कर दिया है और अब वे एक निष्पक्ष शख्स को प्रधानमंत्री नियुक्त करने जा रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि प्रतिद्वंद्वी गुटों फ़तह और हमास ने मिलकर मार्च में साझा सरकार का गठन इस उम्मीद के साथ किया था कि इससे दोनों के बीच तनाव कम होगा लेकिन ऐसा हुआ नहीं।
अमरीकी समर्थन
फ़लस्तीनी राष्ट्रपति के एक सहयोगी ने कहा कि जब तक चुनाव के अनुरुप परिस्थितियाँ नहीं बन जातीं प्रशासन राष्ट्रपति संभालेंगे।
उधर अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलिज़ा राइस ने राष्ट्रपति अब्बास का समर्थन करते हुए कहा है कि उन्होंने वही किया जो न्यायोचित था।
उन्होंने कहा, "हम फ़लस्तीनी जनता को इस मुसीबत से निकालने और बेहतर भविष्य देने की अब्बास की कोशिशों का पूरा समर्थन करते हैं। "
लेकिन इस संकट के चलते यूरोपीय संघ ने गज़ा को भेजी जाने वाली सारी मानवीय सहायता स्थगित कर दी है।
Thursday, June 14, 2007
फ़लस्तीनी गुटों के बीच 'संघर्षविराम'
दोनों गुटों के नेताओं ने एक संयुक्त बयान में संघर्ष रोकने की बात कही है ।
पिछले दिनों हुई हिंसा में 80 से अधिक लोग मारे गए हैं ।
फ़लस्तीनी उपप्रधानमंत्री आज़म अल-अहमद ने कहा है कि हमास ने जो शर्तें रखी गई थीं, उसके आधार पर यह संघर्षविराम हुआ है ।
लेकिन उधर हमास के सैन्य शाखा ने कहा है कि उन्हें हथियार रखने के कोई आदेश नहीं मिले हैं और गज़ा में झड़पें जारी हैं। फ़तह के नेता, फ़लस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास और हमास नेता, फ़लस्तीनी प्रधानमंत्री इस्माइल हानिया ने एक संयुक्त बयान जारी किया है, जिसका प्रसारण फ़लस्तीनी टेलीविज़न पर किया गया है। इसमें सभी पक्षों की ओर से संघर्षविराम की घोषणा की गई है ।
एक वरिष्ठ हमास नेता ने बताया कि दोनों नेताओं के बीच टेलीफ़ोन पर चर्चा हुई है ।
अधिकारियों का कहना है कि हमास ने नौ शर्तें रखी थीं जिसमें एक यह था कि फ़लस्तीनी सुरक्षाबलों पर नियंत्रण के लिए एक मंत्री की नियुक्ति की जा और दूसरा यह कि फ़सल्तीनी सीमा की सुरक्षा में फ़तह के साथ हमास को भी शामिल किया जाए ।
उधर फ़तह के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि हालांकि ये शर्तें सिद्धांत रुप से स्वीकार कर ली गई हैं लेकिन दोनो पक्षों के बीच और बातचीत की ज़रूरत है ।
लेकिन उल्लेखनीय है कि प्रतिद्वंद्वी गुटों फ़तह और हमास ने मिलकर मार्च में साझा सरकार का गठन इस उम्मीद के साथ किया था कि इससे दोनों के बीच तनाव कम होगा लेकिन ऐसा होता हुआ दिख नहीं रहा है ।
हिंसा
उधर संघर्षविराम की घोषणा होते तक भीषण हिंसा जारी थी ।
हमास का दावा है कि उसने फ़तह के बंदूकधारियों को उत्तरी गज़ा से खदेड़ दिया है और अब दक्षिणी गज़ा के भी अधिकांश हिस्सों में उनका नियंत्रण हो गया है ।
हिंसा की घटनाओं में सिर्फ़ बुधवार को ही 17 लोगों के मारे जाने की ख़बरें हैं ।
शनिवार से चल रही हिंसा में 80 से अधिक लोग मारे गए हैं। हिंसा की शुरुआत शनिवार को ही हुई थी जब दोनों गुटों के बीच गज़ा की सड़कों पर और मकानों की छतों से भारी गोलाबारी हुई थी। दोनों ने एक दूसरे पर रॉकेट से गोले दागे थे और मशीनगनों से गोलियाँ बरसाईं थीं ।
हालांकि सोमवार को एक संघर्षविराम हुआ था लेकिन वह तुरंत टूट भी गया था ।
संवाददाताओ का मानना है कि ऐसा लगता है कि इस संघर्ष में हमास जीतता हुआ दिख रहा है क्योंकि गज़ा के ज़्यादातर हिस्सों में उसका नियंत्रण हो गया दिखता है ।
शांति-सैनिकों का प्रस्ताव
इस बीच हिंसा पश्चिमी तट पर भी फैल गया है।
फ़तह ने कहा है कि यदि हमास गज़ा में हमले नहीं रोकता है तो वे 'ख़ून के बदले ख़ून' की नीति अपनाएँगे ।
इस बीच संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने सुझाव दिया है कि गज़ा में अंतरराष्ट्रीय शांति सेना की तैनाती की जा सकती है ।
बान की मून का कहना है कि शांति सेना का सुझाव फ़लस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास और इसराइली प्रधानमंत्री एहुद ओल्मर्ट ने दिया है ।
बुधवार को संयुक्त राष्ट्र राहत एजेंसी के दो कार्यकर्ता हिंसा में मारे गए हैं और इसके बाद संयुक्त राष्ट्र ने गज़ा में राहतकार्य स्थगित करने का फ़ैसला किया है ।
Wednesday, June 13, 2007
धोनी दुनिया के चौथे शीर्ष बल्लेबाज़
दूसरी ओर उन्हें आयरलैंड और इंग्लैंड के वनडे मैचों के लिए भारतीय टीम का उपकप्तान घोषित किया गया है ।
उन्होंने एफ़्रो-एशिया कप के चेन्नई में रविवार को हुए तीसरे और अंतिम वनडे मैच में नाबाद 139 रन की पारी खेली थी ।
यह किसी भी सातवें नंबर के बल्लेबाज का सर्वाधिक एक दिवसीय स्कोर है ।
इंग्लैंड के केविन पीटरसन शीर्ष स्थान पर हैं जबकि ऑस्ट्रेलिया के कप्तान रिकी पोंटिंग दूसरे नंबर पर और ऑस्ट्रेलिया के ही माइकल हसी तीसरे स्थान पर हैं ।
आईसीसी टेस्ट क्रिकेट रैंकिंग में भारतीय कप्तान राहुल द्रविड़ आठवें स्थान पर हैं और लेग स्पिनर अनिल कुंबले गेंदबाजों में तीसरे स्थान पर हैं ।
आस्ट्रेलिया के आलराउंडर एंड्रयू सायमंड्स शीर्ष दस बल्लेबाजों में लौट आए हैं जबकि श्रीलंका के सनथ जयसूर्या एफ्रो-एशिया कप में फीके प्रदर्शन के कारण 13वें स्थान पर पहुँच गए हैं।इंग्लैंड के बाएं हाथ के स्पिनर मोंटी पनेसर वेस्टइंडीज के ख़िलाफ़ तीसरे टेस्ट में शानदार प्रदर्शन से 14 स्थानों की छलांग लगाकर 12 वें स्थान पर पहुंच गए हैं।
पनेसर ने तीसरे टेस्ट में कुल दस विकेट लेकर इंग्लैंड को वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ जीत दिला दी थी ।
गेंदबाजों में शीर्ष पर श्रीलंका के मुथैया मुरलीधरन हैं. दक्षिण अफ्रीका के मखाया एंटिनी दूसरे स्थान पर हैं.
भारत के अनिल कुंबले और दक्षिण अफ़्रीका के पोलाक संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर हैं.
Tuesday, June 12, 2007
हमास-फ़तह गुटों में फिर झड़पें, 14 मरे
सोमवार को फ़लस्तीनी प्रधानमंत्री इस्माइल हानिया के निवास पर हुए हमले में दो लोगों की मौत हुई थी ।
इस हमले के बाद चरमपंथी गुटों ने युद्धविराम की घोषणा की थी लेकिन दोनों ओर से झड़पें नहीं रुकीं ।
प्रधानमंत्री हानिया के हमास और प्रतिद्वंद्वी गुट फ़तह के बीच पिछले मई के मध्य से शुरु हुई झड़पों में कम से कम 50 लोग मारे जा चुके हैं ।
इस बीच दोनों गुटों के बीच कई बार युद्धविराम हो चुका है लेकिन हर बार यह समझौता टूट जाता है ।
अस्पताल में गोलीबारी
फ़तह के तीन समर्थक एक अस्पताल में हुई गोलीबारी में मारे गए।
जबकि गज़ा शहर में एक परिवार के तीन सदस्य मारे गए, जिनमें से एक हमास का समर्थक था ।
फ़तह से जुड़े अल-अक़्शा 'शहीदी जत्थे' के एक वरिष्ठ चरमपंथी सदस्य की उत्तर गज़ा पट्टी में मौत हो गई ।
फ़तह का कहना है कि उनका एक वरिष्ठ सदस्य जमाल अबू अल-जेडियन हमलावरों के निशाने पर था । उनका कहना है कि हमलावरों ने अस्पताल के बिस्तर पर उन पर 41 गोलियाँ दोगीं। बाद में उनका भाई मृत पाया गया ।
रॉयटर समाचार एजेंसी ने बेस हैनन शहर के अस्पताल के डॉक्टर के हवाले से कहा है, "हर कोई एक दूसरे पर गोलियाँ बरसा रहा था।"
इससे पहले सोमवार को बंदूकधारियों ने एक सरकारी इमारत पर गोलीबारी की जहाँ मंत्रिमंडल की बैठक चल रही थी ।
इस हमले में कोई घायल तो नहीं हुआ लेकिन फ़लस्तीनी प्रधानमंत्री इस्माइल हानिया को मंत्रिमंडल की बैठक स्थगित करनी पड़ी ।
Monday, June 11, 2007
प्रत्यर्पण में विफ़लता के लिए केंद्र ज़िम्मेदार
गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के सम्मान में आयोजित एक समारोह में आडवाणी ने कहा, "पूरे प्रकरण पर मैं अर्जेंटीना सरकार या अदालत पर आरोप मंढना नहीं चाहता। क्वात्रोकी के प्रत्यर्पण में विफ़लता के लिए तो मनमोहन सिंह की यूपीए सरकार ज़िम्मेदार है । "
विपक्ष और भारतयी जनता पार्टी (भाजपा) के नेता आडवाणी का कहना था कि यूपीए सरकार ने पहले अर्जेंटीना की अदालत को बताया कि क्वात्रोकी के ख़िलाफ़ कोई सबूत नहीं है जिसके बाद उनके बैंक खातों को फिर से खोल दिया गया।
उन्होंने कहा कि क्वात्रोकी की प्रत्यर्पण याचिका ख़ारिज किए जाने के पीछे यूपीए सरकार के इस क़दम की मुख्य भूमिका हो सकती है ।
आडवाणी का कहना था कि दो माह पहले प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक मामला दर्ज कराया था कि एमडी राव नाम का एक व्यक्ति ख़ुद को प्रधानमंत्री का सलाहकार बताकर लोगों से पैसे वसूल रहा है, लेकिन बाद में पता चला कि उनका संबंध क्वात्रोकी के बेटे से है ।
गौरतलब है कि अर्जेंटीना की अदालत ने क्वात्रोकी को भारत प्रत्यर्पित करने से इनकार कर दिया था । इस मामले में अदालत 13 जून को विस्तृत फ़ैसला देने वाली है ।
दूसरी ओर क्वात्रोकी के प्रत्यर्पण की कोशिश कर रही केंद्रीय जाँच एजेंसी (सीबीआई) ने कहा है कि वो अदालत के फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील करेंगे ।
यह मामला भारत में राजनीतिक रुप से बेहद गंभीर माना जाता है और पिछले दिनों क्वात्रोकी की गिरफ़्तारी के बाद भी सीबीआई की ओर से अदालत को इसकी जानकारी न देने पर कई सवाल उठाए गए थे ।
वैसे क्वात्रोकी लगातार कहते रहे हैं कि बोफ़ोर्स सौदे में उनका कोई हाथ नहीं है और सीबीआई उन्हें बिना वजह परेशान कर रही है ।
Saturday, June 9, 2007
भारत में एड्स पीड़ितों की संख्या पर संदेह
संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि भारत में एचआईवी और एड्स से पीड़ित लोगों की संख्या 57 लाख है जो दुनिया में किसी भी देश में सबसे ज़्यादा है ।
लेकिन एड्स विरोधी संस्था 'आव्हान' के निदेशक अशोक अलेक्ज़ेडर का कहना है कि ताज़ा आँकड़ों में यह संख्या बहुत कम हो सकती है ।
सूचना मिली है कि यह संख्या 30 लाख तक हो सकती है ।
उल्लेखनीय है कि 'आव्हान' भारत में 'बिल एंड मेलिंडा फाउंडेशन' की इकाई है ।
बेहतर विधि
विशेषज्ञों का कहना है कि 57 लाख और 30 लाख का अंतर तो सिर्फ़ एचआईवी संक्रमित लोगों का हिसाब लगाने के तरीक़े में हुई ग़लती से ही आ सकता है ।
यह बात ऐसे समय में सामने आ रही है जब भारत में एड्स और एचआईवी के ख़िलाफ़ नया अभियान छेड़ने की तैयारियाँ की जा रही हैं।
समाचार एजेंसी एपी ने 'आव्हान' संस्था के निदेशक अशोक अलेक्ज़ेंडर के हवाले से कहा है, "जो आँकड़े हमें मिले हैं वे कम हैं और शायद बहुत कम हैं । "
अशोक अलेक्ज़ेंडर का कहना है कि नए आँकड़े ज़्यादा विश्वसनीय होंगे क्योंकि वे प्रसव केंद्रों, संक्रमण का सबसे अधिक ख़तरा झेलने वाले समूहों और सरकार के नेशनल फ़ैमिली हेल्थ सर्वे से हासिल किए गए हैं ।
उनका कहना है कि यह आँकड़ा एकत्रित करने का ज़्यादा अच्छा तरीक़ा है जबकि पिछली बार सिर्फ़ प्रसव केंद्रों या प्रसूति गृहों के आँकड़ों को आधार बनाया गया था ।
उन्होंने आँकड़ों के बारे में कोई अनुमान लगाने से इनकार करते हुए कहा कि अभी भी आँकड़ों का आकलन किया जा रहा है और अंतिम आँकड़ा मिलने में अभी कुछ हफ़्तों का समय लगेगा ।
चिंता
हांलांकि पिछले ही हफ़्ते भारत के स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा था कि वे बिहार और उत्तर प्रदेश में एचआईवी या एड्स से पीड़ित गर्भवती महिलाओं की संख्या में हुई बढ़ोत्तरी से चिंतित हैं ।
ये दोनों ही देश के सबसे पिछड़े राज्यों में से एक हैं ।
अधिकारियों का कहना है कि जो लोग काम की तलाश में राज्य से बाहर जाते हैं वही राज्य में संक्रमण के साथ लौटते हैं ।
अधिकारियों का कहना है कि यदि राज्य की सरकारें इसे लेकर गंभीरता नहीं बरतती हैं तो एड्स महामारी का रुप ले सकती है ।
Thursday, June 7, 2007
आरक्षण आंदोलन पर फिर विवाद
गूजर नेता कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के बीच बैठक की तैयारी हो रही है।
साथ ही गूजरों ने शुक्रवार को महापंचायत बुलाई है जिसमें राज्य सरकार के साथ समझौते को लेकर उपजी भ्रम की स्थिति को दूर करने की कोशिश की जाएगी ।
गूजर आरक्षण संघर्ष समिति के प्रवक्ता रुप सिंह ने बताया कि मुक़दमा दर्ज किए जाने से उन्हें गहरा धक्का पहुँचा है ।
राजस्थान पुलिस ने गूजरों के नेता कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला, रुप सिंह और अन्य नेताओं के ख़िलाफ़ हत्या, आगजनी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने के मुक़दमे दर्ज किए हैं ।
अनुसूचित जनजाति में शामिल किए जाने की माँग को लेकर गूजरों के आंदोलन के दौरान हुई हिंसा में 23 लोग मारे गए थे ।
राजस्थान के अलावा आस-पास के राज्यों में भी आंदोलन का असर दिखा और प्रदर्शन हुए जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराज़गी जताई थी ।
बैठक
रुप सिंह ने बताया कि बैंसला कहाँ पर हैं, यह पता नहीं है और उनसे संपर्क साधने की कोशिश की जा रही है ।
उन्होंने कहा कि बैंसला और मुख्यमंत्री के बीच गुरुवार को ही किसी समय मुलाक़ात होगी ।
रुप सिंह का कहना है कि गूजर समाज में राज्य सरकार के साथ हुए समझौते पर भ्रम की स्थिति है जिसे दूर करना ज़रूरी है ।
उनका कहना था, "अभी हमारी प्राथमिकता हर हाल में शांति कायम रखना है। इसके लिए बैंसला और मुख्यमंत्री के बीच बातचीत ज़रुरी है । "
मुक़दमे
राजस्थान पुलिस ने आंदोलन के दौरान हुई हिंसक वारदातों के मामलों में शीर्ष गूजर नेतृत्व समेत 200 लोगों के ख़िलाफ़ मुक़दमे दर्ज किए हैं और इतनी ही संख्या में गिरफ़्तारियाँ हुई हैं ।
करौली ज़िले में हिंसक आंदोलन के पहले दिन यानी 29 मई को उग्र भीड़ ने एक सिपाही की हत्या कर दी थी। इसी मामले में बैंसला को अभियुक्त बनाया गया है ।
करौली के पुलिस अधीक्षक प्रफ़ुल्ल कुमार ने कहा कि आंदोलन के दौरान भीड़ पर नियंत्रण की ज़िम्मेदारी नेताओं की होती है, इसलिए स्वाभाविक है कि उनके ख़िलाफ़ मुक़दमे दर्ज किए जाएँ.
Wednesday, June 6, 2007
जी-8 के पहले अमरीका-रुस में खींचतान
जर्मनी के रास्ते में चेक गणराज्य में रुके अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्लू बुश ने रूस की निंदा करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक सुधारों के लिए रूस ने जो वादे किए थे, वह उनसे हट गया है।
लेकिन रूस ने तत्काल इसका खंडन किया है।
इससे पहले राष्ट्रपति बुश ने कहा था कि रूस को अमरीका की मिसाइल रक्षा प्रणाली से डरने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि रूस अमरीका का दुश्मन नहीं है।
ग़ौरतलब है कि अमरीका की मिसाइल रक्षा प्रणाली का कुछ हिस्सा यूरोप में भी स्थापित किया जा रहा है.
राष्ट्रपति बुश ने कहा कि रूस और चीन के साथ अमरीका के रिश्ते ज़रूर हैं लेकिन वह इन दोनों देशों से असहमत है।
उन्होंने कहा, "रूस में लोकतांत्रिक विकास को लेकर समस्या रही है और लोगों को अधिकार देने के जो वादे किए गए थे वह प्रक्रिया पटरी से उतर गई है।"
इसी तरह चीन के बारे में उन्होंने कहा कि वे चीन की इस नीति से सहमत नहीं हैं कि देश की अर्थव्यवस्था तो खुलती रहे लेकिन राजनीतिक व्यवस्था न खुले।
उधर रूस ने अमरीकी राष्ट्रपति के आरोपों को तुरंत नकार दिया है।
क्रेमलिन के प्रवक्ता देमित्रि पेस्कोव ने कहा कि रूस एक लोकतांत्रिक देश है और वह उन्ही लोकतांत्रिक मूल्यों का पालन करता है जो दुनिया करती है या जो यूरोपीय मूल्य हैं।
दुश्मन नहीं
इससे पहले राष्ट्रपति बुश ने कहा है कि शीत युद्ध काफ़ी पहले ही समाप्त हो चुका है और अब अमरीका और रूस में कोई दुश्मनी नहीं है।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने धमकी दी थी कि अगर अमरीका की मिसाइल रक्षा प्रणाली स्थापित की जाती है तो वह अपने हथियारों का रुख़ यूरोप की तरफ़ कर देंगे। उनके इस बयान को शीत युद्ध के दौरान अक्सर होने वाली बयानबाज़ी का एक नमूना माना जा रहा है।
अमरीकी प्रशासन ने एक नए शीतयुद्ध के हालात से तो इनकार किया है लेकिन रूस की तरफ़ से इस तरह की भाषा का इस्तेमाल उसी दौर की चिंताओं की याद दिलाता है।
सहयोग का आहवान
चैक गणराज्य के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के साथ एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में बुश ने कहा कि नई प्रणाली शुद्ध रूप से एक रक्षात्मक उपाय है जिसका निशाना रूस नहीं बल्कि असल ख़तरें हैं।
अमरीका पोलैंड में ऐसे रॉकेट लगाना चाहता है जो जासूसी कर सकें और चैक गणराज्य में एक राडार अड्डा बनाना चाहता है। अमरीका का कहना है कि ये हथियार कुछ संभावित ख़तरा पैदा करने वाले देशों के ख़िलाफ़ हैं जिनमें ईरान और उत्तर कोरिया जैसे देश शामिल हैं।
राष्ट्रपति बुश ने कहा कि वह रूस को इस प्रणाली में सहयोग के लिए आमंत्रित करेंगे। बुश बुधवार को जर्मनी में जी-8 सम्मेलन के दौरान संभवतः राष्ट्रपति पुतिन से मुलाक़ात करेंगे।
जॉर्ज बुश ने कहा, "रूस हमारा दुश्मन नहीं है। मैं राष्ट्रपति पुतिन के साथ बातचीत करने के लिए उत्सुक हूँ। मेरा संदेश होगा कि रूस को मिसाइल रक्षा प्रणाली से डरने की ज़रूरत नहीं है।"
बुश ने कहा, "क्यों ना मिसाइल रक्षा प्रणाली में आप भी सहयोग करें। क्यों ना आप भी अमरीका का साथ इस प्रणाली में हाथ बँटाएं। आप अपने सैनिक अधिकारी और वैज्ञानिक भेजें - यह देखने के लिए कि यह प्रणाली किस तरह काम करती है।"
लेकिन रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लैफ़रोफ़ ने इन विचारों को ख़ारिज कर दिया है कि ईरान या उत्तर कोरिया से अमरीका को कोई ख़तरा है।
उन्होंने कहा, "ज़रूरत इस बात की है कि हम वास्तविक ख़तरों का मुक़ाबला करने के लिए एकजुट हों न कि सिर्फ़ काल्पनिक ख़तरों की बात करें। और रूस इस मक़सद में साथ देने के लिए तैयार है।"
रविवार को राष्ट्रपति पुतिन ने भी कहा था कि अमरीका को ईरान से कोई ख़तरा नहीं है और उन्होंने संकेत दिया था कि अमरीका की इस मिसाइल रक्षा प्रणाली का निशाना रूस है।
पुतिन ने कहा था, "अगर यूरोपीय क्षेत्र में अमरीकी हथियार बढ़ते हैं तो हमें यूरोप में नए निशाने साधने होंगे।"
Tuesday, June 5, 2007
गोवा विधानसभा के लिए मतगणना शुरू
भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियों के नेता दावा कर रहे हैं कि वे अगली सरकार बनाने जा रहे हैं ।
भाजपा के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर पणिक्कर ने समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में कहा, '' हम कांग्रेस को पीछे छोड़ देंगे और बहुमत हासिल करने जा रहे हैं । ''
पणिक्कर ने दावा किया कि 40 सदस्यों वाली विधानसभा में भाजपा 21 सीटें हासिल करने जा रही है । इसके पहले उन्होंने कहा था कि यदि उनकी पार्टी को बहुमत हासिल नहीं हुआ तो वे विपक्ष में बैठना पसंद करेंगे ।
विरोधी दावे
दूसरी ओर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और शांताराम नायक का कहना था कि उनकी पार्टी को स्पष्ट बहुमत हासिल होगा।
एक प्रमुख क्षेत्रीय पार्टी 'सेव गोवा फ्रंट' के नेता चर्चिल अलमाओ का कहना है,'' गोवा में कोई भी दल हमारे समर्थन के बिना सरकार नहीं बना पाएगा ।''
उनका दावा था कि उनकी पार्टी छह सीटों पर जीत हासिल करेगी ।
इस बार के चुनाव में 202 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इनमें 15 महिला प्रत्याशी हैं ।
हालांकि चुनाव आयोग की सख़्ती और कड़ाई से नियमों का पालन कराए जाने के कारण इस बार चुनाव प्रचार फीका रहा ।
Monday, June 4, 2007
गूजर नेताओं के साथ अहम बातचीत
दूसरी ओर कुछ गूजर संगठनों ने सोमवार को दिल्ली बंद का आह्वान किया है ।
गूजर महापंचायत की बैठक में सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के प्रवेश स्थानों को सील करने का फ़ैसला किया गया ।
इसको देखते हुए दिल्ली और इसकी सीमाओं पर सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं ।
इसके पहले गूजर समुदायों के लोगों ने रविवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर राजस्थान के गूजरों के साथ सहानुभूति प्रकट की ।
इधर कांग्रेस के दो गूजर सांसदों सचिन पायलट और अवतार सिंह भडाना के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह से मिला ।
इन लोगों ने भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व से राजस्थान के मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की माँग की ।
राजनाथ सिंह से मिलने के बाद अवतार सिंह भडाना ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, "राजनाथ सिंह ने इस बात का आश्वासन दिया है कि जो कुछ भी राजस्थान में हो रहा है, उसे वे गंभीरता से लेंगे।"
लेकिन अवतार सिंह का ये भी कहना था कि अगर हालात नहीं सुधरे तो वे केंद्र सरकार से राज्य सरकार को बर्ख़ास्त करने की माँग करेंगे ।
बातचीत
इधर राजस्थान सरकार और गूजर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला की सोमवार को अहम बातचीत होने जा रही है ।
कई दिनों के बाद गूजर नेता बैंसला बातचीत के लिए तैयार हुए हैं। हालांकि इसके पहले गूजर नेताओं के साथ चार दौर की बातचीत में कोई नतीजा नहीं निकला ।
राजस्थान में गूजरों को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में रखा गया है लेकिन वे अनुसूचित जनजाति के तहत मिलने वाली आरक्षण सुविधा की मांग कर रहे हैं ।
दूसरी ओर राजस्थान का मीणा समुदाय इसका विरोध कर रहा है। इस पर दोनों समुदायों के बीच हिंसक झड़पें हुईं हैं ।
हालांकि गूजर पंचायत की अनुमति के बाद 29 मई को हुई हिंसा में मारे गए छह लोगों का रविवार को अंतिम संस्कार कर दिया गया ।
लेकिन जयपुर-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग अब भी अवरुद्ध है और आंदोलनकारी किसी भी वाहन को आने-जाने नहीं दे रहे हैं ।
उनका कहना है कि जब तक इस इलाक़े में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया नहीं आती हैं, वे रास्ता जाम रखेंगे। सड़कों पर सैकड़ों वाहन फँसे पड़े हैं ।
ग़ौरतलब है कि पिछले दिनों इस मांग ने हिंसक रूप ले लिया था और अभी तक हिंसा में 23 लोगों की मौत हो चुकी है.
Saturday, June 2, 2007
राजस्थान: वसुंधरा वार्ता के लिए तैयार
इससे पहले राज्य सरकार की ओर से गठित चार मंत्रियों की समिति और गूजर प्रतिनिधियों के बीच तीन दौर की वार्ता विफल रही ।
गूजर नेता आंदोलन के शुरु से ही माँग करते रहे हैं कि मुख्यमंत्री ख़ुद उनसे बात करें ।
इस बीच पाँच दिनों से जारी हिंसा के बाद राजस्थान में हालात थोड़े सुधरे हैं लेकिन तनाव बरकरार है ।
दूसरे राज्यों से राजस्थान आए लोगों को उनके गंतव्य तक पहुँचाने की कोशिश की जा रही है ।
इसी कड़ी में जयपुर से 16 बसें भारी सुरक्षा इंतज़ामों के बीच दिल्ली के लिए रवाना की गई है ।
हालाँकि प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों पर यातायात अभी भी सामान्य नहीं हुआ है और रेल सेवा भी बाधित है ।
उम्मीद की किरण
मुख्यमंत्री और गूजर नेताओं के बीच होने वाली सीधी बातचीत से लोगों में समस्या के समाधान के प्रति उम्मीद की किरण जगी है ।
हालाँकि अंदोलनरत गूजर नेताओं को मनाने के लिए राज्य सरकार क्या फ़ॉर्मूला पेश करेगी, इसकी कोई जानकारी नहीं है।
इसे वसुंधरा राजे की राजनीतिक कौशल का इम्तहान भी माना जा रहा है ।
राजस्थान में गूजरों को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में रखा गया है लेकिन वो अनुसूचित जनजाति के तहत मिलने वाली आरक्षण सुविधा की माँग कर रहे हैं ।
इस बीच प्रशासन अपनी तरफ़ से किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है ।
केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की 33 कंपनियाँ और सेना के जवान सभी संवेदनशील इलाक़ों में तैनात हैं ।
मंगलवार को गूजरों के आंदोलन ने हिंसक रूख़ अख़्तियार कर लिया था और अब तक इस हिंसा में 23 लोग मारे जा चुके हैं ।
जानकारों का कहना है कि स्थितियाँ संभाल पाने में राज्य सरकार जिस तरह से नाकाम रही है उससे मुख्यमंत्री की कुर्सी संकट में आ सकती हैं ।
राजस्थान की राज्यपाल प्रतिभा पाटिल ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि उनकी ओऱ से राज्य की शांति व्यवस्था पर एक रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेज दी गई है ।
Friday, June 1, 2007
राजस्थान में तनाव जारी, सरकार में मतभेद
अब इस बात की चिंता जताई जा रही है कि यह मामला अनुसूचित जनजाति में शामिल मीणा समुदाय और गूजरों के बीच सामुदायिक संघर्ष का रुप ले सकता है ।
राज्य में तनाव जारी है। गूजर नेताओं और राज्य सरकार के बीच आज फिर बातचीत होगी। गुरुवार को दूसरे दौर की बातचीत बेनतीज़ा ख़त्म हो गई थी ।
इससे पहले दौसा में मंगलवार को गूजर समुदाय और पुलिस के बीच संघर्ष के बाद फायरिंग में 14 लोगों की मौत हो गई थी ।
सरकार में मतभेद
लेकिन वसुंधरा राजे सरकार भी इस मामले पर एकमत नज़र नहीं आ रही है। गूजर समुदाय और मीणा समुदाय के मंत्री अलग-अलग भाषा बोल रहे हैं ।
उनका कहना है," इस मामले पर मीणा समुदाय के सभी विधायक एकमत हैं। हम मीणाओं को प्राप्त आरक्षण के साथ किसी तरह की छेड़खानी बर्दाश्त नहीं करेंगे । "
तो दूसरी ओर सरकार में गूजर समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले कालूलाल गूजर का कहना है कि राज्य सरकार को इस माँग पर विचार करना चाहिए ।
अब तक अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल गूजरों का कहना है कि उन्हें इस वर्ग में रहकर आरक्षण का लाभ नहीं मिल रहा है और अब उन्हें अनुसूचित जनजाति में शामिल किया जाना चाहिए ।
मीणा समुदाय के प्रतिनिधियों की दौसा में लगातार बैठकें हो रही हैं और वो लामबंद हो रहे हैं। उन्होंने कहा है कि अगर राष्ट्रीय राजमार्गों पर यातायात बहाल नहीं हुआ तो वे ख़ुद कार्रवाई करेंगे ।
राज्य सरकार ने भरतपुर के हिंसाग्रस्त बयाना और सवाई माधोपुर में सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने की कोशिश करने वालों को देखते ही गोली मारने के आदेश दिए हैं ।
गूजर नेता विक्रम सिंह का कहना है कि राज्य सरकार की नीति स्पष्ट नहीं है और वो इस मामले को तूल दे रही है ।
उन्होंने कहा, "अगर राज्य सरकार की नीति स्पष्ट है तो वो गूजरों को एसटी का दर्जा देने के लिए केंद्र सरकार को चिट्ठी लिखे। सरकार जानबूझ कर देरी कर रही है ताकि गूजर-मीणा लड़ें । "
