Saturday, June 9, 2007

भारत में एड्स पीड़ितों की संख्या पर संदेह

एक प्रमुख एड्स कार्यकर्ता का कहना है कि भारत में एचआईवी और एड्स पीड़ितों की संख्या बढ़ा-चढ़ाकर बताई गई है ।


संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि भारत में एचआईवी और एड्स से पीड़ित लोगों की संख्या 57 लाख है जो दुनिया में किसी भी देश में सबसे ज़्यादा है ।
लेकिन एड्स विरोधी संस्था 'आव्हान' के निदेशक अशोक अलेक्ज़ेडर का कहना है कि ताज़ा आँकड़ों में यह संख्या बहुत कम हो सकती है ।
सूचना मिली है कि यह संख्या 30 लाख तक हो सकती है ।
उल्लेखनीय है कि 'आव्हान' भारत में 'बिल एंड मेलिंडा फाउंडेशन' की इकाई है ।


बेहतर विधि

विशेषज्ञों का कहना है कि 57 लाख और 30 लाख का अंतर तो सिर्फ़ एचआईवी संक्रमित लोगों का हिसाब लगाने के तरीक़े में हुई ग़लती से ही आ सकता है ।
यह बात ऐसे समय में सामने आ रही है जब भारत में एड्स और एचआईवी के ख़िलाफ़ नया अभियान छेड़ने की तैयारियाँ की जा रही हैं।
इसके लिए सरकार और अंतरराष्ट्रीय दानदाता ने धनराशि बढ़ा दी है ।
समाचार एजेंसी एपी ने 'आव्हान' संस्था के निदेशक अशोक अलेक्ज़ेंडर के हवाले से कहा है, "जो आँकड़े हमें मिले हैं वे कम हैं और शायद बहुत कम हैं । "
अशोक अलेक्ज़ेंडर का कहना है कि नए आँकड़े ज़्यादा विश्वसनीय होंगे क्योंकि वे प्रसव केंद्रों, संक्रमण का सबसे अधिक ख़तरा झेलने वाले समूहों और सरकार के नेशनल फ़ैमिली हेल्थ सर्वे से हासिल किए गए हैं ।
उनका कहना है कि यह आँकड़ा एकत्रित करने का ज़्यादा अच्छा तरीक़ा है जबकि पिछली बार सिर्फ़ प्रसव केंद्रों या प्रसूति गृहों के आँकड़ों को आधार बनाया गया था ।
उन्होंने आँकड़ों के बारे में कोई अनुमान लगाने से इनकार करते हुए कहा कि अभी भी आँकड़ों का आकलन किया जा रहा है और अंतिम आँकड़ा मिलने में अभी कुछ हफ़्तों का समय लगेगा ।


चिंता

हांलांकि पिछले ही हफ़्ते भारत के स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा था कि वे बिहार और उत्तर प्रदेश में एचआईवी या एड्स से पीड़ित गर्भवती महिलाओं की संख्या में हुई बढ़ोत्तरी से चिंतित हैं ।
ये दोनों ही देश के सबसे पिछड़े राज्यों में से एक हैं ।
अधिकारियों का कहना है कि जो लोग काम की तलाश में राज्य से बाहर जाते हैं वही राज्य में संक्रमण के साथ लौटते हैं ।
अधिकारियों का कहना है कि यदि राज्य की सरकारें इसे लेकर गंभीरता नहीं बरतती हैं तो एड्स महामारी का रुप ले सकती है ।

Thursday, June 7, 2007

आरक्षण आंदोलन पर फिर विवाद

राजस्थान में गूजर नेताओं के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज करने से फिर विवाद उठ खड़ा हुआ है।


गूजर नेता कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के बीच बैठक की तैयारी हो रही है।
साथ ही गूजरों ने शुक्रवार को महापंचायत बुलाई है जिसमें राज्य सरकार के साथ समझौते को लेकर उपजी भ्रम की स्थिति को दूर करने की कोशिश की जाएगी ।
गूजर आरक्षण संघर्ष समिति के प्रवक्ता रुप सिंह ने बताया कि मुक़दमा दर्ज किए जाने से उन्हें गहरा धक्का पहुँचा है ।
राजस्थान पुलिस ने गूजरों के नेता कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला, रुप सिंह और अन्य नेताओं के ख़िलाफ़ हत्या, आगजनी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने के मुक़दमे दर्ज किए हैं ।
अनुसूचित जनजाति में शामिल किए जाने की माँग को लेकर गूजरों के आंदोलन के दौरान हुई हिंसा में 23 लोग मारे गए थे ।
राजस्थान के अलावा आस-पास के राज्यों में भी आंदोलन का असर दिखा और प्रदर्शन हुए जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराज़गी जताई थी ।


बैठक

रुप सिंह ने बताया कि बैंसला कहाँ पर हैं, यह पता नहीं है और उनसे संपर्क साधने की कोशिश की जा रही है ।
उन्होंने कहा कि बैंसला और मुख्यमंत्री के बीच गुरुवार को ही किसी समय मुलाक़ात होगी ।
रुप सिंह का कहना है कि गूजर समाज में राज्य सरकार के साथ हुए समझौते पर भ्रम की स्थिति है जिसे दूर करना ज़रूरी है ।
उनका कहना था, "अभी हमारी प्राथमिकता हर हाल में शांति कायम रखना है। इसके लिए बैंसला और मुख्यमंत्री के बीच बातचीत ज़रुरी है । "


मुक़दमे

राजस्थान पुलिस ने आंदोलन के दौरान हुई हिंसक वारदातों के मामलों में शीर्ष गूजर नेतृत्व समेत 200 लोगों के ख़िलाफ़ मुक़दमे दर्ज किए हैं और इतनी ही संख्या में गिरफ़्तारियाँ हुई हैं ।
करौली ज़िले में हिंसक आंदोलन के पहले दिन यानी 29 मई को उग्र भीड़ ने एक सिपाही की हत्या कर दी थी। इसी मामले में बैंसला को अभियुक्त बनाया गया है ।
करौली के पुलिस अधीक्षक प्रफ़ुल्ल कुमार ने कहा कि आंदोलन के दौरान भीड़ पर नियंत्रण की ज़िम्मेदारी नेताओं की होती है, इसलिए स्वाभाविक है कि उनके ख़िलाफ़ मुक़दमे दर्ज किए जाएँ ।

Wednesday, June 6, 2007

जी-8 के पहले अमरीका-रुस में खींचतान

जी-8 के पहले अमरीका-रुस में खींचतान

जर्मनी में होने जा रहे जी-8 सम्मेलन के एक दिन पहले अमरीका-रूस में खींचतान का माहौल दिख रहा है।

जर्मनी के रास्ते में चेक गणराज्य में रुके अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्लू बुश ने रूस की निंदा करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक सुधारों के लिए रूस ने जो वादे किए थे, वह उनसे हट गया है।

लेकिन रूस ने तत्काल इसका खंडन किया है।

इससे पहले राष्ट्रपति बुश ने कहा था कि रूस को अमरीका की मिसाइल रक्षा प्रणाली से डरने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि रूस अमरीका का दुश्मन नहीं है।

ग़ौरतलब है कि अमरीका की मिसाइल रक्षा प्रणाली का कुछ हिस्सा यूरोप में भी स्थापित किया जा रहा है.

राष्ट्रपति बुश ने कहा कि रूस और चीन के साथ अमरीका के रिश्ते ज़रूर हैं लेकिन वह इन दोनों देशों से असहमत है।

उन्होंने कहा, "रूस में लोकतांत्रिक विकास को लेकर समस्या रही है और लोगों को अधिकार देने के जो वादे किए गए थे वह प्रक्रिया पटरी से उतर गई है।"

इसी तरह चीन के बारे में उन्होंने कहा कि वे चीन की इस नीति से सहमत नहीं हैं कि देश की अर्थव्यवस्था तो खुलती रहे लेकिन राजनीतिक व्यवस्था न खुले।

उधर रूस ने अमरीकी राष्ट्रपति के आरोपों को तुरंत नकार दिया है।

क्रेमलिन के प्रवक्ता देमित्रि पेस्कोव ने कहा कि रूस एक लोकतांत्रिक देश है और वह उन्ही लोकतांत्रिक मूल्यों का पालन करता है जो दुनिया करती है या जो यूरोपीय मूल्य हैं।

दुश्मन नहीं

इससे पहले राष्ट्रपति बुश ने कहा है कि शीत युद्ध काफ़ी पहले ही समाप्त हो चुका है और अब अमरीका और रूस में कोई दुश्मनी नहीं है।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने धमकी दी थी कि अगर अमरीका की मिसाइल रक्षा प्रणाली स्थापित की जाती है तो वह अपने हथियारों का रुख़ यूरोप की तरफ़ कर देंगे। उनके इस बयान को शीत युद्ध के दौरान अक्सर होने वाली बयानबाज़ी का एक नमूना माना जा रहा है।

अमरीकी प्रशासन ने एक नए शीतयुद्ध के हालात से तो इनकार किया है लेकिन रूस की तरफ़ से इस तरह की भाषा का इस्तेमाल उसी दौर की चिंताओं की याद दिलाता है।

सहयोग का आहवान

चैक गणराज्य के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के साथ एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में बुश ने कहा कि नई प्रणाली शुद्ध रूप से एक रक्षात्मक उपाय है जिसका निशाना रूस नहीं बल्कि असल ख़तरें हैं।


अमरीका पोलैंड में ऐसे रॉकेट लगाना चाहता है जो जासूसी कर सकें और चैक गणराज्य में एक राडार अड्डा बनाना चाहता है। अमरीका का कहना है कि ये हथियार कुछ संभावित ख़तरा पैदा करने वाले देशों के ख़िलाफ़ हैं जिनमें ईरान और उत्तर कोरिया जैसे देश शामिल हैं।

राष्ट्रपति बुश ने कहा कि वह रूस को इस प्रणाली में सहयोग के लिए आमंत्रित करेंगे। बुश बुधवार को जर्मनी में जी-8 सम्मेलन के दौरान संभवतः राष्ट्रपति पुतिन से मुलाक़ात करेंगे।

जॉर्ज बुश ने कहा, "रूस हमारा दुश्मन नहीं है। मैं राष्ट्रपति पुतिन के साथ बातचीत करने के लिए उत्सुक हूँ। मेरा संदेश होगा कि रूस को मिसाइल रक्षा प्रणाली से डरने की ज़रूरत नहीं है।"

बुश ने कहा, "क्यों ना मिसाइल रक्षा प्रणाली में आप भी सहयोग करें। क्यों ना आप भी अमरीका का साथ इस प्रणाली में हाथ बँटाएं। आप अपने सैनिक अधिकारी और वैज्ञानिक भेजें - यह देखने के लिए कि यह प्रणाली किस तरह काम करती है।"

लेकिन रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लैफ़रोफ़ ने इन विचारों को ख़ारिज कर दिया है कि ईरान या उत्तर कोरिया से अमरीका को कोई ख़तरा है।

उन्होंने कहा, "ज़रूरत इस बात की है कि हम वास्तविक ख़तरों का मुक़ाबला करने के लिए एकजुट हों न कि सिर्फ़ काल्पनिक ख़तरों की बात करें। और रूस इस मक़सद में साथ देने के लिए तैयार है।"

रविवार को राष्ट्रपति पुतिन ने भी कहा था कि अमरीका को ईरान से कोई ख़तरा नहीं है और उन्होंने संकेत दिया था कि अमरीका की इस मिसाइल रक्षा प्रणाली का निशाना रूस है।

पुतिन ने कहा था, "अगर यूरोपीय क्षेत्र में अमरीकी हथियार बढ़ते हैं तो हमें यूरोप में नए निशाने साधने होंगे।"

Tuesday, June 5, 2007

गोवा विधानसभा के लिए मतगणना शुरू

भारतीय राज्य गोवा में वोटों की गिनती शुरू हो गई है। विधानसभा की 40 सीटों के लिए मुख्य मुक़ाबला भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच है ।


भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियों के नेता दावा कर रहे हैं कि वे अगली सरकार बनाने जा रहे हैं ।
भाजपा के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर पणिक्कर ने समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में कहा, '' हम कांग्रेस को पीछे छोड़ देंगे और बहुमत हासिल करने जा रहे हैं । ''
पणिक्कर ने दावा किया कि 40 सदस्यों वाली विधानसभा में भाजपा 21 सीटें हासिल करने जा रही है । इसके पहले उन्होंने कहा था कि यदि उनकी पार्टी को बहुमत हासिल नहीं हुआ तो वे विपक्ष में बैठना पसंद करेंगे ।


विरोधी दावे


दूसरी ओर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और शांताराम नायक का कहना था कि उनकी पार्टी को स्पष्ट बहुमत हासिल होगा।

नायक का कहना था,'' शुरूआत में हमने अनुमान लगाया था कि कांग्रेस 30 सीटें हासिल करने जा रही है। लेकिन इसमें कमी आ सकती है क्योंकि छोटी पार्टियों वोटों को काट रही है।''
एक प्रमुख क्षेत्रीय पार्टी 'सेव गोवा फ्रंट' के नेता चर्चिल अलमाओ का कहना है,'' गोवा में कोई भी दल हमारे समर्थन के बिना सरकार नहीं बना पाएगा ।''
उनका दावा था कि उनकी पार्टी छह सीटों पर जीत हासिल करेगी ।
इस बार के चुनाव में 202 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इनमें 15 महिला प्रत्याशी हैं ।
हालांकि चुनाव आयोग की सख़्ती और कड़ाई से नियमों का पालन कराए जाने के कारण इस बार चुनाव प्रचार फीका रहा ।

Monday, June 4, 2007

गूजर नेताओं के साथ अहम बातचीत

गूजर समुदाय को अनुसूचित जनजाति में शामिल किए जाने की मांग के संबंध में आरक्षण संघर्ष समिति के प्रमुख किरोड़ी सिंह बैंसला और राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के बीच सोमवार को बातचीत होगी।


दूसरी ओर कुछ गूजर संगठनों ने सोमवार को दिल्ली बंद का आह्वान किया है ।
गूजर महापंचायत की बैठक में सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के प्रवेश स्थानों को सील करने का फ़ैसला किया गया ।
इसको देखते हुए दिल्ली और इसकी सीमाओं पर सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं ।
इसके पहले गूजर समुदायों के लोगों ने रविवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर राजस्थान के गूजरों के साथ सहानुभूति प्रकट की ।
इधर कांग्रेस के दो गूजर सांसदों सचिन पायलट और अवतार सिंह भडाना के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह से मिला ।
इन लोगों ने भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व से राजस्थान के मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की माँग की ।
राजनाथ सिंह से मिलने के बाद अवतार सिंह भडाना ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, "राजनाथ सिंह ने इस बात का आश्वासन दिया है कि जो कुछ भी राजस्थान में हो रहा है, उसे वे गंभीरता से लेंगे।"
लेकिन अवतार सिंह का ये भी कहना था कि अगर हालात नहीं सुधरे तो वे केंद्र सरकार से राज्य सरकार को बर्ख़ास्त करने की माँग करेंगे ।


बातचीत

इधर राजस्थान सरकार और गूजर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला की सोमवार को अहम बातचीत होने जा रही है ।
कई दिनों के बाद गूजर नेता बैंसला बातचीत के लिए तैयार हुए हैं। हालांकि इसके पहले गूजर नेताओं के साथ चार दौर की बातचीत में कोई नतीजा नहीं निकला ।
गुर्जर समिति के सदस्य रूप सिंह ने बताया कि वार्ता में बैंसला और उनका आठ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल शामिल होगा ।
राजस्थान में गूजरों को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में रखा गया है लेकिन वे अनुसूचित जनजाति के तहत मिलने वाली आरक्षण सुविधा की मांग कर रहे हैं ।
दूसरी ओर राजस्थान का मीणा समुदाय इसका विरोध कर रहा है। इस पर दोनों समुदायों के बीच हिंसक झड़पें हुईं हैं ।
हालांकि गूजर पंचायत की अनुमति के बाद 29 मई को हुई हिंसा में मारे गए छह लोगों का रविवार को अंतिम संस्कार कर दिया गया ।
लेकिन जयपुर-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग अब भी अवरुद्ध है और आंदोलनकारी किसी भी वाहन को आने-जाने नहीं दे रहे हैं ।
उनका कहना है कि जब तक इस इलाक़े में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया नहीं आती हैं, वे रास्ता जाम रखेंगे। सड़कों पर सैकड़ों वाहन फँसे पड़े हैं ।
ग़ौरतलब है कि पिछले दिनों इस मांग ने हिंसक रूप ले लिया था और अभी तक हिंसा में 23 लोगों की मौत हो चुकी है ।