उत्तर-पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान के एक गाँव के लोगों ने बताया है कि दो बम हमलों में 35 आम नागरिक मारे गए हैं।
उनका कहना है कि हमले गुरुवार को विदेशी फ़ौजों ने किए थे।
नैटो के नेतृत्व में अफ़ग़ानिस्तान में काम कर रही अंतरराष्ट्रीय फ़ौज 'आईसैफ़' का कहना है कि उन्होंने इस इलाक़े में हवाई हमले किए थे लेकिन इस हमले में नागरिकों के मारे जाने की कोई सूचना उनके पास नहीं है।
उल्लेखनीय है कि पिछले एक साल में फ़ौजी कार्रवाई में आम नागरिकों के मारे जाने को लेकर लोगों में नाराज़गी है और इसे लेकर राष्ट्रपति हामिद करज़ई भी अप्रसन्नता ज़ाहिर कर चुके हैं।
एक बार फिर ऐसी कार्रवाई हुई है जिसके विवरणों को लेकर विवाद है और आरोप लगाए जा रहे हैं कि विदेशी फ़ौजों की कार्रवाई में अफ़ग़ान नागरिकों की मौत हुई है।
कुनार प्राँत के वातापुर ज़िले के ग्रामीणों का कहना है कि गुरुवार को देर शाम एक बम हमले में एक ही परिवार के नौ लोगों की मौत हो गई थी।
शुक्रवार को सुबह जब गाँव के लोग इनका अंतिम संस्कार कर रहे थे तो वहीं एक और बम हमला हुआ और इसमें 25 नागरिक मारे गए।
अफ़ग़ान अधिकारियों ने अभी इन मौतों की पुष्टि नहीं की है।
नैटो के नेतृत्व में काम करने वाली आईसैफ़ का कहना है कि कुनार प्रांत में उनकी कार्रवाई चल रही है।
अधिकारियों का कहना है कि उन पर कई ओर से हमले हो रहे थे और उन्होंने इसके जवाब में उन ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं, जहाँ से गोलाबारी हो रही थी। इसमें एक परिसर भी शामिल है।
उनका कहना है कि उन्हें कुछ चरमपंथियों के मारे जाने का अंदाज़ा है।
लेकिन उनका कहना है, "इस समय यह मानने का कोई कारण नहीं है कि कोई आम नागरिक मारा गया है।"
बीबीसी संवाददाता चार्ल्स हैविलैंड का कहना है कि जिस जगह सैन्य कार्रवाई हुई है वह दूरस्थ इलाक़ा है और ऐसे में मारे गए लोगों की संख्या का पता लगाना कठिन है।
उनका कहना है कि पिछले कुछ हफ़्तों में विदेशी फ़ौजों के हवाई हमलों और गोलीबारी से आम नागरिकों के मारे जाने की घटनाएँ बढ़ी हैं और इसकी व्यापक निंदा भी हुई है।
Saturday, July 7, 2007
बम हमलों में 35 अफ़ग़ान मारे गए
Friday, July 6, 2007
महिलाओं को निकालने के लिए रोकी गई सैन्य कार्रवा
राष्ट्रपति ने कहा है कि कुछ समय के लिए लाल मस्जिद परिसर पर जारी सैन्य कार्रवाई को रोक दिया जाए ताकि मस्जिद के अंदर मौजूद महिलाओं को बाहर निकाला जा सके।
इस आदेश के ठीक पहले सेना ने कट्टरपंथियों के ख़िलाफ़ अपनी कार्रवाई को तीसरे दिन भी जारी रखते हुए लाल मस्जिद परिसर के आसपास और विस्फोट किए हैं।
हालांकि सेना की ओर से मस्जिद में मौजूद लोगों पर कोई सीधा हमला नहीं किया जा रहा है ताकि कट्टरपंथियों का आत्मसमर्पण करवाया जा सके और इस दौरान कम से कम जान-माल का नुकसान हो।
पाकिस्तान के गृहमंत्री आफ़ताब शेरपाओ के मुताबिक अबतक 740 पुरुष और 400 महिलाओं को मस्जिद से बाहर निकाला जा चुका है।
माना जा रहा है कि मस्जिद परिसर में अभी भी कुछ महिलाएँ हो सकती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए एहतियातन यह फ़ैसला लिया गया है।
शर्त मंज़ूर नहीं
गुरुवार को कट्टरपंथियों के नेता अब्दुल राशिद ग़ाज़ी ने पाकिस्तान सरकार से सशर्त आत्मसमर्पण की माँग रखी थी।
उन्होंने कहा था कि वे आत्मसमर्पण के लिए तैयार हैं बशर्ते सरकार यह आश्वासन दे कि वह मस्जिद के भीतर घुसकर कोई कार्रवाई नहीं करेगी।
अब्दुल राशिद ग़ाज़ी ने सरकार से अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा की गारंटी भी माँगी थी।
हालांकि पाकिस्तान सरकार ने इस्लामाबाद की लाल मस्जिद के भीतर छिपे कट्टपंथी छात्रों की उन माँगों को मानने से इनकार कर दिया है जो उन्होंने आत्मसमर्पण के लिए रखी थीं।
पाकिस्तान सरकार ने सभी माँगों को ठुकराते हुए कहा है कि कट्टरपंथी महिलाओं और बच्चों को मानव कवच के रुप में इस्तेमाल कर रहे हैं।
इस बीच मस्जिद के चारों ओर सेना और सुरक्षाबलों की घेरेबंदी जारी है और सेना की ओऱ से शुक्रवार की सुबह भी विस्फोट किए गए हैं।
मस्जिद के प्रमुख मौलाना अब्दुल अज़ीज़ को बुधवार को बुर्क़ा पहनकर भाग निकलने की कोशिश करते हुए गिरफ़्तार किया गया था।
कठोर कार्रवाई
लाल मस्जिद के हथियारबंद लोगों और सुरक्षा बलों के बीच तीन दिनों से चल रही झड़पों में अब तक 19 लोगों की मौत हो चुकी है।
कट्टरपंथियों का गढ़ मानी जाने वाली लाल मस्जिद के भीतर लड़कों और लड़कियों के दो मदरसे हैं।
इस मस्जिद तक जाने वाले सभी रास्तों को अर्धसैनिक बलों ने बंद कर दिया है।
उल्लेखनीय है कि लाल मस्जिद और प्रशासन के बीच लंबे अरसे से टकराव चलता रहा है, इस कट्टरपंथी मस्जिद के छात्र और उसके प्रबंधन से जुड़े लोगों की माँग रही है कि इस्लामाबाद में शरिया का़नून को पूरी तरह लागू कराया जाए।
पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ की इस बात को लेकर निंदा होती रही है कि वे लाल मस्जिद के प्रशासन पर अंकुश नहीं लगा पा रहे हैं।
जानकारों का मानना है कि जहाँ लाल मस्जिद पर ताज़ा कार्रवाई से चरमपंथी गतिविधियों में लिप्त लोगों के लिए एक स्पष्ट संकेत दे पाने में मुशर्रफ़ सफल रहे हैं वहीं उनके इस कठोर क़दम से उनके आलोचकों का भी मुँह बंद हो गया है।
Thursday, July 5, 2007
लाल मस्जिद में विस्फोट और गोलीबारी
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद स्थित लाल मस्जिद से कई विस्फोटों और भारी गोलीबारी की आवाज़े सुनाई पड़ी हैं।
इस मस्जिद को पिछले दो दिनों से सुरक्षाबलों ने घेर रखा था ।
मस्जिद के भीतर से मदरसे के छात्र सुरक्षाबलों का विरोध कर रहे हैं और इसी विरोध के चलते मंगलवार को दोनों और से गोलीबारी हुई थी जिसमें कम से कम दस लोग मारे गए थे ।
इसके बाद सरकार की ओर से विद्रोही छात्रों से हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण करने को कहा गया था ।
बुधवार की शाम तक कोई एक हज़ार लोग आत्मसमर्पण कर चुके थे लेकिन सैकड़ों हथियार बंद लोगों के मस्जिद के भीतर ही होने की शंका जताई गई थी ।
इस बीच मस्जिद के प्रमुख प्रबंधक मौलाना अब्दुल अज़ीज़ को बुर्क़ा पहनकर भागने की कोशिश में गिरफ़्तार कर लिया गया।
सुरक्षाबलों की ओर से कहा गया था अगर ज़रूरी हुआ तो मस्जिद के भीतर कार्रवाई की जाएगी ।
लेकिन वहाँ गुरुवार को तड़के तक कोई कार्रवाई नहीं की गई थी लेकिन तड़के विस्फोटों और गोलीबारी की आवाज़ें सुनाई पड़ने लगीं ।
उल्लेखनीय है कि लाल मस्जिद और प्रशासन के बीच लंबे अरसे से टकराव चलता रहा है, इस कट्टरपंथी मस्जिद के छात्र और उसके प्रबंधन से जुड़े लोगों की माँग रही है कि इस्लामाबाद में शरिया का़नून को पूरी तरह लागू कराया जाए ।
पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ की इस बात को लेकर निंदा होती रही है कि वे लाल मस्जिद के प्रशासन पर अंकुश नहीं लगा पा रहे हैं ।
तनाव
मंगलवार को मस्जिद के एक मदरसे में पढ़ने वाली लड़कियो ने प्रदर्शन किया था और छात्रों ने गोलीबारी की थी ।
इसके बाद मस्जिद के आसपास के पूरे इलाक़े में कर्फ़्यू लगा दिया गया था और वातावरण में बहुत तनाव बना हुआ था। सरकार बुधवार को दिन भर लोगों से हथियार डालने की अपील करती रही ।
लेकिन सुरक्षाबलों का कहना है कि ज़्यादातर हथियारबंद लोग बाहर नहीं निकले।
पाकिस्तानी सरकार ने घोषणा की थी कि स्वेच्छा से बाहर निकलने वालों के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी और उनकी पढ़ाई का बेहतर बंदोबस्त किया जाएगा ।
लाल मस्जिद के मौलाना अब्दुल रशीद ग़ाज़ी ने टेलीफ़ोन पर हुई बातचीत में कहा कि मस्जिद में कोई छात्र हथियारबंद नहीं हैं बल्कि वे मस्जिद के गार्ड थे।
उन्होंने कहा, "मंगलवार की फ़ायरिंग सुरक्षा बलों ने शुरू की थी और अब वे मदरसे का नाम बदनाम कर रहे हैं, हमारी तरफ़ से बाद में गोलियाँ चलाई गईं थी अपनी हिफ़ाज़त में।"
उन्होंने इन आरोपों का खंडन किया कि बाहर निकलने की इच्छा रखने वाले छात्रों को जबरन रोका जा रहा है ।
Wednesday, July 4, 2007
छात्रों को हथियार डालने के आदेश
पाकिस्तान सरकार का कहना है कि उसने इस्लामाबाद की लाल मस्जिद के छात्रों से कहा है कि वे अपने हथियार डाल दें।
इस बीच सरकार ने मस्जिद के आसपास के इलाक़े में कर्फ़्यू लागू कर दिया है और लाल मस्जिद की बिजली काट दी है।
सरकार ने आदेश दिए हैं कि जो कोई भी मस्जिद से हथियार के साथ बाहर आता दिखाई देगा, उसे गोली मार दी जाएगी।
उल्लेखनीय है कि मंगलवार को दिन में लाल मस्जिद के बाहर छात्रों और सुरक्षाकर्मियों के बीच गोलीबारी में कम से कम 10 लोग मारे गए थे, जिनमें दो छात्र, एक सैनिक और एक पत्रकार शामिल हैं। पाकिस्तान के आंतरिक मामलों के उपमंत्री ने पत्रकार वार्ता में नौ लोगों के मारे जाने और 140 से ज़्यादा के घायल होने की पुष्टि की।
हालांकि कई रिपोर्टों में मृतकों की संख्या ज़्यादा बताई जा रही है। एपी के मुताबिक आस-पास के अस्पतालों में करीब 60 लोगों का इलाज चल रहा है।
दिन में कई घंटों तक चली गोलीबारी के बाद गोलीबारी थमी।
बीबीसी से बात करते हुए सूचना मंत्री तारिक़ अज़ीम ने कहा है कि यदि ज़रुरत पड़ी तो सुरक्षाबल मस्जिद पर हमला भी करेंगे।
विवाद
कट्टरपंथी मानी जाने वाली लाल मस्जिद के छात्रों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव तब शुरू हुआ जब सुरक्षाबलों ने बैरिकेड को मस्जिद तक आगे बढ़ाने की कोशिश की।
सरकार और लाल मस्जिद के पीछे कई बार टकराव की स्थिति बनी है
छात्रों ने इसका विरोध किया और फिर सड़कों पर निकली मदरसे की छात्राओं को तितर-बितर करने के लिए आँसू गैस के गोलों का प्रयोग किया गया।
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इसके बाद मस्जिद के अंदर से कुछ छात्रों ने गोलियाँ चलाईं जिससे अर्धसैनिक बल रेंजर्स के एक जवान की मौत हो गई।
रेंजर्स के जवान के मारे जाने के बाद सेना ने लाल मस्जिद को चारों तरफ़ से घेर लिया और दोनों तरफ़ से जमकर गोलीबारी हुई।
पिछले कई महीनों से लाल मस्जिद और उससे जुड़े दो मदरसों के छात्रों का टकराव पाकिस्तान सरकार से जारी है।
लाल मस्जिद से जुड़े धार्मिक नेताओं की माँग है कि पाकिस्तान की राजधानी में इस्लामी क़ानून शरिया पूरी तरह लागू किया जाए।
कई आलोचकों ने सरकार की निंदा की है कि इस्लामाबाद में स्थिति से कड़ाई से नहीं निपटा गया।
पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ पहले कह चुके हैं कि आत्मघाती हमलों की आशंका के चलते सुरक्षाकर्मी मस्जिद में छापा नहीं मार सकते।
के मुताबिक मस्जिद से जुड़े लोग सुरक्षाबल में रसूख़ वाले कई लोगों को जानते हैं जिस वजह से अधिकारी कोई क़दम नहीं उठा पाए हैं।
लेकिन संवाददाताओं का कहना है कि अब जब झड़पों में लोग मारे गए हैं, तो हालात मस्जिद के नेताओं के ख़िलाफ़ जा सकते है।
Tuesday, July 3, 2007
गुजरात में स्थिति गंभीर, सेना सतर्क
गुजरात के कई हिस्सों में भारी बारिश हो रही है जिससे सौराष्ट्र और दक्षिण गुजरात के कई हिस्सों में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है।
प्रशासन ने बिगड़ती स्थिति के मद्देनज़र सेना को सतर्क कर दिया है ।
पिछले कई दिनों से चल रही भारी बारिश के कारण अब तक 14 लोगों की मौत हो गई है ।
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार वडोदरा में बारिश की चपेट में आने से नौ लोगों की मौत हुई है ।
भारी बारिश से गुजरात के भरूच, नर्मदा, सूरत और सौराष्ट्र के भावनगर और सुरेंद्रनगर प्रभावित हुए हैं ।
रविवार से इन क्षेत्रों में 400 मिमी से अधिक बारिश दर्ज की गई है ।
इन इलाक़ों में रहने वाले लगभग सात हज़ार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया है ।
सौराष्ट्र के जूनागढ़ ज़िला बारिश से सबसे अधिक प्रभावित हुआ है ।
यहाँ बारिश के कारण एक स्कूल में लगभग 700 बच्चे फंस गए थे जिन्हें सुरक्षित निकाल लिया गया है ।
राज्य में सरदार सरोवर बांध समेत राज्य के 22 बांध पानी से भरे हुए हैं ।
बांध से पानी छोड़े जाने के कारण वड़ोदरा और भरूच ज़िलों के 72 गांवों में अलर्ट घोषित किया गया है । ख़बरों के अनुसार लगभग 100 गांवों का संपर्क राज्य के विभिन्न हिस्सों से कट गया है ।
पश्चिमी रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि गुजरात में मूसलाधार बारिश के कारण लंबी दूरी की नौ ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है ।
गुजरात सरकार ने स्थिति पर नज़र ऱखने के लिए गांधीनगर में एक आपात केंद्र स्थापित किया है ।
Monday, July 2, 2007
प्रतिभा ने आरोपों को निराधार बताया
यूपीए-वामदलों की ओर से राष्ट्रपति पद की प्रत्याशी प्रतिभा पाटिल ने अपने ऊपर लगे आरोपों का खंडन करते हुए उन्हें दुर्भावनापूर्ण, ग़लत और तथ्यहीन बताया।
प्रतिभा पाटिल रविवार को चेन्नई गई हुई थीं जहाँ उन्होंने कांग्रेस और डीएमके के विधायकों, सांसदों को संबोधित करते हुए यह बात कही ।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों के दौरान उनके ख़िलाफ़ जो भी कहा या लिखा जाता रहा है वो पूरी तरह से बेबुनियाद है और दुर्भावनापूर्ण है ।
प्रतिभा पाटिल रविवार को चेन्नई में महिलाओं की एक रैली को संबोधित करने पहुँची। उनका चेन्नई कार्यक्रम राष्ट्रपति पद के चुनाव प्रचार की शुरुआत माना जा रहा है ।
चेन्नई से पत्रकार मयंक शुक्ल ने बताया कि हालांकि प्रतिभा पाटिल ने रैली में कुछ विशेष बात नहीं कही पर रैली के बाद एक स्थानीय होटल में कांग्रेस और समर्थक राजनीतिक दलों के विधायकों और सांसदों को संबोधित करते हुए उन्होंने ख़ुद पर लगे आरोपों का खंडन किया ।
भाजपा प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने उनके इस बयान पर टिप्पणी करते हुए कहा, "जो व्यक्ति राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार होते हुए ऐसी बात करे तो वह हमारे लिए बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। हम ऐसा आरबीआई और हाईकोर्ट के तथ्यों के आधार पर कह रहे हैं। इन तथ्यों को दरकिनार कर अगर कोई इन्हें ग़लत बता रहा है तो इसपर क्या टिप्पणी की जा सकती है।"
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अगर देश के राष्ट्रपति पद के लिए ऐसा उम्मीदवार दिया है तो यह लोकतंत्र के लिए बहुत चिंता की बात है ।
आरोप
इस बार उन पर आरोप लगाया जा रहा है कि उन्होंने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कथित तौर पर कहा कि वे मृत आध्यात्मिक गुरु की आत्मा से बात कर चुकी हैं।
इससे पहले पर्दाप्रथा पर अपने बयानों से लेकर बैंक के कर्ज़ और हत्या के मामले में कथित रुप से भाई को बचाने जैसे कई विवाद उनकी उम्मीदवारी घोषित होने के बाद सामने आ चुके हैं ।
उन्होंने कह दिया था कि मुगलों के कारण राजस्थान की हिंदू महिलाओं ने पर्दा करना शुरु किया और अब इसे ख़त्म कर दिया जाना चाहिए ।
इस बयान के बाद इतिहासकारों ने प्रतिभा पाटिल को आड़े हाथों लिया था और कहा था कि उनका इतिहासबोध ठीक नहीं है ।
फिर मीडिया में ख़बरें आईं कि उन्होंने महाराष्ट्र में एक बैंक से शक्कर का एक कारखाने के लिए करोड़ों (17 करोड़ से अधिक) का कर्ज़ लिया था और उसे चुकाया नहीं है ।
एक हत्या के विवाद में भी उनका नाम लिया गया जिसमें कथित रुप से उनके भाई पर आरोप हैं। कहा गया था कि प्रतिभा पाटिल ने अपने भाई को बचाने का प्रयास किया था ।
एक विवाद प्रतिभा पाटिल के पति देवीसिंह शेखावत से जुड़ा हुआ है। उन पर कथित रुप से एक व्यक्ति को आत्महत्या करने के लिए उकसाने का आरोप है। वह व्यक्ति उसी स्कूल में शिक्षक था जिससे देवीसिंह शेखावत जुड़े हुए थे ।
इस मामले को ख़त्म करने के लिए शेखावत ने हाईकोर्ट में याचिका लगा रखी है ।