Saturday, September 29, 2007

सिलीगुड़ी में हिंसा के बाद कर्फ़्यू

पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी शहर मे शुक्रवार को भड़की हिंसा के बाद कर्फ़्यू लगा दिया गया है।

इंडियन आइडल बने प्रशांत तमांग पर दिल्ली के एक एफ़एम स्टेशन से प्रसारित हुई टिप्पणी का विरोध कर रहे लोग जब तोड़फोड़ पर उतर आए तो पुलिस ने लाठीचार्ज किया और हवा में गोलियाँ दागीं।

अधिकारियों का कहना है कि दो लोग गोली लगने से घायल हुए हैं। वैसे कुल तीस लोग घायल हुए हैं जिसमें दस पुलिस के लोग भी हैं।

वहाँ तनाव की स्थिति को देखते हुए क़ानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सेना को भी बुलाया गया है।

हिंसा

प्रशांत तमांग पर की गई कथित अपमानजनक टिप्पणी से नाराज़ उनके समर्थक बड़ी संख्या में विरोध प्रदर्शन करने ज़िले के अधिकारियों के पास जा रहे थे।

अधिकारियों का कहना है कि इन प्रदर्शनकारियों में से कुछ लोग हिंसक हो गए और उन्होंने कई वाहन और दुकानों में आग लगा दी।

उनका कहना है कि पहले पुलिस ने लाठीचार्ज किया फिर अश्रुगैस के गोले छोड़े और जब हिंसक भीड़ इससे भी नहीं रुकी तो पुलिस ने गोलियाँ चलाईं।

उत्तरी बंगाल के पुलिस महानिरीक्षक आरएस नलवा ने बीबीसी को बताया, " अभी भी तनाव की स्थिति बनी हुई है लेकिन हमने हिंसा को काबू में कर लिया है।"

इस बीच पश्चिम बंगाल सरकार ने कहा है कि इस कथित अपमानजनक टिप्पणी के लिए एफ़एम के रेडियो जॉकी के ख़िलाफ़ मामला दर्ज करेगी और ज़रूरत हुई तो उन्हें गिरफ़्तार भी किया जाएगा।

मामला

उल्लेखनीय है कि सोनी इंटरटेनमेंट टेलीविज़न चैनल ने पिछले दिनों प्रशांत तमांग को तीसरा 'इंडियन आइडल' घोषित किया था।

प्रशांत तमांग पश्चिम बंगाल पुलिस में कार्यरत हैं और दार्जिलिंग के रहने वाले हैं।

उन्होंने कड़े मुक़ाबले में शिलांग में रहने वाले अमित पॉल को हराकर यह ख़िताब जीता है।

जैसा कि टेलीविज़न कंपनी ने दावा किया है कि कई महीने चली इस प्रतियोगिता के लिए आठ करोड़ लोगों ने हिस्सा लिया। जिसमें भारत के अलावा नेपाल के लोग भी थे।

प्रशांत तमांग के प्रशंसकों में पश्चिम बंगाल के अलावा नेपाल के भी बहुत से लोग हैं।

उधर प्रशांत तमांग ने अपने प्रशंसकों से शांति बनाए रखने और हिंसा से दूर रहने की अपील की है।

उन्होंने एक बांग्ला टेलीविज़न के ज़रिए अपने प्रशंसकों से कहा, "इस अपमानजनक टिप्पणी ने मुझे उकसाया नहीं है। भारत के ज़्यादातर लोग जानते हैं कि मैं कैसा हूँ इसलिए इस टिप्पणी की प्रतिक्रिया में हिंसा की ज़रुरत नहीं है।"

एफ़एम की सफ़ाई

प्रशांत तमांग पर कथित अपमानजनक टिप्पणी दिल्ली के रेड एफ़एम ने प्रसारित की थी।

इसके प्रमुख आकाश वर्मा ने बीबीसी को बताया कि इंडियन आइडल एक चर्चित शो था और उसी पर चर्चा के दौरान उनके प्रस्तोता नितिन ने कुछ मज़ाकिया टिप्पणी की थी।

उनका कहना है कि जैसे ही कुछ लोगों ने फ़ोन करके इस पर आपत्ति जताई, अगले ही दिन नितिन ने अपने शो में स्पष्ट कर दिया था कि उनकी मंशा किसी का अपमान करने की नहीं थी और यदि उनकी टिप्पणी से किसी की भावनाएँ आहत हुई हों तो वे माफ़ी माँगते हैं।

उन्होंने कहा, "यहाँ तक कि हमने प्रशांत तमांग को भी अपने शो में लिया था और उन्होंने भी कहा कि वे रेड एफ़एम सुनते हैं और जो कुछ नितिन ने कहा वह उन्हें आपत्तिजनक नहीं लगता।"

आकाश वर्मा ने कहा है कि वे रेडियो चैनल की ओर से इसे स्पष्ट करना चाहते हैं कि रेडएफ़एम किसी की भावनाएँ आहत नहीं करना चाहता।

यह पूछने पर कि क्या वे नितिन पर कोई कार्रवाई करने का विचार कर रहे हैं, उन्होंने कहा, "नो कमेंट्स, अभी तो हम यह मामला ठीक करने में लगे हुए हैं।

Friday, September 28, 2007

बर्मा सरकार की अंतरराष्ट्रीय आलोचना

बर्मा में सैनिक सरकार का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ी निंदा हुई है और अमरीकी राष्ट्रपति बुश ने सैन्य सरकार से बल प्रयोग बंद करने की अपील की है।

गुरुवार को रंगून में प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ बल प्रयोग में नौ लोगों की मौत हो गई थी।

मारे गए लोगों में जापान का एक फ़ोटोग्राफ़र भी शामिल है।

अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा है कि पूरी दुनिया को बर्मा की सैन्य सरकार पर इस बात के लिए दबाव बनाना चाहिए कि वो प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ बल प्रयोग न करें।

बर्मा के प्रमुख सहयोगी चीन के विदेश मंत्री यांग जिची के साथ व्हाइट हाउस में एक बैठक के दौरान बुश ने चीन से अपील की कि वो अपने प्रभाव का इस्तेमाल करे और सैन्य सरकार पर हिंसा बंद करने के लिए दबाव बनाए।

अमरीका ने पहले ही बर्मा पर आर्थिक प्रतिबंध लगा रखे हैं और ताज़ा घटनाओं के बाद नए सिरे से फिर प्रतिबंध लगाए गए हैं।

उधर दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संगठन आसियान के विदेश मंत्रियों की न्यूयॉर्क में बैठक हो रही है जिसमें सभी विदेश मंत्रियों ने बर्मा के विदेश मंत्रि से सीधे सीधे हिंसा के विषय पर अपनी नाराज़गी जताई और उनसे संयम बरतने की अपील की।

आसियान विदेश मंत्रियों ने बर्मा में गिरफ़्तार राजनेता आंग सान सू की के साथ साथ अन्य राजनीतिक क़ैदियों की रिहाई की भी मांग की।

इस बीच बर्मा के सैन्य शासकों ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत इब्राहिम गामबारी बर्मा पहुंच चुके हैं और वो अब रंगून जा रहे हैं।

हिंसा और प्रदर्शन

बर्मा में पिछले दस दिन से विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं और सरकार ने प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ कड़ी कार्रवाई की है।

बर्मा के सरकारी टेलीविज़न की ख़बरों के अनुसार यह बल प्रयोग रंगून शहर में हुआ और मारे गए लोगों में आठ प्रदर्शनकारी और एक पत्रकार बताया गया है।

जापान की एपीएफ़ समाचार एजेंसी ने पुष्टि की है कि मारा गया जापानी व्यक्ति एक वीडियो पत्रकार था।

इस बल प्रयोग में 11 प्रदर्शनकारी और 31 सैनिक घायल भी हुए हैं।

यह बल प्रयोग प्रदर्शन के दसवें दिन किया गया है। इससे पहले गुरूवार को ही प्रदर्शनकारियों पर पुलिस फ़ायरिंग हुई थी और बौद्ध मठों पर छापेमारी में लगभग दो सौ बौद्ध भिक्षुओं को गिरफ़्तार किया गया था।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक गुरुवार को एक बार फिर राजधानी रंगून के बीचोबीच हज़ारों प्रदर्शनकारी इकट्ठा हुए साथ ही सेना और पुलिस के जवान भी भारी संख्या में तैनात हैं।

Thursday, September 27, 2007

मुशर्रफ़ ने नामांकन दाखिल किया

पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ ने राष्ट्रपति पद के लिए होने वाले चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल कर दिया है।

उनका नामांकन प्रधानमंत्री शौकत अज़ीज़ ने दाखिल किया है।

राष्ट्रपति का चुनाव छह अक्तूबर को होने हैं।

उधर पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को यह फ़ैसला सुनाने जा रहा है कि परवेज़ मुशर्रफ़ सेनाध्यक्ष रहते हुए राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ सकते हैं या नहीं।

वैसे परवेज़ मुशर्रफ़ ने यह घोषणा कर दी है कि राष्ट्रपति चुने जाने के बाद वे सेनाध्यक्ष का पद छोड़ देंगे।

इस्लामाबाद में बहुत संभावना है कि सुप्रीम कोर्ट परवेज़ मुशर्रफ़ को चुनाव लड़ने से न रोके।

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के ख़िलाफ पिछले कुछ दिनों में लगातार विरोध प्रदर्शन हुए हैं और आसार हैं कि कल भी प्रदर्शन हो सकते हैं।

सत्तारूढ़ पार्टी मुस्लिम लीग(क्यू) के महासचिव मुसाहिद हुसैन के अनुसार राष्ट्रपति मुशर्रफ़ का फिर से राष्ट्रपति चुना जाना कठिन नहीं होगा।

राष्ट्रपति के पर्चा भरने के कार्यक्रम के मद्देनज़र राजधानी इस्लामाबाद में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं। हालांकि जनरल मुशर्रफ़ ख़ुद नामांकन दाखिल करने नहीं गए।

इस्लामाबाद को दूसरे शहरों से आने वाली तीनों सड़कों को सील करने के आदेश दे दिए गए थे।

जनरल मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ मैदान में वकीलों की ओर से सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस वजीउद्दीन और बेनज़ीर भुट्टो की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी से अमीन फ़हीम को मैदान में उतारने की घोषणा की गई है।

हालांकि बेनज़ीर भुट्टो की पार्टी के उम्मीदवार के बारे में ये अटकलें लगाई जा रही हैं कि वे गंभीर उम्मीदवार नहीं हैं और ऐन वक़्त पर वे मैदान से हटाए जा सकते है।

Wednesday, September 26, 2007

मुंबई पहुँची टीम इंडिया का भारी स्वागत

चौबीस साल बाद भारत को क्रिकेट का विश्वकप दिलवाने वाली टीम इंडिया मुंबई के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे में पहुँच चुकी है।

वहाँ टीम इंडिया के खिलाड़ियों का भारी स्वागत किया गया है। वहाँ लगातार हो रही बारिश के बावजूद लोग ढोल-नँगाड़ों के साथ वहाँ मौजूद थे।

हवाई अड्डे से वानखेड़े स्टेडियम तक विजय जुलूस की तैयारियाँ की गई हैं और इसके लिए खिलाड़ी खुली बसों पर सवार होकर रवाना हो चुके हैं।

उन्होंने ख़बर दी है कि भारी बारिश के बावजूद लोग रास्ते में खिलाड़ियों का स्वागत करने के लिए खड़े हुए हैं।

उल्लेखनीय है कि दक्षिण अफ़्रीका के जोहान्सबर्ग में सोमवार को हुए रोमांचक फ़ाइनल में पाकिस्तान को पाँच रन से हराकर ट्वेन्टी 20 विश्व कप का ख़िताब जीत लिया था।

भारत के 157 रन के जवाब में पाकिस्तान की पूरी टीम 152 रन बनाकर आउट हो गई थी।

विजय जुलूस

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड और महाराष्ट्र सरकार ने मिलकर टीम इंडिया के भव्य स्वागत की तैयारियाँ की हैं।

हवाई अड्डे पर खिलाड़ियों का स्वागत करने के लिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख और उनके मंत्रिमंडल के सहयोगी और बीसीसीआई के मुख्य कार्यकारी शरद पवार हवाईअड्डे पहुँचे थे।

टीम इंडिया को ले जाने के लिए तीन बिना छतों वाली बसों को तैयार किया गया है। साथ ही मीडिया की एक बस भी चल रही है।

धीमी रफ़्तार से चलती हुई बसों में खिलाड़ी रास्ते में लोगों का अभिवादन स्वीकार करते हुए स्टेडियम पहुँचेंगे।

इस विजय जुलूस के लिए हवाई अड्डे से शिवाजी पार्क, बांद्रा, माहिम, वर्ली और हाजीअली और चौपाटी होते हुए वानखेड़ स्टेडियम पहुँचने का रास्ता तय किया गया है।

आयोजकों का कहना है कि वानखेड़े स्टेडियम में खिलाड़ियों का नागरिक अभिनंदन किया जाएगा और उन्हें पुरस्कार की वह राशि सौंपी जाएगी जिसकी घोषणा पहले ही की जा चुकी है।

इसके लिए बीसीसीआई के प्रमुख कार्यकारी शरद पवार वहाँ उपस्थित होंगे।

पुरस्कार ही पुरस्कार

वैसे तो टीम इंडिया पर पुरस्कारों की बरसात तभी शुरु हो गई थी जब वह फ़ाइनल में पहुँची थी लेकिन विश्वकप जीतने के बाद से घोषणाएँ रुक ही नहीं रही हैं।

विश्व कप जीतने के लिए टीम इंडिया को आईसीसी की ओर से 4 लाख 90 हजार डॉलर (लगभग दो करोड़ रुपए) का पुरस्कार मिला है।

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के अध्यक्ष शरद पवार ने भारतीय टीम को विश्व कप जीतने के लिए 20 लाख डॉलर (लगभग आठ करोड़ रुपए) का इनाम देने की घोषणा की है।

साथ ही बोर्ड ने युवराज सिंह को एक ओवर में छह छक्के जड़ने के लिए एक करोड़ रुपए का इनाम देने की घोषणा की है।

इसी कारनामे के लिए बीसीसीआई के सचिव ललित मोदी ने युवराज सिंह को एक स्पोर्ट्स कार भेंट में देने की घोषणा की है।

बीसीसीआई ने घोषणा की है कि पुरस्कार की राशि खिलाड़ियों को ही दी जाएगी। अनुमान है कि हर खिलाड़ी के हिस्से 80-80 लाख रुपयों का पुरस्कार आएगा।

एयर इंडिया ने टीम के सभी खिलाड़ियों और अधिकारियों को अगले पाँच साल तक मुफ़्त हवाई यात्रा की सुविधा देने की घोषणा की है।

टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को उनके गृहराज्य झारखंड में 'झारखंड रत्न' का सम्मान देने की घोषणा की गई है।

जोगिंदर शर्मा को हरियाणा सरकार की ओर से दो लाख रुपए देने की घोषणा की गई है।

इधर कर्नाटक सरकार ने रॉबिन उथप्पा और भारतीय टीम के बॉलिंग कोच वैंकटेश प्रसाद को पाँच पाँच लाख रुपए का पुरस्कार देने की घोषणा की है।

Tuesday, September 25, 2007

युवा ब्रिगेड के क़दमों में दुनिया

भारत ने एक रोमांचक फ़ाइनल में पाकिस्तान को पाँच रन से हराकर ट्वेन्टी 20 विश्व कप का ख़िताब जीत लिया है। भारत के 157 रन के जवाब में पाकिस्तान की पूरी टीम 152 रन बनाकर आउट हो गई।

मैच का फ़ैसला आख़िरी ओवर में हुआ। आख़िरी ओवर में पाकिस्तान को 13 रन चाहिए था। लेकिन तीन गेंद रहते ही पाकिस्तान की टीम 152 रन बनाकर आउट हो गई।

जोगिंदर शर्मा ने एक बार फिर आख़िरी ओवर किया और मिसबाहुल का अहम विकेट चटकाया। उन्होंने 20 रन देकर दो विकेट लिए।

सिर्फ़ 16 रन देकर तीन विकेट लेने वाले इरफ़ान पठान को मैन ऑफ़ द मैच का पुरस्कार मिला। जबकि पाकिस्तान के शाहिद अफ़रीदी को प्लेयर ऑफ़ द टूर्नामेंट चुना गया।

पाकिस्तान की ओर से मिसबाहुल हक़ ने सर्वाधिक 43 रन बनाए। जबकि इमरान नज़ीर ने 33 रनों का पारी खेली। लेकिन दुर्भाग्यशाली रहे और रॉबिन उथप्पा के सीधे थ्रो पर रन आउट हो गए।

इनके अलावा यूनुस ख़ान ने 24 और यासिर अराफ़ात ने 15 रन बनाए। भारत की ओर से इरफ़ान पठान ने 16 रन देकर तीन विकेट लिए। जबकि आरपी सिंह ने 26 रन देकर तीन विकेट चटकाए।

इससे पहले ट्वेन्टी 20 विश्व कप के फ़ाइनल में भारत ने पाकिस्तान के सामने जीत के लिए 158 रनों का लक्ष्य रखा था। पहले बल्लेबाज़ी करते हुए 20 ओवर में पाँच विकेट पर 157 रन बनाए थे।

पाकिस्तान के गेंदबाज़ों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया, ख़ासकर उमर गुल ने। जबकि गौतम गंभीर को छोड़कर भारत के स्टार खिलाड़ी नहीं चले। गंभीर ने सर्वाधिक 75 रन बनाए जबकि रोहित शर्मा 30 रन बनाकर नाबाद रहे।

भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी करने का फ़ैसला किया। इस मैच में वीरेंदर सहवाग नहीं खेल रहे हैं और भारत ने उनकी जगह यूसुफ़ पठान को टीम में रखा।

यूसुफ़ पठान और गौतम गंभीर ने शुरुआत तो अच्छी की। लेकिन पठान अच्छी शुरुआत करने के बाद 15 रन बनाकर आउट हो गए।

मध्यक्रम पिटा

पठान ने आठ गेंद पर एक चौके और एक छक्के की मदद से 15 रन बनाए। लेकिन भारत को तगड़ा झटका उस समय लगा जब मध्यक्रम की रीढ़ समझे जाने वाले बल्लेबाज़ बिना कुछ ख़ास किए पवेलियन लौट गए।

रॉबिन उथप्पा ने आठ रन बनाए, तो युवराज सिंह ने 14 रन बनाए। जबकि कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने सिर्फ़ छह रन बनाए। गौतम गंभीर एक छोर पर जमे रहे। उन्होंने स्ट्रोक भी अच्छे लगाए।

पाकिस्तान की ओर से उमर गुल ने भी बेहतरीन गेंदबाज़ी की और स्टार खिलाड़ियों युवराज सिंह, धोनी और गौतम गंभीर को पवेलियन भेजा। आख़िरी ओवरों में रोहित शर्मा ने कुछ अच्छे हाथ दिखाए। उन्होंने 16 गेंदों पर 30 रन बनाए।

भारत की टीम 20 ओवर में पाँच विकेट पर 157 रन ही बना सकी। पाकिस्तान की ओर से उमर गुल ने चार ओवर में 28 रन देकर तीन विकेट चटकाए। मोहम्मद आसिफ़ और सोहैल तनवीर को एक-एक विकेट मिले।

Monday, September 24, 2007

फ़ाइनल से पहले दबाव, तनाव और रणनीतिय

ट्वेंटी-20 विश्व कप के 'ड्रीम फाइनल' से पहले भारत और पाकिस्तान की टीम के खिलाड़ियों पर काफ़ी दबाव है और रणनीतियां बनाई जा रही हैं।

पाकिस्तानी टीम के कप्तान शोएब मलिक का कहना है कि जब दर्शकों पर दबाव होता है तो खिलाड़ियों को भी दिक्कत होने लगती है।

उधर भारतीय टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी कहते हैं कि ये स्पेशल मैच होगा।

धोनी कहते हैं कि भारतीय टीम के खेल में युवा खिलाड़ियों के कारण ज़बर्दस्त बदलाव हुआ है।

वो यहां तक कहते हैं कि जब भारत टूर्नामेंट में शामिल हुआ था तो किसी ने सोचा भी नहीं था कि भारतीय टीम फ़ाइनल में जगह बना पाएगी।

लेकिन अब भारत फ़ाइनल में है और सामना है पाकिस्तान से।

भारत और पाकिस्तान के बीच ट्वेन्टी 20 विश्व कप का फ़ाइनल सोमवार को खेला जाएगा। भारत ने सेमी फ़ाइनल में विश्व चैम्पियन ऑस्ट्रेलिया को शिकस्त दी थी तो पाकिस्तान ने न्यूज़ीलैंड को हराया था।

ख़ास खिलाड़ी

धोनी ने कहा, "भारत और पाकिस्तान का मैच हमेशा ही ख़ास होता है और ये तो विश्व कप का फ़ाइनल है। इसलिए यह तो और भी ख़ास है। जहाँ तक इतिहास की बात है इसका क्रिकेट से कोई लेना देना नहीं होता है।"

धोनी ने कहा कि अगर हम ये सोचकर पाकिस्तान से खेलें कि विश्व कप में हम कभी भी उनसे नहीं हारे हैं, तो कुछ नहीं होगा। इसके लिए हमें अच्छा खेल दिखाना होगा।

इस विशेष मैच के लिए दोनों ही टीमों के कुछ खिलाड़ियों पर बड़ी ज़िम्मेदारी रहने वाली है।

दक्षिण अफ्रीका से आ रही रिपोर्टों के अनुसार वीरेंदर सहवाग के आज के मैच में खेलने की संभावना नहीं है। वो ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ सेमीफ़ाइनल में घायल हो गए थे।

इसे देखते हुए भारतीय टीम में एक और बल्लेबाज़ को खिलाया जा सकता है। युवराज सिंह, उथप्पा,गौतम गंभीर और धोनी पर जहां बल्लेबाज़ी की ज़िम्मेदारी होगी वहीं गेंदबाज़ी का दारोमदार होगा श्रीसंत, आरपी सिंह और हरभजन पर।

पाकिस्तान जहां मिसबाहुल हक, शाहिद अफ़रीदी और शोएब मलिक से धमाकेदार बल्लेबाज़ी की उम्मीद रखेगा वहीं गेंदबाज़ी के लिए मोहम्मद आसिफ़ और सोहेल तनवीर पर दारोमदार होगा।

Saturday, September 22, 2007

'राम के नाम पर भावनाओं से खिलवाड़ चुनावी मुद्दा होगा'

भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि यदि संसदीय चुनाव समय से पहले होते हैं तो भाजपा 'राम के नाम पर जनता की भावनाओं से खिलवाड़, देश की सुरक्षा, सत्ताधारी पक्ष की कथित सांप्रदायिक राजनीति और महँगाई' के मुद्दों को लेकर मैदान में उतरेगी।

उन्होंने ये विचार भोपाल में बीबीसी के साथ बातचीत में व्यक्त किए। भोपाल में भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की तीन दिन की बैठक चल रही है।

महत्वपूर्ण है कि शनिवार को इस बैठक में 'रामसेतु' के मुद्दे पर प्रस्ताव पारित किया जाना है।

सेतुसमुद्रम परियोजना पर केंद्र सरकार के विवादास्पद हलफ़नामे के संदर्भ में प्रकाश जावड़ेकर ने आरोप लगाया - "राम के नाम पर लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ हुआ है और भाजपा इस विषय को जनता के बीच ले जाएगी।"

आश्चर्यजनक है कि इसके साथ ही उनका कहना था - "हम रामसेतु पर राजनीति नहीं करना चाहते।"

'सांप्रदायिक राजनीति'

भाजपा की ओर से उठाए जाने वाले अन्य मुद्दो पर उनका कहना था, "आम आदमी के नाम पर सत्ता में आई सरकार ने आम आदमी के साथ विश्वासघात किया और महँगाई की समस्या पैदा की है।"

प्रकाश जावड़ेकर का कहना था कि भाजपा 'विभिन्न तरीक़ों से देश की सुरक्षा को आतंकवाद से पैदा हुए ख़तरे और लोगों को बाँटने वाली सांप्रदायिक राजनीति के विषय भी मतदाताओं के बीच ले जाएगी।'

उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार सांप्रदायिक राजनीति कर रही है। उनके अनुसार - ' यदि ग़रीबों की बात करें तो हिंदू ग़रीब को मदद की बात नहीं है, केवल मुसलमान ग़रीब को ही ग़रीब माना जा रहा है।'

परमाणु सहमति और संप्रभुता

भाजपा प्रवक्ता से पूछा गया कि भारत-अमरीका परमाणु समझौते समेत कई मुद्दों पर पार्टी में अनेक स्वर सुनाई देते हैं।

उन्होंने कहा, "परमाणु समझौते पर पार्टी की राय सपष्ट है। हमारा विरोध कम्युनिस्ट पार्टियों की तरह अमरीका-विरोध से प्रेरित नहीं बल्कि इसलिए हैं क्योंकि इससे हमारी संप्रभुता पर आँच आती है। "

गुजरात में होने वाले चुनावों और वहाँ पार्टी के भीतर असंतुष्ट नेताओं के बारे में प्रकाश जावड़ेकर का कहना था, "मैं नहीं मानता कि गुजरात में कुछ असंतुष्ट मुख्यमंत्री को पद से हटाना चाहते हैं। एक दो सांसद और पाँच-छह विधायक अलग राय रखते हैं और सत्ता में, बड़ी पार्टियों में ऐसा होना स्वभाविक है।"

लेकिन उनका ये भी कहना था कि हो सकता है कि ऐसे कुछ लोगों को पार्टी से बाहर जाना पड़े।

Friday, September 21, 2007

'रामसेतु' पर प्रस्ताव पारित करेगी भाजपा

भोपाल में भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक शुरू हो गई है। इसमें 'रामसेतु' के मुद्दे पर प्रस्ताव पारित किया जाएगा।

पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी तबीयत ठीक नहीं होने के कारण बैठक में हिस्सा नहीं ले रहे हैं।

शुक्रवार को शुरू हुई इस तीन दिवसीय बैठक में पार्टी संभावित चुनावी मुद्दों पर चर्चा करेगी।

लकोसभा चुनाव में भाजपा किसे प्रधानमंत्री का उम्मीदवार बनाएगी, इसको लेकर पार्टी नेताओं की ओर से जो परस्पर विरोधी विचार आ रहे थे, उसे दूर करने की कोशिश की जा रही है।

भाजपा के पूर्व अध्यक्ष वेंकैया नायडू ने बैठक के पहले दिन कहा कि वाजपेयी के बाद लालकृष्ण आडवाणी ही स्वाभाविक उत्तराधिकारी हैं और राम नाईक ने भी उनका समर्थन किया।

बैठक के पहले ही दिन सेतुसमुद्रम या 'रामसेतु' के मामले पर वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी एक प्रस्ताव पेश करेंगे जिस पर चर्चा होगी। वो रामसेतु रक्षा मंच के सदस्य भी हैं।

हालाँकि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा है कि पार्टी 'रामसुते' को राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाएगी।

उनका कहना था, "हम इस मामले को राजनीति से परे रखेंगे। इस मुद्दे को रामसेतु रक्षा मंच की ओर से उठाया जाएगा जिसका भाजपा समर्थन करेगी।"

चुनाव

लोकसभा और आने वाले महीनों में कुछ राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों में पार्टी की रणनीति पर भी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में चर्चा की जाएगी।

भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री रिपोर्ट पेश करेंगे। ख़ास कर गुजरात में विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी में चल रही अंदरूनी उठापटक केंद्र में होगा।

भाजपा के उपाध्यक्ष मुख़्तार अब्बास नक़वी ने गुरुवार को कहा कि बैठक में महँगाई, आतंकवाद, रामसेतु और आम आदमी पर बढ़ते दबाव के मुद्दों पर चर्चा होगी।

भाजपा को मध्यावधि चुनावों की आहट भले ही सुनाई दे रही हो लेकिन लोकसभा चुनाव में पार्टी किसको प्रधानमंत्री का दावेदार बनाएगी, इसको लेकर रस्साकशी जारी है।

लोकसभा में विपक्ष के नेता आडवाणी ने यह कहकर कि ब्रिटेन में चुनाव में विपक्षी पार्टी के विजयी होने की सूरत में विपक्ष के नेता को प्रधानमंत्री बनाए जाने की परंपरा है, इस मामले में पहल कर दी।

मगर उतनी ही तेज़ी से यशवंत सिन्हा और मुरली मनोहर जोशी ने यह कहकर उनका पत्ता काटने की कोशिश की कि यह बात भारत में लागू नहीं होती।

Friday, September 14, 2007

इराक़ से अमरीकी सैनिकों की आंशिक वापसी

अमरीकी जनता को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने इराक़ से सैनिकों की आंशिक वापसी की घोषणा की है।

उन्होंने कहा है कि इस महीने के अंत में जो दो हज़ार मरीन सैनिक वापस लौट रहे हैं उनकी जगह नई नियुक्तियाँ नहीं की जाएँगीं और 5,700 सैनिकों की वापसी क्रिसमस से पहले हो जाएगी।

राष्ट्रपति बुश ने कहा है कि यदि परिस्थितियाँ अनुकूल रहीं तो अगली गर्मियों तक लगभग 30 हज़ार सैनिकों की वापसी हो जाएगी।

सैनिकों की वापसी को इराक़ में मिलने वाली सफलता से जोड़ते हुए उन्होंने कहा, "हम जितने ज़्यादा सफल होंगे, उतने ज़्यादा सैनिकों की वापसी हो सकेगी।"

इस तरह अगली गर्मियों तक सैनिकों की संख्या उतनी ही हो जाएगी जितनी इस साल और सैनिक भेजने के पहले थी।

उन्होंने आमतौर पर इराक़ में अमरीकी कमांडर जनरल डेविड पैट्रॉस के सुझावों को मान लिया है, जिन्होंने इराक़ में अमरीकी फ़ौज की प्रगति पर इस सप्ताह के शुरु में संसद में एक रिपोर्ट पेश की थी।

हालांकि विपक्षियों का कहना है कि और सैनिकों को वापस बुलाया जाना चाहिए।

'सफलता'

राष्ट्रपति बुश ने व्हाइट हाउस से टेलीविज़न के ज़रिए राष्ट्र को संबोधित किया है।

उन्होंने इस साल के शुरु में 30 हज़ार अतिरिक्त सैनिकों की नियुक्ति को युक्तिसंगत ठहराते हुए कहा कि इससे सैन्य अभियान को फ़ायदा पहुँचा है।

अमरीकी फ़ौजों की सफलता के रुप में उन्होंने अनबार प्रांत का ज़िक्र किया और कहा कि वहाँ लोगों ने अमरीकी फ़ौजों के साथ मिलकर चरमपंथियों को खदेड़ दिया है।

उनका कहना था कि हाल के महीनों में फ़ौजों ने हर महीने औसतन 15 सौ चरमपंथियों को मारा या पकड़ा है।

राष्ट्रपति बुश ने कहा कि स्वतंत्र इराक़ से मध्यपूर्व के लोगों को एक उदाहरण मिलेगा।

उन्होंने जनरल पेट्रॉस से कहा है कि वे अगले साल मार्च में इराक़ पर एक और रिपोर्ट पेश करें।

प्रतिक्रिया

बुश प्रशासन पर डेमोक्रेटिक पार्टी का भारी दबाव था कि वे अपनी इराक़ नीति बदलें और सैनिकों की वापसी की घोषणा करें।

राष्ट्रपति बुश के संबोधन के बाद पहली प्रतिक्रिया में डेमोक्रेटिक पार्टी ने कहा है कि राष्ट्रपति की योजना से कोई बदलाव नहीं दिखता।

राष्ट्रपति पद की दौड़ में शामिल हिलेरी क्लिंटन ने कहा है कि बुश ने जो घोषणा की है वह 'बहुत देर से बहुत थोड़ा' है।

सांसद जैक रीड ने कहा कि इराक़ में स्थाई शांति की स्थापना की सूरत यही है कि इराक़ी नेता अपने आपसी मतभेद भुलाएँ।

राष्ट्रपति बुश का यह संबोधन इराक़ के एक बड़े सुन्नी नेता अब्द अल-सत्तार अबू रिशा की हत्या के बाद हुआ है।

वो अल-क़ायदा के विरोधी थे और अनबार प्रांत में अमरीकी फ़ौजों की सहयता कर रहे थे।

Thursday, September 13, 2007

फिर भूकंप, सुनामी की एक और चेतावनी

इंडोनेशिया में एक बार फिर भूकंप का तगड़ा झटका लगा है जिसने दक्षिणी सुमात्रा को हिलाकर रख दिया है। इसके बाद 24 घंटों में तीसरी बार सूनामी की चेतावनी जारी की गई है।

रिक्टर स्केल पर 8.4 की तीव्रता वाले भूकंप के कोई 12 घंटे बाद भूकंप का यह झटका लगा है।

बुधवार को आए भूकंप में कई इमारतें नष्ट हो गई, संचार और बिजली व्यवस्था अस्त-व्यस्त हो गई और कम से कम नौ जानें गईं थीं।

इसके बाद सूनामी की चेतावनी जारी की गई थी लेकिन बाद में इसे वापस ले लिया गया था।

सूनामी की चेतावनी जारी करने वाले देशों में इंडोनेशिया, भारत, मलेशिया और श्रीलंका शामिल थे।

अब भारत और मलेशिया ने भी कहा है कि सूनामी की आशंका नहीं है लेकिन स्थिति पर नज़र रखी जा रही है।

भूकंप

बुधवार को आया भूकंप इतना शक्तिशाली था कि उससे सैकड़ों किलोमीटर दूर राजधानी जकार्ता में भी इमारतें हिल गईं।

जकार्ता में ि दिसंबर 2004 में आए भूकंप के बाद यह सबसे ताक़तवर भूकंप था।

ग़ौरतलब है कि उसी भूकंप के बाद समुद्र में हलचल मच गई थी और अनेक देशों में सूनामी से मची भारी तबाही में लाखों लोगों की जान गई थी।

सिंगापुर और थाईलैंड में भी कुछ लोगों ने भूकंप के झटके महसूस किए गए।

भूकंप का सबसे ज़्यादा असर बेंकुलु और पडांग शहरों में हुआ है जहाँ कोई 20 लाख लोग रहते हैं।

इंडोनेशिया सरकार का कहना है कि इन शहरों में राहत सामग्री भेजी जा रही है।

Wednesday, September 12, 2007

रामसेतु का विरोध: कई शहरों में विरोध प्रदर्शन

भारत और श्रीलंका के बीच बनने वाले सेतु समुद्रम परियोजना के विरोध में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल सहित कई हिंदू संगठनों ने देश भर में चक्का जाम किया है।

इस विरोध प्रदर्शन में भाजपा और शिवसेना जैसे राजनीतिक दल भी शामिल हैं।

चक्का जाम के चलते राजधानी दिल्ली सहित देश के कई शहरों में सड़क यातायात रुक गया है और कई जगह रेल यातायात भी प्रभावित हुआ है।

टेलीविज़न चैनलों पर जगह-जगह से विरोध प्रदर्शन की तस्वीरें दिखाई जा रही हैं।

हिंदू संगठनों ने इस परियोजना के विरोध में तीन घंटों के चक्का जाम का आव्हान किया है। चक्का जाम 11 बजे तक चलना है।

हिंदू संगठन माँग कर रहे हैं कि श्रीलंका और भारत के बीच 'सेतु' को न तोड़ा जाए क्योंकि इससे उनकी धार्मिक भावनाएँ आहत होती है।

विरोध प्रदर्शन

इस परियोजना का विरोध कर रहे हिंदू संगठनों ने दिल्ली में कई अहम रास्तों पर यातायात रोक रखा है और हज़ारों वाहन फँसे हुए हैं।

दिल्ली-आगरा मार्ग पर रेल यातायात को रोका गया है।

जयपुर-आगरा राजमार्ग और पाली-जोधपुर राजमार्ग पर बजरंग दल और विश्वहिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने चक्का जाम कर दिया है।

वहीं जयपुर स्टेशन पर जाकर कार्यकर्ताओं ने ट्रेनों को रोकने का प्रयास किया है।

भोपाल शहर में भी 11 बजे तक बंद का आव्हान किया है, वहीं इंदौर से भी विरोध प्रदर्शन की ख़बरें हैं।

विरोध

उल्लेखनीय है कि श्रीलंका और भारत के बीच समुद्र में शैवल की उथली पट्टी पाई गई है।

हिंदू संगठनों का दावा है कि यह रामसेतु है जिसका ज़िक्र हिंदू धार्मिक ग्रंथ रामायण में किया गया है और इसका निर्माण स्वयं भगवान राम ने किया था।

भारत सरकार यहाँ सेतु समुद्रम के नाम से एक परियोजना पर काम कर रही है। इसका मक़सद भारत के पश्चिमी तट से पूर्वी तट के बीच जहाजों की आवाजाही सुगम बनाना है।

इसके बन जाने के बाद जहाज को पूरे श्रीलंका का चक्कर नहीं लगाना होगा।

इस परियोजना की कुल लागत दो हज़ार 87 करोड़ रुपए है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री सुब्रमण्यम स्वामी की एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने इस 'सेतु' को तोड़ने पर 14 सितंबर तक के लिए रोक लगा दी है।

हालाँकि अदालत ने सेतुसमुद्रम परियोजना के लिए समुद्र की तलहटी की सफाई का काम जारी रखने को मंज़ूरी दी है, बशर्ते कि इससे कथित रामसेतु को कोई नुकसान नहीं पहुँचे।

Tuesday, September 11, 2007

'इराक़ में सैनिकों की बढ़ोतरी कारगर'

इराक़ में अमरीकी सेना के शीर्ष कमांडर जनरल डेविड पेट्रास का कहना है कि इराक़ में सैनिकों की संख्या बढ़ाने के सभी उद्देश्य ' काफी हद तक ' पूरे हो गए हैं और ऐसे में जल्दी सेनाएं वापस बुलाना सही नहीं होगा।

अमरीकी कांग्रेस के समक्ष बयान देते हुए पेट्रास ने कहा कि इराक़ में फरवरी के बाद तेज़ हुई हिंसा में अब कमी आई है।

जनरल पेट्रास और इराक़ में अमरीकी राजदूत रेयान क्राकर दोनों ही कांग्रेस की एक समिति के समक्ष बयान दे रहे हैं।

इस सुनवाई को राष्ट्रपति जॉर्ज बुश की इराक़ नीति के मद्देनज़र अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कांग्रेस की विदेश मामलों की समिति और सशस्त्र सेना समिति के समक्ष बयान देते हुए पेट्रास ने कहा कि फ़रवरी के बाद हिंसा बढ़ी। इस पर नियंत्रण के लिए सैनिकों की संख्या बढ़ाई गई और इसके कारण हमले और जातीय हिंसा में कमी आई है।

उन्होंने ये भी कहा कि 2008 के मध्य तक तीस हज़ार के क़रीब अमरीकी सैनिक वापस बुलाए जा सकते हैं जिसमें से 200 हज़ार सितंबर में वापस हो सकते हैं।

पेट्रास ने माना कि इराक़ में सुरक्षा स्थिति अत्यंत कठिन है।

पेट्रास के बाद बयान देते हुए रॉकर ने कहा कि इस तथ्य पर भरोसा किया जा सकता है कि अमरीका इराक़ में निर्धारित अपने लक्ष्य पूरे कर लेगा।

इराक़ में हिंसा

उधर इराक़ में ताज़ा हिंसा में कम से कम आठ अमरीकी सैनिक मारे गए हैं।

पश्चिमी बग़दाद के समारा में अमरीकी सैनिकों ने अल क़ायदा के 12 लड़ाकों को मारने और तीन को बंदी बनाने का भी दावा किया है।

अमरीकी सैनिकों की मौत ऐसे समय में हुई है जब इराक़ के प्रधानमंत्री नूरी अल मलिकी ने संसद में कहा है कि अमरीकी सेना की मदद के बिना इराक़ी सेना इराक़ में शांति व्यवस्था कायम नहीं कर सकती है।

पेट्रास के बयान से घंटो पहले संसद को संबोधित करते हुए मलिकी ने भी कहा कि अमरीकी सेनाओं की बढ़ोतरी से बग़दाद के आसपास के इलाक़े में हिंसा मॆं कमी आई है।

Monday, September 10, 2007

इस्लामाबाद पहुंचे नवाज़ शरीफ़

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ सात वर्षों तक निर्वासित जीवन बिताने के बाद इस्लामाबाद पहुंच गए हैं।

लंदन से पीआईए की उड़ान संख्या 786 से चले शरीफ़ अब इस्लामाबाद एयरपोर्ट पहुंच गए हैं जहां एयरपोर्ट को सील कर दिया गया और सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं।

देश में सार्वजनिक रैलियों पर प्रतिबंध लगा दिया है और एयरपोर्ट को चारों ओर से सुरक्षा बलों ने घेर रखा है।

इस्लामाबाद एयरपोर्ट के रास्ते में पुलिस ने अवरोध लगा दिए हैं और हर जगह पुलिसकर्मी तैनात है क्योंकि बड़ी संख्या में लोग नवाज़ शरीफ़ का स्वागत करने एयरपोर्ट जाना चाहते हैं।

बीबीसी संवाददाता शाहज़ेब ज़िलानी के अनुसार कल रात नवाज़ शरीफ़ की पार्टी मुस्लिम लीग नवाज़ के कार्यालयों पर छापे मारे गए और कई लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है।

कहा जा रहा है कि नवाज़ शरीफ़ इस्लामाबाद पहुंचने के बाद एक बड़े जूलूस के साथ लाहौर जाना चाहते हैं लेकिन सैनिक सरकार कोशिश कर रही है ऐसा कोई जूलूस आयोजित न हो।

उधर पाकिस्तान के अख़बारों में कई तरह के बयान है जिसमें कयास लगाया गया है कि शरीफ़ की वापसी के बाद उनके साथ क्या किया जाएगा।

इस संबंध में अलग अलग संभावनाएं व्यक्त की जा रही है। सरकारी मंत्रियों के अलग अलग बयान आ रहे हैं जिसके अनुसार शरीफ़ को गिरफ्तार किया जा सकता है या फिर उन्हें किसी अन्य विमान से वापस ब्रिटेन या किसी और देश भेजा जा सकता है।

हालांकि इन सभी संभावनाओं के साथ सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को नज़रअंदाज़ नही करना चाहिए जिसके तहत नवाज़ शरीफ़ को वापस आने की अनुमति दी गई है।

नवाज़ की रवानगी

नवाज़ शरीफ़ रविवार की देर रात पीआईए के विमान से लंदन से इस्लामाबाद रवाना हुए हैं लेकिन उनके भाई शाहबाज़ शरीफ़ साथ नहीं गए हैं।

नवाज़ शरीफ़ ने लंदन के हीथ्रो हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बातचीत में कहा कि यदि उन्हें गिरफ़्तार किया गया तो यह देश के स्वतंत्रता के लिए छोटी सी कीमत होगी।

दूसरी ओर शाहबाज़ शरीफ़ ने बताया है कि नवाज़ शरीफ़ ने उन्हें अभी पाकिस्तान जाने से मना किया है।

बातचीत में शाहबाज़ शरीफ़ ने कहा कि वे तो पाकिस्तान जाना चाहते थे लेकिन उनके बड़े भाई नवाज़ शरीफ़ ने मना कर दिया।

उन्होंने कहा, " मैंने बड़ी कोशिश की लेकिन उनका हुक्म है। और वो नहीं मान रहे। मैं इससे मायूस हूँ। लेकिन मेरे लीडर ने मुझे सख़्ती से रोका है। मैं क्या कर सकता हूँ।"

लेकिन उन्होंने उम्मीद जताई कि वे बहुत जल्दी ही पाकिस्तान जाएँगे।

उनका कहना था कि ये अहम मौक़ा है, इतने सालों बाद अपने वतन के विमान में बैठ रहा हूँ।

ग़ौरतलब है कि कुछ दिन पहले पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें स्वदेश लौटने की अनुमति दे दी थी। 1999 में नवाज़ शरीफ़ का तख़्ता पलट दिया गया था और अगले साल उन्हें पाकिस्तान से निर्वासित कर दिया गया था।
नवाज़ शरीफ़ की वापसी ऐसे समय में हो रही है जब पाकिस्तान में राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के लिए स्थितियां बेहतर नहीं हैं।

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश इफ्तिख़ार चौधरी को बर्खास्त करने के मामले में लोगों का ज़बर्दस्त विरोध झेलना पड़ा। बाद में सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के तहत न्यायाधीश को फिर बहाल कर दिया गया।

अब सुप्रीम कोर्ट ने नवाज़ शरीफ़ की वापसी की अनुमति दी है और आने वाले दिनों में पाकिस्तान पीपुल्स लीग की नेता बेनज़ीर भुट्टो भी वापस आने की कोशिश में है।

मुशर्रफ़ के लिए नवाज़ शरीफ़ की वापसी एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है।

Saturday, September 8, 2007

'अमरीका इस्लाम क़बूल कर ले'

अल क़ायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन तीन वर्षों में पहली बार वीडियो टेप में दिखे हैं। इस टेप में अमरीकियों से इस्लाम अपनाने की अपील की गई है ताकि इराक़ में लड़ाई ख़त्म हो सके।

टेप का परीक्षण करने वाले अमरीकी विशेषज्ञों का कहना है कि उन्हें विश्वास है कि टेप में सुनाई दे रही आवाज़ ओसामा बिन लादेन की ही है।

अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि टेप से स्पष्ट है कि इराक़ में अभी डटे रहने की ज़रूरत है।

यह वीडियो 9/11 की घटना की छठी बरसी से ठीक पहले जारी किया गया है।

ख़तरनाक

बुश का कहना है कि टेप में जारी किया संदेश 'ख़तरनाक दुनिया के बारे में फिर आगाह करता है जिसमें हम रह रहे हैं'।

वो कहते हैं, "यह महत्वपूर्ण है कि हम अपनी सुरक्षा के लिए प्रतिबद्धता दिखाएं और अल-क़ायदा को जड़ें जमाने का मौका नहीं दे।"

उन्होंने कहा कि यह टेप याद दिलाता है कि इराक़ में एकजुटता की कितनी ज़रुरत है।

टेप का अध्ययन करने वाले अधिकारियों का कहना है कि टेप इस साल गर्मियों में शूट किया हुआ हो सकता है क्योंकि इस टेप में फ़्राँस के नए राष्ट्रपति निकोलाई सारकोज़ी और ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री गोर्डन ब्राउन का ज़िक्र किया गया है।

'दो विकल्प'

वीडियो टेप को संपादित करके अल जज़ीरा टीवी ने शुक्रवार शाम को प्रसारित किया है जिसकी अवधि आधे घंटे की है।

इस टेप में ओसामा बिन लादेन सफ़ेद और हल्के पीले रंग के कपडे़ पहने हुए दिखाई पड़ रहे हैं और उन्होंने सफ़ेद पगड़ी पहन रखी है। अल-क़ायदा नेता इस टेप में थके हुए दिखाई दे रहे हैं और उनकी दाढ़ी 2004 में जारी वीडियो की तुलना में छोटी और काली है।

नीचे एक बैनर है जिस पर संदेश लिखा है, "अमरीकी लोगों को शेख़ ओसामा बिन लादेन का एक संदेश"।

कई अमरीकी मीडिया संगठनों को मिले टेप में ओसामा ने अमरीका को खुल कर कोई धमकी नहीं दी है और ना ही हमलों का आह्वान जैसी कोई बात कही है।

टेप में कहा गया है कि अमरीकी इराक़ में लड़ाई ख़त्म करने के लिए बुश प्रशासन को राज़ी करने में विफल हो गए हैं।

एबीसी न्यूज़ को मिले टेप के ट्रांसक्रिप्ट में कहा गया है, "आपने एक भयंकर भूल की है, जिसने ये लड़ाई छेड़ी उसके ख़िलाफ़ न तो आपने कोई कार्रवाई की और ना ही कोई सज़ा दी।"

इसमें आगे कहा गया है, "आपने बुश को उनका पहला कार्यकाल पूरा करने की अनुमति दी और आश्चर्य ये है कि उन्हें दूसरे कार्यकाल के लिए चुन लिया, जिससे आपने उन्हें स्पष्ट तौर पर इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान में हमारे लोगों की हत्या करने के लिए अधिकृत किया।"

लोकतंत्र

लादेन के इस कथित टेप में लोकतांत्रिक प्रणाली पर भी प्रहार किया गया है।

टेप में इराक़ युद्ध को समाप्त करने के दो उपाय सुझाए हैं, "एक तो यह कि हमारा पक्ष हमले तेज़ कर दे और ज़्यादा लोगों को मारना शुरु कर दे और दूसरा यह कि अमरीकी लोग लोकतंत्र को ख़ारिज कर इस्लाम स्वीकार कर लें।"

टेप में कहा गया है, "यह अब आपको और पूरी दुनिया को स्पष्ट हो गया है कि लोकतांत्रिक प्रणाली अक्षम हो गई है, यह किस कदर बड़े कॉरपोरेट घड़ानों के हितों के लिए आम लोगों के हितों के साथ-साथ सैनिकों और आबादी की क़ुर्बानी देकर उनके ख़ून से खिलवाड़ करती है।"

'नई साजिश'

संवाददाताओं का कहना है कि नए वीडियो से उन अफ़वाहों पर विराम लग सकता है जिसके मुताबिक अल-क़ायदा प्रमुख की मौत हो चुकी है।

अमरीकी आंतरिक सुरक्षा विभाग ने कहा है कि वीडियो जारी होने से किसी नए ख़तरे की संभावना की कोई पक्की सूचना नहीं है।

लेकिन ख़ुफ़िया विभाग सीआईए के निदेशक माइकल हेडन ने शुक्रवार को न्यूयॉर्क में विदेश संबंधों पर समिति के समक्ष चेतावनी दी कि अल-क़ायदा अमरीका पर नए हमले की साजिश रच रहा है।

Friday, September 7, 2007

बारूदी सुरंग विस्फोट में तीन मारे गए

आंध्र प्रदेश के नेल्लौर में शुक्रवार तड़के हुए बारूदी सुरंग विस्फोट में तीन लोग मारे गए हैं।

निशाना पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता एन जनार्दन रेड्डी के काफ़िले को बनाया गया लेकिन वो और उनकी पत्नी एन राज्यलक्ष्मी बाल-बाल बच गए।

जनार्दन रेड्डी विशाखापत्तनम से सांसद हैं जबकि राज्यलक्ष्मी राज्य सरकार में शिक्षा मंत्री हैं।

आंध्र प्रदेश के गृह मंत्री के जना रेड्डी ने बताया कि मारे गए लोग जनार्दन रेड्डी के समर्थक थे जो उनके साथ यात्रा कर रहे थे।

उनका कहना था, "हमें इस हमले के पीछे प्रतिबंधित माओवादी संगठन का हाथ होने का संदेह है।"

बारूदी सुरंग नेल्लौर और तिरूपति के बीच विद्यानगर के निकट एक पुलिया के नीचे रखा गया था।

विस्फोट

जैसे ही 50 गाड़ियों का काफ़िला इस पुलिया के ऊपर से गुजरने लगा, रिमोट कंट्रोल से बारूदी सुरंग में विस्फोट कर दिया गया।

हमले में वीआईपी दंपत्ति को ही निशाना बनाया गया था क्योंकि विस्फोट उसी समय हुआ जब लालबत्ती लगी गाड़ी पुलिया पर पहुँची थी।

जनार्दन रेड्डी तिरूपति स्थित श्री वेंकटेश्वर विश्वविद्यालय जा रहे थे जहाँ उन्हें डॉक्टरेट की उपाधि दी जानी थी।

पुलिस का कहना है कि विस्फोट करने के बाद एक या अधिक व्यक्ति वहाँ से भाग खड़े हुए जिनकी धर-पकड़ के लिए अभियान शुरू कर दिया गया है।

पिछले एक साल में माओवादियों का यह सबसे बड़ा हमला है।

जनार्दन रेड्डी 1990 से 1992 के बीच मुख्यमंत्री रहे थे। उन्हीं के कार्यकाल के दौरान माओवादी संगठन पीपुल्स वार को प्रतिबंधित किया गया था।

अक्तूबर, 2004 में पीपुल्स वार और माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर (एमसीसी) का आपस में विलय हो गया और भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नाम से नया संगठन बना।

Thursday, September 6, 2007

राज्यसभा में परमाणु समझौते पर चर्चा

भारत और अमरीका के बीच परमाणु समझौते को लेकर केंद्र की यूपीए सरकार से वामपंथियों और विपक्षी दलों की नाराज़गी के बीच गुरुवार को राज्यसभा में इस विषय पर चर्चा होनी है।

राज्यसभा की कार्यसूची के अनुसार दोपहर बाद इस विषय पर चर्चा होगी।

एक ओर सरकार ने इस समझौते की पड़ताल के लिए वामपंथियों के साथ एक समिति के गठन की घोषणा की है।

दूसरी ओर समझौते पर पहले से सवाल उठा रहे मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी और नवगठित तीसरे मोर्चे की नाराज़गी इस समिति के गठन से और भी बढ़ गई है।

भाजपा और तीसरे मोर्चे ने इस सरकार और वामपंथी दलों की समिति के स्थान पर संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के गठन की माँग तेज़ कर दी है।

इसी माँग को लेकर भाजपा और तीसरे मोर्चे ने बुधवार को संसद के दोनों सदनों में जमकर हंगामा किया और दोनों सदनों की कार्यवाही नहीं चलने दी।

हालांकि यूपीए सरकार की ओर से प्रणव मुखर्जी कह चुके हैं कि जेपीसी के गठन का कोई प्रश्न ही नहीं है। वामपंथी नेता भी इसके लिए राज़ी नहीं हैं।

उल्लेखनीय है कि भारत ने हाल ही में अमरीका के साथ परमाणु समझौते को अंतिम रुप दिया है और अब इसे अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) और परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों (एनएसजी) के साथ बात करके आगे बढ़ाना है।

चेतावनी

यूपीए सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे वामपंथी दलों ने इस समझौते पर बड़ी शंकाएँ ज़ाहिर करते हुए कहा है कि जब तक उनकी शंकाएँ दूर नहीं हो जातीं सरकार को समझौते पर आगे नहीं बढ़ना चाहिए।

मंगलवार को वामपंथी नेताओं ने अपनी चेतावनी को दोहराते हुए सरकार से एक बार फिर कहा है कि यदि सरकार समिति की रिपोर्ट आए बिना समझौते की दिशा में क़दम बढ़ाती है तो उसे 'परिणाम भुगतने के लिए' तैयार रहना चाहिए।

वामपंथी साफ़ कह चुके हैं कि सरकार को अभी आईएईए के साथ इस विषय पर बातचीत शुरु नहीं करनी चाहिए।

उधर भाजपा का कहना है कि सरकार को इस समझौते की पड़ताल के लिए जेपीसी का गठन करना चाहिए क्योंकि सरकार और वामपंथियों की समिति से बात नहीं बन सकती।

भाजपा, शिवसेना और तीसरे मोर्चे का कहना है कि सरकार का यह क़दम संसद और राष्ट्र का अपमान है।

वामपंथियों के रुख़ और विपक्ष की नाराज़गी के बीच सरकार रास्ता किस तरह निकालेगी यह अभी स्पष्ट नहीं हो पा रहा है और ऐसे में गुरुवार को राज्यसभा में चर्चा किस तरह होगी यह भी साफ़ नहीं है।

Wednesday, September 5, 2007

परमाणु समझौते पर 15 सदस्यों की समिति

भारत और अमरीका के बीच हुए परमाणु समझौते पर वाम दलों की आपत्तियों पर चर्चा के लिए गठित समिति कमिटी के सदस्यों की घोषणा कर दी गई है।

संवाद समिति पीटीआई के अनुसार विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी इसके संयोजक होंगे जबकि समिति में गठबंधन दलों के विभिन्न दलों के 15 सदस्य होंगे।

रिपोर्टों के अनुसार कांग्रेस और वाम दलों से छह छह सदस्य होंगे जबकि राष्ट्रीय जनता दल, द्रविड़ मुनेत्र कझगम और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के एक एक सदस्य होंगे।

मुखर्जी के अलावा कांग्रेस के एके एंटनी, पी चिदंबरम, कपिल सिब्बल, सैफुद्दीन सोज़ और पृथ्वीराज चौहान समिति में होंगे जबकि आरजेडी के लालू प्रसाद यादव, डीएमके के टी आर बालू और एनसीपी के शरद पवार इस समिति के सदस्य होंगे।

वाम दलों के छह सदस्यों में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के प्रकाश कारत और सीताराम येचुरी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के एबी बर्धन और डी राजा, फॉरवर्ड ब्लॉक के देबब्रत बिस्वास और रेवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के टी जे चंद्रचूड़न शामिल होंगे।

मुखर्जी ने कहा कि अभी इस समिति की पहली बैठक की तारीख तय नहीं हुई है। उन्होंने इन सवालों का जवाब भी नहीं दिया कि समिति की रिपोर्ट कब आएगी।

सरकार ने पिछले दिनों समिति के गठन की घोषणा की थी लेकिन इसके सदस्यों के नाम नही बताए थे।

वाम दलों का रुख कड़ा

समिति का गठन वाम दलों की आपत्तियों पर विचार के लिए किया गया है लेकिन कमेटी के गठन से पहले ही वाम दलों ने अपना रुख कड़ा कर रखा है।
परमाणु समझौते के विरोध के साथ ही वाम दलों ने अब अमरीका और अन्य दलों के साथ नौसैनिक अभ्यास का भी विरोध किया है और इसके ख़िलाफ़ व्यापक स्तर पर अभियान भी शुरु किया है।कोलकाता में बकायदा एक अभियान शुरु कर सैनिक अभ्यास का विरोध किया गया और वहीं वाम दलों के नेताओं ने साफ कहा कि वो परमाणु सौदे पर गठित समिति में भी सदस्यों को समझाने की कोशिश करेंगे कि यह समझौता देशहित में नही है

Tuesday, September 4, 2007

पाकिस्तान के रावलपिंडी में दो धमाके

पाकिस्तानी सेना का कहना है कि रावलपिंडी शहर में दो धमाके हुए हैं जिनमें कम से कम 15 लोग मारे गए हैं।

सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल वहीद अरशद का कहना था कि पहला धमाका रावलपिंडी के कैंट इलाक़े में एक बस में हुआ जिसमें कम से कम 10 लोग मारे गए हैं और कई अन्य घायल हुए हैं।

पुलिस का कहना है कि इस बस में सरकारी रक्षा कर्मचारी थे और उन्हें दफ़्तर ले जाया जा रहा था। इस धमाके से बस बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि इससे आसपास के कुछ लोगों को भी चोटें आईं हैं

इसके थोड़ी देर बाद दूसरा धमाका रावलपिंडी के फ़ौजी इलाक़े के एक बाज़ार में हुआ।

समाचार एजेंसियों का कहना है कि इस धमाके में पाँच लोग हताहत हुए हैं।

समाचार एजेंसी का कहना है कि ये धमाका एक मोटरसाइकिल में बंधे विस्फोटक की मदद से कराया गया।
ग़ौरतलब है कि जुलाई में लाल मस्जिद को खाली कराने के लिए की गई पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई के बाद चरमपंथी हमलों में बढोत्तरी हुई है।

Monday, September 3, 2007

बांग्लादेश में ख़ालिदा ज़िया गिरफ़्तार

बांग्लादेश के सैनिक शासन ने पूर्व प्रधानमंत्री ख़ालिदा ज़िया और उनके बेटे को जबरन वसूली और भ्रष्टाचार के आरोपों में गिरफ़्तार कर लिया है।

उनके वकील ने बताया कि ख़ालिदा ज़िया की ज़मानत की अर्जी नामंज़ूर कर दी गई और उन्हें मामले की सुनवाई तक जेल भेज दिया गया है।

उनके बेटे अराफ़ात रहमान कोको को सात दिन तक पूछताछ के लिए हिरासत में रखने का आदेश दिया गया है।

ख़ालिदा ज़िया और उनके छोटे बेटे कोको को कड़ी सुरक्षा के बीच सोमवार सुबह अदालत ले जाया गया था।

अदालत के चारों ओर बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात थे। दूसरी ओर ख़ालिदा ज़िया के हज़ारों समर्थक भी वहाँ जमा हो गए थे। ख़ालिदा बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की नेता हैं।

उन पर आरोप है कि जब वो प्रधानमंत्री थी तो उन्होंने दो सरकारी कंटेनर डिपो के ठेके देने में अनियमितताएँ बरतीं और इसमें उनके बेटे कोको ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल किया।

एक अन्य पूर्व प्रधानमंत्री शेख़ हसीना जुलाई से हिरासत में हैं और अब उन पर भी भ्रष्टाचार के नए आरोप लगाए गए हैं।

बांग्लादेश में जनवरी से आपातकाल लागू है और सेना समर्थित अंतरिम सरकार ने चुनाव स्थगित कर दिए हैं। साथ ही राजनीतिक गतिविधियों पर भी पाबंदी लगा दी है।

इसके बाद से अंतरिम सरकार ने भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ अभियान चला रखा है और 150 अधिक वरिष्ठ राजनीतिज्ञों को गिरफ़्तार कर लिया है।

शेख़ हसीना पर भी मामले

इसके पहले पूर्व प्रधानमंत्री शेख़ हसीना पर अपने कार्यकाल के दौरान रिश्वत लेने का मामला दर्ज किया गया था। उन पर कई अन्य मामले पहले से ही चल रहे हैं।

बांग्लादेश में भ्रष्टाचार निरोधक आयोग ने शेख़ हसीना पर एक निजी बिजली कंपनी से अवैध तरीके से चार लाख 35 हज़ार डॉलर की राशि लेने का आरोप लगाया है।

आयोगा का कहना है कि मामला 1996 से 2000 के बीच का है जब शेख़ हसीना सत्ता में थीं। इस संबंध में छह अन्य लोगों कि ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया है।

ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी सरकारी एजेंसी ने उनके ख़िलाफ़ मामला दर्ज कराया हो।

शेख़ हसीना के समर्थकों का आरोप है कि उन्हें फिर प्रधानमंत्री बनने से रोकने के लिए उन पर झूठे आरोप लगाए गए हैं।

Saturday, September 1, 2007

इलाहाबाद में हिंसा के बाद कर्फ्यू

उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद ज़िले में शुक्रवार की रात सांप्रदायिक तनाव पैदा होने और हिंसा भड़कने के बाद पाँच थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू लगा दिया गया है।

वहाँ एक संप्रदाय विशेष के धार्मिक ग्रंथ के अपमान की कथित अफ़वाह फैलने के बाद तनाव की स्थिति पैदा हो गई थी।

यह घटना करेली थाना क्षेत्र की है जहाँ बाद में पुलिस और भड़के लोगों के बीच हिंसक झड़पें हुई।

इस दौरान उग्र लोगों ने पुलिस पर पथराव किए और दोनों ओर से हवाई फायरिंग भी की गई। बाद में स्थितियों को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन को करेली समेत पाँच थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू लगाना पड़ा।

ज़िले के करेली, अतरसुइया, शाहगंज, कोतवाली और खुलदाबाद थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू लगा दिया गया है।

हालांकि पुलिस अधिकारियों ने बताया कि शनिवार सुबह तक स्थितियाँ नियंत्रण में आ गई थीं पर प्रशासन किसी भी तरह की लापरवाही और दोबारा तनाव भड़कने की स्थिति को रोकना चाहता है इसलिए इन क्षेत्रों में कर्फ्यू जारी रहेगा।

विवाद

उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक बृजलाल ने बताया कि यह तनाव तब भड़का जब किसी ने यह ख़बर फैलानी शुरू की कि करेली थाना क्षेत्र में स्थित काला राणा कब्रिस्तान में एक समुदाय विशेष के धर्म ग्रंथ के पन्ने फटे हुए पड़े हैं।

इस बात पर कुछ लोग भड़क उठे और देखते ही देखते विरोध स्वरूप बड़ी तादाद में लोग सड़कों पर उतर आए।

उग्र लोगों ने करेली थाने का घेराव कर लिया और पथराव शुरू कर दिया। इसके बाद दोनों ओर से हवाई फ़ायरिंग भी शुरू हो गई।

हालांकि इस घटना में किसी भी व्यक्ति की मौत नहीं हुई है पर पुलिस का कहना है कि वो किसी भी तरह की गुंजाइश नहीं रखना चाहती जिससे की क़ानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़े।

उधर कुछ स्थानीय लोगों ने बताया कि पिछले एक पखवाड़े के दौरान यह इस तरह की दूसरी घटना है जब किसी संप्रदाय विशेष की धार्मिक पुस्तक के अनादर की बात सामने आई है।

ग़ौरतलब है कि करेली मुस्लिम बाहुल्य इलाका है और सांप्रदायिक तनाव की दृष्टि से यह एक संवेदनशील क्षेत्र रहा है।