Wednesday, October 31, 2007

बर्मा की सेना में 'बच्चों की भर्ती'

एक अमरीकी मानवाधिकार संस्था का कहना है कि सेना में वयस्कों की कमी झेल रही बर्मा की सेना अब ज़बरदस्ती बच्चों को भर्ती कर रही है।

ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है कि बच्चों की उम्र 10 साल तक की है और उन्हें सेना में भर्ती के लिए या तो मारा-पीटा जाता है या फिर गिरफ़्तार करने की धमकी दी जाती है।

इससे पहले बर्मा ने कहा था कि वह बच्चों को सेना में भर्ती किए जाने से रोकने की दिशा में काम कर रही है।

ह्यूमन राइट्स वॉच ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से अपील की है बर्मा की सेना में बच्चों की कथित भर्ती के लिए उसे और दंडित किया जाना चाहिए।

झूठे दस्तावेज़

ह्यूमन राइट्स वॉच की रिपोर्ट 'सोल्ड टू बी सोल्जर्स' में कहा गया है कि बर्मा की सेना में हज़ारों बच्चे हैं।

रिपोर्ट कहती है कि बर्मा की सेना का कोई 20 प्रतिशत 18 वर्ष से कम उम्र के लोगों का है।

इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सेना के भर्ती दस्ते और सेना की ओर से तैनात असैनिक दलाल बच्चों को सार्वजनिक स्थल पर पकड़ रहे हैं। इन लोगों को सेना की ओर इनाम का लालच दिया गया है।
बर्मा के सैनिक
बर्मा की सेना पर मानवाधिकार हनन के आरोप हैं

भर्ती के लिए बच्चों को मारा-पीटा जाता है या फिर उन्हें गिरफ़्तार करने का डर दिखाया जाता है।

कहा गया है कि दलाल बच्चों को सड़कों, रेलवे स्टेशनों और बस स्टैंड जैसी जगहों से उठाकर सेना के भर्ती कार्यालय में ले जाकर बेच देते हैं।

वैसे सेना में भर्ती की न्यूनतम उम्र 18 वर्ष है। रिपोर्ट का दावा है कि सेना के अधिकारी नियमित रुप से दस्तावेज़ों में ग़लत जानकारियाँ भरते हैं और उनकी उम्र बढ़ाकर 18 दिखा दी जाती है।

रिपोर्ट में एक बच्चे के हवाले से कहा गया है कि उसे जब दूसरी बार सेना में भर्ती करने के लिए लाया गया तो उसे अपनी उम्र ग़लत बताने को कहा गया।

उसने कहा, "जब मैं 16 साल का था तो मुझे थप्पड़ मारकर कहा गया, तुम 18 साल के हो समझे, अपनी उम्र 18 बताओ।"

"मैं वापस घर जाना चाहता था और यह बात मैंने उनसे कही थी लेकिन उन्होंने मना कर दिया।"

अनदेखी

मानवाधिकार संस्था की रिपोर्ट में कहा गया है कि औसतन 18 हफ़्तों की ट्रेनिंग के बाद बच्चों को बटालियनों में भेज दिया जाता है।

उन्हें अक्सर सीधे युद्ध क्षेत्र में भी भेज दिया जाता है।

या फिर उन्हें गाँव और घर जलाने जैसे काम करने के लिए मज़बूर किया जाता है जो मानवाधिकार उल्लंघन के मामले हैं।

हाल ही में शांतिपूर्व प्रदर्शन कर रहे बौद्धभिक्षुओं के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई के बाद तो सरकार को सेना के लिए लोग मिलना और कठिन हो जाएगा

जो बेकर, ह्यूमन राइट्स वॉच की पैरवीकार

ह्यूमन राइट्स वॉच की पैरवीकार जो बेकर ने कहा, "सेना के पद भरने के लिए बर्मा सच में बच्चों की ख़रीदफ़रोख़्त कर रहा है।"

उन्होंने कहा, "सरकार से वरिष्ठ जनरल बच्चों की इस ज़बरदस्ती भर्ती को बर्दाश्त करते रहते हैं और वे नियम तोड़ने वालों को सज़ा नहीं देते।"

जो बेकर का कहना है कि सेना में काम करने की जो स्थिति है और जिस तरह कम तनख़्वाह मिलती है उसके चलते योग्य उम्मीदवार भी सेना में नहीं जाना चाहते।

उनका कहना है, "हाल ही में शांतिपूर्व प्रदर्शन कर रहे बौद्धभिक्षुओं के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई के बाद तो सरकार को सेना के लिए लोग मिलना और कठिन हो जाएगा।"

सेना के अधिकारी मानते हैं कि लोग सेना छोड़कर जा रहे हैं।

उधर बर्मा सरकार का कहना है कि उसने सेना में बच्चों की भर्ती के मसले को देखने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है।

जो बेकर इस समिति को 'पाखंड' बताते हुए कहती हैं कि सरकार को इस मामले में सीधी कार्रवाई करनी चाहिए और सेना से बच्चों को हटाना चाहिए।

इस बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बर्मा में मानवाधिकार की स्थिति पर चिंता बढ़ती जा रही है।

Tuesday, October 30, 2007

इसराइल के फ़ैसले से संयुक्त राष्ट्र असहमत

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने कहा है कि गज़ा पट्टी की पूरी आबादी को सज़ा देने का इसराइल का फ़ैसला स्वीकार नही किया जा सकता।

इसे लेकर इसराइल ने भी चिंता जताई है।

लगातार हो रहे रॉकेट हमलों के जवाब में इसराइल ने गज़ा पट्टी में पेट्रोल और डीज़ल की आपूर्ति कम करना शुरु कर दिया है।

पिछले जून में प्रतिद्वंद्वी फ़लस्तीनी गुट फ़तह पर जीत के बाद से गज़ा पट्टी पर हमास का कब्जा है।

गज़ा में पेट्रोल और डीज़ल की आपूर्ति कम करने के फ़ैसले को इसराइल के अटॉर्नी जनरल की मंज़ूरी मिली हुई है।

लेकिन अटॉर्नी जनरल ने गज़ा पर पड़ रहे मानवीय असर का आकलन किए बिना वहाँ बिजली की आपूर्ति घटाने को मंज़ूरी देने से इनकार कर दिया है।

उल्लेखनीय है कि पेट्रोल और डीज़ल के लिए गज़ा पट्टी पूरी तरह इसराइल पर निर्भर करता है जबकि उसकी आधी बिजली इसराइल से आती है।

इसराइल का कहना है कि गज़ा को ईंधन में 15 प्रतिशत की कटौती हमास पर दबाव बनाने का एक अहिंसक तरीक़ा है।

इसराइल ने कहा है कि मुख्य अस्पतालों के लिए पर्याप्त बिजली आपूर्ति की जाती रहेगी और गज़ा के एकमात्र बिजली घर में ईंघन की आपूर्ति जारी रहेगी।

मानवीय त्रासदी

संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता ने महासचिव का बयान पढ़कर सुनाया है। इसमें उन्होंने फ़लस्तीनी चरमपंथियों के रॉकेट हमलों की निंदा करते हुए इसे तत्काल रोकने को कहा है।
बान की मून
मून ने कहा है कि सामूहिक सज़ा कोई हल नहीं हो सकता

लेकिन उन्होंने कहा है कि वे यह भी मानते हैं कि सज़ा देने के लिए इसराइल ने जो क़दम उठाया है उसका असर पूरे गज़ा के लोगों पर पड़ेगा।

उन्होंने कहा है, "ईंधन में कटौती से गज़ा के 14 लाख लोगों की मानवीय त्रासदी में बढ़ोत्तरी होगी।"

बान की मून ने कहा है, "सामूहिक रुप से सज़ा देना कोई हल नहीं हो सकता।"

अपने प्रतिबंधों के तहत इसराइल ने बिजली की लाइनों में से एक को 15 मिनट के लिए बंद कर दिया था और यदि इसके बाद भी रॉकेट हमले जारी रहे तो यह कटौती दो घंटो तक बढ़ाए जाने की योजना है।

लेकिन इसराइल के अटॉर्नी जनरल मेनाहम मेज़ाउज़ ने कहा है कि जब तक संभावित मानवीय असर का आकलन नहीं कर लिया जाता तब तक बिजली की कटौती को मंज़ूरी नहीं दी जा सकती।

हालांकि उन्होंने ईंधन में कटौती को मंज़ूरी दे दी है।

इसराइल और फ़लस्तीनी मानवाधिकार समूहों ने इस कटौती के ख़िलाफ़ इसराइली सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाएँ दायर की हैं।

इस बीच गज़ा पर शासन कर रहे हमास गुट और कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने इस कटौती की निंदा की है।

हालांकि गज़ा में इसराइल की ईंधन कटौती का असर अभी गज़ा के लोगों पर दिख नहीं रहा है।

Monday, October 29, 2007

संसदीय समिति के समक्ष सेन की पेशी

भारत-अमरीका परमाणु समझौते का विरोध करने वालों को 'हैडलेस चिकन' बताने वाले अमरीका में भारत के राजदूत रोनेन सेन सोमवार को लोकसभा के समझ पेश होंगे और उनसे विशेषाधिकार समिति जवाब तलब करेगी।

सेन ने रिडीफ़ डॉट कॉम को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि '' इसे (परमाणु समझौता) यहाँ राष्ट्रपति और वहाँ कैबिनेट ने पारित किया, तो फिर सिरकटे मुर्गे (हेडलेस चिकन) की तरह क्या फड़फड़ाना।''

रोनेन सेन के बयान पर संसद के दोनों सदनों में भारी हंगामा हुआ था और सदन की कार्यवाही कई दिन तक प्रभावित रही थी।

इस मुद्दे पर विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी को सफ़ाई देनी पड़ी थी।

प्रणव मुखर्जी ने राजदूत का बचाव करते हुए कहा था कि "उनके बयान को ग़लत तरीक़े से पेश किया गया है और उन्होंने अपने बयान के लिए माफ़ी माँग ली है।"

रोनेन सेन का बयान विदेश मंत्री ने संसद में पढ़कर सुनाया था, जिसमें उन्होंने कहा था, "मैंने अनौपचारिक बातचीत में अपने विचार प्रकट किए थे और मेरे विचार किसी व्यक्ति या संस्था के बारे में नहीं बल्कि मीडिया के अपने कुछ दोस्तों के बारे थे, फिर भी अगर किसी की भावना को चोट पहुँची है तो मैं माफ़ी माँगता हूँ।"

लेकिन सांसदों के भारी विरोध को देखते हुए इस मामले को दोनों सदनों की विशेषाधिकार समितियों को सौंप दिया गया था।

लोक सभा के बाद दो नवंबर को राज्यसभा की विशेषाधिकार समिति रोनेन सेन से स्पष्टीकरण माँगेगी।

संविधान के जानकार सुभाष कश्यप का कहना है कि इस समिति में सत्ताधारी और विपक्षी दलों के सदस्य होते है और सभी को सवाल पूछने का अधिकार होता है।

समिति के सदस्य जो भी सवाल पूछेंगे और जो जवाब आएँगे, उनकी रिकार्डिंग होगी और उसके बाद विशेषाधिकार समिति निर्णय लेगी।

Saturday, October 27, 2007

माओवादी हमले में मरांडी के बेटे सहित 17 की मौत

झारखंड के गिरिडीह ज़िले में माओवादियों के एक हमले में राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी के बेटे अनूप मरांडी समेत 17 लोगों की मौत हो गई है।

गिरिडीह के पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह ने बताया कि गिरिडीड से अस्सी किलोमीटर दूर चिलकारी गांव में एक समारोह के दौरान ये हमला हुआ था।

सिंह के अनुसार इस हमले में 17 लोगों की मौत हो गई है और दस से अधिक लोग घायल हैं।

शुक्रवार को आधी रात के बाद जब हमला हुआ तो वहाँ बाबूलाल मरांडी के भाई नूनुलाल मरांडी भी थे लेकिन वे बच निकलने में सफल रहे।

बाबूलाल के पुत्र अनूप की कुछ ही दिनों पहले शादी हुई थी।

घायलों में दो महिलाएँ और एक पुलिसकर्मी शामिल है।

बाबूलाल मरांडी और उनका पूरा परिवार पहले से ही माओवादियों के हिट लिस्ट में है।

हमला

पुलिस अधिकारी सिंह के अनुसार वहाँ पिछले चार दिनों से जनजातीय फ़ुटबॉल प्रतियोगिता चल रही थी और शुक्रवार की रात पुरस्कार वितरण हुआ।

इसके बाद अनूप मरांडी और नूनुलाल मरांडी दोनों गाँव में ही रुक गए थे।

पुलिस अधिकारियों ने गाँव वालों के हवाले से बताया है कि रात को माओवादियों ने गाँव को घेर लिया और फ़ायरिंग करने लगे।

इस फ़ायरिंग में अनूप मरांडी सहित 14 लोग मारे गए जबकि नूनु मरांडी किसी तरह बच निकलने में सफल रहे।
पुलिस का कहना है कि बाबूलाल मरांडी और उनका पूरा परिवार पहले से ही माओवादियों की हिटलिस्ट में है और आमतौर पर इन लोगों को किसी गाँव में ठहरने की सलाह नहीं दी जाती।
बाबूलाल मरांडी झारखंड के पहले मुख्यमंत्री थे और पहले भारतीय जनता पार्टी में थे।
बाद में उन्होंने भाजपा छोड़ दी थी और झारखंड विकास मोर्चा नाम की पार्टी बना ली थी।
वे इस समय कोडरमा से निर्दलीय सांसद भी हैं।

Friday, October 26, 2007

प्रकृति को नुक़सान का जीवन पर असर

संयुक्त राष्ट्र की एक अहम रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रकृति को लगातार नष्ट किए जाने के कारण लोगों के स्वास्थ्य और संपत्ति पर असर हो रहा है।

'ग्लोबल इनवायरमेंट आउटलुक' में कहा गया है कि ज़्यादातर प्रवृत्तियाँ ग़लत दिशा में जा रही हैं।

पर्यावरण को होने वाले नुक़सान के लिए मुख्य रुप से कृषि भूमि को हो रही क्षति, जंगलों का कम होना, प्रदूषण, अत्यधिक मछली मारने और साफ़ पानी की कमी को दोषी ठहराया गया है।

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में कहा गया है कि इन प्रवृत्तियों को उलटने के लिए आवश्यक इच्छाशक्ति की ज़बरदस्त कमी है।

संयुक्त राष्ट्र की पर्यावरण की संस्था (यूनेप) के कार्यकारी निदेशक एचिम स्टेनर ने कहा, "ये समस्याएँ लगातार बनी हुई हैं और इनको सुलझाया नहीं जा सका है।"

उन्होंने कहा, "महासागरों में आक्सीजन रहित क्षेत्रों के बढ़ते जाने से लेकर पर्यावरण को लगातार हो रहे नुक़सान तक पुरानी समस्याएँ बनी हुई हैं और नई खड़ी होती जा रही हैं।"

पर्यावरण के नुक़सान से जो क्षति हो रही है वह हाल के दशक के मानव समाज की कई उपलब्धियों को छोटा बना रही है

बान की मून, महासचिव, संयुक्त राष्ट्र

यूनेप ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि समस्याओं का हल नहीं निकाले जाने से विकासशील देशों में लाखों लोगों का जीवन ख़तरे में पड़ गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि मछलियों की स्थिति ख़राब हो गई है, कृषि योग्य भूमि लगातार कम हो रही है (ख़ासकर अफ़्रीका में), लोगों को पर्याप्त पीने का पानी नहीं मिल रहा है और ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन बढ़ता जा रहा है।

इस रिपोर्ट की भूमिका में संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून ने लिखा है, "पर्यावरण के नुक़सान से जो क्षति हो रही है वह हाल के दशक के मानव समाज की कई उपलब्धियों को छोटा बना रही है।"

उन्होंने कहा है, "यह ग़रीबी के ख़िलाफ़ लड़ी जा रही लड़ाई के महत्व को घटा रही है और इससे विश्वशांति और सुरक्षा पर भी असर हो सकता है।"

जियो-4 नाम की इस रिपोर्ट में कुछ अच्छे क़दमों की ओर भी इशारा किया गया है इसमें अमेज़न के जंगलों की कटाई में कमी, पश्चिमी यूरोप में स्वच्छ हवा और ओज़ोन की परत को नुक़सान से बचाने के लिए होने वाले वैश्विक समझौतों का ज़िक्र किया गया है।

लेकिन कुल मिलाकर वैश्विक प्रवृत्तियों को लेकर निराशा ही जताई गई है।

Thursday, October 25, 2007

भारत-चीन-रूस प्रतिबंध के ख़िलाफ़

बर्मा में हाल के घटनाक्रम के मद्देनज़र उस पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने का भारत, चीन और रूस ने कड़ा विरोध किया है।

भारत ने बर्मा में आर्थिक प्रतिबंध का विरोध करते हुए वहाँ राजनीतिक सुधारों और आमसहमति बनाने के प्रयासों को बढ़ावा देने का प्रस्ताव किया था जिसका चीन और रूस ने समर्थन किया।

इसके अलावा तीनों देशों ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों को लोकतांत्रिक बनाने और विश्व व्यवस्था को 'न्यायपूर्ण और तर्कसंगत' बनाने पर ज़ोर दिया है।

तीनों देशों के विदेश मंत्रियों की चीन में हुई बैठक के बाद जारी साझा बयान में 'आतंकवाद से संयुक्त राष्ट्र के दिशा निर्देशों के अनुरूप' मिलकर लड़ने की बात कही है।

इसके अलावा चीन और रूस ने संयुक्त राष्ट्र में भारत की भूमिका बढ़ाने पर का समर्थन किया है लेकिन दोनों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्यता की बात नहीं की है।

प्रतिबंध का विरोध

भारत-चीन और रूस के बीच यह तीसरी त्रिपक्षीय वार्ता है।
तीनों देशों का सहयोग किसी देश या संगठन के ख़िलाफ़ नहीं है, इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय सामंजस्य को बढ़ावा देना और आपसी समझ को बढ़ाना है

साझा बयान

इसमें भारत के विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी, रूस के सर्गेई लैवरोव और चीन के याँग जिएची ने कई अहम मसलों पर बातचीत की और अंत में एक संयुक्त पत्रवार्ता में साझा बयान जारी किया।

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार संयुक्त पत्रवार्ता में भारत के विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा, "संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने बर्मा में सभी पक्षों से बातचीत की जो प्रक्रिया शुरु की है हम मानते हैं कि उसे बढ़ावा दिया जाना चाहिए।"

तीनों देशों ने विश्व व्यवस्था को लोकतांत्रिक बनाने की बात कही है लेकिन स्पष्ट किया है कि इन तीन देशों का गठबंधन किसी देश विशेष या संगठन के ख़िलाफ़ नहीं है।

साझा बयान में कहा गया है, "तीनों देशों का सहयोग किसी देश या संगठन के ख़िलाफ़ नहीं है, इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय सामंजस्य को बढ़ावा देना और आपसी समझ को बढ़ाना है।"

तीनों देशों के विदेश मंत्रियों ने कहा है कि भारत-चीन और रूस के विकास से क्षेत्र को फ़ायदा होगा वहीं इससे विश्व को बहुध्रुवीय बनाने की प्रक्रिया को लाभ मिलेगा।

Wednesday, October 24, 2007

सू ची की रिहाई के लिए आज होंगे प्रदर्शन

बर्मा में लोकतंत्र समर्थक नेता ऑंग सान सू ची की रिहाई की माँग करते हुए प्रदर्शनकारी बुधवार को दुनिया भर में 12 शहरों में रैलियाँ करने जा रहे हैं।

ये प्रदर्शन विभिन्न देशों में स्थित चीन के दूतावासों के बाहर होंगे। रैलियाँ सिडनी, बैंकॉक, केप टाउन, वियना, बर्लिन, पेरिस, लंदन, डबलिन, न्यूयॉर्क, वॉशिंगटन, टोरंटो और ब्रासिलिया।

इन रैलियों का आयोजन कर रहे लोकतंत्र समर्थक मानते हैं कि सू ची की रिहाई में चीन की अहम भूमिका हो सकती है क्योंकि चीन के बर्मा के सैन्य शासकों के साथ क़रीबी रिश्ते हैं।

हाल में बर्मा में लोकतंत्र के समर्थन में हुए प्रदर्शनों के बाद बर्म के सैन्य शासकों ने सू ची के साथ बातचीत करने की पेशकश रखी थी।

लेकिन उन्होंने शर्त भी लगाई थी कि सू ची बर्मा के ख़िलाफ़ लगे प्रतिबंधों को दिया गया अपना समर्थन वापस लें।

नोबेल विजेताओं की अपील

ये लोग संयुक्त राष्ट्र पर भी दबाव बनाएँगे ताकि वह वहाँ पिछले महीने लोकतंत्र की माँग को लेकर प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ हुई हिंसक कार्रवाई के विरुद्ध कदम उठाए।

उधर छह महिला नोबेल पुरस्कार विजेताओं ने संयुक्त राष्ट्र से अपील की है कि ऑंग सान सू ची की रिहाई के लिए निर्णायक कदम उठाए।
बर्मा में प्रदर्शन
बर्मा में हाल में लोकतंत्र के पक्ष में प्रदर्शन हुए थे और प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ हिंसक कार्रवाई हुई थी

संयुक्त राष्ट्र को लिखे एक पत्र में जिन नोबेल विजेताओं ने ये अपील की है, वे हैं - डॉक्टर जोडी विलियम्स, शिरीन एबादी, वाँगारी माथाई, रिगोबर्टा मैंचू टुम, बैटी विलियम्स और माईरीड कोरिगन मैक्गव्यर।

बीबीसी संवाददाता माइक वूलरिज का कहना है कि ये प्रदर्शन ऑंग सान सू ची के जेल में 12 साल पूरे होने के मौक़े पर हो रहे हैं।

वर्ष 1990 में हुए चुनावों में ऑंग सान सू ची की नेशनल लीग फ़ॉर डेमोक्रेसी ने चुनावों में स्पष्ट जीत हासिल की थी लेकिन बर्मा के सैन्य शासकों ने सत्ता उन्हें सौंपने से इनकार कर दिया।

Tuesday, October 23, 2007

तेज़ी से बढ़ रही हैं ग्रीनहाउस गैसें

एक नए वैज्ञानिक शोध से पता चला है कि वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैस कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा उम्मीद से कहीं अधिक तेज़ी से बढ़ रही है।

'ग्लोबल कार्बन प्रॉजेक्ट' के शोधकर्ताओं का कहना है कि कार्बन डाइऑक्साइड की बढ़ती मात्रा आश्चर्यजनक नहीं है लेकिन इसके कारण और जिस गति से ये बढ़ रहा है, वो अत्यंत चिंताजनक है।

'ग्लोब कार्बन प्रोजेक्ट' के कुछ वैज्ञानिक जलवायु परिवर्तन पर बने अंतरसरकारी समिति यानी आईपीसीसी ( इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज) से भी जुड़े हुए हैं।

दो प्रमुख कारण

शोध के अनुसार वर्ष 2000 के बाद ग्रीनहाउस गैस कार्बनडाई डाइऑक्साइड की मात्रा में उम्मीद से 35 प्रतिशत अधिक तेज़ी से बढ़ोतरी हो रही है जो गहरी चिंता का विषय है।

यह नया शोध अमरीका की 'नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेस' में प्रकाशित हुआ है। इसमें बढ़ती ग्रीनहाउस गैसों के लिए दो प्रमुख कारण गिनाए गए हैं।
दक्षिणी समुद्र की हवाओं में आ रहे परिवर्तन और सूखे के कारण समुद्र और जंगलों की कार्बन 2000 के बाद डाइऑक्साइड सोखने की क्षमता में कमी आ रही है

कोरिन क्वेरे, रिपोर्ट लेखक

इसमें जीवाश्म ईंधनों के लापरवाही से इस्तेमाल के साथ-साथ पृथ्वी द्वारा ग्रीनहाउस गैसों को सोखने की क्षमता में आ रही कमी को बढ़ रही ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा के लिए ज़िम्मेदार बताया गया है।

रिपोर्ट में चीन का विशेष तौर पर नाम लिया गया है जो कोयले जैसे जीवाश्म ईंधन का अधिक से अधिक उपयोग कर रहा है।

आईपीसीसी के सदस्य और इस रिपोर्ट को लिखने वाले कोरिन ले क्वेरे का कहना है कि दक्षिणी समुद्र की हवाओं में आ रहे परिवर्तन और सूखे के कारण समुद्र और जंगलों की कार्बन डाइऑक्साइड सोखने की क्षमता में कमी आ रही है।

क्वेरे के अनुसार बदलते मौसम के साथ समुद्र गर्म हो रहे हैं और उनकी कार्बन डाइऑक्साइड सोखने की क्षमता कम हो रही है।

समुद्र की इस घटती क्षमता को न केवल पृथ्वी के दक्षिणी भूभाग में रिकार्ड किया गया है बल्कि एक अन्य शोध में यह भी दिखाया गया है कि पिछले दस वर्षों में उत्तरी भूभाग में भी समुद्र की कार्बन डाइऑक्साइड सोखने की क्षमता घट रही है।

Monday, October 22, 2007

परमाणु क़रार पर यूपीए-वामदलों की अहम बैठक

अमरीका के साथ प्रस्तावित परमाणु क़रार पर चर्चा के लिए बनी यूपीए-वामदलों की संयुक्त समिति की सोमवार को एक महत्वपूर्ण बैठक हो रही है।

ये बैठक ऐसे समय में हो रही है जब संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन ( यूपीए) को बाहर से समर्थन दे रहे वामदल माँग कर रहे हैं कि सरकार इस संबंध में स्पष्ट बयान दे कि परमाणु सौदा रद्द कर दिया गया है या ठंडे बस्ते में है।

इस लिहाज से माना जा रहा है कि सोमवार को हो रही समिति की बैठक निर्णायक हो सकती है।

ग़ौरतलब है कि सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे वामदल लगातार अमरीका के साथ संभावित परमाणु समझौते का विरोध करते आ रहे हैं।

वामदलों का कहना है कि जिन शर्तों और सीमाओं में परमाणु क़रार हो रहा है उससे भारत के हित और संप्रभुता पर प्रतिकूल असर पड़ेगा और विदेश नीति भी प्रभावित होगी।

ऐसी स्थिति में भारत के हितों से समझौता करने के बजाय इस परमाणु समझौते को फिलहाल टाल दिया जाना चाहिए।

संयुक्त समिति

वामदलों और केंद्र की यूपीए सरकार के बीच पैदा हुए इसी गतिरोध को ख़त्म करने के लिए ही पिछले दिनों एक संयुक्त समिति का गठन किया गया था ताकि परमाणु समझौते पर विस्तार से चर्चा करके एक स्पष्ट समझ बनाई जा सके।

विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी की अध्यक्षता में होने वाली यह बैठक परमाणु सौदे पर वाम दलों की चिंताओं पर चर्चा के लिए होती हैं।

हालांकि पिछले कुछ दिनों से वाम दल जिस तरह के बयान दे रहे हैं उससे लगता है कि अब इन बैठकों का सिलसिला लंबा नहीं चलेगा।

सौदे के बारे में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पिछले दिनों हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप सम्मेलन में कहा था कि ये जीवन का अंत नहीं है लेकिन बाद में उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में यह भी कहा था कि फिलहाल सौदा ठंडे बस्ते में नहीं डाला गया है।

साफ़ करो रुख़

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव एबी बर्धन ने साफ कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सरकार साफ कहेगी कि सौदे को फिलहाल टाल दिया गया है।

इन बैठकों पर परमाणु क़रार ही नहीं, वर्तमान केंद्र सरकार का भविष्य भी टिका हुआ है। अगर परमाणु सौदे पर यूपीए और वाम दलों के बीच कोई सहमति नहीं बनती है तो इसका असर सरकार पर भी पड़ेगा।

इस मुद्दे पर दोनों ही पक्ष एक-दूसरे को धमकियां दे चुके हैं और सरकार गिराने की भी बात हो चुकी है।

आरोप-प्रत्यारोप और वाद-विवाद के बाद अभी भी सरकार कई तरह के बयान दे रही है और लगता है कि वो सरकार के साथ-साथ परमाणु सौदे को भी बचाने की कोशिश में लगी हुई है।

Saturday, October 20, 2007

कराचीः कोई अहम सुराग नहीं, जाँच जारी

पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो के काफ़िले पर गुरुवार रात हुए हमले के संबंध में अभी तक जाँचकर्ताओं को कोई ठोस सुराग नहीं मिल सका है।

ग़ौरतलब है कि बेनज़ीर भुट्टो के काफ़िले पर गुरुवार रात हुए आत्मघाती हमले में 130 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई थी और लगभग 300 लोग घायल हो गए थे।

हालांकि पूरे मामले की जाँच के प्रमुख मंज़ूर मुग़ल ने बीबीसी को बताया कि विस्फोट की जगह से एक संदिग्ध व्यक्ति का सिर मिला है। इस व्यक्ति की अभी तक शिनाख़्त नहीं हो सकी है।

मज़ूर मुग़ल ने बताया कि आत्मघाती हमलों में आमतौर पर हमलावर का सिर सुरक्षित रहता है और इसी आधार पर विस्फोट की जगह के मिले सिर को जाँच के लिए सील कर लिया गया है।

उन्होंने बताया कि अमूमन इतना समय बीतने के बाद हमलों के संबंध में कुछ सुराग मिल ही जाते हैं पर इस बार ऐसा नहीं हुआ है।

पाकिस्तान के गृह सचिव सैयद कमाल शाह ने बीबीसी को बताया कि गुरुवार की घटना में आत्मघाती हमलावर ने काफ़िले को निशाना बनाया था और इस्तेमाल किया गया विस्फोटक पहले होते रहे धमाकों से अलग नहीं है।

अभी तक किसी संगठन ने इस हमले की ज़िम्मेदारी नहीं ली है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे धमाके की जाँच कर रहे हैं और ये भी पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि कहीं इस हमले के तार अफ़ग़ानिस्तान से सटे क़बायली इलाक़े से तो जुड़े नहीं हैं।

'सार्वजनिक करें नाम'
उधर पाकिस्तान के उप-सूचनामंत्री तारीक़ अज़ीम ने कहा है कि बेहतर होता अगर बेनज़ीर उन नामों का खुलासा करतीं जिनपर उन्हें हमलों के सिलसिले में शक है।


तारीक़ अज़ीम, उप सूचनामंत्री, पाकिस्तान
अच्छा होता अगर बेनज़ीर उन नामों को सार्वजनिक करतीं जिनपर उन्हें शक है. केवल कहने से नहीं होता है, ये कौन लोग हैं और उनपर आरोप का आधार क्या है, यह बताना चाहिए. या तो बेनज़ीर इस बात को राष्ट्रपति तक ही सीमित रखतीं या फिर पूरी तरह से सार्वजनिक करतीं

शुक्रवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में बेनज़ीर भुट्टो ने कहा था कि उन्हें इस बात की जानकारी है कि कौन लोग उन्हें मारना चाहते हैं और ऐसे तीन नामों की जानकारी उन्होंने राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ को अपने पत्र में दे दी है।

तारीक़ अज़ीम ने बेनज़ीर के इस बयान पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि अगर उन्हें ऐसे लोगों के नाम मालूम हैं तो वो इन नामों को सार्वजनिक करें और यह भी बताएं कि किस आधार पर वो ऐसा कह रही हैं।

तारीक़ अज़ीम ने कहा, "अच्छा होता अगर बेनज़ीर उन नामों को सार्वजनिक करतीं जिनपर उन्हें शक है। केवल कहने से नहीं होता है, ये कौन लोग हैं और उनपर आरोप का आधार क्या है, यह बताना चाहिए। या तो बेनज़ीर इस बात को राष्ट्रपति तक ही सीमित रखतीं या फिर पूरी तरह से सार्वजनिक करतीं।"

यह पूछने पर कि बेनज़ीर की ओर से ऐसा इसलिए भी तो किया जा सकता है ताकि देश में तनाव न बढ़े, तारीक़ कहते हैं कि किसी राष्ट्रीय नेता पर हमला होने से ज़्यादा तनाव पैदा करने वाली बात क्या हो सकती है।
पर क्या नाम सार्वजनिक होने के बाद उनपर कार्रवाई की जाएगी, इसपर वो कहते हैं, "किसी के कहने पर ही कार्रवाई नहीं होती। वो नाम लेने के पीछे आधार बताएं तो उन नामों को ध्यान में रखकर तहकीक़ात की जा सकती है।"

पाकिस्तान के गृह सचिव सैयद कमाल शाह ने भी कहा है कि पूर्व प्रधानमंत्री या किसी और की तरफ से ऐसा कोई नाम नहीं बताया गया है जिसपर शक किया जा सके।

'सरकार ज़िम्मेदार नहीं'
बेनज़ीर
बेनज़ीर भुट्टो ने कहा है कि लोकतंत्र के लिए उनकी लड़ाई जारी रहेगी

धमाकों के बाद शुक्रवार को बेनज़ीर भुट्टो ने कहा था कि वो आत्मघाती हमले के लिए सरकार को ज़िम्मेदार नहीं ठहरा रहीं लेकिन उन्होंने इसकी जाँच की मांग की कि जिस समय धमाका हुआ उस समय सड़कों की बत्तियाँ क्यों बुझा दी गई थी।

उन्होंने कहा कि अगर ऐसा नहीं होता कि उनके सुरक्षा गार्ड आत्मघाती हमलावर को पकड़ सकते थे। बेनज़ीर भुट्टो ने कहा कि बम धमाकों से पहले उनके वाहन पर गोलियाँ चलाई गईं थीं ताकि इसे रोका जा सके।

कराची स्थित अपने निवास बिलावल हाउस में एक प्रेस कांफ़्रेंस के दौरान बेनज़ीर भुट्टो ने धमाको की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि ये हमला किसी सच्चे मुसलमान ने नहीं किया है क्योंकि महिलाओं और निर्दोष लोगों को मारना इस्लाम के ख़िलाफ़ है।

उन्होंने यह भी कहा कि इन हमलों के बाद भी लोकतंत्र के लिए उनका संघर्ष जारी रहेगा।

बेनज़ीर भुट्टो ने बीबीसी से हुई बातचीत में कहा कि वे जनवरी में होने वाले चुनावों में हिस्सा लेंगी और इसके लिए उनके कार्यकर्ता तैयार हैं।

Friday, October 19, 2007

बेनज़ीर के काफ़िले में बम विस्फोट, सौ से अधिक मरे

आठ साल के निर्वासन के बाद स्वदेश लौटीं पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो के स्वागत की रैली के नज़दीक दो बम धमाके हुए हैं।

कराची के पुलिस प्रमुख अज़हर फ़ारुक़ी ने विस्फोटों में 111 लोगों के मारे जाने की पुष्टि की है।

उन्होंने कहा है कि यह एक आत्मघाती हमला था।

हमले में सौ से अधिक लोग घायल भी हुए हैं।

मरने वालों में 20 पुलिसकर्मी और एक स्थानीय टेलीविज़न चैनल के कैमरामैन भी शामिल हैं।

पाकिस्तान के गृहमंत्री के आफ़ताब शेरपाओ ने बीबीसी को बताया कि बेनज़ीर भुट्टो और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के दूसरे बड़े नेता सुरक्षित हैं।

दुनिया भर में निंदा

धमाकों से बेनज़ीर भुट्टो के वाहन की खिड़कियों के शीशे टूट गए हैं।

विस्फोट के समय बेनज़ीर भुट्टो उस वाहन के भीतर बैठी हुई थीं। इससे पहले वे इस वाहन की छत पर खड़ी हुई लोगों का अभिवादन कर रही थीं।

बेनज़ीर भुट्टो को उनके निवास बिलावल हाउस पहुँचा दिया गया। उनकी ओर से कोई बयान जारी नहीं किया गया है।

आत्मघाती हमला?

धमाके आधी रात के बाद हुए हैं। दो कारों में आग लग गई।

कराची के पुलिस प्रमुख अज़हर फ़ारूक़ी ने कहा है कि यह एक आत्मघाती हमला था।

आत्मघाती हमले की तरह ही पहला विस्फोट हैंडग्रैनेड से किया गया और दूसरा आत्मघाती हमला किया गया।

यह पूछने पर कि सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम के बाद यह हमला कैसे संभव हुआ तो उन्होंने कहा कि जब इतनी भीड़ हो तो आत्मघाती हमला हो सकता है।

जब गृहमंत्री शेरपाओ ने पूछा कि इतनी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बाद यह घटना कैसे घटी तो उन्होंने कहा, "हज़ारों-लाखों लोग हों तो यह तय करना मुश्किल होता है कि कौन लोग काफ़िले में शामिल लोग हैं और कौन नहीं।"

उन्होंने कहा, "जब काफ़िला 14-16 किलोमीटर चल चुका हो तो जैमर की बैटरी भी काम करना बंद कर देती है और यदि हमला रिमोट से न किया गया हो तो उसे जैमर से रोकना संभव नहीं होता।"

पाकिस्तान के टेलीविज़न चैनल दिखा रहे हैं कि विस्फोट के बाद घटनास्थल के पास अफ़रा-तफ़री का माहौल बन गया और लोग इधर-उधर भागने लगे।

बेनज़ीर भुट्टो रैली में
बेनज़ीर भुट्टो के स्वागत के लिए हज़ारों लोग जमा हुए थे

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि वहाँ लाशें बिखरी पड़ी थीं और जहाँ-तहाँ ख़ून बिखरा हुआ था।

घायलों को कई अस्पतालों में पहुँचाया गया। इनमें से कई की हालत नाज़ुक बताई गई है।

उल्लेखनीय है कि बेनज़ीर भुट्टो दोपहर को दुबई से पाकिस्तान पहुँचीं और उनके स्वागत की रैली एयरपोर्ट से शहर की ओर निकली थी।

वे शहर पहुँचने के बाद एक आमसभा को संबोधित करने वाली थीं। इस रैली में बेनज़ीर भुट्टो के दसियों हज़ार समर्थक थे।

बताया गया है कि धमाके बाद काफ़िले को रोक दिया गया और आसपास के इलाक़े की घेरेबंदी की गई है। वहाँ बम निरोधक दस्ते भेजे गए हैं।

तालेबान समर्थक चरमपंथियों ने पहले ही हमलों की धमकी दी थी और इसके मद्देनज़र कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। प्रशासन ने 'फ़ूलप्रूफ़' सुरक्षा व्यवस्था का दावा किया था।

Thursday, October 18, 2007

बेनज़ीर के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था

पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो गुरुवार को स्वदेश लौट रही हैं। वे अपने गृहनगर कराची लौटेंगीं।वे पिछले आठ सालों से अपनी मर्ज़ी से लंदन और दुबई में निर्वासित ज़िंदगी व्यतीत कर रहीं हैं।
एक ओर कराची में उनके समर्थकों ने स्वागत की भारी तैयारियाँ की हैं और दूसरी ओर प्रशासन ने उनकी सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए हैं।

सरकार ने कहा है कि वह बेनज़ीर भुट्टो की सुरक्षा के लिए 'फ़ूलप्रूफ़' इंतज़ाम कर रही है।

पाकिस्तान के गृहमंत्रालय के अधिकारी जावेद इक़बाल चीमा ने कहा है कि तालेबान समर्थक चरमपंथियों ने आत्मघाती हमलों की धमकी दी है।

उल्लेखनीय है कि भ्रष्टाचार के मुक़दमें वापस लिए जाने के आश्वासन के बाद बेनज़ीर भुट्टो पाकिस्तान लौट रही हैं।

संभावना है कि बेनज़ीर भुट्टो और राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के बीच सत्ता में साझेदारी के लिए एक समझौता भी होने जा रहा है।

सुरक्षा के इंतज़ाम

संभावना है कि बेनज़ीर भुट्टो दोपहर तक कराची पहुँचेंगीं।

सुरक्षा
सुरक्षाकर्मी बुधवार से ही सड़कों पर गश्त लगा रहे हैं

प्रशासन ने कोई 20 हज़ार सैनिकों और पुलिसकर्मियों की कराची में तैनाती की है।

शहर से जिन्ना अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे की ओर जाने वाली मुख्य सड़कों को बड़े-बड़े कंटेनर लगाकर बंद कर दिया गया है।

बेनज़ीर भुट्टो एयरपोर्ट से पाकिस्तान के संस्थापक कायदे आज़म की मज़ार पर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि देंगी और बाद में एक बड़े जलसे को संबोधित करेंगी।

पाकिस्तान के गृहमंत्रालय के अधिकारी जावेद इक़बाल चीमा का कहना है कि बेनज़ीर भुट्टो ने बुलेटप्रूफ़ गाड़ियाँ जुलूस में ले जाने की इजाज़त माँगी थी जो उन्हें दे दी गई है।

उनका कहना है कि हालात को ध्यान में रखते हुए हथियारों के सार्वजनिक रुप से प्रदर्शन पर रोक लगा दी गई है।

स्वागत की तैयारी

उनके भव्य स्वागत के लिए हज़ारों पार्टी कार्यकर्ता बुधवार की शाम से ही कराची पहुँचना शुरू हो गए हैं।

स्वागत की तैयारियाँ
कराची की मुख्य सड़कों के किनारे बड़े होर्डिंग और पोस्टर लगाए गए हैं

बेनज़ीर भुट्टो का भव्य स्वागत करने के लिए कराची में उनकी बड़ी-बड़ी तस्वीरें, बैनर और पार्टी के झंडे लगाए गए हैं।

पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के कार्यकर्ता शहर भर में संगीत की धुनों पर नाच रहे हैं और बेनज़ीर भुट्टो की स्वदेश वापसी पर बहुत ख़ुश नज़र आ रहे हैं।

स्थानीय पत्रकार हफ़ीज़ चाचड़ के मुताबिक़ बेनज़ीर भुट्टो के निवास बिलावल हाउस में कार्यकर्ताओं की भीड़ लगी हई है और जश्न का माहौल है।

पीपुल्स पार्टी के एक नेता सफ़दर अब्बासी ने बताया, “पूरा शहर बेनज़ीर भुट्टो और शहीद ज़ुल्फिक़ार अली भुट्टो की तस्वीरों, पार्टी के झंडों और बैनर से सजा हुआ है। बेनज़ीर भुट्टो का ऐतिहासिक स्वागत करने के लिए हज़ारों पार्टी कार्यकर्ता कराची पहुँच रहे हैं।”

Wednesday, October 17, 2007

'समझौते पर 2008 तक अमल हो जाए'

अमरीका ने साफ़ किया है कि भारत के साथ परमाणु समझौता ख़त्म नहीं हुआ है और भारत अपनी अड़चनें दूर करने के बाद इस पर अमल शुरु कर सकता है।

अमरीका ने संकेत दिए हैं कि इस समझौते पर अमल के लिए भारत के पास 2008 तक का समय है।

अमरीका का यह बयान भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश से सोमवार को टेलीफ़ोन पर हुई बातचीत के बाद आया है।

मनमोहन सिंह ने राष्ट्रपति बुश को सूचित किया था कि परमाणु समझौते को लागू करने में 'परेशानी आ रही है।'

उल्लेखनीय है कि यूपीए सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे वामपंथी दल इस परमाणु समझौते का विरोध कर रहे थे और उन्होंने सरकार को चेतावनी दी थी कि यदि सरकार समझौते पर अमल शुरु करती है तो वे समर्थन वापस ले लेंगे।

कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के कई सहयोगी दलों का मानना है कि इस समझौते के लिए सरकार को दाँव पर नहीं लगाया जाना चाहिए और सरकार ने इसे मान लिया है।

अमरीकी दृष्टिकोण

परमाणु समझौते को फ़िलहाल स्थगित रखने के भारत सरकार के फ़ैसले के बाद अमरीका ने कहा है कि इस समझौते पर 'ऐसे समय पर अमल किया जा सकता है जब दोनों पक्षों के सही समय हो।'

अमरीका उम्मीद करता है कि भारत इस समझौते पर आगे बढ़ने का निर्णय लेगा और हम चाहेंगे कि यह समझौता 2008 तक पूरा हो जाए

टॉम केसी, प्रवक्ता, अमरीकी विदेश मंत्रालय

अमरीका के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि यह समझौता दोनों देशों के लिए 'सकारात्मक' और 'अच्छा' है और यह परमाणु अप्रसार के प्रयासों के लिए भी अच्छा है।

समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार अमरीकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता टॉम केसी ने कहा, "अमरीका उम्मीद करता है कि भारत इस समझौते पर आगे बढ़ने का निर्णय लेगा और हम चाहेंगे कि यह समझौता 2008 तक पूरा हो जाए।"

उन्होंने कहा, "अमरीका ने अपनी ओर से इस समझौते को लेकर किए गए अपने वादे को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत की है और इसे पूरा करने के लिए वह आगे भी ऐसा करता रहेगा।"

उधर अमरीकी राष्ट्रपति कार्यालय के प्रवक्ता ने टोनी फ़्रैटो ने साफ़ किया है कि यह समझौता ख़त्म नहीं हुआ है।
भारत एक फल-फूल रहा लोकतंत्र है। उन्हें कुछ और काम करना है और इसके लिए उन्हें कुछ अतिरिक्त समय की ज़रूरत हो सकती है. राष्ट्रपति इसे समझते हैं...लेकिन यह समझौता ख़त्म नहीं हुआ है

टोनी फ्रैटो, प्रवक्ता, व्हाइट हाउस

समाचार एजेंसी एपी के अनुसार उन्होंने कहा, "भारत एक फल-फूल रहा लोकतंत्र है। उन्हें कुछ और काम करना है और इसके लिए उन्हें कुछ अतिरिक्त समय की ज़रूरत हो सकती है। राष्ट्रपति इसे समझते हैं...लेकिन यह समझौता ख़त्म नहीं हुआ है।"

अमरीकी प्रशासन ने कहा है कि भारत को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) से समझौता करना है और अमरीका को परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों के साथ एक समझौता करना है और अमरीका चाहेगा कि उसकी ओर से यह समझौता पूरा हो जाए।

उल्लेखनीय है कि अमरीका में अगले साल राष्ट्रपति पद के चुनाव होने हैं और बुश प्रशासन चाहता है कि दोनों देशों के बीच समझौता बुश के राष्ट्रपति रहते ही अमल में आ जाए।

Tuesday, October 16, 2007

परमाणु समझौता लागू करने में परेशानीः मनमोहन सिंह

भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश से कहा है कि दोनों देशों के बीच प्रस्तावित परमाणु करार लागू करने में परेशानी आ रही है।

भारतीय प्रधानमंत्री ने सोमवार को अमरीकी राष्ट्रपति से फ़ोन के ज़रिए बातचीत की है।

दोनों के बीच भारत-अमरीका परमाणु करार और विश्व व्यापार संगठन के दोहा दौर की बातचीत के मसले पर चर्चा हुई।

ग़ौरतलब है कि पिछले ही सप्ताह भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और सत्तारूढ़ यूपीए गठबंधन की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा था कि सरकार गिरने की क़ीमत पर परमाणु समझौता नहीं किया जाएगा।

मनमोहन सिंह इन दिनों अफ़्रीकी देशों की यात्रा पर हैं और नाइजीरिया में अपनी यात्रा के दौरान ही उन्होंने अमरीकी राष्ट्रपति से बातचीत की है।

हालांकि बातचीत के बाद आधिकारिक तौर पर जारी किए गए बयान में ऐसी किसी बात का ज़िक्र नहीं है जिसके आधार पर कहा जा सके कि मनमोहन सिंह ने अमरीकी राष्ट्रपति से इन परेशानियों को दूर करने की कोशिश करने की बात कही हो।

इससे पहले भारत अमरीका से परमाणु करार के मुद्दे पर बातचीत में दोहराता रहा है कि परमाणु करार के रास्ते में आने वाली अड़चनों को दूर करने का प्रयास किया जाएगा।

दोहा पर बात

दोनों देशों के नेताओं के बीच दोहा दौर को लेकर भी बातचीत हुई।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भारत का पक्ष रखते हुए कहा कि दोहा दौर में जो बातें सामने आई हैं वे मोटे तौर पर भारत को स्वीकार्य हैं।

हालांकि उन्होंने कृषि क्षेत्र में तय किए गए कुछ प्रावधानों को लेकर अपनी चिंता राष्ट्रपति बुश के सामने रखी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर दोहा दौर को बचाने के लिए कोई सकारात्मक क़दम उठाया जाता है तो भारत इसमें सहयोग देगा।


बुश और मनमोहन
राष्ट्रपति बुश परमाणु सहमति को अपने कार्यकाल की बड़ी उपलब्धी मानते आए हैं

साथ ही उन्होंने विकासशील देशों के हितों को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ने की बात भी कही।

समझौता फ़िलहाल नहीं

विशेषज्ञ मानते हैं कि इस ताज़ा बातचीत के आधार पर यह बात और पुख़्ता हो गई है कि आने वाले कुछ समय तक के लिए ही सही, पर दोनों देशों के बीच होने वाला परमाणु करार अब ठंडे बस्ते में है।

प्रधानमंत्री के साथ नाइजीरिया यात्रा पर गईं इंडियन एक्सप्रेस अख़बार की सह-संपादक सीमा चिश्ती ने बीबीसी से बातचीत में कहा है कि इस बातचीत से एक तरह का संकेत भारत की ओर से अमरीका को दिया गया है कि फ़िलहाल यह समझौता लागू नहीं होने वाला।

ग़ौरतलब है कि दोनों देशों के बीच प्रस्तावित परमाणु समझौते का केंद्र सरकार को समर्थन दे रहे वामदलों की ओर से विरोध किया जाता रहा है।

वामदलों की दलील है कि जिन शर्तों पर दोनों देशों के बीच परमाणु करार हो रहा है उनसे भारत की संप्रभुता को ख़तरा है और ऐसा करना देश के हित में नहीं है।

केंद्र सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे वामदलों के 60 सांसदों का समर्थन केंद्र सरकार को हासिल है और अगर परमाणु करार के मुद्दे पर मतभेदों के बाद वामदल समर्थन वापस ले लेते तो सरकार अल्पमत में आ जाती।

पिछले कुछ समय से इस मुद्दे पर क़ायम गतिरोध के बाद आखिरकार केंद्र सरकार ने परमाणु समझौते से फिलहाल पैर पीछे खींचना ही बेहतर समझा है।

Monday, October 15, 2007

धमाके के बाद पंजाब में कड़ी सुरक्षा

भारत के पंजाब राज्य के औद्योगिक शहर लुधियाना में रविवार रात को हुए धमाके के बाद पंजाब और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल सोमवार सुबह घटनास्थल का दौरा करेंगे।

लुधियाना में श्रृंगार सिनेमा हॉल में हुए धमाके में छह लोग मारे गए और 35 घायल हो गए। फ़िलहाल न तो पुलिस ने इस घटना के लिए किसी संगठन को ज़िम्मेदार ठहराया है और न ही किसी संगठन ने इसकी ज़िम्मेदारी ली है।

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार छह में से चार लोगों की घटनास्थल पर ही मृत्यु हो गई जबकि दो लोगों ने स्थानीय अस्पताल में दम तोड़ दिया। जिन दो लोगों की अस्पताल में मृत्यु हुई, उनकी पहचान नहीं हो पाई है। ग़ौरतलब है कि हाल में राजस्थान के अजमेर शहर में विश्व प्रसिद्ध ख़्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में भी धमाका हुआ था जिसमें दो लोग मारे गए थे और 14 घायल हो गए थे।

केंद्रीय गृह राज्यमंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने कहा है कि ऐसा लगता नहीं है कि अजमेर और लुधियाना के धमाकों में कोई संबंध है।

लुधियाना में धमाका

उनका ये भी कहना था कि केंद्र सरकार पंजाब सरकार से इस मामले पर विस्तृत रिपोर्ट आने का इंतजार कर रही है।

'शांति भंग करने की कोशिश'
धमाके के बाद हॉल में अफ़रा-तफ़री मच गई। हॉल के अंदर धुआँ भर गया था और सीटें उखड़ गई थीं। फिर रात भर पुलिसवाले सुराग खोजने और सबूत एकत्र करने का काम करते रहे

सिनेमा हॉल के चौकीदार

पंजाब के पुलिस महानिदेशक एनपीएस ऑलख ने बीबीसी को बताया कि राज्य में सुरक्षाबलों को अत्यधिक सुरक्षा बरतने के लिए कहा गया है। उनका कहना है कि संभव है कि इस घटना को किसी चरमपंथी संगठन ने अंजाम दिया हो।

देर रात ही विस्फोट की विस्तृत जाँच करने के लिए फोरेंसिक टीम सिनेमा हॉल पहुँच गई थी।

पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के मीडिया सलाहकार हरचरण बैंस ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि ये 'राज्य में शांति व्यवस्था भंग करने की कोशिश है।'

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस घटना पर अफ़सोस ज़ाहिर करते हुए हर मृतक के परिजनों के लिए एक लाख रुपए का मुआवज़ा और हर घायल व्यक्ति के लिए 50 हज़ार रुपए के मुआवज़े की घोषणा की है।

बिहार-उत्तर प्रदेश के लोग

जब सिनेमा हॉल में धमाका हुआ तब वहाँ भोजपुरी फ़िल्म 'जन्म-जन्म के साथ' दिखाई जा रही थी।

बताया गया है कि सिनेमा हॉल की क्षमता लगभग 650 की है और जब घटना हुई तब सिनेमा हॉल परिसर में लगभग एक हज़ार लोग मौजूद थे।


धमाके में घायल
धमाके से घायल हुए छह लोगों की स्थिति गंभीर है

सिनेमा हॉल के कर्मचारियों ने बताया कि मनोज तिवारी और रवि किशन अभिनीत फ़िल्म 'जन्म-जन्म के साथ' को देखने आए अधिकतर लोग भोजपुरी समझने-बोलने वाले थे।

पंजाब के उद्योग का केंद्र कहे जाने वाले लुधियाना शहर में लगभग बीस लाख लोग बिहार और उत्तर प्रदेश से हैं जो विभिन्न कारखानों में काम करते हैं और भोजपुरी फ़िल्में देखने में दिलचस्पी रखते हैं।

श्रृंगार सिनेमा हॉम के एक चौकीदार - कोलकाता के हरि किशन का कहना था, "धमाके के बाद हॉल में अफ़रा-तफ़री मच गई। हॉल के अंदर धुआँ भर गया था और सीटें उखड़ गई थीं। फिर रात भर पुलिसवाले सुराग खोजने और सबूत एकत्र करने का काम करते रहे।"

घायल हुए 35 लोगों को सिनेमा हॉल के निकट स्थित दो अस्पतालों - सीएमसी और सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कुछ की हालत गंभीर बताई गई है लेकिन अस्पताल के अधिकारी फ़िलहाल घायलों से मिलने से मिलने की इजाज़त नहीं दे रहे हैं।

Saturday, October 13, 2007

वामपंथी समझौते संबंधी बयानों से उत्साहित

वामपंथी दलों ने भारत अमरीका परमाणु समझौते पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की ताज़ा बयानों को गठबंधन धर्म की बहाली का संकेत बताया है और कहा है कि ये देश के लिए अच्छा है।

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता सीताराम येचुरी और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव एबी बर्द्धन ने हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप सम्मेलन में परमाणु समझौते पर इन नेताओं के संकेतों पर कहा कि विरोधी दृष्टिकोणों के बीच संवाद और एक दूसरे के दृष्टिकोण के प्रति सहिष्णुता और सम्मान की भावना गठबंधन राजनीति की अनिवार्यता है।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि समझौता न होने से उन्हें निराशा तो होगी लेकिन यह अंत नहीं है।

जबकि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने समझौते पर वामदलों के विरोध को ग़ैरवाजिब मानने से इनकार किया और उनके साथ सामंजस्य बिठाने की ज़रुरत बताई।

मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी दोनों ने मध्यावधि चुनावों की अटकलों पर कहा है कि सरकार को कोई ख़तरा नहीं है।

मनमोहन सिंह ने कहा कि उन्हें यकीन है कि उनकी सरकार अपना कार्यकाल पूरा करेगी।

प्रधानमंत्री ने कहा, " चुनाव अभी दूर हैं। सरकार का कार्यकाल पूरा होने में अभी डेढ़ साल का वक़्त है। मैं उम्मीद करता हूँ कि सरकार अपना कार्यकाल पूरा करेगी।"

मनमोहन सिंह ने कहा, " हमारी सरकार सिर्फ़ एक मुद्दे भर की नहीं है। अगर समझौता नहीं हुआ तो यह निराशानजक होगा। लेकिन जीवन में व्यक्ति ऐसी निराशाओं के साथ जीता है और फिर आगे बढ़ जाता है।"

सोनिया गांधी ने भी मध्यावधि चुनावों की संभावना को नकार दिया।

Friday, October 12, 2007

अजमेरः पूछताछ जारी, निष्क्रिय किया गया विस्फोटक

गुरुवार को अजमेर में ख़्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में हुए धमाके के बाद पुलिस ने आधा दर्जन लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है.

इसके अलावा तलाशी के दौरान दरगाह परिसर से बरामद विस्फोटक डिवाइस को भी जाँचकर्ताओं ने निष्क्रिय कर दिया है.

उधर दरगाह के नाजिम अहमद रज़ा ने बीबीसी को बताया है कि दरगाह परिसर में 16 क्लोज़ सक्रिट कैमरे लगे हुए हैं जिनकी मदद ली जा सकती है.

हालांकि पुलिस का कहना है कि इस बात की उम्मीद कम ही है कि इन कैमरों से कुछ रिकॉर्ड हुआ होगा क्योंकि इनके कुछ तार क्षतिग्रस्त हैं.

उधर राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बीबीसी को अनौपचारिक तौर पर बताया कि जाँच का काम सही दिशा में जा रहा है और जल्द ही इस बात का पता लगा लिया जाएगा कि इस हमले के पीछे किसका हाथ है.

उन्होंने बताया कि जाँचकर्ताओं को इस घटना से संबंधित कुछ पुख़्ता सबूत मिले हैं.

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि फोरेंसिक टीम के विशेषज्ञ अबतक मिले सबूतों के आधार पर जाँच का काम कर रही है.

पूछताछ

पुलिस का कहना है कि लोगों को शुरुआती पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है ताकि घटना के बारे में ज़्यादा जानकारी मिल सके.

हालांकि पुलिस की ओर से अभी इस बारे में कुछ भी नहीं बताया गया है कि इन लोगों में से कोई विस्फोट में शामिल था या नहीं.

गुरुवार को दरगाह में हुए विस्फोट में दो लोगों की मौत हो गई थी और ढाई दर्जन लोग घायल हो गए थे.

पुलिस ने दरगाह परिसर की तलाशी के दौरान कुछ धातु के टुकड़े और कुछ मोबाइल के टुकड़े बरामद किए हैं.

जाँच अधिकारी इन चीजों को जोड़कर घटना के तार खोजने की कोशिश कर रहे हैं.

इस बीच परिसर की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ़) को सौंप दी गई है और चप्पे-चप्पे पर सीमा सुरक्षा बल के जवान तैनात हैं.

जाँच में तेज़ी

राज्य के गृहमंत्री और पुलिस प्रमुख समेत कई आला अधिकारी मौके पर मौजूद हैं और जल्द से जल्द इस बात की तहक़ीकात करने की कोशिश की जा रही है कि इन धमाकों के पीछे किसका हाथ था.

पुलिस को यह भी संदेह है कि हमले को अंजाम देने वाला व्यक्ति शायद बाहर का था और कम अनुभवी था.

कुछ अधिकारियों का मानना है कि हमला जिस जगह और जिस तैयारी के साथ किया गया, उससे लगता है कि हमलावर को इस जगह और विस्फोटक के बारे में ज़्यादा मालूमात नहीं थी.

उधर दरगाह में हुए धमाके के बाद देशभर में कई प्रमुख धार्मिक स्थलों की सुरक्षा कड़ी कर दी है. केंद्र सरकार ने त्योहारों के मद्देनज़र देश भर में अलर्ट घोषित कर दिया था.

राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने दरगाह पर हुए धमाकों की जाँच के आदेश दे दिए हैं.

साथ ही उन्होंने मृतकों के परिजनों को पाँच पाँच लाख रुपए देने और घायलों को एक एक लाख रुपए की सहायता देने की घोषणा की है.

Thursday, October 11, 2007

बर्मा में बढ़े अफ़ीम उत्पादन पर चिंता

नशीली दवा और अपराध पर काम करने वाली संयुक्त राष्ट्र की इस इकाई (यूएनओडीसी) का कहना है कि अफ़ीम उत्पादन में भ्रष्टाचार भी शामिल हो गया है और बड़े अधिकारियों की साँठगाँठ भी जुड़ गई है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि थाईलैंड, लाओस और बर्मा में अफ़ीम की खेती में पिछले कुछ सालों में काफ़ी कमी आई थी लेकिन बर्मा में एक बार फिर इसमें बढ़ोत्तरी हो रही है.

उल्लेखनीय है कि थाईलैंड, लाओस और बर्मा को नशीली दवाओं के स्वर्णिम त्रिभुज के रुप में जाना जाता था.

संयुक्त राष्ट्र की इस रिपोर्ट पर फ़िलहाल बर्मा के सैन्य शासकों की ओर से कोई टिप्पणी नहीं की गई है.

चिंता

पिछले वर्षों में नशीली दवाओं के खिलाफ़ चलाए गए अभियानों के कारण थाईलैंड, लाओस और बर्मा में अफ़ीम का उत्पादन बहुत कम हुआ है.

लेकिन अभी भी बर्मा दुनिया का दूसरे नंबर का सबसे बड़ा अफ़ीम उत्पादक है.

इस समय सबसे अधिक अफ़ीम का उत्पादन अफ़ग़ानिस्तान में होता है. अनुमान है कि दुनिया का 90 प्रतिशत अफ़ीम अफ़ग़ानिस्तान में ही पैदा होता है.

इस समय दक्षिण-पूर्वी एशिया में सिर्फ़ पाँच प्रतिशत अफ़ीम का उत्पादन होता है.

यूएनओडीसी की ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि बर्मा में अफ़ीम की खेती में 29 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है लेकिन अच्छी खेती होने के कारण नशीली दवा का उत्पादन 46 प्रतिशत बढ़ गया है.

यूएनओडीसी के कार्यकारी निदेशक एंटोनियो मारियो कोस्टा का कहना है, "भ्रष्टाचार, ऊँचे स्तर पर मिलिभगत और सीमा पर कमज़ोर निगरानी के चलते बर्मा में नशीली दवाओं का व्यापार बढ़ा है."

उन्होंने इससे निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने पर ज़ोर दिया है.

Wednesday, October 10, 2007

चर्चा के लिए सरन नेपाल दौरे पर

नेपाल में संविधान सभा के चुनाव अनिश्चित काल के लिए टाले जाने से चिंतित भारत ने अपने विशेष दूत श्याम सरन को वहाँ भेजने का निर्णय लिया है.

अपने दो दिवसीय दौरे में वे जल्द से जल्द चुनाव करवाने की संभावनाओं के बारे सभी पक्षों से चर्चा करेंगे.

उल्लेखनीय है कि नेपाल में अंतरिम सरकार से माओवादियों के हटने के बाद वहाँ राजनीतिक संकट गहरा गया है और सरकार को संविधान सभा के 22 नवंबर को होने वाले चुनाव स्थगित करने पड़े हैं.

माओवादी चाहते हैं कि संविधान सभा के चुनाव से पहले ही नेपाल में राजशाही को ख़त्म कर दिया जाए और नेपाल में लोकतंत्र घोषित कर दिया जाए.

भारत के पूर्व विदेश सचिव श्याम सरन नेपाल में भारत के राजदूत भी रह चुके हैं. वे इस समय भारत-अमरीका असैनिक परमाणु समझौते के लिए प्रधानमंत्री के विशेष दूत की भूमिका भी निभा रहे हैं.

भारत अपने पड़ोसी देश नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता से चिंतित है और चाहता है कि नेपाल में जितनी जल्दी हो सके चुनाव होने चाहिए और लोकतंत्र की स्थापना होनी चाहिए.

भारतीय विदेश विभाग के सूत्रों के हवाले से समाचार एजेंसियों ने कहा है कि नेपाल में लोकतंत्र की बहाली के लिए भारत हर तरह की सहायता देने के लिए तैयार है.

इस बीच नेपाल में सात नवंबर को अंतरिम संसद का विशेष सत्र बुलाया गया है जिसमें इस विषय पर चर्चा होगी.

Tuesday, October 9, 2007

परमाणु समझौते पर अहम बैठक

यूपीए और वामपंथी दलों के बीच परमाणु समझौते के मतभेदों को दूर करने के लिए बनी समिति की यह चौथी औपचारिक बैठक है.
समिति के संचालक प्रणव मुखर्जी सोमवार को सीपीएम के नेता प्रकाश करात और सीताराम येचुरी से इस अनुरोध के साथ मिले थे कि सरकार को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा समिति (आईएईए) से बातचीत करने दिया जाए.
लेकिन सीपीएम नेताओं ने इसे ख़ारिज कर दिया है.

यूपीए अमरीका के दबाव में है

इस बीच आईएईए के प्रमुख अल बारादेई भारत पहुँच चुके हैं.
वे मंगलवार को परमाणु ऊर्जा केंद्र का दौरा करेंगे और फिर बुधवार को उनकी मुलाक़ात प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कई भारतीय अधिकारियों से होनी है.

बढ़ता मतभेद

सोमवार को वामदलों और यूपीए के बीच बढ़ते मतभेदों का एक और उदाहरण सामने आया.
सोमवार को विदेशमंत्री प्रणव मुखर्जी ने सीपीएम के नेता प्रकाश करात और सीताराम येचुरी से मुलाक़ात की.
प्रणव मुखर्जी ने दोनों नेताओं के सामने यह अनुरोध रखा कि सरकार को आईएईए के साथ बातचीत करने दिया जाए.
ख़बरें हैं कि प्रणव मुखर्जी ने आश्वासन दिया था कि सरकार बातचीत के हर पहलू से वामदलों को अवगत करवाती रहेगी.
इसके बाद प्रकाश करात और सीताराम येचुरी ने यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाक़ात की.
आख़िर इन नेताओं ने सरकार का आईएईए से बातचीत करने देने का अनुरोध ठुकरा दिया.
बाद में कांग्रेस कोर समिति की भी एक बैठक सोमवार को हुई.

समझौते के विरोधी विकास के विरोधी है

उधर मंगलवार को अल बरदेई सोमवार को मुंबई पहुँच चुके हैं. वे मंगलवार को भारतीय परमाणु ऊर्जा केंद्र में रहेंगे.
बुधवार को वे दिल्ली में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कई भारतीय अधिकारियों से मिलेंगे.

हालांकि बातचीत के इन दौर को औपचारिक ही बताया जा रहा है.

सीपीआई के महासचिव एबी बर्धन ने बीबीसी से हुई बातचीत में कहा है कि सरकार अगर आईएईए से अनौपचारिक बात करती है तो वामपंथी दलों को कोई आपत्ति नहीं है.

उन्होंने कहा, "लेकिन अल बारादेई अपनी तकनीकी टीम लेकर बैठें और भारत सरकार अपने परमाणु विशेषज्ञों के साथ बैठकर यदि बातचीत करेगी तो दिक़्कत होगी."

उन्होंने कहा कि मतभेदों को दूर करने के लिए समिति बनी है और जब तक समिति में बातचीत चल रही है मतभेद दूर होने की संभावना बनी हुई है.

हालांकि इस समिति की पहली तीन बैठकों में कोई नतीजा निकलना तो दूर, मतभेद कम होने का एक भी संकेत नहीं मिला है.

Monday, October 8, 2007

सोनिया के बयान से भड़के वामपंथी

परमाणु समझौते पर सोनिया गांधी के बयान से वामपंथी नेता भड़क उठे हैं। हालांकि कांग्रेस की ओर से इस पर सफ़ाई देने की कोशिश की गई है।

ग़ौरतलब है कि रविवार को हरियाणा के झज्जर में आयोजित एक जनसभा में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा था कि ‘अमरीका के साथ परमाणु समझौते का विरोध करने वाले विकास के दुश्मन हैं।’

सोनिया गांधी का कहना था कि देश में बिजली की कमी है और अमरीका से परमाणु समझौता इसी दिशा में एक प्रयास है।

'परमाणु क़रार के विरोधी विकास के दुश्मन'

हालांकि बाद में कांग्रेस की ओर सफ़ाई दी गई कि सोनिया का इशारा वामपंथी दलों की ओर नहीं था।लेकिन सोनिया गांधी के बयान ने वामपंथी नेता भड़क गए हैं।

सोनिया गांधी के बयान पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव एबी बर्धन ने बीबीसी से बातचीत में कहा, " यूपीए सरकार अमरीकी दबाव में काम कर रही है और इसीलिए इस मुद्दे पर वो जल्दबाज़ी करना चाहती है।"


अगर देश को समय से पहले चुनाव देखना पड़ता है तो कांग्रेस पार्टी इसके लिए ज़िम्मेदार होगी

एबी बर्धन, सीपीआई महासचिव

बर्धन ने कहा कि कांग्रेस की यह दलील एकदम खोखली है कि इस समझौते से देश की बिजली की ज़रूरत का हल निकलेगा।

उनका कहना था कि परमाणु ऊर्जा से केवल 20 हज़ार मेगावाट बिजली उत्पादन बढ़ेगा।

मीडिया से बातचीत में एबी बर्धन ने यह भी कहा कि अगर देश को समय से पहले चुनाव देखना पड़ता है तो कांग्रेस पार्टी इसके लिए ज़िम्मेदार होगी।

बयान से विवाद

जनसभा में सोनिया ने वामपंथियों का उल्लेख तो नहीं किया था लेकिन 'विकास के विरोधियों' के नाम उनकी टिप्पणी वामपंथी दलों और कांग्रेस के बीच गतिरोध के मद्देनजर अहम मानी जा रही है।


सोनिया गांधी
सोनिया गांधी ने कहा था कि समझौते के विरोधी विकास के दुश्मन हैं।

सोनिया गांधी अब तक क़रार की वकालत करते हुए विरोधियों की आलोचना करने से बचती रही हैं।

ग़ौरतलब है कि इससे पहले शनिवार को प्रधानमंत्री निवास पर हुए रोज़ा इफ़्तार में सोनिया गांधी ने पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में कहा था कि अगर चुनाव समय से पहले होते हैं तो कांग्रेस उसके लिए तैयार है।

उधर वामपंथी नेता लगातार इस बात को दोहराते आ रहे हैं कि अमरीका के साथ परमाणु समझौते के मुद्दे पर वे अपनी राय से पीछे हटने वाले नहीं हैं।

टेलीग्राफ़ अख़बार की दिल्ली संपादक मानिनी चटर्जी का मानना है कि पहले वामपंथी दल और कांग्रेस ये सोच रहे थे कि परमाणु समझौते पर मतभेदों का लाभ आगामी चुनावों में भाजपा और नरेंद्र मोदी को न मिले। लेकिन अब दोनों चुनाव के लिए कमर कसते नज़र आ रहे हैं और ऐसा लग रहा है कि सुलह-समझौतों का दौर ख़त्म हो रहा है।"

दोनों ओर से बयानबाज़ी ऐसे समय में हो रही है जब अंतरराष्ट्रीय परमाणु एजेंसी के प्रमुख भारत यात्रा पर आने वाले हैं।

Saturday, October 6, 2007

पाकिस्तान में आज राष्ट्रपति चुनाव

पाकिस्तान में आज राष्ट्रपति चुनाव होने जा रहा है. हालाँकि इसके नतीजों पर रोक लगा दी गई है क्योंकि जनरल मुशर्रफ़ की उम्मीदवारी पर अदालत का फ़ैसला आना बाकी है।

शुक्रवार को पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि छह अक्तूबर को राष्ट्रपति पद के लिए होने वाला चुनाव पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार हो सकता है मगर परिणामों के लिए इंतज़ार करना होगा।

दरअसल, राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के दो प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवारों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएँ दाख़िल की थीं कि परवेज़ मुशर्रफ़ सेनाध्यक्ष रहते हुए यह चुनाव नहीं लड़ सकते।

सियासत का माहिर जनरल

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसे इन याचिकाओं पर विचार करने के लिए कुछ और समय की ज़रूरत है.

शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले के बाद राष्ट्रपति चुनावों के बारे में और भ्रम पैदा हो गया है.

मुशर्रफ़ की मुश्किलें

संभावना जताई जा रही है कि परवेज़ मुशर्रफ़ राष्ट्रीय एसेंबली और प्रांतीय एसेंबलियों में अपने चुनाव के लिए ज़रूरी बहुमत हासिल कर सकते हैं।

मगर संवाददाताओं का कहना है कि अगर परवेज़ मुशर्रफ़ छह अक्तूबर को होने वाले चुनावों में जीत के लिए ज़रूरी बहुमत हासिल भी कर लेते हैं तो भी उनकी हार-जीत का फ़ैसला तब तक नहीं हो सकता जब तक सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर कोई फ़ैसला नहीं सुनाए कि सेनाध्यक्ष पद पर रहते परवेज़ मुशर्रफ़ की उम्मीदवारी संवैधानिक थी या नहीं।

ग़ौरतलब है कि 17 अक्तूबर से मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ दायर याचिकाओं की सुनवाई का काम शुरू होना है। इसके ठीक एक दिन बाद यानी 18 अक्तूबर को पूर्वी प्रधानमंत्री और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) की नेता बेनज़ीर भुट्टो ने स्वदेश लौटने की घोषणा कर रखी है।

सुप्रीम कोर्ट का यह फ़ैसला ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ और पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो के बीच सुलह हो गई है।

समझौते के तहत बेनज़ीर भुट्टो के ख़िलाफ़ चल रहे पुराने मामले वापस ले लिए गए हैं। इसे सत्ता साझीदारी के समझौते की ओर एक अहम क़दम माना जा रहा है।

ऐसी संभावना है कि सुलह समझौते के बाद पीपीपी के सदस्य राष्ट्रपति चुनाव का बहिष्कार नहीं करेंगे।

Friday, October 5, 2007

कर्नाटक सरकार पर संकट गहराया

कर्नाटक सरकार पर संकट के बादल मँडराने लगे हैं।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने स्पष्ट किया है कि वह कर्नाटक में जनता दल (सेक्युलर) के साथ हुए सत्ता साझीदारी के समझौते पर पुनर्विचार नहीं करेगी।

भाजपा के सभी विधायक अपने नेता और उपमुख्यमंत्री बीएस एदियुरप्पा के साथ दिल्ली से बंगलौर लौट गए हैं।

भाजपा विधायकों ने शुक्रवार को राज्यपाल से मिलने की योजना बनाई है और संभावना है कि भाजपा कर्नाटक सरकार से समर्थन वापस ले लेगी।

बंगलौर से पत्रकार आरके मट्टू ने बताया कि समर्थन वापसी या भाजपा विधायकों के इस्तीफ़े के बाद सरकार का गिरना तय है।

कड़े तेवर

दोनों दलों के बीच हुए समझौते के तहत जेडीएस को बीस माह बाद मुख्यमंत्री की कुर्सी भाजपा को सौंपनी थी और यह अवधि तीन अक्तूबर को ही समाप्त हो गई।

मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने पहले तो कहा कि वह इस्तीफ़ा दे देंगे लेकिन ऐसा हुआ नहीं।

दोनों दलों के बीच खींचतान को समाप्त करने के लिए भाजपा नेता यशवंत सिन्हा ने काफी कोशिश की लेकिन नतीज़ा नहीं निकला और सत्ता संघर्ष दिल्ली आ पहुँचा।

इसी मसले पर गुरुवार को दिल्ली में भाजपा संसदीय दल की बैठक हुई जिसके बाद यशवंत सिन्हा ने कहा, "हम सत्ता साझीदारी के समझौते पर अडिग हैं। एदयुरप्पा ही मुख्यमंत्री पद के दावेदार हैं और रहेंगे।"

भाजपा की तल्ख़ी के देखते हुए अब जेडीएस नेता एचडी देवगौड़ा नरम पड़ गए हैं। उन्होंने शुक्रवार को यशवंत सिन्हा और भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह से मिलने के लिए समय माँगा है।

Thursday, October 4, 2007

डेरा प्रमुख की सीबीआई अदालत में पेशी

डेरा प्रमुख बाबा गुरमीत राम रहीम सिंह आज अंबाला में सीबीआई अदालत के समक्ष पेश हो रहे हैं।

उन पर हत्या और बलात्कार के मामलों की सुनवाई होगी।

बाबा राम रहीम सिरसा से सैंकड़ों गाड़ियों के काफ़िले के साथ अंबाला पहुँचे। रास्ते में भी सड़क के दोनों ओर उनके समर्थक भारी संख्या में मौजूद थे।

डेरा प्रमुख के समर्थकों की मौजूदगी को देखते हुए सीबीआई अदालत के आस-पास सुरक्षा के व्यापक इंतज़ाम किए गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को डेरा प्रमुख की अंतरिम ज़मानत रद्द किए जाने की अपील ठुकरा दी थी।

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने उन्हें अग्रिम ज़मानत दे दी थी। हालाँकि उन्हें सीबीआई की विशेष अदालत में पेश होने और वहीं नियमित ज़मानत हासिल करने के लिए अर्ज़ी देने का आदेश दिया था।

सीबीआई ने डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख बाबा गुरमीत राम रहीम सिंह के ख़िलाफ़ तीन मामलों में आरोप दायर किए हैं।

ये मामले डेरा प्रबंधक रंजीत सिंह और सिरसा के एक पत्रकार राम चंदर की हत्या और एक शिष्या के कथित बलात्कार के हैं।

डेरा सच्चा सौदा एक आध्यात्मिक संगठन है, जिसकी स्थापना 1948 में तब के संयुक्त पंजाब और आज के हरियाणा के सिरसा में की गई थी। बाबा गुरमीत राम रहीम सिंह संगठन के प्रमुख हैं।

हाल में डेरा सच्चा सौदा संगठन और उनके प्रमुख काफ़ी विवाद में रहे थे।

दरअसल गुरमीत राम रहीम को कथित रूप से एक विज्ञापन में सिखों के 10वें गुरु गोविंद सिंह की वेशभूषा में दिखाया गया था जिससे सिख समुदाय में भारी नाराज़गी थी।

इसके बाद सिख समुदाय के लोगों और डेरा सच्चा सौदा समर्थकों के बीच राज्य के कुछ स्थानों पर हिंसक झड़पें हुईं थीं।

बाद में बाबा गुरमीत राम रहीम सिंह ने गुरु गोविंद सिंह से माफ़ी मांगी थी और बयान में कहा था कि गुरु गोविंद सिंह के जैसा दिखने या उनकी नकल करने की उनकी कोई मंशा नहीं थी।

Wednesday, October 3, 2007

उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच वार्ता

उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के बीच प्योंगयोंग में वार्ता चल रही है।

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति रोह मू-ह्यून इस वार्ता के लिए उत्तर कोरिया पहुँचे हुए हैं।

संभावना है कि रोह मू-ह्यून उत्तर कोरिया के लिए बड़े आर्थिक पैकेज की घोषणा करें, जिसमें निवेश भी होगा और सहयोग भी।

इसके अलावा दोनों के बीच कुछ सैन्य मसलों पर भी चर्चा होनी है जिसमें समुद्री सीमा की सुरक्षा का मसला भी है।

सात सालों में यह दोनों राष्ट्रप्रमुखों के बीच पहली औपचारिक बातचीत है।

सोमवार को राष्ट्रपति रोह जब अपनी पत्नी के साथ प्योंगयोंग पहुँचे तो न केवल उत्तर कोरिया के नेता किम जॉन्ग-ली ने उनका स्वागत किया बल्कि लोगों में भी बड़ा उत्साह था।

लेकिन संवाददाताओं का कहना है कि रिश्तों में प्रगाढ़ता की उम्मीदें बहुत हैं और इसकी संभावनाएँ सीमित ही हैं।

हालांकि उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच सात साल पहले शुरु हुई वार्ता के बाद से उत्तर कोरिया को अरबों डॉलर की सहायता दी जा चुकी है लेकिन उत्तर कोरिया अभी भी अलग-थलग है पड़ा हुआ है और उसकी हालत दयनीय है।

कुछ पर्यवेक्षक मानते हैं कि जब दोनों कोरिया के बीच सैन्य तनाव बढ़ा हुआ है, तब किम जॉन्ग-इल इस वार्ता का उपयोग ज़्यादा से ज़्यादा आर्थिक सहायता के लिए करना चाहते हैं।

राष्ट्रपति रोह का कार्यकाल सिर्फ़ एक महीने बचा हुआ है और उनके विरोधी आरोप लगाते हैं कि रोह अपनी छवि शांति स्थापित करने वाले एक नेता के रुप में बनाना चाहते हैं।

इस बीच उत्तर कोरिया के अधिकारी चोए सू-हॉन ने संयुक्त राष्ट्र से कहा है कि उन्हें वार्ता से तो बहुत उम्मीद है लेकिन वास्तविक तरक़्की तब तक नहीं हो सकती जब तक कि अमरीका उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ परमाणु हमले और आर्थिक प्रतिबंध की धमकी देना बंद नहीं कर देता।

उधर अमरीकी विदेश विभाग के प्रवक्ता शॉन मैककॉर्मक ने कहा है कि अमरीका ने उस योजना पर मुहर लगा दी है जिसमें उत्तर कोरिया के परमाणु ठिकानों को इस साल के अंत तक बंद किया जाना है।

इस योजना को रविवार को छह देशों की बैठक में अंतिम रुप दिया गया था।

Monday, October 1, 2007

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री भूख हड़ताल पर

सेतुसमुद्रम परियोजना के मुद्दे पर प्रस्तावित बंद पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम करुणानिधि और डीएमके के अन्य नेता राज्य में सोमवार को भूख हड़ताल पर हैं।

यह हड़ताल परियोजना को जल्द पूरा किए जाने की मांग को लेकर की जा रही है।

करुणानिधि ने बंद पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के फ़ैसले के कुछ देर बाद रविवार को कहा था यह भूख हड़ताल सेतुसमुद्रम परियोजना को जल्द पूरा किए जाने की राह की आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए है।
करुणानिधि ने अदालत के आदेश पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।
करुणानिधि ने कहा कि डीएमके कार्यकर्ता राज्य के सभी जिलों मुख्यालयों पर भूख हड़ताल करेंगे।
इसके पहले सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु में डीएमके के आह्वान पर सोमवार को होने वाले बंद पर रोक लगा दी थी।बंद पर पूर्व फ़ैसलों का हवाला देते हुए अदालत ने इसे ग़ैरक़ानूनी और असंवैधानिक बताया।
डीएमके ने सोमवर को सेतुसमुद्रम परियोजना के पक्ष में तमिलनाडु बंद का आह्वान किया था।
इसके ख़िलाफ़ विपक्षी जयललिता की पार्टी अन्नाद्रमुक ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।
अन्नाद्रमुक का कहना है कि डीएमके सेतुसमुद्रम मामले को तूल देकर तमिलनाडु में नया बखेड़ा खड़ा करना चाहती है।