विवादास्पद लेखिका तस्लीमा नसरीन को दिल्ली स्थित राजस्थान हाउस से किसी अन्य स्थान ले जाया गया है।
राजस्थान सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भारतीय समयानुसार रात लगभग 12।45 बजे तस्लीमा को केंद्र सरकार के अधिकारियों के हवाले कर दिया गया।
उन्हें कहा ले जाया गया है, इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।
इधर तस्लीमा नसरीन को लेकर सोमवार को राजनीतिक बयानबाजी तेज़ रही।
सीपीएम नेता सीताराम येचुरी ने कहा है कि इस मामले में पश्चिम बंगाल सरकार की कोई भूमिका नहीं है।
उनका कहना था कि ये निर्णय केंद्र सरकार को लेना है कि तस्लीमा नसरीन भारत में रहें या नहीं अथवा उनकी वीज़ा की अवधि बढ़ाई जाए या नहीं?
दूसरी ओर भाजपा ने तसलीमा को राजनीतिक शरणार्थी का दर्जा देने की मांग की है।
भाजपा नेता विजय कुमार मल्होत्रा ने कहा कि इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की खामोशी चिंताजनक है।
उनका कहना था कि देश में शरण और वीज़ा देने के बाद भी तस्लीमा नसरीन को जान बचाने के लिए इधर-उधर भागना पड़े, यह शर्मनाक है।
विवाद
ग़ौरतलब है कि इसके पहले तस्लीमा नसरीन ने कहा था कि वे वापस कोलकाता जाना चाहती हैं।
टेलीविज़न चैनल एनडीटीवी से बातचीत में उन्होंने कहा, " मुझे अपने घर की याद आती है, मुझे कोलकाता की याद आती है।"
उल्लेखनीय है कि तस्लीमा नसरीन की वीज़ा की अवधि बढ़ाए जाने के विरोध में कोलकाता में हिंसा भड़क उठी थी जिसमें 43 लोग घायल हुए थे।
इसके बाद उन्हें राजस्थान भेज दिया गया था और फिर दिल्ली लाया गया था।
विवादों में घिरीं लेखिका तस्लीमा नसरीन 1990 के दशक में कट्टरपंथियों की धमकियों के कारण बांग्लादेश से यूरोप चली गई थीं और पिछले तीन साल से वे कोलकाता में रह रहीं थीं।
उनके लेख इस्लामी कट्टरपंथियों को काफ़ी समय से अखरते रहे हैं।
Tuesday, November 27, 2007
तस्लीमा की सुरक्षा केंद्र के ज़िम्मे
Monday, November 26, 2007
चुनावों के लिए पर्चा भरेंगे शरीफ़
सऊदी अरब से निर्वासित जीवन बिता कर वतन लौटे पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ आगामी चुनावों के लिए सोमवार को नामांकन दाखिल कर सकते हैं।
हालांकि विपक्षी दलों ने सभी राजनीतिक दलों से आगामी चुनावों का बहिष्कार करने की अपील की है।
पाकिस्तान मुस्लिम लीग ( नवाज़ ) के प्रमुख नवाज़ शरीफ़ रविवार को पाकिस्तान पहुंचे हैं।
पाकिस्तान में इस समय आपातकाल है और राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने जनवरी महीने में चुनावों की तारीख तय की है।
इससे पहले उनकी प्रतिद्वंद्वी और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की नेता बेनज़ीर भुट्टो ने सिंध प्रांत में दो सीटों पर नामांकन भर दिया है।
उधर विपक्षी दलों के समूह आल पार्टी डेमोक्रेटिक मूवमेंट ने शनिवार को कहा था कि अगर राष्ट्रपति मुशर्रफ़ आपातकाल नहीं हटाते और सुप्रीम कोर्ट के बर्खास्त जजों की बहाली नहीं करते तो चुनावों का बहिष्कार किया जाएगा।
पीएमएल नवाज़ इस समूह की सदस्य है। उधर पीपीपी ने भी चुनावों का बहिष्कार करने का समर्थन किया था लेकिन अब बेनज़ीर ने पर्चा भर दिया है। ऐसे में लगता है कि नवाज़ शरीफ़ भी पर्चा भरेंगे।
तानाशाही ख़त्म करुंगा
इससे पहले पाकिस्तान लौटने के बाद नवाज़ शरीफ़ ने कहा है कि वह मुल्क़ से तानाशाही ख़त्म करने आए हैं और वो लोकतंत्र मज़बूत बनाना चाहते हैं।
नवाज़ शरीफ़ का विमान रविवार रात लाहौर हवाई अड्डे पर उतरा। सऊदी अरब से उनके साथ उनकी पत्नी कुलसुम नवाज़ और भाई शाहबाज़ शरीफ़ भी आए हैं।
उन्होंने बीबीसी के साथ विशेष बातचीत में कहा, "हम देश में क़ानून का शासन चाहते हैं। हमें जम्हूरियत चाहिए और कुछ नहीं।"
नवाज़ शरीफ़ का कहना था, "ये मेरी ज़िंदगी का बेहतरीन लम्हा है। मैं उन लोगों का शुक्रगुजार हूँ जिन्होंने मेरा साथ दिया।"
हम देश में क़ानून का शासन चाहते हैं। हमें जम्हूरियत चाहिए और कुछ नहीं
नवाज़ शरीफ़
पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि वो 1977 के संविधान की बहाली के लिए काम करेंगे।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वो बदले की राजनीति के तहत आगे नहीं बढ़ेंगे। इस सवाल पर कि क्या वो जनरल मुशर्रफ़ के साथ मिल कर काम करेंगे तो उनका कहना था, "हमारा एजेंडा उनसे अलग है।"
संसदीय चुनाव में हिस्सा लेने के सवाल पर उनका कहना था कि इसका फ़ैसला 'ऑल पार्टी डेमोक्रैटिक मूवमेंट' में शामिल अन्य दलों के साथ सलाह मशविरे के बाद ही किया जाएगा।
स्वागत
अपने परिवार के तीस सदस्यों के साथ पाकिस्तान पहुँचे नवाज़ शरीफ़ ने कहा कि उनका "परवेज़ मुशर्रफ़ से किसी तरह का समझौता करने का कोई इरादा नहीं है"।
वे सात वर्ष निर्वासित ज़िंदगी गुज़ारने के बाद जेद्दा से एक विशेष विमान से लाहौर पहुँचे हैं।
सरकार की ओर से कहा गया है कि नवाज़ शरीफ़ अपनी मर्ज़ी से वापस लौटे हैं और उन्हें पिछली बार की तरह रोका या वापस नहीं भेजा जाएगा।
पिछले 10 सितंबर को इसी सरकार ने स्वदेश वापस लौटे नवाज़ शरीफ़ को हवाईअड्डे से ही वापस भेज दिया गया था।
हवाई अड्डे के लाउंज से बाहर निकलते ही पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) के समर्थकों ने उन्हें और शाहबाज़ शरीफ़ को कंधों पर उठा लिया और ज़बर्दस्त नारेबाज़ी की।
उन्होंने लोगों से कहा कि वो किसी सौदेबाज़ी के लिए वापस नहीं आए हैं बल्कि मुल्क़ और कौम के लिए वापस आए हैं।
हवाई अड्डे पर उनकी पार्टी के कार्यकर्ता लगातार जनरल मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ नारे लगाते रहे। पुलिस के साथ कार्यकर्ताओं की धक्कामुक्की भी हुई और हल्का लाठीचार्ज करना पड़ा।
कुछ दिन पहले पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें स्वदेश लौटने की अनुमति दे दी थी।
1999 में नवाज़ शरीफ़ का तख़्ता पलट दिया गया था और अगले साल उन्हें पाकिस्तान से सऊदी अरब निर्वासित कर दिया गया था।
Thursday, November 22, 2007
'राज्य सरकार भय दूर करने की कोशिश करे'
गृह मंत्री शिवराज पाटिल ने कहा है कि केंद्र सरकार ने नंदीग्राम में स्थिति सामान्य बनाए रखने के लिए संवैधानिक प्रावधानों के तहत कुछ निर्देश दिए हैं।
लोकसभा में नंदीग्राम के मुद्दे पर लगभग साढ़े छह घंटे चली बहस का जवाब देते हुए गृह मंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार से कहा गया है कि वह भयमुक्त वातावरण तैयार करने के लिए सभी आवश्यक क़दम उठाए।
इससे पहले लोकसभा में विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने राज्य सरकार को संविधान के अनुच्छेद 355 के तहत निर्देश देने और इसका असर नहीं होने पर राष्ट्रपति शासन लागू करने की माँग की थी।
शिवराज पाटिल ने कहा कि केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 355 की तर्ज पर ही राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं।
उन्होंने बताया कि इन निर्देशों में कहा गया है कि नंदीग्राम छोड़कर गए लोगों को घर वापस लौटाना होगा और उन्हें पूरा संरक्षण देना होगा।
साथ ही मोटरसाइकिल से घूमकर किसी को डराने की अनुमति नहीं हो, पीड़ितों को समुचित मुआवजा दिया जाए और सुरक्षा बलों की उचित तैनाती की जाए।
उन्होंने स्वीकार किया कि नंदीग्राम में जो कुछ हुआ वह दुखद था और ऐसी स्थिति बन गई थी कि कोई सरकारी मुलाजिम वहाँ तक नहीं जा सकता था।
गृह मंत्री ने कहा कि वहाँ व्याप्त भय की भावना सबसे बड़ी बात है जिसे दूर करने के लिए राज्य सरकार क़दम उठाए, इसमें केंद्र उसके साथ होगा।
Wednesday, November 21, 2007
मुशर्रफ़ ने लोकतंत्र को आगे बढ़ाया: राष्ट्रपति बुश
अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ पर भरोसा जताते हुए कहा है राष्ट्रपति मुशर्रफ़ अपनी ज़बान के पक्के हैं और उन्होंने देश में लोकतंत्र को आगे बढ़ाया है।
एजेंसियों के अनुसार राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने एबीसी टीवी को वॉशिंगटन के पास कैंप डेविड में दिए एक इंटरव्यू में ये विचार व्यक्त किए हैं।
समाचार माध्यमों के मुताबिक राष्ट्रपति बुश ने कहा, "मुझे लगता है कि उन्होंने हज़ारों लोगों को जेल से रिहा कर एक अच्छा संकेत दिया है। क्या हम इमरजेंसी लगाए जाने से ख़ुश हैं? नहीं, हम ख़ुश नहीं।"
महत्वपूर्ण है कि पाकिस्तान में इमरजेंसी लागू होने के बाद हज़ारों लोगों की गिरफ़्तारी हुई है लेकिन मंगलवार को जेल में क़ैद किए गए तीन हज़ार से ज़्यादा लोगों को रिहा कर दिया गया।
'लोकतंत्र को पटरी पर लाएँगे'
पाकिस्तान में चरमपंथ और लोकतंत्र पर राष्ट्रपति बुश का कहना था, "क्या मैं चरमपंथियों और कट्टरपंथियों के साथ लड़ाई में उनका महत्व जानता हूँ? हाँ मैं जानता हूँ। और क्या मैं मानता हूँ कि वे पाकिस्तान में लोकतंत्र को पटरी में ला पाएँगे? हाँ, मैं ज़रूर ऐसी उम्मीद करता हूँ।"
उनका कहना था, "उन्होंने (मुशर्रफ़) ने कहा है कि वे वर्दी उतार देंगे। उन्होंने कहा है कि चुनाव होंगे। आज उन्होंने क़ैदियों को रिहा किया है। अब तक मैनें पाया है कि वे अपनी ज़बान के पक्के हैं।"
मुझे लगता है कि उन्होंने हज़ारों लोगों को जेल से रिहा कर एक अच्छा संकेत दिया है. क्या हम इमरजेंसी लगाए जाने से ख़ुश हैं? नहीं, हम ख़ुश नहीं. क्या मैं चरमपंथियों और कट्टरपंथियों के साथ लड़ाई में उनका महत्व जानता हूँ? और क्या मैं मानता हूँ कि वे पाकिस्तान में लोकतंत्र को पटरी में ला पाएँगे? हाँ, मैं ज़रूर ऐसी उम्मीद करता हूँ
राष्ट्रपति बुश
राष्ट्रपति बुश ने कहा कि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने ऐसी कोई हद पार नहीं की है जिससे वे अमरीका का समर्थन खो दें।
उनका कहना था, "मुझे नहीं लगता कि वे (मुशर्रफ़) कोई हद पार करेंगे। मुझे लगता है कि वे सच में ऐसे व्यक्ति हैं जिनका लोकतंत्र में विश्वास है।"
जब उनसे पाकिस्तान के परमाणु हथियारों की सुरक्षा के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था, "मुझे पूरी उम्मीद है। इस समय तो हमें काफ़ी आश्वस्त हैं। जिस भी देश के पास परमाणु हथियार होंगे, हम उस पर क़रीबी नज़र तो रखेंगे ही।"
Tuesday, November 20, 2007
'बुश इमरजेंसी पर गुज़ारिश ही कर सकते हैं'
अमरीकी राष्ट्रपति के कार्यालय की प्रवक्ता डाना पैरिनो ने पत्रकारों को बताया है कि अमरीकी विदेश उपमंत्री जॉन नेग्रोपॉन्टे ने अपनी पाकिस्तान यात्रा से लौटकर राष्ट्रपति जॉर्ज बुश को वहाँ हुई गतिविधियों से अवगत कराया है।
प्रवक्ता डाना पैरिनो से पूछा गया कि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के इमरजेंसी हटाने से इनकार कर देने के बाद अमरीका आगे क्या करेगा?
डाना पैरिनो का कहना था, "पाकिस्तान एक संप्रभु देश है और राष्ट्रपति बुश पाकिस्तान से गुज़ारिश ही कर सकते हैं। कूटनीति में नतीज़े तत्काल सामने नज़र नहीं आते और इसलिए हमने बातचीत के विकल्प खुले रखे हैं।"
उधर पाकिस्तान में जहाँ नवगठित सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के दोबारा चुनाव को चुनौती देने वाली छह याचिकाओं में से पाँच रद्द कर दी हैं, वहीं मंगलवार को राष्ट्रपति मुशर्रफ़ सऊदी अरब जा रहे हैं।
एक ओर अटकलें लगाई जा रही हैं कि शायद राष्ट्रपति मुशर्रफ़ वहाँ पाकिस्तान के निर्वासित पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ से बातचीत करें, लेकिन नवाज़ शरीफ़ ने विभिन्न समाचार माध्यमों के ज़रिए स्पष्ट किया है कि उनकी राष्ट्रपति मुशर्रफ़ से बातचीत करने की कोई योजना नहीं है।
चुनाव कराने की घोषणा
पाकिस्तान एक संप्रभु देश है और राष्ट्रपति बुश पाकिस्तान से गुज़ारिश ही कर सकते हैं। कूटनीति में नतीज़े तत्काल सामने नज़र नहीं आते और इसलिए हमने बातचीत के विकल्प खुले रखे हैं
व्हाइट हाउस प्रवक्ता
अमरीकी राष्ट्रपति कार्यालय की प्रवक्ता डाना पैरिनो ने कहा है कि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने इमरजेंसी हटाने की घोषणा तो नहीं की है लेकिन उन्होंने चुनाव कराने की घोषणा की है, जो अच्छी बात है।
उन्होंने ये भी भरोसा ज़ाहिर किया कि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ सेनाध्यक्ष का पद भी छोड़ देंगे, जो पाकिस्तान की जनता के लिए एक अच्छी बात होगी।
लेकिन डाना पैरिनो का ये भी कहना था, "हम नहीं मानते कि ऐसे माहौल में जहाँ लोगों को चुनाव प्रचार करने की आज़ादी न हो और मीडिया को रिपोर्टिंग करने की अनुमति न हो, वहाँ चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष हो सकते हैं।"
हम नहीं मानते कि ऐसे माहौल में जहाँ लोगों को चुनाव प्रचार करने की आज़ादी न हो और मीडिया को रिपोर्टिंग करने की अनुमति न हो, वहाँ चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष हो सकते हैं
व्हाइट हाउस
अमरीका में विश्लेषकों का मानना है कि अमरीका पाकिस्तान में एक ऐसी सरकार चाहता है जिसमें मुशर्रफ़ भी हों और बेनज़ीर भी हो और मुशर्रफ़ सरकार और फ़ौज के बीच पुल का काम करें।
टीकाकारों का मानना है कि यदि अमरीका इस समय राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ कड़े कदम उठाने का सोचता भी है तो उसे अपनी कई हितों का ध्यान रखना होगा।
उनका मानना है कि यदि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ 'हट' भी जाते हैं तो 'आतंकवाद के ख़िलाफ़ जंग' और अफ़ग़ानिस्तान में अमरीका के नेतृत्व वाले सैन्य अभियान का क्या होगा, क्योंकि वह इसके लिए पाकिस्तान की बंदरगाह और क्षेत्र का इस्तेमाल करता है।
Monday, November 19, 2007
संसद में छा सकता है नंदीग्राम का मुद्दा
मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने संसद के दोनों सदनों में सोमवार को नंदीग्राम का मुद्दा ज़ोर-शोर से उठाने के संकेत दिए हैं और इस मामले पर केंद्र सरकार की 'चुप्पी' की आलोचना की है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी राज्यसभा में इस मुद्दे पर सोमवार को बहस कराने के लिए पहले ही प्रस्ताव दे चुके हैं।
उन्होंने नंदीग्राम में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के कार्यकर्ताओं की कथित ज़्यादती पर 'चुप्पी' साधने के लिए कांग्रेस की तीखी आलोचना की है।
मुरली मनोहर जोशी ने रविवार को भुवनेश्वर में पत्रकारों से कहा कि उनकी पार्टी संसद के दोनों सदनों में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाएगी।
उनका कहना था, "यह बहुत ही आश्चर्यजनक है कि कांग्रेस नंदीग्राम के मुद्दे पर चुप है। सिर्फ़ इसलिए कि सीपीएम केंद्र की यूपीए सरकार को समर्थन दे रहा है।"
यह बहुत ही आश्चर्यजनक है कि कांग्रेस नंदीग्राम के मुद्दे पर चुप है. सिर्फ़ इसलिए कि सीपीएम केंद्र की यूपीए सरकार को समर्थन दे रहा है
मुरली मनोहर जोशी
भाजपा नेता ने सवाल किया कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी या प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने नंदीग्राम का दौरा क्यों नहीं किया।
उन्होंने कहा, "ऐसा लगता है कि कांग्रेस की चुप्पी इसलिए है कि वो अपनी अगुआई वाली यूपीए सरकार को बचाए या भारत-अमरीका परमाणु समझौते पर सीपीएम को लचीला रूख़ अपनाने के लिए बाध्य करे।"
मुरली मनोहर जोशी का कहना था कि वो पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के पक्षधर नहीं हैं लेकिन केंद्र सरकार संवैधानिक प्रावधानों के तहत राज्य सरकार को चेतावनी दे सकती थी।
नंदीग्राम के अलावा परमाणु समझौते का मुद्दा भी संसद में उठना तय है।
सीपीएम का कहना है कि केंद्र सरकार अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के साथ आणविक प्रतिष्ठानों की निगरानी और अन्य पहलुओं पर बातचीत जारी रख सकती है लेकिन इनके निष्कर्षों को परमाणु समझौते के मुद्दे पर गठित यूपए-वाम समिति के समक्ष पेश करना होगा।
Saturday, November 17, 2007
बांग्लादेश में तूफ़ान से सैकड़ों मारे गए
बांग्लादेश सरकार का कहना है कि दक्षिण-पश्चिमी तटवर्ती इलाक़ों में आए भीषण तूफ़ान में छह सौ ज़्यादा लोग मारे गए हैं। कुछ अन्य रिपोर्टों में मृतकों की संख्या एक हज़ार से अधिक बताई गई है।
बचावकर्मियों का कहना है कि मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है। तूफ़ान ने भारी तबाही मचाई है और हज़ारों लोग बेघरबार हो गए हैं और कई इलाक़ों में संचार व्यवस्था ठप्प हो गई है।
अधिकारियों का कहना है कि गुरुवार की रात आया भीषण तूफ़ान शुक्रवार शाम तक ठंडा हो गया।
तूफ़ान तटवर्ती इलाक़ों में 240 किलोमीटर प्रति किलोमीटर की रफ़्तार से पहुँचा और इसकी वजह से कई जगह पाँच-पाँच मीटर ऊँची लहरें उठ रहीं थीं।
इस समुद्री तूफ़ान के बाद अनेक लोग लापता हैं और लाखों अपने घर छोड़कर पलायन करने को मजबूर हुए हैं।
अधिकरियों का कहना है कि मछली पकड़ने के लिए गईं कोई 150 नौकाएँ लौट नहीं सकीं हैं। संयुक्त राष्ट्र की एक एजेंसी का कहना है कि एक हज़ार मछुआरे लापता हैं।
बाढ़ पीड़ित
पीड़ितों तक सहायता पहुँचाने की कोशिशें जारी हैं
बांग्लादेश के पड़ोस में भारत के पश्चिमी बंगाल राज्य के अधिकारियों को आशंका है कि तूफ़ान से वहाँ लगभग दस लाख लोगों प्रभावित हुए हैं।
सहायता और बचाव कार्य
बांग्लादेश में दो सौ किलोमीटर प्रति घंटे से ज़्यादा तीव्रता वाली तेज़ हवाओं ने कई घरों और भवनों को ध्वस्त कर दिया है और बड़ी संख्या में पेड़ और बिजली के खंबे उखड़ गए।
सेना, पुलिस और अन्य सरकारी एजेंसियों के अलावा रेडक्रॉस और कई स्वयंसेवी संस्थाएं राहत और बचाव कार्य में लगी हुई हैं।
पीड़ितों को खाना, दवा, टेंट और कंबल आदि पहुँचाने की कोशिशें की जा रही हैं। कई तटवर्ती इलाक़ों में पानी भरा हुआ है।
यातायात ठप्प पड़ा हुआ है और सरकार को ढाका के मुख्य हवाईअड्डे से सभी उड़ानें रद्द करनी पड़ी हैं।
जिन लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया था उनमें से काफ़ी तो वापिस लौट चुके हैं और जो नहीं लौटे हैं उन्हें सलाह दी जा रही है कि अब कोई ख़तरा नहीं है
निदेशक, भारत मौसम विभाग
कई इलाकों में संचार व्यवस्था प्रभावित होने के कारण अभी तक तूफ़ान से हुई तबाही का सही अंदाज़ा नहीं लगाया जा सका है।
बांग्लादेश का दक्षिणी तट अक्सर तूफ़ान की चपेट में आ जाता है। वर्ष 1970 में यहाँ भीषण तूफ़ान आया था जिसमें पाँच लाख लोग मारे गए थे।
भारत में हालात सामान्य
नई दिल्ली में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के निदेशक बीपी यादव का कहना था कि गुरूवार को आए उस तूफ़ान की तीव्रता शुक्रवार तक धीमी पड़ चुकी है और सरकार ने अलर्ट हटा लिया है।
बांग्लादेश
तूफ़ान की रफ़्तार 240 किलोमीटर प्रतिघंटा थी
यादव ने बातचीत में कहा, "जिन लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया था उनमें से काफ़ी तो वापिस लौट चुके हैं और जो नहीं लौटे हैं उन्हें सलाह दी जा रही है कि अब कोई ख़तरा नहीं है।"
यादव ने कहा कि मछुआरे भी समुद्र में अपनी सामान्य गतिविधियाँ जारी रख सकते हैं।
यादव ने कहा कि इस तूफ़ान से प्रभावित उड़ीसा और पश्चिम बंगाल में कोई बड़ा नुक़सान नहीं हुआ है और इसका ज़्यादातर नुक़सान बांग्लादेश में हुआ है।
यादव ने कहा कि यह तूफ़ान बांग्लादेश और भारत के सभी इलाक़ों में ठंडा पड़ चुका है और अब इससे और नुक़सान की कोई संभावना नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत में संचार व्यवस्था ठीकठाक है और यातायात के हालात भी सामान्य हैं।
Friday, November 16, 2007
बांग्लादेश: तूफ़ान में 50 से ज़्यादा मारे गए
बांग्लादेश के दक्षिण-पश्चिमी तटवर्ती इलाक़ों में गुरुवार को आए भीषण समुद्री तूफ़ान में 50 से ज़्यादा लोगों के मारे जाने की ख़बर है। प्रशासन का कहना है कि हताहतों की संख्या बढ़ सकती है।
ताज़ा जानकारी के मुताबिक इस समुद्री तूफ़ान में अनेक लोग लापता हो गए हैं और लाखों लोग अपने घरों को छोड़कर पलायन करने को मजबूर हुए हैं और अब शरणार्थी शिविरों में हैं।
बांग्लादेश के पड़ोस में भारत के पश्चिमी बंगाल राज्य के अधिकारियों को आशंका है कि तूफ़ान से वहाँ लगभग दस लाख लोगों प्रभावित हुए हैं।
दो सौ किलोमीटर प्रति घंटे से ज़्यादा तीव्रता वाली तेज़ हवाओं ने कई घरों, भवनों को ध्वस्त कर दिया है और बड़ी संख्या में पेड़ उखड़ गए हैं। कई तटवर्ती इलाक़ों में पानी भरा हुआ है।
बांग्लादेश की राजधानी ढाका में हवाई अड्डा अब भी बंद है।
बांग्लादेश
तूफ़ान में 200 किलोमीटर प्रति घंटा की तीव्रता वाली हवाएँ चलीं
कई इलाकों में संचार व्यवस्था प्रभावित होने के कारण अभी तक तूफ़ान से हुई तबाही का सही अंदाज़ा नहीं लगाया जा सका है।
बांग्लादेश से पत्रकार हसन शहरयार का कहना है कि तूफ़ान से हुए नुकसान को देखते हुए कहा जा सकता है कि मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है।
हालांकि सरकारी सूत्रों का कहना है कि जैसे-जैसे प्रभावित इलाकों से संपर्क बहाल होता है, जानमाल के नुकसान का असली अंदाज़ा तभी लगेगा।
संचार ठप्प
स्थिति यह है कि कुछ शहरों और कस्बों से देर रात तक कोई संपर्क स्थापित नहीं हो पाया था और वहाँ से कोई स्पष्ट जानकारी हासिल नहीं हो सकी है।
बताया जा रहा है कि तफ़ान प्रभावित इलाके के तीन गाँव पूरी तरह से नष्ट हो गए हैं।
चेतावनी
तूफ़ान से पहले चेतावनी जारी की गई थी
सरकार ने तूफ़ान के कुछ समय पहले ही चेतावनी जारी कर दी थी और लगभग साढ़े छह लाख लोगों को तूफ़ान प्रभावित इलाकों से निकाल लिया गया था।
लगभग 1000 अस्थायी पड़ावों मे तूफ़ान से प्रभावित लोगों के आश्रय लेने की व्यवस्था की गई है।
उधर मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह तूफ़ान अब थोड़ा कमज़ोर पड़ता नज़र आ रहा है और संभव है कि शुक्रवार दोपहर तक इसकी तीव्रता कुछ कम हो जाए।
Thursday, November 15, 2007
शीतकालीन सत्र के गर्म रहने के आसार
भारतीय संसद का शीतकालीन सत्र गुरुवार से शुरु हो रहा है।
भारत-अमरीका परमाणु समझौते और नंदीग्राम की हिंसा से लेकर गेंहूँ आयात तक कई ऐसे मुद्दे हैं जिन पर यूपीए सरकार को अपने सहयोगियों और विपक्षी दलों के सवालों से दो चार होना पड़ेगा।
हालांकि सरकार कह रही है कि वह हर विषय पर चर्चा के लिए तैयार है लेकिन विपक्ष के तेवर बता रहे हैं कि चर्चा से पहले हंगामा और शोर-शराबा तय है।
हालांकि सदन के पहले दिन कोई कार्यवाही नहीं होनी है क्योंकि दोनों ही सदन श्रद्धांजलि सभा के बाद स्थगित होने वाले हैं।
इस बीच लोकसभा सदस्य विजय खंडेलवाल का निधन हुआ है तो राज्यसभा से जना कृष्णमूर्ति का।
कई मुद्दे
तीन हफ़्ते चलने वाले इस सत्र में कई मुद्दों पर सरकार और विपक्ष आमने सामने होंगे तो कुछ पर सरकार को अपने ही सहयोगी दलों के सवालों के भी जवाब देने होंगे।
मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने पहले ही दिन प्रश्नकाल स्थगित कर नंदीग्राम पर बहस करवाने का नोटिस दे रखा है।
नंदीग्राम की हिंसा के मुद्दे पर यूपीए को बाहर से समर्थन दे रहे वाममोर्चे को जवाब देना होगा, ख़ासकर सीपीएम को, जिसके कार्यकर्ताओं ने नंदीग्राम में हिंसक कार्रवाई की है।
वामपंथी नेता
वामदलों ने परमाणु समझौते पर सरकार से समर्थन वापसी की धमकी भी दी थी
सीपीएम कार्यकर्ताओं की कार्रवाई को जिस तरह मुख्यमंत्री बुद्धदेब भट्टाचार्य ने उचित ठहराया है, वह भी बहस का विषय रहेगा।
परमाणु क़रार के मुद्दे पर यूपीए सरकार को उनके अपने सहयोगी वामदल की घेरे रहेंगे। हालांकि वामदलों का रुख़ पिछले दो-तीन दिनों में कुछ नरम हो गया दिखता है लेकिन इससे बहस कमज़ोर हो जाएगी ऐसा नहीं दिखता।
इस मुद्दे पर भाजपा ने भी साफ़ कर दिया है कि वह सरकार का साथ नहीं देने जा रही है।
इसके अलावा जिन मुद्दों पर माहौल गर्माया रहेगा उनमें गेहूँ के आयात और धान के समर्थन मूल्य का मामला रहेगा।
सेतुसमुद्रम परियोजना से लेकर ख़ुदरा बाज़ार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश जैसे कई मुद्दे इसी सत्र में उठने की संभावना है।
तारीख़
परमाणु समझौते ने मानसून सत्र को गर्माए रखा था। और अब माना जा रहा है कि शीतकालीन सत्र की प्राथमिकता परमाणु मुद्दे पर चर्चा है।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा है कि वे चाहते हैं कि चर्चा के दौरान सभी वरिष्ठ मंत्री उपस्थित रहें। उधर भाजपा ने साफ़ कर दिया है कि वे प्रधानमंत्री की उपस्थिति सदन में चाहते हैं।
हालांकि संसदीय कार्यमंत्री प्रियरंजन दासमुंशी कह रहे हैं कि वे सभी की सुविधा से चर्चा की तारीख़ तय कर लेंगे लेकिन मामला थोड़ा कठिन भी दिखता है।
20 नवंबर को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सिंगापुर जाकर आसियान की बैठक में शामिल होना है और फिर चोगम की बैठक के लिए यूगांडा जाना है।
इससे लगता है कि परमाणु समझौते पर चर्चा या तो 16 नवंबर को हो सकती है या फिर 19 नवंबर को। अगर मामला इससे आगे बढ़ा तो फिर प्रधानमंत्री के लौटने का इंतज़ार करना होगा।
Wednesday, November 14, 2007
'जहाँ मार्शल लॉ हो, वहाँ कैसे चुनाव?'
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने कहा है कि जब तक बर्ख़ास्त मुख्य न्यायाधीश और अन्य जजों को बहाल नहीं किया जाता, 'तब तक देश में चुनावों की बात न तो सुननी चाहिए और न ही माननी चाहिए।'
महत्वपूर्ण है कि निर्वासित पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने बीबीसी को इंटरव्यू में ऐसा तब कहा है जब मंगलवार को पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के इस्तीफ़े की माँग कर चुकी हैं।
जेद्दा से बातचीत में नवाज़ शरीफ़ ने बनेज़ीर भुट्टो के बयान का स्वागत किया।
लेकिन उनका ये भी कहना था, "जिस देश में इमरजेंसी हो और हक़ीकत में मार्शल लॉ लागू हो, जहाँ राजनीतिक नेता और मानवाधिकार कार्यकर्ता क़ैद हों और चुनाव प्रचार भी न हो सकता हो, उस देश में क्या चुनाव होंगे?"
जब निर्वासित पूर्व प्रधानमंत्री से स्पष्ट पूछा गया कि क्या उनकी पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) चुनाव में भाग नहीं लेगी, तो उनका कहना था, "मैं अकेले तो इसका फ़ैसला नहीं ले सकता। ये फ़ैसला सबको मिलकर करना चाहिए। लेकिन जो विचार मैने व्यक्त किए हैं, ऑल पार्टीस डेमोक्रेटिक मूवमेंट के सभी नेता चुनावों के बारे में यही नज़रिए रखते हैं।"
जिस देश में इमरजेंसी हो और हक़ीकत में मार्शल लॉ लागू हो, जहाँ राजनीतिक नेता और मानवाधिकार कार्यकर्ता क़ैद हों और चुनाव प्रचार भी न हो सकता हो, उस देश में क्या चुनाव होंगे
नवाज़ शरीफ़
उनका दावा था कि उनकी पार्टी के अधिकतर लोग जेल में बंद हैं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा, "जनरल मुशर्रफ़ के मुताबिक 55 दिन के बाद चुनाव होने हैं लेकिन चुनाव प्रचार और मीटिंग करने की इजाज़त नहीं है, तो क्या चुनाव होंगे।"
नवाज़ शरीफ़ ने आरोप लगाया, "जनरल मुशर्रफ़ ख़ुद ही खेल के नियम बना रहे हैं, ख़ुद ही अंपायर हैं और विपक्ष को उन्होंने रन आउट दे दिया है।"
नेग्रोपॉंटे पाकिस्तान जाएँगे
उधर अमरीकी विदेश उपमंत्री जॉन नेग्रोपॉन्टे इस हफ़्ते पाकिस्तान का दौरा करेंगे। अमरीकी राष्ट्रपति के कार्यालय ने घोषणा की है।
जनरल मुशर्रफ़ ख़ुद ही खेल के नियम बना रहे हैं, ख़ुद ही अंपायर हैं और विपक्ष को उन्होंने रन आउट दे दिया है
नवाज़ शरीफ़
माना जा रहा है कि वे पाकिस्तानी राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ से मिलेंगे और उनसे इमरजेंसी हटाने के लिए कहेंगे। वे कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से भी मुलाक़ात करेंगे।
फ़िलहाल ये स्पष्ट नहीं है कि वे नज़बंद की गई पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो से भी मिलेंगे या नहीं।
इमरजेंसी का विरोध कर रहीं विपक्षी नेता बेनज़ीर भुट्टो को सात दिनों के लिए लाहौर में नज़रबंद किया गया है।
मंगलवार को फ़ोन पर हुई बातचीत में उन्होंने कहा था कि मुशर्रफ़ स्थितियों को समझ पाने और काबू कर पाने में विफल हो गए हैं और अब उन्हें इस्तीफ़ा दे देना चाहिए।
Tuesday, November 13, 2007
बेनज़ीर भुट्टो फिर 'नज़रबंद'
इमरजेंसी का विरोध कर रहीं पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री और विपक्षी नेता बेनज़ीर भुट्टो को सात दिनों के लिए नज़रबंद कर दिया गया है।
उधर बेनज़ीर भुट्टो की पार्टी, पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की ओर से लाहौर से इस्लामाबाद के लिए प्रस्तावित रैली के मद्देनज़र लाहौर में कड़ी कर दी गई है।
बेनज़ीर इस वक्त लाहौर में अपनी पार्टी के एक नेता के घर पर रुकी हुई हैं। इस घर के इर्द-गिर्द सोमवार रात से ही पुलिस की बड़ी तादाद में तैनाती कर दी गई है।
इस घर के आसपास के लगभग एक किलोमीटर के दायरे में किसी भी व्यक्ति के आने-जाने पर रोक लगा दी गई है और रास्ते बंद कर दिए गए हैं।
ग़ौरतलब है कि अपने तय कार्यक्रम के मुताबिक मंगलवार को बेनज़ीर भुट्टो अपने समर्थकों के साथ लाहौर से इस्लामाबाद तक की एक रैली निकालने वाली थीं।
बेनज़ीर भुट्टो ने इस रैली की घोषणा करते हुए कहा था कि उनका विरोध प्रदर्शन पाकिस्तान में आपातकाल के ख़त्म होने तक चलता रहेगा।
पिछले सप्ताह भी अपनी एक रैली से ठीक पहले बेनज़ीर भुट्टो को नज़रबंद कर दिया गया था। हालांकि बाद में उनकी नज़रबंदी हटा ली गई थी।
सुरक्षा कड़ी
इस रैली के मद्देनज़र लाहौर में धारा 144 लागू कर दी गई है। लोगों को बिना अनुमति के एक साथ इकट्ठे होने या कोई सामुहिक कार्यक्रम करने से रोक दिया गया है।
शेख़ रशीद, रेलमंत्री-पाकिस्तान
बेनज़ीर अगर कुछ साबित करना चाहती हैं तो चुनाव का सामना करें, रैली और प्रदर्शनों के ज़रिए वो ख़ुद को विपक्ष के नेता के तौर पर स्थापित करने की कोशिश कर रही हैं. उन्हें लगता है कि सारे भ्रष्टाचार के आरोपों से उबरकर वो खुद को जनता के नेता के तौर पर स्थापित कर लेंगी. जनता को तय करने दें कि चोर कौन है और चौकीदार कौन
जानकारी के मुताबिक सोमवार की शाम बेनज़ीर भुट्टो लाहौर के कुछ इलाकों में जाकर रैली से पहले की तैयारी का जायज़ा लेकर अपने एक स्थानीय नेता के घर आईं। इसके तुरंत बाद उस घर के इर्द-गिर्द पुलिस और सुरक्षाबलों की तैनाती बढ़ा दी गई।
अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि बेनज़ीर को इस बारे में इत्तला दी गई कि उन्हें बाहर जाने से रोका जा रहा है. इस आदेश को उन्होंने स्वीकारने से इनकार कर दिया.
अधिकारियों से पूछा कि उनकी नज़रबंदी सुरक्षा के लिहाज से की गई है या उन्हें रैली करने से रोकने के लिए तो अधिकारियों ने कहा कि रैली करना सुरक्षित नहीं है इसलिए उन्हें बाहर निकलने से रोका जा रहा है।
इस बारे में लाहौर के पुलिस प्रमुख मलिक इक़बाल ने बताया कि बेनज़ीर भुट्टो के पास पुलिसकर्मी नज़रबंदी का आदेश लेकर गए थे लेकिन उन्होंने उसे लेने से इनकार कर दिया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि बेनज़ीर आदेश स्वीकार करें या ना करें, उस पर पूरी तरह अमल किया जाएगा।
लाहौर में बेनज़ीर भुट्टो सीनेटर लतीफ़ खोसा के यहाँ रूकी हुई हैं। पुलिस ने खोसा के घर के एक किलोमीटर के दायरे में गश्त बढ़ा दी है और किसी अनजान व्यक्ति वहाँ से आने-जाने की अनुमति नहीं है।
'इस्लामाबाद चलो'
बेनज़ीर की य