राजस्थान में गूज़रों के आरक्षण के मुद्दे पर गठित आयोग की रिपोर्ट के ठीक पहले मीणा समुदाय के नेता और राज्य सरकार के मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने इस्तीफ़ा दे दिया है।
मीणा का इस्तीफ़ा उनकी पत्नी गोलमा देवी ने कल देर रात मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को सौंपा।
किरोड़ी लाल मीणा राज्य सरकार में खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री हैं।
गूजरों की आरक्षण संबंधी मांग और उसके कारण हुई हिंसा के बाद राज्य सरकार ने जस्टिस चोपड़ा की अध्यक्षता में एक आयोग का गठन किया था जिसकी रिपोर्ट आज राज्य सरकार को दी जानी है।
ख़बरें हैं कि आयोग ने गूजरों की आरक्षण की मांग को लेकर ऐसी सिफ़ारिशें की हैं जो मीणा समुदाय को पसंद नहीं हैं।
संभवत इसी कारण मीणा समुदाय के नेता किरोड़ी लाल मीणा ने इस्तीफ़ा दिया है।
उल्लेखनीय है कि राजस्थान में गूजर समुदाय अनुसूचित जनजाति का दर्ज़ा दिए जाने की मांग कर रहा है जिसका मीणा समुदाय यह कहते हुए विरोध कर रहे हैं कि इससे उनको मिलने वाली सुविधाएं कम हो जाएंगी।
इस बीच दोनों समुदायों ने एक दूसरे को हद में रहकर बात करने की सलाह दी है औऱ चेतावनी दी है।
इसे देखते हुए राज्य के 14 ज़िलों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है क्योंकि मई महीने में इसी तरह की गर्मागर्मी के बाद दोनों समुदायों के बीच हिंसा हुई थी और 20 से अधिक लोग मारे भी गए थे।
Monday, December 17, 2007
मीणा समुदाय के नेता ने इस्तीफ़ा दिया
Saturday, December 15, 2007
उत्सर्जन में कटौती पर सहमति लेकिन
जलवायु परिवर्तन पर बाली सम्मेलन में ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती के दस्तावेज़ पर आरंभिक सहमति बन गई है लेकिन लक्ष्य तय नहीं हो सके।
सम्मेलन के अंतिम चरण में हिस्सा लेने के लिए संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून बाली पहुँच रहे हैं।
अभी ये तय नहीं है कि विकासशील देश मौजूदा स्वरुप में समझौते के प्रारूप को स्वीकार करेंगे या नहीं।
समझौते के प्रारुप पत्र से यह भी स्पष्ट नहीं है कि कार्बन डाईऑक्साइड के उत्सर्जन में कमी लाने में विकासशील देशों की कितनी भागीदारी होगी।
इस दस्तावेज़ के आधार पर वर्ष 2009 में भी बातचीत जारी रहेगी।
अमरीका ने चेतावनी दी थी कि अगर प्रदूषण फैलाने वाली ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी लाने के लिए कोई बाध्यकारी लक्ष्य निर्धारित किया गया तो वह इसे स्वीकार नहीं करेगा।
दूसरी ओर यूरोपीय संघ जलवायु परिवर्तन से उपजी चुनौतियों से निपटने के लिए इसे ज़रूरी बता रहा था।
इस मतभेद को दूर करने के लिए कोई बीच का रास्ता निकाला गया है।
समझौते का जो मसौदा है उस पर अभी वार्ता में हिस्सा ले रहे सभी पक्षों की सहमति की अंतिम मुहर लगनी बाक़ी है मगर लग ये रहा है कि ये सब को कुछ न कुछ देकर ख़ुश करने वाला एक दस्तावेज़ बना है।
धुँधली तस्वीर
यूरोपीय संघ काफ़ी बढ़चढ़कर कह रहा था कि विकसित देशों को ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन कम करना चाहिए और पहले के दस्तावेज़ में उसे प्रमुखता से जगह मिली थी मगर इस दस्तावेज़ में वो हिस्सा महज़ फ़ुटनोट बनकर रह गया है यानी मुख्य दस्तावेज़ के पीछे जोड़ी गई टिप्पणियाँ और आँकड़े।
साथ ही वर्ष 2050 तक उत्सर्जन को आधा करने की जो बात थी वो भी इस दस्तावेज़ से बाहर कर दी गई है।
अमरीका के लिए चिंता का विषय था ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन कम करने की अनिवार्य शर्तें, इस बारे में दस्तावेज़ की भाषा अस्पष्ट सी रखी गई दिखती है।
इसमें विकसित देशों से ज़रूरी प्रतिबद्धताओं और क़दमों को राष्ट्रीय स्तर पर समर्थन देने की बात कही गई है,
अमरीका हमेशा से ही ऐसी भाषा का पक्षधर रहा है। मगर साथ ही इसमें ये भी कहा गया है कि ये समर्थन अनिवार्य शर्तों के रूप में भी हो सकता है।
इस भाषा के साथ अमरीका में आने वाले नए प्रशासन को वर्ष 2009 के अंत तक वैधानिक रूप से अनिवार्य सीमा तय करने की छूट मिल सकती है।
मगर पर्यावरण से जुड़े संगठनों और अन्य प्रतिनिधियों ने दस्तावेज़ की इस भाषा को कमज़ोर बताते हुए इसे गँवाया हुआ एक अवसर कहा है।
Friday, December 14, 2007
मतदाताओं को लुभाने की आख़िरी कोशिश
गुजरात में विधानसभा चुनाव के दूसरे और आख़िरी चरण के लिए प्रचार का आज आख़िरी दिन है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।
दूसरे चरण में मध्य और उत्तरी गुजरात की 95 सीटों के लिए 16 दिसंबर को वोट डाले जाएंगे।
मतों की गिनती 23 दिसंबर को होगी।
प्रचार के आख़िरी दिन शुक्रवार को भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार घोषित किए गए लाल कृष्ण आडवाणी जनसभाओं को संबोधित करने वाले हैं।
दूसरी ओर कांग्रेस के चुनाव प्रचार की कमान राहुल गांधी संभालेंगे जिनका दाहोद में 'रोड शो' निर्धारित है।
अंतिम चरण के लिए चुनाव प्रचार में मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी कांग्रेस पर प्रहार करने का कोई मौका नहीं चूक रहे हैं।
13 दिसंबर को संसद पर हमले की सातवीं बरसी पर उन्होंने एक बार फ़िर इस मामले में दोषी पाए गए अफ़जल गुरु को फांसी देने में हो रही देरी का मुद्दा उठाया।
आदिवासी पहलू
दूसरे चरण में जिन सीटों के लिए मतदान होने हैं उनमें से कई सीटों पर आदिवासी मतों की अहम भूमिका होगी।
राहुल गांधी भीड़ जुटाने में कामयाब हो रहे हैं
कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में ग़रीबों को मुफ़्त टेलीविज़न, अनाज, मिट्टी तेल, कपड़े बांटने की घोषणा कर इस मतदाता वर्ग को रिझाने की कोशिश की है।
पंजहमल और दाहोद का दौरा करने के बाद बीबीसी संवाददाता अविनाश दत्त का कहना है कि यहाँ की 13 सीटों पर कांग्रेस के पास खोने के लिए कुछ भी नहीं है क्योंकि इन सभी पर पिछले चुनाव में भाजपा ने परचम लहराया था।
उनका कहना है कि कांग्रेस प्रदर्शन में सुधार की उम्मीद तो कर रही है लेकिन उसकी आशा का अकेला सहारा भाजपा में बगावत है।
गोधरा कांड और उसके बाद हुए दंगों से संबंधित मामलों में लगभग सात सौ लोगों पर मुक़दमा चल रहा है और ये सभी भाजपा के समर्थक माने जाते थे लेकिन मुक़दमा शुरू होने के बाद सरकार की उपेक्षा से नाराज़ चल रहे हैं।
Thursday, December 13, 2007
राजधानी एक्सप्रेस में धमाका, पाँच की मौत
भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम से दिल्ली आ रही राजधानी एक्सप्रेस में गुरुवार तड़के हुए विस्फोट में कम से कम पाँच लोग मारे गए हैं और 13 अन्य घायल हुए हैं।
ट्रेन में यह विस्फोट उत्तरी असम के चोंगाजन स्टेशन के पास रात के क़रीब दो बजे हुआ है।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि धमाका पटरी पर हुआ जिससे ट्रेन के एक डब्बे को क्षति पहुँची।
हालांकि विस्फोट के कारण ट्रेन पटरी से नहीं उतरी।
रेलवे प्रवक्ता त्रिकाल राभा ने बताया कि पाँच लोगों की मौत हो गई थी और 13 लोग घायल हैं। कई अन्य यात्रियों को छोटी मोटी चोटें आईं हैं।
अभी तक यह साफ़ नहीं हुआ है कि इस विस्फोट के पीछे किसका हाथ है।
असम में कई चरमपंथी संगठन सक्रिय हैं लेकिन अभी तक किसी ने इसकी ज़िम्मेदारी नहीं ली है।
इससे पहले सोमवार को दिल्ली जा रही एक अन्य यात्री ट्रेन ब्रह्मपुत्र मेल न्यूजलपाईगुड़ी के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और कुछ अन्य लोग घायल हुए थे।
इस ट्रेन में भारतीय सेना के अनेक जवान छुट्टियां बिताने के लिए अपने घर जा रहे थे।
Wednesday, December 12, 2007
'पहले चरण में भाजपा को नुक़सान'
गुजरात विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान के बाद किए विभिन्न टेलीविज़न चैनलों के सर्वेक्षणों यानी एक्ज़िट पोल का कहना है कि पहले चरण में भारतीय जनता पार्टी को नुक़सान होने जा रहा है।
सर्वेक्षणों का मानना है कि राज्य में भाजपा और कांग्रेस के बीच नज़दीकी चुनावी मुक़ाबला होता नज़र आ रहा है।
टीवी चैनल एनडीटीवी के एक्ज़िट पोल में भाजपा को सौराष्ट्र इलाक़े में 13 सीटों का नुक़सान दिखाया गया है।
एनडीटीवी के सर्वे के मुताबिक पिछले चुनाव में इस इलाक़े से भाजपा ने 39 सीटें हासिल कीं थीं जो इस बार गिरकर 26 रह सकती हैं।
दूसरी ओर 2002 के चुनावों में यहाँ से 18 सीटें हासिल करने वाली कांग्रेस इस बार 31 सीटों पर बाजी मार सकती है।
दक्षिण गुजरात में सन् 2002 की स्थिति बनी रहेगी जिसमें दोनों दलों को 14-14 सीटें हासिल हुईं थीं।
एनडीटीवी के सर्वेक्षण के अनुसार इस चरण में भाजपा को 40 और कांग्रेस को 43 सीटें हासिल हो सकतीं है। सर्वेक्षण में कांग्रेस को 13 सीटों का फायदा होता दिखाया गया है।
कांग्रेस को बढ़त
स्टार न्यूज के एक्ज़िट पोल में कहा गया है कि इस चरण में कांग्रेस पिछली बार से सात सीटें ज्यादा लेकर 37 क्षेत्रों में विजयी होगी।
सोनिया गांधी
पहले चरण में कांग्रेस को लाभ होने की बात कही गई है
इस सर्वेक्षण का कहना है कि भाजपा को इस चरण में 48 सीटें हासिल हो सकती हैं।
एक्ज़िट पोल के अनुसार ये सारा उलटफेर सौराष्ट्र की वजह से हो रहा है जिसमें नरेंद्र मोदी को कई बाग़ियों का सामना करना पड़ रहा है।
ये चुनाव गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए बहुत अहम हैं।
भाजपा लगातार तीसरी बार राज्य में सत्ता हासिल करने की कोशिश कर रही है।
वहीं कांग्रेस का कहना है कि भाजपा ने 2002 का चुनाव सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के कारण जीता था लेकिन इस बार मोदी के विकास के दावे खोखले साबित हो गए हैं।
उल्लेखनीय है कि 87 सीटों के लिए मंगलवार को हुए इस पहले चरण में लगभग 60 फ़ीसदी मतदान हुआ था।
चुनाव का दूसरा और अंतिम चरण 16 दिसंबर को होगा जबकि 23 दिसंबर को मतगणना होगी।
Tuesday, December 11, 2007
गुजरात: पहले चरण का मतदान शुरू
गुजरात विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 182 में से 87 सीटों के लिए मंगलवार को मतदान शुरू हो गया है। इस चुनाव में मुख्य मुक़ाबला भाजपा के नरेंद्र मोदी और कांग्रेस के बीच है।
ये मतदान दक्षिण गुजरात, सौराष्ट्र और कच्छ के इलाक़े में हो रहा है।
पहले दौर में एक करोड़ 78 लाख 77 हज़ार से ज़्यादा मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।
मतदाता इस दौर में 53 महिलाओं समेत 669 उम्मीदवारों के भाग्य का फ़ैसला होगा।
इस चरण में मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के 10 मंत्रियों की चुनावी किस्मत दांव पर लगी है।
चुनाव का दूसरा और अंतिम चरण 16 दिसंबर को पूरा होगा जबकि 23 दिसंबर को मतगणना होगी।
ये चुनाव गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए बहुत अहम हैं। भाजपा लगातार तीसरी बार राज्य में सत्ता हासिल करने की कोशिश कर रही है।
वहीं कांग्रेस का कहना है कि भाजपा ने 2002 का चुनाव सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के कारण जीता था। लेकिन इस बार मोदी के विकास के दावे खोखले साबित हो गए हैं।
चुनौती
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अपनी चुनावी सभाओं में नरेंद्र मोदी को निशाना बनाया है।
सोनिया गांधी
सोनिया गांधी ने मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बनाया है
गोधरा कांड और उसके बाद हुई सांप्रदायिक हिंसा की छाप इन चुनावों पर भी स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है।
नरेंद्र मोदी को चुनाव में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। पटेल समुदाय में ख़ासा असर रखने वाले उन्हीं की पार्टी के नेता केशुभाई पटेल बाग़ी तेवर अख़्तियार किए हुए हैं।
भाजपा के आठ बाग़ी नेता कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं।
जानकारों का कहना है कि सौराष्ट्र और कच्छ का इलाक़ा बहुत हद तक फ़ैसला कर सकता है कि गुजरात में सत्ता की बागडोर किसके हाथों में होगी।
सन् 2002 के चुनावों में भाजपा ने इस इलाक़े से 39 सीटें हासिल कीं थीं। कांग्रेस के हाथ 18 सीटें लगी थीं। एक सीट निर्दलीय उम्मीदवार की झोली में गई थी।
Monday, December 10, 2007
ब्रह्मपुत्र मेल दुर्घटनाग्रस्त, एक की मौत
असम के डिब्रूगढ़ से दिल्ली जा रही ब्रह्मपुत्र मेल की कई बोगियाँ रविवार को देर रात पटरी से उतर गई।
इस दुर्घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई है और लगभग 100 लोग घायल हो गए हैं।
दुर्घटना कटिहार मंडल के रंगपानी और निजबाड़ी रेलवे स्टेशन के बीच हुई।
आरंभिक सूचनाओं के मुताबिक घायल दस यात्रियों की हालत गंभीर बताई जा रही है।
हादसे में घायल लगभग 50 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
दुर्घटना के समय अधिकतर यात्री सो रहे थे।
लोगों को निकालने में स्थानीय लोग मदद कर रहे हैं। दुर्घटना के कुछ घंटों बाद ही रेलवे का राहत और बचाव दल वहाँ पहुँच गया।
अंधेरे के कारण बचाव कार्य में बाधा आ रही थी और ख़बरों के अनुसार अब भी कई लोग बोगियों में फंसे हुए हैं।
घायलों में केंद्रीय अर्धसैनिक बल (सीआरपीएफ़) के जवान भी शामिल हैं।
दुर्घटना के कारणों का पता नहीं चल सका है।
Saturday, December 8, 2007
'चुनाव आयोग सोनिया के ख़िलाफ़ कार्रवाई करे'
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने माँग की है कि चुनाव आयोग कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के ख़िलाफ़ वैसी ही कार्रवाई करे जैसी उसने भाजपा नेता और मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ की है। चुनाव आयोग से दोहरे मापदंड न अपनाने का अनुरोध भी किया गया है।
सोनिया गांधी ने गुजरात में चुनाव प्रचार के दौरान नवसारी में कहा था कि 'जो गुजरात में शासन कर रहे हैं वे मौत के सौदागर हैं।' लेकिन कांग्रेस का कहना है कि सोनिया गांधी की टिप्पणी राज्य के अधिकारियों के बारे में थी।
उधर चुनाव आयोग सोहराबुद्दीन मुठभेड़ को सही ठहराने के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान पर उन्हें पहले ही नोटिस जारी कर चुका है जिसका जवाब उन्हें शनिवार तक देना है।
गुजरात में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान 11 और 16 दिसंबर को होना है।
'दोहरे मापदंड नहीं'
सोनिया गांधी की टिप्पणी राज्य सरकार के अधिकारियों के बारे में थी। उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया था। जो पुलिस अधिकारी वंजारा ने किया, क्या कोई ऐसे अभियुक्त का बचाव कर सकता है। कुछ लोगों ने इस पर ऐसी प्रतिक्रिया दी है जो लोकतांत्रिक मूल्यों के ख़िलाफ़ है
कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल
भाजपा के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली का कहना है, "मैनें नरेंद्र मोदी का भाषण सुना है और उनका हर शब्द और हर वाक्य कांग्रेस नेताओं के भाषण और आरोपों के जवाब में कहा गया है। चुनाव आयोग को चाहिए कि वह कांग्रेस नेताओं के बयान मँगवाए और उनसे जवाब तलब करे।"
पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने कहा, "चुनाव आयोग को दोहरे मापदंड नहीं अपनाने चाहिए।"
भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस अधयक्ष सोनिया गांधी ने आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन किया है। भाजपा की गुजरात इकाई की महासचिव जयंति बारोत ने सोनिया गांधी के ख़िलाफ़ चुनाव आयोग को शिकायत दर्ज कराई थी और उन्होंने अब दोबारा कार्रवाई की माँग की है।
मैनें नरेंद्र मोदी का भाषण सुना है और उनका हर शब्द और हर वाक्य कांग्रेस नेताओं के भाषण और आरोपों के जवाब में कहा गया है। चुनाव आयोग को चाहिए कि वह कांग्रेस नेताओं के बयान मँगवाए और उनसे जवाब तलब करे
भाजपा नेता अरुण जेटली
उनका आरोप है, "सोनिया गांधी ने अपने भाषण में लोगों को जातिगत आधार पर बाँटने और उनकी धार्मिक भावनाएँ भड़काने की कोशिश की है। हमने दो दिसंबर को शिकायत दर्ज कराई धी और अब तक चुनाव आयोग ने इस पर कार्रवाई नहीं की है।"
उधर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने कहा कि सोनिया गांधी ने नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ कुछ कहा ही नहीं है।
उनका कहना था, "सोनिया गांधी की टिप्पणी राज्य सरकार के अधिकारियों के बारे में थी। उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया था। जो पुलिस अधिकारी वंजारा ने किया, क्या कोई ऐसे अभियुक्त का बचाव कर सकता है। कुछ लोगों ने इस पर ऐसी प्रतिक्रिया दी है जो लोकतांत्रिक मूल्यों के ख़िलाफ़ है।"
मोदी के तीख़े तेवर बरक़रार
उधर मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस और विशेष तौर पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर तीख़े तेवर बरक़रार रखे हैं।
सोनिया में मुझे मौत का सौदागर कहा है। क्या इस राज्य की जनता का अपमान नहीं है? आपको इसका बदला लेना है। मतदान के दिन आप ऐसा ज़रूर करें
मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी
समाचार एजेंसियों के अनुसार, मोदी पिछले कुछ दिन से अपनी चुनावी सभाओं में लगातार कहते आ रहे हैं, "सोनिया में मुझे मौत का सौदागर कहा है। क्या इस राज्य की जनता का अपमान नहीं है? आपको इसका बदला लेना है। मतदान के दिन आप ऐसा ज़रूर करें।"
उन्होंने मीडिया के साथ बातचीत में कहा, "मेरी सोनिया गांधी से कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है। कांग्रेस सोनिया गांधी के नाम पर चुनाव लड़ रही है। क्योंकि उनका प्रतिद्वंद्वी मैं हूँ तो मुझे उन पर प्रहार तो करने ही होंगे।
Friday, December 7, 2007
गुजरात में चुनावी माहौल गर्माया
गुजरात में चुनावी माहौल गर्माता जा रहा है और चुनाव मैदान में भाजपा और कांग्रेस के बड़े नेता भी उतर गए हैं।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह शुक्रवार को गुजरात का दौरा करेंगे और राजकोट और सूरत में चुनावी सभाओं को संबोधित करेंगे।
प्रेक्षकों का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास के मुद्दे का जवाब देंगे।
संसद का सत्रावसान हो रहा है और मनमोहन सिंह 11 दिसंबर को एक बार फिर गुजरात के चुनावी मैदान में होंगे।
मनमोहन सिंह के अगले दिन शनिवार को सोनिया गाँधी सौराष्ट्र, मध्य और दक्षिण गुजरात में कई सभाओं को संबोधित करेंगी।
इन सभी इलाक़ों में भारतीय जनता पार्टी की अच्छी पकड़ मानी जाती है।
कांग्रेस के सहयोगी दल भी पीछे नहीं हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता शरद पवार भी अगले कुछ दिनों में गुजरात में नज़र आएंगे।
आयोग का जवाब तलब
दूसरी ओर सोहराबुद्दीन मुठभेड़ मामले पर गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के कथित बयान पर भारतीय चुनाव आयोग ने स्थानीय प्रशासन से रिपोर्ट माँगी है।
नरेंद्र मोदी
नरेंद्र मोदी के बयान को लेकर विवाद उठ खड़ा हुआ है
प्रशासन से पूछा गया है कि असल में नरेंद्र मोदी ने क्या कहा था ताकि चुनाव आयोग ये पता कर सके कि क्या मोदी ने चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन किया है।
वहीं मोदी ने कथित बयान पर राजनीतिक पार्टियों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
कांग्रेस ने नरेंद्र मोदी के बयान की निंदा की है।
पार्टी के प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, "मुख्यमंत्री ने एक तरह से क़त्ल की बात कबूल कर ली है और घोषणा कर दी है कि उनके पास हत्या करने का लाइसेंस है।"
वहीं मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएस) के नेता सीताराम येचुरी ने नरेंद्र मोदी के बयान को 'शर्मनाक' बताया है।
Thursday, December 6, 2007
मस्जिद विध्वंस की बरसी पर कड़ी सुरक्षा
उत्तर प्रदेश के अयोध्या में बाबरी विध्वंस की 15 वीं बरसी पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है और पुलिस व अर्धसैनिक बलों ने उसे छावनी जैसा बना दिया है।
प्रशासन ने हाल में फ़ैजाबाद, लखनऊ और वाराणसी में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों को देखते हुए अलर्ट घोषित कर दिया है।
ग़ौरतलब है कि हिंदू कट्टरपंथियों की एक भीड़ ने छह दिसंबर, 1992 को अयोध्या की बाबरी मस्जिद को गिरा दिया था।
इसके बाद देश के विभिन्न हिस्सों में सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी थी जिसमें दो हज़ार से अधिक लोग मारे गए थे।
गुप्तचर और पुलिस एजेंसियों का मानना है कि अयोध्या को चरमपंथी निशाना बना सकते हैं।
इस वजह से विवादास्पद स्थल की कांटेदार तार लगाकर घेराबंदी कर दी गई है, साथ ही चौबीसों घंटे कड़ी चौकसी बरती जा रही है।
जिलाधिकारी अनिल गर्ग ने बीबीसी को बताया,'' यह स्थान हमेशा से संवेदनशील रहा है लेकिन अदालतों में हुए धमाकों के बाद हम अतिरिक्त सुरक्षा बरत रहे हैं। लोगों से भी सचेत रहने को कहा गया है।''
मुसलमानों के विरोध दिवस और कट्टरपंथी हिंदुओं के विजय दिवस मनाने के मद्देनज़र अतिरिक्त पुलिस और अर्धसैनिक बलों को यहाँ तैनात किया गया है।
विवाद
हिंदुओं का मानना है कि यह भगवान राम का जन्मस्थल है और वे वहाँ भव्य मंदिर बनाना चाहते हैं।
यह स्थान हमेशा से संवेदनशील रहा है लेकिन अदालतों में हुए धमाकों के बाद हम अतिरिक्त सुरक्षा बरत रहे हैं। लोगों से भी सचेत रहने को कहा गया है
अनिल गर्ग, जिलाधिकारी
मुसलिम समुदाय के लोग यहाँ मस्जिद निर्माण के लिए क़ानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।
हिंदू कट्टरपंथी संगठनों का दावा है कि पहले उस स्थान पर मंदिर हुआ करता था जिसे तोड़कर मुग़ल शासकों ने बाबरी मस्जिद बनवाई थी।
हालांकि इस स्थल के मालिकाना हक़ को लेकर दशकों से हिंदू और मुसलमानों में दशकों से विवाद बना हुआ है।
लेकिन 23 दिसंबर, 1949 को ये विवाद तब गहराया जब सवेरे बाबरी मस्जिद का दरवाज़ा खोलने पर पाया गया कि उसके भीतर हिंदुओं के आराध्य देव राम के बाल रूप की मूर्ति रखी थी।
इस जगह हिंदुओं के आराध्य राम की जन्मभूमि होने का दावा करने वाले हिंदू कट्टरपंथियों ने कहा था कि "रामलला यहाँ प्रकट हुए हैं।"
लेकिन मुसलमानों का आरोप है कि रात में किसी ने चुपचाप बाबरी मस्जिद में घुसकर ये मूर्ति वहां रख दी थी।
मुसलमानों का कहना है कि ऐसे कोई सबूत नहीं हैं कि वहाँ कभी मंदिर था।
Wednesday, December 5, 2007
नए प्रतिबंध लगाने पर सवालिया निशान: चीन
चीन का कहना है कि अमरीका की ख़ुफ़िया एजेंसियों की ताज़ा रिपोर्ट आने के बाद ईरान पर सुरक्षा परिषद के नए प्रतिबंध लगाने पर सवालिया निशान लग गया है। दूसरी ओर अमरीका और उसके यूरोपीय सहयोगी देश अब भी ईरान पर प्रतिबंध लगाने के पक्ष में हैं।
संयुक्त राष्ट्र में चीन के राजदूत वांग ग्वांग्या का कहना था कि स्थिति बदल गई है और सुरक्षा परिषद को इस पर विचार करना होगा।
सोमवार को अमरीका की कई ख़ुफ़िया संस्थाओं की रिपोर्ट में कहा गया था कि ईरान ने वर्ष 2003 में ही परमाणु हथियार कार्यक्रम को रोक दिया था। ये भी कहा गया कि ईरान अब परमाणु हथियार बनाने का प्रयास नहीं कर रहा है।
हालाँकि अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा है कि 'ईरान अब भी ख़तरा' बना हुआ है। उन्होंने ये भी कहा कि ईरान पर आई रिपोर्ट के बावजूद ईरान पर दबाव बनाए रखना ज़रूरी है।
उधर इसराइल, ब्रिटेन और फ़्रांस ने भी कहा है कि वे इस रिपोर्ट के बावजूद ईरान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव को बढ़ाने के पक्ष में हैं।
चीन और रूस ने दो बार तो ईरान के ख़िलाफ़ प्रतिबंध लगाने का समर्थन किया है लेकिन दोनो देशों के ईरान के साथ क़रीबी व्यापारिक संबंध हैं और वे नहीं चाहते कि ईरान के साथ उनके रिश्तों में दरार आए.
पहले से लगे हुए हैं प्रतिबंध
बीबीसी के संयुक्त राष्ट्र संवाददाता लौरा ट्रेविलियन का कहना है कि चीन की प्रतिक्रिया के बाद संयुक्त राष्ट्र में चीन के राजदूत से पूछा गया कि क्या ताज़ा रिपोर्ट के बाद ईरान पर नए संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध लगने की संभावना घट गई है?
तीख़े तेवर
अंतरराष्ट्रीय बिरादरी को चाहिए कि अगर ईरान परमाणु हथियार बनाने की कोशिश जारी रखता है तो उसे पूरी तरह अलग-थलग कर दे
राष्ट्रपति बुश
लौरा ट्रेविलियन का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र में चीन के राजदूत वांग ग्वांग्या का कहना था कि स्थिति बदल गई है और इस पर सुरक्षा परिषद को विचार करना होगा।
राजदूत वांग ग्वांग्या मानते हैं कि कूटनयिकों को सुरक्षा परिषद की कार्रवाई से पहले इस रिपोर्ट के मतलब को समझना होगा।
महत्वपूर्ण है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने दिसंबर 2006 में ईरान को ऐसी सामग्री, संयंत्र और तकनीक देने पर प्रतिबंध लगाया था जिससे परमाणु ईंधन का संवर्द्धन हो सकता हो या फिर परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम सिस्टम बनाने में सहायता मिल सकती हो।
इसके बाद इस साल मार्च में ईरान के सरकारी बैंक सेपाह और 28 संस्थाओं और लोगों से लेन-देन पर प्रतिबंध लगाया गया था। ईरान से हथियारों का आयात नहीं हो सकता और संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों से कहा गया है कि वे ईरान को कोई बड़ी हथियार प्रणाली बेचने से परहेज़ करें।
लेकिन पिछले शनिवार को पेरिस में विश्व के छह ताकतवर देशों की बैठक में ईरान पर तीसरी बार प्रतिबंध लगाने की प्रक्रिया शुरु करने पर सहमति बनी।
'विचारों में बदलाव'
ईरान ने किया स्वागत
यह स्वभाविक है कि हम इस रिपोर्ट का स्वागत करें, क्योंकि जो देश पहले इस मुद्दे पर सवाल उठाते रहे हैं... अब उन्होंने वास्तविकता के धरातल पर अपने विचारों में कुछ बदलाव किया है
ईरानी विदेश मंत्री
जहाँ एक ओर ईरान ने अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसियों की रिपोर्ट का स्वागत किया है, वहीं अमरीकी राष्ट्रपति ने कहा कि 'ईरान से निबटने के लिए सभी विकल्प खुले हैं।'
बुश ने कहा, "अंतरराष्ट्रीय बिरादरी को चाहिए कि अगर ईरान परमाणु हथियार बनाने की कोशिश जारी रखता है तो उसे पूरी तरह अलग-थलग कर दे।"
ईरान के विदेश मंत्री मनुशेरह मुत्तकी ने अमरीकी रिपोर्ट पर कहा, "यह स्वभाविक है कि हम इस रिपोर्ट का स्वागत करें, क्योंकि जो देश पहले इस मुद्दे पर सवाल उठाते रहे हैं... अब उन्होंने वास्तविकता के धरातल पर अपने विचारों में कुछ बदलाव किया है।"
लेकिन इसराइल के प्रधानमंत्री एहूद ओलमर्ट ने कहा कि यह बहुत महत्वपूर्ण है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए अमरीका के नेतृत्व में चल रहे प्रयास जारी रहे।
Tuesday, December 4, 2007
'ईरान का परमाणु कार्यक्रम वर्ष 2003 से बंद
अमरीका की ख़ुफ़िया एजेंसियों के आकलन के अनुसार ईरान का मकसद अब भी स्पष्ट नहीं है. ईरान शुरु से ही कहता आया है कि उसका कोई परमाणु हथियार बनाने का कार्यक्रम नहीं है.
अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के एक वरिष्ठ सलाहकार का कहना है कि ख़ुफ़िया रिपोर्ट सकारात्मक है लेकिन ईरान के 'परमाणु हथियार हासिल करने का ख़तरा गंभीर' है.
अमरीका में बॉस्टन विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर हुसैन हक्कानी ने बीबीसी के अनीश अहलूवालिया को बताया, "इस रिपोर्ट से राष्ट्रपति बुश को कुछ शर्मिंदगी तो होगी लेकिन ये ईरान पर नीति बदलने का एक बहना भी बन सकता है."
प्रोफ़ेसर हक्कानी का कहना है, "अमरीका की बहुत सारी अंतरराष्ट्रीय नीतियाँ घरेलू झगड़ों को प्रतिबिंबित करती हैं. पहले राष्ट्रपति बुश पर उस लॉबी का प्रभाव था जो ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर युद्ध के पक्ष में थी. अब लगता है कि वह लॉबी प्रभावशाली हो रही है जो बातचीत करना चाहती है."
उनका कहना है, "ये बात साफ़ है ईरान पर जितना दबाव पहले था, अब उतना नहीं है. सब कुछ अमरीका की अंदरूनी राजनीति पर निर्भर है. बुश प्रशासन का जो साल या सवा साल का कार्यकाल बचा है, उसमें वह संभवत: उसमें कोई ऐसा घटनाक्रम शुरु नहीं करने चाहेगा जिससे उसकी मुश्किलें बढ़ें."
'अंतरराष्ट्रीय दबाव जारी रखें'
अमरीका की 16 ख़ुफ़िया एजेंसियों की जानकारी पर आधारित रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान यूरेनियम संवर्द्धन ज़रूर कर रहा है.
रिपोर्ट के अनुसार यदि ईरान परमाणु हथियारों पर शोध जारी रखता है तो वह अगले आठ साल में परमाणु बम बना सकता है.
इस आकलन में ये भी कहा गया है कि अब ईरान अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक दबाव की ओर ज़्यादा ध्यान दे रहा है और अमरीकी राष्ट्रपति के कार्यालय ने अन्य देशों से कहा है कि वे ये दबाव जारी रखें.
पिछले कुछ वर्षों से अपने विवादित परमाणु कार्यक्रमों को लेकर ईरान को अमरीका सहित दुनिया के कई देशों की ओर से जिस तरह सख्त चेतावनियां दी गईं, वो अमरीकी ख़ुफिया एजेंसी के इस आकलन की रौशनी में बिल्कुल उल्टी पड़ जाती है.
पिछले महीने भी अमरीकी राष्ट्रपति बुश ने कहा था कि अगर तीसरे विश्व युद्ध को न्योता नहीं देना है तो ईरान के परमाणु कार्यक्रमों को रोकना होगा.
हालांकि व्हाइट हाउस की ओर से एक वक्तव्य जारी कर ये कहा गया है कि ये रिपोर्ट बुश प्रशासन की उस नीति को सही ठहराती है, जिसमें ईरान को विवादित परमाणु कार्यक्रम का हल बातचीत के ज़रिये निकालने पर जो़र दिया जा रहा है.
Monday, December 3, 2007
जलवायु परिवर्तन पर अहम बैठक शुरू
इस सम्मेलन में लगभग दो सौ देशों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं.
जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र की संस्था के प्रमुख ईवो ड बुए का कहना है कि जलवायु परिवर्तन पर लंबी अवधि के लिए कोई भी रणनीति तैयार करने में अमरीका की अनदेखी करना मूखर्ता होगी.
बाली सम्मेलन में ही यह तय करने की कोशिश की जाएगी कि क्योटो प्रोटोकॉल के बाद किसी समझौते का स्वरूप कैसा होगा.
क्योटो प्रोटोकॉल के तहत निर्धारित समयसीमा वर्ष 2012 में ख़त्म हो रही है.
वर्ष 1997 में हुए क्योटो समझौते में प्रदूषण फैलाने वाली गैसों के उत्सर्जन में कमी करने के लिए विकासशील और विकसित देशों को लक्ष्य दिया गया था लेकिन अमरीका शुरु से ही नकारात्म रवैया अपनाता रहा और इसे मानने से इनकार कर दिया.
हालाँकि अब अमरीका का कहना है कि वो बाली सम्मेलन में खुले दिमाग के साथ शिरकत कर रहा है.
संयुक्त राष्ट्र चिंतित
संयुक्त राष्ट्र की ओर से विभिन्न देशों के पैनल (आईपीसीसी) की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक जलवायु परिवर्तन का असर पहले की तुलना में तेज़ी से दिखाई दे रहा है.
बाली सम्मेलन में इस बात पर