अमरीका और ब्रिटेन ने कहा है कि पाकिस्तान में 16 दिसंबर को इमरजेंसी हटाने की घोषणा स्वागतयोग्य है लेकिन अभी और बहुत कुछ करने की ज़रूरत है।
ग़ौरतलब है कि दोबारा राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद परवेज़ मुशर्रफ़ ने गुरुवार को कहा था कि उन्होंने 16 दिसंबर को इमरजेंसी हटाने की योजना बनाई है।
लेकिन अमरीका और ब्रिटेन का कहना है कि आठ जनवरी को प्रस्तावित संसदीय चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने के लिए और प्रयास करने की ज़रूरत है।
अमरीका ने कहा है कि प्रेस की आज़ादी और लोगों को एकजुट होने की इजाज़त देना ज़रूरी है।
वहीं ब्रितानी विदेश मंत्री डेविड मिलिबैंड ने हिरासत में लिए गए जजों और वकीलों को रिहा करने की माँग की है।
उधर निर्वासन के बाद पाकिस्तान लौटे दोनो पूर्व प्रधानमंत्रियों की चुनावों में हिस्सा लेने पर अलग-अलग राय है।
पाकिस्तान मुस्लीम लीग (नवाज़) के प्रमुख नवाज़ शरीफ़ ने कहा है कि वो चुनावों का बहिष्कार करेंगे लेकिन पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) की अध्यक्ष बेनज़ीर भुट्टो का कहना है कि वो चुनाव में हिस्सा लेंगी लेकिन विरोध भी जारी रहेगा।
अमरीका का रूख़
अमरीकी राष्ट्रपति कार्यालय व्हाइट हाउस और विदेश मंत्रालय ने वर्दी उतारकर राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के लिए परवेज़ मुशर्रफ़ की सराहना की।
व्हाइट हाउस प्रवक्ता डाना पेरिनो ने कहा कि राष्ट्रपति जॉर्ज बुश मानते हैं कि पाकिस्तान में लोकतंत्र की बहाली के लिहाज़ से यह एक 'आवश्यक' क़दम था।
उन्होंने पाकिस्तान के सभी राजनीतिक पक्षों और लोगों से चुनाव में हिस्सा लेने की अपील की।
पेरिनो ने तीन नवंबर को लागू इमरजेंसी के बाद मूल अधिकारों के निलंबन का ज़िक्र करते हुए मुशर्रफ़ से ऐसे क़दम उठाने की अपील की जिससे उनके विरोधियों को अपने विचार व्यक्त करने और एक जगह इकट्ठा होने की अनुमति मिले और प्रेस की आज़ादी बहाल हो।
Friday, November 30, 2007
Thursday, November 29, 2007
मुशर्रफ़ राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे
पाकिस्तान के सेना प्रमुख का पद छोड़ने के बाद गुरुवार को परवेज़ मुशर्रफ़ असैनिक राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेंगे।
परवेज़ मुशर्रफ़ को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अब्दुल हमीद डोगर पाँच साल के लिए राष्ट्रपति पद की शपथ दिलाएंगे।
मुशर्रफ़ ने छह अक्तूबर को हुए राष्ट्रपति चुनाव में जीत हासिल की थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नतीजे घोषित करने से रोक दिया था।
लेकिन तीन नवंबर को आपातकाल की घोषणा के साथ ही मुशर्रफ़ ने उन जजों को निलंबित कर दिया जो उनके राष्ट्रपति चुने जाने को चुनौती दे रहे थे।
इसके बाद उन्होंने नए जजों की नियुक्त की जिन्होंने उनकी जीत को जायज ठहरा दिया।
इसके साथ ही मुशर्रफ़ के लिए दूसरी बार राष्ट्रपति पद की शपथ लेने का रास्ता साफ़ हो गया।
सेनाध्यक्ष का पद छोड़ा
इसके पहले उन्होंने बुधवार को सेना प्रमुख का पद छोड़ दिया था।
मैं सेना को छोड़ ज़रुर रहा हूँ लेकिन मेरा दिल और दिमाग सेना के साथ ही रहेगा
परवेज़ मुशर्रफ़
परवेज़ मुशर्रफ़ ने सेनाध्यक्ष का पद जनरल अशफ़ाक कियानी को सौंप दिया है। उन्हें परवेज़ मुशर्रफ़ का क़रीबी समझा जाता है।
जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ क़रीब नौ साल तक पाकिस्तान के सेना प्रमुख रहे हैं।
परवेज़ मुशर्रफ़ ने वर्दी छोड़ने की औपचारिक घोषणा करते हुए कहा कि वे सेना को छोड़ ज़रुर रहे हैं लेकिन उनका 'दिल और दिमाग सेना के साथ ही रहेगा'।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय और पाकिस्तान के विपक्षी दलों की एक प्रमुख माँग थी कि परवेज़ मुशर्रफ़ सिर्फ़ एक ही पद पर रह सकते हैं या तो राष्ट्रपति पद पर रहें या फिर सेनाध्यक्ष के पद पर।
इस क़दम के बाद भी विपक्षी नेता संतुष्ट नज़र नहीं आ रहे हैं क्योंकि असैनिक राष्ट्रपति बनने के बाद भी परवेज़ मुशर्रफ़ के पास असीमित शक्तियाँ रहेंगी जिनमें चुनी हुई सरकार को बर्ख़ास्त करने का अधिकार भी शामिल है।
इसके अलावा अभी देश में इमरजेंसी लागू है और उनके ही नेतृत्व में आम चुनाव होने हैं।
परवेज़ मुशर्रफ़ को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अब्दुल हमीद डोगर पाँच साल के लिए राष्ट्रपति पद की शपथ दिलाएंगे।
मुशर्रफ़ ने छह अक्तूबर को हुए राष्ट्रपति चुनाव में जीत हासिल की थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नतीजे घोषित करने से रोक दिया था।
लेकिन तीन नवंबर को आपातकाल की घोषणा के साथ ही मुशर्रफ़ ने उन जजों को निलंबित कर दिया जो उनके राष्ट्रपति चुने जाने को चुनौती दे रहे थे।
इसके बाद उन्होंने नए जजों की नियुक्त की जिन्होंने उनकी जीत को जायज ठहरा दिया।
इसके साथ ही मुशर्रफ़ के लिए दूसरी बार राष्ट्रपति पद की शपथ लेने का रास्ता साफ़ हो गया।
सेनाध्यक्ष का पद छोड़ा
इसके पहले उन्होंने बुधवार को सेना प्रमुख का पद छोड़ दिया था।
मैं सेना को छोड़ ज़रुर रहा हूँ लेकिन मेरा दिल और दिमाग सेना के साथ ही रहेगा
परवेज़ मुशर्रफ़
परवेज़ मुशर्रफ़ ने सेनाध्यक्ष का पद जनरल अशफ़ाक कियानी को सौंप दिया है। उन्हें परवेज़ मुशर्रफ़ का क़रीबी समझा जाता है।
जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ क़रीब नौ साल तक पाकिस्तान के सेना प्रमुख रहे हैं।
परवेज़ मुशर्रफ़ ने वर्दी छोड़ने की औपचारिक घोषणा करते हुए कहा कि वे सेना को छोड़ ज़रुर रहे हैं लेकिन उनका 'दिल और दिमाग सेना के साथ ही रहेगा'।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय और पाकिस्तान के विपक्षी दलों की एक प्रमुख माँग थी कि परवेज़ मुशर्रफ़ सिर्फ़ एक ही पद पर रह सकते हैं या तो राष्ट्रपति पद पर रहें या फिर सेनाध्यक्ष के पद पर।
इस क़दम के बाद भी विपक्षी नेता संतुष्ट नज़र नहीं आ रहे हैं क्योंकि असैनिक राष्ट्रपति बनने के बाद भी परवेज़ मुशर्रफ़ के पास असीमित शक्तियाँ रहेंगी जिनमें चुनी हुई सरकार को बर्ख़ास्त करने का अधिकार भी शामिल है।
इसके अलावा अभी देश में इमरजेंसी लागू है और उनके ही नेतृत्व में आम चुनाव होने हैं।
Wednesday, November 28, 2007
सेनाध्यक्ष का पद छोड़ेंगे मुशर्रफ़
भारी अंतरराष्ट्रीय और बढ़ते घरेलू दबाव के चलते पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ नौ साल तक सेना प्रमुख रहने के बाद बुधवार को ये पद छोड़ने जा रहे हैं।
वो सेनाध्यक्ष का पद अपने क़रीबी माने जाने वाले जनरल अशफ़ाक कियानी को सौंपेंगे। इसके लिए वे रावलपिंडी स्थित सेना मुख्यालय जाएँगे।
इसके अगले दिन यानी गुरुवार को परवेज़ मुशर्रफ़ एक असैनिक राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेंगे।
माना जा रहा है कि परवेज़ मुशर्रफ़ के इस क़दम के साथ ही पाकिस्तान में आठ साल पुराना सैन्य शासन समाप्त हो जाएगा।
लाहौर से बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि इस क़दम के बाद भी अभी यह तय नहीं है कि विपक्षी नेता संतुष्ट हो जाएँगे।
क्योंकि असैनिक राष्ट्रपति बनने के बाद भी परवेज़ मुशर्रफ़ के पास असीमित शक्तियाँ रहेंगी जिसमें चुनी हुई सरकार को बर्खास्त करने का अधिकार शामिल है।
इसके अलावा अभी देश में इमरजेंसी लागू है और उनके ही नेतृत्व में आम चुनाव होने हैं।
विदाई
परवेज़ मुशर्रफ़ सेनाध्यक्ष का पद छोड़ने से एक दिन पहले मंगलवार को सेना को अलविदा कहने सैन्य मुख्यालय गए।
रावलपिंडी में सेना मुख्यालय पहुँचने पर उन्हें थल, वायु और नौसेना की ओर से गार्ड ऑफ़ ऑनर पेश किया गया।
सेना के बैंड ने पाकिस्तान के राष्ट्रीय गीत सहित कई धुनें बजाईं। इस दौरान मुशर्रफ़ अपने सभी मैडलों से सजी सेना की वर्दी पहने हुए थे।
इस कार्यक्रम के बाद राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने सेना के तीनों अंगों के प्रमुखों से मुलाक़ात की।
हालांकि परवेज़ मुशर्रफ़ इससे पहले भी कई बार सेनाध्यक्ष का पद छोड़ने का आश्वासन दे चुके हैं लेकिन इस बार लगता है कि वे वादा पूरा करने जा रहे हैं।
असैनिक राष्ट्रपति
इसके पहले राष्ट्रपति के प्रवक्ता मेजर जनरल राशिद कुरैशी ने बीबीसी से बातचीत में कहा था कि बुधवार को जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ सेनाध्यक्ष का पद छोड़ेंगे।
उस वक्त से जनरल अशफ़ाक कियानी सेनाध्यक्ष बन जाएँगे और अगले ही दिन मुशर्रफ़ एक असैनिक राष्ट्रपति के रूप में शपथ ले लेंगे।
ख़बरों के अनुसार सैन्य प्रमुख का पद छोड़ देने के बावजूद मुशर्रफ़ की सुरक्षा का जिम्मा सेना पर ही रहेगा।
असैनिक राष्ट्रपति होने के बावजूद मुशर्रफ़ अपने सैन्य कर्मचारियों को बरक़रार रख सकेंगे।
जनरल मुशर्रफ़ पर सेना प्रमुख का पद छोड़ने के लिए भारी अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दबाव था।
उन्होंने 1999 में तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ का तख्ता पलट कर सत्ता हथिया ली थी।
ग़ौरतलब है कि पाकिस्तान में आठ जनवरी को संसदीय चुनाव होने हैं और बेनज़ीर भुट्टो और नवाज़ शरीफ़ जैसे नेता चुनाव मैदान में हैं।
वो सेनाध्यक्ष का पद अपने क़रीबी माने जाने वाले जनरल अशफ़ाक कियानी को सौंपेंगे। इसके लिए वे रावलपिंडी स्थित सेना मुख्यालय जाएँगे।
इसके अगले दिन यानी गुरुवार को परवेज़ मुशर्रफ़ एक असैनिक राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेंगे।
माना जा रहा है कि परवेज़ मुशर्रफ़ के इस क़दम के साथ ही पाकिस्तान में आठ साल पुराना सैन्य शासन समाप्त हो जाएगा।
लाहौर से बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि इस क़दम के बाद भी अभी यह तय नहीं है कि विपक्षी नेता संतुष्ट हो जाएँगे।
क्योंकि असैनिक राष्ट्रपति बनने के बाद भी परवेज़ मुशर्रफ़ के पास असीमित शक्तियाँ रहेंगी जिसमें चुनी हुई सरकार को बर्खास्त करने का अधिकार शामिल है।
इसके अलावा अभी देश में इमरजेंसी लागू है और उनके ही नेतृत्व में आम चुनाव होने हैं।
विदाई
परवेज़ मुशर्रफ़ सेनाध्यक्ष का पद छोड़ने से एक दिन पहले मंगलवार को सेना को अलविदा कहने सैन्य मुख्यालय गए।
रावलपिंडी में सेना मुख्यालय पहुँचने पर उन्हें थल, वायु और नौसेना की ओर से गार्ड ऑफ़ ऑनर पेश किया गया।
सेना के बैंड ने पाकिस्तान के राष्ट्रीय गीत सहित कई धुनें बजाईं। इस दौरान मुशर्रफ़ अपने सभी मैडलों से सजी सेना की वर्दी पहने हुए थे।
इस कार्यक्रम के बाद राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने सेना के तीनों अंगों के प्रमुखों से मुलाक़ात की।
हालांकि परवेज़ मुशर्रफ़ इससे पहले भी कई बार सेनाध्यक्ष का पद छोड़ने का आश्वासन दे चुके हैं लेकिन इस बार लगता है कि वे वादा पूरा करने जा रहे हैं।
असैनिक राष्ट्रपति
इसके पहले राष्ट्रपति के प्रवक्ता मेजर जनरल राशिद कुरैशी ने बीबीसी से बातचीत में कहा था कि बुधवार को जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ सेनाध्यक्ष का पद छोड़ेंगे।
उस वक्त से जनरल अशफ़ाक कियानी सेनाध्यक्ष बन जाएँगे और अगले ही दिन मुशर्रफ़ एक असैनिक राष्ट्रपति के रूप में शपथ ले लेंगे।
ख़बरों के अनुसार सैन्य प्रमुख का पद छोड़ देने के बावजूद मुशर्रफ़ की सुरक्षा का जिम्मा सेना पर ही रहेगा।
असैनिक राष्ट्रपति होने के बावजूद मुशर्रफ़ अपने सैन्य कर्मचारियों को बरक़रार रख सकेंगे।
जनरल मुशर्रफ़ पर सेना प्रमुख का पद छोड़ने के लिए भारी अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दबाव था।
उन्होंने 1999 में तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ का तख्ता पलट कर सत्ता हथिया ली थी।
ग़ौरतलब है कि पाकिस्तान में आठ जनवरी को संसदीय चुनाव होने हैं और बेनज़ीर भुट्टो और नवाज़ शरीफ़ जैसे नेता चुनाव मैदान में हैं।
Tuesday, November 27, 2007
तस्लीमा की सुरक्षा केंद्र के ज़िम्मे
विवादास्पद लेखिका तस्लीमा नसरीन को दिल्ली स्थित राजस्थान हाउस से किसी अन्य स्थान ले जाया गया है।
राजस्थान सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भारतीय समयानुसार रात लगभग 12।45 बजे तस्लीमा को केंद्र सरकार के अधिकारियों के हवाले कर दिया गया।
उन्हें कहा ले जाया गया है, इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।
इधर तस्लीमा नसरीन को लेकर सोमवार को राजनीतिक बयानबाजी तेज़ रही।
सीपीएम नेता सीताराम येचुरी ने कहा है कि इस मामले में पश्चिम बंगाल सरकार की कोई भूमिका नहीं है।
उनका कहना था कि ये निर्णय केंद्र सरकार को लेना है कि तस्लीमा नसरीन भारत में रहें या नहीं अथवा उनकी वीज़ा की अवधि बढ़ाई जाए या नहीं?
दूसरी ओर भाजपा ने तसलीमा को राजनीतिक शरणार्थी का दर्जा देने की मांग की है।
भाजपा नेता विजय कुमार मल्होत्रा ने कहा कि इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की खामोशी चिंताजनक है।
उनका कहना था कि देश में शरण और वीज़ा देने के बाद भी तस्लीमा नसरीन को जान बचाने के लिए इधर-उधर भागना पड़े, यह शर्मनाक है।
विवाद
ग़ौरतलब है कि इसके पहले तस्लीमा नसरीन ने कहा था कि वे वापस कोलकाता जाना चाहती हैं।
टेलीविज़न चैनल एनडीटीवी से बातचीत में उन्होंने कहा, " मुझे अपने घर की याद आती है, मुझे कोलकाता की याद आती है।"
उल्लेखनीय है कि तस्लीमा नसरीन की वीज़ा की अवधि बढ़ाए जाने के विरोध में कोलकाता में हिंसा भड़क उठी थी जिसमें 43 लोग घायल हुए थे।
इसके बाद उन्हें राजस्थान भेज दिया गया था और फिर दिल्ली लाया गया था।
विवादों में घिरीं लेखिका तस्लीमा नसरीन 1990 के दशक में कट्टरपंथियों की धमकियों के कारण बांग्लादेश से यूरोप चली गई थीं और पिछले तीन साल से वे कोलकाता में रह रहीं थीं।
उनके लेख इस्लामी कट्टरपंथियों को काफ़ी समय से अखरते रहे हैं।
राजस्थान सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भारतीय समयानुसार रात लगभग 12।45 बजे तस्लीमा को केंद्र सरकार के अधिकारियों के हवाले कर दिया गया।
उन्हें कहा ले जाया गया है, इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।
इधर तस्लीमा नसरीन को लेकर सोमवार को राजनीतिक बयानबाजी तेज़ रही।
सीपीएम नेता सीताराम येचुरी ने कहा है कि इस मामले में पश्चिम बंगाल सरकार की कोई भूमिका नहीं है।
उनका कहना था कि ये निर्णय केंद्र सरकार को लेना है कि तस्लीमा नसरीन भारत में रहें या नहीं अथवा उनकी वीज़ा की अवधि बढ़ाई जाए या नहीं?
दूसरी ओर भाजपा ने तसलीमा को राजनीतिक शरणार्थी का दर्जा देने की मांग की है।
भाजपा नेता विजय कुमार मल्होत्रा ने कहा कि इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की खामोशी चिंताजनक है।
उनका कहना था कि देश में शरण और वीज़ा देने के बाद भी तस्लीमा नसरीन को जान बचाने के लिए इधर-उधर भागना पड़े, यह शर्मनाक है।
विवाद
ग़ौरतलब है कि इसके पहले तस्लीमा नसरीन ने कहा था कि वे वापस कोलकाता जाना चाहती हैं।
टेलीविज़न चैनल एनडीटीवी से बातचीत में उन्होंने कहा, " मुझे अपने घर की याद आती है, मुझे कोलकाता की याद आती है।"
उल्लेखनीय है कि तस्लीमा नसरीन की वीज़ा की अवधि बढ़ाए जाने के विरोध में कोलकाता में हिंसा भड़क उठी थी जिसमें 43 लोग घायल हुए थे।
इसके बाद उन्हें राजस्थान भेज दिया गया था और फिर दिल्ली लाया गया था।
विवादों में घिरीं लेखिका तस्लीमा नसरीन 1990 के दशक में कट्टरपंथियों की धमकियों के कारण बांग्लादेश से यूरोप चली गई थीं और पिछले तीन साल से वे कोलकाता में रह रहीं थीं।
उनके लेख इस्लामी कट्टरपंथियों को काफ़ी समय से अखरते रहे हैं।
Monday, November 26, 2007
चुनावों के लिए पर्चा भरेंगे शरीफ़
सऊदी अरब से निर्वासित जीवन बिता कर वतन लौटे पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ आगामी चुनावों के लिए सोमवार को नामांकन दाखिल कर सकते हैं।
हालांकि विपक्षी दलों ने सभी राजनीतिक दलों से आगामी चुनावों का बहिष्कार करने की अपील की है।
पाकिस्तान मुस्लिम लीग ( नवाज़ ) के प्रमुख नवाज़ शरीफ़ रविवार को पाकिस्तान पहुंचे हैं।
पाकिस्तान में इस समय आपातकाल है और राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने जनवरी महीने में चुनावों की तारीख तय की है।
इससे पहले उनकी प्रतिद्वंद्वी और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की नेता बेनज़ीर भुट्टो ने सिंध प्रांत में दो सीटों पर नामांकन भर दिया है।
उधर विपक्षी दलों के समूह आल पार्टी डेमोक्रेटिक मूवमेंट ने शनिवार को कहा था कि अगर राष्ट्रपति मुशर्रफ़ आपातकाल नहीं हटाते और सुप्रीम कोर्ट के बर्खास्त जजों की बहाली नहीं करते तो चुनावों का बहिष्कार किया जाएगा।
पीएमएल नवाज़ इस समूह की सदस्य है। उधर पीपीपी ने भी चुनावों का बहिष्कार करने का समर्थन किया था लेकिन अब बेनज़ीर ने पर्चा भर दिया है। ऐसे में लगता है कि नवाज़ शरीफ़ भी पर्चा भरेंगे।
तानाशाही ख़त्म करुंगा
इससे पहले पाकिस्तान लौटने के बाद नवाज़ शरीफ़ ने कहा है कि वह मुल्क़ से तानाशाही ख़त्म करने आए हैं और वो लोकतंत्र मज़बूत बनाना चाहते हैं।
नवाज़ शरीफ़ का विमान रविवार रात लाहौर हवाई अड्डे पर उतरा। सऊदी अरब से उनके साथ उनकी पत्नी कुलसुम नवाज़ और भाई शाहबाज़ शरीफ़ भी आए हैं।
उन्होंने बीबीसी के साथ विशेष बातचीत में कहा, "हम देश में क़ानून का शासन चाहते हैं। हमें जम्हूरियत चाहिए और कुछ नहीं।"
नवाज़ शरीफ़ का कहना था, "ये मेरी ज़िंदगी का बेहतरीन लम्हा है। मैं उन लोगों का शुक्रगुजार हूँ जिन्होंने मेरा साथ दिया।"
हम देश में क़ानून का शासन चाहते हैं। हमें जम्हूरियत चाहिए और कुछ नहीं
नवाज़ शरीफ़
पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि वो 1977 के संविधान की बहाली के लिए काम करेंगे।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वो बदले की राजनीति के तहत आगे नहीं बढ़ेंगे। इस सवाल पर कि क्या वो जनरल मुशर्रफ़ के साथ मिल कर काम करेंगे तो उनका कहना था, "हमारा एजेंडा उनसे अलग है।"
संसदीय चुनाव में हिस्सा लेने के सवाल पर उनका कहना था कि इसका फ़ैसला 'ऑल पार्टी डेमोक्रैटिक मूवमेंट' में शामिल अन्य दलों के साथ सलाह मशविरे के बाद ही किया जाएगा।
स्वागत
अपने परिवार के तीस सदस्यों के साथ पाकिस्तान पहुँचे नवाज़ शरीफ़ ने कहा कि उनका "परवेज़ मुशर्रफ़ से किसी तरह का समझौता करने का कोई इरादा नहीं है"।
वे सात वर्ष निर्वासित ज़िंदगी गुज़ारने के बाद जेद्दा से एक विशेष विमान से लाहौर पहुँचे हैं।
सरकार की ओर से कहा गया है कि नवाज़ शरीफ़ अपनी मर्ज़ी से वापस लौटे हैं और उन्हें पिछली बार की तरह रोका या वापस नहीं भेजा जाएगा।
पिछले 10 सितंबर को इसी सरकार ने स्वदेश वापस लौटे नवाज़ शरीफ़ को हवाईअड्डे से ही वापस भेज दिया गया था।
हवाई अड्डे के लाउंज से बाहर निकलते ही पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) के समर्थकों ने उन्हें और शाहबाज़ शरीफ़ को कंधों पर उठा लिया और ज़बर्दस्त नारेबाज़ी की।
उन्होंने लोगों से कहा कि वो किसी सौदेबाज़ी के लिए वापस नहीं आए हैं बल्कि मुल्क़ और कौम के लिए वापस आए हैं।
हवाई अड्डे पर उनकी पार्टी के कार्यकर्ता लगातार जनरल मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ नारे लगाते रहे। पुलिस के साथ कार्यकर्ताओं की धक्कामुक्की भी हुई और हल्का लाठीचार्ज करना पड़ा।
कुछ दिन पहले पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें स्वदेश लौटने की अनुमति दे दी थी।
1999 में नवाज़ शरीफ़ का तख़्ता पलट दिया गया था और अगले साल उन्हें पाकिस्तान से सऊदी अरब निर्वासित कर दिया गया था।
हालांकि विपक्षी दलों ने सभी राजनीतिक दलों से आगामी चुनावों का बहिष्कार करने की अपील की है।
पाकिस्तान मुस्लिम लीग ( नवाज़ ) के प्रमुख नवाज़ शरीफ़ रविवार को पाकिस्तान पहुंचे हैं।
पाकिस्तान में इस समय आपातकाल है और राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने जनवरी महीने में चुनावों की तारीख तय की है।
इससे पहले उनकी प्रतिद्वंद्वी और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की नेता बेनज़ीर भुट्टो ने सिंध प्रांत में दो सीटों पर नामांकन भर दिया है।
उधर विपक्षी दलों के समूह आल पार्टी डेमोक्रेटिक मूवमेंट ने शनिवार को कहा था कि अगर राष्ट्रपति मुशर्रफ़ आपातकाल नहीं हटाते और सुप्रीम कोर्ट के बर्खास्त जजों की बहाली नहीं करते तो चुनावों का बहिष्कार किया जाएगा।
पीएमएल नवाज़ इस समूह की सदस्य है। उधर पीपीपी ने भी चुनावों का बहिष्कार करने का समर्थन किया था लेकिन अब बेनज़ीर ने पर्चा भर दिया है। ऐसे में लगता है कि नवाज़ शरीफ़ भी पर्चा भरेंगे।
तानाशाही ख़त्म करुंगा
इससे पहले पाकिस्तान लौटने के बाद नवाज़ शरीफ़ ने कहा है कि वह मुल्क़ से तानाशाही ख़त्म करने आए हैं और वो लोकतंत्र मज़बूत बनाना चाहते हैं।
नवाज़ शरीफ़ का विमान रविवार रात लाहौर हवाई अड्डे पर उतरा। सऊदी अरब से उनके साथ उनकी पत्नी कुलसुम नवाज़ और भाई शाहबाज़ शरीफ़ भी आए हैं।
उन्होंने बीबीसी के साथ विशेष बातचीत में कहा, "हम देश में क़ानून का शासन चाहते हैं। हमें जम्हूरियत चाहिए और कुछ नहीं।"
नवाज़ शरीफ़ का कहना था, "ये मेरी ज़िंदगी का बेहतरीन लम्हा है। मैं उन लोगों का शुक्रगुजार हूँ जिन्होंने मेरा साथ दिया।"
हम देश में क़ानून का शासन चाहते हैं। हमें जम्हूरियत चाहिए और कुछ नहीं
नवाज़ शरीफ़
पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि वो 1977 के संविधान की बहाली के लिए काम करेंगे।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वो बदले की राजनीति के तहत आगे नहीं बढ़ेंगे। इस सवाल पर कि क्या वो जनरल मुशर्रफ़ के साथ मिल कर काम करेंगे तो उनका कहना था, "हमारा एजेंडा उनसे अलग है।"
संसदीय चुनाव में हिस्सा लेने के सवाल पर उनका कहना था कि इसका फ़ैसला 'ऑल पार्टी डेमोक्रैटिक मूवमेंट' में शामिल अन्य दलों के साथ सलाह मशविरे के बाद ही किया जाएगा।
स्वागत
अपने परिवार के तीस सदस्यों के साथ पाकिस्तान पहुँचे नवाज़ शरीफ़ ने कहा कि उनका "परवेज़ मुशर्रफ़ से किसी तरह का समझौता करने का कोई इरादा नहीं है"।
वे सात वर्ष निर्वासित ज़िंदगी गुज़ारने के बाद जेद्दा से एक विशेष विमान से लाहौर पहुँचे हैं।
सरकार की ओर से कहा गया है कि नवाज़ शरीफ़ अपनी मर्ज़ी से वापस लौटे हैं और उन्हें पिछली बार की तरह रोका या वापस नहीं भेजा जाएगा।
पिछले 10 सितंबर को इसी सरकार ने स्वदेश वापस लौटे नवाज़ शरीफ़ को हवाईअड्डे से ही वापस भेज दिया गया था।
हवाई अड्डे के लाउंज से बाहर निकलते ही पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) के समर्थकों ने उन्हें और शाहबाज़ शरीफ़ को कंधों पर उठा लिया और ज़बर्दस्त नारेबाज़ी की।
उन्होंने लोगों से कहा कि वो किसी सौदेबाज़ी के लिए वापस नहीं आए हैं बल्कि मुल्क़ और कौम के लिए वापस आए हैं।
हवाई अड्डे पर उनकी पार्टी के कार्यकर्ता लगातार जनरल मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ नारे लगाते रहे। पुलिस के साथ कार्यकर्ताओं की धक्कामुक्की भी हुई और हल्का लाठीचार्ज करना पड़ा।
कुछ दिन पहले पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें स्वदेश लौटने की अनुमति दे दी थी।
1999 में नवाज़ शरीफ़ का तख़्ता पलट दिया गया था और अगले साल उन्हें पाकिस्तान से सऊदी अरब निर्वासित कर दिया गया था।
Thursday, November 22, 2007
'राज्य सरकार भय दूर करने की कोशिश करे'
गृह मंत्री शिवराज पाटिल ने कहा है कि केंद्र सरकार ने नंदीग्राम में स्थिति सामान्य बनाए रखने के लिए संवैधानिक प्रावधानों के तहत कुछ निर्देश दिए हैं।
लोकसभा में नंदीग्राम के मुद्दे पर लगभग साढ़े छह घंटे चली बहस का जवाब देते हुए गृह मंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार से कहा गया है कि वह भयमुक्त वातावरण तैयार करने के लिए सभी आवश्यक क़दम उठाए।
इससे पहले लोकसभा में विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने राज्य सरकार को संविधान के अनुच्छेद 355 के तहत निर्देश देने और इसका असर नहीं होने पर राष्ट्रपति शासन लागू करने की माँग की थी।
शिवराज पाटिल ने कहा कि केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 355 की तर्ज पर ही राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं।
उन्होंने बताया कि इन निर्देशों में कहा गया है कि नंदीग्राम छोड़कर गए लोगों को घर वापस लौटाना होगा और उन्हें पूरा संरक्षण देना होगा।
साथ ही मोटरसाइकिल से घूमकर किसी को डराने की अनुमति नहीं हो, पीड़ितों को समुचित मुआवजा दिया जाए और सुरक्षा बलों की उचित तैनाती की जाए।
उन्होंने स्वीकार किया कि नंदीग्राम में जो कुछ हुआ वह दुखद था और ऐसी स्थिति बन गई थी कि कोई सरकारी मुलाजिम वहाँ तक नहीं जा सकता था।
गृह मंत्री ने कहा कि वहाँ व्याप्त भय की भावना सबसे बड़ी बात है जिसे दूर करने के लिए राज्य सरकार क़दम उठाए, इसमें केंद्र उसके साथ होगा।
लोकसभा में नंदीग्राम के मुद्दे पर लगभग साढ़े छह घंटे चली बहस का जवाब देते हुए गृह मंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार से कहा गया है कि वह भयमुक्त वातावरण तैयार करने के लिए सभी आवश्यक क़दम उठाए।
इससे पहले लोकसभा में विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने राज्य सरकार को संविधान के अनुच्छेद 355 के तहत निर्देश देने और इसका असर नहीं होने पर राष्ट्रपति शासन लागू करने की माँग की थी।
शिवराज पाटिल ने कहा कि केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 355 की तर्ज पर ही राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं।
उन्होंने बताया कि इन निर्देशों में कहा गया है कि नंदीग्राम छोड़कर गए लोगों को घर वापस लौटाना होगा और उन्हें पूरा संरक्षण देना होगा।
साथ ही मोटरसाइकिल से घूमकर किसी को डराने की अनुमति नहीं हो, पीड़ितों को समुचित मुआवजा दिया जाए और सुरक्षा बलों की उचित तैनाती की जाए।
उन्होंने स्वीकार किया कि नंदीग्राम में जो कुछ हुआ वह दुखद था और ऐसी स्थिति बन गई थी कि कोई सरकारी मुलाजिम वहाँ तक नहीं जा सकता था।
गृह मंत्री ने कहा कि वहाँ व्याप्त भय की भावना सबसे बड़ी बात है जिसे दूर करने के लिए राज्य सरकार क़दम उठाए, इसमें केंद्र उसके साथ होगा।
Wednesday, November 21, 2007
मुशर्रफ़ ने लोकतंत्र को आगे बढ़ाया: राष्ट्रपति बुश
अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ पर भरोसा जताते हुए कहा है राष्ट्रपति मुशर्रफ़ अपनी ज़बान के पक्के हैं और उन्होंने देश में लोकतंत्र को आगे बढ़ाया है।
एजेंसियों के अनुसार राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने एबीसी टीवी को वॉशिंगटन के पास कैंप डेविड में दिए एक इंटरव्यू में ये विचार व्यक्त किए हैं।
समाचार माध्यमों के मुताबिक राष्ट्रपति बुश ने कहा, "मुझे लगता है कि उन्होंने हज़ारों लोगों को जेल से रिहा कर एक अच्छा संकेत दिया है। क्या हम इमरजेंसी लगाए जाने से ख़ुश हैं? नहीं, हम ख़ुश नहीं।"
महत्वपूर्ण है कि पाकिस्तान में इमरजेंसी लागू होने के बाद हज़ारों लोगों की गिरफ़्तारी हुई है लेकिन मंगलवार को जेल में क़ैद किए गए तीन हज़ार से ज़्यादा लोगों को रिहा कर दिया गया।
'लोकतंत्र को पटरी पर लाएँगे'
पाकिस्तान में चरमपंथ और लोकतंत्र पर राष्ट्रपति बुश का कहना था, "क्या मैं चरमपंथियों और कट्टरपंथियों के साथ लड़ाई में उनका महत्व जानता हूँ? हाँ मैं जानता हूँ। और क्या मैं मानता हूँ कि वे पाकिस्तान में लोकतंत्र को पटरी में ला पाएँगे? हाँ, मैं ज़रूर ऐसी उम्मीद करता हूँ।"
उनका कहना था, "उन्होंने (मुशर्रफ़) ने कहा है कि वे वर्दी उतार देंगे। उन्होंने कहा है कि चुनाव होंगे। आज उन्होंने क़ैदियों को रिहा किया है। अब तक मैनें पाया है कि वे अपनी ज़बान के पक्के हैं।"
मुझे लगता है कि उन्होंने हज़ारों लोगों को जेल से रिहा कर एक अच्छा संकेत दिया है. क्या हम इमरजेंसी लगाए जाने से ख़ुश हैं? नहीं, हम ख़ुश नहीं. क्या मैं चरमपंथियों और कट्टरपंथियों के साथ लड़ाई में उनका महत्व जानता हूँ? और क्या मैं मानता हूँ कि वे पाकिस्तान में लोकतंत्र को पटरी में ला पाएँगे? हाँ, मैं ज़रूर ऐसी उम्मीद करता हूँ
राष्ट्रपति बुश
राष्ट्रपति बुश ने कहा कि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने ऐसी कोई हद पार नहीं की है जिससे वे अमरीका का समर्थन खो दें।
उनका कहना था, "मुझे नहीं लगता कि वे (मुशर्रफ़) कोई हद पार करेंगे। मुझे लगता है कि वे सच में ऐसे व्यक्ति हैं जिनका लोकतंत्र में विश्वास है।"
जब उनसे पाकिस्तान के परमाणु हथियारों की सुरक्षा के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था, "मुझे पूरी उम्मीद है। इस समय तो हमें काफ़ी आश्वस्त हैं। जिस भी देश के पास परमाणु हथियार होंगे, हम उस पर क़रीबी नज़र तो रखेंगे ही।"
एजेंसियों के अनुसार राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने एबीसी टीवी को वॉशिंगटन के पास कैंप डेविड में दिए एक इंटरव्यू में ये विचार व्यक्त किए हैं।
समाचार माध्यमों के मुताबिक राष्ट्रपति बुश ने कहा, "मुझे लगता है कि उन्होंने हज़ारों लोगों को जेल से रिहा कर एक अच्छा संकेत दिया है। क्या हम इमरजेंसी लगाए जाने से ख़ुश हैं? नहीं, हम ख़ुश नहीं।"
महत्वपूर्ण है कि पाकिस्तान में इमरजेंसी लागू होने के बाद हज़ारों लोगों की गिरफ़्तारी हुई है लेकिन मंगलवार को जेल में क़ैद किए गए तीन हज़ार से ज़्यादा लोगों को रिहा कर दिया गया।
'लोकतंत्र को पटरी पर लाएँगे'
पाकिस्तान में चरमपंथ और लोकतंत्र पर राष्ट्रपति बुश का कहना था, "क्या मैं चरमपंथियों और कट्टरपंथियों के साथ लड़ाई में उनका महत्व जानता हूँ? हाँ मैं जानता हूँ। और क्या मैं मानता हूँ कि वे पाकिस्तान में लोकतंत्र को पटरी में ला पाएँगे? हाँ, मैं ज़रूर ऐसी उम्मीद करता हूँ।"
उनका कहना था, "उन्होंने (मुशर्रफ़) ने कहा है कि वे वर्दी उतार देंगे। उन्होंने कहा है कि चुनाव होंगे। आज उन्होंने क़ैदियों को रिहा किया है। अब तक मैनें पाया है कि वे अपनी ज़बान के पक्के हैं।"
मुझे लगता है कि उन्होंने हज़ारों लोगों को जेल से रिहा कर एक अच्छा संकेत दिया है. क्या हम इमरजेंसी लगाए जाने से ख़ुश हैं? नहीं, हम ख़ुश नहीं. क्या मैं चरमपंथियों और कट्टरपंथियों के साथ लड़ाई में उनका महत्व जानता हूँ? और क्या मैं मानता हूँ कि वे पाकिस्तान में लोकतंत्र को पटरी में ला पाएँगे? हाँ, मैं ज़रूर ऐसी उम्मीद करता हूँ
राष्ट्रपति बुश
राष्ट्रपति बुश ने कहा कि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने ऐसी कोई हद पार नहीं की है जिससे वे अमरीका का समर्थन खो दें।
उनका कहना था, "मुझे नहीं लगता कि वे (मुशर्रफ़) कोई हद पार करेंगे। मुझे लगता है कि वे सच में ऐसे व्यक्ति हैं जिनका लोकतंत्र में विश्वास है।"
जब उनसे पाकिस्तान के परमाणु हथियारों की सुरक्षा के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था, "मुझे पूरी उम्मीद है। इस समय तो हमें काफ़ी आश्वस्त हैं। जिस भी देश के पास परमाणु हथियार होंगे, हम उस पर क़रीबी नज़र तो रखेंगे ही।"
Tuesday, November 20, 2007
'बुश इमरजेंसी पर गुज़ारिश ही कर सकते हैं'
अमरीकी राष्ट्रपति के कार्यालय की प्रवक्ता डाना पैरिनो ने पत्रकारों को बताया है कि अमरीकी विदेश उपमंत्री जॉन नेग्रोपॉन्टे ने अपनी पाकिस्तान यात्रा से लौटकर राष्ट्रपति जॉर्ज बुश को वहाँ हुई गतिविधियों से अवगत कराया है।
प्रवक्ता डाना पैरिनो से पूछा गया कि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के इमरजेंसी हटाने से इनकार कर देने के बाद अमरीका आगे क्या करेगा?
डाना पैरिनो का कहना था, "पाकिस्तान एक संप्रभु देश है और राष्ट्रपति बुश पाकिस्तान से गुज़ारिश ही कर सकते हैं। कूटनीति में नतीज़े तत्काल सामने नज़र नहीं आते और इसलिए हमने बातचीत के विकल्प खुले रखे हैं।"
उधर पाकिस्तान में जहाँ नवगठित सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के दोबारा चुनाव को चुनौती देने वाली छह याचिकाओं में से पाँच रद्द कर दी हैं, वहीं मंगलवार को राष्ट्रपति मुशर्रफ़ सऊदी अरब जा रहे हैं।
एक ओर अटकलें लगाई जा रही हैं कि शायद राष्ट्रपति मुशर्रफ़ वहाँ पाकिस्तान के निर्वासित पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ से बातचीत करें, लेकिन नवाज़ शरीफ़ ने विभिन्न समाचार माध्यमों के ज़रिए स्पष्ट किया है कि उनकी राष्ट्रपति मुशर्रफ़ से बातचीत करने की कोई योजना नहीं है।
चुनाव कराने की घोषणा
पाकिस्तान एक संप्रभु देश है और राष्ट्रपति बुश पाकिस्तान से गुज़ारिश ही कर सकते हैं। कूटनीति में नतीज़े तत्काल सामने नज़र नहीं आते और इसलिए हमने बातचीत के विकल्प खुले रखे हैं
व्हाइट हाउस प्रवक्ता
अमरीकी राष्ट्रपति कार्यालय की प्रवक्ता डाना पैरिनो ने कहा है कि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने इमरजेंसी हटाने की घोषणा तो नहीं की है लेकिन उन्होंने चुनाव कराने की घोषणा की है, जो अच्छी बात है।
उन्होंने ये भी भरोसा ज़ाहिर किया कि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ सेनाध्यक्ष का पद भी छोड़ देंगे, जो पाकिस्तान की जनता के लिए एक अच्छी बात होगी।
लेकिन डाना पैरिनो का ये भी कहना था, "हम नहीं मानते कि ऐसे माहौल में जहाँ लोगों को चुनाव प्रचार करने की आज़ादी न हो और मीडिया को रिपोर्टिंग करने की अनुमति न हो, वहाँ चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष हो सकते हैं।"
हम नहीं मानते कि ऐसे माहौल में जहाँ लोगों को चुनाव प्रचार करने की आज़ादी न हो और मीडिया को रिपोर्टिंग करने की अनुमति न हो, वहाँ चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष हो सकते हैं
व्हाइट हाउस
अमरीका में विश्लेषकों का मानना है कि अमरीका पाकिस्तान में एक ऐसी सरकार चाहता है जिसमें मुशर्रफ़ भी हों और बेनज़ीर भी हो और मुशर्रफ़ सरकार और फ़ौज के बीच पुल का काम करें।
टीकाकारों का मानना है कि यदि अमरीका इस समय राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ कड़े कदम उठाने का सोचता भी है तो उसे अपनी कई हितों का ध्यान रखना होगा।
उनका मानना है कि यदि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ 'हट' भी जाते हैं तो 'आतंकवाद के ख़िलाफ़ जंग' और अफ़ग़ानिस्तान में अमरीका के नेतृत्व वाले सैन्य अभियान का क्या होगा, क्योंकि वह इसके लिए पाकिस्तान की बंदरगाह और क्षेत्र का इस्तेमाल करता है।
प्रवक्ता डाना पैरिनो से पूछा गया कि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के इमरजेंसी हटाने से इनकार कर देने के बाद अमरीका आगे क्या करेगा?
डाना पैरिनो का कहना था, "पाकिस्तान एक संप्रभु देश है और राष्ट्रपति बुश पाकिस्तान से गुज़ारिश ही कर सकते हैं। कूटनीति में नतीज़े तत्काल सामने नज़र नहीं आते और इसलिए हमने बातचीत के विकल्प खुले रखे हैं।"
उधर पाकिस्तान में जहाँ नवगठित सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के दोबारा चुनाव को चुनौती देने वाली छह याचिकाओं में से पाँच रद्द कर दी हैं, वहीं मंगलवार को राष्ट्रपति मुशर्रफ़ सऊदी अरब जा रहे हैं।
एक ओर अटकलें लगाई जा रही हैं कि शायद राष्ट्रपति मुशर्रफ़ वहाँ पाकिस्तान के निर्वासित पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ से बातचीत करें, लेकिन नवाज़ शरीफ़ ने विभिन्न समाचार माध्यमों के ज़रिए स्पष्ट किया है कि उनकी राष्ट्रपति मुशर्रफ़ से बातचीत करने की कोई योजना नहीं है।
चुनाव कराने की घोषणा
पाकिस्तान एक संप्रभु देश है और राष्ट्रपति बुश पाकिस्तान से गुज़ारिश ही कर सकते हैं। कूटनीति में नतीज़े तत्काल सामने नज़र नहीं आते और इसलिए हमने बातचीत के विकल्प खुले रखे हैं
व्हाइट हाउस प्रवक्ता
अमरीकी राष्ट्रपति कार्यालय की प्रवक्ता डाना पैरिनो ने कहा है कि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने इमरजेंसी हटाने की घोषणा तो नहीं की है लेकिन उन्होंने चुनाव कराने की घोषणा की है, जो अच्छी बात है।
उन्होंने ये भी भरोसा ज़ाहिर किया कि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ सेनाध्यक्ष का पद भी छोड़ देंगे, जो पाकिस्तान की जनता के लिए एक अच्छी बात होगी।
लेकिन डाना पैरिनो का ये भी कहना था, "हम नहीं मानते कि ऐसे माहौल में जहाँ लोगों को चुनाव प्रचार करने की आज़ादी न हो और मीडिया को रिपोर्टिंग करने की अनुमति न हो, वहाँ चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष हो सकते हैं।"
हम नहीं मानते कि ऐसे माहौल में जहाँ लोगों को चुनाव प्रचार करने की आज़ादी न हो और मीडिया को रिपोर्टिंग करने की अनुमति न हो, वहाँ चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष हो सकते हैं
व्हाइट हाउस
अमरीका में विश्लेषकों का मानना है कि अमरीका पाकिस्तान में एक ऐसी सरकार चाहता है जिसमें मुशर्रफ़ भी हों और बेनज़ीर भी हो और मुशर्रफ़ सरकार और फ़ौज के बीच पुल का काम करें।
टीकाकारों का मानना है कि यदि अमरीका इस समय राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ कड़े कदम उठाने का सोचता भी है तो उसे अपनी कई हितों का ध्यान रखना होगा।
उनका मानना है कि यदि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ 'हट' भी जाते हैं तो 'आतंकवाद के ख़िलाफ़ जंग' और अफ़ग़ानिस्तान में अमरीका के नेतृत्व वाले सैन्य अभियान का क्या होगा, क्योंकि वह इसके लिए पाकिस्तान की बंदरगाह और क्षेत्र का इस्तेमाल करता है।
Monday, November 19, 2007
संसद में छा सकता है नंदीग्राम का मुद्दा
मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने संसद के दोनों सदनों में सोमवार को नंदीग्राम का मुद्दा ज़ोर-शोर से उठाने के संकेत दिए हैं और इस मामले पर केंद्र सरकार की 'चुप्पी' की आलोचना की है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी राज्यसभा में इस मुद्दे पर सोमवार को बहस कराने के लिए पहले ही प्रस्ताव दे चुके हैं।
उन्होंने नंदीग्राम में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के कार्यकर्ताओं की कथित ज़्यादती पर 'चुप्पी' साधने के लिए कांग्रेस की तीखी आलोचना की है।
मुरली मनोहर जोशी ने रविवार को भुवनेश्वर में पत्रकारों से कहा कि उनकी पार्टी संसद के दोनों सदनों में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाएगी।
उनका कहना था, "यह बहुत ही आश्चर्यजनक है कि कांग्रेस नंदीग्राम के मुद्दे पर चुप है। सिर्फ़ इसलिए कि सीपीएम केंद्र की यूपीए सरकार को समर्थन दे रहा है।"
यह बहुत ही आश्चर्यजनक है कि कांग्रेस नंदीग्राम के मुद्दे पर चुप है. सिर्फ़ इसलिए कि सीपीएम केंद्र की यूपीए सरकार को समर्थन दे रहा है
मुरली मनोहर जोशी
भाजपा नेता ने सवाल किया कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी या प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने नंदीग्राम का दौरा क्यों नहीं किया।
उन्होंने कहा, "ऐसा लगता है कि कांग्रेस की चुप्पी इसलिए है कि वो अपनी अगुआई वाली यूपीए सरकार को बचाए या भारत-अमरीका परमाणु समझौते पर सीपीएम को लचीला रूख़ अपनाने के लिए बाध्य करे।"
मुरली मनोहर जोशी का कहना था कि वो पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के पक्षधर नहीं हैं लेकिन केंद्र सरकार संवैधानिक प्रावधानों के तहत राज्य सरकार को चेतावनी दे सकती थी।
नंदीग्राम के अलावा परमाणु समझौते का मुद्दा भी संसद में उठना तय है।
सीपीएम का कहना है कि केंद्र सरकार अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के साथ आणविक प्रतिष्ठानों की निगरानी और अन्य पहलुओं पर बातचीत जारी रख सकती है लेकिन इनके निष्कर्षों को परमाणु समझौते के मुद्दे पर गठित यूपए-वाम समिति के समक्ष पेश करना होगा।
भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी राज्यसभा में इस मुद्दे पर सोमवार को बहस कराने के लिए पहले ही प्रस्ताव दे चुके हैं।
उन्होंने नंदीग्राम में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के कार्यकर्ताओं की कथित ज़्यादती पर 'चुप्पी' साधने के लिए कांग्रेस की तीखी आलोचना की है।
मुरली मनोहर जोशी ने रविवार को भुवनेश्वर में पत्रकारों से कहा कि उनकी पार्टी संसद के दोनों सदनों में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाएगी।
उनका कहना था, "यह बहुत ही आश्चर्यजनक है कि कांग्रेस नंदीग्राम के मुद्दे पर चुप है। सिर्फ़ इसलिए कि सीपीएम केंद्र की यूपीए सरकार को समर्थन दे रहा है।"
यह बहुत ही आश्चर्यजनक है कि कांग्रेस नंदीग्राम के मुद्दे पर चुप है. सिर्फ़ इसलिए कि सीपीएम केंद्र की यूपीए सरकार को समर्थन दे रहा है
मुरली मनोहर जोशी
भाजपा नेता ने सवाल किया कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी या प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने नंदीग्राम का दौरा क्यों नहीं किया।
उन्होंने कहा, "ऐसा लगता है कि कांग्रेस की चुप्पी इसलिए है कि वो अपनी अगुआई वाली यूपीए सरकार को बचाए या भारत-अमरीका परमाणु समझौते पर सीपीएम को लचीला रूख़ अपनाने के लिए बाध्य करे।"
मुरली मनोहर जोशी का कहना था कि वो पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के पक्षधर नहीं हैं लेकिन केंद्र सरकार संवैधानिक प्रावधानों के तहत राज्य सरकार को चेतावनी दे सकती थी।
नंदीग्राम के अलावा परमाणु समझौते का मुद्दा भी संसद में उठना तय है।
सीपीएम का कहना है कि केंद्र सरकार अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के साथ आणविक प्रतिष्ठानों की निगरानी और अन्य पहलुओं पर बातचीत जारी रख सकती है लेकिन इनके निष्कर्षों को परमाणु समझौते के मुद्दे पर गठित यूपए-वाम समिति के समक्ष पेश करना होगा।
Saturday, November 17, 2007
बांग्लादेश में तूफ़ान से सैकड़ों मारे गए
बांग्लादेश सरकार का कहना है कि दक्षिण-पश्चिमी तटवर्ती इलाक़ों में आए भीषण तूफ़ान में छह सौ ज़्यादा लोग मारे गए हैं। कुछ अन्य रिपोर्टों में मृतकों की संख्या एक हज़ार से अधिक बताई गई है।
बचावकर्मियों का कहना है कि मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है। तूफ़ान ने भारी तबाही मचाई है और हज़ारों लोग बेघरबार हो गए हैं और कई इलाक़ों में संचार व्यवस्था ठप्प हो गई है।
अधिकारियों का कहना है कि गुरुवार की रात आया भीषण तूफ़ान शुक्रवार शाम तक ठंडा हो गया।
तूफ़ान तटवर्ती इलाक़ों में 240 किलोमीटर प्रति किलोमीटर की रफ़्तार से पहुँचा और इसकी वजह से कई जगह पाँच-पाँच मीटर ऊँची लहरें उठ रहीं थीं।
इस समुद्री तूफ़ान के बाद अनेक लोग लापता हैं और लाखों अपने घर छोड़कर पलायन करने को मजबूर हुए हैं।
अधिकरियों का कहना है कि मछली पकड़ने के लिए गईं कोई 150 नौकाएँ लौट नहीं सकीं हैं। संयुक्त राष्ट्र की एक एजेंसी का कहना है कि एक हज़ार मछुआरे लापता हैं।
बाढ़ पीड़ित
पीड़ितों तक सहायता पहुँचाने की कोशिशें जारी हैं
बांग्लादेश के पड़ोस में भारत के पश्चिमी बंगाल राज्य के अधिकारियों को आशंका है कि तूफ़ान से वहाँ लगभग दस लाख लोगों प्रभावित हुए हैं।
सहायता और बचाव कार्य
बांग्लादेश में दो सौ किलोमीटर प्रति घंटे से ज़्यादा तीव्रता वाली तेज़ हवाओं ने कई घरों और भवनों को ध्वस्त कर दिया है और बड़ी संख्या में पेड़ और बिजली के खंबे उखड़ गए।
सेना, पुलिस और अन्य सरकारी एजेंसियों के अलावा रेडक्रॉस और कई स्वयंसेवी संस्थाएं राहत और बचाव कार्य में लगी हुई हैं।
पीड़ितों को खाना, दवा, टेंट और कंबल आदि पहुँचाने की कोशिशें की जा रही हैं। कई तटवर्ती इलाक़ों में पानी भरा हुआ है।
यातायात ठप्प पड़ा हुआ है और सरकार को ढाका के मुख्य हवाईअड्डे से सभी उड़ानें रद्द करनी पड़ी हैं।
जिन लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया था उनमें से काफ़ी तो वापिस लौट चुके हैं और जो नहीं लौटे हैं उन्हें सलाह दी जा रही है कि अब कोई ख़तरा नहीं है
निदेशक, भारत मौसम विभाग
कई इलाकों में संचार व्यवस्था प्रभावित होने के कारण अभी तक तूफ़ान से हुई तबाही का सही अंदाज़ा नहीं लगाया जा सका है।
बांग्लादेश का दक्षिणी तट अक्सर तूफ़ान की चपेट में आ जाता है। वर्ष 1970 में यहाँ भीषण तूफ़ान आया था जिसमें पाँच लाख लोग मारे गए थे।
भारत में हालात सामान्य
नई दिल्ली में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के निदेशक बीपी यादव का कहना था कि गुरूवार को आए उस तूफ़ान की तीव्रता शुक्रवार तक धीमी पड़ चुकी है और सरकार ने अलर्ट हटा लिया है।
बांग्लादेश
तूफ़ान की रफ़्तार 240 किलोमीटर प्रतिघंटा थी
यादव ने बातचीत में कहा, "जिन लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया था उनमें से काफ़ी तो वापिस लौट चुके हैं और जो नहीं लौटे हैं उन्हें सलाह दी जा रही है कि अब कोई ख़तरा नहीं है।"
यादव ने कहा कि मछुआरे भी समुद्र में अपनी सामान्य गतिविधियाँ जारी रख सकते हैं।
यादव ने कहा कि इस तूफ़ान से प्रभावित उड़ीसा और पश्चिम बंगाल में कोई बड़ा नुक़सान नहीं हुआ है और इसका ज़्यादातर नुक़सान बांग्लादेश में हुआ है।
यादव ने कहा कि यह तूफ़ान बांग्लादेश और भारत के सभी इलाक़ों में ठंडा पड़ चुका है और अब इससे और नुक़सान की कोई संभावना नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत में संचार व्यवस्था ठीकठाक है और यातायात के हालात भी सामान्य हैं।
बचावकर्मियों का कहना है कि मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है। तूफ़ान ने भारी तबाही मचाई है और हज़ारों लोग बेघरबार हो गए हैं और कई इलाक़ों में संचार व्यवस्था ठप्प हो गई है।
अधिकारियों का कहना है कि गुरुवार की रात आया भीषण तूफ़ान शुक्रवार शाम तक ठंडा हो गया।
तूफ़ान तटवर्ती इलाक़ों में 240 किलोमीटर प्रति किलोमीटर की रफ़्तार से पहुँचा और इसकी वजह से कई जगह पाँच-पाँच मीटर ऊँची लहरें उठ रहीं थीं।
इस समुद्री तूफ़ान के बाद अनेक लोग लापता हैं और लाखों अपने घर छोड़कर पलायन करने को मजबूर हुए हैं।
अधिकरियों का कहना है कि मछली पकड़ने के लिए गईं कोई 150 नौकाएँ लौट नहीं सकीं हैं। संयुक्त राष्ट्र की एक एजेंसी का कहना है कि एक हज़ार मछुआरे लापता हैं।
बाढ़ पीड़ित
पीड़ितों तक सहायता पहुँचाने की कोशिशें जारी हैं
बांग्लादेश के पड़ोस में भारत के पश्चिमी बंगाल राज्य के अधिकारियों को आशंका है कि तूफ़ान से वहाँ लगभग दस लाख लोगों प्रभावित हुए हैं।
सहायता और बचाव कार्य
बांग्लादेश में दो सौ किलोमीटर प्रति घंटे से ज़्यादा तीव्रता वाली तेज़ हवाओं ने कई घरों और भवनों को ध्वस्त कर दिया है और बड़ी संख्या में पेड़ और बिजली के खंबे उखड़ गए।
सेना, पुलिस और अन्य सरकारी एजेंसियों के अलावा रेडक्रॉस और कई स्वयंसेवी संस्थाएं राहत और बचाव कार्य में लगी हुई हैं।
पीड़ितों को खाना, दवा, टेंट और कंबल आदि पहुँचाने की कोशिशें की जा रही हैं। कई तटवर्ती इलाक़ों में पानी भरा हुआ है।
यातायात ठप्प पड़ा हुआ है और सरकार को ढाका के मुख्य हवाईअड्डे से सभी उड़ानें रद्द करनी पड़ी हैं।
जिन लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया था उनमें से काफ़ी तो वापिस लौट चुके हैं और जो नहीं लौटे हैं उन्हें सलाह दी जा रही है कि अब कोई ख़तरा नहीं है
निदेशक, भारत मौसम विभाग
कई इलाकों में संचार व्यवस्था प्रभावित होने के कारण अभी तक तूफ़ान से हुई तबाही का सही अंदाज़ा नहीं लगाया जा सका है।
बांग्लादेश का दक्षिणी तट अक्सर तूफ़ान की चपेट में आ जाता है। वर्ष 1970 में यहाँ भीषण तूफ़ान आया था जिसमें पाँच लाख लोग मारे गए थे।
भारत में हालात सामान्य
नई दिल्ली में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के निदेशक बीपी यादव का कहना था कि गुरूवार को आए उस तूफ़ान की तीव्रता शुक्रवार तक धीमी पड़ चुकी है और सरकार ने अलर्ट हटा लिया है।
बांग्लादेश
तूफ़ान की रफ़्तार 240 किलोमीटर प्रतिघंटा थी
यादव ने बातचीत में कहा, "जिन लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया था उनमें से काफ़ी तो वापिस लौट चुके हैं और जो नहीं लौटे हैं उन्हें सलाह दी जा रही है कि अब कोई ख़तरा नहीं है।"
यादव ने कहा कि मछुआरे भी समुद्र में अपनी सामान्य गतिविधियाँ जारी रख सकते हैं।
यादव ने कहा कि इस तूफ़ान से प्रभावित उड़ीसा और पश्चिम बंगाल में कोई बड़ा नुक़सान नहीं हुआ है और इसका ज़्यादातर नुक़सान बांग्लादेश में हुआ है।
यादव ने कहा कि यह तूफ़ान बांग्लादेश और भारत के सभी इलाक़ों में ठंडा पड़ चुका है और अब इससे और नुक़सान की कोई संभावना नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत में संचार व्यवस्था ठीकठाक है और यातायात के हालात भी सामान्य हैं।
Friday, November 16, 2007
बांग्लादेश: तूफ़ान में 50 से ज़्यादा मारे गए
बांग्लादेश के दक्षिण-पश्चिमी तटवर्ती इलाक़ों में गुरुवार को आए भीषण समुद्री तूफ़ान में 50 से ज़्यादा लोगों के मारे जाने की ख़बर है। प्रशासन का कहना है कि हताहतों की संख्या बढ़ सकती है।
ताज़ा जानकारी के मुताबिक इस समुद्री तूफ़ान में अनेक लोग लापता हो गए हैं और लाखों लोग अपने घरों को छोड़कर पलायन करने को मजबूर हुए हैं और अब शरणार्थी शिविरों में हैं।
बांग्लादेश के पड़ोस में भारत के पश्चिमी बंगाल राज्य के अधिकारियों को आशंका है कि तूफ़ान से वहाँ लगभग दस लाख लोगों प्रभावित हुए हैं।
दो सौ किलोमीटर प्रति घंटे से ज़्यादा तीव्रता वाली तेज़ हवाओं ने कई घरों, भवनों को ध्वस्त कर दिया है और बड़ी संख्या में पेड़ उखड़ गए हैं। कई तटवर्ती इलाक़ों में पानी भरा हुआ है।
बांग्लादेश की राजधानी ढाका में हवाई अड्डा अब भी बंद है।
बांग्लादेश
तूफ़ान में 200 किलोमीटर प्रति घंटा की तीव्रता वाली हवाएँ चलीं
कई इलाकों में संचार व्यवस्था प्रभावित होने के कारण अभी तक तूफ़ान से हुई तबाही का सही अंदाज़ा नहीं लगाया जा सका है।
बांग्लादेश से पत्रकार हसन शहरयार का कहना है कि तूफ़ान से हुए नुकसान को देखते हुए कहा जा सकता है कि मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है।
हालांकि सरकारी सूत्रों का कहना है कि जैसे-जैसे प्रभावित इलाकों से संपर्क बहाल होता है, जानमाल के नुकसान का असली अंदाज़ा तभी लगेगा।
संचार ठप्प
स्थिति यह है कि कुछ शहरों और कस्बों से देर रात तक कोई संपर्क स्थापित नहीं हो पाया था और वहाँ से कोई स्पष्ट जानकारी हासिल नहीं हो सकी है।
बताया जा रहा है कि तफ़ान प्रभावित इलाके के तीन गाँव पूरी तरह से नष्ट हो गए हैं।
चेतावनी
तूफ़ान से पहले चेतावनी जारी की गई थी
सरकार ने तूफ़ान के कुछ समय पहले ही चेतावनी जारी कर दी थी और लगभग साढ़े छह लाख लोगों को तूफ़ान प्रभावित इलाकों से निकाल लिया गया था।
लगभग 1000 अस्थायी पड़ावों मे तूफ़ान से प्रभावित लोगों के आश्रय लेने की व्यवस्था की गई है।
उधर मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह तूफ़ान अब थोड़ा कमज़ोर पड़ता नज़र आ रहा है और संभव है कि शुक्रवार दोपहर तक इसकी तीव्रता कुछ कम हो जाए।
ताज़ा जानकारी के मुताबिक इस समुद्री तूफ़ान में अनेक लोग लापता हो गए हैं और लाखों लोग अपने घरों को छोड़कर पलायन करने को मजबूर हुए हैं और अब शरणार्थी शिविरों में हैं।
बांग्लादेश के पड़ोस में भारत के पश्चिमी बंगाल राज्य के अधिकारियों को आशंका है कि तूफ़ान से वहाँ लगभग दस लाख लोगों प्रभावित हुए हैं।
दो सौ किलोमीटर प्रति घंटे से ज़्यादा तीव्रता वाली तेज़ हवाओं ने कई घरों, भवनों को ध्वस्त कर दिया है और बड़ी संख्या में पेड़ उखड़ गए हैं। कई तटवर्ती इलाक़ों में पानी भरा हुआ है।
बांग्लादेश की राजधानी ढाका में हवाई अड्डा अब भी बंद है।
बांग्लादेश
तूफ़ान में 200 किलोमीटर प्रति घंटा की तीव्रता वाली हवाएँ चलीं
कई इलाकों में संचार व्यवस्था प्रभावित होने के कारण अभी तक तूफ़ान से हुई तबाही का सही अंदाज़ा नहीं लगाया जा सका है।
बांग्लादेश से पत्रकार हसन शहरयार का कहना है कि तूफ़ान से हुए नुकसान को देखते हुए कहा जा सकता है कि मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है।
हालांकि सरकारी सूत्रों का कहना है कि जैसे-जैसे प्रभावित इलाकों से संपर्क बहाल होता है, जानमाल के नुकसान का असली अंदाज़ा तभी लगेगा।
संचार ठप्प
स्थिति यह है कि कुछ शहरों और कस्बों से देर रात तक कोई संपर्क स्थापित नहीं हो पाया था और वहाँ से कोई स्पष्ट जानकारी हासिल नहीं हो सकी है।
बताया जा रहा है कि तफ़ान प्रभावित इलाके के तीन गाँव पूरी तरह से नष्ट हो गए हैं।
चेतावनी
तूफ़ान से पहले चेतावनी जारी की गई थी
सरकार ने तूफ़ान के कुछ समय पहले ही चेतावनी जारी कर दी थी और लगभग साढ़े छह लाख लोगों को तूफ़ान प्रभावित इलाकों से निकाल लिया गया था।
लगभग 1000 अस्थायी पड़ावों मे तूफ़ान से प्रभावित लोगों के आश्रय लेने की व्यवस्था की गई है।
उधर मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह तूफ़ान अब थोड़ा कमज़ोर पड़ता नज़र आ रहा है और संभव है कि शुक्रवार दोपहर तक इसकी तीव्रता कुछ कम हो जाए।
Thursday, November 15, 2007
शीतकालीन सत्र के गर्म रहने के आसार
भारतीय संसद का शीतकालीन सत्र गुरुवार से शुरु हो रहा है।
भारत-अमरीका परमाणु समझौते और नंदीग्राम की हिंसा से लेकर गेंहूँ आयात तक कई ऐसे मुद्दे हैं जिन पर यूपीए सरकार को अपने सहयोगियों और विपक्षी दलों के सवालों से दो चार होना पड़ेगा।
हालांकि सरकार कह रही है कि वह हर विषय पर चर्चा के लिए तैयार है लेकिन विपक्ष के तेवर बता रहे हैं कि चर्चा से पहले हंगामा और शोर-शराबा तय है।
हालांकि सदन के पहले दिन कोई कार्यवाही नहीं होनी है क्योंकि दोनों ही सदन श्रद्धांजलि सभा के बाद स्थगित होने वाले हैं।
इस बीच लोकसभा सदस्य विजय खंडेलवाल का निधन हुआ है तो राज्यसभा से जना कृष्णमूर्ति का।
कई मुद्दे
तीन हफ़्ते चलने वाले इस सत्र में कई मुद्दों पर सरकार और विपक्ष आमने सामने होंगे तो कुछ पर सरकार को अपने ही सहयोगी दलों के सवालों के भी जवाब देने होंगे।
मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने पहले ही दिन प्रश्नकाल स्थगित कर नंदीग्राम पर बहस करवाने का नोटिस दे रखा है।
नंदीग्राम की हिंसा के मुद्दे पर यूपीए को बाहर से समर्थन दे रहे वाममोर्चे को जवाब देना होगा, ख़ासकर सीपीएम को, जिसके कार्यकर्ताओं ने नंदीग्राम में हिंसक कार्रवाई की है।
वामपंथी नेता
वामदलों ने परमाणु समझौते पर सरकार से समर्थन वापसी की धमकी भी दी थी
सीपीएम कार्यकर्ताओं की कार्रवाई को जिस तरह मुख्यमंत्री बुद्धदेब भट्टाचार्य ने उचित ठहराया है, वह भी बहस का विषय रहेगा।
परमाणु क़रार के मुद्दे पर यूपीए सरकार को उनके अपने सहयोगी वामदल की घेरे रहेंगे। हालांकि वामदलों का रुख़ पिछले दो-तीन दिनों में कुछ नरम हो गया दिखता है लेकिन इससे बहस कमज़ोर हो जाएगी ऐसा नहीं दिखता।
इस मुद्दे पर भाजपा ने भी साफ़ कर दिया है कि वह सरकार का साथ नहीं देने जा रही है।
इसके अलावा जिन मुद्दों पर माहौल गर्माया रहेगा उनमें गेहूँ के आयात और धान के समर्थन मूल्य का मामला रहेगा।
सेतुसमुद्रम परियोजना से लेकर ख़ुदरा बाज़ार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश जैसे कई मुद्दे इसी सत्र में उठने की संभावना है।
तारीख़
परमाणु समझौते ने मानसून सत्र को गर्माए रखा था। और अब माना जा रहा है कि शीतकालीन सत्र की प्राथमिकता परमाणु मुद्दे पर चर्चा है।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा है कि वे चाहते हैं कि चर्चा के दौरान सभी वरिष्ठ मंत्री उपस्थित रहें। उधर भाजपा ने साफ़ कर दिया है कि वे प्रधानमंत्री की उपस्थिति सदन में चाहते हैं।
हालांकि संसदीय कार्यमंत्री प्रियरंजन दासमुंशी कह रहे हैं कि वे सभी की सुविधा से चर्चा की तारीख़ तय कर लेंगे लेकिन मामला थोड़ा कठिन भी दिखता है।
20 नवंबर को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सिंगापुर जाकर आसियान की बैठक में शामिल होना है और फिर चोगम की बैठक के लिए यूगांडा जाना है।
इससे लगता है कि परमाणु समझौते पर चर्चा या तो 16 नवंबर को हो सकती है या फिर 19 नवंबर को। अगर मामला इससे आगे बढ़ा तो फिर प्रधानमंत्री के लौटने का इंतज़ार करना होगा।
भारत-अमरीका परमाणु समझौते और नंदीग्राम की हिंसा से लेकर गेंहूँ आयात तक कई ऐसे मुद्दे हैं जिन पर यूपीए सरकार को अपने सहयोगियों और विपक्षी दलों के सवालों से दो चार होना पड़ेगा।
हालांकि सरकार कह रही है कि वह हर विषय पर चर्चा के लिए तैयार है लेकिन विपक्ष के तेवर बता रहे हैं कि चर्चा से पहले हंगामा और शोर-शराबा तय है।
हालांकि सदन के पहले दिन कोई कार्यवाही नहीं होनी है क्योंकि दोनों ही सदन श्रद्धांजलि सभा के बाद स्थगित होने वाले हैं।
इस बीच लोकसभा सदस्य विजय खंडेलवाल का निधन हुआ है तो राज्यसभा से जना कृष्णमूर्ति का।
कई मुद्दे
तीन हफ़्ते चलने वाले इस सत्र में कई मुद्दों पर सरकार और विपक्ष आमने सामने होंगे तो कुछ पर सरकार को अपने ही सहयोगी दलों के सवालों के भी जवाब देने होंगे।
मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने पहले ही दिन प्रश्नकाल स्थगित कर नंदीग्राम पर बहस करवाने का नोटिस दे रखा है।
नंदीग्राम की हिंसा के मुद्दे पर यूपीए को बाहर से समर्थन दे रहे वाममोर्चे को जवाब देना होगा, ख़ासकर सीपीएम को, जिसके कार्यकर्ताओं ने नंदीग्राम में हिंसक कार्रवाई की है।
वामपंथी नेता
वामदलों ने परमाणु समझौते पर सरकार से समर्थन वापसी की धमकी भी दी थी
सीपीएम कार्यकर्ताओं की कार्रवाई को जिस तरह मुख्यमंत्री बुद्धदेब भट्टाचार्य ने उचित ठहराया है, वह भी बहस का विषय रहेगा।
परमाणु क़रार के मुद्दे पर यूपीए सरकार को उनके अपने सहयोगी वामदल की घेरे रहेंगे। हालांकि वामदलों का रुख़ पिछले दो-तीन दिनों में कुछ नरम हो गया दिखता है लेकिन इससे बहस कमज़ोर हो जाएगी ऐसा नहीं दिखता।
इस मुद्दे पर भाजपा ने भी साफ़ कर दिया है कि वह सरकार का साथ नहीं देने जा रही है।
इसके अलावा जिन मुद्दों पर माहौल गर्माया रहेगा उनमें गेहूँ के आयात और धान के समर्थन मूल्य का मामला रहेगा।
सेतुसमुद्रम परियोजना से लेकर ख़ुदरा बाज़ार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश जैसे कई मुद्दे इसी सत्र में उठने की संभावना है।
तारीख़
परमाणु समझौते ने मानसून सत्र को गर्माए रखा था। और अब माना जा रहा है कि शीतकालीन सत्र की प्राथमिकता परमाणु मुद्दे पर चर्चा है।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा है कि वे चाहते हैं कि चर्चा के दौरान सभी वरिष्ठ मंत्री उपस्थित रहें। उधर भाजपा ने साफ़ कर दिया है कि वे प्रधानमंत्री की उपस्थिति सदन में चाहते हैं।
हालांकि संसदीय कार्यमंत्री प्रियरंजन दासमुंशी कह रहे हैं कि वे सभी की सुविधा से चर्चा की तारीख़ तय कर लेंगे लेकिन मामला थोड़ा कठिन भी दिखता है।
20 नवंबर को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सिंगापुर जाकर आसियान की बैठक में शामिल होना है और फिर चोगम की बैठक के लिए यूगांडा जाना है।
इससे लगता है कि परमाणु समझौते पर चर्चा या तो 16 नवंबर को हो सकती है या फिर 19 नवंबर को। अगर मामला इससे आगे बढ़ा तो फिर प्रधानमंत्री के लौटने का इंतज़ार करना होगा।
Wednesday, November 14, 2007
'जहाँ मार्शल लॉ हो, वहाँ कैसे चुनाव?'
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने कहा है कि जब तक बर्ख़ास्त मुख्य न्यायाधीश और अन्य जजों को बहाल नहीं किया जाता, 'तब तक देश में चुनावों की बात न तो सुननी चाहिए और न ही माननी चाहिए।'
महत्वपूर्ण है कि निर्वासित पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने बीबीसी को इंटरव्यू में ऐसा तब कहा है जब मंगलवार को पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के इस्तीफ़े की माँग कर चुकी हैं।
जेद्दा से बातचीत में नवाज़ शरीफ़ ने बनेज़ीर भुट्टो के बयान का स्वागत किया।
लेकिन उनका ये भी कहना था, "जिस देश में इमरजेंसी हो और हक़ीकत में मार्शल लॉ लागू हो, जहाँ राजनीतिक नेता और मानवाधिकार कार्यकर्ता क़ैद हों और चुनाव प्रचार भी न हो सकता हो, उस देश में क्या चुनाव होंगे?"
जब निर्वासित पूर्व प्रधानमंत्री से स्पष्ट पूछा गया कि क्या उनकी पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) चुनाव में भाग नहीं लेगी, तो उनका कहना था, "मैं अकेले तो इसका फ़ैसला नहीं ले सकता। ये फ़ैसला सबको मिलकर करना चाहिए। लेकिन जो विचार मैने व्यक्त किए हैं, ऑल पार्टीस डेमोक्रेटिक मूवमेंट के सभी नेता चुनावों के बारे में यही नज़रिए रखते हैं।"
जिस देश में इमरजेंसी हो और हक़ीकत में मार्शल लॉ लागू हो, जहाँ राजनीतिक नेता और मानवाधिकार कार्यकर्ता क़ैद हों और चुनाव प्रचार भी न हो सकता हो, उस देश में क्या चुनाव होंगे
नवाज़ शरीफ़
उनका दावा था कि उनकी पार्टी के अधिकतर लोग जेल में बंद हैं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा, "जनरल मुशर्रफ़ के मुताबिक 55 दिन के बाद चुनाव होने हैं लेकिन चुनाव प्रचार और मीटिंग करने की इजाज़त नहीं है, तो क्या चुनाव होंगे।"
नवाज़ शरीफ़ ने आरोप लगाया, "जनरल मुशर्रफ़ ख़ुद ही खेल के नियम बना रहे हैं, ख़ुद ही अंपायर हैं और विपक्ष को उन्होंने रन आउट दे दिया है।"
नेग्रोपॉंटे पाकिस्तान जाएँगे
उधर अमरीकी विदेश उपमंत्री जॉन नेग्रोपॉन्टे इस हफ़्ते पाकिस्तान का दौरा करेंगे। अमरीकी राष्ट्रपति के कार्यालय ने घोषणा की है।
जनरल मुशर्रफ़ ख़ुद ही खेल के नियम बना रहे हैं, ख़ुद ही अंपायर हैं और विपक्ष को उन्होंने रन आउट दे दिया है
नवाज़ शरीफ़
माना जा रहा है कि वे पाकिस्तानी राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ से मिलेंगे और उनसे इमरजेंसी हटाने के लिए कहेंगे। वे कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से भी मुलाक़ात करेंगे।
फ़िलहाल ये स्पष्ट नहीं है कि वे नज़बंद की गई पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो से भी मिलेंगे या नहीं।
इमरजेंसी का विरोध कर रहीं विपक्षी नेता बेनज़ीर भुट्टो को सात दिनों के लिए लाहौर में नज़रबंद किया गया है।
मंगलवार को फ़ोन पर हुई बातचीत में उन्होंने कहा था कि मुशर्रफ़ स्थितियों को समझ पाने और काबू कर पाने में विफल हो गए हैं और अब उन्हें इस्तीफ़ा दे देना चाहिए।
महत्वपूर्ण है कि निर्वासित पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने बीबीसी को इंटरव्यू में ऐसा तब कहा है जब मंगलवार को पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के इस्तीफ़े की माँग कर चुकी हैं।
जेद्दा से बातचीत में नवाज़ शरीफ़ ने बनेज़ीर भुट्टो के बयान का स्वागत किया।
लेकिन उनका ये भी कहना था, "जिस देश में इमरजेंसी हो और हक़ीकत में मार्शल लॉ लागू हो, जहाँ राजनीतिक नेता और मानवाधिकार कार्यकर्ता क़ैद हों और चुनाव प्रचार भी न हो सकता हो, उस देश में क्या चुनाव होंगे?"
जब निर्वासित पूर्व प्रधानमंत्री से स्पष्ट पूछा गया कि क्या उनकी पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) चुनाव में भाग नहीं लेगी, तो उनका कहना था, "मैं अकेले तो इसका फ़ैसला नहीं ले सकता। ये फ़ैसला सबको मिलकर करना चाहिए। लेकिन जो विचार मैने व्यक्त किए हैं, ऑल पार्टीस डेमोक्रेटिक मूवमेंट के सभी नेता चुनावों के बारे में यही नज़रिए रखते हैं।"
जिस देश में इमरजेंसी हो और हक़ीकत में मार्शल लॉ लागू हो, जहाँ राजनीतिक नेता और मानवाधिकार कार्यकर्ता क़ैद हों और चुनाव प्रचार भी न हो सकता हो, उस देश में क्या चुनाव होंगे
नवाज़ शरीफ़
उनका दावा था कि उनकी पार्टी के अधिकतर लोग जेल में बंद हैं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा, "जनरल मुशर्रफ़ के मुताबिक 55 दिन के बाद चुनाव होने हैं लेकिन चुनाव प्रचार और मीटिंग करने की इजाज़त नहीं है, तो क्या चुनाव होंगे।"
नवाज़ शरीफ़ ने आरोप लगाया, "जनरल मुशर्रफ़ ख़ुद ही खेल के नियम बना रहे हैं, ख़ुद ही अंपायर हैं और विपक्ष को उन्होंने रन आउट दे दिया है।"
नेग्रोपॉंटे पाकिस्तान जाएँगे
उधर अमरीकी विदेश उपमंत्री जॉन नेग्रोपॉन्टे इस हफ़्ते पाकिस्तान का दौरा करेंगे। अमरीकी राष्ट्रपति के कार्यालय ने घोषणा की है।
जनरल मुशर्रफ़ ख़ुद ही खेल के नियम बना रहे हैं, ख़ुद ही अंपायर हैं और विपक्ष को उन्होंने रन आउट दे दिया है
नवाज़ शरीफ़
माना जा रहा है कि वे पाकिस्तानी राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ से मिलेंगे और उनसे इमरजेंसी हटाने के लिए कहेंगे। वे कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से भी मुलाक़ात करेंगे।
फ़िलहाल ये स्पष्ट नहीं है कि वे नज़बंद की गई पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो से भी मिलेंगे या नहीं।
इमरजेंसी का विरोध कर रहीं विपक्षी नेता बेनज़ीर भुट्टो को सात दिनों के लिए लाहौर में नज़रबंद किया गया है।
मंगलवार को फ़ोन पर हुई बातचीत में उन्होंने कहा था कि मुशर्रफ़ स्थितियों को समझ पाने और काबू कर पाने में विफल हो गए हैं और अब उन्हें इस्तीफ़ा दे देना चाहिए।
Tuesday, November 13, 2007
बेनज़ीर भुट्टो फिर 'नज़रबंद'
इमरजेंसी का विरोध कर रहीं पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री और विपक्षी नेता बेनज़ीर भुट्टो को सात दिनों के लिए नज़रबंद कर दिया गया है।
उधर बेनज़ीर भुट्टो की पार्टी, पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की ओर से लाहौर से इस्लामाबाद के लिए प्रस्तावित रैली के मद्देनज़र लाहौर में कड़ी कर दी गई है।
बेनज़ीर इस वक्त लाहौर में अपनी पार्टी के एक नेता के घर पर रुकी हुई हैं। इस घर के इर्द-गिर्द सोमवार रात से ही पुलिस की बड़ी तादाद में तैनाती कर दी गई है।
इस घर के आसपास के लगभग एक किलोमीटर के दायरे में किसी भी व्यक्ति के आने-जाने पर रोक लगा दी गई है और रास्ते बंद कर दिए गए हैं।
ग़ौरतलब है कि अपने तय कार्यक्रम के मुताबिक मंगलवार को बेनज़ीर भुट्टो अपने समर्थकों के साथ लाहौर से इस्लामाबाद तक की एक रैली निकालने वाली थीं।
बेनज़ीर भुट्टो ने इस रैली की घोषणा करते हुए कहा था कि उनका विरोध प्रदर्शन पाकिस्तान में आपातकाल के ख़त्म होने तक चलता रहेगा।
पिछले सप्ताह भी अपनी एक रैली से ठीक पहले बेनज़ीर भुट्टो को नज़रबंद कर दिया गया था। हालांकि बाद में उनकी नज़रबंदी हटा ली गई थी।
सुरक्षा कड़ी
इस रैली के मद्देनज़र लाहौर में धारा 144 लागू कर दी गई है। लोगों को बिना अनुमति के एक साथ इकट्ठे होने या कोई सामुहिक कार्यक्रम करने से रोक दिया गया है।
शेख़ रशीद, रेलमंत्री-पाकिस्तान
बेनज़ीर अगर कुछ साबित करना चाहती हैं तो चुनाव का सामना करें, रैली और प्रदर्शनों के ज़रिए वो ख़ुद को विपक्ष के नेता के तौर पर स्थापित करने की कोशिश कर रही हैं. उन्हें लगता है कि सारे भ्रष्टाचार के आरोपों से उबरकर वो खुद को जनता के नेता के तौर पर स्थापित कर लेंगी. जनता को तय करने दें कि चोर कौन है और चौकीदार कौन
जानकारी के मुताबिक सोमवार की शाम बेनज़ीर भुट्टो लाहौर के कुछ इलाकों में जाकर रैली से पहले की तैयारी का जायज़ा लेकर अपने एक स्थानीय नेता के घर आईं। इसके तुरंत बाद उस घर के इर्द-गिर्द पुलिस और सुरक्षाबलों की तैनाती बढ़ा दी गई।
अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि बेनज़ीर को इस बारे में इत्तला दी गई कि उन्हें बाहर जाने से रोका जा रहा है. इस आदेश को उन्होंने स्वीकारने से इनकार कर दिया.
अधिकारियों से पूछा कि उनकी नज़रबंदी सुरक्षा के लिहाज से की गई है या उन्हें रैली करने से रोकने के लिए तो अधिकारियों ने कहा कि रैली करना सुरक्षित नहीं है इसलिए उन्हें बाहर निकलने से रोका जा रहा है।
इस बारे में लाहौर के पुलिस प्रमुख मलिक इक़बाल ने बताया कि बेनज़ीर भुट्टो के पास पुलिसकर्मी नज़रबंदी का आदेश लेकर गए थे लेकिन उन्होंने उसे लेने से इनकार कर दिया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि बेनज़ीर आदेश स्वीकार करें या ना करें, उस पर पूरी तरह अमल किया जाएगा।
लाहौर में बेनज़ीर भुट्टो सीनेटर लतीफ़ खोसा के यहाँ रूकी हुई हैं। पुलिस ने खोसा के घर के एक किलोमीटर के दायरे में गश्त बढ़ा दी है और किसी अनजान व्यक्ति वहाँ से आने-जाने की अनुमति नहीं है।
'इस्लामाबाद चलो'
बेनज़ीर की योजना मंगलवार को लाहौर से इस्लामाबाद तक मार्च करने की है। हालाँकि अधिकारियों ने प्रस्तावित मार्च पर प्रतिबंध लगा दिया है।
सुरक्षा
लाहौर में धारा 144 लागू कर दी गई है
पाकिस्तानी अधिकारियों ने इसे ग़ैरक़ानूनी बताया है। दूसरी ओर बेनज़ीर भुट्टो ने कहा है कि वो किसी भी सूरत में अपनी योजना नहीं बदलेंगी।
उन्होंने कहा कि उनकी गिरफ़्तारी की सूरत में भी मार्च निकाला जाएगा।
बेनज़ीर ने अपने समर्थकों से कहा है कि उनके रोके जाने की स्थिति में भी समर्थकों को रैली निकालनी चाहिए और अपना विरोध जारी रखना चाहिए।
पाकिस्तान सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा है कि बेनज़ीर भुट्टो को क़ानून तोड़ने की इजाज़त किसी क़ीमत पर नहीं दी जाएगी।
पाकिस्तान के रेलमंत्री शेख़ रशीद ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "बेनज़ीर अगर कुछ साबित करना चाहती हैं तो चुनाव का सामना करें, रैली और प्रदर्शनों के ज़रिए वो ख़ुद को विपक्ष के नेता के तौर पर स्थापित करने की कोशिश कर रही हैं। उन्हें लगता है कि सारे भ्रष्टाचार के आरोपों से उबरकर वो खुद को जनता के नेता के तौर पर स्थापित कर लेंगी। जनता को तय करने दें कि चोर कौन है और चौकीदार कौन।"
जब उनसे पूछा गया कि क्या रैली-प्रदर्शन करना ग़लत है और ऐसा नहीं करना चाहिए तो उन्होंने कहा, "बेशक रैली-प्रदर्शन कीजिए पर अगर कोई हादसा हो गया तो कौन ज़िम्मेदार होगा। अभी पिछली रैली में डेढ़ सौ लोग मारे जा चुके हैं।"
चिंताजनक स्थिति
बेनज़ीर भुट्टो
बेनज़ीर भुट्टो को लाहौर में नज़रबंद कर दिया गया है
उधर राष्ट्रकुल देशों के संगठन कॉमनवेल्थ ने सोमवार को पाकिस्तान में लागू आपातकाल पर चिंता जाहिर करते हुए पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि अगर आपातकाल नहीं हटाया गया तो पाकिस्तान को कॉमनवेल्थ की सदस्यता से निलंबित कर दिया जाएगा।
कॉमनवेल्थ के महासचिव डॉन मैकिनन ने कहा कि अब पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के पास दस दिनों का समय है।
अमरीका पाकिस्तानी राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ पर इस बात के लिए दबाव बनाए हुए है कि वो सत्ता साझीदारी समझौते में बेनज़ीर को शामिल कर लें ताकि इस्लामी चरमपंथियों के ख़िलाफ़ संघर्ष में तेज़ी लाई जा सके।
ग़ौरतलब है कि पिछले महीने स्वनिर्वासन के बाद जब बेनज़ीर भुट्टो पाकिस्तान वापस लौटी थीं, उसी दिन उनके काफ़िले में हुए बम धमाकों में 130 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई।
राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने रविवार को वादा किया था कि देश में संसदीय चुनाव नौ जनवरी से पहले करा लिए जाएंगे लेकिन बेनज़ीर इस बात पर अड़ी हैं कि सबसे पहले इमरजेंसी वापस ली जानी चाहिए।
उधर बेनज़ीर भुट्टो की पार्टी, पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की ओर से लाहौर से इस्लामाबाद के लिए प्रस्तावित रैली के मद्देनज़र लाहौर में कड़ी कर दी गई है।
बेनज़ीर इस वक्त लाहौर में अपनी पार्टी के एक नेता के घर पर रुकी हुई हैं। इस घर के इर्द-गिर्द सोमवार रात से ही पुलिस की बड़ी तादाद में तैनाती कर दी गई है।
इस घर के आसपास के लगभग एक किलोमीटर के दायरे में किसी भी व्यक्ति के आने-जाने पर रोक लगा दी गई है और रास्ते बंद कर दिए गए हैं।
ग़ौरतलब है कि अपने तय कार्यक्रम के मुताबिक मंगलवार को बेनज़ीर भुट्टो अपने समर्थकों के साथ लाहौर से इस्लामाबाद तक की एक रैली निकालने वाली थीं।
बेनज़ीर भुट्टो ने इस रैली की घोषणा करते हुए कहा था कि उनका विरोध प्रदर्शन पाकिस्तान में आपातकाल के ख़त्म होने तक चलता रहेगा।
पिछले सप्ताह भी अपनी एक रैली से ठीक पहले बेनज़ीर भुट्टो को नज़रबंद कर दिया गया था। हालांकि बाद में उनकी नज़रबंदी हटा ली गई थी।
सुरक्षा कड़ी
इस रैली के मद्देनज़र लाहौर में धारा 144 लागू कर दी गई है। लोगों को बिना अनुमति के एक साथ इकट्ठे होने या कोई सामुहिक कार्यक्रम करने से रोक दिया गया है।
शेख़ रशीद, रेलमंत्री-पाकिस्तान
बेनज़ीर अगर कुछ साबित करना चाहती हैं तो चुनाव का सामना करें, रैली और प्रदर्शनों के ज़रिए वो ख़ुद को विपक्ष के नेता के तौर पर स्थापित करने की कोशिश कर रही हैं. उन्हें लगता है कि सारे भ्रष्टाचार के आरोपों से उबरकर वो खुद को जनता के नेता के तौर पर स्थापित कर लेंगी. जनता को तय करने दें कि चोर कौन है और चौकीदार कौन
जानकारी के मुताबिक सोमवार की शाम बेनज़ीर भुट्टो लाहौर के कुछ इलाकों में जाकर रैली से पहले की तैयारी का जायज़ा लेकर अपने एक स्थानीय नेता के घर आईं। इसके तुरंत बाद उस घर के इर्द-गिर्द पुलिस और सुरक्षाबलों की तैनाती बढ़ा दी गई।
अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि बेनज़ीर को इस बारे में इत्तला दी गई कि उन्हें बाहर जाने से रोका जा रहा है. इस आदेश को उन्होंने स्वीकारने से इनकार कर दिया.
अधिकारियों से पूछा कि उनकी नज़रबंदी सुरक्षा के लिहाज से की गई है या उन्हें रैली करने से रोकने के लिए तो अधिकारियों ने कहा कि रैली करना सुरक्षित नहीं है इसलिए उन्हें बाहर निकलने से रोका जा रहा है।
इस बारे में लाहौर के पुलिस प्रमुख मलिक इक़बाल ने बताया कि बेनज़ीर भुट्टो के पास पुलिसकर्मी नज़रबंदी का आदेश लेकर गए थे लेकिन उन्होंने उसे लेने से इनकार कर दिया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि बेनज़ीर आदेश स्वीकार करें या ना करें, उस पर पूरी तरह अमल किया जाएगा।
लाहौर में बेनज़ीर भुट्टो सीनेटर लतीफ़ खोसा के यहाँ रूकी हुई हैं। पुलिस ने खोसा के घर के एक किलोमीटर के दायरे में गश्त बढ़ा दी है और किसी अनजान व्यक्ति वहाँ से आने-जाने की अनुमति नहीं है।
'इस्लामाबाद चलो'
बेनज़ीर की योजना मंगलवार को लाहौर से इस्लामाबाद तक मार्च करने की है। हालाँकि अधिकारियों ने प्रस्तावित मार्च पर प्रतिबंध लगा दिया है।
सुरक्षा
लाहौर में धारा 144 लागू कर दी गई है
पाकिस्तानी अधिकारियों ने इसे ग़ैरक़ानूनी बताया है। दूसरी ओर बेनज़ीर भुट्टो ने कहा है कि वो किसी भी सूरत में अपनी योजना नहीं बदलेंगी।
उन्होंने कहा कि उनकी गिरफ़्तारी की सूरत में भी मार्च निकाला जाएगा।
बेनज़ीर ने अपने समर्थकों से कहा है कि उनके रोके जाने की स्थिति में भी समर्थकों को रैली निकालनी चाहिए और अपना विरोध जारी रखना चाहिए।
पाकिस्तान सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा है कि बेनज़ीर भुट्टो को क़ानून तोड़ने की इजाज़त किसी क़ीमत पर नहीं दी जाएगी।
पाकिस्तान के रेलमंत्री शेख़ रशीद ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "बेनज़ीर अगर कुछ साबित करना चाहती हैं तो चुनाव का सामना करें, रैली और प्रदर्शनों के ज़रिए वो ख़ुद को विपक्ष के नेता के तौर पर स्थापित करने की कोशिश कर रही हैं। उन्हें लगता है कि सारे भ्रष्टाचार के आरोपों से उबरकर वो खुद को जनता के नेता के तौर पर स्थापित कर लेंगी। जनता को तय करने दें कि चोर कौन है और चौकीदार कौन।"
जब उनसे पूछा गया कि क्या रैली-प्रदर्शन करना ग़लत है और ऐसा नहीं करना चाहिए तो उन्होंने कहा, "बेशक रैली-प्रदर्शन कीजिए पर अगर कोई हादसा हो गया तो कौन ज़िम्मेदार होगा। अभी पिछली रैली में डेढ़ सौ लोग मारे जा चुके हैं।"
चिंताजनक स्थिति
बेनज़ीर भुट्टो
बेनज़ीर भुट्टो को लाहौर में नज़रबंद कर दिया गया है
उधर राष्ट्रकुल देशों के संगठन कॉमनवेल्थ ने सोमवार को पाकिस्तान में लागू आपातकाल पर चिंता जाहिर करते हुए पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि अगर आपातकाल नहीं हटाया गया तो पाकिस्तान को कॉमनवेल्थ की सदस्यता से निलंबित कर दिया जाएगा।
कॉमनवेल्थ के महासचिव डॉन मैकिनन ने कहा कि अब पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के पास दस दिनों का समय है।
अमरीका पाकिस्तानी राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ पर इस बात के लिए दबाव बनाए हुए है कि वो सत्ता साझीदारी समझौते में बेनज़ीर को शामिल कर लें ताकि इस्लामी चरमपंथियों के ख़िलाफ़ संघर्ष में तेज़ी लाई जा सके।
ग़ौरतलब है कि पिछले महीने स्वनिर्वासन के बाद जब बेनज़ीर भुट्टो पाकिस्तान वापस लौटी थीं, उसी दिन उनके काफ़िले में हुए बम धमाकों में 130 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई।
राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने रविवार को वादा किया था कि देश में संसदीय चुनाव नौ जनवरी से पहले करा लिए जाएंगे लेकिन बेनज़ीर इस बात पर अड़ी हैं कि सबसे पहले इमरजेंसी वापस ली जानी चाहिए।
Monday, November 12, 2007
पश्चिम बंगाल में विपक्ष का राज्यव्यापी बंद
नंदीग्राम में जारी हिंसा के विरोध में पश्चिम बंगाल में विपक्षी दलों के राज्यव्यापी बंद का राज्यभर में सामान्य जनजीवन पर असर पड़ रहा है।
सोमवार को राज्यभर में विपक्षी दलों की ओर से बंद का आहवान किया गया है। कुछ विपक्षी दलों ने 24 घंटे से ज़्यादा अवधि के बंद की आहवान भी किया है।
हालांकि राज्य सरकार ने कहा है कि बंद की स्थिति से निपटने के सारे पुख्ता इंतज़ाम कर लिए गए हैं और भारी तादाद में सुरक्षा बलों और पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है।
उधर राज्य में सत्तारूढ़ वाम गठबंधन की प्रमुख घटक, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी को अब अपने सहयोगियों के भी विरोध का सामना करना पड़ रहा है।
स्थिति यह है कि सीपीएम के सहयोगी दल सीपीआई, आरएसपी और फ़ॉरवर्ड ब्लॉक भी नंदीग्राम में बिगड़े हालातों का ठीकरा सीपीएम के सिर ही फोड़ रहे हैं।
सहयोगी दलों के कुछ मंत्रियों ने यहाँ तक कह दिया है कि वो मौजूदा सरकार के भागीदार नहीं रहना चाहते हैं।
अपनों का विरोध
सत्ताधारी गठबंधन के एक घटक, आरएसपी के विधायक और राज्य सरकार में लोकनिर्माण मंत्री क्षितिज गोस्वामी ने सीपीएम पर सीधा वार करते हुए कहा कि लोगों को दबाकर उनकी ज़मीन हथियाना मार्क्सवाद नहीं हो सकता है।
यह किसी भी तरह का वामपंथ या मार्क्सवाद नहीं है। यह सीधे तौर पर ज़मीन हासिल करने की कवायद है। ऐसी स्थिति में हमें वाममोर्चे की सरकार से बाहर हो जाना चाहिए
क्षितिज गोस्वामी, लोकनिर्माण मंत्री, राज्य सरकार
उन्होंने कहा, "यह किसी भी तरह का वामपंथ या मार्क्सवाद नहीं है। यह सीधे तौर पर ज़मीन हासिल करने की कवायद है। ऐसी स्थिति में हमें वाममोर्चे की सरकार से बाहर हो जाना चाहिए।"
नंदीग्राम के मुद्दे पर राज्य सरकार पहले से ही राज्य में कलाकारों, रंगकर्मियों, साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों, विद्यार्थियों आदि के विरोध का सामना कर रही है।
इस सिलसिले में रविवार को भी कोलकाता समेत कुछ स्थानों पर नंदीग्राम में बिगड़ते हालातों ने न निपट पाने के लिए राज्य सरकार के विरोध में प्रदर्शन किए गए। इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया गया है।
गहराता विवाद
उधर भारत के प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने भी नंदीग्राम की ताज़ा स्थिति को लेकर अपनी चिंता ज़ाहिर की है।
विरोध
राज्य सरकार को चौतरफ़ा विरोध का सामना करना पड़ रहा है
प्रधानमंत्री रविवार को रूस यात्रा पर निकल चुके हैं। उनके मीडिया सलाहकार संजय बारू ने रविवार को प्रधानमंत्री की ओर से एक बयान जारी किया है जिसमें नंदीग्राम की स्थिति पर गहरी चिंता जताई गई है।
इस बीच रविवार की रात सीआईपीएफ़ के जवान नंदीग्राम के क़रीब पहुँच गए हैं। उन्हें रात में मार्क्सवादी समर्थकों ने रोकने की कोशिश की।
माना जा रहा है कि सोमवार को सीआरपीएफ़ आगे बढ़कर नंदीग्राम में अपनी तैनाती पर होगी।
रविवार को तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी ने नंदीग्राम जाने की कोशिश की लेकिन वो सफल नहीं हो पाईं।
इसके बाद उन्होंने सोमवार से अनिश्चितकालीन राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया था। दूसरी ओर कांग्रेस ने भी सोमवार को 24 घंटे के बंद की और भाजपा ने अलग से 48 घंटे के बंद की घोषणा की है।
सोमवार को राज्यभर में विपक्षी दलों की ओर से बंद का आहवान किया गया है। कुछ विपक्षी दलों ने 24 घंटे से ज़्यादा अवधि के बंद की आहवान भी किया है।
हालांकि राज्य सरकार ने कहा है कि बंद की स्थिति से निपटने के सारे पुख्ता इंतज़ाम कर लिए गए हैं और भारी तादाद में सुरक्षा बलों और पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है।
उधर राज्य में सत्तारूढ़ वाम गठबंधन की प्रमुख घटक, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी को अब अपने सहयोगियों के भी विरोध का सामना करना पड़ रहा है।
स्थिति यह है कि सीपीएम के सहयोगी दल सीपीआई, आरएसपी और फ़ॉरवर्ड ब्लॉक भी नंदीग्राम में बिगड़े हालातों का ठीकरा सीपीएम के सिर ही फोड़ रहे हैं।
सहयोगी दलों के कुछ मंत्रियों ने यहाँ तक कह दिया है कि वो मौजूदा सरकार के भागीदार नहीं रहना चाहते हैं।
अपनों का विरोध
सत्ताधारी गठबंधन के एक घटक, आरएसपी के विधायक और राज्य सरकार में लोकनिर्माण मंत्री क्षितिज गोस्वामी ने सीपीएम पर सीधा वार करते हुए कहा कि लोगों को दबाकर उनकी ज़मीन हथियाना मार्क्सवाद नहीं हो सकता है।
यह किसी भी तरह का वामपंथ या मार्क्सवाद नहीं है। यह सीधे तौर पर ज़मीन हासिल करने की कवायद है। ऐसी स्थिति में हमें वाममोर्चे की सरकार से बाहर हो जाना चाहिए
क्षितिज गोस्वामी, लोकनिर्माण मंत्री, राज्य सरकार
उन्होंने कहा, "यह किसी भी तरह का वामपंथ या मार्क्सवाद नहीं है। यह सीधे तौर पर ज़मीन हासिल करने की कवायद है। ऐसी स्थिति में हमें वाममोर्चे की सरकार से बाहर हो जाना चाहिए।"
नंदीग्राम के मुद्दे पर राज्य सरकार पहले से ही राज्य में कलाकारों, रंगकर्मियों, साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों, विद्यार्थियों आदि के विरोध का सामना कर रही है।
इस सिलसिले में रविवार को भी कोलकाता समेत कुछ स्थानों पर नंदीग्राम में बिगड़ते हालातों ने न निपट पाने के लिए राज्य सरकार के विरोध में प्रदर्शन किए गए। इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया गया है।
गहराता विवाद
उधर भारत के प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने भी नंदीग्राम की ताज़ा स्थिति को लेकर अपनी चिंता ज़ाहिर की है।
विरोध
राज्य सरकार को चौतरफ़ा विरोध का सामना करना पड़ रहा है
प्रधानमंत्री रविवार को रूस यात्रा पर निकल चुके हैं। उनके मीडिया सलाहकार संजय बारू ने रविवार को प्रधानमंत्री की ओर से एक बयान जारी किया है जिसमें नंदीग्राम की स्थिति पर गहरी चिंता जताई गई है।
इस बीच रविवार की रात सीआईपीएफ़ के जवान नंदीग्राम के क़रीब पहुँच गए हैं। उन्हें रात में मार्क्सवादी समर्थकों ने रोकने की कोशिश की।
माना जा रहा है कि सोमवार को सीआरपीएफ़ आगे बढ़कर नंदीग्राम में अपनी तैनाती पर होगी।
रविवार को तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी ने नंदीग्राम जाने की कोशिश की लेकिन वो सफल नहीं हो पाईं।
इसके बाद उन्होंने सोमवार से अनिश्चितकालीन राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया था। दूसरी ओर कांग्रेस ने भी सोमवार को 24 घंटे के बंद की और भाजपा ने अलग से 48 घंटे के बंद की घोषणा की है।
Wednesday, November 7, 2007
पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव की आलोचना की
पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून की आलोचना करते हुए उनपर आरोप लगाया है कि वो देश के अंदरूनी मामलों में दखल दे रहे हैं।
पाकिस्तान की ओर से यह टिप्पणी संयुक्त राष्ट्र महासचिव के सोमवार को दिए हए उस बयान के बाद आई है जिसमें उन्होंने देश में आपातकाल लागू किए जाने पर चिंता व्यक्त की थी।
उधर नवाज़ शरीफ़ गुट की मुस्लिम लीग ने साफ़ कह दिया है कि उनकी पार्टी बुधवार को इस्लामाबाद में हो रही विपक्षी दलों के गठबंधन की बैठक में हिस्सा नहीं लेंगे।
नवाज़ गुट के शीर्ष नेता एहसन इक़बाल ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि बेनज़ीर भुट्टो जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ के साथ सत्ता में साझेदारी चाहती हैं और उनसे संपर्क में हैं। ऐसी सूरत में उनके साथ बातचीत का कोई मतलब नहीं निकलता।
माना जा रहा है कि नवाज़ शरीफ़ की पार्टी के इस ताज़ा रुख़ से बेनज़ीर भुट्टों की कोशिशों को झटका लगा है।
ग़ौरतलब है कि पिछले सप्ताह शनिवार को पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने देशभर में आपातकाल लागू कर दिया था। इसके बाद सैकड़ों की तादाद में विपक्षी दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार कर लिया गया था।
आपातकाल लागू किए जाने के फ़ैसले पर दुनिया के कई देशों ने खेद व्यक्त किया था और कहा था कि पाकिस्तान में लोकतंत्र की जल्द से जल्द स्थापना की जानी चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र चिंतित
संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के राजदूत मुनीर अकरम ने मंगलवार को महासचिव बान की मून से मुलाक़ात करके कहा है कि पाकिस्तान देश में लोकतंत्र और क़ानून व्यवस्था की स्थापना को लेकर प्रतिबद्ध है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव
मैं पाकिस्तान की ताज़ा स्थिति पर दोबारा अपनी गहरी चिंता और खेद व्यक्त करता हूँ. पाकिस्तान में जल्द से जल्द लोकतंत्र बहाल होना चाहिए
हालांकि इस बातचीत के बाद महासचिव ने पत्रकारों से पाकिस्तान में जारी गतिविधियों को लेकर दोबारा अफ़सोस ज़ाहिर किया।
उन्होंने पाकिस्तान की मौजूदा सरकार से कहा है कि वहाँ पर तत्काल लोकतंत्र बहाल किया जाए और सभी राजनीतिक क़ैदियों को रिहा किया जाए।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कहा, "मैं पाकिस्तान की ताज़ा स्थिति पर दोबारा अपनी गहरी चिंता और खेद व्यक्त करता हूँ। पाकिस्तान में जल्द से जल्द लोकतंत्र बहाल होना चाहिए।"
हालांकि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ओर से पाकिस्तान में आपातकाल लागू होने के बाद से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
यह सुरक्षा परिषद के बर्मा में लोकतंत्र बहाली को लेकर अपनाए गए कड़े रुख़ से एकदम उलट स्थिति है। बर्मा में सैनिक शासन के हाथों लोकतंत्र समर्थकों के आंदोलन के दमन को सुरक्षा परिषद ने आड़े हाथों लिया था।
पाकिस्तान की ओर से यह टिप्पणी संयुक्त राष्ट्र महासचिव के सोमवार को दिए हए उस बयान के बाद आई है जिसमें उन्होंने देश में आपातकाल लागू किए जाने पर चिंता व्यक्त की थी।
उधर नवाज़ शरीफ़ गुट की मुस्लिम लीग ने साफ़ कह दिया है कि उनकी पार्टी बुधवार को इस्लामाबाद में हो रही विपक्षी दलों के गठबंधन की बैठक में हिस्सा नहीं लेंगे।
नवाज़ गुट के शीर्ष नेता एहसन इक़बाल ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि बेनज़ीर भुट्टो जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ के साथ सत्ता में साझेदारी चाहती हैं और उनसे संपर्क में हैं। ऐसी सूरत में उनके साथ बातचीत का कोई मतलब नहीं निकलता।
माना जा रहा है कि नवाज़ शरीफ़ की पार्टी के इस ताज़ा रुख़ से बेनज़ीर भुट्टों की कोशिशों को झटका लगा है।
ग़ौरतलब है कि पिछले सप्ताह शनिवार को पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने देशभर में आपातकाल लागू कर दिया था। इसके बाद सैकड़ों की तादाद में विपक्षी दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार कर लिया गया था।
आपातकाल लागू किए जाने के फ़ैसले पर दुनिया के कई देशों ने खेद व्यक्त किया था और कहा था कि पाकिस्तान में लोकतंत्र की जल्द से जल्द स्थापना की जानी चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र चिंतित
संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के राजदूत मुनीर अकरम ने मंगलवार को महासचिव बान की मून से मुलाक़ात करके कहा है कि पाकिस्तान देश में लोकतंत्र और क़ानून व्यवस्था की स्थापना को लेकर प्रतिबद्ध है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव
मैं पाकिस्तान की ताज़ा स्थिति पर दोबारा अपनी गहरी चिंता और खेद व्यक्त करता हूँ. पाकिस्तान में जल्द से जल्द लोकतंत्र बहाल होना चाहिए
हालांकि इस बातचीत के बाद महासचिव ने पत्रकारों से पाकिस्तान में जारी गतिविधियों को लेकर दोबारा अफ़सोस ज़ाहिर किया।
उन्होंने पाकिस्तान की मौजूदा सरकार से कहा है कि वहाँ पर तत्काल लोकतंत्र बहाल किया जाए और सभी राजनीतिक क़ैदियों को रिहा किया जाए।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कहा, "मैं पाकिस्तान की ताज़ा स्थिति पर दोबारा अपनी गहरी चिंता और खेद व्यक्त करता हूँ। पाकिस्तान में जल्द से जल्द लोकतंत्र बहाल होना चाहिए।"
हालांकि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ओर से पाकिस्तान में आपातकाल लागू होने के बाद से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
यह सुरक्षा परिषद के बर्मा में लोकतंत्र बहाली को लेकर अपनाए गए कड़े रुख़ से एकदम उलट स्थिति है। बर्मा में सैनिक शासन के हाथों लोकतंत्र समर्थकों के आंदोलन के दमन को सुरक्षा परिषद ने आड़े हाथों लिया था।
Tuesday, November 6, 2007
बुश ने लोकतंत्र बहाल करने की अपील की
अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने पाकिस्तान में इमरजेंसी ख़त्म करने की अपील की है। उन्होंने राष्ट्रपति मुशर्रफ़ से वर्दी छोड़ने का अनुरोध भी किया है।
पाकिस्तान में इमरजेंसी लगाए जाने के तीन दिनों के बाद पहली बार अमरीकी राष्ट्रपति ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।
उन्होंने राष्ट्रपति मुशर्रफ़ से जल्द से जल्द पाकिस्तान में संसदीय चुनाव कराने और सेना प्रमुख का पद छोड़ने की अपील की।
चुनाव तय कार्यक्रम के मुताबिक
जॉर्ज बुश का कहना था, "हम उम्मीद करते हैं कि वहाँ जल्द से जल्द चुनाव होंगे और राष्ट्रपति सेना की वर्दी उतार देंगे।"
बुश ने विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस से कहा है कि वो टेलीफ़ोन पर उनके संदेश से राष्ट्रपति मुशर्रफ़ को अवगत करा दें।
दबाव
अमरीका ने पाकिस्तान के साथ इस हफ़्ते रक्षा सहयोग पर होने वाली बातचीत स्थगित कर दी है और कहा है कि वह पाकिस्तान को दी जाने वाली अरबों डॉलर की सहायता योजना की समीक्षा भी कर रहा है।
ब्रिटेन भी पाकिस्तान को सहायता जारी रखने पर पुनर्विचार कर रहा है। हॉलैंड उसे मिलने वाली सहायता रोकने वाला पहला देश बन गया है।
उधर यूरोपीय संघ भी आगे क्या नीति अपनाई जाए, इस पर विचार कर रहा है।
हालाँकि सोमवार को राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने इस बात के स्पष्ट संकेत दिए कि वे इतनी जल्दी सेना प्रमुख का पद नहीं छोड़ेंगे।
हम उम्मीद करते हैं कि वहाँ जल्द से जल्द चुनाव होंगे और राष्ट्रपति सेना की वर्दी उतार देंगे
जॉर्ज बुश
उन्होंने इस्लामाबाद में विदेशी राजनयिकों से कहा, "एक बार न्यायपालिका, कार्यपालिका और संसद को पटरी पर ले आया जाए तो मैं वर्दी छोड़ दूंगा।"
बुश के साथ-साथ अन्य देशों और संयुक्त राष्ट्र की ओर से भी मुशर्रफ़ पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने राष्ट्रपति मुशर्रफ़ से लोकतंत्र की बहाली और इमरजेंसी के दौरान हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करने की माँग की है।
ब्रिटेन ने भी लोकतांत्रिक सरकार बहाल करने की माँग दोहराई है।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शौकत अज़ीज़ ने संसदीय चुनाव कराने की बात तो कही है लेकिन कोई समयसीमा नहीं बताई।
दूसरी ओर पाकिस्तान के अटॉर्नी जनरल मलिक अब्दुल क़यूम ने कहा था कि चुनाव जनवरी के पूर्वार्ध में कराए जाएंगे।
इससे पहले पाकिस्तान के सूचना उपमंत्री तारिक़ अज़ीम ने इस तरह की अटकलों का खंडन किया है कि संसदीय चुनाव तय कार्यक्रम के अनुसार ही कराए जाएँगे।
इमरजेंसी लागू करने के ख़िलाफ़ वकीलों ने आज पाकिस्तान में विरोध प्रदर्शन किया और पुलिस ने उन पर लाठी चार्ज किया।
अब तक सैंकड़ों लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है जिनमें विपक्षी दलों ने नेता और मानवाधिकार कार्यकर्ता शामिल हैं।
पाकिस्तान में इमरजेंसी लगाए जाने के तीन दिनों के बाद पहली बार अमरीकी राष्ट्रपति ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।
उन्होंने राष्ट्रपति मुशर्रफ़ से जल्द से जल्द पाकिस्तान में संसदीय चुनाव कराने और सेना प्रमुख का पद छोड़ने की अपील की।
चुनाव तय कार्यक्रम के मुताबिक
जॉर्ज बुश का कहना था, "हम उम्मीद करते हैं कि वहाँ जल्द से जल्द चुनाव होंगे और राष्ट्रपति सेना की वर्दी उतार देंगे।"
बुश ने विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस से कहा है कि वो टेलीफ़ोन पर उनके संदेश से राष्ट्रपति मुशर्रफ़ को अवगत करा दें।
दबाव
अमरीका ने पाकिस्तान के साथ इस हफ़्ते रक्षा सहयोग पर होने वाली बातचीत स्थगित कर दी है और कहा है कि वह पाकिस्तान को दी जाने वाली अरबों डॉलर की सहायता योजना की समीक्षा भी कर रहा है।
ब्रिटेन भी पाकिस्तान को सहायता जारी रखने पर पुनर्विचार कर रहा है। हॉलैंड उसे मिलने वाली सहायता रोकने वाला पहला देश बन गया है।
उधर यूरोपीय संघ भी आगे क्या नीति अपनाई जाए, इस पर विचार कर रहा है।
हालाँकि सोमवार को राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने इस बात के स्पष्ट संकेत दिए कि वे इतनी जल्दी सेना प्रमुख का पद नहीं छोड़ेंगे।
हम उम्मीद करते हैं कि वहाँ जल्द से जल्द चुनाव होंगे और राष्ट्रपति सेना की वर्दी उतार देंगे
जॉर्ज बुश
उन्होंने इस्लामाबाद में विदेशी राजनयिकों से कहा, "एक बार न्यायपालिका, कार्यपालिका और संसद को पटरी पर ले आया जाए तो मैं वर्दी छोड़ दूंगा।"
बुश के साथ-साथ अन्य देशों और संयुक्त राष्ट्र की ओर से भी मुशर्रफ़ पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने राष्ट्रपति मुशर्रफ़ से लोकतंत्र की बहाली और इमरजेंसी के दौरान हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करने की माँग की है।
ब्रिटेन ने भी लोकतांत्रिक सरकार बहाल करने की माँग दोहराई है।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शौकत अज़ीज़ ने संसदीय चुनाव कराने की बात तो कही है लेकिन कोई समयसीमा नहीं बताई।
दूसरी ओर पाकिस्तान के अटॉर्नी जनरल मलिक अब्दुल क़यूम ने कहा था कि चुनाव जनवरी के पूर्वार्ध में कराए जाएंगे।
इससे पहले पाकिस्तान के सूचना उपमंत्री तारिक़ अज़ीम ने इस तरह की अटकलों का खंडन किया है कि संसदीय चुनाव तय कार्यक्रम के अनुसार ही कराए जाएँगे।
इमरजेंसी लागू करने के ख़िलाफ़ वकीलों ने आज पाकिस्तान में विरोध प्रदर्शन किया और पुलिस ने उन पर लाठी चार्ज किया।
अब तक सैंकड़ों लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है जिनमें विपक्षी दलों ने नेता और मानवाधिकार कार्यकर्ता शामिल हैं।
Saturday, November 3, 2007
सौ पाकिस्तानी सैनिक अभी भी बंधक
पाकिस्तान के स्वात में चरमपंथियों ने बंधक बनाए गए 48 पाकिस्तानी सैनिकों को शुक्रवार को रिहा कर दिया लेकिन दावा किया है कि सौ से अधिक सैनिक अभी भी बंधक हैं।
इस बीच स्थानीय जिरगा ने चरमपंथियों के साथ संघर्षविराम के लिए बातचीत की कोशिशें शुरु की हैं। चरमपंथियों ने इस बातचीत के लिए कुछ शर्तें रखीं हैं।
इस बीच स्वात में कई जगह से छिटपुट संघर्ष और गोलीबारी की ख़बरें मिली हैं।
उल्लेखनीय है कि स्वात घाटी में पिछले कुछ दिनों से पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और चमरपंथियों के बीच भीषण संघर्ष चल रहा है।
संघर्षविराम की कोशिशें
बुधवार को चरमपंथियों ने 48 बंधक सैनिकों को मीडिया के सामने पेश किया।
जवानों के सामने कोई क़ौमी उद्देश्य नहीं है और वे सिर्फ़ अमरीका के लिए लड़ रहे हैं। किसी भी फ़ौज के लिए अमरीका को ख़ुश करने के लिए या उसकी धमकी के चलते लंबे समय तक लड़ना संभव नहीं है
जनरल हमीद गुल, पूर्व प्रमुख आईएसआई
लेकिन चरमपंथियों ने दावा किया है कि उनके पास अभी भी कोई सौ सैनिक बंधक हैं।
चरमपंथी गुट के प्रवक्ता मज़ीद ने बीबीसी के संवाददाता रिफ़तुल्ला औरकज़ई से हुई बातचीत में बताया कि इनमें से 40 सैनिकों को एक अस्पताल से बंधक बनाया गया जबकि 20 को पुलिस स्टेशन से।
उधर स्वात के क़बायली जिरगा ने संघर्षविराम के लिए चरमपंथियों के साथ बातचीत की पहल की है।
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि मौलाना फ़ज़लुल्लाह और जिरगा के नेताओं के बीच किसी अज्ञात स्थान पर मुलाक़ात हुई है।
उनका कहना है कि मौलाना फ़ज़लुल्लाह ने संघर्षविराम के लिए कुछ शर्तें रखी हैं। इसमें सेना को इलाक़े से हटाना और उनके ख़िलाफ़ दर्ज सभी मामलों को वापस लेना शामिल है।
हालांकि ये शर्तें अधिकारिक रुप से घोषित नहीं की गई हैं और अभी इस पर सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
सेना का मनोबल
पाकिस्तानी सैनिक
पाकिस्तानी सैनिकों के मनोबल को लेकर सवाल उठने लगे हैं
बीबीसी के संवाददाता रिफ़तुल्ला औरकज़ई ने बुधवार को रिहा हुए कुछ सैनिकों से बात भी की।
इन सैनिकों का कहना है कि अब वे 'अपने मुसलमान भाइयों से नहीं लड़ेंगे जो शरीयत के लिए संघर्ष कर रहे हैं'।
हालांकि इससे पहले भी यह सवाल उठता रहा है कि सैनिक इतनी आसानी से बंधक कैसे बनाए जा रहे हैं और चरमपंथियों के ख़िलाफ़ लड़ाई लंबी क्यों खिंच रही है।
लेकिन सैनिकों के इस बयान से प्रतीत होता है कि सेना का मनोबल कम हो रहा है।
पाकिस्तान ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई के पूर्व प्रमुख जनरल हमीद गुल ने माना कि सैनिकों में लड़ने का जज़्बा कम हो रहा है। बीबीसी से हुई बातचीत में उन्होंने कहा, "सैनिक अब नहीं चाहते कि वे अपने ही लोगों के ख़िलाफ़ लड़ें।"
उनका कहना है, "जवानों के सामने कोई क़ौमी उद्देश्य नहीं है और वे सिर्फ़ अमरीका के लिए लड़ रहे हैं। किसी भी फ़ौज के लिए अमरीका को ख़ुश करने के लिए या उसकी धमकी के चलते लंबे समय तक लड़ना संभव नहीं है।"
मनोबल का उदाहरण देते हुए उन्होंने कारगिल युद्ध का उदाहरण दिया कि थोड़े से पाकिस्तानी सैनिकों ने पूरी भारतीय सेना को रोक लिया था।
हमीद गुल ने सलाह दी कि सेना को राजनीति से अलग होकर काम करना चाहिए।
इस बीच स्थानीय जिरगा ने चरमपंथियों के साथ संघर्षविराम के लिए बातचीत की कोशिशें शुरु की हैं। चरमपंथियों ने इस बातचीत के लिए कुछ शर्तें रखीं हैं।
इस बीच स्वात में कई जगह से छिटपुट संघर्ष और गोलीबारी की ख़बरें मिली हैं।
उल्लेखनीय है कि स्वात घाटी में पिछले कुछ दिनों से पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और चमरपंथियों के बीच भीषण संघर्ष चल रहा है।
संघर्षविराम की कोशिशें
बुधवार को चरमपंथियों ने 48 बंधक सैनिकों को मीडिया के सामने पेश किया।
जवानों के सामने कोई क़ौमी उद्देश्य नहीं है और वे सिर्फ़ अमरीका के लिए लड़ रहे हैं। किसी भी फ़ौज के लिए अमरीका को ख़ुश करने के लिए या उसकी धमकी के चलते लंबे समय तक लड़ना संभव नहीं है
जनरल हमीद गुल, पूर्व प्रमुख आईएसआई
लेकिन चरमपंथियों ने दावा किया है कि उनके पास अभी भी कोई सौ सैनिक बंधक हैं।
चरमपंथी गुट के प्रवक्ता मज़ीद ने बीबीसी के संवाददाता रिफ़तुल्ला औरकज़ई से हुई बातचीत में बताया कि इनमें से 40 सैनिकों को एक अस्पताल से बंधक बनाया गया जबकि 20 को पुलिस स्टेशन से।
उधर स्वात के क़बायली जिरगा ने संघर्षविराम के लिए चरमपंथियों के साथ बातचीत की पहल की है।
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि मौलाना फ़ज़लुल्लाह और जिरगा के नेताओं के बीच किसी अज्ञात स्थान पर मुलाक़ात हुई है।
उनका कहना है कि मौलाना फ़ज़लुल्लाह ने संघर्षविराम के लिए कुछ शर्तें रखी हैं। इसमें सेना को इलाक़े से हटाना और उनके ख़िलाफ़ दर्ज सभी मामलों को वापस लेना शामिल है।
हालांकि ये शर्तें अधिकारिक रुप से घोषित नहीं की गई हैं और अभी इस पर सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
सेना का मनोबल
पाकिस्तानी सैनिक
पाकिस्तानी सैनिकों के मनोबल को लेकर सवाल उठने लगे हैं
बीबीसी के संवाददाता रिफ़तुल्ला औरकज़ई ने बुधवार को रिहा हुए कुछ सैनिकों से बात भी की।
इन सैनिकों का कहना है कि अब वे 'अपने मुसलमान भाइयों से नहीं लड़ेंगे जो शरीयत के लिए संघर्ष कर रहे हैं'।
हालांकि इससे पहले भी यह सवाल उठता रहा है कि सैनिक इतनी आसानी से बंधक कैसे बनाए जा रहे हैं और चरमपंथियों के ख़िलाफ़ लड़ाई लंबी क्यों खिंच रही है।
लेकिन सैनिकों के इस बयान से प्रतीत होता है कि सेना का मनोबल कम हो रहा है।
पाकिस्तान ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई के पूर्व प्रमुख जनरल हमीद गुल ने माना कि सैनिकों में लड़ने का जज़्बा कम हो रहा है। बीबीसी से हुई बातचीत में उन्होंने कहा, "सैनिक अब नहीं चाहते कि वे अपने ही लोगों के ख़िलाफ़ लड़ें।"
उनका कहना है, "जवानों के सामने कोई क़ौमी उद्देश्य नहीं है और वे सिर्फ़ अमरीका के लिए लड़ रहे हैं। किसी भी फ़ौज के लिए अमरीका को ख़ुश करने के लिए या उसकी धमकी के चलते लंबे समय तक लड़ना संभव नहीं है।"
मनोबल का उदाहरण देते हुए उन्होंने कारगिल युद्ध का उदाहरण दिया कि थोड़े से पाकिस्तानी सैनिकों ने पूरी भारतीय सेना को रोक लिया था।
हमीद गुल ने सलाह दी कि सेना को राजनीति से अलग होकर काम करना चाहिए।
Friday, November 2, 2007
स्वात में 40 सैनिकों को बंधक बनाने का दावा
पाकिस्तान के सूबा सरहद के स्वात घाटी में चरमपंथियों और सुरक्षाबलों के बीच घमासान जारी है।
गुरुवार को सेना की ओर से 70 चरमपंथियों को मारने का दावा करने के बाद चरमपंथियों की ओर से दावा किया गया है कि उन्होंने 40 सैनिकों को बंदी बना लिया है।
चरमपंथियों ने कुछ सुरक्षाकर्मियों को मारने की भी बात कही है।
गुरुवार की रात भर स्वात के विभिन्न इलाक़ों में गोलीबारी की आवाज़ें आती रहीं हैं लेकिन किसी बड़ी कार्रवाई की ख़बरें नहीं हैं।
दोनों ओर से यह कार्रवाई दो दिन पहले हुए अनाधिकारिक संघर्ष विराम के बाद हुई है।
कार्रवाई और दावे
गुरुवार को सेना के गनशिप हैलीकॉप्टर ने चरमपंथी ठिकानों पर भारी गोलीबारी की थी।
इसके अलावा भी कई जगह कार्रवाई की गई है।
पाकिस्तान सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल वहीद अरशद ने बीबीसी को बताया कि गुरुवार की कार्रवाई में कम से कम 70 चरमपंथी मारे गए हैं।
कट्टरपंथी इस्लामी नेता मौलाना फ़ज़लुल्लाह ने इसके बाद स्वात में चल रहे अवैधानिक एफ़एम स्टेशन पर एक वक्तव्य भी दिया।
मौलाना फ़ज़लुल्ला के प्रवक्ता मौलाना सिराज़ुद्दीन ने बीबीसी से हुई बातचीत में कहा कि उन्होंने सेना के 40 से अधिक जवानों को बंधक बना लिया है।
हालांकि सेना की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
स्वात के मिंगोरा में मौजूद बीबीसी के संवाददाता रिफ़तुल्ला औरकज़ई का कहना है कि चरमपंथियों की गतिविधियाँ लगातार बढ़ रही हैं और अब लगता है कि वे मिंगोरा में सेना के ठिकाने के क़रीब पहुँच रहे हैं।
गुरुवार को सेना की ओर से 70 चरमपंथियों को मारने का दावा करने के बाद चरमपंथियों की ओर से दावा किया गया है कि उन्होंने 40 सैनिकों को बंदी बना लिया है।
चरमपंथियों ने कुछ सुरक्षाकर्मियों को मारने की भी बात कही है।
गुरुवार की रात भर स्वात के विभिन्न इलाक़ों में गोलीबारी की आवाज़ें आती रहीं हैं लेकिन किसी बड़ी कार्रवाई की ख़बरें नहीं हैं।
दोनों ओर से यह कार्रवाई दो दिन पहले हुए अनाधिकारिक संघर्ष विराम के बाद हुई है।
कार्रवाई और दावे
गुरुवार को सेना के गनशिप हैलीकॉप्टर ने चरमपंथी ठिकानों पर भारी गोलीबारी की थी।
इसके अलावा भी कई जगह कार्रवाई की गई है।
पाकिस्तान सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल वहीद अरशद ने बीबीसी को बताया कि गुरुवार की कार्रवाई में कम से कम 70 चरमपंथी मारे गए हैं।
कट्टरपंथी इस्लामी नेता मौलाना फ़ज़लुल्लाह ने इसके बाद स्वात में चल रहे अवैधानिक एफ़एम स्टेशन पर एक वक्तव्य भी दिया।
मौलाना फ़ज़लुल्ला के प्रवक्ता मौलाना सिराज़ुद्दीन ने बीबीसी से हुई बातचीत में कहा कि उन्होंने सेना के 40 से अधिक जवानों को बंधक बना लिया है।
हालांकि सेना की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
स्वात के मिंगोरा में मौजूद बीबीसी के संवाददाता रिफ़तुल्ला औरकज़ई का कहना है कि चरमपंथियों की गतिविधियाँ लगातार बढ़ रही हैं और अब लगता है कि वे मिंगोरा में सेना के ठिकाने के क़रीब पहुँच रहे हैं।
Thursday, November 1, 2007
पाकिस्तान एयरफ़ोर्स की बस पर आत्मघाती हमला
पाकिस्तान पुलिस का कहना है कि पंजाब प्रांत में एयरफ़ोर्स की एक बस में हुए आत्मघाती हमले में कम से कम पाँच लोग मारे गए हैं।
हमले में क़रीब 40 लोग घायल हुए हैं।
इस बस में एयरफ़ोर्स के अधिकारी सवार थे। समाचार एजेंसियों का कहना है कि बस में ज़्यादातर प्रशिक्षु फ़्लाइंग ऑफ़िसर थे।
पुलिस के अनुसार घटना पूर्वी पंजाब के सरगोधा में हुई है।
समाचार एजेंसी एपी के अनुसार पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल वहीद अरशद ने बताया है कि हमलावर मोटरसाइकिल पर था और वह आकर बस से टकरा गया।
उन्होंने बताया कि एयरफ़ोर्स अधिकारी काम पर जा रहे थे। उन्होंने इसे 'आतंकवाद की घटना' बताया है।
सेना के प्रवक्ता का कहना है कि घटना की जाँच की जा रही है।
पिछले दिनों पाकिस्तानी सेना और पुलिस और उनके ठिकानों पर लगातार चरमपंथी हमले होते रहे हैं।
दो दिन पहले रावलपिंडी के एक पुलिसनाके पर एक आत्मघाती हमले में कम से कम छह लोग मारे गए थे, जिनमें तीन पुलिस अधिकारी थे।
गत चार सिंतबर को रावलपिंडी में ही रक्षा विभाग के कर्मचारियों को ले जा रही एक बस पर हुए आत्मघाती हमले में कम से कम 25 लोग मारे गए थे और 66 लोग घायल हुए थे ।
सुरक्षा एजेंसियों ने इन हमलों के लिए तालेबान या अल-क़ायदा को दोषी ठेराया है।
हमले में क़रीब 40 लोग घायल हुए हैं।
इस बस में एयरफ़ोर्स के अधिकारी सवार थे। समाचार एजेंसियों का कहना है कि बस में ज़्यादातर प्रशिक्षु फ़्लाइंग ऑफ़िसर थे।
पुलिस के अनुसार घटना पूर्वी पंजाब के सरगोधा में हुई है।
समाचार एजेंसी एपी के अनुसार पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल वहीद अरशद ने बताया है कि हमलावर मोटरसाइकिल पर था और वह आकर बस से टकरा गया।
उन्होंने बताया कि एयरफ़ोर्स अधिकारी काम पर जा रहे थे। उन्होंने इसे 'आतंकवाद की घटना' बताया है।
सेना के प्रवक्ता का कहना है कि घटना की जाँच की जा रही है।
पिछले दिनों पाकिस्तानी सेना और पुलिस और उनके ठिकानों पर लगातार चरमपंथी हमले होते रहे हैं।
दो दिन पहले रावलपिंडी के एक पुलिसनाके पर एक आत्मघाती हमले में कम से कम छह लोग मारे गए थे, जिनमें तीन पुलिस अधिकारी थे।
गत चार सिंतबर को रावलपिंडी में ही रक्षा विभाग के कर्मचारियों को ले जा रही एक बस पर हुए आत्मघाती हमले में कम से कम 25 लोग मारे गए थे और 66 लोग घायल हुए थे ।
सुरक्षा एजेंसियों ने इन हमलों के लिए तालेबान या अल-क़ायदा को दोषी ठेराया है।
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