Monday, December 31, 2007

पाकिस्तान में चुनाव आयोग की बैठक

पाकिस्तान के चुनाव आयोग की आज एक महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो की मौत के बाद चुनावों के भविष्य का फ़ैसला किया जाना है।

वैसे चुनावों की तय तारीख़ आठ जनवरी है लेकिन आत्मघाती हमले में बेनज़ीर की मौत के बाद चुनावों को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है।

हालांकि बेनज़ीर की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी ने चुनावों में हिस्सा लेने का ऐलान कर दिया है।

दूसरी तरफ़ बदले हुए हालात में पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग ( नवाज़) ने भी चुनावों में हिस्सा लेने की बात कही है।

अब तक पीएमएल चुनावों का बहिष्कार कर रहा था। रविवार को बीबीसी के साथ एक बातचीत में पार्टी के प्रवक्ता सिद्दीक उल फ़ारुक ने कहा कि उनकी पार्टी चुनावों में हिस्सा लेने के लिए पूरी तरह तैयार है।

इसके अलावा राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के समर्थन वाली पाकिस्तान मुस्लिम लीग ( क्यू) ने पहले से ही चुनावों को तय समय पर करवाने की हिमायत करता आ रहा है।

इस्लामाबाद से बीबीसी संवाददाता शाहज़ेब जिलानी का कहना है कि जब तीन बड़ी पार्टियां चुनावों में हिस्सा लेने के लिए तैयार हैं तो फिर ऐसे में चुनाव आयोग के समक्ष चुनावों का टालने का कोई बड़ा कारण नहीं दिखता है।

हालांकि पर्यवेक्षकों का कहना है कि जिस तरह से बेनज़ीर की दिन दहाड़े हत्या की गई है उससे पाकिस्तान के अन्य नेताओं की सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल उठ खड़े हुए हैं।

इस बात पर भी बहस हो रही है कि असुरक्षित माहौल में चुनावों को कैसे अंजाम दिया जाएगा।
चुनाव आयोग अपनी बैठक में इन्हीं सब विषयों पर चर्चा करके अपना फ़ैसला सुना सकता है।

Saturday, December 29, 2007

'बेनज़ीर की हत्या के लिए अल क़ायदा ज़िम्मेदार'

पाकिस्तान सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो की हत्या के लिए अल क़ायदा और तालेबान को ज़िम्मेदार ठहराया है। सरकार का कहना है कि उसके पास बातचीत के रिकॉर्ड हैं जिनसे स्पष्ट होता है कि हमला अल क़ायदा ने करवाए।

दूसरी ओर ब्रिटिश और अमरीकी ख़ुफ़िया अधिकारियों का कहना है कि वो अभी इस पर कुछ भी कहने के लिए तैयार नहीं हैं।

इस बीच बेनज़ीर की हत्या किन कारणों से हुई, इसको लेकर नई-नई बातें सामने आ रही हैं।

पाकिस्तान में हिंसा, 30 से ज़्यादा मरे

ग़ौरतलब है कि गुरुवार को रावलपिंडी में एक रैली के बाद जब बेनज़ीर अपनी गाड़ी की छत खोल कर समर्थकों का अभिवादन कर रही थीं, तभी एक आत्मघाती हमलावर ने गोलियाँ चलाईं और फिर ख़ुद को विस्फोट से उड़ा लिया। हमले में बीस और लोग मारे गए थे।

इस बात के पक्के सबूत हैं कि अल क़ायदा, इसका नेटवर्क और इससे जुड़े दस्ते पाकिस्तान को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं
इक़बाल चीमा

बेनज़ीर की हत्या के बाद उपजे हालात में आठ जनवरी को प्रस्तावित संसदीय चुनाव होंगे या नहीं इस पर राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के एक प्रवक्ता ने कहा है कि अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।

बेनज़ीर के शव को उनके पिता ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो की क़ब्र के पास ही दफ़नाया गया है।

'अलक क़ायदा का हाथ'
पाकिस्तानी गृह मंत्रालय का कहना है कि ख़ुफ़िया एजेंसियों के पास टेलीफ़ोन पर हुई बातचीत के रिकॉर्ड हैं जिनसे पता चलता है कि 'अल क़ायदा के नेता' बैतुल्ला महसूद ने बेनज़ीर पर हमले के आदेश दिए थे।

रैली के दौरान आत्मघाती हमले में बेनज़ीर मारी गईं

बीबीसी संवाददाता फ़्रैंक गार्डनर का कहना है कि अभी सच्चाई बता पाना मुश्किल है।

बैतुल्ला महसूद अशांत दक्षिणी वज़ीरिस्तान का कबायली नेता है।

गृह मंत्रालय के प्रवक्ता इक़बाल चीमा ने पत्रकारों के बताया कि बातचीत के रिकॉर्ड में कथित तौर पर बैतुल्ला एक अन्य चरमपंथी से बात कर रहा है और बेनज़ीर की हत्या के बाद उसे बधाई दे रहा है।
उनका कहना था, "इस बात के पक्के सबूत हैं कि अल क़ायदा, इसका नेटवर्क और इससे जुड़े दस्ते पाकिस्तान को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं।"

'झूठ का पुलिंदा'

पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि बेनज़ीर न तो गोलियों का शिकार हुई और ना ही विस्फोट के छर्रे उन्हें लगे थे।
अधिकारियों के मुताबिक बंदूकधारी हमलावर से बचने के क्रम में उनका सिर कार की छत से टकराया था जिससे उनकी मौत हो गई।

बेनज़ीर की हत्या के बाद पाकिस्तान में व्यापक हिंसा हुई है

इससे पहले पाकिस्तानी गृह मंत्रालय के प्रवक्ता इक़बाल चीमा ने कहा था कि बेनज़ीर की मौत विस्फोट के छर्रों से हुई।

दूसरी ओर बेनज़ीर के सुरक्षा सलाहकार रहमान मलिक का कहना है कि बेनज़ीर को गले और सीने में गोली लगी थी। वहीं, बेनज़ीर का इलाज़ करने वाले एक सर्जन ने कहा कि उनकी मौत बम के छर्रों से हुई होगी।

पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के वरिष्ठ नेता फ़ारूक़ नाइक का कहना है कि हत्या के कारणों पर सरकार का स्पष्टीकरण झूठ का पुलिंदा है।

उन्होंने समाचार एजेंसी एएफ़पी से कहा, "बेनज़ीर को दो गोलियाँ लगी। एक उनके पेट में और दूसरा सिर पर।"

Friday, December 28, 2007

तनाव के बीच बेनज़ीर को दफ़नाने की तैयारी

पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो के पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए लरकाना लाया गया है।

गुरुवार शाम रावलपिंडी में एक चुनावी रैली को संबोधित करने के बाद एक बंदूकधारी ने बेनज़ीर भुट्टो पर पहले गोली चलाई गई और फिर आत्मघाती धमाका कर दिया जिसमें उनकी मौत हो गई।

हालाँकि अभी तक ये स्पष्ट नहीं हो सका है कि उनकी मौत गोली लगने से हुई या बम विस्फोट से।

इस हमले में बीस और लोग मारे गए हैं।

राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने तीन दिनों के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है।

बेनज़ीर नहीं रहीं

पाकिस्तान के गृह मंत्रालय के प्रवक्ता जावेद इक़बाल चीमा ने बताया है कि हत्या के पीछे किसका हाथ था, इसकी जाँच के लिए दो समितियाँ गठित की गई हैं।

बेनज़ीर की हत्या के बाद पाकिस्तान के कई हिस्सों में हिंसा हुई जिसमें दस लोगों की मौत हो गई। सिंध प्रांत में हालात सबसे ज़्यादा तनावपूर्ण है।
हत्याकांड के विरोध में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी, पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) और जमाते इस्लामी ने शुक्रवार को आम हड़ताल का आह्वान किया है।

बेनज़ीर के पार्थिव शरीर को लरकाना लाया गया है जहाँ आज उन्हें दफ़नाया जाएगा।

आतंकवाद का ख़ात्मा करेंगे: मुशर्रफ़

बेनज़ीर की हत्या की कड़ी निंदा

लरकाना पूर्व प्रधानमंत्री के पार्थिव शरीर को सी-वन-30 विमान से लाया गया है। इस विमान में उनके पति आसिफ़ अली जरदारी और पार्टी के कई अन्य लोग साथ आए हैं।

स्थानीय समयानुसार आज 11 बजे उन्हें दफ़नाया जाएगा। बेनज़ीर के शव को उनके पिता ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो की क़ब्र के पास ही दफ़नाया जाएगा।

जाँच समितियाँ
गृह मंत्रालय के प्रवक्ता इक़बाल चीमा ने बताया है कि हत्या की चाँज के लिए गठित दो जाँच समितियों ने अपना काम शुरू कर दिया है।
आत्मघाती धमाके में कई लोग मारे गए

उन्होंने इस बात से इनकार किया कि हत्यास्थल के आस-पास सबूतों के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ हुई है।
चीमा का कहना था कि इस नृशंस हत्या के पीछे चरमपंथियों का हाथ हो सकता है जो पाकिस्तान के कबायली और अन्य हिस्सों मे आत्मघाती विस्फोट करते रहे हैं।
उन्होंने बताया कि रैली के दौरान बेनज़ीर की सुरक्षा के पुख़्ता इंतज़ाम किए गए थे लेकिन जाने के समय जब वो अपनी कार का दरवाजा खोल कर अपने समर्थकों की ओर मुख़ातिब हुईं, तभी वो हमले के शिकार बन गईं।

इक़बाल चीमा का कहना था कि बेनज़ीर की गाड़ी बुलेट और बम प्रूफ़ थी। उन्होंने कहा कि बेनज़ीर की मौत गोलियाँ लगने से नहीं हुई बल्कि आत्मघाती विस्फोट के छर्रों से हुईं।
हत्या की निंदा

पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने बेनज़ीर भुट्टो की हत्या की निंदा की है और लोगों से शांत रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि 'आतंकवादियों' के मंसूबों को कामयाब नहीं होने दिया जाएगा।
राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने तीन दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है

राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने बेनज़ीर भुट्टो के परिवारवालों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने तीन दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है। अभी तक किसी ने भी बेनज़ीर भुट्टो पर हमले की ज़िम्मेदारी नहीं ली है।

बेनज़ीर भुट्टो की हत्या की कड़ी निंदा हो रही है। अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने इसे कायरतापूर्ण कार्रवाई बताई है। भारत ने भी हत्या की निंदा की है।
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने भी बेनज़ीर भुट्टो की हत्या की आलोचना की है और कहा है कि उनकी पार्टी आठ जनवरी को होने वाले चुनाव का बहिष्कार करेगी।
पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की नेता बेनज़ीर भुट्टो दो बार देश की प्रधानमंत्री रहीं और वे जनवरी में होने वाले चुनाव के मद्देनज़र चुनावी सभा कर रही थी। पाकिस्तान लौटने के बाद उन पर ये दूसरा आत्मघाती हमला था।

Thursday, December 27, 2007

उड़ीसा में फिर हिंसा भड़की, कर्फ़्यू जारी

भारी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद उड़ीसा के कुछ इलाक़ों में बुधवार को फिर कुछ और गिरजाघरों को निशाना बनाया गया और हिंसक घटनाएँ हुईं।

इनमें लगभग 11 लोग घायल हुए हैं।

भुवनेश्वर से पत्रकार संदीप साहू का कहना है कि उड़ीसा के कंधमाल में कर्फ़्यू के बावजूद हिंसा हुई।

सूखानंदी में एक गिरिजाघर के दरवाज़े को आग लगा दी गई, साथ ही कलिंगा में कुछ घरों को निशाना बनाया गया।

प्रशासन का कहना है कि संवेदनशील इलाक़ों में सीआरपीएफ़ और रैपिड एक्शन फोर्स को तैनात कर दिया गया है।

जिले के क‌र्फ़्यूग्रस्त बालीगुडा, धारिंगीबाड़ी, ब्राह्मणीगांव और फुलबनी कस्बों में स्थिति अब भी तनावपूर्ण बनी हुई है।

इन इलाक़ों में बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी और गरिजाघरों, कुछ घरों और ग़ैरसरकारी संगठनों के दफ़्तरों में तोड़फोड़ और आगजनी की गई थी।

क्रिसमस पर हिंसा

ग़ौरतलब है कि उड़ीसा में क्रिसमस के दिन विश्व हिंदू परिषद् के आह्वान पर किए गए बंद के दौरान छह गिरजाघरों को निशाना बनाया गया था और झड़पों में एक युवक की मौत हो गई थी।

पुलिस ने बताया कि विहिप समर्थक लक्ष्मणानंद सरस्वती पर सोमवार को हुए हमले का विरोध कर रहे थे।
लक्ष्मणानंद राज्य में कथित रूप से धर्म परिवर्तन का विरोध करने वालों नेताओं में प्रमुख हैं।
इस मामले में 13 लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया है।
उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है।

Wednesday, December 26, 2007

उड़ीसा में कई गिरजाघरों पर हमले

उड़ीसा में क्रिसमस के दिन विश्व हिंदू परिषद् के आह्वान पर किए गए बंद के दौरान छह गिरजाघरों को निशाना बनाया गया और झड़पों में एक युवक की मौत हो गई है।

भुवनेश्वर से पत्रकार संदीप साहू का कहना है कि हिंसा में कम से कम 24 लोग घायल भी हुए हैं।

हिंसा के बारे में और जानकारी देते हुए राजस्व डिवीजन आयुक्त सत्यव्रत साहू ने कहा ' राज्य के चार ज़िलों फुलबनी, बालीगुडा, दारिंगीबाड़ी और ब्राह्मणीगांव में हिंसा को देखते हुए कर्फ्यू लगा दिया गया है।'

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि बाराखंभा में एक व्यक्ति की मौत हुई है।

अधिकारी का कहना था कि स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में है।
राज्य के कंधामल ज़िले में छह चर्चों को निशाना बनाया गया जबकि अपुष्ट ख़बरों के अनुसार कई और स्थानों पर भी चर्चों को निशाना बनाया गया है।

मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है।

पुलिस ने बताया कि विहिप समर्थक लक्ष्मणानंद सरस्वती पर हुए हमले का विरोध कर रहे थे।

लक्ष्मणानंद राज्य में कथित रूप से धर्म परिवर्तन का विरोध करने वालों नेताओं में प्रमुख हैं।
सोमवार से ही दारिंगबाड़ी इलाके में उस समय तनाव शुरु हुआ जब कुछ अज्ञात लोगों ने राज्य के स्टील एवं खान मंत्री पद्मनाभ बेहरा के दो घरों पर हमला किया।
इससे पहले लक्ष्मणानंद सरस्वती पर भी हमला किया गया था जिससे विहिप समर्थक ख़ासे नाराज़ थे।
लक्ष्मणानंद पर हमले के मामले में 13 लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया है।

Tuesday, December 25, 2007

ईसा के जन्मस्थल पर विशेष समारोह

दुनिया भर में ईसा मसीह का जन्मदिन क्रिसमस जोरशोर से मनाया जा रहा है।

मध्य पूर्व में ईसा मसीह के जन्मस्थल बेथलेहम में लाखों लोग सोमवार की रात जमा हुए और उन्होंने विशेष प्रार्थना सभा में हिस्सा लिया।

बेथलेहम में मध्यरात्रि होते ही यानी 25 दिसंबर के शुरू होने के साथ ही पूरे रीति रिवाज़ के साथ चर्च ऑफ़ नेटिविटी में विशेष प्रार्थना सभा आयोजित की गई।

स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि इस साल बेथलेहम आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या पिछले वर्ष की तुलना में दोगुनी हो गई है।

रोम में पोप बेनेडिक्ट ने सेंट पीटर्स में आयोजित विशेष प्रार्थना सभा में हिस्सा लिया। इसे देखने के लिए हज़ारों लोग जमा थे।

जो लोग इस स्थान तक नहीं पहुँच पा रहे थे, उन्होंने इस दृश्य को बड़े वीडियो स्क्रीन पर इसे देखा।

पोप मंगलवार को अपना पारंपरिक क्रिसमस संदेश देंगे।

भारत में क्रिसमस

भारत के विभिन्न हिस्सों में क्रिसमस जोरशोर से मनाया जा रहा है।

भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने देशवासियों को क्रिसमस की बधाई दी है।

प्रधानमंत्री ने अपने बधाई संदेश में कहा कि यह त्यौहार ईसा मसीह के भाईचारे, दया और क्षमाशीलता के संदेश का स्मरण कराता है।
भारत की राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने भी भारत के लोगों को क्रिसमस की बधाई दी है।

राष्ट्रपति ने अपने संदेश में कहा, " ईसा मसीह के प्यार, दयालुता और क्षमा भावना के संदेश आज भी सबके लिए प्रासंगिक है।"

उन्होंने उम्मीद जताई कि क्रिसमस लोगों के दिलों में खुशी, उत्साह और उम्मीद भर देगा।

Monday, December 24, 2007

मोदी को नेता चुने जाने के लिए बैठक

गुजरात भारतीय जनता पार्टी के नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक सोमवार को गांधीनगर में हो रही है जिसमें नरेंद्र मोदी को नेता चुना जाएगा।
इसके बाद उनके तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ़ हो जाएगा।

भाजपा नेता अरुण जेटली ने बताया कि गांधीनगर में सोमवार को पार्टी के नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक होगी और विधायक दल के नेता का औपचारिक रूप से चुनाव किया जाएगा।

विधायक दल की इस बैठक में पार्टी के केंद्रीय पर्यवेक्षक के रूप में वेंकैया नायडू और ख़ुद जेटली भी मौजूद रहेंगे।
उन्होंने कहा कि यह चुनाव नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लड़ा गया है इसलिए स्वाभाविक है कि उन्हें नेता चुना जाएगा।
बोर्ड की सहमति

दूसरी ओर गुजरात विधानसभा चुनावों में पूर्ण बहुमत हासिल करने के बाद भाजपा संसदीय बोर्ड ने मुख्यमंत्री पद के लिए नरेंद्र मोदी के नाम पर मुहर लगा दी है।
ये पार्टी को दोबारा सत्ता में लाने के लिए पॉज़िटिव वोट है। अनेक तरह के प्रचार, तरकीबों और शब्द-प्रयोगों के इस्तेमाल के बावजूद गुजरात की जनता ने नकारात्मकता को नकार दिया है

नरेंद्र मोदी

जेटली ने कहा कि संसदीय बोर्ड की बैठक में गुजरात चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन पर संतोष व्यक्त किया गया है।
ऐसी संभावना जताई जा रही है कि नरेंद्र मोदी 27 दिसंबर को शपथ ग्रहण करेंगे।
भाजपा ने 182 सदस्यीय विधानसभा में 117 सीटें जीती हैं जो उसके पिछले प्रदर्शन से सिर्फ़ दस कम है। कांग्रेस के खाते में 62 सीटें गई हैं।
कांग्रेस पार्टी ने हार स्वीकार कर ली है लेकिन ये भी कहा है कि इससे गोधरा कांड के बाद हुए दंगों में मोदी के ऊपर लगे 'काले धब्बे' कम नहीं हुए हैं।
नतीजे आने के बाद संवाददाताओं को संबोधित करते हुए नरेंद्र मोदी ने कहा, " ये पार्टी को दोबारा सत्ता में लाने के लिए पॉज़िटिव वोट है। अनेक तरह के प्रचार, तरकीबों और शब्द-प्रयोगों के इस्तेमाल के बावजूद गुजरात की जनता ने नकारात्मकता को नकार दिया है।"

Saturday, December 22, 2007

यूपी में दो 'संदिग्ध चरमपंथी' गिरफ़्तार

उत्तरप्रदेश पुलिस ने दावा किया है कि उन्होंने बाराबंकी ज़िले में दो 'संदिग्ध चरमपंथियों' को गिरफ़्तार किया है।
पुलिस ने बताया कि इन संदिग्धों के पास से बड़ी मात्रा में विस्फोटक भी बरामद किया गया है।
पुलिस का आकलन है कि इन 'संदिग्ध चरमपंथियों' का ताल्लुक पिछले महीने 23 नवंबर को उत्तरप्रदेश की तीन अदालतों में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों से हो सकता है।

गत माह 23 नवंबर को उत्तरप्रदेश के वाराणसी, फ़ैज़ाबाद और लखनऊ की अदालतों में सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे जिसमें कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई थी।
इनमें से सबसे ज़्यादा लोग वाराणसी में मारे गए थे। वहाँ नौ लोग इन हमलों का शिकार हुए थे।
पहली बार अदालतों को निशाना बनाकर किए गए इन सिलसिलेवार धमाकों में 60 से भी ज़्यादा लोग घायल हो गए थे।
हमले के तार

इस बारे में उत्तरप्रदेश पुलिस के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (क़ानून व्यवस्था) ब्रजलाल ने बीबीसी को बताया कि गिरफ़्तार 'संदिग्ध चरमपंथियों' के तार इन हमलों से जुड़े होने के संकेत मिले हैं पर अभी पूछताछ जारी है।

ब्रजलाल ने बताया कि इन दोनों संदिग्धों को बाराबंकी ज़िले के बस स्टैंड से गिरफ़्तार किया गया है। इन संदिग्धों के नाम तारिक और ख़ालिद बताए गए हैं।
उन्होंने बताया कि शुरुआती पूछताछ के बाद पता चला है कि ये दोनों 'संदिग्ध चरमपंथी' एक चरमपंथी संगठन 'हरक़त उल जेहाद-इस्लामी' (हूजी) के सदस्य हैं।
हालांकि बाक़ी विवरण देने से उन्होंने इनकार कर दिया और कहा है कि इस बारे में राज्य पुलिस की आधिकारिक तौर पर होने वाली घोषणा का इंतज़ार किया जाना चाहिए।

Friday, December 21, 2007

मैं ओपनिंग के लिए भी तैयार हूँ: द्रविड़

भारत के पूर्व कप्तान राहुल द्रविड़ का कहना है कि ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ 26 दिसंबर से शुरू होने वाली टेस्ट सिरीज़ में उन्हें सलामी बल्लेबाज की भूमिका निभाने में कोई परेशानी नहीं है।

पत्रकारों से बातचीत में द्रविड़ ने कहा, ''उछाल भरे विकेटों पर मुझे ब्रेट ली और अन्य ऑस्ट्रेलियाई तेज़ गेंदबाज़ आक्रमण का सामना करने में कोई दिक्कत नहीं है।''
उनका कहना था कि अगर टेस्ट मैचों में मुझे पारी की शुरुआत करने के लिए कहा जाता है तो मुझे खुशी होगी।

उल्लेखनीय है कि द्रविड़ इसके पहले भी भारत के लिए कई बार पारी शुरूआत कर चुके हैं।

द्रविड़ ने कहा,'' मैं सौंपी गई किसी भी जिम्मेदारी को निभाने में सहज महसूस करता हूँ। मैं अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की कोशिश करता हूँ।''
उनका कहना था,'' यहाँ गेंद काफ़ी उछाल लेती है, लेकिन अगर आप यहाँ के उछाल से तालमेल बिठा लेते हैं और विकेट पर टिक जाते हैं तो फिर आपको स्ट्रोक्स खेलने का मौक़ा मिलता है।''
और अभ्यास मैच

उन्होंने माना कि ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ टेस्ट सिरीज़ से पहले केवल एक अभ्यास मैच ही काफ़ी नहीं है।
''उछाल भरे विकेटों पर मुझे ब्रेट ली और अन्य ऑस्ट्रेलियाई तेज़ गेंदबाज़ आक्रमण का सामना करने में कोई परेशानी नहीं है

राहुल द्रविड़

उनका कहना था,'' बेहतर होता कि हम यहाँ एक से ज्यादा अभ्यास मैच खेलते। पिछले दौरे पर हमने दो अभ्यास मैच खेले थे।''

विक्टोरिया के ख़िलाफ़ गुरुवार को शुरू हुए तीन दिवसीय अभ्यास मैच में राहुल द्रविड़ को वसीम जाफ़र के साथ भारत की पारी शुरू करने के लिए उतारा गया था।

माना जा रहा है कि 26 दिसंबर से शुरू हो रहे टेस्ट मैच में उनसे भारतीय पारी की शुरुआत करने को कहा जा सकता है।
राहुल द्रविड़ ने भारत के सलामी बल्लेबाज के रूप में आठ टेस्ट मैच खेले हैं और इसमें उन्होंने 33।55 की औसत से 369 रन बनाए हैं।

पाकिस्तान के ख़िलाफ़ पारी की शुरुआत करते हुए उन्होंने दो शतक बनाए हैं।
द्रविड़ ने सन् 2003-04 के भारत के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर चार टेस्ट मैचों में 600 रन बनाए थे और इसमें एडिलेड टेस्ट में उनका दोहरा शतक भी शामिल है।

Thursday, December 20, 2007

प्रधानमंत्री ने भाजपा की आपत्तियाँ ख़ारिज कीं

भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भाजपा मुख्यमंत्रियों की ओर से लगाए गए आरोपों को पूरी तरह ख़ारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने 11वीं पंचवर्षीय योजना में अल्पसंख्यकों को विशेष रियायतों पर आपत्ति जताई थी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि लोगों को जाति और धर्म के नाम पर बांटने की कोई कोशिश नहीं की गई है।

उनका कहना था कि 11 वीं योजना में समाज के अत्यंत गरीब और वंचित तबके पर ध्यान केंद्रित किया गया है। योजना में लोगों को जाति, रंग, लिंग या धर्म के आधार पर बांटने की कोई कोशिश नहीं की गई है

मनमोहन सिंह, भारतीय प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय विकास परिषद की बैठक में 11वीं योजना के दस्तावेज़ को मंजूरी दिए जाने से पहले कहा कि इस योजना का लक्ष्य वंचित लोगों को आर्थिक विकास प्रक्रिया में भागीदार बनाना है।
उनका कहना था कि योजना में लोगों को जाति, रंग, लिंग या धर्म के आधार पर बांटने की कोई कोशिश नहीं की गई है।
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह बात सही है कि कुछ सामाजिक समूह विकास के लिहाज से बदतर स्थिति में हैं, इस योजना में ऐसे लोगों पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
भाजपा की आपत्ति

इसके पहले गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11वीं पंचवर्षीय योजना में अल्पसंख्यकों को दी जाने वाली विशेष रियायतों की समीक्षा की मांग की थी।
नया 15 सूत्रीय कार्यक्रम विभिन्न योजनाओं के लाभान्वितों के लिए उनके अल्पसंख्यक दर्जे के हिसाब से बनाया गया है। देश के सामाजिक ढाँचे को बनाए रखने के लिए इसकी समीक्षा ज़रूरी है

नरेंद्र मोदी, गुजरात के मुख्यमंत्री

दिल्ली में योजना की स्वीकृति के लिए आयोजित राष्ट्रीय विकास परिषद की बैठक में उन्होंने कहा कि विभिन्न कार्यक्रमों के तहत अल्पसंख्यकों के लिए 15 फ़ीसदी बजट के प्रावधान की समीक्षा होनी चाहिए।

मोदी ने कहा, '' नया 15 सूत्रीय कार्यक्रम विभिन्न योजनाओं के लाभान्वितों के लिए उनके अल्पसंख्यक दर्जे के हिसाब से बनाया गया है। देश के सामाजिक ढाँचे को बनाए रखने के लिए इसकी समीक्षा ज़रूरी है।''

उन्होंने कहा, '' अल्पसंख्यकों पर पैसे की बारिश और लाभान्वितों के बीच भेदभाव से भारत को विकास के पथ पर ले जाने में मदद नहीं मिलेगी।''

उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार का पूरा ध्यान अपने ‘वोट बैंक’ पर है।

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज चौहान ने भी केंद्र की इस 15 सूत्रीय योजना का विरोध किया।

उनका कहना था,'' हम चाहते हैं कि रियायतों का लाभ समाज के सभी तबकों को मिलना चाहिए। सभी को न्याय मिले, लेकिन तुष्टीकरण के आधार पर इस तरह के प्रावधान का हम विरोध करते हैं।''

Wednesday, December 19, 2007

कराची एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त, अनेक हताहत

पाकिस्तान के सिंध प्रांत में कराची से लाहौर जा रही कराची एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त हो गई है। अनेक लोगों के मारे जाने की आशंका है जबकि कम से कम 100 घायल लोगों को क़रीब के अस्पतालों में पहुँचाया गया है।

पुलिस के मुताबिक कम से कम छह बोगियाँ पटरी से उतर गई हैं और एक दूसरे पर चढ़ गई हैं। छह अन्य एक तालाब में गिर गई हैं।

प्रांरंभिक जानकारी के मुताबिक पुलिस इसे एक हादसा बता रही है।

घटनास्थल पर एक पुलिस अधिकारी ने कहा है कि 50 शव ट्रेन से निकाले गए हैं लेकिन इसकी आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हो पाई है।


ट्रेन मंगलवार रात लगभग नौ बजे कराची से रवाना हुई और जब बुधवार तड़के दो बजे ये दुर्घटना हुई तब कराची एक्सप्रेस की 16 बोगियाँ खचाखच भरी हुई थी

एक रेलवे अधिकारी

उस इलाक़े में पाकिस्तान रेलवे के चीफ़ कंट्रोलर तनवीर अहमद ने निसार खोखर को बताया कि जब दुर्घटना हुई तब रेलगाड़ी सामान्य से ज़्यादा तेज़ गति से चल रही थी।

केवल चार बोगियाँ बचीं

नौशेरा फ़िरोज़ के स्टेशन मास्टर मुश्ताक़ अहमद ने बीबीसी को बताया, "'ट्रेन लगभग नौ बजे कराची से रवाना हुई और जब बुधवार तड़के दो बजे ये दुर्घटना हुई तब कराची एक्सप्रेस की 16 बोगियाँ खचाखच भरी हुई थी।"

नौशेरा फ़िरोज़ ज़िले में महराबपुर के पास हुई इस दुर्घटना में केवल चार बोगियाँ पटरी पर रह गई हैं। मेहराबपुर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी अब्दुल हलीम कालड़ू का कहना था, "छह बोगियाँ एक दूसरे पर चढ़ गईं जबकि छह अन्य घटनास्थल के पास एक तालाब में जा गिरी हैं।"

अंधेरा होने के कारण पुलिस और प्रशासनिक कर्मचारियों को राहत कार्य करने में ख़ासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।


छह बोगियाँ एक दूसरे पर चढ़ गईं जबकि छह अन्य घटनास्थल के पास एक तालाब में जा गिरी हैं

महराबपुर पुलिस अधिकारी

रेलवे अधिकारी तनवीर अहमद ने बीबीसी को बताया, "पूरे इलाक़े के अस्पतालों में आपातस्थिति की घोषणा की गई है। घटनास्थल पर 30 एंबुलेंस पास के इलाक़ों से और 30 ही कराची से पहुँचाई गई हैं।"

घटनास्थल पर ट्रेन की बोगियों को काटने का काम शुरु हो गया है ताकि अंदर फँसे हुए यात्रियों को बाहर निकाला जाए और घायल लोगों की मदद की जा सके।

Tuesday, December 18, 2007

फ़लस्तीनी प्रशासन को उम्मीद से ज़्यादा मदद

पेरिस में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में दानदाताओं ने फ़लस्तीन राष्ट्र के गठन के लिए 290 अरब रूपए से ज़्यादा की सहायता देने की पेशकश की है।

फ़लस्तीन को 68 देशों और संगठनों की ओर से मिल रही यह 7।4 अरब अमरीकी डॉलर की राशि उनकी ओर से राष्ट्र के गठन के लिए की गई अपील से कहीं अधिक है।

फ़लस्तीनी प्रतिनिधिमंडल ने तीन साल की एक 5।6 अरब डॉलर की परियोजना का प्रस्ताव रखा था ताकि फ़लस्तीनी प्रशासन को बरबादी से बचाया जा सके।

इस घोषणा से पहले फ़लस्तीनी प्रधानमंत्री सलाम फ़याद ने कहा कि उन्हें इतनी ज़्यादा रक़म मिलने की कोई उम्मीद नहीं थी।

फ्रांस की राजधानी पेरिस में इस सिलसिले में अंतरराष्ट्रीय दानदाताओं का एक सम्मेलन आयोजित किया गया था जहाँ दानदाताओं ने सोमवार को अपनी-अपनी मदद का वादा किया।

फ्रांस के विदेशमंत्री बर्नर्ड कुशनैर ने इस सम्मेलन में फ़लस्तीनी प्रशासन के लिए दी जाने वाली राशि की जानकारी सार्वजनिक करते हुए बताया कि दानदाताओं ने 7।6 अरब अमरीकी डॉलर देने का वादा किया है।

सहायता की ज़रूरत

अमरीकी विदेशमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चेताया था कि उनकी ओर से मदद ही फ़लस्तीनी प्रशासन को बरबाद होने से बचा सकती थी।

फ़लस्तीन राष्ट्र के गठन के लिए मदद की यह पेशकश ऐसे समय में आई है जब मध्य-पूर्व क्षेत्र में जारी अस्थिरता और संकट को ख़त्म करने के लिए बातचीत का सिलसिला एकबार फिर शुरू हुआ है।

हालांकि बीबीसी संवाददाता के मुताबिक इस बात को लेकर उनके मन में संदेह ही है कि इस मदद से उनके रोज़मर्रा के जीवन स्तर में कुछ सुधार आएगा।

कई लोगों का मानना है कि पैसे की कमी असली समस्या नहीं है बल्कि लोगों और संसाधनों के आवागमन पर लगी रोक और इसराइल का कब्ज़ा असली समस्या हैं।

हालांकि इतनी बड़ी घोषणा के बावजूद ग़ज़ा पट्टी में रहने वाले फ़लस्तीनियों के बीच कोई उत्साह नहीं है।
वहाँ हमास पार्टी का शासन है और उसके समर्थकों का मानना है कि पेरिस में इकट्ठा हुई रक़म का ज़्यादातर हिस्सा पश्चिमी तट में लगेगा जहाँ महमूद अब्बास की फ़तह पार्टी का शासन है।

Monday, December 17, 2007

मीणा समुदाय के नेता ने इस्तीफ़ा दिया

राजस्थान में गूज़रों के आरक्षण के मुद्दे पर गठित आयोग की रिपोर्ट के ठीक पहले मीणा समुदाय के नेता और राज्य सरकार के मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने इस्तीफ़ा दे दिया है।
मीणा का इस्तीफ़ा उनकी पत्नी गोलमा देवी ने कल देर रात मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को सौंपा।

किरोड़ी लाल मीणा राज्य सरकार में खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री हैं।

गूजरों की आरक्षण संबंधी मांग और उसके कारण हुई हिंसा के बाद राज्य सरकार ने जस्टिस चोपड़ा की अध्यक्षता में एक आयोग का गठन किया था जिसकी रिपोर्ट आज राज्य सरकार को दी जानी है।
ख़बरें हैं कि आयोग ने गूजरों की आरक्षण की मांग को लेकर ऐसी सिफ़ारिशें की हैं जो मीणा समुदाय को पसंद नहीं हैं।
संभवत इसी कारण मीणा समुदाय के नेता किरोड़ी लाल मीणा ने इस्तीफ़ा दिया है।
उल्लेखनीय है कि राजस्थान में गूजर समुदाय अनुसूचित जनजाति का दर्ज़ा दिए जाने की मांग कर रहा है जिसका मीणा समुदाय यह कहते हुए विरोध कर रहे हैं कि इससे उनको मिलने वाली सुविधाएं कम हो जाएंगी।

इस बीच दोनों समुदायों ने एक दूसरे को हद में रहकर बात करने की सलाह दी है औऱ चेतावनी दी है।
इसे देखते हुए राज्य के 14 ज़िलों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है क्योंकि मई महीने में इसी तरह की गर्मागर्मी के बाद दोनों समुदायों के बीच हिंसा हुई थी और 20 से अधिक लोग मारे भी गए थे।

Saturday, December 15, 2007

उत्सर्जन में कटौती पर सहमति लेकिन

जलवायु परिवर्तन पर बाली सम्मेलन में ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती के दस्तावेज़ पर आरंभिक सहमति बन गई है लेकिन लक्ष्य तय नहीं हो सके।

सम्मेलन के अंतिम चरण में हिस्सा लेने के लिए संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून बाली पहुँच रहे हैं।

अभी ये तय नहीं है कि विकासशील देश मौजूदा स्वरुप में समझौते के प्रारूप को स्वीकार करेंगे या नहीं।

समझौते के प्रारुप पत्र से यह भी स्पष्ट नहीं है कि कार्बन डाईऑक्साइड के उत्सर्जन में कमी लाने में विकासशील देशों की कितनी भागीदारी होगी।

इस दस्तावेज़ के आधार पर वर्ष 2009 में भी बातचीत जारी रहेगी।

अमरीका ने चेतावनी दी थी कि अगर प्रदूषण फैलाने वाली ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी लाने के लिए कोई बाध्यकारी लक्ष्य निर्धारित किया गया तो वह इसे स्वीकार नहीं करेगा।

दूसरी ओर यूरोपीय संघ जलवायु परिवर्तन से उपजी चुनौतियों से निपटने के लिए इसे ज़रूरी बता रहा था।

इस मतभेद को दूर करने के लिए कोई बीच का रास्ता निकाला गया है।

समझौते का जो मसौदा है उस पर अभी वार्ता में हिस्सा ले रहे सभी पक्षों की सहमति की अंतिम मुहर लगनी बाक़ी है मगर लग ये रहा है कि ये सब को कुछ न कुछ देकर ख़ुश करने वाला एक दस्तावेज़ बना है।

धुँधली तस्वीर

यूरोपीय संघ काफ़ी बढ़चढ़कर कह रहा था कि विकसित देशों को ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन कम करना चाहिए और पहले के दस्तावेज़ में उसे प्रमुखता से जगह मिली थी मगर इस दस्तावेज़ में वो हिस्सा महज़ फ़ुटनोट बनकर रह गया है यानी मुख्य दस्तावेज़ के पीछे जोड़ी गई टिप्पणियाँ और आँकड़े।

साथ ही वर्ष 2050 तक उत्सर्जन को आधा करने की जो बात थी वो भी इस दस्तावेज़ से बाहर कर दी गई है।

अमरीका के लिए चिंता का विषय था ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन कम करने की अनिवार्य शर्तें, इस बारे में दस्तावेज़ की भाषा अस्पष्ट सी रखी गई दिखती है।

इसमें विकसित देशों से ज़रूरी प्रतिबद्धताओं और क़दमों को राष्ट्रीय स्तर पर समर्थन देने की बात कही गई है,

अमरीका हमेशा से ही ऐसी भाषा का पक्षधर रहा है। मगर साथ ही इसमें ये भी कहा गया है कि ये समर्थन अनिवार्य शर्तों के रूप में भी हो सकता है।

इस भाषा के साथ अमरीका में आने वाले नए प्रशासन को वर्ष 2009 के अंत तक वैधानिक रूप से अनिवार्य सीमा तय करने की छूट मिल सकती है।

मगर पर्यावरण से जुड़े संगठनों और अन्य प्रतिनिधियों ने दस्तावेज़ की इस भाषा को कमज़ोर बताते हुए इसे गँवाया हुआ एक अवसर कहा है।

Friday, December 14, 2007

मतदाताओं को लुभाने की आख़िरी कोशिश

गुजरात में विधानसभा चुनाव के दूसरे और आख़िरी चरण के लिए प्रचार का आज आख़िरी दिन है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।

दूसरे चरण में मध्य और उत्तरी गुजरात की 95 सीटों के लिए 16 दिसंबर को वोट डाले जाएंगे।

मतों की गिनती 23 दिसंबर को होगी।

प्रचार के आख़िरी दिन शुक्रवार को भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार घोषित किए गए लाल कृष्ण आडवाणी जनसभाओं को संबोधित करने वाले हैं।

दूसरी ओर कांग्रेस के चुनाव प्रचार की कमान राहुल गांधी संभालेंगे जिनका दाहोद में 'रोड शो' निर्धारित है।

अंतिम चरण के लिए चुनाव प्रचार में मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी कांग्रेस पर प्रहार करने का कोई मौका नहीं चूक रहे हैं।

13 दिसंबर को संसद पर हमले की सातवीं बरसी पर उन्होंने एक बार फ़िर इस मामले में दोषी पाए गए अफ़जल गुरु को फांसी देने में हो रही देरी का मुद्दा उठाया।

आदिवासी पहलू

दूसरे चरण में जिन सीटों के लिए मतदान होने हैं उनमें से कई सीटों पर आदिवासी मतों की अहम भूमिका होगी।

राहुल गांधी भीड़ जुटाने में कामयाब हो रहे हैं

कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में ग़रीबों को मुफ़्त टेलीविज़न, अनाज, मिट्टी तेल, कपड़े बांटने की घोषणा कर इस मतदाता वर्ग को रिझाने की कोशिश की है।

पंजहमल और दाहोद का दौरा करने के बाद बीबीसी संवाददाता अविनाश दत्त का कहना है कि यहाँ की 13 सीटों पर कांग्रेस के पास खोने के लिए कुछ भी नहीं है क्योंकि इन सभी पर पिछले चुनाव में भाजपा ने परचम लहराया था।

उनका कहना है कि कांग्रेस प्रदर्शन में सुधार की उम्मीद तो कर रही है लेकिन उसकी आशा का अकेला सहारा भाजपा में बगावत है।

गोधरा कांड और उसके बाद हुए दंगों से संबंधित मामलों में लगभग सात सौ लोगों पर मुक़दमा चल रहा है और ये सभी भाजपा के समर्थक माने जाते थे लेकिन मुक़दमा शुरू होने के बाद सरकार की उपेक्षा से नाराज़ चल रहे हैं।

Thursday, December 13, 2007

राजधानी एक्सप्रेस में धमाका, पाँच की मौत

भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम से दिल्ली आ रही राजधानी एक्सप्रेस में गुरुवार तड़के हुए विस्फोट में कम से कम पाँच लोग मारे गए हैं और 13 अन्य घायल हुए हैं।

ट्रेन में यह विस्फोट उत्तरी असम के चोंगाजन स्टेशन के पास रात के क़रीब दो बजे हुआ है।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि धमाका पटरी पर हुआ जिससे ट्रेन के एक डब्बे को क्षति पहुँची।
हालांकि विस्फोट के कारण ट्रेन पटरी से नहीं उतरी।

रेलवे प्रवक्ता त्रिकाल राभा ने बताया कि पाँच लोगों की मौत हो गई थी और 13 लोग घायल हैं। कई अन्य यात्रियों को छोटी मोटी चोटें आईं हैं।

अभी तक यह साफ़ नहीं हुआ है कि इस विस्फोट के पीछे किसका हाथ है।
असम में कई चरमपंथी संगठन सक्रिय हैं लेकिन अभी तक किसी ने इसकी ज़िम्मेदारी नहीं ली है।
इससे पहले सोमवार को दिल्ली जा रही एक अन्य यात्री ट्रेन ब्रह्मपुत्र मेल न्यूजलपाईगुड़ी के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और कुछ अन्य लोग घायल हुए थे।
इस ट्रेन में भारतीय सेना के अनेक जवान छुट्टियां बिताने के लिए अपने घर जा रहे थे।

Wednesday, December 12, 2007

'पहले चरण में भाजपा को नुक़सान'

गुजरात विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान के बाद किए विभिन्न टेलीविज़न चैनलों के सर्वेक्षणों यानी एक्ज़िट पोल का कहना है कि पहले चरण में भारतीय जनता पार्टी को नुक़सान होने जा रहा है।

सर्वेक्षणों का मानना है कि राज्य में भाजपा और कांग्रेस के बीच नज़दीकी चुनावी मुक़ाबला होता नज़र आ रहा है।

टीवी चैनल एनडीटीवी के एक्ज़िट पोल में भाजपा को सौराष्ट्र इलाक़े में 13 सीटों का नुक़सान दिखाया गया है।

एनडीटीवी के सर्वे के मुताबिक पिछले चुनाव में इस इलाक़े से भाजपा ने 39 सीटें हासिल कीं थीं जो इस बार गिरकर 26 रह सकती हैं।

दूसरी ओर 2002 के चुनावों में यहाँ से 18 सीटें हासिल करने वाली कांग्रेस इस बार 31 सीटों पर बाजी मार सकती है।

दक्षिण गुजरात में सन् 2002 की स्थिति बनी रहेगी जिसमें दोनों दलों को 14-14 सीटें हासिल हुईं थीं।

एनडीटीवी के सर्वेक्षण के अनुसार इस चरण में भाजपा को 40 और कांग्रेस को 43 सीटें हासिल हो सकतीं है। सर्वेक्षण में कांग्रेस को 13 सीटों का फायदा होता दिखाया गया है।

कांग्रेस को बढ़त

स्टार न्यूज के एक्ज़िट पोल में कहा गया है कि इस चरण में कांग्रेस पिछली बार से सात सीटें ज्यादा लेकर 37 क्षेत्रों में विजयी होगी।


सोनिया गांधी
पहले चरण में कांग्रेस को लाभ होने की बात कही गई है

इस सर्वेक्षण का कहना है कि भाजपा को इस चरण में 48 सीटें हासिल हो सकती हैं।

एक्ज़िट पोल के अनुसार ये सारा उलटफेर सौराष्ट्र की वजह से हो रहा है जिसमें नरेंद्र मोदी को कई बाग़ियों का सामना करना पड़ रहा है।

ये चुनाव गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए बहुत अहम हैं।

भाजपा लगातार तीसरी बार राज्य में सत्ता हासिल करने की कोशिश कर रही है।

वहीं कांग्रेस का कहना है कि भाजपा ने 2002 का चुनाव सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के कारण जीता था लेकिन इस बार मोदी के विकास के दावे खोखले साबित हो गए हैं।

उल्लेखनीय है कि 87 सीटों के लिए मंगलवार को हुए इस पहले चरण में लगभग 60 फ़ीसदी मतदान हुआ था।

चुनाव का दूसरा और अंतिम चरण 16 दिसंबर को होगा जबकि 23 दिसंबर को मतगणना होगी।

Tuesday, December 11, 2007

गुजरात: पहले चरण का मतदान शुरू

गुजरात विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 182 में से 87 सीटों के लिए मंगलवार को मतदान शुरू हो गया है। इस चुनाव में मुख्य मुक़ाबला भाजपा के नरेंद्र मोदी और कांग्रेस के बीच है।

ये मतदान दक्षिण गुजरात, सौराष्ट्र और कच्छ के इलाक़े में हो रहा है।

पहले दौर में एक करोड़ 78 लाख 77 हज़ार से ज़्यादा मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।

मतदाता इस दौर में 53 महिलाओं समेत 669 उम्मीदवारों के भाग्य का फ़ैसला होगा।

इस चरण में मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के 10 मंत्रियों की चुनावी किस्मत दांव पर लगी है।

चुनाव का दूसरा और अंतिम चरण 16 दिसंबर को पूरा होगा जबकि 23 दिसंबर को मतगणना होगी।

ये चुनाव गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए बहुत अहम हैं। भाजपा लगातार तीसरी बार राज्य में सत्ता हासिल करने की कोशिश कर रही है।

वहीं कांग्रेस का कहना है कि भाजपा ने 2002 का चुनाव सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के कारण जीता था। लेकिन इस बार मोदी के विकास के दावे खोखले साबित हो गए हैं।

चुनौती

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अपनी चुनावी सभाओं में नरेंद्र मोदी को निशाना बनाया है।

सोनिया गांधी
सोनिया गांधी ने मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बनाया है

गोधरा कांड और उसके बाद हुई सांप्रदायिक हिंसा की छाप इन चुनावों पर भी स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है।

नरेंद्र मोदी को चुनाव में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। पटेल समुदाय में ख़ासा असर रखने वाले उन्हीं की पार्टी के नेता केशुभाई पटेल बाग़ी तेवर अख़्तियार किए हुए हैं।

भाजपा के आठ बाग़ी नेता कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं।

जानकारों का कहना है कि सौराष्ट्र और कच्छ का इलाक़ा बहुत हद तक फ़ैसला कर सकता है कि गुजरात में सत्ता की बागडोर किसके हाथों में होगी।

सन् 2002 के चुनावों में भाजपा ने इस इलाक़े से 39 सीटें हासिल कीं थीं। कांग्रेस के हाथ 18 सीटें लगी थीं। एक सीट निर्दलीय उम्मीदवार की झोली में गई थी।

Monday, December 10, 2007

ब्रह्मपुत्र मेल दुर्घटनाग्रस्त, एक की मौत

असम के डिब्रूगढ़ से दिल्ली जा रही ब्रह्मपुत्र मेल की कई बोगियाँ रविवार को देर रात पटरी से उतर गई।
इस दुर्घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई है और लगभग 100 लोग घायल हो गए हैं।

दुर्घटना कटिहार मंडल के रंगपानी और निजबाड़ी रेलवे स्टेशन के बीच हुई।
आरंभिक सूचनाओं के मुताबिक घायल दस यात्रियों की हालत गंभीर बताई जा रही है।
हादसे में घायल लगभग 50 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

दुर्घटना के समय अधिकतर यात्री सो रहे थे।

लोगों को निकालने में स्थानीय लोग मदद कर रहे हैं। दुर्घटना के कुछ घंटों बाद ही रेलवे का राहत और बचाव दल वहाँ पहुँच गया।
अंधेरे के कारण बचाव कार्य में बाधा आ रही थी और ख़बरों के अनुसार अब भी कई लोग बोगियों में फंसे हुए हैं।
घायलों में केंद्रीय अर्धसैनिक बल (सीआरपीएफ़) के जवान भी शामिल हैं।

दुर्घटना के कारणों का पता नहीं चल सका है।

Saturday, December 8, 2007

'चुनाव आयोग सोनिया के ख़िलाफ़ कार्रवाई करे'

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने माँग की है कि चुनाव आयोग कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के ख़िलाफ़ वैसी ही कार्रवाई करे जैसी उसने भाजपा नेता और मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ की है। चुनाव आयोग से दोहरे मापदंड न अपनाने का अनुरोध भी किया गया है।

सोनिया गांधी ने गुजरात में चुनाव प्रचार के दौरान नवसारी में कहा था कि 'जो गुजरात में शासन कर रहे हैं वे मौत के सौदागर हैं।' लेकिन कांग्रेस का कहना है कि सोनिया गांधी की टिप्पणी राज्य के अधिकारियों के बारे में थी।

उधर चुनाव आयोग सोहराबुद्दीन मुठभेड़ को सही ठहराने के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान पर उन्हें पहले ही नोटिस जारी कर चुका है जिसका जवाब उन्हें शनिवार तक देना है।

गुजरात में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान 11 और 16 दिसंबर को होना है।

'दोहरे मापदंड नहीं'
सोनिया गांधी की टिप्पणी राज्य सरकार के अधिकारियों के बारे में थी। उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया था। जो पुलिस अधिकारी वंजारा ने किया, क्या कोई ऐसे अभियुक्त का बचाव कर सकता है। कुछ लोगों ने इस पर ऐसी प्रतिक्रिया दी है जो लोकतांत्रिक मूल्यों के ख़िलाफ़ है

कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल

भाजपा के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली का कहना है, "मैनें नरेंद्र मोदी का भाषण सुना है और उनका हर शब्द और हर वाक्य कांग्रेस नेताओं के भाषण और आरोपों के जवाब में कहा गया है। चुनाव आयोग को चाहिए कि वह कांग्रेस नेताओं के बयान मँगवाए और उनसे जवाब तलब करे।"

पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने कहा, "चुनाव आयोग को दोहरे मापदंड नहीं अपनाने चाहिए।"

भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस अधयक्ष सोनिया गांधी ने आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन किया है। भाजपा की गुजरात इकाई की महासचिव जयंति बारोत ने सोनिया गांधी के ख़िलाफ़ चुनाव आयोग को शिकायत दर्ज कराई थी और उन्होंने अब दोबारा कार्रवाई की माँग की है।
मैनें नरेंद्र मोदी का भाषण सुना है और उनका हर शब्द और हर वाक्य कांग्रेस नेताओं के भाषण और आरोपों के जवाब में कहा गया है। चुनाव आयोग को चाहिए कि वह कांग्रेस नेताओं के बयान मँगवाए और उनसे जवाब तलब करे

भाजपा नेता अरुण जेटली

उनका आरोप है, "सोनिया गांधी ने अपने भाषण में लोगों को जातिगत आधार पर बाँटने और उनकी धार्मिक भावनाएँ भड़काने की कोशिश की है। हमने दो दिसंबर को शिकायत दर्ज कराई धी और अब तक चुनाव आयोग ने इस पर कार्रवाई नहीं की है।"

उधर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने कहा कि सोनिया गांधी ने नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ कुछ कहा ही नहीं है।

उनका कहना था, "सोनिया गांधी की टिप्पणी राज्य सरकार के अधिकारियों के बारे में थी। उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया था। जो पुलिस अधिकारी वंजारा ने किया, क्या कोई ऐसे अभियुक्त का बचाव कर सकता है। कुछ लोगों ने इस पर ऐसी प्रतिक्रिया दी है जो लोकतांत्रिक मूल्यों के ख़िलाफ़ है।"

मोदी के तीख़े तेवर बरक़रार

उधर मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस और विशेष तौर पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर तीख़े तेवर बरक़रार रखे हैं।
सोनिया में मुझे मौत का सौदागर कहा है। क्या इस राज्य की जनता का अपमान नहीं है? आपको इसका बदला लेना है। मतदान के दिन आप ऐसा ज़रूर करें

मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी

समाचार एजेंसियों के अनुसार, मोदी पिछले कुछ दिन से अपनी चुनावी सभाओं में लगातार कहते आ रहे हैं, "सोनिया में मुझे मौत का सौदागर कहा है। क्या इस राज्य की जनता का अपमान नहीं है? आपको इसका बदला लेना है। मतदान के दिन आप ऐसा ज़रूर करें।"

उन्होंने मीडिया के साथ बातचीत में कहा, "मेरी सोनिया गांधी से कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है। कांग्रेस सोनिया गांधी के नाम पर चुनाव लड़ रही है। क्योंकि उनका प्रतिद्वंद्वी मैं हूँ तो मुझे उन पर प्रहार तो करने ही होंगे।

Friday, December 7, 2007

गुजरात में चुनावी माहौल गर्माया

गुजरात में चुनावी माहौल गर्माता जा रहा है और चुनाव मैदान में भाजपा और कांग्रेस के बड़े नेता भी उतर गए हैं।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह शुक्रवार को गुजरात का दौरा करेंगे और राजकोट और सूरत में चुनावी सभाओं को संबोधित करेंगे।

प्रेक्षकों का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास के मुद्दे का जवाब देंगे।
संसद का सत्रावसान हो रहा है और मनमोहन सिंह 11 दिसंबर को एक बार फिर गुजरात के चुनावी मैदान में होंगे।
मनमोहन सिंह के अगले दिन शनिवार को सोनिया गाँधी सौराष्ट्र, मध्य और दक्षिण गुजरात में कई सभाओं को संबोधित करेंगी।

इन सभी इलाक़ों में भारतीय जनता पार्टी की अच्छी पकड़ मानी जाती है।
कांग्रेस के सहयोगी दल भी पीछे नहीं हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता शरद पवार भी अगले कुछ दिनों में गुजरात में नज़र आएंगे।

आयोग का जवाब तलब

दूसरी ओर सोहराबुद्दीन मुठभेड़ मामले पर गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के कथित बयान पर भारतीय चुनाव आयोग ने स्थानीय प्रशासन से रिपोर्ट माँगी है।
नरेंद्र मोदी
नरेंद्र मोदी के बयान को लेकर विवाद उठ खड़ा हुआ है

प्रशासन से पूछा गया है कि असल में नरेंद्र मोदी ने क्या कहा था ताकि चुनाव आयोग ये पता कर सके कि क्या मोदी ने चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन किया है।

वहीं मोदी ने कथित बयान पर राजनीतिक पार्टियों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

कांग्रेस ने नरेंद्र मोदी के बयान की निंदा की है।
पार्टी के प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, "मुख्यमंत्री ने एक तरह से क़त्ल की बात कबूल कर ली है और घोषणा कर दी है कि उनके पास हत्या करने का लाइसेंस है।"

वहीं मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएस) के नेता सीताराम येचुरी ने नरेंद्र मोदी के बयान को 'शर्मनाक' बताया है।

Thursday, December 6, 2007

मस्जिद विध्वंस की बरसी पर कड़ी सुरक्षा

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में बाबरी विध्वंस की 15 वीं बरसी पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है और पुलिस व अर्धसैनिक बलों ने उसे छावनी जैसा बना दिया है।

प्रशासन ने हाल में फ़ैजाबाद, लखनऊ और वाराणसी में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों को देखते हुए अलर्ट घोषित कर दिया है।
ग़ौरतलब है कि हिंदू कट्टरपंथियों की एक भीड़ ने छह दिसंबर, 1992 को अयोध्या की बाबरी मस्जिद को गिरा दिया था।
इसके बाद देश के विभिन्न हिस्सों में सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी थी जिसमें दो हज़ार से अधिक लोग मारे गए थे।
गुप्तचर और पुलिस एजेंसियों का मानना है कि अयोध्या को चरमपंथी निशाना बना सकते हैं।
इस वजह से विवादास्पद स्थल की कांटेदार तार लगाकर घेराबंदी कर दी गई है, साथ ही चौबीसों घंटे कड़ी चौकसी बरती जा रही है।

जिलाधिकारी अनिल गर्ग ने बीबीसी को बताया,'' यह स्थान हमेशा से संवेदनशील रहा है लेकिन अदालतों में हुए धमाकों के बाद हम अतिरिक्त सुरक्षा बरत रहे हैं। लोगों से भी सचेत रहने को कहा गया है।''
मुसलमानों के विरोध दिवस और कट्टरपंथी हिंदुओं के विजय दिवस मनाने के मद्देनज़र अतिरिक्त पुलिस और अर्धसैनिक बलों को यहाँ तैनात किया गया है।

विवाद

हिंदुओं का मानना है कि यह भगवान राम का जन्मस्थल है और वे वहाँ भव्य मंदिर बनाना चाहते हैं।
यह स्थान हमेशा से संवेदनशील रहा है लेकिन अदालतों में हुए धमाकों के बाद हम अतिरिक्त सुरक्षा बरत रहे हैं। लोगों से भी सचेत रहने को कहा गया है

अनिल गर्ग, जिलाधिकारी

मुसलिम समुदाय के लोग यहाँ मस्जिद निर्माण के लिए क़ानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।
हिंदू कट्टरपंथी संगठनों का दावा है कि पहले उस स्थान पर मंदिर हुआ करता था जिसे तोड़कर मुग़ल शासकों ने बाबरी मस्जिद बनवाई थी।
हालांकि इस स्थल के मालिकाना हक़ को लेकर दशकों से हिंदू और मुसलमानों में दशकों से विवाद बना हुआ है।

लेकिन 23 दिसंबर, 1949 को ये विवाद तब गहराया जब सवेरे बाबरी मस्जिद का दरवाज़ा खोलने पर पाया गया कि उसके भीतर हिंदुओं के आराध्य देव राम के बाल रूप की मूर्ति रखी थी।
इस जगह हिंदुओं के आराध्य राम की जन्मभूमि होने का दावा करने वाले हिंदू कट्टरपंथियों ने कहा था कि "रामलला यहाँ प्रकट हुए हैं।"

लेकिन मुसलमानों का आरोप है कि रात में किसी ने चुपचाप बाबरी मस्जिद में घुसकर ये मूर्ति वहां रख दी थी।
मुसलमानों का कहना है कि ऐसे कोई सबूत नहीं हैं कि वहाँ कभी मंदिर था।

Wednesday, December 5, 2007

नए प्रतिबंध लगाने पर सवालिया निशान: चीन

चीन का कहना है कि अमरीका की ख़ुफ़िया एजेंसियों की ताज़ा रिपोर्ट आने के बाद ईरान पर सुरक्षा परिषद के नए प्रतिबंध लगाने पर सवालिया निशान लग गया है। दूसरी ओर अमरीका और उसके यूरोपीय सहयोगी देश अब भी ईरान पर प्रतिबंध लगाने के पक्ष में हैं।

संयुक्त राष्ट्र में चीन के राजदूत वांग ग्वांग्या का कहना था कि स्थिति बदल गई है और सुरक्षा परिषद को इस पर विचार करना होगा।
सोमवार को अमरीका की कई ख़ुफ़िया संस्थाओं की रिपोर्ट में कहा गया था कि ईरान ने वर्ष 2003 में ही परमाणु हथियार कार्यक्रम को रोक दिया था। ये भी कहा गया कि ईरान अब परमाणु हथियार बनाने का प्रयास नहीं कर रहा है।

हालाँकि अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा है कि 'ईरान अब भी ख़तरा' बना हुआ है। उन्होंने ये भी कहा कि ईरान पर आई रिपोर्ट के बावजूद ईरान पर दबाव बनाए रखना ज़रूरी है।

उधर इसराइल, ब्रिटेन और फ़्रांस ने भी कहा है कि वे इस रिपोर्ट के बावजूद ईरान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव को बढ़ाने के पक्ष में हैं।

चीन और रूस ने दो बार तो ईरान के ख़िलाफ़ प्रतिबंध लगाने का समर्थन किया है लेकिन दोनो देशों के ईरान के साथ क़रीबी व्यापारिक संबंध हैं और वे नहीं चाहते कि ईरान के साथ उनके रिश्तों में दरार आए.

पहले से लगे हुए हैं प्रतिबंध

बीबीसी के संयुक्त राष्ट्र संवाददाता लौरा ट्रेविलियन का कहना है कि चीन की प्रतिक्रिया के बाद संयुक्त राष्ट्र में चीन के राजदूत से पूछा गया कि क्या ताज़ा रिपोर्ट के बाद ईरान पर नए संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध लगने की संभावना घट गई है?

तीख़े तेवर
अंतरराष्ट्रीय बिरादरी को चाहिए कि अगर ईरान परमाणु हथियार बनाने की कोशिश जारी रखता है तो उसे पूरी तरह अलग-थलग कर दे

राष्ट्रपति बुश

लौरा ट्रेविलियन का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र में चीन के राजदूत वांग ग्वांग्या का कहना था कि स्थिति बदल गई है और इस पर सुरक्षा परिषद को विचार करना होगा।

राजदूत वांग ग्वांग्या मानते हैं कि कूटनयिकों को सुरक्षा परिषद की कार्रवाई से पहले इस रिपोर्ट के मतलब को समझना होगा।

महत्वपूर्ण है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने दिसंबर 2006 में ईरान को ऐसी सामग्री, संयंत्र और तकनीक देने पर प्रतिबंध लगाया था जिससे परमाणु ईंधन का संवर्द्धन हो सकता हो या फिर परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम सिस्टम बनाने में सहायता मिल सकती हो।

इसके बाद इस साल मार्च में ईरान के सरकारी बैंक सेपाह और 28 संस्थाओं और लोगों से लेन-देन पर प्रतिबंध लगाया गया था। ईरान से हथियारों का आयात नहीं हो सकता और संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों से कहा गया है कि वे ईरान को कोई बड़ी हथियार प्रणाली बेचने से परहेज़ करें।

लेकिन पिछले शनिवार को पेरिस में विश्व के छह ताकतवर देशों की बैठक में ईरान पर तीसरी बार प्रतिबंध लगाने की प्रक्रिया शुरु करने पर सहमति बनी।

'विचारों में बदलाव'


ईरान ने किया स्वागत
यह स्वभाविक है कि हम इस रिपोर्ट का स्वागत करें, क्योंकि जो देश पहले इस मुद्दे पर सवाल उठाते रहे हैं... अब उन्होंने वास्तविकता के धरातल पर अपने विचारों में कुछ बदलाव किया है

ईरानी विदेश मंत्री

जहाँ एक ओर ईरान ने अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसियों की रिपोर्ट का स्वागत किया है, वहीं अमरीकी राष्ट्रपति ने कहा कि 'ईरान से निबटने के लिए सभी विकल्प खुले हैं।'

बुश ने कहा, "अंतरराष्ट्रीय बिरादरी को चाहिए कि अगर ईरान परमाणु हथियार बनाने की कोशिश जारी रखता है तो उसे पूरी तरह अलग-थलग कर दे।"

ईरान के विदेश मंत्री मनुशेरह मुत्तकी ने अमरीकी रिपोर्ट पर कहा, "यह स्वभाविक है कि हम इस रिपोर्ट का स्वागत करें, क्योंकि जो देश पहले इस मुद्दे पर सवाल उठाते रहे हैं... अब उन्होंने वास्तविकता के धरातल पर अपने विचारों में कुछ बदलाव किया है।"

लेकिन इसराइल के प्रधानमंत्री एहूद ओलमर्ट ने कहा कि यह बहुत महत्वपूर्ण है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए अमरीका के नेतृत्व में चल रहे प्रयास जारी रहे।

Tuesday, December 4, 2007

'ईरान का परमाणु कार्यक्रम वर्ष 2003 से बंद

अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी के अधिकारियों के अनुसार अमरीका अब मानता है कि ईरान ने वर्ष 2003 में ही अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम को रोक दिया था और कुछ विश्वास के साथ कहा जा सकता है कि वह दोबारा बहाल नहीं हुआ है.

अमरीका की ख़ुफ़िया एजेंसियों के आकलन के अनुसार ईरान का मकसद अब भी स्पष्ट नहीं है. ईरान शुरु से ही कहता आया है कि उसका कोई परमाणु हथियार बनाने का कार्यक्रम नहीं है.

अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के एक वरिष्ठ सलाहकार का कहना है कि ख़ुफ़िया रिपोर्ट सकारात्मक है लेकिन ईरान के 'परमाणु हथियार हासिल करने का ख़तरा गंभीर' है.

अमरीका में बॉस्टन विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर हुसैन हक्कानी ने बीबीसी के अनीश अहलूवालिया को बताया, "इस रिपोर्ट से राष्ट्रपति बुश को कुछ शर्मिंदगी तो होगी लेकिन ये ईरान पर नीति बदलने का एक बहना भी बन सकता है."

प्रोफ़ेसर हक्कानी का कहना है, "अमरीका की बहुत सारी अंतरराष्ट्रीय नीतियाँ घरेलू झगड़ों को प्रतिबिंबित करती हैं. पहले राष्ट्रपति बुश पर उस लॉबी का प्रभाव था जो ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर युद्ध के पक्ष में थी. अब लगता है कि वह लॉबी प्रभावशाली हो रही है जो बातचीत करना चाहती है."

उनका कहना है, "ये बात साफ़ है ईरान पर जितना दबाव पहले था, अब उतना नहीं है. सब कुछ अमरीका की अंदरूनी राजनीति पर निर्भर है. बुश प्रशासन का जो साल या सवा साल का कार्यकाल बचा है, उसमें वह संभवत: उसमें कोई ऐसा घटनाक्रम शुरु नहीं करने चाहेगा जिससे उसकी मुश्किलें बढ़ें."

'अंतरराष्ट्रीय दबाव जारी रखें'

अमरीका की 16 ख़ुफ़िया एजेंसियों की जानकारी पर आधारित रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान यूरेनियम संवर्द्धन ज़रूर कर रहा है.

रिपोर्ट के अनुसार यदि ईरान परमाणु हथियारों पर शोध जारी रखता है तो वह अगले आठ साल में परमाणु बम बना सकता है.

इस आकलन में ये भी कहा गया है कि अब ईरान अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक दबाव की ओर ज़्यादा ध्यान दे रहा है और अमरीकी राष्ट्रपति के कार्यालय ने अन्य देशों से कहा है कि वे ये दबाव जारी रखें.

पिछले कुछ वर्षों से अपने विवादित परमाणु कार्यक्रमों को लेकर ईरान को अमरीका सहित दुनिया के कई देशों की ओर से जिस तरह सख्त चेतावनियां दी गईं, वो अमरीकी ख़ुफिया एजेंसी के इस आकलन की रौशनी में बिल्कुल उल्टी पड़ जाती है.

पिछले महीने भी अमरीकी राष्ट्रपति बुश ने कहा था कि अगर तीसरे विश्व युद्ध को न्योता नहीं देना है तो ईरान के परमाणु कार्यक्रमों को रोकना होगा.

हालांकि व्हाइट हाउस की ओर से एक वक्तव्य जारी कर ये कहा गया है कि ये रिपोर्ट बुश प्रशासन की उस नीति को सही ठहराती है, जिसमें ईरान को विवादित परमाणु कार्यक्रम का हल बातचीत के ज़रिये निकालने पर जो़र दिया जा रहा है.

Monday, December 3, 2007

जलवायु परिवर्तन पर अहम बैठक शुरू

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर इंडोनेशियाई द्वीप बाली में सोमवार से शुरु हुए सम्मेलन में अमरीका की भूमिका अहम होगी.

इस सम्मेलन में लगभग दो सौ देशों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं.

जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र की संस्था के प्रमुख ईवो ड बुए का कहना है कि जलवायु परिवर्तन पर लंबी अवधि के लिए कोई भी रणनीति तैयार करने में अमरीका की अनदेखी करना मूखर्ता होगी.

बाली सम्मेलन में ही यह तय करने की कोशिश की जाएगी कि क्योटो प्रोटोकॉल के बाद किसी समझौते का स्वरूप कैसा होगा.

क्योटो प्रोटोकॉल के तहत निर्धारित समयसीमा वर्ष 2012 में ख़त्म हो रही है.

वर्ष 1997 में हुए क्योटो समझौते में प्रदूषण फैलाने वाली गैसों के उत्सर्जन में कमी करने के लिए विकासशील और विकसित देशों को लक्ष्य दिया गया था लेकिन अमरीका शुरु से ही नकारात्म रवैया अपनाता रहा और इसे मानने से इनकार कर दिया.

हालाँकि अब अमरीका का कहना है कि वो बाली सम्मेलन में खुले दिमाग के साथ शिरकत कर रहा है.

संयुक्त राष्ट्र चिंतित

संयुक्त राष्ट्र की ओर से विभिन्न देशों के पैनल (आईपीसीसी) की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक जलवायु परिवर्तन का असर पहले की तुलना में तेज़ी से दिखाई दे रहा है.

बाली सम्मेलन में इस बात पर भी चर्चा होगी कि ग़रीब देशों को वैश्विक तापमान में हो रही वृद्धि के असर से बचाने के लिए क्या उपाय किए जाएँ.

इससे पहले संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून ने कहा था कि जलवायु परिवर्तन पर आईपीसीसी की रिपोर्ट में दुनिया भर में बढ़ रहे तापमान की समस्या के समाधान के लिए ठोस उपाय सुझाए गए हैं लेकिन उन पर सख़्ती से अमल किए जाने की ज़रूरत होगी.

उन्होंने कहा था कि बाली में होने वाले जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में इस बारे में कोई ठोस नीति बनाए जाने की ज़रूरत है.

आईपीसीसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन बहुत ख़तरनाक चुनौती बन चुकी है और अगर इससे नहीं निपटा गया तो इसके ऐसे ख़तरनाक प्रभाव हो सकते हैं जिनसे उबरना असंभव हो सकता है.

Saturday, December 1, 2007

घंटों बाद क्लिंटन का कार्यालय 'मुक्त'

अमरीका में राष्ट्रपति पद के दावेदारों में से एक, हिलेरी क्लिंटन के न्यू हैंपशर प्रांत के चुनाव कार्यालय को कई घंटों की मशक्कत के बाद मुक्त करवा लिया गया है.

इस कार्यालय में एक व्यक्ति ने कई लोगों को बंधक बना कर रख लिया था.

थोड़ी देर पहले उस व्यक्ति ने दो लोगों को रिहा किया था. बाद में पुलिस ने इस व्यक्ति को ही गिरफ़्तार कर लिया है.

बंधक बनाने वाला व्यक्ति कई घंटे पहले रॉचेस्टर शहर में क्लिंटन के चुनाव कार्यालय में घुस गया था और उसने दावा किया था कि उसके शरीर से एक बम बंधा हुआ है.

वह हिलेरी क्लिंटन से बात करना चाहता था.

टेलीविज़न चैनलों पर दिखाया गया कि कार्यालय के आसपास पुलिस ने घेरेबंदी कर ली थी.

इस पूरी घटना में किसी की मौत नहीं हुई है.

हिलेरी नहीं थीं

जब बंधक बनाने वाला व्यक्ति कार्यालय के अंदर गया तो डेमोक्रेटिक पार्टी की सदस्य हिलेरी क्लिंटन वहाँ मौजूद नहीं थीं.

न्यू हैंपशर पुलिस का कहना है कि वहाँ बम निरोधक दस्ते को भेजा दिया गया था और साथ में उस व्यक्ति से बात करने के लिए विशेषज्ञ भेजे गए थे.

अधिकारियों ने बीबीसी को बताया कि संदिग्ध व्यक्ति कोई स्थानीय व्यक्ति है और वह इससे पहले भी भावुकता में बहकर कारनामे कर चुका है.

सूत्रों का कहना है कि उस व्यक्ति ने अपने बेटे को फ़ोन करके टेलीविज़न पर ख़बरें देखने को कहा.

पुलिस का कहना है कि इस व्यक्ति ने पहले एक माँ और उसके बच्चे को छोड़ दिया था लेकिन उसने दो कार्यकर्ताओं को रोक लिया था.

हिलेरी क्लिंटन के कार्यालय के अलावा अपनी उम्मीदवारी के लिए लड़ रहे बराक ओबामा और जॉन एडवर्ड्स के कार्यालयों को भी खाली करवा लिया गया है.

ओबामा का चुनाव कार्यालय भी उसी सड़क पर है जहाँ क्लिंटन के चुनाव कार्यालय का मुख्यालय है.

न्यू हैंपशर में 2008 के राष्ट्रपति चुनाव का प्रचार जनवरी में शुरु होना है और इस समय सभी उम्मीदवार वहाँ प्रचार पर अपना ध्यान केंद्रित किए हुए हैं