भारत के वित्तमंत्री पी चिदंबरम शुक्रवार को लोकसभा में वर्ष 2008-09 का बजट पेश करेंगे।
यह बजट यूपीए सरकार का अंतिम बजट होगा और इसलिए माना जा रहा है कि इस बजट में भी चुनाव की आहट सुनाई देगी और मतदाताओं को लुभाने की कोशिश दिखाई देगी।
गुरुवार को पेश आर्थिक सर्वेक्षण में देश में अर्थव्यवस्था की जो तस्वीर उभर कर सामने आई है उससे लगता है कि वित्तमंत्री के लिए बजट में संतुलन बनाए रखने की ख़ासी चुनौती होगी।
एक ओर उन्हें देश के आर्थिक विकास दर की चिंता करनी होगी और दूसरी ओर महंगाई की शिकायत कर रहे लोगों और आत्महत्या को मजबूर हो रहे किसानों को राहत पहुँचाने की कोशिश करनी होगी।
संसद में सातवीं बार बजट पेश करने जा रहे वित्तमंत्री चिदंबरम से व्यक्तिगत टैक्स देने वालों को भी रियायत की उम्मीद है और कॉर्पोरेट टैक्स देने वालों को भी।
ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार की आस लगाए लोगों को भी आस है तो छठें वेतन आयोग का इंतज़ार कर रहे सरकारी कर्मचारी भी बजट पर नज़र लगाए बैठे हैं।
चुनौतियाँ
गुरुवार को संसद में पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि पिछली तिमाही में विकास दर इससे पहले के दो वर्षों की तुलना में सबसे कम रहा है।
आम लोगों की ज़रूरतों के सामान के दाम बढ़ने पर इसमें चिंता जताई गई है और अगले कुछ समय में महँगाई दर और बढ़ने की आशंका भी जताई गई है। सरकार ने ये भी स्वीकार किया है कि महँगाई बढ़ने से आम आदमी पर बोझ बढ़ रहा है।
इसके अलावा आर्थिक सर्वेक्षण में विकास दर 8.7 फ़ीसदी रहने की संभावना जताई गई है जो यूपीए सरकार के नौ फ़ीसदी के निर्धारित लक्ष्य से कम है।
एक ओर बढ़ते ब्याज़ दरों के चलते उपभोक्ताओं ने बाज़ार में खर्च में कमी कर रखी है तो दूसरी ओर रुपए की मज़बूती के चलते आईटी उद्योग की कमर टूट रही है और निर्यात पर ख़ासा असर पड़ा है।
हालांकि ख़बरें हैं कि किसानों की हालत को लेकर सरकार कोई बड़ा पैकेज देने जा रही है लेकिन बजट के दो दिनों पहले राजनीति तेज़ हो गई है और यूपीए सरकार को बाहर से समर्थन दे वामपंथी किसानों के मुद्दे पर विपक्षियों की रैली में जा खड़े हुए।
एक ओर सीएजी की रिपोर्ट कह रही है कि ग्रामीण रोज़गार गारंटी क़ानून के तहत चल रहा कार्यक्रम ठीक नहीं चल रहा है और दूसरी ओर कांग्रेस के भीतर से इसे पूरे देश में लागू करने का दबाव है।
ऐसी चुनौतियों से निपटने के लिए हॉर्वर्ड में पढ़े वित्तमंत्री पी चिदंबरम अगर आर्थिक क़दम उठाना भी चाहेंगे तो राजनीति उन्हें ऐसा करने से रोकती रहेगी क्योंकि यह चर्चा पहले से ही चल रही है कि यह साल चुनाव का साल हो सकता है।
Friday, February 29, 2008
Thursday, February 28, 2008
आज पेशा होगा भारत का आर्थिक सर्वेक्षण
भारतीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम बजट से पहले आज संसद में आर्थिक सर्वेक्षण पेश करेंगे। इसमें पिछले कुछ महीनों में बढ़ी महँगाई का ज़िक्र होने की संभावना है।
आर्थिक सर्वेक्षण संसद के दोनों सदनों में पेश किया जाएगा..
सर्वेक्षण में अमेरीकी अर्थव्यवस्था में छाए संकट के मद्देनज़र घरेलू अर्थव्यवस्था पर उसके प्रभावों को प्रमुखता से बताए जाने की उम्मीद है।
वित्तमंत्री पी चिदंबरम कई बार ये उम्मीद जता चुके हैं कि नौ फ़ीसदी विकास दर का लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा।
केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (सीएसओ) के संशोधित अनुमान के अनुसार वर्ष 2006-07 में आर्थिक विकास दर 9.6 प्रतिशत थी।
दिसंबर 2007 के मासिक आँकड़ों के मुताबिक मैनुफैक्चरिंग क्षेत्र की विकास दर 13 फ़ीसदी से घट कर लगभग दस फ़ीसदी रह गई है।
आर्थिक सर्वेक्षण में इस तरह की सुस्ती के कारणों के बारे जानकारी दिए जाने की संभावना है। इस वित्त वर्ष के दौरान डॉलर के मुक़ाबले रूपए में आई मज़बूती का भी निर्यातों पर असर पड़ा है।
इसी तरह महंगाई बढ़ने का ख़तरा भी बना हुआ है जो चार फ़ीसदी के पार पहुँच चुका है।
आर्थिक सर्वेक्षण में इन्हीं मुद्दों पर सरकार की तरफ से सफाई और आने वाले साल के बारे में नई तस्वीर पेश की जाएगी।
आर्थिक सर्वेक्षण संसद के दोनों सदनों में पेश किया जाएगा..
सर्वेक्षण में अमेरीकी अर्थव्यवस्था में छाए संकट के मद्देनज़र घरेलू अर्थव्यवस्था पर उसके प्रभावों को प्रमुखता से बताए जाने की उम्मीद है।
वित्तमंत्री पी चिदंबरम कई बार ये उम्मीद जता चुके हैं कि नौ फ़ीसदी विकास दर का लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा।
केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (सीएसओ) के संशोधित अनुमान के अनुसार वर्ष 2006-07 में आर्थिक विकास दर 9.6 प्रतिशत थी।
दिसंबर 2007 के मासिक आँकड़ों के मुताबिक मैनुफैक्चरिंग क्षेत्र की विकास दर 13 फ़ीसदी से घट कर लगभग दस फ़ीसदी रह गई है।
आर्थिक सर्वेक्षण में इस तरह की सुस्ती के कारणों के बारे जानकारी दिए जाने की संभावना है। इस वित्त वर्ष के दौरान डॉलर के मुक़ाबले रूपए में आई मज़बूती का भी निर्यातों पर असर पड़ा है।
इसी तरह महंगाई बढ़ने का ख़तरा भी बना हुआ है जो चार फ़ीसदी के पार पहुँच चुका है।
आर्थिक सर्वेक्षण में इन्हीं मुद्दों पर सरकार की तरफ से सफाई और आने वाले साल के बारे में नई तस्वीर पेश की जाएगी।
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Wednesday, February 27, 2008
इराक़ युद्ध संबंधी ब्यौरा जारी करने का आदेश
ब्रिटेन सरकार को ये आदेश दिया गया है कि वो कैबिनेट की उस महत्वपूर्ण बैठक का ब्यौरा सार्वजनिक करे जिसमें इराक़ युद्ध की क़ानूनी वैधता पर चर्चा हुई थी।
ब्रिटेन के सूचना आयुक्त यानि इंफ़र्मेशन कमिश्नर रिचर्ड थॉमस ने कहा कि ये मुद्दा 'गंभीर और विवादित है' इसीलिए इन दस्तावेज़ों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
ब्रिटेन सरकार के लिए यह एक बड़ा झटका है क्योंकि वो इस जानकारी को सार्वजनिक करने से कतराती रही है।
इराक़ युद्ध से पहले ब्रिटेन की कैबिनेट की दो अहम बैठकें हुई थीं। अब शायद लोग ये जान पाएं कि इन बैठकों में हुआ क्या था और ये संभव हुआ है ब्रिटेन के सूचना आयुक्त के अभूतपूर्व फ़ैसले की वजह से।
हालांकि ब्रिटेन सरकार ने कहा था कि ये जानकारी सार्वजनिक नहीं की जानी चाहिए और इसके लिए दो कारण बताए थे।
पहला यह कि इससे मंत्रिमंडल की सम्मिलित ज़िम्मेदारी पर असर पड़ेगा और दूसरा यह कि अहम बैठकों में नेता खुलकर किसी मुद्दे पर बात करने से कतराएँगे।
दलील नाकाफ़ी
लेकिन सूचना आयुक्त रिचर्ड थॉमस ने इन कारणों को नाकाफ़ी क़रार देते हुए कहा कि जनता को इराक़ युद्ध के असल कारण जानने का हक़ है।
टोनी ब्लेयर
आदेश टोनी ब्लेयर के कार्यकाल की एक कैबिनेट बैठक से संबंधित है
यह एक एहम फ़ैसला है। जनता शायद अब यह जान पाए कि ब्रिटेन के किस मंत्री ने इराक़ युद्ध पर क्या सवाल उठाए, किसने युद्ध का विरोध किया और इस पूरे मुद्दे पर मंत्रिमंडल ने कितने विस्तार से बहस की।
ब्रिटेन की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी लिबरल डेमोक्रैट्स, ने जानकारी सार्वजनिक करने की घोषणा का स्वागत किया है।
पार्टी के विदेश मामलों के प्रवक्ता एड डेवी कहते हैं, "लेबर पार्टी ने गुपचुप काम करने के लिए जो गोपनीयता की दीवार खड़ी की थी उसकी दीवार ईंट-दर-ईंट टूट रही है। लेबर पार्टी ने बहुत कुछ छिपाया है और सूचना आयुक्त की बदौलत जनता कुछ समय में सच जान सकेगी लेकिन यह शर्म की बात है कि सरकार से दस्तावेज़ एक-एक करके छीनने पड़ रहे हैं।"
उधर डाउनिंग स्ट्रीट के अधिकारियों का कहना है कि वो इस के ख़िलाफ़ अपील करने पर विचार कर रहे हैं।
साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि दस्तावेज के सार्वजनिक होने के बाद भी शायद ज़्यादा जानकारी सामने न आए क्योंकि मंत्रिमंडल की बैठकों के मिनिट ज़्यादा विस्तार से नहीं लिए जाते हैं, हरेक शब्द लिखा नहीं जाता है।
ब्रिटेन के सूचना आयुक्त यानि इंफ़र्मेशन कमिश्नर रिचर्ड थॉमस ने कहा कि ये मुद्दा 'गंभीर और विवादित है' इसीलिए इन दस्तावेज़ों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
ब्रिटेन सरकार के लिए यह एक बड़ा झटका है क्योंकि वो इस जानकारी को सार्वजनिक करने से कतराती रही है।
इराक़ युद्ध से पहले ब्रिटेन की कैबिनेट की दो अहम बैठकें हुई थीं। अब शायद लोग ये जान पाएं कि इन बैठकों में हुआ क्या था और ये संभव हुआ है ब्रिटेन के सूचना आयुक्त के अभूतपूर्व फ़ैसले की वजह से।
हालांकि ब्रिटेन सरकार ने कहा था कि ये जानकारी सार्वजनिक नहीं की जानी चाहिए और इसके लिए दो कारण बताए थे।
पहला यह कि इससे मंत्रिमंडल की सम्मिलित ज़िम्मेदारी पर असर पड़ेगा और दूसरा यह कि अहम बैठकों में नेता खुलकर किसी मुद्दे पर बात करने से कतराएँगे।
दलील नाकाफ़ी
लेकिन सूचना आयुक्त रिचर्ड थॉमस ने इन कारणों को नाकाफ़ी क़रार देते हुए कहा कि जनता को इराक़ युद्ध के असल कारण जानने का हक़ है।
टोनी ब्लेयर
आदेश टोनी ब्लेयर के कार्यकाल की एक कैबिनेट बैठक से संबंधित है
यह एक एहम फ़ैसला है। जनता शायद अब यह जान पाए कि ब्रिटेन के किस मंत्री ने इराक़ युद्ध पर क्या सवाल उठाए, किसने युद्ध का विरोध किया और इस पूरे मुद्दे पर मंत्रिमंडल ने कितने विस्तार से बहस की।
ब्रिटेन की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी लिबरल डेमोक्रैट्स, ने जानकारी सार्वजनिक करने की घोषणा का स्वागत किया है।
पार्टी के विदेश मामलों के प्रवक्ता एड डेवी कहते हैं, "लेबर पार्टी ने गुपचुप काम करने के लिए जो गोपनीयता की दीवार खड़ी की थी उसकी दीवार ईंट-दर-ईंट टूट रही है। लेबर पार्टी ने बहुत कुछ छिपाया है और सूचना आयुक्त की बदौलत जनता कुछ समय में सच जान सकेगी लेकिन यह शर्म की बात है कि सरकार से दस्तावेज़ एक-एक करके छीनने पड़ रहे हैं।"
उधर डाउनिंग स्ट्रीट के अधिकारियों का कहना है कि वो इस के ख़िलाफ़ अपील करने पर विचार कर रहे हैं।
साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि दस्तावेज के सार्वजनिक होने के बाद भी शायद ज़्यादा जानकारी सामने न आए क्योंकि मंत्रिमंडल की बैठकों के मिनिट ज़्यादा विस्तार से नहीं लिए जाते हैं, हरेक शब्द लिखा नहीं जाता है।
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Tuesday, February 26, 2008
रेल बजटः मतदाताओं पर रहेगी नज़र
मंगलवार को भारत के लगभग हर तबके के लोगों की नज़र होगी रेलमंत्री लालू प्रसाद पर और उनके सूटकेस में बंद रेल बजट पर।
माना जा रहा है कि संसद में जब रेलमंत्री मंगलवार को वर्ष 2008-09 का रेल बजट पेश करेंगे तो उसपर राज्यों और फिर केंद्र में आगामी चुनावों की छाप दिख सकती है।
वैसे लालू प्रसाद अपने कार्यकाल में लगभग सभी बजटों को लोकलुभावन बनाकर पेश करते रहे हैं पर इस बार ऐसा स्पष्ट तौर पर दिख रहा है कि राजनीति अर्थनीति पर हावी रहेगी।
आने वाले दिनों में देश में कुछ राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं और फिर यूपीए सरकार का कार्यकाल भी पूरा हो रहा है यानी देश में आम चुनावों के लिए मानस तैयार करने का समय आ चुका है।
जाहिर है, लालू प्रसाद का रेल बजट इसके प्रभाव से अछूता नहीं रहेगा और इसीलिए जानकार बताते हैं कि लालू लोगों पर भार बढ़ाने के बजाय उन्हें कुछ रिरायतें दे सकते हैं।
आगामी बजट
पिछले बजट में रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने अलग-अलग श्रेणियों में यात्री किरायों में मामूली कमी करते हुए व्यस्त और भीड़-भाड़ वाले सीजन के हिसाब से किरायों में बदलाव किए थे।
लालू प्रसाद
लालू लोकलुभावन स्वरूप वाला बजट पेश करते रहे हैं
इस रेल बजट में किरायों में कमी किए बिना भी रेल मंत्री यात्रियों को रियायत दे सकते हैं। मसलन, ग़रीबों की भाषा-शैली वाले लालू इस बार कुछ और ग़रीब-रथों की घोषणा कर सकते हैं।
एसोचैम पहले ही रेलवे माल भाड़ा में एक फ़ीसदी कटौती की माँग कर चुका है।
इस बीच उद्योग और वाणिज्य संगठन एसोचैम ने भारत की विभिन्न कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) से बात कर रेल किरायों पर सर्वेक्षण कराया है।
इस सर्वेक्षण में शामिल 300 सीईओ में से 210 ने उम्मीद जताई है कि यात्री किराया स्थिर रहेगा क्योंकि रेल मंत्री मुनाफ़े का फ़ायदा उन तक पहुँचाना चाहेंगे।
लगभग 70 प्रतिशत सीईओ ने रेल मंत्री से माल भाड़ा एक फ़ीसदी कम करने की माँग की है।
उनका कहना है कि मालभाड़ा कम होने से सामानों के दाम घटेंगे और महँगाई पर नियंत्रण रखने में मदद मिल सकेगी।
माना जा रहा है कि संसद में जब रेलमंत्री मंगलवार को वर्ष 2008-09 का रेल बजट पेश करेंगे तो उसपर राज्यों और फिर केंद्र में आगामी चुनावों की छाप दिख सकती है।
वैसे लालू प्रसाद अपने कार्यकाल में लगभग सभी बजटों को लोकलुभावन बनाकर पेश करते रहे हैं पर इस बार ऐसा स्पष्ट तौर पर दिख रहा है कि राजनीति अर्थनीति पर हावी रहेगी।
आने वाले दिनों में देश में कुछ राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं और फिर यूपीए सरकार का कार्यकाल भी पूरा हो रहा है यानी देश में आम चुनावों के लिए मानस तैयार करने का समय आ चुका है।
जाहिर है, लालू प्रसाद का रेल बजट इसके प्रभाव से अछूता नहीं रहेगा और इसीलिए जानकार बताते हैं कि लालू लोगों पर भार बढ़ाने के बजाय उन्हें कुछ रिरायतें दे सकते हैं।
आगामी बजट
पिछले बजट में रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने अलग-अलग श्रेणियों में यात्री किरायों में मामूली कमी करते हुए व्यस्त और भीड़-भाड़ वाले सीजन के हिसाब से किरायों में बदलाव किए थे।
लालू प्रसाद
लालू लोकलुभावन स्वरूप वाला बजट पेश करते रहे हैं
इस रेल बजट में किरायों में कमी किए बिना भी रेल मंत्री यात्रियों को रियायत दे सकते हैं। मसलन, ग़रीबों की भाषा-शैली वाले लालू इस बार कुछ और ग़रीब-रथों की घोषणा कर सकते हैं।
एसोचैम पहले ही रेलवे माल भाड़ा में एक फ़ीसदी कटौती की माँग कर चुका है।
इस बीच उद्योग और वाणिज्य संगठन एसोचैम ने भारत की विभिन्न कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) से बात कर रेल किरायों पर सर्वेक्षण कराया है।
इस सर्वेक्षण में शामिल 300 सीईओ में से 210 ने उम्मीद जताई है कि यात्री किराया स्थिर रहेगा क्योंकि रेल मंत्री मुनाफ़े का फ़ायदा उन तक पहुँचाना चाहेंगे।
लगभग 70 प्रतिशत सीईओ ने रेल मंत्री से माल भाड़ा एक फ़ीसदी कम करने की माँग की है।
उनका कहना है कि मालभाड़ा कम होने से सामानों के दाम घटेंगे और महँगाई पर नियंत्रण रखने में मदद मिल सकेगी।
Monday, February 25, 2008
संसद के बजट सत्र की शुरुआत
भारतीय संसद का बजट सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है। संसद की शुरुआत राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के अभिभाषण से होगी।
बजट सत्र में कांग्रेस नेतृत्ववाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार ने विपक्ष के हमलों से बचने की तैयारी की है।
दूसरी ओर विपक्ष ने महंगाई और किसानों की आत्महत्या जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने का ऐलान किया है।
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री प्रियरंजन दासमुंशी ने रविवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि राष्ट्रपति प्रतिभा पटिल के अभिभाषण से बजट सत्र शुरू होगा।
सरकार किसी भी विषय पर चर्चा के लिए तैयार है लेकिन इस सत्र में वित्त संबंधी कामकाज होता है इसलिए उसे ही प्राथमिकता दी जाएगी।
प्रियरंजन दासमुंशी, संसदीय मंत्री
रेल बजट 26 फ़रवरी और आम बजट 29 फ़रवरी को पेश किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि आर्थिक समीक्षा 28 फ़रवरी को संसद में पेश की जाएगी और नगालैंड में राष्ट्रपति शासन बढ़ाने संबंधी विधेयक 26 फ़रवरी को पेश किया जाएगा।
उन्होंने विपक्ष के संबंध में कहा कि सरकार किसी भी विषय पर चर्चा के लिए तैयार है लेकिन इस सत्र में वित्त संबंधी कामकाज होता है इसलिए उसे ही प्राथमिकता दी जाएगी।
दूसरी ओर लोक सभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने रविवार को सर्वदलीय बैठक आयोजित की।
इसमें विपक्षी दलों ने महंगाई और किसानों की समस्या से निपटने में सरकार की विफलता का आरोप लगाते हुए सदन में इन मुद्दों पर विशेष बहस कराने की मांग की।
बजट सत्र में कांग्रेस नेतृत्ववाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार ने विपक्ष के हमलों से बचने की तैयारी की है।
दूसरी ओर विपक्ष ने महंगाई और किसानों की आत्महत्या जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने का ऐलान किया है।
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री प्रियरंजन दासमुंशी ने रविवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि राष्ट्रपति प्रतिभा पटिल के अभिभाषण से बजट सत्र शुरू होगा।
सरकार किसी भी विषय पर चर्चा के लिए तैयार है लेकिन इस सत्र में वित्त संबंधी कामकाज होता है इसलिए उसे ही प्राथमिकता दी जाएगी।
प्रियरंजन दासमुंशी, संसदीय मंत्री
रेल बजट 26 फ़रवरी और आम बजट 29 फ़रवरी को पेश किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि आर्थिक समीक्षा 28 फ़रवरी को संसद में पेश की जाएगी और नगालैंड में राष्ट्रपति शासन बढ़ाने संबंधी विधेयक 26 फ़रवरी को पेश किया जाएगा।
उन्होंने विपक्ष के संबंध में कहा कि सरकार किसी भी विषय पर चर्चा के लिए तैयार है लेकिन इस सत्र में वित्त संबंधी कामकाज होता है इसलिए उसे ही प्राथमिकता दी जाएगी।
दूसरी ओर लोक सभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने रविवार को सर्वदलीय बैठक आयोजित की।
इसमें विपक्षी दलों ने महंगाई और किसानों की समस्या से निपटने में सरकार की विफलता का आरोप लगाते हुए सदन में इन मुद्दों पर विशेष बहस कराने की मांग की।
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Saturday, February 23, 2008
आज हो सकती है प्रधानमंत्री की घोषणा
पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) आज प्रधानमंत्री के नाम की घोषणा कर सकती है। इस पद के दावेदारों में मख़दूम अमीन फ़हीम सबसे आगे चल रहे हैं।
प्रधानमंत्री चुनने के लिए पीपीपी के सह अध्यक्ष आसिफ़ अली ज़रदारी की अगुआई में शुक्रवार को देर रात तक बैठक चली लेकिन कोई निर्णय नहीं लिया जा सका।
ज़रदारी ख़ुद प्रधानमंत्री नहीं बनने की घोषणा पहले ही कर चुके हैं।
उल्लेखनीय है कि नेशनल असेंबली के लिए हुए चुनाव में सबसे ज़्यादा सीटें हासिल करने वाली पीपीपी और पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) ने साझा सरकार बनाने का फ़ैसला किया है।
पीपीपी नेताओं ने बैठक के बाद पत्रकारों से कहा, "प्रधानमंत्री कौन होगा इसकी घोषणा शनिवार सुबह तक कर दी जाएगी।"
कराची सेप्रधानमंत्री पद की होड़ में पीपीपी के वरिष्ठ नेता मख़दूम अमीन फ़हीम सबसे आगे चल रहे हैं।
उनका कहना है कि राजनीतिक गलियारों में मख़दूम फ़हीम के नाम की चर्चा ज़ोरों पर है।
नया पेंच
पाकिस्तान में चुनावी नतीजे तो आ चुके हैं लेकिन ये अनाधिकारिक हैं।
पाकिस्तान सरकार ने अभी तक चुनावी नतीजों की अधिसूचना जारी नहीं की है और ऐसा कब तक होगा ये भी तय नहीं है।
चुनावों में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के रुप में उभरी पीएमल (एन) के नेता नवाज़ शरीफ़ कह चुके हैं जनादेश राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ है और उन्हें इस्तीफ़ा दे देना चाहिए।
हालाँकि परवेज़ मुशर्रफ़ के प्रवक्ता मेजर जनरल राशिक कुरैशी ने कहा कि पीएमल (एन) को छोड़ कर किसी और पार्टी ने ये नहीं कहा है कि वो राष्ट्रपति के साथ काम नहीं करेंगे।
प्रधानमंत्री चुनने के लिए पीपीपी के सह अध्यक्ष आसिफ़ अली ज़रदारी की अगुआई में शुक्रवार को देर रात तक बैठक चली लेकिन कोई निर्णय नहीं लिया जा सका।
ज़रदारी ख़ुद प्रधानमंत्री नहीं बनने की घोषणा पहले ही कर चुके हैं।
उल्लेखनीय है कि नेशनल असेंबली के लिए हुए चुनाव में सबसे ज़्यादा सीटें हासिल करने वाली पीपीपी और पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) ने साझा सरकार बनाने का फ़ैसला किया है।
पीपीपी नेताओं ने बैठक के बाद पत्रकारों से कहा, "प्रधानमंत्री कौन होगा इसकी घोषणा शनिवार सुबह तक कर दी जाएगी।"
कराची सेप्रधानमंत्री पद की होड़ में पीपीपी के वरिष्ठ नेता मख़दूम अमीन फ़हीम सबसे आगे चल रहे हैं।
उनका कहना है कि राजनीतिक गलियारों में मख़दूम फ़हीम के नाम की चर्चा ज़ोरों पर है।
नया पेंच
पाकिस्तान में चुनावी नतीजे तो आ चुके हैं लेकिन ये अनाधिकारिक हैं।
पाकिस्तान सरकार ने अभी तक चुनावी नतीजों की अधिसूचना जारी नहीं की है और ऐसा कब तक होगा ये भी तय नहीं है।
चुनावों में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के रुप में उभरी पीएमल (एन) के नेता नवाज़ शरीफ़ कह चुके हैं जनादेश राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ है और उन्हें इस्तीफ़ा दे देना चाहिए।
हालाँकि परवेज़ मुशर्रफ़ के प्रवक्ता मेजर जनरल राशिक कुरैशी ने कहा कि पीएमल (एन) को छोड़ कर किसी और पार्टी ने ये नहीं कहा है कि वो राष्ट्रपति के साथ काम नहीं करेंगे।
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पाकिस्तान सरकार
Friday, February 22, 2008
बेलग्रेड में अमरीकी दूतावास पर हमला
कोसोवो को स्वतंत्र राष्ट्र का दर्जा देने का विरोध कर रहे लोगों ने सर्बिया की राजधानी बेलग्रेड में पश्चिमी देशों के कई दूतावासों को अपना निशाना बनाया है।
सबसे बड़ा हमला अमरीकी दूतावास पर हुआ है। नक़ाब पहने प्रदर्शनकारियों ने दूतावास के एक हिस्से में आग लगा दी।
दूतावास परिसर से एक बुरी तरह जला हुआ शव मिला है। हालाँकि अभी तक मृत व्यक्ति की पहचान नहीं हो पाई है।
एक वरिष्ठ अमरीकी अधिकारी का कहना है कि दूतावास के सभी अमरीकी कर्मचारी संपर्क में हैं और हो सकता है कि जला हुआ शव अंदर घुसे किसी प्रदर्शनकारी का हो।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने इन घटनाओं की निंदा की है।
उधर अमरीका ने आरोप लगाया है कि सर्बिया सरकार ने उसके दूतावास को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया नहीं कराई।
अमरीका के अलावा ब्रिटेन, बेल्जियम, क्रोएशिया और तुर्की के दूतावासों पर भी हमले हुए हैं।
बेलग्रेड स्थित सर्बियाई संसद के बाहरी इलाक़ों में धुएँ का गुबार देखा जा सकता है। सुरक्षाकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए आँसू गैस के गोले छोड़े हैं।
विरोध
उल्लेखनीय है कि जर्मनी और अमरीका के अलावा कई देशों ने कोसोवो की संसद के उस प्रस्ताव को समर्थन दिया है जिसमें उन्होंने आज़ादी की घोषणा कर दी है।
इस मसले पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में और बाद में यूरोपीय संघ में भी मतभेद खुल कर सामने आ चुके हैं।
बेलग्रेड में बीबीसी संवाददाता का कहना है कि संसद के बाहर हज़ारों की संख्या में प्रदर्शनकारी सर्बिया के प्रधानमंत्री का भाषण सुनने जुटे जहां प्रधानमंत्री ने एक भावुक भाषण दिया।
अपने भाषण में प्रधानमंत्री वोजिस्लाव कोस्तुनिका ने कोसोवो की आज़ादी की घोषणा की कड़ी निंदा की और कहा कि पश्चिमी देश सिर्फ सर्बिया पर दबाव डाल रहे हैं कि वो अपनी पहचान छोड़ दे।
उल्लेखनीय है कि सर्बिया के लोग कोसोवो को अपनी पहचान से जो़ड़कर देखते हैं।
1990 के दशक में यूगोस्लाविया के विभाजन के बाद मुख्य रुप से तीन देश बने क्रोएशिया, सर्बिया और बोस्निया हर्जेगोविना।
कोसोवो सर्बिया का एक हिस्सा है जो बहुत पहले से ही सर्बिया से अलग होने के लिए लड़ता रहा है और क़रीब छह सात साल पहले इसे संयुक्त राष्ट्र के अधीन घोषित कर दिया गया था।
अब कोसोवो की संसद ने खुद को आज़ाद घोषित कर दिया है जिसे पश्चिमी देशों का समर्थन मिल रहा है। इससे सर्बिया काफ़ी नाराज़ है और उसे रुस का समर्थन मिला हुआ है।
सबसे बड़ा हमला अमरीकी दूतावास पर हुआ है। नक़ाब पहने प्रदर्शनकारियों ने दूतावास के एक हिस्से में आग लगा दी।
दूतावास परिसर से एक बुरी तरह जला हुआ शव मिला है। हालाँकि अभी तक मृत व्यक्ति की पहचान नहीं हो पाई है।
एक वरिष्ठ अमरीकी अधिकारी का कहना है कि दूतावास के सभी अमरीकी कर्मचारी संपर्क में हैं और हो सकता है कि जला हुआ शव अंदर घुसे किसी प्रदर्शनकारी का हो।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने इन घटनाओं की निंदा की है।
उधर अमरीका ने आरोप लगाया है कि सर्बिया सरकार ने उसके दूतावास को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया नहीं कराई।
अमरीका के अलावा ब्रिटेन, बेल्जियम, क्रोएशिया और तुर्की के दूतावासों पर भी हमले हुए हैं।
बेलग्रेड स्थित सर्बियाई संसद के बाहरी इलाक़ों में धुएँ का गुबार देखा जा सकता है। सुरक्षाकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए आँसू गैस के गोले छोड़े हैं।
विरोध
उल्लेखनीय है कि जर्मनी और अमरीका के अलावा कई देशों ने कोसोवो की संसद के उस प्रस्ताव को समर्थन दिया है जिसमें उन्होंने आज़ादी की घोषणा कर दी है।
इस मसले पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में और बाद में यूरोपीय संघ में भी मतभेद खुल कर सामने आ चुके हैं।
बेलग्रेड में बीबीसी संवाददाता का कहना है कि संसद के बाहर हज़ारों की संख्या में प्रदर्शनकारी सर्बिया के प्रधानमंत्री का भाषण सुनने जुटे जहां प्रधानमंत्री ने एक भावुक भाषण दिया।
अपने भाषण में प्रधानमंत्री वोजिस्लाव कोस्तुनिका ने कोसोवो की आज़ादी की घोषणा की कड़ी निंदा की और कहा कि पश्चिमी देश सिर्फ सर्बिया पर दबाव डाल रहे हैं कि वो अपनी पहचान छोड़ दे।
उल्लेखनीय है कि सर्बिया के लोग कोसोवो को अपनी पहचान से जो़ड़कर देखते हैं।
1990 के दशक में यूगोस्लाविया के विभाजन के बाद मुख्य रुप से तीन देश बने क्रोएशिया, सर्बिया और बोस्निया हर्जेगोविना।
कोसोवो सर्बिया का एक हिस्सा है जो बहुत पहले से ही सर्बिया से अलग होने के लिए लड़ता रहा है और क़रीब छह सात साल पहले इसे संयुक्त राष्ट्र के अधीन घोषित कर दिया गया था।
अब कोसोवो की संसद ने खुद को आज़ाद घोषित कर दिया है जिसे पश्चिमी देशों का समर्थन मिल रहा है। इससे सर्बिया काफ़ी नाराज़ है और उसे रुस का समर्थन मिला हुआ है।
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Thursday, February 21, 2008
ज़रदारी- नवाज़ की आज अहम मुलाक़ात
पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के नेता आसिफ़ अली ज़रदारी और नवाज़ शरीफ़ के बीच आज अहम बैठक हो रही है जिसमें गठबंधन सरकार बनाने पर चर्चा होगी।
दोनों दल पहले ही इस बात के संकेत दे चुके हैं वो सत्ता में साझीदारी कर सकते हैं।
दोनों दलों के शीर्ष नेताओं की बैठक में राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के भविष्य पर भी चर्चा हो सकती है क्योंकि नवाज़ शरीफ़ लगातार मुशर्रफ़ के इस्तीफ़े की माँग करते आ रहे हैं।
संभावित गठबंधन सरकार में प्रधानमंत्री कौन होगा, इस पर भी दोनों नेता चर्चा कर सकते हैं।
पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो के पति आसिफ़ अली ज़रदारी खुद को प्रधानमंत्री पद की दौड़ से बाहर कर चुके हैं।
उन्होंने कहा है कि उनकी पार्टी जल्दी ही अपना उम्मीदवार चुनेगी जो गठबंधन सरकार की अगुआई करेगा।
नतीजे
पाकिस्तान के संसदीय चुनावों में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) सबसे बड़े दल के रुप में उभरी है। दूसरे पायदान पर पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) है।
इन चुनावों में राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के समर्थक दलों की करारी हार हुई है।
पाकिस्तानी संसद के निचले सदन यानी नेशनल असेंबली की 272 सीटों में पीपीपी को 87 सीटें मिली हैं और पीएमएल (एन) को 66 सीटों पर सफलता प्राप्त हुई है।
अगर दोनों दल आपस में हाथ मिलाते हैं तो सरकार बनाने लायक बहुमत आसानी से मिल जाएगी।
दोनों दल पहले ही इस बात के संकेत दे चुके हैं वो सत्ता में साझीदारी कर सकते हैं।
दोनों दलों के शीर्ष नेताओं की बैठक में राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के भविष्य पर भी चर्चा हो सकती है क्योंकि नवाज़ शरीफ़ लगातार मुशर्रफ़ के इस्तीफ़े की माँग करते आ रहे हैं।
संभावित गठबंधन सरकार में प्रधानमंत्री कौन होगा, इस पर भी दोनों नेता चर्चा कर सकते हैं।
पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो के पति आसिफ़ अली ज़रदारी खुद को प्रधानमंत्री पद की दौड़ से बाहर कर चुके हैं।
उन्होंने कहा है कि उनकी पार्टी जल्दी ही अपना उम्मीदवार चुनेगी जो गठबंधन सरकार की अगुआई करेगा।
नतीजे
पाकिस्तान के संसदीय चुनावों में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) सबसे बड़े दल के रुप में उभरी है। दूसरे पायदान पर पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) है।
इन चुनावों में राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के समर्थक दलों की करारी हार हुई है।
पाकिस्तानी संसद के निचले सदन यानी नेशनल असेंबली की 272 सीटों में पीपीपी को 87 सीटें मिली हैं और पीएमएल (एन) को 66 सीटों पर सफलता प्राप्त हुई है।
अगर दोनों दल आपस में हाथ मिलाते हैं तो सरकार बनाने लायक बहुमत आसानी से मिल जाएगी।
Wednesday, February 20, 2008
इस्तीफ़े की कोई योजना नहीं: मुशर्रफ़
पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने स्पष्ट कर दिया है कि संसदीय चुनावों में विपक्ष की जीत के बावजूद उनके इस्तीफ़ा देने की कोई योजना नहीं है।
उन्होंने कहा,'' इस समय पाकिस्तान में स्थिर लोकतांत्रिक सरकार स्थापित करने की ज़रूरत है।''
दूसरी ओर पाकिस्तान में सरकार बनाने की कोशिशें तेज़ हो गईं हैं।
ख़बरें हैं कि पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के नेता आसिफ़ अली ज़रदारी और पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) के नवाज़ शरीफ़ के बीच बुधवार को बैठक होनी है जिसमें गठबंधन सरकार के संबंध में बातचीत होगी।
ख़बर है कि सूबा सरहद में सफल रही अवामी नेशनल पार्टी के नेता भी इस बातचीत में शामिल होंगे।
इस समय पाकिस्तान में स्थिर लोकतांत्रिक सरकार स्थापित करने की ज़रूरत है
राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़
इसके पहले पाकिस्तान चुनाव में सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी के तौर पर उभर कर सामने आई पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी और दूसरे नंबर पर रही पीएमएल (नवाज़) के नेताओं के कहा है कि वे गठबंधन सरकार बनाने के लिए राज़ी हैं।
नतीजों के मुताबिक पीपीपी को 87 और पीएमएल (नवाज़) को 66 सीटें मिली हैं।
अगर ये दोनों पार्टियाँ मिलकर सरकार बनाती हैं तो दोनों के पास संसद की आधी से ज़्यादा सीटें होंगी।
मंगलवार को एक संवाददाता सम्मेलन में पीपीपी के नेता और बेनज़ीर भुट्टो के पति आसिफ़ अली ज़रदारी ने कहा है कि उनकी पार्टी ऐसी सरकार बनाएगी जो सभी लोकतांत्रिक शक्तियों को साथ लेकर चलेगी।
एकजुट होने का आह्वान
दूसरी ओर नवाज़ शरीफ़ कहा है कि लोकतांत्रिक शक्तियों को एकजुट होना चाहिए ताकि ‘तानाशाही’ का अंत किया जा सके।
नवाज़ शरीफ़ ने कहा कि वो बेनज़ीर भुट्टो की पार्टी पीपीपी के नेता आसिफ़ अली ज़रदारी से मिलेंगे।
नवाज़ शरीफ़ की पार्टी दूसरे नंबर पर रही हैं
उनका कहना था, " मैं लोगों की भावना की कद्र करता हूँ। लोगों ने अपना मत ज़ाहिर कर दिया है। लेकिन मुशर्रफ़ को ये बात समझ में नहीं आ रही थी। उन्होंने अपनी आँखें बंद कर रखीं थीं। उनका कहना था कि जब लोग चाहेंगे वो चले जाएँगे। आज लोगों ने बता दिया है कि वो क्या चाहते हैं।"
अगर पीपीपी और पीएमएल (नवाज़) मिलकर गठबंधन सरकार बनाते हैं तो संसद में दो-तिहाई बहुमत के साथ वे मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ महाभियोग प्रस्ताव भी ला सकते हैं।
राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ को समर्थन देने वाली पीएमएल-क्यू के खाते में 38 सीटें ही आई हैं।
पीएमएल-क्यू ने नेता शुजात हुसैन ने एपी टेलीवीज़न न्यूज़ से बातचीत में कहा कि उनकी पार्टी खुले दिल से नतीजों को स्वीकार करती है और विपक्षी खेमे में बैठने के लिए तैयार है।
परवेज़ मुशर्रफ़ स्वयं चुनाव में खड़े नहीं हुए थे लेकिन संवाददाताओं का कहना है कि उनके समर्थकों की हार के कारण उनकी स्थिति कमज़ोर हुई है।
मतदान नेशनल असेंबली की 272 सीटों और प्रांतीय असेंबलियों की 577 सीटों के लिए हुआ था।
उन्होंने कहा,'' इस समय पाकिस्तान में स्थिर लोकतांत्रिक सरकार स्थापित करने की ज़रूरत है।''
दूसरी ओर पाकिस्तान में सरकार बनाने की कोशिशें तेज़ हो गईं हैं।
ख़बरें हैं कि पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के नेता आसिफ़ अली ज़रदारी और पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) के नवाज़ शरीफ़ के बीच बुधवार को बैठक होनी है जिसमें गठबंधन सरकार के संबंध में बातचीत होगी।
ख़बर है कि सूबा सरहद में सफल रही अवामी नेशनल पार्टी के नेता भी इस बातचीत में शामिल होंगे।
इस समय पाकिस्तान में स्थिर लोकतांत्रिक सरकार स्थापित करने की ज़रूरत है
राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़
इसके पहले पाकिस्तान चुनाव में सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी के तौर पर उभर कर सामने आई पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी और दूसरे नंबर पर रही पीएमएल (नवाज़) के नेताओं के कहा है कि वे गठबंधन सरकार बनाने के लिए राज़ी हैं।
नतीजों के मुताबिक पीपीपी को 87 और पीएमएल (नवाज़) को 66 सीटें मिली हैं।
अगर ये दोनों पार्टियाँ मिलकर सरकार बनाती हैं तो दोनों के पास संसद की आधी से ज़्यादा सीटें होंगी।
मंगलवार को एक संवाददाता सम्मेलन में पीपीपी के नेता और बेनज़ीर भुट्टो के पति आसिफ़ अली ज़रदारी ने कहा है कि उनकी पार्टी ऐसी सरकार बनाएगी जो सभी लोकतांत्रिक शक्तियों को साथ लेकर चलेगी।
एकजुट होने का आह्वान
दूसरी ओर नवाज़ शरीफ़ कहा है कि लोकतांत्रिक शक्तियों को एकजुट होना चाहिए ताकि ‘तानाशाही’ का अंत किया जा सके।
नवाज़ शरीफ़ ने कहा कि वो बेनज़ीर भुट्टो की पार्टी पीपीपी के नेता आसिफ़ अली ज़रदारी से मिलेंगे।
नवाज़ शरीफ़ की पार्टी दूसरे नंबर पर रही हैं
उनका कहना था, " मैं लोगों की भावना की कद्र करता हूँ। लोगों ने अपना मत ज़ाहिर कर दिया है। लेकिन मुशर्रफ़ को ये बात समझ में नहीं आ रही थी। उन्होंने अपनी आँखें बंद कर रखीं थीं। उनका कहना था कि जब लोग चाहेंगे वो चले जाएँगे। आज लोगों ने बता दिया है कि वो क्या चाहते हैं।"
अगर पीपीपी और पीएमएल (नवाज़) मिलकर गठबंधन सरकार बनाते हैं तो संसद में दो-तिहाई बहुमत के साथ वे मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ महाभियोग प्रस्ताव भी ला सकते हैं।
राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ को समर्थन देने वाली पीएमएल-क्यू के खाते में 38 सीटें ही आई हैं।
पीएमएल-क्यू ने नेता शुजात हुसैन ने एपी टेलीवीज़न न्यूज़ से बातचीत में कहा कि उनकी पार्टी खुले दिल से नतीजों को स्वीकार करती है और विपक्षी खेमे में बैठने के लिए तैयार है।
परवेज़ मुशर्रफ़ स्वयं चुनाव में खड़े नहीं हुए थे लेकिन संवाददाताओं का कहना है कि उनके समर्थकों की हार के कारण उनकी स्थिति कमज़ोर हुई है।
मतदान नेशनल असेंबली की 272 सीटों और प्रांतीय असेंबलियों की 577 सीटों के लिए हुआ था।
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Tuesday, February 19, 2008
मुशर्रफ़ का दल 'चुनावों में पिछड़ा'
पाकिस्तान में राष्ट्रपति मुशर्रफ़ को समर्थन देने वाली पाकिस्तान मुसलिम लीग (क़ायदे आजम) के प्रवक्ता ने स्वीकार किया है कि विपक्षी दलों ने चुनावों में बढ़त हासिल कर ली है।
पीएमएल-क्यू के प्रवक्ता तारीक़ अज़ीम ने कहा कि यदि शुरुआती नतीजों की पुष्टि होती है तो पार्टी विपक्ष की भूमिका निभाने को तैयार है।
समाचार एजेंसी एएफ़पी के साथ बातचीत में तारिक़ अज़ीम ने कहा कि शुरुआती नतीजों में नवाज़ शरीफ़ और बेनज़ीर भुट्टो को 'बड़ी सफलता' हासिल हुई है।
उनका कहना था,'' यदि नतीजों की पुष्टि होती है तो हम प्रभावी विपक्ष की भूमिका निभाएँगे।''
दूसरी ओर विपक्षी पार्टियों के समर्थकों ने अभी से जीत का जश्न मनाना शुरू कर दिया है।
हालांकि अभी नेशनल और प्रांतीय असेंबलियों के लिए हुए चुनाव में वोटों की गिनती जारी है। उम्मीद की जा रही है कि अगले कुछ घंटों में नतीजे आ जाएँगे।
बेनज़ीर भुट्टो के कुछ युवा समर्थक कराची की सड़कों में जश्न मनाने में जुट गए हैं।
उल्लेखनीय है कि पाकिस्तानी पीपुल्स पार्टी और पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) मु्ख्य राजनीतिक विपक्षी पार्टियाँ हैं।
शुरुआती रुझानों के अनुसार उनके उम्मीदवार आगे चल रहे हैं और परवेज़ मुशर्रफ़ के कई निकटतम सहयोगी अपनी सीटें हार गए हैं।
ख़बरों के अनुसार राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के अधीन प्रधानमंत्री रहे पाकिस्तान मुस्लिम लीग (क़ायदे आजम) के चौधरी शुजात हुसैन नेशनल असेंबली का चुनाव हार गए हैं।
मुशर्रफ़ के विश्वस्त और पूर्व मंत्री शेख़ रशीद अहमद रावलपिंडी सीट से हार गए हैं।
चुनावी हिंसा
ग़ौरतलब है कि सोमवार को शाम बजे मतदान पूरा हुआ था और मतदान के दौरान देश भर के अलग-अलग हिस्सों से हिंसा की ख़बरें आई थीं। ग़ैर आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक हिंसा में 10 से ज़्यादा लोग मारे गए थे।
मतदान संसद के निचले सदन यानी नेशनल असेंबली की 272 सीटों और प्रांतीय असेंबलियों की 577 सीटों के लिए हुआ है।
नेशनल और प्रांतीय असेंबलियाँ
पंजाब: 445 सीटें, 3214 उम्मीदवार
सिंध: 191 सीटें, 2095 उम्मीदवार
सूबा सरहद: 134 सीटें, 1025 उम्मीदवार
बलूचिस्तान: 65 सीटें, 684 उम्मीदवार
परवेज़ मुशर्रफ़ के प्रवक्ता के मुताबिक रावलपिंडी में मतदान के बाद राष्ट्रपति ने कहा कि जो भी चुनाव में जीतेगा उसके साथ मिलकर काम किया जाएगा।
मतदान के दौरान प्रांतीय असेंबली के लिए पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) के उम्मीदवार चौधरी आसिफ़ अशरफ़ की गाड़ी को निशाना बनाकर हमला किया गया जिसमें उनकी मौत हो गई। हमले में उनके ड्राइवर और निजी सचिव भी मारे गए।
एक अन्य घटना में लाहौर में ही पीएमएल (नवाज़) के चुनावी दफ़्तर पर अंधाधुंध फ़ायरिंग में एक व्यक्ति मारा गया।
कड़े इंतज़ाम
चुनाव के लिए सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए थे। पूरे देश में लगभग 80 हज़ार सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया था।
मतगणना
मतगणना का काम अभी जारी है
कुल 7, 335 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं और करीब आठ करोड़ नौ लाख मतदाता वोट डालने के लिए पंजीकृत थे।
पाकिस्तान के चुनावी इतिहास में पहली बार मतपेटियों को पारदर्शी बनाया गया।
पिछले दिनों हुई हिंसा की घटनाओं के कारण इस ऐतिहासिक चुनाव में तनाव और डर का साया मंडराता रहा है।
मतदान के दौरान धाँधली की आशंकाएँ भी जताई जाती रही हैं।
ये चुनाव पहले आठ जनवरी को होने थे लेकिन 27 दिसंबर को एक रैली में पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो की हत्या के बाद चुनाव 18 फ़रवरी तक के लिए टाल दिए गए थे।
दुनिया भर की नज़रें इस समय पाकिस्तान पर टिकी हुई हैं। चुनावों का जायज़ा लेने के लिए दुनिया भर से क़रीब सौ पर्यवेक्षक और पत्रकार पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों में पहुँचे हुए हैं।
पीएमएल-क्यू के प्रवक्ता तारीक़ अज़ीम ने कहा कि यदि शुरुआती नतीजों की पुष्टि होती है तो पार्टी विपक्ष की भूमिका निभाने को तैयार है।
समाचार एजेंसी एएफ़पी के साथ बातचीत में तारिक़ अज़ीम ने कहा कि शुरुआती नतीजों में नवाज़ शरीफ़ और बेनज़ीर भुट्टो को 'बड़ी सफलता' हासिल हुई है।
उनका कहना था,'' यदि नतीजों की पुष्टि होती है तो हम प्रभावी विपक्ष की भूमिका निभाएँगे।''
दूसरी ओर विपक्षी पार्टियों के समर्थकों ने अभी से जीत का जश्न मनाना शुरू कर दिया है।
हालांकि अभी नेशनल और प्रांतीय असेंबलियों के लिए हुए चुनाव में वोटों की गिनती जारी है। उम्मीद की जा रही है कि अगले कुछ घंटों में नतीजे आ जाएँगे।
बेनज़ीर भुट्टो के कुछ युवा समर्थक कराची की सड़कों में जश्न मनाने में जुट गए हैं।
उल्लेखनीय है कि पाकिस्तानी पीपुल्स पार्टी और पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) मु्ख्य राजनीतिक विपक्षी पार्टियाँ हैं।
शुरुआती रुझानों के अनुसार उनके उम्मीदवार आगे चल रहे हैं और परवेज़ मुशर्रफ़ के कई निकटतम सहयोगी अपनी सीटें हार गए हैं।
ख़बरों के अनुसार राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के अधीन प्रधानमंत्री रहे पाकिस्तान मुस्लिम लीग (क़ायदे आजम) के चौधरी शुजात हुसैन नेशनल असेंबली का चुनाव हार गए हैं।
मुशर्रफ़ के विश्वस्त और पूर्व मंत्री शेख़ रशीद अहमद रावलपिंडी सीट से हार गए हैं।
चुनावी हिंसा
ग़ौरतलब है कि सोमवार को शाम बजे मतदान पूरा हुआ था और मतदान के दौरान देश भर के अलग-अलग हिस्सों से हिंसा की ख़बरें आई थीं। ग़ैर आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक हिंसा में 10 से ज़्यादा लोग मारे गए थे।
मतदान संसद के निचले सदन यानी नेशनल असेंबली की 272 सीटों और प्रांतीय असेंबलियों की 577 सीटों के लिए हुआ है।
नेशनल और प्रांतीय असेंबलियाँ
पंजाब: 445 सीटें, 3214 उम्मीदवार
सिंध: 191 सीटें, 2095 उम्मीदवार
सूबा सरहद: 134 सीटें, 1025 उम्मीदवार
बलूचिस्तान: 65 सीटें, 684 उम्मीदवार
परवेज़ मुशर्रफ़ के प्रवक्ता के मुताबिक रावलपिंडी में मतदान के बाद राष्ट्रपति ने कहा कि जो भी चुनाव में जीतेगा उसके साथ मिलकर काम किया जाएगा।
मतदान के दौरान प्रांतीय असेंबली के लिए पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) के उम्मीदवार चौधरी आसिफ़ अशरफ़ की गाड़ी को निशाना बनाकर हमला किया गया जिसमें उनकी मौत हो गई। हमले में उनके ड्राइवर और निजी सचिव भी मारे गए।
एक अन्य घटना में लाहौर में ही पीएमएल (नवाज़) के चुनावी दफ़्तर पर अंधाधुंध फ़ायरिंग में एक व्यक्ति मारा गया।
कड़े इंतज़ाम
चुनाव के लिए सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए थे। पूरे देश में लगभग 80 हज़ार सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया था।
मतगणना
मतगणना का काम अभी जारी है
कुल 7, 335 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं और करीब आठ करोड़ नौ लाख मतदाता वोट डालने के लिए पंजीकृत थे।
पाकिस्तान के चुनावी इतिहास में पहली बार मतपेटियों को पारदर्शी बनाया गया।
पिछले दिनों हुई हिंसा की घटनाओं के कारण इस ऐतिहासिक चुनाव में तनाव और डर का साया मंडराता रहा है।
मतदान के दौरान धाँधली की आशंकाएँ भी जताई जाती रही हैं।
ये चुनाव पहले आठ जनवरी को होने थे लेकिन 27 दिसंबर को एक रैली में पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो की हत्या के बाद चुनाव 18 फ़रवरी तक के लिए टाल दिए गए थे।
दुनिया भर की नज़रें इस समय पाकिस्तान पर टिकी हुई हैं। चुनावों का जायज़ा लेने के लिए दुनिया भर से क़रीब सौ पर्यवेक्षक और पत्रकार पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों में पहुँचे हुए हैं।
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मुश्हरफ
Monday, February 18, 2008
पाकिस्तान में तनाव के बीच मतदान शुरू
इस्लामाबाद स्थित बीबीसी संवाददाता राजेश जोशी ने बताया है कि चुनावी धांधली और हिंसा की आशंका के बीच लोग धीरे-धीरे मतदान केंद्रों पर वोट डालने पहुंच रहे हैं.
चुनाव के लिए सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं. पूरे देश में लगभग 80 हज़ार सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है.
संसद के निचले सदन यानी नेशनल असेंबली की 272 सीटों और प्रांतीय असेंबलियों की 577 सीटों के लिए मतदान हो रहा है.
मतदान स्थानीय समय के अनुसार सुबह आठ बजे (भारतीय समयानुसार सुबह साढ़े आठ बजे) शुरू हुआ और शाम पाँच बजे तक चलेगा.
इसके लिए कुल 7, 335 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं और आठ करोड़ नौ लाख मतदाता इनके राजनीतिक भविष्य का फ़ैसला करेंगे.
नेशनल और प्रांतीय असेंबलियाँ
पंजाब: 445 सीटें, 3214 उम्मीदवार
सिंध: 191 सीटें, 2095 उम्मीदवार
सूबा सरहद: 134 सीटें, 1025 उम्मीदवार
बलूचिस्तान: 65 सीटें, 684 उम्मीदवार
देश भर में कुल एक लाख 70 हज़ार मतदान केंद्रों की स्थापना की गई है. पाकिस्तान के चुनावी इतिहास में पहली बार मतपेटियों को पारदर्शी बनाया गया है.
पिछले दिनों हुई हिंसा को ध्यान में रखते हुए देशभर में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं. अधिकारियों का कहना है कि 35 हज़ार सैनिकों और 47 हज़ार अर्धसैनिक बल के जवानों को तैनात किया गया है.
पिछले दिनों हुई हिंसा की घटनाओं के चलते इस ऐतिहासिक चुनाव में तनाव और डर का साया साफ नज़र आ रहा है.
मतदान के दौरान धाँधली की आशंकाएँ भी जताई जा रही हैं.
हालांकि पाकिस्तान के चुनाव आयुक्त क़ाज़ी मोहम्मद फ़ारुक़ ने दोहराया है कि क़ानून व्यवस्था को क़ायम रखते हुए चुनाव बिल्कुल निष्पक्ष कराए जा रहे हैं.
मतदान के पहले हिंसा
शनिवार को क़बायली इलाक़े पारचिनार में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के कार्यालय में हुए आत्मघाती हमले में 40 से अधिक लोग मारे गए थे और 90 से अधिक घायल हो गए थे.
पाकिस्तानी सैनिक
हिंसा और तनाव के साए के बीच पाकिस्तान में मतदान हो रहा है
रविवार को भी मुस्लिम लीग(नवाज़) के कार्यालय में हमला हुआ और क्वेटा में एमक्यूएम के कार्यालय में भी एक बम विस्फोट हुआ. इन हमलों में कई लोग घायल हुए हैं.
इन चुनाव से पाकिस्तान में सैन्य शासन का अंत हो जाएगा हालाँकि आशंकाएँ जताई जा रही हैं कि इससे अस्थिरता का एक नया दौर शुरू होगा.
इन चुनावों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़रें भी लगी हुई हैं और चुनावों का जायज़ा लेने के लिए दुनिया भर से क़रीब सौ पर्यवेक्षक और पत्रकार पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों में पहुँचे हैं.
इस्लामाबाद में मौजूद बीबीसी संवाददाता राजेश जोशी का कहना है कि इन इंतज़ामों के बावजूद लोगों में मन में डर है और दहशत साफ़ दिखती है.
संवाददाताओं का कहना है कि हो सकता है कि इस डर के कारण मतदान करने के लिए कम लोग बाहर निकलें.
आशंकाएँ
ये चुनाव पहले आठ जनवरी को होने थे लेकिन 27 दिसंबर को एक रैली में पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो की हत्या के बाद चुनाव 18 फ़रवरी तक के लिए टाल दिए गए थे.
नवाज़ शरीफ़ और आसिफ़ अली ज़रदारी
दोनों प्रमुख विपक्षी दलों को चुनाव में धांधली की आशंका है
पाकिस्तान की दो प्रमुख विपक्षी पार्टियों ने आशंका जताई है कि राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के सहयोगी चुनाव में धाँधली कर सकते हैं.
उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर चुनाव में गड़बड़ी हुई तो वो इसका विरोध करेंगे.
चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों के अनुसार आगे चल रही पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) ने कहा है कि चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष नहीं होने जा रहे हैं.
पीपीपी का कहना है कि मुशर्रफ़ का समर्थन करने वाली पीएमएल-क्यू फ़र्जी मतदान करने वाली है.
पीपीपी की प्रतिद्वंद्वी और पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ की पार्टी ने भी कहा है कि परवेज़ मुशर्रफ़ के समर्थक फ़र्जी मतदान की योजना बना चुके हैं.
विश्लेषकों का कहना है कि अगर चुनाव साफ़ सुथरे हुए तो तीनों प्रमुख पार्टियों में से किसी को भी बहुमत हासिल होने की संभावना नहीं है और एक त्रिशंकु संसद उभरेगी.
चुनाव के लिए सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं. पूरे देश में लगभग 80 हज़ार सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है.
संसद के निचले सदन यानी नेशनल असेंबली की 272 सीटों और प्रांतीय असेंबलियों की 577 सीटों के लिए मतदान हो रहा है.
मतदान स्थानीय समय के अनुसार सुबह आठ बजे (भारतीय समयानुसार सुबह साढ़े आठ बजे) शुरू हुआ और शाम पाँच बजे तक चलेगा.
इसके लिए कुल 7, 335 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं और आठ करोड़ नौ लाख मतदाता इनके राजनीतिक भविष्य का फ़ैसला करेंगे.
नेशनल और प्रांतीय असेंबलियाँ
पंजाब: 445 सीटें, 3214 उम्मीदवार
सिंध: 191 सीटें, 2095 उम्मीदवार
सूबा सरहद: 134 सीटें, 1025 उम्मीदवार
बलूचिस्तान: 65 सीटें, 684 उम्मीदवार
देश भर में कुल एक लाख 70 हज़ार मतदान केंद्रों की स्थापना की गई है. पाकिस्तान के चुनावी इतिहास में पहली बार मतपेटियों को पारदर्शी बनाया गया है.
पिछले दिनों हुई हिंसा को ध्यान में रखते हुए देशभर में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं. अधिकारियों का कहना है कि 35 हज़ार सैनिकों और 47 हज़ार अर्धसैनिक बल के जवानों को तैनात किया गया है.
पिछले दिनों हुई हिंसा की घटनाओं के चलते इस ऐतिहासिक चुनाव में तनाव और डर का साया साफ नज़र आ रहा है.
मतदान के दौरान धाँधली की आशंकाएँ भी जताई जा रही हैं.
हालांकि पाकिस्तान के चुनाव आयुक्त क़ाज़ी मोहम्मद फ़ारुक़ ने दोहराया है कि क़ानून व्यवस्था को क़ायम रखते हुए चुनाव बिल्कुल निष्पक्ष कराए जा रहे हैं.
मतदान के पहले हिंसा
शनिवार को क़बायली इलाक़े पारचिनार में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के कार्यालय में हुए आत्मघाती हमले में 40 से अधिक लोग मारे गए थे और 90 से अधिक घायल हो गए थे.
पाकिस्तानी सैनिक
हिंसा और तनाव के साए के बीच पाकिस्तान में मतदान हो रहा है
रविवार को भी मुस्लिम लीग(नवाज़) के कार्यालय में हमला हुआ और क्वेटा में एमक्यूएम के कार्यालय में भी एक बम विस्फोट हुआ. इन हमलों में कई लोग घायल हुए हैं.
इन चुनाव से पाकिस्तान में सैन्य शासन का अंत हो जाएगा हालाँकि आशंकाएँ जताई जा रही हैं कि इससे अस्थिरता का एक नया दौर शुरू होगा.
इन चुनावों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़रें भी लगी हुई हैं और चुनावों का जायज़ा लेने के लिए दुनिया भर से क़रीब सौ पर्यवेक्षक और पत्रकार पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों में पहुँचे हैं.
इस्लामाबाद में मौजूद बीबीसी संवाददाता राजेश जोशी का कहना है कि इन इंतज़ामों के बावजूद लोगों में मन में डर है और दहशत साफ़ दिखती है.
संवाददाताओं का कहना है कि हो सकता है कि इस डर के कारण मतदान करने के लिए कम लोग बाहर निकलें.
आशंकाएँ
ये चुनाव पहले आठ जनवरी को होने थे लेकिन 27 दिसंबर को एक रैली में पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो की हत्या के बाद चुनाव 18 फ़रवरी तक के लिए टाल दिए गए थे.
नवाज़ शरीफ़ और आसिफ़ अली ज़रदारी
दोनों प्रमुख विपक्षी दलों को चुनाव में धांधली की आशंका है
पाकिस्तान की दो प्रमुख विपक्षी पार्टियों ने आशंका जताई है कि राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के सहयोगी चुनाव में धाँधली कर सकते हैं.
उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर चुनाव में गड़बड़ी हुई तो वो इसका विरोध करेंगे.
चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों के अनुसार आगे चल रही पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) ने कहा है कि चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष नहीं होने जा रहे हैं.
पीपीपी का कहना है कि मुशर्रफ़ का समर्थन करने वाली पीएमएल-क्यू फ़र्जी मतदान करने वाली है.
पीपीपी की प्रतिद्वंद्वी और पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ की पार्टी ने भी कहा है कि परवेज़ मुशर्रफ़ के समर्थक फ़र्जी मतदान की योजना बना चुके हैं.
विश्लेषकों का कहना है कि अगर चुनाव साफ़ सुथरे हुए तो तीनों प्रमुख पार्टियों में से किसी को भी बहुमत हासिल होने की संभावना नहीं है और एक त्रिशंकु संसद उभरेगी.
Saturday, February 16, 2008
नक्सलियों के हमले में 14 मारे गए
उड़ीसा के नयागढ़ ज़िले में नक्सलियों के हमले में दस पुलिसकर्मियों समेत 14 लोग मारे गए हैं। नक्सलियों ने ज़िले के मुख्य पुलिस प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया।
शुक्रवा रात लगभग 11 बजे से लेकर एक बजे तक माओवादी विद्रोहियों ने नयागढ़ के पुलिस शस्त्रागार, पुलिस प्रशिक्षण केंद्र और पुलिस थाने पर लगातार गोलीबारी की।
माओवादी बकायदा अपने साथ एक बस लाए थे जिसमें वो शस्त्रागार से लूटे गए हथियार लाद कर चलता बने।
पुलिस का कहना है कि 50 नक्सलियों के हथियारबंद दस्ते ने अचानक धावा बोल दिया जिससे पुलिसकर्मियों को संभलने का ज़्यादा मौक नहीं मिल सका।
हालाँकि पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई की लेकिन अभी तक किसी नक्सली के मारे जाने की सूचना नहीं मिली है।
नक्सलियों के दस्ते में महिलाएँ भी शामिल थीं।
दासपल्ला के निकट माओवादियों की फ़यारिंग में एक निर्दोष व्यक्ति भी मारा गया।
हमला करने से पहले माओवादियों ने घोषणा की कि वो जनता को निशाना नहीं बनाएंगे क्योंकि उनका लक्ष्य पुलिसकर्मी हैं।
पहली घटना में रात 11 बजे दो ट्रकों पर हथियारों से लैस नक्सलियों ने नयागढ़ थाने पर हमला बोल दिया।
पहले बमों से ज़ोरदार हमला किया गया। जब तक वहां तैनात जवान मोर्चा लेते तब तक थाने के बगल में स्थित शस्त्रागार पर हमला कर वहां से हथियार लूट लिए।
लगभग इसी समय एक अन्य घटना में नक्सलियों ने ज़िला मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर दूर दसतल्ला के नुआगांव थाने पर भी हमला किया।
शुक्रवा रात लगभग 11 बजे से लेकर एक बजे तक माओवादी विद्रोहियों ने नयागढ़ के पुलिस शस्त्रागार, पुलिस प्रशिक्षण केंद्र और पुलिस थाने पर लगातार गोलीबारी की।
माओवादी बकायदा अपने साथ एक बस लाए थे जिसमें वो शस्त्रागार से लूटे गए हथियार लाद कर चलता बने।
पुलिस का कहना है कि 50 नक्सलियों के हथियारबंद दस्ते ने अचानक धावा बोल दिया जिससे पुलिसकर्मियों को संभलने का ज़्यादा मौक नहीं मिल सका।
हालाँकि पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई की लेकिन अभी तक किसी नक्सली के मारे जाने की सूचना नहीं मिली है।
नक्सलियों के दस्ते में महिलाएँ भी शामिल थीं।
दासपल्ला के निकट माओवादियों की फ़यारिंग में एक निर्दोष व्यक्ति भी मारा गया।
हमला करने से पहले माओवादियों ने घोषणा की कि वो जनता को निशाना नहीं बनाएंगे क्योंकि उनका लक्ष्य पुलिसकर्मी हैं।
पहली घटना में रात 11 बजे दो ट्रकों पर हथियारों से लैस नक्सलियों ने नयागढ़ थाने पर हमला बोल दिया।
पहले बमों से ज़ोरदार हमला किया गया। जब तक वहां तैनात जवान मोर्चा लेते तब तक थाने के बगल में स्थित शस्त्रागार पर हमला कर वहां से हथियार लूट लिए।
लगभग इसी समय एक अन्य घटना में नक्सलियों ने ज़िला मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर दूर दसतल्ला के नुआगांव थाने पर भी हमला किया।
Friday, February 15, 2008
तस्लीमा का वीज़ा बढ़ाने का फ़ैसला
भारत सरकार ने बांग्लादेश की विवादास्पद लेखिका तस्लीमा नसरीन का वीज़ा बढ़ाने का फ़ैसला किया है। लेकिन ये स्पष्ट नहीं किया कि ये कितनी अवधि के लिए बढ़ाया गया है।
ग़ौरतलब है कि तस्लीमा के वीज़ा की अवधि रविवार को समाप्त हो रही थी और इसको बढ़ाए जाने को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नवतेज सरना ने बताया,'' भारत सरकार ने तस्लीमा नसरीन का वीज़ा बढ़ाने का निर्णय किया है।''
भारत की परंपरा रही है कि जिन्होंने माँगा है, हमने उन्हें आतिथ्य प्रदान किया है। भारत ने उन लोगों को सुरक्षा दी है जो हमारे मेहमान बनकर आए हैं।
नवतेज सरना, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता
सरना ने कहा,'' भारत की परंपरा रही है कि जिन्होंने माँगा है, हमने उन्हें आतिथ्य प्रदान किया है। भारत ने उन लोगों को सुरक्षा दी है जो हमारे मेहमान बनकर आए हैं।''
उनका कहना था कि तस्लीमा नसरीन हमारी मेहमान हैं और अपनी परंपरा के अनुरूप हमने उन्हें ऐसी ही सुविधाएं दी हैं।
साथ ही विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि भारत में जो मेहमान के रूप में आए हैं, उन्हें यहां की परंपराओं को लेकर सजग रहना चाहिए और ऐसा कोई आचरण नहीं करना चाहिए, जिससे दूसरे देशों के साथ हमारे संबंधों अथवा हमारे धर्मनिरपेक्ष आदर्शों पर प्रभाव पड़े।
बुद्धजीवियों का समर्थन
तस्लीमा नसरीन को पिछले कुछ महीनों से अज्ञातवास में रखा जा रहा है। लेकिन उनके समर्थन में स्वर भी उठने लगे हैं।
बुधवार को विभिन्न बुद्धिजीवियों ने उन्हें भारत की नागरिकता देने की मांग की थी।
तस्लीमा नसरीन को मिलने जुलने की आज़ादी न देने पर प्रसिद्ध लेखिका महाश्वेता देवी ने कड़ा विरोध जताया था।
हम केंद्र सरकार और पश्चिम बंगाल सरकार से लेखकों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए तस्लीमा नसरीन को भारत में रहने और लिखने की आज़ादी देने की माँग करते हैं।
महाश्वेता देवी, प्रसिद्ध लेखिका
उनका कहना है कि सरकार का यह व्यवहार विचारों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर कुठाराघात है।
महाश्वेता देवी ने भारत सरकार और पश्चिम बंगाल सरकार से लेखकों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए तस्लीमा नसरीन को भारत में रहने और लिखने की आज़ादी देने की मांग की थी।
बुकर अवार्ड से सम्मानित लेखिका अरुंधति राय ने भी तस्लीमा की स्वतंत्रता को लेकर चिंता जताई थी।
उल्लेखनीय है कि तस्लीमा नसरीन के ख़िलाफ़ कुछ मस्लिम संगठनों के उग्र प्रदर्शन के बाद उन्हें कोलकाता छोड़ने को कहा गया था।
उसके बाद उन्हें कोलकता से जयपुर, जयपुर से दिल्ली और फिर उन्हें सुरक्षाकर्मी एक अज्ञात स्थल पर ले गए और तब से उन्हें अज्ञातस्थल पर ही रखा जा रहा है।
ग़ौरतलब है कि तस्लीमा के वीज़ा की अवधि रविवार को समाप्त हो रही थी और इसको बढ़ाए जाने को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नवतेज सरना ने बताया,'' भारत सरकार ने तस्लीमा नसरीन का वीज़ा बढ़ाने का निर्णय किया है।''
भारत की परंपरा रही है कि जिन्होंने माँगा है, हमने उन्हें आतिथ्य प्रदान किया है। भारत ने उन लोगों को सुरक्षा दी है जो हमारे मेहमान बनकर आए हैं।
नवतेज सरना, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता
सरना ने कहा,'' भारत की परंपरा रही है कि जिन्होंने माँगा है, हमने उन्हें आतिथ्य प्रदान किया है। भारत ने उन लोगों को सुरक्षा दी है जो हमारे मेहमान बनकर आए हैं।''
उनका कहना था कि तस्लीमा नसरीन हमारी मेहमान हैं और अपनी परंपरा के अनुरूप हमने उन्हें ऐसी ही सुविधाएं दी हैं।
साथ ही विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि भारत में जो मेहमान के रूप में आए हैं, उन्हें यहां की परंपराओं को लेकर सजग रहना चाहिए और ऐसा कोई आचरण नहीं करना चाहिए, जिससे दूसरे देशों के साथ हमारे संबंधों अथवा हमारे धर्मनिरपेक्ष आदर्शों पर प्रभाव पड़े।
बुद्धजीवियों का समर्थन
तस्लीमा नसरीन को पिछले कुछ महीनों से अज्ञातवास में रखा जा रहा है। लेकिन उनके समर्थन में स्वर भी उठने लगे हैं।
बुधवार को विभिन्न बुद्धिजीवियों ने उन्हें भारत की नागरिकता देने की मांग की थी।
तस्लीमा नसरीन को मिलने जुलने की आज़ादी न देने पर प्रसिद्ध लेखिका महाश्वेता देवी ने कड़ा विरोध जताया था।
हम केंद्र सरकार और पश्चिम बंगाल सरकार से लेखकों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए तस्लीमा नसरीन को भारत में रहने और लिखने की आज़ादी देने की माँग करते हैं।
महाश्वेता देवी, प्रसिद्ध लेखिका
उनका कहना है कि सरकार का यह व्यवहार विचारों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर कुठाराघात है।
महाश्वेता देवी ने भारत सरकार और पश्चिम बंगाल सरकार से लेखकों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए तस्लीमा नसरीन को भारत में रहने और लिखने की आज़ादी देने की मांग की थी।
बुकर अवार्ड से सम्मानित लेखिका अरुंधति राय ने भी तस्लीमा की स्वतंत्रता को लेकर चिंता जताई थी।
उल्लेखनीय है कि तस्लीमा नसरीन के ख़िलाफ़ कुछ मस्लिम संगठनों के उग्र प्रदर्शन के बाद उन्हें कोलकाता छोड़ने को कहा गया था।
उसके बाद उन्हें कोलकता से जयपुर, जयपुर से दिल्ली और फिर उन्हें सुरक्षाकर्मी एक अज्ञात स्थल पर ले गए और तब से उन्हें अज्ञातस्थल पर ही रखा जा रहा है।
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Thursday, February 14, 2008
'भारत में महामारी का रूप लेता धूम्रपान'
शोधकर्ताओं का कहना है कि भारत में धूम्रपान एक महामारी का रूप लेता जा रहा है। इसकी वजह से सन् 2010 तक हर साल लगभग 10 लाख लोगों की मौत होने लगेगी।
न्यू इंग्लैंड जनरल ऑफ़ मेडिसिन में छपे शोध में कहा गया है कि इसमें आधे ग़रीब और अशिक्षित लोग होंगे।
ये शोध भारत, कनाडा और ब्रिटेन के डॉक्टरों ने संयुक्त रूप से किया है।
शोधकर्ताओं के अनुसार ये भारत में धूम्रपान को लेकर किया गया अब तक का सबसे व्यापक अध्ययन है। इसमें 900 अध्ययनकर्ताओं ने देश के विभिन्न हिस्सों के 11 लाख घरों में जाकर तथ्य जुटाए हैं।
टोरंटो विश्वविद्यालय के ग्लोबल हैल्थ रिसर्च सेंटर के प्रभात झा कहते हैं,'' नतीजों से हम अचंभित हैं क्योंकि भारत में लोग धूम्रपान देर से शुरू करते हैं और वे यूरोप और अमरीका के लोगों के मुक़ाबले कम सिगरेट अथवा बीड़ी पीते हैं।''
नतीजों से हम अचंभित हैं क्योंकि भारत में लोग धूम्रपान देर से शुरू करते हैं और वे यूरोप और अमरीका के लोगों के मुक़ाबले कम सिगरेट अथवा बीड़ी पीते हैं।
प्रभात झा, टोरंटो विश्वविद्यालय
इस अध्ययन के अनुमान के अनुसार भारत में लगभग 12 करोड़ लोग धूम्रपान करते हैं। इसमें से 39 और 69 साल की उम्र के 30 फ़ीसदी मर्द और पाँच फ़ीसदी महिलाएँ सिगरेट अथवा बीड़ी पीती हैं।
प्रभात झा के अनुसार अध्ययन से पता चला कि बीमार पड़ने से पहले केवल दो फ़ीसदी लोग धूम्रपान छोड़ते हैं
समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार भारत के स्वास्थ्य मंत्री अबुमणि रामदॉस ने एक बयान में कहा कि वो इस अध्ययन के नतीजे से चिंतित हैं।
उनका कहना था कि भारत सरकार तंबाकू इस्तेमाल को कम करने के लिए सभी संभव क़दम उठा रही है, विशेषकर ग़रीबों और अशिक्षित लोगों को जानकारी दी जा रही है।
ग़ौरतलब है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की ताज़ा रिपोर्ट में भी कहा गया है कि धूम्रपान करने वाले कुल लोगों में से दस फ़ीसदी भारत में रहते है।
न्यू इंग्लैंड जनरल ऑफ़ मेडिसिन में छपे शोध में कहा गया है कि इसमें आधे ग़रीब और अशिक्षित लोग होंगे।
ये शोध भारत, कनाडा और ब्रिटेन के डॉक्टरों ने संयुक्त रूप से किया है।
शोधकर्ताओं के अनुसार ये भारत में धूम्रपान को लेकर किया गया अब तक का सबसे व्यापक अध्ययन है। इसमें 900 अध्ययनकर्ताओं ने देश के विभिन्न हिस्सों के 11 लाख घरों में जाकर तथ्य जुटाए हैं।
टोरंटो विश्वविद्यालय के ग्लोबल हैल्थ रिसर्च सेंटर के प्रभात झा कहते हैं,'' नतीजों से हम अचंभित हैं क्योंकि भारत में लोग धूम्रपान देर से शुरू करते हैं और वे यूरोप और अमरीका के लोगों के मुक़ाबले कम सिगरेट अथवा बीड़ी पीते हैं।''
नतीजों से हम अचंभित हैं क्योंकि भारत में लोग धूम्रपान देर से शुरू करते हैं और वे यूरोप और अमरीका के लोगों के मुक़ाबले कम सिगरेट अथवा बीड़ी पीते हैं।
प्रभात झा, टोरंटो विश्वविद्यालय
इस अध्ययन के अनुमान के अनुसार भारत में लगभग 12 करोड़ लोग धूम्रपान करते हैं। इसमें से 39 और 69 साल की उम्र के 30 फ़ीसदी मर्द और पाँच फ़ीसदी महिलाएँ सिगरेट अथवा बीड़ी पीती हैं।
प्रभात झा के अनुसार अध्ययन से पता चला कि बीमार पड़ने से पहले केवल दो फ़ीसदी लोग धूम्रपान छोड़ते हैं
समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार भारत के स्वास्थ्य मंत्री अबुमणि रामदॉस ने एक बयान में कहा कि वो इस अध्ययन के नतीजे से चिंतित हैं।
उनका कहना था कि भारत सरकार तंबाकू इस्तेमाल को कम करने के लिए सभी संभव क़दम उठा रही है, विशेषकर ग़रीबों और अशिक्षित लोगों को जानकारी दी जा रही है।
ग़ौरतलब है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की ताज़ा रिपोर्ट में भी कहा गया है कि धूम्रपान करने वाले कुल लोगों में से दस फ़ीसदी भारत में रहते है।
Wednesday, February 13, 2008
ओबामा की एक और जीत
अमरीका में राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी के लिए प्रयास कर रहे बराक ओबामा ने वर्जीनिया और राजधानी वाशिंगटन डीसी में हिलेरी क्लिंटन को हरा दिया है।
अभी मैरीलैंड के नतीजे आने बाकी है। वाशिंगटन और वर्जीनिया में ओबामा की जीत की उम्मीद की जा रही थी जिसके साथ ही हिलेरी और ओबामा का संघर्ष और कड़ा होता जा रहा है।
मैरीलैंड में ख़राब मौसम और यातायात की समस्याओं के कारण मतदान का समय बढ़ा दिया गया था और इसी कारण मतगणना में देर हुई है। वर्जीनिया और वाशिंगटन की तरह मैरीलैंड में भी ओबामा की जीत तय मानी जा रही है।
बराक की इस जीत के बाद अब वो हिलेरी से कुछ ही मतों से पीछे चल रहे हैं। उधर रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार जॉन मैक्केन ने वर्जीनिया में अपनी पार्टी के प्रतिद्वंद्वी माइक हकबी को हरा दिया है और अब लगता नहीं कि रिपब्लिकन पार्टी से उनकी उम्मीदवारी को कोई बड़ी चुनौती मिलने वाली है।
हिलेरी की मुश्किल
सीनेटर ओबामा ने अपने शानदार प्रदर्शन से हिलेरी क्लिंटन को दबाव में ला दिया है। हालांकि अब तक राष्ट्रीय स्तर पर बराक ओबामा और हिलेरी क्लिंटन लगभग बराबरी पर चल रहे हैं।
हिलेरी क्लिंटन ने इस बात से इनकार किया है कि उनके प्रचार अभियान में कोई परेशानी पेश आ रही है।
हाल में बराक ओबामा ने लुइसियाना और नेब्रास्का में भी हिलेरी क्लिंटन को पीछे छोड़ दिया था।
अब हिलेरी क्लिंटन की अब नज़रें ओहायो और टेक्सास पर टिकी हैं जहाँ मार्च में मतदान होगा।
हिलेरी क्लिंटन
हिलेरी क्लिंटन ने अभी उम्मीद नहीं छोड़ी है
माइक हकबी पर पार्टी की एकता के लिए अपनी उम्मीदवारी वापस लेने का दबाव है लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनका पीछे हटने का कोई इरादा नहीं है।
डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवारी दस फ़ीसदी प्रतिनिधियों यानी लगभग 2025 प्रतिनिधियों के समर्थन पर निर्भर है।
आमतौर पर जिसके पास जितने प्रतिनिधि होते हैं वही पार्टी का अधिकृत उम्मीदवार चुन लिया जाता है।
सुपर ट्यूसडे के दिन बीस प्रांतों में मतदान हुए लेकिन डेमोक्रेटिक दावेदारों में से किसी एक को स्पष्ट मत नहीं मिले।
समर्थकों के मतों से डेलीगेट या प्रतिनिधियों का चुनाव होता है और ये प्रतिनिधि बाद में औपचारिक रूप से उम्मीदवारों का चयन करेंगे।
अभी मैरीलैंड के नतीजे आने बाकी है। वाशिंगटन और वर्जीनिया में ओबामा की जीत की उम्मीद की जा रही थी जिसके साथ ही हिलेरी और ओबामा का संघर्ष और कड़ा होता जा रहा है।
मैरीलैंड में ख़राब मौसम और यातायात की समस्याओं के कारण मतदान का समय बढ़ा दिया गया था और इसी कारण मतगणना में देर हुई है। वर्जीनिया और वाशिंगटन की तरह मैरीलैंड में भी ओबामा की जीत तय मानी जा रही है।
बराक की इस जीत के बाद अब वो हिलेरी से कुछ ही मतों से पीछे चल रहे हैं। उधर रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार जॉन मैक्केन ने वर्जीनिया में अपनी पार्टी के प्रतिद्वंद्वी माइक हकबी को हरा दिया है और अब लगता नहीं कि रिपब्लिकन पार्टी से उनकी उम्मीदवारी को कोई बड़ी चुनौती मिलने वाली है।
हिलेरी की मुश्किल
सीनेटर ओबामा ने अपने शानदार प्रदर्शन से हिलेरी क्लिंटन को दबाव में ला दिया है। हालांकि अब तक राष्ट्रीय स्तर पर बराक ओबामा और हिलेरी क्लिंटन लगभग बराबरी पर चल रहे हैं।
हिलेरी क्लिंटन ने इस बात से इनकार किया है कि उनके प्रचार अभियान में कोई परेशानी पेश आ रही है।
हाल में बराक ओबामा ने लुइसियाना और नेब्रास्का में भी हिलेरी क्लिंटन को पीछे छोड़ दिया था।
अब हिलेरी क्लिंटन की अब नज़रें ओहायो और टेक्सास पर टिकी हैं जहाँ मार्च में मतदान होगा।
हिलेरी क्लिंटन
हिलेरी क्लिंटन ने अभी उम्मीद नहीं छोड़ी है
माइक हकबी पर पार्टी की एकता के लिए अपनी उम्मीदवारी वापस लेने का दबाव है लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनका पीछे हटने का कोई इरादा नहीं है।
डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवारी दस फ़ीसदी प्रतिनिधियों यानी लगभग 2025 प्रतिनिधियों के समर्थन पर निर्भर है।
आमतौर पर जिसके पास जितने प्रतिनिधि होते हैं वही पार्टी का अधिकृत उम्मीदवार चुन लिया जाता है।
सुपर ट्यूसडे के दिन बीस प्रांतों में मतदान हुए लेकिन डेमोक्रेटिक दावेदारों में से किसी एक को स्पष्ट मत नहीं मिले।
समर्थकों के मतों से डेलीगेट या प्रतिनिधियों का चुनाव होता है और ये प्रतिनिधि बाद में औपचारिक रूप से उम्मीदवारों का चयन करेंगे।
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Tuesday, February 12, 2008
रूसी प्रधानमंत्री की भारत यात्रा
रूसी प्रधानमंत्री विक्टर ज़ुबकोफ़ मंगलवार से अपने दोदिवसीय भारत दौरे की शुरुआत कर रहे हैं।
माना जा रहा है कि इस दौरान दोनों देशों के बीच कारोबार और व्यापारिक रिश्तों पर बातचीत होगी।
समाचार माध्यमों का कहना है कि इस दौरान दोनों पक्षों के बीच पाँच समझौते होने की उम्मीद है।
भारत पहुँचने पर वो मंगलवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से बातचीत करेंगे। इस दौरान ही समझौतों पर चर्चा होगी। रूस सन् 2010 तक भारत के साथ द्विपक्षीय कारोबार बढ़ाकर 10 अरब डॉलर करना चाहता है। फ़िलहाल ये पाँच अरब डॉलर है।
रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री विक्टर ज़ुबकोफ़ ने कहा,'' भारत एक आजमाया हुआ दोस्त है, और रूस में एक कहावत है कि एक पुराना दोस्त दो नए दोस्तों से बेहतर होता है।''
पुराने रिश्ते
अपनी इस यात्रा के दौरान वे भारतीय राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी और विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी से भी मुलाकात करेंगे।
रूसी प्रधानमंत्री विक्टर ज़ुबकोफ़
तीन महीने पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने रूस की यात्रा की थी। इस दौरान भारत और रूस ने परस्पर सहयोग के चार महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए थे।
दोनों देशों के बीच मादक पदार्थों की तस्करी रोकने, अंतरिक्ष, परिवहन और व्यापार के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए समझौते हुए थे।
ग़ौरतलब है कि भारत और रूस के बीच तत्कालीन सोवियत संघ के दिनों से ही घनिष्ठ रिश्ते रहे हैं और भारत हमेशा से ही रूसी हथियारों का बड़ा ख़रीददार रहा है।
लेकिन पिछले काफ़ी समय से संकेत आ रहे हैं कि दोनों देशों के बीच रिश्ते उतने मधुर नहीं रह गए हैं जितने शायद दो दशक पहले हुआ करते थे।
माना जा रहा है कि इस दौरान दोनों देशों के बीच कारोबार और व्यापारिक रिश्तों पर बातचीत होगी।
समाचार माध्यमों का कहना है कि इस दौरान दोनों पक्षों के बीच पाँच समझौते होने की उम्मीद है।
भारत पहुँचने पर वो मंगलवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से बातचीत करेंगे। इस दौरान ही समझौतों पर चर्चा होगी। रूस सन् 2010 तक भारत के साथ द्विपक्षीय कारोबार बढ़ाकर 10 अरब डॉलर करना चाहता है। फ़िलहाल ये पाँच अरब डॉलर है।
रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री विक्टर ज़ुबकोफ़ ने कहा,'' भारत एक आजमाया हुआ दोस्त है, और रूस में एक कहावत है कि एक पुराना दोस्त दो नए दोस्तों से बेहतर होता है।''
पुराने रिश्ते
अपनी इस यात्रा के दौरान वे भारतीय राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी और विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी से भी मुलाकात करेंगे।
रूसी प्रधानमंत्री विक्टर ज़ुबकोफ़
तीन महीने पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने रूस की यात्रा की थी। इस दौरान भारत और रूस ने परस्पर सहयोग के चार महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए थे।
दोनों देशों के बीच मादक पदार्थों की तस्करी रोकने, अंतरिक्ष, परिवहन और व्यापार के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए समझौते हुए थे।
ग़ौरतलब है कि भारत और रूस के बीच तत्कालीन सोवियत संघ के दिनों से ही घनिष्ठ रिश्ते रहे हैं और भारत हमेशा से ही रूसी हथियारों का बड़ा ख़रीददार रहा है।
लेकिन पिछले काफ़ी समय से संकेत आ रहे हैं कि दोनों देशों के बीच रिश्ते उतने मधुर नहीं रह गए हैं जितने शायद दो दशक पहले हुआ करते थे।
Monday, February 11, 2008
पूर्वी तिमोर के राष्ट्रपति को गोली मारी गई
पूर्वी तिमोर के राष्ट्रपति होज़े रामोस होर्ता को हमलावरों ने गोली मार कर घायल कर दिया है। ऑस्ट्रेलियाई सैनिक अड्डे पर उनकी सर्जरी की जा रही है।
ताज़ा ख़बर के मुताबिक डिली में ही ऑस्ट्रेलिया सैनिक अड्डे पर उनकी सर्जरी की जा रही है।
सेना के प्रवक्ता के मुताबिक राष्ट्रपति के पेट में गोली लगी है। हमला करने वाले विद्रोही सैनिक नेता अल्फ़्रेदो राइनादो को राष्ट्रपति के सुरक्षाकर्मियों ने मार दिया।
विद्रोहीन नेता ने पिछले साल नवंबर में सरकार के ख़िलाफ़ हथियार उठाने की चेतावनी दी थी।
वर्ष 2006 में बाग़ी सैनिकों और पुलिस के बीच हुई संघर्ष के मामले में राइनादो पर मुक़दमा चल रहा था।
ये हमला सोमवार तड़के हुआ। होज़े रामोस होर्ता पिछले साल मई में पूर्वी तिमोर के दूसरे राष्ट्रपति बने थे।
वर्ष 1996 में उन्हें शांति के लिए नोबल पुरस्कार भी मिला।
हमला
सेना के प्रवक्ता मेजर डोमिंगोज द कमारा ने बताया कि दो कारें राष्ट्रपति के बंगले के पास से गुजरीं और उसी समय गोलीबारी शुरू हो गई।
ख़बरों के मुताबिक एक सैनिक भी गोलीबारी का शिकार हुआ है और वह गंभीर रूप से घायल है।
राइनादो ने कथित तौर पर वर्ष 2006 में हुए संघर्ष की अगुआई की थी जिसमें 37 लोग मारे गए थे और 15 हज़ार लोगों को घर-बार छोड़ना पड़ा था।
इंडोनेशिया पहले पुर्तगाल का उपनिवेश था और 1975 में उसके पीछे हटने के बाद इस पर इंडोनेशियाई नियंत्रण के ख़िलाफ़ शुरु हुए अभियान में होज़े रामोस होर्ता ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया था।
पूर्वी तिमोर को वर्ष 2002 में आज़ादी मिल गई।
ताज़ा ख़बर के मुताबिक डिली में ही ऑस्ट्रेलिया सैनिक अड्डे पर उनकी सर्जरी की जा रही है।
सेना के प्रवक्ता के मुताबिक राष्ट्रपति के पेट में गोली लगी है। हमला करने वाले विद्रोही सैनिक नेता अल्फ़्रेदो राइनादो को राष्ट्रपति के सुरक्षाकर्मियों ने मार दिया।
विद्रोहीन नेता ने पिछले साल नवंबर में सरकार के ख़िलाफ़ हथियार उठाने की चेतावनी दी थी।
वर्ष 2006 में बाग़ी सैनिकों और पुलिस के बीच हुई संघर्ष के मामले में राइनादो पर मुक़दमा चल रहा था।
ये हमला सोमवार तड़के हुआ। होज़े रामोस होर्ता पिछले साल मई में पूर्वी तिमोर के दूसरे राष्ट्रपति बने थे।
वर्ष 1996 में उन्हें शांति के लिए नोबल पुरस्कार भी मिला।
हमला
सेना के प्रवक्ता मेजर डोमिंगोज द कमारा ने बताया कि दो कारें राष्ट्रपति के बंगले के पास से गुजरीं और उसी समय गोलीबारी शुरू हो गई।
ख़बरों के मुताबिक एक सैनिक भी गोलीबारी का शिकार हुआ है और वह गंभीर रूप से घायल है।
राइनादो ने कथित तौर पर वर्ष 2006 में हुए संघर्ष की अगुआई की थी जिसमें 37 लोग मारे गए थे और 15 हज़ार लोगों को घर-बार छोड़ना पड़ा था।
इंडोनेशिया पहले पुर्तगाल का उपनिवेश था और 1975 में उसके पीछे हटने के बाद इस पर इंडोनेशियाई नियंत्रण के ख़िलाफ़ शुरु हुए अभियान में होज़े रामोस होर्ता ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया था।
पूर्वी तिमोर को वर्ष 2002 में आज़ादी मिल गई।
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राष्ट्रिय्पति,
रैनादो
Saturday, February 9, 2008
चीन की शिकायत पर भारत का ऐतराज़
भारतीय विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने चीन की आपत्तियों को ख़ारिज करते हुए कहा है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है और प्रधानमंत्री वहाँ जाने को स्वतंत्र हैं।
ग़ौरतलब है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 31 जनवरी को अरुणाचल प्रदेश की यात्रा की थी और कहा था कि देश में सूर्योदय की किरणें सबसे पहले इसी राज्य में पड़ती हैं।
समाचार एजेंसियों के मुताबिक उनकी इस यात्रा पर चीन सरकार ने अनौपचारिक विरोध दर्ज कराया है।
चीन लंबे अरसे से दावा करता रहा है कि अरूणाचल का बड़ा हिस्सा उसके भू-भाग का अंग है।
चीन के विरोध पर कड़ी प्रतिक्रिया जताते हुए प्रणव मुखर्जी ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि यह पूर्वोत्तर राज्य देश का अभिन्न भाग है और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह देश के किसी भी भाग में जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि हम चीन के रुख़ से वाकिफ़ हैं और वे भी हमारे विचारों से अवगत हैं।
उनका कहना था, "हमारे पास संसद में अरुणाचल प्रदेश से चुने गए प्रतिनिधि हैं। इसलिए ये स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री देश के किसी भी हिस्से की यात्रा कर सकते हैं।"
भारत और चीन सीमा विवाद के मसले को सुलझाने के लिए लगातार बातचीत करते रहे हैं।
कूटनयिक हलकों में माना जा रहा था कि इस लिहाज़ से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की हाल में हुई चीन यात्रा काफी सफल रही है।
लेकिन उनकी चीन यात्रा के एक माह बाद ही ताज़ा विवाद सामने है।
ग़ौरतलब है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 31 जनवरी को अरुणाचल प्रदेश की यात्रा की थी और कहा था कि देश में सूर्योदय की किरणें सबसे पहले इसी राज्य में पड़ती हैं।
समाचार एजेंसियों के मुताबिक उनकी इस यात्रा पर चीन सरकार ने अनौपचारिक विरोध दर्ज कराया है।
चीन लंबे अरसे से दावा करता रहा है कि अरूणाचल का बड़ा हिस्सा उसके भू-भाग का अंग है।
चीन के विरोध पर कड़ी प्रतिक्रिया जताते हुए प्रणव मुखर्जी ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि यह पूर्वोत्तर राज्य देश का अभिन्न भाग है और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह देश के किसी भी भाग में जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि हम चीन के रुख़ से वाकिफ़ हैं और वे भी हमारे विचारों से अवगत हैं।
उनका कहना था, "हमारे पास संसद में अरुणाचल प्रदेश से चुने गए प्रतिनिधि हैं। इसलिए ये स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री देश के किसी भी हिस्से की यात्रा कर सकते हैं।"
भारत और चीन सीमा विवाद के मसले को सुलझाने के लिए लगातार बातचीत करते रहे हैं।
कूटनयिक हलकों में माना जा रहा था कि इस लिहाज़ से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की हाल में हुई चीन यात्रा काफी सफल रही है।
लेकिन उनकी चीन यात्रा के एक माह बाद ही ताज़ा विवाद सामने है।
Friday, February 8, 2008
किडनी कांड: मुख्य अभियुक्त काठमांडू में
गुरुवार को गिरफ़्तार किए गए किडनी कांड के मुख्य अभियुक्त अमित कुमार को नेपाल की राजधानी काठमांडू लाया गया है।
वहाँ नेपाल पुलिस के आला अधिकारियों और नेपाली गृहमंत्रालय के अधिकिरियों के बीच उच्च स्तरीय बैठक चल रही है।
अधिकारियों का कहना है कि इस बैठक में इस बात पर चर्चा चल रही है कि डॉक्टर अमित कुमार को सीधे भारत को सौंप दिया जाए या फिर उन्हें नेपाल में ही रखकर नेपाल में किडनी कांड से जुड़े पहलुओं पर चर्चा की जाए।
चूंकि नेपाल में भी ग़रीबों की किडनी निकालने की ख़बरें मिली हैं और एक गाँव तो ऐसा मिला है जहाँ हर परिवार से कम से कम एक व्यक्ति की किडनी निकाल ली गई है।
काठमांडू से वरिष्ठ पत्रकार युवराज घिमिरे का कहना है कि कुछ अधिकारियों का मानना है कि अभी डॉक्टर अमित कुमार को काठमांडू में रखा जाए और भारत को प्रत्यार्पण की औपचारिकताएँ पूरी करने को कहा जाए।
उनका कहना है कि डॉक्टर अमित कुमार की गिरफ़्तारी के तुरंत बाद भारतीय दूतावास को ख़बर दे दी गई थी और दूतावास के अधिकारी लगातार नेपाली अधिकारियों से संपर्क बनाए हुए हैं।
ख़बर है कि भारत से एक दल शुक्रवार को काठमांडू पहुँच रहा है।
मुरादाबाद पुलिस को भी तलाश
रामदत्त त्रिपाठी का कहना है कि किडनी कांड के मुख्य अभियुक्त के पकड़े जाने के बाद से मुरादाबाद पुलिस भी सक्रिय हो गई है।
अधिकारियों का कहना है कि उन्हें भी दो मामलों में डॉक्टर अमित की तलाश है और वे भारत सरकार के ज़रिए डॉक्टर अमित को उन्हें सौंपे जाने का अनुरोध कर रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि किडनी चोरी के मामले का भांडा मुरादाबाद से ही फूटा था जब वहाँ दो व्यक्तियों ने किडनी के बदले पूरे पैसे न मिलने की शिकायत पुलिस से की थी।
इस शिकायत के बाद मुरादाबाद पुलिस ने छापे मारे थे।
फ़िलहाल एक डॉक्टर और एक नेपाली ड्राइवर मुरादाबाद पुलिस हिरासत में है और उनसे पूछताछ की जा रही है। गिरफ़्तारी
डॉक्टर अमित कुमार को गुरुवार को नेपाल में गिरफ़्तार किया गया। नेपाल के गृह राज्यमंत्री राम कुमार चौधरी ने इसकी पुष्टि कर दी थी।
एक पीड़ित शकील अहमद अपने माता-पिता के साथ
किडनी चोरी के शिकार कई लोग अब शिकायतें लेकर सामने आ रहे हैं
नेपाल पुलिस की एक विशेष टीम ने डॉक्टर अमित कुमार को दक्षिणी नेपाल के सौराहा शहर से गिरफ़्तार किया था।
जिस इलाक़े से डॉक्टर अमित कुमार को गिरफ़्तार किया गया है, वो इलाक़ा भारतीय सीमा से सटा हुआ है, जो बिहार के रक्सौल शहर से 60 किलोमीटर दूर है।
राम कुमार चौधरी ने बताया है कि डॉक्ट अमित के पास से एक लाख 45 हजार डॉलर और 936 यूरो का ड्राफ्ट बरामद हुआ है।
नेपाली पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरफ़्तारी के बाद डॉक्टर अमित कुमार ने उन्हें 20 लाख रुपयों की रिश्वत देने की कोशिश की जिससे कि उन्हें छोड़ दिया जाए।
मामला
जनवरी के आख़िरी सप्ताह में दिल्ली से सटे गुड़गाँव स्थित एक घर पर पुलिस ने छापा मारा था जहाँ से ग़ैर-क़ानूनी तरीके से गुर्दा प्रतिरोपण का धंधा चल रहा था।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक़ सैकड़ों ग़रीब मज़दूरों को बहला-फुसला कर गुर्दा बेचने के लिए राज़ी किया जाता था। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए इस मामले में कई लोगों को गिरफ़्तार किया था।
जो लोग अपनी गुर्दा निकलवाने के लिए तैयार हो जाते थे उनमें से अधिकतर ग़रीब तबके के मज़दूर होते थे।
इन मज़दूरों को गुर्दा निकलवाने के लिए 50 हज़ार से लेकर एक लाख रूपए तक दिए जाते थे लेकिन जिन लोगों को किडनी प्रत्यर्पित की जाती थी उनसे 10 लाख से 18 लाख रुपए तक वसूले जाते थे।
पुलिस जाँच में यह भी पता चला कि हरियाणा को केंद्र बनाकर किए जा रहे इस अपराध की जड़ें भारत के कई राज्यों और दुनिया के कई देशों में फैली हुई हैं।
लेकिन इस कांड के प्रमुख अभियुक्त डॉक्टर अमित कुमार फ़रार हो गए थे। बाद में हरियाणा सरकार ने इस मामले की जाँच सीबीआई से कराने की सिफ़ारिश की थी और डॉक्टर अमित की गिरफ़्तारी के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलर्ट जारी किया गया था।
मानव अंगों की ख़रीद-फ़रोख़्त पर भारत में क़ानूनी प्रतिबंध है लेकिन फिर भी कई ग़रीब लोग प्रतिरोपण के लिए तैयार ग्राहकों को गुर्दा बेचते रहे हैं। इनमें कई विदेशी ग्राहक भी शामिल हैं।
वहाँ नेपाल पुलिस के आला अधिकारियों और नेपाली गृहमंत्रालय के अधिकिरियों के बीच उच्च स्तरीय बैठक चल रही है।
अधिकारियों का कहना है कि इस बैठक में इस बात पर चर्चा चल रही है कि डॉक्टर अमित कुमार को सीधे भारत को सौंप दिया जाए या फिर उन्हें नेपाल में ही रखकर नेपाल में किडनी कांड से जुड़े पहलुओं पर चर्चा की जाए।
चूंकि नेपाल में भी ग़रीबों की किडनी निकालने की ख़बरें मिली हैं और एक गाँव तो ऐसा मिला है जहाँ हर परिवार से कम से कम एक व्यक्ति की किडनी निकाल ली गई है।
काठमांडू से वरिष्ठ पत्रकार युवराज घिमिरे का कहना है कि कुछ अधिकारियों का मानना है कि अभी डॉक्टर अमित कुमार को काठमांडू में रखा जाए और भारत को प्रत्यार्पण की औपचारिकताएँ पूरी करने को कहा जाए।
उनका कहना है कि डॉक्टर अमित कुमार की गिरफ़्तारी के तुरंत बाद भारतीय दूतावास को ख़बर दे दी गई थी और दूतावास के अधिकारी लगातार नेपाली अधिकारियों से संपर्क बनाए हुए हैं।
ख़बर है कि भारत से एक दल शुक्रवार को काठमांडू पहुँच रहा है।
मुरादाबाद पुलिस को भी तलाश
रामदत्त त्रिपाठी का कहना है कि किडनी कांड के मुख्य अभियुक्त के पकड़े जाने के बाद से मुरादाबाद पुलिस भी सक्रिय हो गई है।
अधिकारियों का कहना है कि उन्हें भी दो मामलों में डॉक्टर अमित की तलाश है और वे भारत सरकार के ज़रिए डॉक्टर अमित को उन्हें सौंपे जाने का अनुरोध कर रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि किडनी चोरी के मामले का भांडा मुरादाबाद से ही फूटा था जब वहाँ दो व्यक्तियों ने किडनी के बदले पूरे पैसे न मिलने की शिकायत पुलिस से की थी।
इस शिकायत के बाद मुरादाबाद पुलिस ने छापे मारे थे।
फ़िलहाल एक डॉक्टर और एक नेपाली ड्राइवर मुरादाबाद पुलिस हिरासत में है और उनसे पूछताछ की जा रही है। गिरफ़्तारी
डॉक्टर अमित कुमार को गुरुवार को नेपाल में गिरफ़्तार किया गया। नेपाल के गृह राज्यमंत्री राम कुमार चौधरी ने इसकी पुष्टि कर दी थी।
एक पीड़ित शकील अहमद अपने माता-पिता के साथ
किडनी चोरी के शिकार कई लोग अब शिकायतें लेकर सामने आ रहे हैं
नेपाल पुलिस की एक विशेष टीम ने डॉक्टर अमित कुमार को दक्षिणी नेपाल के सौराहा शहर से गिरफ़्तार किया था।
जिस इलाक़े से डॉक्टर अमित कुमार को गिरफ़्तार किया गया है, वो इलाक़ा भारतीय सीमा से सटा हुआ है, जो बिहार के रक्सौल शहर से 60 किलोमीटर दूर है।
राम कुमार चौधरी ने बताया है कि डॉक्ट अमित के पास से एक लाख 45 हजार डॉलर और 936 यूरो का ड्राफ्ट बरामद हुआ है।
नेपाली पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरफ़्तारी के बाद डॉक्टर अमित कुमार ने उन्हें 20 लाख रुपयों की रिश्वत देने की कोशिश की जिससे कि उन्हें छोड़ दिया जाए।
मामला
जनवरी के आख़िरी सप्ताह में दिल्ली से सटे गुड़गाँव स्थित एक घर पर पुलिस ने छापा मारा था जहाँ से ग़ैर-क़ानूनी तरीके से गुर्दा प्रतिरोपण का धंधा चल रहा था।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक़ सैकड़ों ग़रीब मज़दूरों को बहला-फुसला कर गुर्दा बेचने के लिए राज़ी किया जाता था। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए इस मामले में कई लोगों को गिरफ़्तार किया था।
जो लोग अपनी गुर्दा निकलवाने के लिए तैयार हो जाते थे उनमें से अधिकतर ग़रीब तबके के मज़दूर होते थे।
इन मज़दूरों को गुर्दा निकलवाने के लिए 50 हज़ार से लेकर एक लाख रूपए तक दिए जाते थे लेकिन जिन लोगों को किडनी प्रत्यर्पित की जाती थी उनसे 10 लाख से 18 लाख रुपए तक वसूले जाते थे।
पुलिस जाँच में यह भी पता चला कि हरियाणा को केंद्र बनाकर किए जा रहे इस अपराध की जड़ें भारत के कई राज्यों और दुनिया के कई देशों में फैली हुई हैं।
लेकिन इस कांड के प्रमुख अभियुक्त डॉक्टर अमित कुमार फ़रार हो गए थे। बाद में हरियाणा सरकार ने इस मामले की जाँच सीबीआई से कराने की सिफ़ारिश की थी और डॉक्टर अमित की गिरफ़्तारी के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलर्ट जारी किया गया था।
मानव अंगों की ख़रीद-फ़रोख़्त पर भारत में क़ानूनी प्रतिबंध है लेकिन फिर भी कई ग़रीब लोग प्रतिरोपण के लिए तैयार ग्राहकों को गुर्दा बेचते रहे हैं। इनमें कई विदेशी ग्राहक भी शामिल हैं।
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Thursday, February 7, 2008
'ताकि 18 की उम्र में शादी कर सकें लड़के'
भारत में शायद अब शादी करने के लिए लड़कों को 21 वर्ष की उम्र होने तक इंतज़ार न करना पड़े।
वजह यह है कि देश के विधि आयोग ने सिफ़ारिश की है कि लड़कियों की तरह लड़कों के लिए भी शादी की न्यूनतम आयु सीमा घटाकर 18 वर्ष कर दी जाए।
साथ ही उन शादियों को अमान्य करार दिए जाने की सिफ़ारिश भी की गई है जो कि 16 वर्ष से कम उम्र में की गई हैं।
विधि आयोग ने शादी के पंजीकरण को अनिवार्य करने पर बल देते हुए कहा कि अगर 16 वर्ष से कम उम्र में लड़के और लड़की परस्पर सहमति या असहमति से यौन संबंध बनाते हैं तो इसे दुष्कर्म की श्रेणी में रखा जाएगा।
यानी इस दायरे में वे लोग भी आ जाएंगे जो 16 वर्ष से कम उम्र की अपनी पत्नी से यौन संबंध बनाएंगे।
विरोधाभाष
भारतीय दंड संहिता की धारा 375 कहती है कि अगर 15 वर्ष की लड़की को पत्नी बताकर सहमति से उसके साथ सहवास किया जाए तो इसपर कोई कार्यवाही नहीं होगी।
वहीं दूसरी ओर विवाह क़ानून कहते हैं कि विवाह के लिए लड़के की उम्र 21 साल और लड़की की उम्र 18 साल होनी ज़रूरी है।
दोनों बातों में जो विरोधाभाष है, उसे ख़त्म करने के लिए विधि आयोग को यह ज़िम्मेदारी सौंपी गई कि पड़ताल करके यह तय किया जाए कि भारत में शादी के लिए न्यूनतम उम्र क्या होनी चाहिए।
हालांकि केंद्रीय महिला एवं बाल कल्याण मंत्री रेणुका चौधरी आयोग की इन ताज़ा सिफ़ारिशों से सहमत नहीं हैं पर आयोग का इसके पीछे तर्क है कि अगर किसी लड़के को 18 वर्ष की उम्र में मत देने का अधिकार है तो शादी करने का क्यों नहीं।
आयोग ने अपनी सिफ़ारिशों को केंद्रीय विधिमंत्री हंसराज भारद्वाज को सौंप दिया है। सिफ़ारिशें तो कर दी गई हैं पर इन्हें पहले सरकार और फिर संसद की मंज़ूरी के बाद ही अमलीजामा पहनाया जा सकेगा।
वजह यह है कि देश के विधि आयोग ने सिफ़ारिश की है कि लड़कियों की तरह लड़कों के लिए भी शादी की न्यूनतम आयु सीमा घटाकर 18 वर्ष कर दी जाए।
साथ ही उन शादियों को अमान्य करार दिए जाने की सिफ़ारिश भी की गई है जो कि 16 वर्ष से कम उम्र में की गई हैं।
विधि आयोग ने शादी के पंजीकरण को अनिवार्य करने पर बल देते हुए कहा कि अगर 16 वर्ष से कम उम्र में लड़के और लड़की परस्पर सहमति या असहमति से यौन संबंध बनाते हैं तो इसे दुष्कर्म की श्रेणी में रखा जाएगा।
यानी इस दायरे में वे लोग भी आ जाएंगे जो 16 वर्ष से कम उम्र की अपनी पत्नी से यौन संबंध बनाएंगे।
विरोधाभाष
भारतीय दंड संहिता की धारा 375 कहती है कि अगर 15 वर्ष की लड़की को पत्नी बताकर सहमति से उसके साथ सहवास किया जाए तो इसपर कोई कार्यवाही नहीं होगी।
वहीं दूसरी ओर विवाह क़ानून कहते हैं कि विवाह के लिए लड़के की उम्र 21 साल और लड़की की उम्र 18 साल होनी ज़रूरी है।
दोनों बातों में जो विरोधाभाष है, उसे ख़त्म करने के लिए विधि आयोग को यह ज़िम्मेदारी सौंपी गई कि पड़ताल करके यह तय किया जाए कि भारत में शादी के लिए न्यूनतम उम्र क्या होनी चाहिए।
हालांकि केंद्रीय महिला एवं बाल कल्याण मंत्री रेणुका चौधरी आयोग की इन ताज़ा सिफ़ारिशों से सहमत नहीं हैं पर आयोग का इसके पीछे तर्क है कि अगर किसी लड़के को 18 वर्ष की उम्र में मत देने का अधिकार है तो शादी करने का क्यों नहीं।
आयोग ने अपनी सिफ़ारिशों को केंद्रीय विधिमंत्री हंसराज भारद्वाज को सौंप दिया है। सिफ़ारिशें तो कर दी गई हैं पर इन्हें पहले सरकार और फिर संसद की मंज़ूरी के बाद ही अमलीजामा पहनाया जा सकेगा।
Wednesday, February 6, 2008
मैक्केन जीत की ओर, ओबामा-हिलेरी में टक्कर
अमरीका के राष्ट्रपति चुनावों के लिए हो रहे 24 राज्यों के चुनाव में कोई 18 राज्यों में मतदान पूरा हो चुका है और शेष राज्यों में मतदान जारी है।
मतदान के दौरान हुए सर्वेक्षणों से पता चलता है कि रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार जॉन मैक्केन विजेता के रुप में उभर रहे हैं।
जबकि डेमोक्रेटिक पार्टी में बात इतनी साफ़ नहीं है। वहाँ बराक ओबामा और हिलेरी क्लिंटन के बीच काँटे का मुक़ाबला दिखाई दे रहा है।
मंगलवार राष्ट्रपति चुनाव के लिए सबसे अहम दिन था और इसे सुपर ट्यूसडे कहा गया था क्योंकि इसी दिन दोनों प्रमुख पार्टियों के कोई 42 प्रतिशत प्रतिनिधि या डेलीगेट चुने जाने हैं।
इन प्रतिनिधियों का चुनाव उम्मीदवारों को मिले मतों के प्रतिशत के आधार पर होता है।
हर राज्य में चुने जाने वाले दोनों पार्टियों के प्रतिनिधि बाद में औपचारिक रुप से अपनी पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवारों का चयन करेंगे।
मैक्केन आगे
आरंभिक अनुमानों के आधार पर कहा जा रहा है कि रिपब्लिकन पार्टी के जॉन मैक्केन न्यूयॉर्क, न्यूजर्सी, कनेक्टिकट और डेलावेयर राज्यों में विजेता बनकर उभर रहे हैं।
न्यूयॉर्क शहर से ही रिपब्लिकन पार्टी के 87 प्रतिनिधि चुनकर आते हैं जबकि बाक़ी राज्यों से 97 प्रतिनिधि चुनकर आएँगे। वैसे मैक्केन के इलिनॉइस राज्य में जीतने की भी संभावना व्यक्त की गई है।
मैक्केन के निकटतम प्रतिद्वंद्वी मिट रॉमनी हैं जो अपने गृहराज्य मैसाच्युसेट्स में जीत की ओर बढ़ रहे हैं।
माइक हकबी को तीन राज्यों में जीत का दावेदार बताया गया है।
हिलेरी का संघर्ष
उधर डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से जब अनुमानों की घोषणा शुरु हुई तो बराक ओबामा के दो बड़े राज्यों में जीत की संभावानाओं की घोषणा हुई।
एक उनका अपना गृहराज्य इलिनोइस और दूसरा जॉर्जिया।
ओबामा और हिलेरी
ओबामा और हिलेरी शुरुआती दौर से ही बराबरी का संघर्ष कर रहे हैं
जॉर्जिया में अफ़्रीकी-अमरीकियों की संख्या काफ़ी है और अनुमान लगाया जा रहा था कि वे ओबामा को ही चुनेंगे। लेकिन एक अनुमान यह भी था कि स्थिति कहीं साउथ कैरोलाइना की तरह न हो जाए।
साउथ कैरोलाइना में भी अफ़्रीकी-अमरीकी बड़ी संख्या में हैं लेकिन उनमें से सिर्फ़ 24 प्रतिशत ने ओबामा के पक्ष में मतदान किया था। जॉर्जिया में उनके पक्ष में 43 प्रतिशत के आने की संभावना जताई गई है।
लेकिन इन अनुमानों के बाद हिलेरी क्लिंटन संघर्ष करती हुई आगे आते दिखाई दीं।
ओकलाहामा, और अरकन्सास में हिलेरी क्लिंटन की जीत की संभावनाएँ जताई गई है। अनुमान है कि वे न्यूयॉर्क और मैसाच्युसेट्स में भी जीतेंगीं।
वॉशिंगटन में बीबीसी संवाददाता ब्रजेश उपाध्याय के अनुसार अब तक के अनुमानों के अनुसार दोनों डेमोक्रेट उम्मीदवारों के चार-चार राज्यों में जीत के आसार बताए गए हैं। यानी टक्कर काँटे की है।
मतदान के दौरान हुए सर्वेक्षणों से पता चलता है कि रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार जॉन मैक्केन विजेता के रुप में उभर रहे हैं।
जबकि डेमोक्रेटिक पार्टी में बात इतनी साफ़ नहीं है। वहाँ बराक ओबामा और हिलेरी क्लिंटन के बीच काँटे का मुक़ाबला दिखाई दे रहा है।
मंगलवार राष्ट्रपति चुनाव के लिए सबसे अहम दिन था और इसे सुपर ट्यूसडे कहा गया था क्योंकि इसी दिन दोनों प्रमुख पार्टियों के कोई 42 प्रतिशत प्रतिनिधि या डेलीगेट चुने जाने हैं।
इन प्रतिनिधियों का चुनाव उम्मीदवारों को मिले मतों के प्रतिशत के आधार पर होता है।
हर राज्य में चुने जाने वाले दोनों पार्टियों के प्रतिनिधि बाद में औपचारिक रुप से अपनी पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवारों का चयन करेंगे।
मैक्केन आगे
आरंभिक अनुमानों के आधार पर कहा जा रहा है कि रिपब्लिकन पार्टी के जॉन मैक्केन न्यूयॉर्क, न्यूजर्सी, कनेक्टिकट और डेलावेयर राज्यों में विजेता बनकर उभर रहे हैं।
न्यूयॉर्क शहर से ही रिपब्लिकन पार्टी के 87 प्रतिनिधि चुनकर आते हैं जबकि बाक़ी राज्यों से 97 प्रतिनिधि चुनकर आएँगे। वैसे मैक्केन के इलिनॉइस राज्य में जीतने की भी संभावना व्यक्त की गई है।
मैक्केन के निकटतम प्रतिद्वंद्वी मिट रॉमनी हैं जो अपने गृहराज्य मैसाच्युसेट्स में जीत की ओर बढ़ रहे हैं।
माइक हकबी को तीन राज्यों में जीत का दावेदार बताया गया है।
हिलेरी का संघर्ष
उधर डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से जब अनुमानों की घोषणा शुरु हुई तो बराक ओबामा के दो बड़े राज्यों में जीत की संभावानाओं की घोषणा हुई।
एक उनका अपना गृहराज्य इलिनोइस और दूसरा जॉर्जिया।
ओबामा और हिलेरी
ओबामा और हिलेरी शुरुआती दौर से ही बराबरी का संघर्ष कर रहे हैं
जॉर्जिया में अफ़्रीकी-अमरीकियों की संख्या काफ़ी है और अनुमान लगाया जा रहा था कि वे ओबामा को ही चुनेंगे। लेकिन एक अनुमान यह भी था कि स्थिति कहीं साउथ कैरोलाइना की तरह न हो जाए।
साउथ कैरोलाइना में भी अफ़्रीकी-अमरीकी बड़ी संख्या में हैं लेकिन उनमें से सिर्फ़ 24 प्रतिशत ने ओबामा के पक्ष में मतदान किया था। जॉर्जिया में उनके पक्ष में 43 प्रतिशत के आने की संभावना जताई गई है।
लेकिन इन अनुमानों के बाद हिलेरी क्लिंटन संघर्ष करती हुई आगे आते दिखाई दीं।
ओकलाहामा, और अरकन्सास में हिलेरी क्लिंटन की जीत की संभावनाएँ जताई गई है। अनुमान है कि वे न्यूयॉर्क और मैसाच्युसेट्स में भी जीतेंगीं।
वॉशिंगटन में बीबीसी संवाददाता ब्रजेश उपाध्याय के अनुसार अब तक के अनुमानों के अनुसार दोनों डेमोक्रेट उम्मीदवारों के चार-चार राज्यों में जीत के आसार बताए गए हैं। यानी टक्कर काँटे की है।
Tuesday, February 5, 2008
अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव: 24 राज्यों में मतदान
अमरीका के राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी की दौड़ औपचारिक तौर पर लगभग एक महीने पहले शुरू हुई आयोवा से और मंगलवार को चौबीस राज्यों में डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन अपने उम्मीदवारों को चुनने के लिए वोट डाल रहे हैं।
अमरीका में कोई इसे 'सुपर ट्यूसडे' कह रहा है तो कोई 'सुपर-डुपर ट्यूसडे'।
रिपब्लिकन पार्टी की ओर से जॉन मैक्केन सबसे ज़्यादा दमदार नज़र आ रहे हैं वहीं डमोक्रेट्स की ओर से हिलेरी क्लिंटन और बराक ओबामा के बीच कांटे की टक्कर है।
वैसे तो ये माना जाता है कि इतने बड़े इस दंगल में जो जितने ज़्यादा हाथ मिला सके, जितने ज़्यादा दूसरे के बच्चों को चूम सके और जितना ज़्यादा पैसा खर्च कर सके, जीत उसी की होगी।
इस प्रक्रिया के पूरे होने के बाद दोनों पार्टियों की ओर से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों का निर्णय होगा और फिर शुरु होगा राष्ट्रपति पद का असली चुनाव।
यानी बड़ा सीधा सपाट सा मामला दिखता है लेकिन है बहुत ज़्यादा पेचीदा।
पेचीदगी
हर राज्य को उसकी जनसंख्या के आधार पर रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स पार्टियों ने प्रतिनिधि या डेलीगेट्स दिए हुए हैं और जिसे जितने प्रतिशत वोट मिले उतने प्रतिशत डेलीगेट उनके खाते में आए।
यानी अगर किसी राज्य में दस डेलिगेट हैं और बराक ओबामा को साठ प्रतिशत वोट मिले तो उन्हें छह डेलिगेट मिलेंगे और हिलेरी क्लिंटन को चार।
ये तो डेमोक्रेट्स का गणित है, और कुछ राज्यों में रिपब्लिकन का भी यही फ़ार्मूला है।
लेकिन बाक़ी राज्यों में रिपब्लिकन 'विनर टेक्स ऑल' यानी का फॉर्मूला मानते हैं यानी 'जो जीता सारे डेलिगेट्स उसी के'।
इसके अलावा सुपर डेलिगेट्स भी होते हैं यानी पार्टी के बड़े-बड़े अधिकारी जिन्हें वोट डालने का अधिकार होता है और इसलिए उनका दिल जीतने के लिए सभी उम्मीदवार इन दिनों उनके सामने बिछे रहते हैं।
और जब सभी राज्यों के चुनाव हो जाएंगे तो अगस्त और सितंबर में एक नेशनल कंवेंशन में ये डेलिगेट्स उम्मीदवार का फ़ैसला औपचारिक तौर पर करेंगे।
इस पूरी कवायद की ख़ास बात ये भी है कि आप पचास राज्यों में बहुमत हासिल कर भी लें लेकिन फिर भी आप हार सकते हैं।
कारण ये कि दूसरे के पास डेलिगेट्स ज़्यादा हो सकते हैं क्योंकि उसने कैलिफ़ोर्निया जैसे बड़े राज्य में जीत हासिल कर ली हो।
डेमोक्रेट्स में जो जीतेगा उसे 2025 डेलिगेट्स हासिल करने होंगे, और रिपब्लिकन उम्मीदवार को 1191।
न्यूयॉर्क विश्वविद्दालय में राजनीति शास्त्र के प्रोफ़सर प्रवीण चौधरी का कहना है कि ये मामला इतना पेचीदा है और इतने लंबे समय तक चलता है कि उम्मीदवार उसीमें फंसकर रह जाते हैं, कोई नई बात नहीं निकलती।
वैसे तो सुपर ट्यूसडे के बारे में माना यही जाता रहा है कि जिसने यहाँ जीत हासिल कर ली, उम्मीदवारी उसकी हुई लेकिन इस बार मुक़ाबला ऐसा है कि हो सकता है फ़ैसला अगस्त में ही जाकर हो।
टक्कर
डेमोक्रेट्स की ओर से आठ उम्मीदवार थे इस दौड़ में और सुपर ट्यूसडे तक केवल दो रह गए हैं, हिलैरी क्लिंटन और बराक ओबामा।
मैक्केन
रिपब्लिकन पार्टी की ओर से मैक्केन दौड़ में आगे दिख रहे हैं
टक्कर ऐसी है कि एक-एक डेलिगेट के लिए देश के एक कोने से दूसरे का चक्कर लगाए जा रहे हैं।
जहाँ हिलेरी अपने अनुभव को हथियार बना रही हैं, वहीं ओबामा देश को एकजुट करने की बात कर रहे हैं, बदलाव की बात कर रहे हैं।
रिपब्लिकन कैंप में अभी भी चार उम्मीदवार टिके हुए हैं लेकिन असली टक्कर जॉन मैक्केन और मिट रॉमनी के बीच है।
कुछ महीने पहले माना जा रहा था कि मैक्केन शायद ही कुछ कर पाएँ लेकिन अब ''मैक इज़ बैक'' का नारा पूरी तेज़ी पर है और उन्हें रोकने के लिए मिट रॉमनी रिपब्लिकन वोटरों को ये कहकर लुभा रहे हैं कि सही मायनों में रिपब्लिकन तो वही हैं।
डेमोक्रेट्स के लिए ये दौड़ एक मील का पत्थर साबित हो चुका है क्योंकि हिलैरी जीतें या ओबामा---एक महिला, दूसरा अफ़्रीकन-अमेरिकन यानी काला---अमरीका में आज तक ऐसा नहीं हुआ।
और दोनों में से अगर कोई व्हाइट हाउस की गद्दी पर बैठ गया तो अमरीका में एक नए इतिहास की शुरूआत होगी।
अमरीका में कोई इसे 'सुपर ट्यूसडे' कह रहा है तो कोई 'सुपर-डुपर ट्यूसडे'।
रिपब्लिकन पार्टी की ओर से जॉन मैक्केन सबसे ज़्यादा दमदार नज़र आ रहे हैं वहीं डमोक्रेट्स की ओर से हिलेरी क्लिंटन और बराक ओबामा के बीच कांटे की टक्कर है।
वैसे तो ये माना जाता है कि इतने बड़े इस दंगल में जो जितने ज़्यादा हाथ मिला सके, जितने ज़्यादा दूसरे के बच्चों को चूम सके और जितना ज़्यादा पैसा खर्च कर सके, जीत उसी की होगी।
इस प्रक्रिया के पूरे होने के बाद दोनों पार्टियों की ओर से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों का निर्णय होगा और फिर शुरु होगा राष्ट्रपति पद का असली चुनाव।
यानी बड़ा सीधा सपाट सा मामला दिखता है लेकिन है बहुत ज़्यादा पेचीदा।
पेचीदगी
हर राज्य को उसकी जनसंख्या के आधार पर रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स पार्टियों ने प्रतिनिधि या डेलीगेट्स दिए हुए हैं और जिसे जितने प्रतिशत वोट मिले उतने प्रतिशत डेलीगेट उनके खाते में आए।
यानी अगर किसी राज्य में दस डेलिगेट हैं और बराक ओबामा को साठ प्रतिशत वोट मिले तो उन्हें छह डेलिगेट मिलेंगे और हिलेरी क्लिंटन को चार।
ये तो डेमोक्रेट्स का गणित है, और कुछ राज्यों में रिपब्लिकन का भी यही फ़ार्मूला है।
लेकिन बाक़ी राज्यों में रिपब्लिकन 'विनर टेक्स ऑल' यानी का फॉर्मूला मानते हैं यानी 'जो जीता सारे डेलिगेट्स उसी के'।
इसके अलावा सुपर डेलिगेट्स भी होते हैं यानी पार्टी के बड़े-बड़े अधिकारी जिन्हें वोट डालने का अधिकार होता है और इसलिए उनका दिल जीतने के लिए सभी उम्मीदवार इन दिनों उनके सामने बिछे रहते हैं।
और जब सभी राज्यों के चुनाव हो जाएंगे तो अगस्त और सितंबर में एक नेशनल कंवेंशन में ये डेलिगेट्स उम्मीदवार का फ़ैसला औपचारिक तौर पर करेंगे।
इस पूरी कवायद की ख़ास बात ये भी है कि आप पचास राज्यों में बहुमत हासिल कर भी लें लेकिन फिर भी आप हार सकते हैं।
कारण ये कि दूसरे के पास डेलिगेट्स ज़्यादा हो सकते हैं क्योंकि उसने कैलिफ़ोर्निया जैसे बड़े राज्य में जीत हासिल कर ली हो।
डेमोक्रेट्स में जो जीतेगा उसे 2025 डेलिगेट्स हासिल करने होंगे, और रिपब्लिकन उम्मीदवार को 1191।
न्यूयॉर्क विश्वविद्दालय में राजनीति शास्त्र के प्रोफ़सर प्रवीण चौधरी का कहना है कि ये मामला इतना पेचीदा है और इतने लंबे समय तक चलता है कि उम्मीदवार उसीमें फंसकर रह जाते हैं, कोई नई बात नहीं निकलती।
वैसे तो सुपर ट्यूसडे के बारे में माना यही जाता रहा है कि जिसने यहाँ जीत हासिल कर ली, उम्मीदवारी उसकी हुई लेकिन इस बार मुक़ाबला ऐसा है कि हो सकता है फ़ैसला अगस्त में ही जाकर हो।
टक्कर
डेमोक्रेट्स की ओर से आठ उम्मीदवार थे इस दौड़ में और सुपर ट्यूसडे तक केवल दो रह गए हैं, हिलैरी क्लिंटन और बराक ओबामा।
मैक्केन
रिपब्लिकन पार्टी की ओर से मैक्केन दौड़ में आगे दिख रहे हैं
टक्कर ऐसी है कि एक-एक डेलिगेट के लिए देश के एक कोने से दूसरे का चक्कर लगाए जा रहे हैं।
जहाँ हिलेरी अपने अनुभव को हथियार बना रही हैं, वहीं ओबामा देश को एकजुट करने की बात कर रहे हैं, बदलाव की बात कर रहे हैं।
रिपब्लिकन कैंप में अभी भी चार उम्मीदवार टिके हुए हैं लेकिन असली टक्कर जॉन मैक्केन और मिट रॉमनी के बीच है।
कुछ महीने पहले माना जा रहा था कि मैक्केन शायद ही कुछ कर पाएँ लेकिन अब ''मैक इज़ बैक'' का नारा पूरी तेज़ी पर है और उन्हें रोकने के लिए मिट रॉमनी रिपब्लिकन वोटरों को ये कहकर लुभा रहे हैं कि सही मायनों में रिपब्लिकन तो वही हैं।
डेमोक्रेट्स के लिए ये दौड़ एक मील का पत्थर साबित हो चुका है क्योंकि हिलैरी जीतें या ओबामा---एक महिला, दूसरा अफ़्रीकन-अमेरिकन यानी काला---अमरीका में आज तक ऐसा नहीं हुआ।
और दोनों में से अगर कोई व्हाइट हाउस की गद्दी पर बैठ गया तो अमरीका में एक नए इतिहास की शुरूआत होगी।
Monday, February 4, 2008
रावलपिंडी में आत्मघाती हमला, 6 मरे
पाकिस्तान के रावलपिंडी शहर में सोमवार को एक बस पर हुए आत्मघाती हमले में कम से कम छह लोग मारे गए हैं जबकि आठ अन्य घायल हुए हैं।
इस बस में सुरक्षाकर्मी सवार थे। घायल होने वाले में आसपास से गुज़र रहे लोग भी शामिल हैं।
रावलपिंडी में पाकिस्तानी सेना का मुख्यालय है और वहाँ इससे पहले भी इस तरह के आत्मघाती हमले किए जा चुके हैं।
यह विस्फोट ऐसे समय में हुआ है जब पाकिस्तान में चुनाव को दो हफ़्तों से भी कम समय बचा है।
पुलिस का कहना है कि आत्मघाती हमलावर मोटरसाइकिल पर सवार था और उसने अपनी मोटर साइकिल सैन्यकर्मियों से भरी एक मिनीबस से टकरा दी।
उनका कहना है कि इस विस्फोट में बस के परखच्चे उड़ गए।
जिस समय यह हमला हुआ उस समय बस सेना के इंजीनियरिंग विभाग के पास थी और बाज़ार के पास से गुज़र रही थी।
समाचार एजेंसी एपी के अनुसार इस विस्फोट से आसपास के कई वाहनों को नुक़सान पहुँचा है और वहाँ से गुज़र रहे लोग भी घायल हुए हैं।
पिछले एक साल में रावलपिंडी में कई आत्मघाती हमले हुए हैं जिसमें एक बार सैन्य कर्मचारियों को ले जा रही बस पर आत्मघाती हमला शामिल है।
उल्लेखनीय है कि रावलपिंडी में ही गत 27 दिसंबर को पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो की हत्या कर दी गई थी।
रावलपिंडी राजधानी इस्लामाबाद से 12 किलोमीटर दूर है। राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ भी इसी शहर में रहते हैं।
इस बस में सुरक्षाकर्मी सवार थे। घायल होने वाले में आसपास से गुज़र रहे लोग भी शामिल हैं।
रावलपिंडी में पाकिस्तानी सेना का मुख्यालय है और वहाँ इससे पहले भी इस तरह के आत्मघाती हमले किए जा चुके हैं।
यह विस्फोट ऐसे समय में हुआ है जब पाकिस्तान में चुनाव को दो हफ़्तों से भी कम समय बचा है।
पुलिस का कहना है कि आत्मघाती हमलावर मोटरसाइकिल पर सवार था और उसने अपनी मोटर साइकिल सैन्यकर्मियों से भरी एक मिनीबस से टकरा दी।
उनका कहना है कि इस विस्फोट में बस के परखच्चे उड़ गए।
जिस समय यह हमला हुआ उस समय बस सेना के इंजीनियरिंग विभाग के पास थी और बाज़ार के पास से गुज़र रही थी।
समाचार एजेंसी एपी के अनुसार इस विस्फोट से आसपास के कई वाहनों को नुक़सान पहुँचा है और वहाँ से गुज़र रहे लोग भी घायल हुए हैं।
पिछले एक साल में रावलपिंडी में कई आत्मघाती हमले हुए हैं जिसमें एक बार सैन्य कर्मचारियों को ले जा रही बस पर आत्मघाती हमला शामिल है।
उल्लेखनीय है कि रावलपिंडी में ही गत 27 दिसंबर को पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो की हत्या कर दी गई थी।
रावलपिंडी राजधानी इस्लामाबाद से 12 किलोमीटर दूर है। राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ भी इसी शहर में रहते हैं।
Saturday, February 2, 2008
श्रीलंका में विस्फोट, बीस मारे गए
मध्य श्रीलंका के दंबुला शहर में एक बस को निशाना बनाकर किए गए विस्फोट में कम से कम बीस लोग मारे गए हैं और पचास अन्य घायल हैं।
पुलिस का कहना है कि ये विस्फोट दंबुला के बस पड़ाव में हुआ। यात्री बस कैंडी से अनुराधापुरा जा रही थी और इस बस पड़ाव पर इसका ठहराव था।
ये विस्फोट सोमवार को श्रीलंका के साठवें स्वतंत्रता दिवस समारोहों से पहले हुआ है।
श्रीलंका सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर उदय नानायक्करा ने विस्फोट के लिए तमिल विद्रोहियों यानी एलटीटीई को ज़िम्मेदार ठहराया है।
हालाँकि तमिल विद्रोहियों की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। इस वर्ष जनवरी से ही श्रीलंका में कई तरह के बम धमाके हुए हैं।
श्रीलंका सेना और तमिल विद्रोहियों के बीच वर्ष 2002 में हुआ संघर्ष विराम समझौता जनवरी में ही औपचारिक रूप से ख़त्म हो चुका है।
कुछ दिनों पहले ही मन्नार में एक बस में भीषण बम विस्फोट हुआ था जिसमें कम से कम 18 लोग मारे गए थे।
पुलिस का कहना है कि ये विस्फोट दंबुला के बस पड़ाव में हुआ। यात्री बस कैंडी से अनुराधापुरा जा रही थी और इस बस पड़ाव पर इसका ठहराव था।
ये विस्फोट सोमवार को श्रीलंका के साठवें स्वतंत्रता दिवस समारोहों से पहले हुआ है।
श्रीलंका सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर उदय नानायक्करा ने विस्फोट के लिए तमिल विद्रोहियों यानी एलटीटीई को ज़िम्मेदार ठहराया है।
हालाँकि तमिल विद्रोहियों की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। इस वर्ष जनवरी से ही श्रीलंका में कई तरह के बम धमाके हुए हैं।
श्रीलंका सेना और तमिल विद्रोहियों के बीच वर्ष 2002 में हुआ संघर्ष विराम समझौता जनवरी में ही औपचारिक रूप से ख़त्म हो चुका है।
कुछ दिनों पहले ही मन्नार में एक बस में भीषण बम विस्फोट हुआ था जिसमें कम से कम 18 लोग मारे गए थे।
Friday, February 1, 2008
ओबामा और हिलेरी आमने-सामने
अमरीका में डेमोक्रैटिक पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी के दावेदार बराक ओबामा और हिलेरी क्लिंटन पहली बार टेलीविज़न पर आमने-सामने हुए।
डेमोक्रैट जॉन एडवर्ड्स राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी की होड़ से हट चुके हैं और अब सीधा मुक़ाबला अमरीकी-अफ़्रीकी मूल के ओबामा और पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की पत्नी सीनेटर हिलेरी क्लिंटन के बीच है।
उधर रिपब्लिकन पार्टी में भी राष्ट्रपति चुनाव के लिए टिकट पाने की होड़ तेज़ हो गई है। कैलीफोर्निया के गवर्नर आर्नोल्ड श्वार्ज़नेगर ने जॉन मैककेन को अपना समर्थन दिया है।
दावेदारी हासिल करने की होड़ से बाहर हो चुके रिपब्लिकन रूडी जुलियानी ने भी मैककेन को ही अपना समर्थन दिया है।
इससे मंगलवार को 24 प्रांतों में एकसाथ उम्मीदवार तय करने के लिए होने वाले चुनाव (सुपर ट्यूज़डे) में मैककेन की दावेदारी मज़बूत मानी जा रही है।
इराक़ बना मुद्दा
बराक ओबामा और हिलेरी क्लिंटन के बीच टेलीविज़न पर हुई पहली बहस में इराक़ युद्ध का मुद्दा फिर उभरा।
ओबामा ने दावा किया कि इराक़ में संघर्ष ख़त्म करने के लिए वह सबसे सही राष्ट्रपति साबित होंगे।
दूसरी ओर हिलेरी क्लिंटन ने कहा कि वो राष्ट्रपति बनीं तो जल्द से जल्द इराक़ से अमरीकी सेना वापस बुला लेंगी।
इससे पहले दोनों नेताओं ने उम्मीदवारी की आपसी होड़ से इतर हटते हुए कहा कि नीतिगत मसलों पर मुख्य मतभेद उनके बीच नहीं है बल्कि डेमोक्रैटिक पार्टी और रिपब्लिकन पार्टी के बीच है।
डेमोक्रैट जॉन एडवर्ड्स राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी की होड़ से हट चुके हैं और अब सीधा मुक़ाबला अमरीकी-अफ़्रीकी मूल के ओबामा और पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की पत्नी सीनेटर हिलेरी क्लिंटन के बीच है।
उधर रिपब्लिकन पार्टी में भी राष्ट्रपति चुनाव के लिए टिकट पाने की होड़ तेज़ हो गई है। कैलीफोर्निया के गवर्नर आर्नोल्ड श्वार्ज़नेगर ने जॉन मैककेन को अपना समर्थन दिया है।
दावेदारी हासिल करने की होड़ से बाहर हो चुके रिपब्लिकन रूडी जुलियानी ने भी मैककेन को ही अपना समर्थन दिया है।
इससे मंगलवार को 24 प्रांतों में एकसाथ उम्मीदवार तय करने के लिए होने वाले चुनाव (सुपर ट्यूज़डे) में मैककेन की दावेदारी मज़बूत मानी जा रही है।
इराक़ बना मुद्दा
बराक ओबामा और हिलेरी क्लिंटन के बीच टेलीविज़न पर हुई पहली बहस में इराक़ युद्ध का मुद्दा फिर उभरा।
ओबामा ने दावा किया कि इराक़ में संघर्ष ख़त्म करने के लिए वह सबसे सही राष्ट्रपति साबित होंगे।
दूसरी ओर हिलेरी क्लिंटन ने कहा कि वो राष्ट्रपति बनीं तो जल्द से जल्द इराक़ से अमरीकी सेना वापस बुला लेंगी।
इससे पहले दोनों नेताओं ने उम्मीदवारी की आपसी होड़ से इतर हटते हुए कहा कि नीतिगत मसलों पर मुख्य मतभेद उनके बीच नहीं है बल्कि डेमोक्रैटिक पार्टी और रिपब्लिकन पार्टी के बीच है।
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