राष्ट्रपति बुश ने अमरीका की अर्थव्यवस्था को मज़बूत बनाने और उसमें तेज़ी लाने के लिए लगभग डेढ़ सौ अरब डॉलर के विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा की है।
दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले अमरीका को इन दिनों आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है और इसके लिए सरकार को अब विशेष आर्थिक पैकेज लाना पड़ा है।
उन्होंने कहा कि इस पैकेज को इतना बड़ा बनाना होगा कि जिससे इस विशाल अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थिति में एक बड़ा बदलाव आ सके।
उन्होंने कहा कि ऐसे कुछ बिंदु हैं जिनपर ख़ासतौर पर ध्यान देने की ज़रूरत है, साथ ही व्यापार के लिए राजकोषीय प्रोत्साहन भी होना चाहिए ताकि रोज़गार पैदा हों और निवेश को बढ़ावा मिले।
उन्होंने अमरीकी नागरिकों के लिए तत्काल आयकर राहत की भी बात कही जिसकी मदद से लोगों को महंगाई से निपटने में मदद मिल सके।
व्हाइट हाउस के हवाले से बताया गया है कि यह आर्थिक पैकेज अमरीका के सकल घरेलू उत्पाद का एक प्रतिशत या फिर लगभग 145 अरब अमरीकी डॉलर का हो सकता है।
पैकेज के बारे में घोषणा करते हुए राष्ट्रपति बुश ने कहा कि यह पैकेज बुनियादी तौर पर मज़बूत अमरीकी अर्थव्यवस्था के हाथ में एक इंजेक्शन लगाने की तरह है ताकि उसे स्वस्थ रखा जा सके।
संकट
पिछले दिनों एक सरकारी रिपोर्ट में कहा गया था कि अमरीका में बेरोज़गारी की दर दो साल में सबसे अधिक हो गई है।
अमरीकी राष्ट्रपति बुश
यह पैकेज बुनियादी तौर पर मज़बूत अमरीकी अर्थव्यवस्था के हाथ में एक इंजेक्शन लगाने की तरह है ताकि उसे स्वस्थ रखा जा सके
अमरीकी केंद्रीय बैंक के प्रमुख बेन बरनांके पहले ही यह कह चुके हैं कि वो करों में छूट और निवेशकों को बेहतर ऋण सुविधा देने के पक्ष में हैं। उन्होंने अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए ब्याज़ दरों में और कटौती की ज़रुरत बताई थी।
बेन के बयान को अमरीका में आर्थिक मंदी के संकेत के रुप में देखा जा रहा है और महंगाई बढ़ने की आशंका के रुप में भी।
ग़ौरतलब है कि इस दिशा में राष्ट्रपति बुश, दोनों पार्टियों के संसद सदस्यों और आर्थिक मामलों से जुड़े अधिकारियों के बीच गुरुवार को बातचीत हो चुकी है।
इस बातचीत के बाद इस बात पर सहमति बन गई थी कि अमरीकी अर्थव्यवस्था के सामने पैदा हुए संकट से उबरने के लिए एक पैकेज की ज़रूरत है।
पैकेज क्या होगा और किन बातों पर आधारित होगा, इसके बारे में गुरुवार को कोई घोषणा नहीं की गई थी। शुक्रवार को इस बारे में आगे की जानकारी राष्ट्रपति की ओर से जारी की गई।
Saturday, January 19, 2008
अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए पैकेज
Friday, January 18, 2008
अमरीकाः आर्थिक पैकेज पर सहमति
अमरीका में इस बात को लेकर आम सहमति बन गई है कि अमरीकी अर्थव्यवस्था के सामने पैदा हुए संकट से उबरने के लिए एक पैकेज की ज़रूरत है।
इस बारे में अमरीकी राष्ट्रपति, आर्थिक मामलों के वरिष्ठ अधिकारियों और दोनों राजनीतिक दलों के सांसदों की आपस में बातचीत भी हुई।
अभी तक की बातचीत के बाद इस बात पर सहमति बन गई है कि अमरीकी अर्थव्यव्स्था में नई जान फूंकने के लिए एक नया आर्थिक पैकेज तैयार करने की ज़रूरत है।
हालांकि आर्थिक पैकेज क्या होगा और क्या क़दम उठाए जाएंगे, इसके बारे में कोई स्पष्ट विवरण अभी तक जारी नहीं किया गया है।
जानकारी के मुताबिक़ शुक्रवार को इस बारे में राष्ट्रपति बुश अपनी योजना सामने रखेंगे।
गुरुवार की बैठक के बाद व्हाइट हाउस प्रवक्ता, टोनी फ्रैटो ने बताया कि जो भी क़दम उठाए जाएंगे, वो ठोस होंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस दिशा में तत्काल काम किया जाएगा।
डेमोक्रेट पार्टी के नेता डेविड स्कॉट ने भी ऐसा किए जाने की हिमायत की है।
संकट
उधर अमरीकी शेयर बाज़ार में भी कल मंदी देखी गई और न्यूयोर्क शेयर बाज़ार दो प्रतिशत नीचे बंद हुआ।
अमरीकी केंद्रीय बैंक के प्रमुख बेन बरनांके पहले ही यह कह चुके हैं कि वो करों में छूट और निवेशकों को बेहतर ऋण सुविधा देने के पक्ष में हैं। उन्होंने अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए ब्याज़ दरों में और कटौती की ज़रुरत बताई थी।
बेन के बयान को अमरीका में आर्थिक मंदी के संकेत के रुप में देखा जा रहा है और महंगाई बढ़ने की आशंका के रुप में भी।
पिछले दिनों एक सरकारी रिपोर्ट में कहा गया था कि अमरीका में बेरोज़गारी की दर दो साल में सबसे अधिक हो गई है।
Thursday, January 17, 2008
इराक़ के आर्थिक विकास की तारीफ़
अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ़) और संयुक्त राष्ट्र ने इराक़ के आर्थिक और राजनीतिक विकास की तारीफ़ की है।
आईएमएफ़ के मध्यपूर्व और मध्य एशिया विभाग के निदेशक मोहसिन ख़ान का कहना है कि अगले साल इराक़ के विकास में महत्वपूर्ण तेज़ी दिख सकती है।
दूसरी ओर इराक़ में संयुक्त राष्ट्र के दूत स्टैफ़न डेमिस्टूरा ने कहा है कि वे इराक़ में चल रहे राजनीतिक चर्चाओं से उत्साहित हैं और इसके लिए सरकार को बधाई देना चाहते हैं।
दो अहम अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की ये टिप्पणियाँ संयोगवश ऐसे समय पर आई हैं जब इराक़ के पिछले कुछ सप्ताह अपेक्षाकृत अच्छे गुज़रे हैं।
पिछले कुछ हफ़्तों में इराक़ में हिंसा की घटनाओं में काफ़ी कमी दिख रही है।
अर्थव्यवस्था
आईएमएफ़ ने इराक़ की अर्थव्यवस्था की एक चमकदार तस्वीर पेश की है।
संस्था का कहना है कि उसे उम्मीद है कि इस साल इराक़ के आर्थिक विकास की दर सात प्रतिशत तक होगी और यही दर अगले साल भी बनी रहेगी।
आईएमएफ़ ने कहा है कि तेल के निर्यात से भी तेज़ी आने जा रही है और यह दो लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुँच सकता है।
इससे इराक़ को होने वाली आय में भी बढ़ोत्तरी होगी।
लेकिन इसके साथ ही आईएमएफ़ ने स्पष्ट किया है कि इस विकास के बावजूद इराक़ को आर्थिक सहायता की ज़रुरत पड़ती रहेगी, ख़ासकर सुरक्षा के मामले में।
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अमरीकी सैनिकों की संख्या बढ़ने के बाद से तेल ठिकानों पर चरमपंथियों के हमले कम हुए हैं।
लेकिन अभी भी तेल से होने वाली आय के वितरण के क़ानून बनाने की बाधा खड़ी हुई है।
राजनीतिक चर्चाएँ
अर्थव्यवस्था के तेज़ी से बढ़ने की ख़बरों के बीच इराक़ में संयुक्त राष्ट्र के दूत ने राजनीतिक स्थितियों पर भी उत्साहवर्धक टिप्पणियाँ की हैं।
सद्दाम हुसैन
सद्दाम हुसैन की पार्टी के पुराने सदस्यों को नौकरियाँ लौटाई जा रही हैं
शिया और सुन्नियों के बीच चल रही चर्चा को उन्होंने उत्साहजनक बताते हुए कहा है कि इस साल की शुरुआत से उनका दृष्टिकोण लगातार बदला है।
उन्होंने 2008 को इराक़ के लिए महत्वपूर्ण वर्ष बताया है।
पिछले शनिवार को बने नए क़ानून को परिदृष्य बदलने वाला बताया है। इस क़ानून के तहत सद्दाम हुसैन की बाथ पार्टी के पुराने सदस्यों की नौकरी बहाल करने का फ़ैसला किया गया है।
अमरीकी हमले के बाद से उन्हें नौकरियों से हटा दिया गया था और बाथ पार्टी के लोगों को नौकरी पाने का हक़ नहीं था।
इस फ़ैसले के बाद से दोनों गुटों के बीच चल रही हिंसा में कमी देखी जा रही है।
लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस बदलाव का दारोमदार अगले छह से बारह महीनों में होने वाली राजनीतिक सहमतियों में आने वाली तेज़ी पर भी बहुत कुछ निर्भर करेगा।
Wednesday, January 16, 2008
बस धमाके में बीस से ज़्यादा मारे गए
श्रीलंका के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में एक बस में हुए ज़बर्दस्त विस्फोट में कम से कम 20 लोग मारे गए हैं और कई अन्य घायल हुए हैं।
इस तरह की ख़बरें आ रही हैं कि बस में कई बच्चे भी सवार थे।
श्रीलंकाई रक्षा मंत्रालय ने विस्फोट के लिए तमिल विद्रोही संगठन एलटीटीई को ज़िम्मेदार ठहराया है।
ये धमाका ऐसे समय में हुआ है जब श्रीलंका सरकार और तमिल विद्रोहियों के बीच छह वर्ष पहले हुआ संघर्ष विराम समझौता ख़त्म हो रहा है।
अस्पताल के अधिकारियों का कहना है कि विस्फोट के बाद लगभग 50 घायल लोगों को भर्ती कराया गया है।
एलटीटीई की तरफ़ से अभी तक कोई बयान नहीं आया है। हालाँकि इससे पहले हुए धमाकों में हाथ होने से तमिल विद्रोही इनकार करते रहे हैं।
श्रीलंकाई सेना और एलटीटीई के बीच वर्ष 2002 में संघर्ष विराम समझौता हुआ था लेकिन पिछले वर्ष से दोनों पक्षों के बीच झड़पें तेज हो गईं थी।
इसे देखते हुए लगभग 15 दिन पहले श्रीलंका सरकार ने समझौते को रद्द करने का फ़ैसला किया जो बुधवार से लागू होगा।
श्रीलंका में अस्सी के दशक से जारी हिंसा में अब तक 70 हज़ार से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं।
Tuesday, January 15, 2008
सऊदी अरब के दौरे पर राष्ट्रपति बुश
मध्य पूर्व देशों का दौरा कर रहे अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के सऊदी अरब पहुंचने के कुछ ही घंटों में अमरीकी प्रशासन ने सऊदी अरब को बड़े पैमाने पर हथियार बेचने की रज़ामंदी दे दी है।
अमरीकी प्रशासन ने कहा है कि सऊदी अरब को हथियार बेचने की मंशा से कांग्रेस को अवगत कराया गया है।
अमरीका और खाड़ी देशों के बीच हथियारों की बिक्री का अरबों डॉलर का सौदा है जिसके तहत सऊदी अरब को आधुनिकतम हथियार बेचे जाने हैं।
इस सौदे के तहत अमरीका सऊदी अरब को सही निशाने पर बम गिराने की तकनीक भी देने वाला है जिसकी क़ीमत क़रीब 10 करोड़ 23 लाख डॉलर आंकी गई है।
अमरीका ने हथियारों की बिक्री को आगे बढ़ाने का फ़ैसला ऐसे समय मे लिया है जब राष्ट्रपति बुश ने सऊदी अरब से ईरान पर लगाम कसने में मदद मांगी है।
हालांकिे कूटनीतिक मामलों का कहना है कि अमरीका और सऊदी अरब के बीच इस बात को लेकर मतभेद हैं कि ईरान के साथ कैसे निपटा जाए।
जहां अमरीका ईरान के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई करने का पक्ष लेता रहा है वहीं सऊदी अरब का कहना है कि ईरान को साथ मिलाकर चलने की कोशिश करनी चाहिए और देखना चाहिए कि ईरान से कहां तक बात की जा सकती है।
बुश की सऊदी अरब यात्रा के दौरान दोनों देशों के नेताओं के बीच ऊरान के अलावा इस्राइल और फ़लस्तीनी शांति प्रक्रिया के बारे में भी बातचीत होने की उम्मीद है क्योंकि पिछले कुछ समय में बुश शांति प्रक्रिया शुरु कराने की कोशिश में है जिसके लिए उन्हें अरब देशों का समर्थन भी चाहिए।
Monday, January 14, 2008
'चीन के साथ संबंधों को उच्च प्राथमिकता'
भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ के साथ अनौपचारिक बातचीत कर अपने दौरे की शुरुआत की है। इस दौरान दोनों ओर के चुनिंदा लोग ही मौजूद थे।
भारत की ओर से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन, विदेश सचिव शिवशंकर मेनन और चीन में भारत की राजदूत निरुपमा सुब्रमण्यम मौजूद थीं।
रविवार को मनमोहन सिंह ने उन स्थानों का भी दौरा किया जहाँ ओलंपिक खेल होने वाले हैं।
वो सोमवार को चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ और राष्ट्रपति हू जिंताओ से औपचारिक बातचीत करेंगे।
समाचार एजेंसियों का कहना है कि इस दौरान व्यापार को बढ़ावा देने के अलावा सीमा विवाद पर भी चर्चा होगी।
चीन के प्रधानमंत्री से मुलाक़ात से पहले प्रधानमंत्री सिंह ने कहा है कि भारत और चीन के संबंधों का नया दौर शुरू होने जा रहा है।
भारत और चीन के संबंधों का नया दौर शुरू होने जा रहा है और हम चीन के साथ संबंधों को मजबूत करने को उच्च प्राथमिकता देते हैं
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह
उनका कहना था कि हम चीन के साथ संबंधों को मजबूत करने को उच्च प्राथमिकता देते हैं।
प्रधानमंत्री सिंह का कहना था कि चीन भारत का सबसे बड़ा पड़ोसी देश है और वह भारत की पूर्वोन्मुख नीति के केंद्र में है।
प्रधानमंत्री के रूप में मनमोहन सिंह पहली बार चीन के दौरे पर हैं और पाँच साल में यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली चीन यात्रा है।
भारतीय प्रधानमंत्री की चीन यात्रा ऐसे समय पर हो रही है जब दोनों ही देशों की अर्थव्यवस्था तेज़ी से बढ़ रही है।
हालांकि यह भी तथ्य है कि 1962 के युद्ध के बाद से शुरु हुआ सीमा विवाद अब भी दोनों देशों के बीच संदेह का कारण बना हुआ है।
हिंदी के लिए सहायता
हिंदी सीखने के लिए चीन के युवाओं में दिखे उत्साह से प्रभावित प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने प्रतिष्ठित पीकिंग विश्वविद्यालय में इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडियन स्टडीज़ को 75 लाख रुपए देने की घोषणा की।
दोनों देशों के बीच सीमा विवाद पर भी चर्चा होगी
प्रधानमंत्री ने हिंदी में चीन के प्रोफ़ेसरों से उनका हालचाल जाना।
यह संस्थान चीन में भारतीय संस्कृति और हिंदी भाषा के प्रचार के लिए लंबे वक्त से काम कर रहा है।
साथ ही प्रधानमंत्री ने 2008 बीजिंग ओलंपिक खेलों के प्रस्तावित स्थल का दौरा किया। उन्होंने वहां तैयारियों का जायजा भी लिया।
प्रधानमंत्री ने ओलंपिक गाँव में करीब आधा घंटा बिताया और अपने संदेश में भारत की जनता और सरकार की ओर से इस आयोजन की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं।