Saturday, February 23, 2008

आज हो सकती है प्रधानमंत्री की घोषणा

पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) आज प्रधानमंत्री के नाम की घोषणा कर सकती है। इस पद के दावेदारों में मख़दूम अमीन फ़हीम सबसे आगे चल रहे हैं।

प्रधानमंत्री चुनने के लिए पीपीपी के सह अध्यक्ष आसिफ़ अली ज़रदारी की अगुआई में शुक्रवार को देर रात तक बैठक चली लेकिन कोई निर्णय नहीं लिया जा सका।

ज़रदारी ख़ुद प्रधानमंत्री नहीं बनने की घोषणा पहले ही कर चुके हैं।

उल्लेखनीय है कि नेशनल असेंबली के लिए हुए चुनाव में सबसे ज़्यादा सीटें हासिल करने वाली पीपीपी और पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) ने साझा सरकार बनाने का फ़ैसला किया है।

पीपीपी नेताओं ने बैठक के बाद पत्रकारों से कहा, "प्रधानमंत्री कौन होगा इसकी घोषणा शनिवार सुबह तक कर दी जाएगी।"

कराची सेप्रधानमंत्री पद की होड़ में पीपीपी के वरिष्ठ नेता मख़दूम अमीन फ़हीम सबसे आगे चल रहे हैं।

उनका कहना है कि राजनीतिक गलियारों में मख़दूम फ़हीम के नाम की चर्चा ज़ोरों पर है।

नया पेंच

पाकिस्तान में चुनावी नतीजे तो आ चुके हैं लेकिन ये अनाधिकारिक हैं।

पाकिस्तान सरकार ने अभी तक चुनावी नतीजों की अधिसूचना जारी नहीं की है और ऐसा कब तक होगा ये भी तय नहीं है।

चुनावों में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के रुप में उभरी पीएमल (एन) के नेता नवाज़ शरीफ़ कह चुके हैं जनादेश राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ है और उन्हें इस्तीफ़ा दे देना चाहिए।

हालाँकि परवेज़ मुशर्रफ़ के प्रवक्ता मेजर जनरल राशिक कुरैशी ने कहा कि पीएमल (एन) को छोड़ कर किसी और पार्टी ने ये नहीं कहा है कि वो राष्ट्रपति के साथ काम नहीं करेंगे।

Friday, February 22, 2008

बेलग्रेड में अमरीकी दूतावास पर हमला

कोसोवो को स्वतंत्र राष्ट्र का दर्जा देने का विरोध कर रहे लोगों ने सर्बिया की राजधानी बेलग्रेड में पश्चिमी देशों के कई दूतावासों को अपना निशाना बनाया है।

सबसे बड़ा हमला अमरीकी दूतावास पर हुआ है। नक़ाब पहने प्रदर्शनकारियों ने दूतावास के एक हिस्से में आग लगा दी।

दूतावास परिसर से एक बुरी तरह जला हुआ शव मिला है। हालाँकि अभी तक मृत व्यक्ति की पहचान नहीं हो पाई है।

एक वरिष्ठ अमरीकी अधिकारी का कहना है कि दूतावास के सभी अमरीकी कर्मचारी संपर्क में हैं और हो सकता है कि जला हुआ शव अंदर घुसे किसी प्रदर्शनकारी का हो।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने इन घटनाओं की निंदा की है।

उधर अमरीका ने आरोप लगाया है कि सर्बिया सरकार ने उसके दूतावास को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया नहीं कराई।

अमरीका के अलावा ब्रिटेन, बेल्जियम, क्रोएशिया और तुर्की के दूतावासों पर भी हमले हुए हैं।

बेलग्रेड स्थित सर्बियाई संसद के बाहरी इलाक़ों में धुएँ का गुबार देखा जा सकता है। सुरक्षाकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए आँसू गैस के गोले छोड़े हैं।

विरोध

उल्लेखनीय है कि जर्मनी और अमरीका के अलावा कई देशों ने कोसोवो की संसद के उस प्रस्ताव को समर्थन दिया है जिसमें उन्होंने आज़ादी की घोषणा कर दी है।

इस मसले पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में और बाद में यूरोपीय संघ में भी मतभेद खुल कर सामने आ चुके हैं।

बेलग्रेड में बीबीसी संवाददाता का कहना है कि संसद के बाहर हज़ारों की संख्या में प्रदर्शनकारी सर्बिया के प्रधानमंत्री का भाषण सुनने जुटे जहां प्रधानमंत्री ने एक भावुक भाषण दिया।

अपने भाषण में प्रधानमंत्री वोजिस्लाव कोस्तुनिका ने कोसोवो की आज़ादी की घोषणा की कड़ी निंदा की और कहा कि पश्चिमी देश सिर्फ सर्बिया पर दबाव डाल रहे हैं कि वो अपनी पहचान छोड़ दे।

उल्लेखनीय है कि सर्बिया के लोग कोसोवो को अपनी पहचान से जो़ड़कर देखते हैं।

1990 के दशक में यूगोस्लाविया के विभाजन के बाद मुख्य रुप से तीन देश बने क्रोएशिया, सर्बिया और बोस्निया हर्जेगोविना।

कोसोवो सर्बिया का एक हिस्सा है जो बहुत पहले से ही सर्बिया से अलग होने के लिए लड़ता रहा है और क़रीब छह सात साल पहले इसे संयुक्त राष्ट्र के अधीन घोषित कर दिया गया था।

अब कोसोवो की संसद ने खुद को आज़ाद घोषित कर दिया है जिसे पश्चिमी देशों का समर्थन मिल रहा है। इससे सर्बिया काफ़ी नाराज़ है और उसे रुस का समर्थन मिला हुआ है।

Thursday, February 21, 2008

ज़रदारी- नवाज़ की आज अहम मुलाक़ात

पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के नेता आसिफ़ अली ज़रदारी और नवाज़ शरीफ़ के बीच आज अहम बैठक हो रही है जिसमें गठबंधन सरकार बनाने पर चर्चा होगी।

दोनों दल पहले ही इस बात के संकेत दे चुके हैं वो सत्ता में साझीदारी कर सकते हैं।

दोनों दलों के शीर्ष नेताओं की बैठक में राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के भविष्य पर भी चर्चा हो सकती है क्योंकि नवाज़ शरीफ़ लगातार मुशर्रफ़ के इस्तीफ़े की माँग करते आ रहे हैं।

संभावित गठबंधन सरकार में प्रधानमंत्री कौन होगा, इस पर भी दोनों नेता चर्चा कर सकते हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो के पति आसिफ़ अली ज़रदारी खुद को प्रधानमंत्री पद की दौड़ से बाहर कर चुके हैं।

उन्होंने कहा है कि उनकी पार्टी जल्दी ही अपना उम्मीदवार चुनेगी जो गठबंधन सरकार की अगुआई करेगा।

नतीजे

पाकिस्तान के संसदीय चुनावों में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) सबसे बड़े दल के रुप में उभरी है। दूसरे पायदान पर पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) है।

इन चुनावों में राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के समर्थक दलों की करारी हार हुई है।

पाकिस्तानी संसद के निचले सदन यानी नेशनल असेंबली की 272 सीटों में पीपीपी को 87 सीटें मिली हैं और पीएमएल (एन) को 66 सीटों पर सफलता प्राप्त हुई है।

अगर दोनों दल आपस में हाथ मिलाते हैं तो सरकार बनाने लायक बहुमत आसानी से मिल जाएगी।

Wednesday, February 20, 2008

इस्तीफ़े की कोई योजना नहीं: मुशर्रफ़

पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने स्पष्ट कर दिया है कि संसदीय चुनावों में विपक्ष की जीत के बावजूद उनके इस्तीफ़ा देने की कोई योजना नहीं है।

उन्होंने कहा,'' इस समय पाकिस्तान में स्थिर लोकतांत्रिक सरकार स्थापित करने की ज़रूरत है।''

दूसरी ओर पाकिस्तान में सरकार बनाने की कोशिशें तेज़ हो गईं हैं।

ख़बरें हैं कि पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के नेता आसिफ़ अली ज़रदारी और पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) के नवाज़ शरीफ़ के बीच बुधवार को बैठक होनी है जिसमें गठबंधन सरकार के संबंध में बातचीत होगी।

ख़बर है कि सूबा सरहद में सफल रही अवामी नेशनल पार्टी के नेता भी इस बातचीत में शामिल होंगे।

इस समय पाकिस्तान में स्थिर लोकतांत्रिक सरकार स्थापित करने की ज़रूरत है

राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़

इसके पहले पाकिस्तान चुनाव में सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी के तौर पर उभर कर सामने आई पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी और दूसरे नंबर पर रही पीएमएल (नवाज़) के नेताओं के कहा है कि वे गठबंधन सरकार बनाने के लिए राज़ी हैं।

नतीजों के मुताबिक पीपीपी को 87 और पीएमएल (नवाज़) को 66 सीटें मिली हैं।

अगर ये दोनों पार्टियाँ मिलकर सरकार बनाती हैं तो दोनों के पास संसद की आधी से ज़्यादा सीटें होंगी।

मंगलवार को एक संवाददाता सम्मेलन में पीपीपी के नेता और बेनज़ीर भुट्टो के पति आसिफ़ अली ज़रदारी ने कहा है कि उनकी पार्टी ऐसी सरकार बनाएगी जो सभी लोकतांत्रिक शक्तियों को साथ लेकर चलेगी।

एकजुट होने का आह्वान

दूसरी ओर नवाज़ शरीफ़ कहा है कि लोकतांत्रिक शक्तियों को एकजुट होना चाहिए ताकि ‘तानाशाही’ का अंत किया जा सके।

नवाज़ शरीफ़ ने कहा कि वो बेनज़ीर भुट्टो की पार्टी पीपीपी के नेता आसिफ़ अली ज़रदारी से मिलेंगे।


नवाज़ शरीफ़ की पार्टी दूसरे नंबर पर रही हैं

उनका कहना था, " मैं लोगों की भावना की कद्र करता हूँ। लोगों ने अपना मत ज़ाहिर कर दिया है। लेकिन मुशर्रफ़ को ये बात समझ में नहीं आ रही थी। उन्होंने अपनी आँखें बंद कर रखीं थीं। उनका कहना था कि जब लोग चाहेंगे वो चले जाएँगे। आज लोगों ने बता दिया है कि वो क्या चाहते हैं।"

अगर पीपीपी और पीएमएल (नवाज़) मिलकर गठबंधन सरकार बनाते हैं तो संसद में दो-तिहाई बहुमत के साथ वे मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ महाभियोग प्रस्ताव भी ला सकते हैं।

राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ को समर्थन देने वाली पीएमएल-क्यू के खाते में 38 सीटें ही आई हैं।

पीएमएल-क्यू ने नेता शुजात हुसैन ने एपी टेलीवीज़न न्यूज़ से बातचीत में कहा कि उनकी पार्टी खुले दिल से नतीजों को स्वीकार करती है और विपक्षी खेमे में बैठने के लिए तैयार है।

परवेज़ मुशर्रफ़ स्वयं चुनाव में खड़े नहीं हुए थे लेकिन संवाददाताओं का कहना है कि उनके समर्थकों की हार के कारण उनकी स्थिति कमज़ोर हुई है।

मतदान नेशनल असेंबली की 272 सीटों और प्रांतीय असेंबलियों की 577 सीटों के लिए हुआ था।

Tuesday, February 19, 2008

मुशर्रफ़ का दल 'चुनावों में पिछड़ा'

पाकिस्तान में राष्ट्रपति मुशर्रफ़ को समर्थन देने वाली पाकिस्तान मुसलिम लीग (क़ायदे आजम) के प्रवक्ता ने स्वीकार किया है कि विपक्षी दलों ने चुनावों में बढ़त हासिल कर ली है।

पीएमएल-क्यू के प्रवक्ता तारीक़ अज़ीम ने कहा कि यदि शुरुआती नतीजों की पुष्टि होती है तो पार्टी विपक्ष की भूमिका निभाने को तैयार है।

समाचार एजेंसी एएफ़पी के साथ बातचीत में तारिक़ अज़ीम ने कहा कि शुरुआती नतीजों में नवाज़ शरीफ़ और बेनज़ीर भुट्टो को 'बड़ी सफलता' हासिल हुई है।

उनका कहना था,'' यदि नतीजों की पुष्टि होती है तो हम प्रभावी विपक्ष की भूमिका निभाएँगे।''

दूसरी ओर विपक्षी पार्टियों के समर्थकों ने अभी से जीत का जश्न मनाना शुरू कर दिया है।

हालांकि अभी नेशनल और प्रांतीय असेंबलियों के लिए हुए चुनाव में वोटों की गिनती जारी है। उम्मीद की जा रही है कि अगले कुछ घंटों में नतीजे आ जाएँगे।

बेनज़ीर भुट्टो के कुछ युवा समर्थक कराची की सड़कों में जश्न मनाने में जुट गए हैं।

उल्लेखनीय है कि पाकिस्तानी पीपुल्स पार्टी और पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) मु्ख्य राजनीतिक विपक्षी पार्टियाँ हैं।

शुरुआती रुझानों के अनुसार उनके उम्मीदवार आगे चल रहे हैं और परवेज़ मुशर्रफ़ के कई निकटतम सहयोगी अपनी सीटें हार गए हैं।

ख़बरों के अनुसार राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के अधीन प्रधानमंत्री रहे पाकिस्तान मुस्लिम लीग (क़ायदे आजम) के चौधरी शुजात हुसैन नेशनल असेंबली का चुनाव हार गए हैं।

मुशर्रफ़ के विश्वस्त और पूर्व मंत्री शेख़ रशीद अहमद रावलपिंडी सीट से हार गए हैं।

चुनावी हिंसा

ग़ौरतलब है कि सोमवार को शाम बजे मतदान पूरा हुआ था और मतदान के दौरान देश भर के अलग-अलग हिस्सों से हिंसा की ख़बरें आई थीं। ग़ैर आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक हिंसा में 10 से ज़्यादा लोग मारे गए थे।

मतदान संसद के निचले सदन यानी नेशनल असेंबली की 272 सीटों और प्रांतीय असेंबलियों की 577 सीटों के लिए हुआ है।


नेशनल और प्रांतीय असेंबलियाँ
पंजाब: 445 सीटें, 3214 उम्मीदवार
सिंध: 191 सीटें, 2095 उम्मीदवार
सूबा सरहद: 134 सीटें, 1025 उम्मीदवार
बलूचिस्तान: 65 सीटें, 684 उम्मीदवार

परवेज़ मुशर्रफ़ के प्रवक्ता के मुताबिक रावलपिंडी में मतदान के बाद राष्ट्रपति ने कहा कि जो भी चुनाव में जीतेगा उसके साथ मिलकर काम किया जाएगा।

मतदान के दौरान प्रांतीय असेंबली के लिए पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) के उम्मीदवार चौधरी आसिफ़ अशरफ़ की गाड़ी को निशाना बनाकर हमला किया गया जिसमें उनकी मौत हो गई। हमले में उनके ड्राइवर और निजी सचिव भी मारे गए।

एक अन्य घटना में लाहौर में ही पीएमएल (नवाज़) के चुनावी दफ़्तर पर अंधाधुंध फ़ायरिंग में एक व्यक्ति मारा गया।

कड़े इंतज़ाम

चुनाव के लिए सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए थे। पूरे देश में लगभग 80 हज़ार सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया था।


मतगणना
मतगणना का काम अभी जारी है

कुल 7, 335 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं और करीब आठ करोड़ नौ लाख मतदाता वोट डालने के लिए पंजीकृत थे।

पाकिस्तान के चुनावी इतिहास में पहली बार मतपेटियों को पारदर्शी बनाया गया।

पिछले दिनों हुई हिंसा की घटनाओं के कारण इस ऐतिहासिक चुनाव में तनाव और डर का साया मंडराता रहा है।

मतदान के दौरान धाँधली की आशंकाएँ भी जताई जाती रही हैं।

ये चुनाव पहले आठ जनवरी को होने थे लेकिन 27 दिसंबर को एक रैली में पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो की हत्या के बाद चुनाव 18 फ़रवरी तक के लिए टाल दिए गए थे।

दुनिया भर की नज़रें इस समय पाकिस्तान पर टिकी हुई हैं। चुनावों का जायज़ा लेने के लिए दुनिया भर से क़रीब सौ पर्यवेक्षक और पत्रकार पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों में पहुँचे हुए हैं।

Monday, February 18, 2008

पाकिस्तान में तनाव के बीच मतदान शुरू

इस्लामाबाद स्थित बीबीसी संवाददाता राजेश जोशी ने बताया है कि चुनावी धांधली और हिंसा की आशंका के बीच लोग धीरे-धीरे मतदान केंद्रों पर वोट डालने पहुंच रहे हैं.

चुनाव के लिए सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं. पूरे देश में लगभग 80 हज़ार सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है.

संसद के निचले सदन यानी नेशनल असेंबली की 272 सीटों और प्रांतीय असेंबलियों की 577 सीटों के लिए मतदान हो रहा है.

मतदान स्थानीय समय के अनुसार सुबह आठ बजे (भारतीय समयानुसार सुबह साढ़े आठ बजे) शुरू हुआ और शाम पाँच बजे तक चलेगा.

इसके लिए कुल 7, 335 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं और आठ करोड़ नौ लाख मतदाता इनके राजनीतिक भविष्य का फ़ैसला करेंगे.


नेशनल और प्रांतीय असेंबलियाँ
पंजाब: 445 सीटें, 3214 उम्मीदवार
सिंध: 191 सीटें, 2095 उम्मीदवार
सूबा सरहद: 134 सीटें, 1025 उम्मीदवार
बलूचिस्तान: 65 सीटें, 684 उम्मीदवार

देश भर में कुल एक लाख 70 हज़ार मतदान केंद्रों की स्थापना की गई है. पाकिस्तान के चुनावी इतिहास में पहली बार मतपेटियों को पारदर्शी बनाया गया है.

पिछले दिनों हुई हिंसा को ध्यान में रखते हुए देशभर में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं. अधिकारियों का कहना है कि 35 हज़ार सैनिकों और 47 हज़ार अर्धसैनिक बल के जवानों को तैनात किया गया है.

पिछले दिनों हुई हिंसा की घटनाओं के चलते इस ऐतिहासिक चुनाव में तनाव और डर का साया साफ नज़र रहा है.

मतदान के दौरान धाँधली की आशंकाएँ भी जताई जा रही हैं.

हालांकि पाकिस्तान के चुनाव आयुक्त क़ाज़ी मोहम्मद फ़ारुक़ ने दोहराया है कि क़ानून व्यवस्था को क़ायम रखते हुए चुनाव बिल्कुल निष्पक्ष कराए जा रहे हैं.

मतदान के पहले हिंसा

शनिवार को क़बायली इलाक़े पारचिनार में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के कार्यालय में हुए आत्मघाती हमले में 40 से अधिक लोग मारे गए थे और 90 से अधिक घायल हो गए थे.


पाकिस्तानी सैनिक
हिंसा और तनाव के साए के बीच पाकिस्तान में मतदान हो रहा है

रविवार को भी मुस्लिम लीग(नवाज़) के कार्यालय में हमला हुआ और क्वेटा में एमक्यूएम के कार्यालय में भी एक बम विस्फोट हुआ. इन हमलों में कई लोग घायल हुए हैं.

इन चुनाव से पाकिस्तान में सैन्य शासन का अंत हो जाएगा हालाँकि आशंकाएँ जताई जा रही हैं कि इससे अस्थिरता का एक नया दौर शुरू होगा.

इन चुनावों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़रें भी लगी हुई हैं और चुनावों का जायज़ा लेने के लिए दुनिया भर से क़रीब सौ पर्यवेक्षक और पत्रकार पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों में पहुँचे हैं.

इस्लामाबाद में मौजूद बीबीसी संवाददाता राजेश जोशी का कहना है कि इन इंतज़ामों के बावजूद लोगों में मन में डर है और दहशत साफ़ दिखती है.

संवाददाताओं का कहना है कि हो सकता है कि इस डर के कारण मतदान करने के लिए कम लोग बाहर निकलें.

आशंकाएँ

ये चुनाव पहले आठ जनवरी को होने थे लेकिन 27 दिसंबर को एक रैली में पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो की हत्या के बाद चुनाव 18 फ़रवरी तक के लिए टाल दिए गए थे.


नवाज़ शरीफ़ और आसिफ़ अली ज़रदारी
दोनों प्रमुख विपक्षी दलों को चुनाव में धांधली की आशंका है

पाकिस्तान की दो प्रमुख विपक्षी पार्टियों ने आशंका जताई है कि राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के सहयोगी चुनाव में धाँधली कर सकते हैं.

उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर चुनाव में गड़बड़ी हुई तो वो इसका विरोध करेंगे.

चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों के अनुसार आगे चल रही पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) ने कहा है कि चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष नहीं होने जा रहे हैं.

पीपीपी का कहना है कि मुशर्रफ़ का समर्थन करने वाली पीएमएल-क्यू फ़र्जी मतदान करने वाली है.

पीपीपी की प्रतिद्वंद्वी और पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ की पार्टी ने भी कहा है कि परवेज़ मुशर्रफ़ के समर्थक फ़र्जी मतदान की योजना बना चुके हैं.

विश्लेषकों का कहना है कि अगर चुनाव साफ़ सुथरे हुए तो तीनों प्रमुख पार्टियों में से किसी को भी बहुमत हासिल होने की संभावना नहीं है और एक त्रिशंकु संसद उभरेगी.