अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष अपनी माली हालत सुधारने के लिए अपने कोष से 400 टन सोना बेचने की तैयारी कर रहा है।
मुद्रोकोष की इस योजना को वाशिंगटन में हुई बोर्ड की बैठक में मंज़ूरी मिल गई है।
यदि मुद्राकोष यह क़दम नहीं उठाता है तो आने वाले सालों में उसका वित्तीय घाटा 40 करोड़ डॉलर तक हो सकता है।
योजना के अनुसार 400 टन सोना बेच दिया जाएगा, जो मुद्राकोष के पास जमा सोने का 12 प्रतिशत है।
उम्मीद जताई जा रही है कि इतना सोना बेचने से मुद्राकोष को जो राशि मिलेगी उसका निवेश किया जाएगा और इससे हर साल तीस करोड़ डॉलर तक की राशि मिल सकती है।
शेष दस करोड़ डॉलर का घाटा खर्चो में कटौती करके पूरा किया जाएगा।
मुद्राकोष के इस प्रस्ताव पर अमल करने के लिए कई सदस्य देशों को अपने संविधान में संशोधन करना होगा।
सोना बेचने के लिए मुद्राकोष को अमरीकी संसद की मंज़ूरी भी लेनी होगी और माना जा रहा है कि वहाँ इस पर तीखी बहस हो सकती है।
मुद्राकोष की आय में पिछले सालों में इसलिए कमी हुई है क्योंकि अब कम ही बड़े विकासशील देश इस संस्था से कर्ज़ ले रहे हैं और इसलिए वे ब्याज भी अदा नहीं कर रहे हैं।
पिछले दिनों में सबसे बड़ी वित्तीय सहायता की ज़रुरत अर्जेंटीना को पड़ी थी पर उसे भी अब छह साल हो गए।
एशियाई देशों में एक दशक पहले आई मंदी का असर यह हुआ है कि अब हर देश के पास विदेशी मुद्रा का एक बड़ा भंडार है।
शायद इस संग्रह का कारण यही है कि वे देश मुद्राकोष से कर्ज़ नहीं लेना चाहते।
Tuesday, April 8, 2008
अपना सोना बेचेगा अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष
Monday, April 7, 2008
हिलेरी के निकट सहयोगी ने साथ छोड़ा
अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव में डेमोक्रैटिक पार्टी की ओर से उम्मीदवारी हासिल करने की जी-तोड़ कोशिश कर रहीं हिलेरी क्लिंटन को झटका लगा है।
हिलेरी के मुख्य रणनीतिकार मार्क पेन ने इस्तीफ़ा दे दिया है।
मार्क पेन एक जनसंपर्क कंपनी (पीआर एजेंसी) चलाते हैं और इसे देखते हुए हिलेरी के चुनाव अभियान में उनकी भागीदारी पर सवाल उठाए गए थे।
पेन की कंपनी को कोलंबिया की सरकार से ये काम मिला हुआ है कि वो अमरीका के साथ मुक्त व्यापार समझौता कराने में मदद करे।
वहीं दूसरी ओर ख़ुद हिलेरी क्लिंटन कोलंबिया के साथ इस तरह के समझौते का विरोध करती हैं।
हिलेरी की प्रचार प्रबंधक मैगी विलियम्स ने बताया, "पिछले कुछ दिनों में हुई गतिविधियों को देखते हुए मार्क पेन से अपनी भूमिका छोड़ने को कहा गया।"
ग़लती मानी
'वाल स्ट्रीट जर्नल' ने हाल ही में प्रकाशित ख़बर में कहा था कि मार्क पेन ने अपनी कंपनी बर्सन मार्स्टेलर के प्रमुख के तौर पर 31 मार्च को कोलंबियाई राजदूत से मुलाक़ात की।
हालाँकि बाद में मार्क पेन ने एक बयान जारी कर माना कि इस बैठक में शामिल होकर उन्होंने ग़लत किया है और वे इस तरह की ग़लती नहीं दोहराएंगे।
डेमोक्रैटिक पार्टी की ओर से बराक ओबामा और हिलेरी क्लिंटन उम्मीदवार बनने की होड़ में बने हुए हैं।
विभिन्न राज्यों के प्राइमरी चुनावों में दोनों के बीच कड़ा संघर्ष हुआ है।
अब माना जा रहा है कि अगस्त में पार्टी सम्मेलन के दौरान ही उम्मीदवार के चयन पर अंतिम फ़ैसला हो सकता है।
बराक ओबामा के पास अभी 1634 प्रतिनिधि हैं और हिलेरी क्लिंटन के पास 1500 ।
लेकिन राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवारी हासिल करने के लिए 2024 प्रतिनिधियों का समर्थन चाहिए।
Saturday, April 5, 2008
तेल की क़ीमतों में उछाल जारी
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की क़ीमत फ़िर बढ़ कर 106 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई है। इसके असर से भारत में महँगाई और बढ़ सकती है।
ताज़ा उछाल अमरीका में रोज़गार के आँकड़ों में कमी की रिपोर्ट के बाद आया है।
वायदा बाज़ार में मई माह के लिए 106 डॉलर 23 सेंट प्रति बैरल की दर से कच्चे तेल की बोली लगाई गई।
लंदन के बाज़ार में कच्चा तेल दो डॉलर चढ़ कर लगभग 105 डॉलर प्रति बैरल हो गया।
भारत के लिए ये बुरी ख़बर है जहाँ महँगाई की दर तीन साल के सर्वोच्च स्तर पर पहुँच चुकी है।
भारत अपनी ज़रूरतों का 70 फ़ीसदी कच्चा तेल आयात करता है और क़मीतें बढ़ने से पेट्रोल और डीजल की क़ीमत फिर बढ़ाई जा सकती है।
एक्सॉन मोबिल के अमरीकी रिफ़ाइनरी में आग लगने की ख़बर का असर भी बाज़ार पर पड़ा।
अमरीका में गर्मी के दिनों में पेट्रोल की खपत बढ़ जाती है, इसलिए आपूर्ति में किसी तरह की गड़बड़ी से क़ीमतें बढ़ जाती हैं।
अमरीकी डॉलर के यूरो के मुक़ाबले कमज़ोर पड़ने का असर भी तेल क़ीमतों पर पड़ रहा है और निवेशक मुद्रा बाज़ार में घुसने के बज़ाए कमोडिटी बाज़ार में निवेश कर रहे हैं।
Friday, April 4, 2008
नैटो अफ़ग़ानिस्तान में सहायता बढ़ाएगा
नैटो संगठन के 26 सदस्य देशों ने अफ़ग़ानिस्तान को लंबे समय तक सहायता देने का वादा करते हुए वहाँ सैन्य सहायता बढ़ाने का फ़ैसला किया है।
रोमानिया की राजधानी बुकारेस्ट में नैटो के सम्मेलन में कहा गया कि अफ़ग़ानिस्तान तालेबान के ख़िलाफ़ लड़ाई का नेतृत्व कर रहा है और वहाँ अंतरराष्ट्रीय सहायता में बेहतर तालमेल की ज़रुरत है।
नैटो देशों ने फ़ैसला किया है कि वे 2010 तक अफ़ग़ान सैनिकों की संख्या 80 हज़ार कर दी जाएगी और इसके लिए प्रशिक्षण और हथियारों की व्यवस्था की जाएगी।
इससे पहले फ़्रांस ने अफ़ग़ानिस्तान में अपने सैनिकों की संख्या बढ़ाने की घोषणा की थी।
उल्लेखनीय है कि अमरीका लंबे समय से अफ़ग़ानिस्तान में नैटो का समर्थन बढ़ाने की माँग कर रहा है लेकिन इसके लिए सदस्य देश राज़ी नहीं हो रहे थे।
मैंने तय किया है कि पूर्वी क्षेत्र में फ़ांस के सैनिकों की मौजूदगी को एक अतिरिक्त बटालियन तैनात कर और मज़बूत किया जाए
फ़्रांस के राष्ट्रपति
संवाददाताओं का कहना है कि गुरुवार को लिया गया फ़ैसला नैटो के सदस्य देशों में अफ़ग़ानिस्तान में सैनिकों की उपस्थिति को लेकर घटते समर्थन को उलटने की कोशिश है।
नैटो के सम्मेलन में अफ़ग़ानिस्तान को लेकर जो रणनीति तय की गई है उसमें नया कुछ भी नहीं है।
उनका कहना है कि इसमें यह बात दोहराई गई है कि वहाँ तालेबान और अल-क़ायदा को नहीं लौटने देना है।
फ़्रांस और सैनिक भेजेगा
फ़्रांस के राष्ट्रपति निकोला सार्कोज़ी ने अपने भाषण में कहा, "मैंने तय किया है कि पूर्वी क्षेत्र में फ़ांस के सैनिकों की मौजूदगी को एक अतिरिक्त बटालियन तैनात कर और मज़बूत किया जाए।"
महत्वपूर्ण है कि नैटो के नेतृत्व वाली अंतरराष्ट्रीय सेनाओं के कमांडर जनरल डेनियल मेकनील ने लगभग दस हज़ार अतिरिक्त सैनिक तैनात किए जाने की माँग की है।
इससे पहले कनाडा ने धमकी दी थी कि यदि और नैटो देश अपने सैनिक अफ़ग़ानिस्तान में अपने सैनिक नहीं भेजते तो वह अपने सैनिकों को वापस बुला लेगा।
अमरीका ने वादा किया है कि वह दक्षिणी अफ़ग़ानिस्तान में कनाडा की सेना की मदद के लिए कुछ अतिरिक्त सैनिक भेजेगा।
Thursday, April 3, 2008
ओसामा बिन लादेन स्वस्थ हैं: ज़वाहिरी
अल क़ायदा के दूसरे प्रमुख नेता अयमन अल ज़वाहिरी का कहना है कि ओसामा बिन लादेन स्वस्थ हैं और उनके ख़राब स्वास्थ्य की ख़बरें झूठी हैं।
ज़वाहिरी ने ये बातें एक इस्लामी वेबसाइट पर एक सवाल के जवाब में कहीं।
उनका कहना था,'' शेख ओसामा बिन लादेन का स्वास्थ अच्छा है। ग़लत इरादे से उनके बारे में झूठी ख़बरें फैलाई जाती हैं।''
ग़ौरतलब है कि काफ़ी लंबे अरसे से ओसामा बिन लादेन के बारे में अटकलें लगाईं जा रहीं हैं।
ऐसा माना जाता है कि ज़वाहिरी और ओसामा बिन लादेन अफ़ग़ानिस्तान अथवा पाकिस्तान में छुपे हो सकते हैं।
अयमन अल ज़वाहिरी ने इस वेबसाइट पर संयुक्त राष्ट्र पर निशाना साधा और उसे मुसलमानों की दुश्मन संस्था ठहराया है।
अपने 90 मिनट के ऑडियो संदेश में ज़वाहिरी ने कहा,'' संयुक्त राष्ट्र इस्लाम और मुसलमानों का दुश्मन है।''
एक और संदेश
अपने संदेश में उन्होंने अल क़ायदा की फ़लस्तीन में योजना और महिलाओं के चरमपंथी कार्रवाई में हिस्सा लेने पर भी अपने विचार व्यक्त किए हैं।
शेख ओसामा बिन लादेन का स्वास्थ अच्छा है. ग़लत इरादे से उनके बारे में झूठी ख़बरें फैलाई जाती हैं
अयमन अल ज़वाहिरी
ज़वाहिरी ने इसराइल के अंदर और बाहर यहूदी लोगों पर हमले के बात कही।
पिछले महीने भी ज़वाहिरी के नाम से ऑडियो संदेश जारी किया गया था जिसमें अमरीका और इसराइल पर हमले की बात कही थी।
अयमन अल ज़वाहिरी पेशे से आँखों के डॉक्टर रहे हैं और उन्हें अल क़ायदा का प्रमुख रणनीतिकार माना जाता है।
कुछ विश्लेषक मानते हैं कि 11 सितंबर, 2001 के हमलों के पीछ अयमन अल ज़वाहिरी की ही सोच थी।
2001 में अमरीका ने जो दुनिया के सबसे वांछित 22 आतंकवादियों की जो सूची जारी की थी उसमें ज़वाहिरी का नाम ओसामा बिन लादेन के बाद दूसरे नंबर पर था और उन पर ढाई करोड़ डॉलर का इनाम रखा गया था।
Wednesday, April 2, 2008
एमनेस्टी ने चीन की कड़ी आलोचना की
मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल का कहना है कि चीनी प्रशासन ने दुनिया की नज़र में अपनी छवि स्थिर और शांतिपूर्ण देश की प्रस्तुत करने की कोशिश में विभिन्न गतिविधियों का मुँह बंद करने की कोशिश की है।
एमनेस्टी का कहना है कि तिब्बत की कार्रवाई के बाद यदि विदेशी नेताओं और ओलंपिक समिति के सदस्यों ने चीन के मानवाधिकार उल्लंघन की बात नहीं की, तो इसमें उनकी सहमति नज़र आएगी।
बीजिंग से पत्रकार सैबल दास का कहना है कि चीन पर छवि को लेकर भारी दबाव है।
वो अपनी ‘अत्याचारी’ की छवि पेश नहीं करना चाहता है क्योंकि इससे बहुत से पश्चिमी देशों के एथलीट और नेता ओलंपिक खेलों के दौरान नहीं आएँगे।
इसके पहले चीन ने कहा था कि ओलंपिक खेलों में बाधा डालने के लिए तिब्बती आत्मघाती हमला कर सकते हैं।
हालांकि धर्मशाला स्थित निर्वासित तिब्बती सरकार ने बीजिंग के इन आरोपों का खंडन किया है।
चीन के नागरिक सुरक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को दावा किया कि ल्हासा और तिब्बत के अन्य हिस्सों में हिंसक प्रदर्शन के बाद अब तिब्बती आत्मघाती हमले की साजिश रच रहे हैं।
भारत की सलाह
इधर भारत के विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने भारत में रह रहे निर्वासित शीर्ष तिब्बती धर्मगुरू दलाई लामा को आगाह किया है कि वे ऐसा कोई काम न करें जिससे भारत और चीन के आपसी रिश्तों पर असर पड़े।
यदि विदेशी नेताओं और ओलंपिक समिति के सदस्यों ने चीन के मानवाधिकार उल्लंघन की बात नहीं की, तो इसमें उनकी सहमति नज़र आएगी
एमनेस्टी इंटरनेशनल
प्रणव मुखर्जी ने कहा कि दलाई लामा हमेशा की तरह भारत में सम्मान से रह सकते हैं लेकिन राजनीतिक गतिविधियों से उन्हें दूर रहना चाहिए।
विदेश मंत्री का यह बयान ऐसे समय पर आया है जबकि भारत में लगातार चीन विरोधी प्रदर्शन हो रहे हैं।
एक टीवी चैनल को दिए गए इंटरव्यू में प्रणव मुखर्जी ने कहा, "भारत उनका मेज़बान बना रहेगा लेकिन अपने भारत प्रवास के दौरान उन्हें किसी राजनीतिक गतिविधि में हिस्सा नहीं लेना चाहिए और कुछ भी ऐसा नहीं करना चाहिए जिससे कि भारत और चीन के आपसी संबंधों पर बुरा असर हो।"
भारत के लिए यह एक कठिन चुनौती है क्योंकि वह तिब्बत के शीर्षस्थ नेता और उनके सहयोगियों को अपने यहाँ शरण देता है लेकिन साथ ही चीन से भी अपने रिश्ते ख़राब नहीं करना चाहता।
Tuesday, April 1, 2008
अमरीका ने व्यापक वित्तीय क़दमों की घोषणा की
अमरीकी सरकार ने मंदी की आशंका के कारण वित्तीय बाज़ारों के लिए व्यापक क़दमों की घोषणा की है।
माना जा रहा है कि 1930 की मंदी के बाद ये सबसे व्यापक क़दम हैं।
जानकारों का कहना है कि अमरीका की वित्तीय व्यवस्था में लंबे समय से बदलाव नहीं किया गया था जिसे करने का फ़ैसला अब लिया गया है।
अब वित्तीय ढाँचे की गतिविधियों को अलग अलग राज्यों की बजाए उन्हें अमरीका के केंद्रीय बैंक की निगरानी में रखा जाएगा।
हमारी पहली प्राथमिकता है वित्तीय संकट, घरों की गिरती क़ीमतों से पैदा हुआ संकट, और हम इस समस्या को जल्द से जल्द सुलझाना चाहते हैं
हेनरी पॉलसन, अमरीकी वित्त मंत्री
अमरीका के वित्त मंत्री हेनरी पॉलसन का कहना है कि इससे उन्हें ये आशा तो नहीं है कि वित्तीय बाज़ारों की वर्तमान समस्याएँ सुलझ जाएंगी लेकिन लंबे समय के लिए ये एक अच्छी व्यवस्था बनाने की कोशिश है।
उनका कहना था,'' हमारी पहली प्राथमिकता है वित्तीय संकट, घरों की गिरती क़ीमतों से पैदा हुआ संकट और हम इस समस्या को जल्द से जल्द सुलझाना चाहते हैं।''
व्यापक क़दम
अमरीकी वित्त मंत्री का कहना था,'' हम जो बड़े बदलाव लागू करना चाहते हैं, हम उन्हें तब तक पूरी तरह लागू नहीं कर सकते जब तक कि ये समस्याएँ सुलझा नहीं ली जातीं।''
लेकिन वित्त मंत्री हेनरी पॉलसन को वित्तीय व्यवस्था के बदलाव करने के लिए अपनी योजना को संसद से मंज़ूर करवाना होगा।
इन क़दमों के बाद सोमवार देर शाम अमरीकी शेयर बाज़ारों में मामूली उछाल आया।
डाओ जोन्स का सूचकांक 47 अंक और नैसडैक 17 अंक ऊपर बंद हुआ।
इधर भारत सोमवार को शेयर बाज़ारों में भारी गिरावट दर्ज की गई थी।
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स लगभग 727 अंक गिरकर 15,644 पर बंद हुआ।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी लगभग 207 अंक लुढ़क कर 4,734 रह गया।
इस वर्ष के शुरुआती तीन महीनों में सेंसेक्स में लगभग 23 फ़ीसदी की गिरावट आ चुकी है।
Monday, March 31, 2008
महंगाई से चिंतित सरकार ने बैठक बुलाई
ख़बरें हैं कि बढ़ती महंगाई की स्थिति पर विचार के लिए सोमवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की कीमतों संबंधी समिति बैठक बुलाई गई है।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में होनेवाली इस बैठक में कृषि मंत्री शरद पवार, वित्त मंत्री पी चिदंबरम, विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी और वाणिज्य मंत्री कमलनाथ मौजूद रहेंगे।
ग़ौरतलब है कि इस समय भारत में खाद्य वस्तुओं के दाम आसमान छू रहे हैं।
वित्त सचिव डी सुब्बाराव ने शनिवार को एक सेमिनार के दौरान बढ़ती कीमतों को काबू में लाने के लिए सरकारी क़दमों के बारे में पूछे जाने पर इस बैठक के बारे में जानकारी दी थी।
उनका कहना था कि मुद्रास्फ़ीति की दर काफ़ी चिंताजनक है, इसके लिए काफ़ी हद तक अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बढ़ोत्तरी ज़िम्मेदार है।
उल्लेखनीय है कि इस समय मुद्रास्फ़ीति की दर 13 माह के सर्वोच्च स्तर 6।68 प्रतिशत पर है।
कुछ महीने पहले तक यह दर चार फ़ीसदी के आसपास थी लेकिन 15 मार्च को समाप्त हुए सप्ताह में यह 0।76 फ़ीसदी की बढ़त के साथ 6।68 तक पहुँच गई।
वामपंथियों की चेतावनी
दूसरी ओर महंगाई को लेकर न केवल विपक्षी भारतीय जनता पार्टी बल्कि सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे वामपंथी दलों ने भी चेतावनी दी है।
पंद्रह अप्रैल के बाद वामपंथी अन्य दलों के साथ बातचीत कर कीमतों में वृद्धि के ख़िलाफ़ देशव्यापी आंदोलन छेड़ेगे
सीताराम येचुरी, सीपीएम नेता
वामपंथी दलों ने बढ़ती महंगाई के लिए कांग्रेस नेतृत्ववाली यूपीए सरकार की आलोचना की है।
सीपीएम नेता सीताराम येचुरी ने कोयंबटूर में पार्टी कांग्रेस के दौरान पत्रकारों से बातचीत में कहा कि पार्टी ने महंगाई पर नियंत्रण के लिए 15 अप्रैल की समयसीमा तय की है।
उनका कहना था,'' पंद्रह अप्रैल के बाद वामपंथी अन्य दलों के साथ बातचीत कर कीमतों में वृद्धि के ख़िलाफ़ देशव्यापी आंदोलन छेड़ेगे।''
उन्होंने कहा कि सरकार को इस संबंध में तत्काल क़दम उठाने चाहिए।
येचुरी का कहना था कि सभी आवश्यक वस्तुओं की कीमतें बढ़ रही हैं और आम आदमी के लिए यह काफ़ी मुश्किल स्थिति है।
Friday, March 28, 2008
इराक़ में हिंसा जारी, बग़दाद में कर्फ़्यू
पिछले कुछ दिनों से जारी हिंसा के दौर को देखते हुए इराक़ सरकार ने राजधानी बग़दाद में तीन दिन के लिए कर्फ़्यू लगा दिया है।
इस सप्ताह की शुरुआत से ही इराक़ के दक्षिणी शहर बसरा में शिया कट्टरपंथियों और इराक़ी सेना के बीच भीषण संघर्ष जारी है जिसमें 130 से भी ज़्यादा लोगों की जानें जा चुकी हैं।
बसरा से शुरू हुई हिंसा बाद में देश के अन्य शिया आबादी वाले हिस्सों में भी फैलने लगी। राजधानी बग़दाद के शिया आबादी वाले क्षेत्र में भी हिंसक झड़पें हुई हैं।
स्थिति को देखते हुए अब इराक़ सरकार ने राजधानी में तीन दिन के लिए कर्फ़्यू लगा दिया है।
शिया कट्टरपंथियों को चेतावनी
अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने इराक़ में शिया कट्टरपंथियों के ख़िलाफ़ चलाए जा रहे अभियान को अपना समर्थन देते हुए कट्टरपंथियों से निपटने के प्रयासों की सराहना की है।
उन्होंने इराक़ी प्रधानमंत्री के शिया कट्टरपंथियों से कठोरता से निपटने के क़दम की भी सराहना की। इराक़ी सेना के अभियान को अमरीकी सैनिकों की ओर से भी मदद मिल रही है।
हिंसा के दौरान दो अमरीकी लोगों के मारे जाने के बाद अमरीकी सरकार ने बग़दाद स्थित अपने दूतावास के कर्मचारियों को सतर्क कर दिया है और कहा है कि वे ग्रीन ज़ोन इलाके से बाहर न निकलें।
शिया लड़ाकों को चेतावनी
इससे पहले बुधवार को इराक़ी प्रधानमंत्री नूर अल मलिकी ने चेतावनी दी थी कि अगर बसरा में संघर्ष कर रहे शिया कट्टरपंथी 72 घंटे में हथियार नहीं छोड़ते हैं तो उन्हें इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
शिया लड़ाके
पिछले दो दिनों के दौरान 70 से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं
उधर प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद शिया कट्टरपंथियों के नेता ने कुछ नरमी दिखाते हुए समझौते का प्रस्ताव रखा है।
इराक़ के कट्टरपंथी शिया संगठन के सरबरा मुक्तदा अल सद्र ने कहा है कि अगर इराक़ी प्रधानमंत्री बसरा छोड़ दें तो दोनों पक्षों के बीच बातचीत की संभावना बन सकती है।
सद्र ने गुरुवार को जारी एक बयान में कहा है कि इस पूरे मसले का राजनीतिक हल निकालने का प्रयास किया जाना चाहिए।
शिया बाहुल्य क्षेत्र बसरा सुरक्षा की दृष्टि से पिछले कुछ बरसों से ख़ासा संवेदनशील इलाका रहा है।
इराक़ पर 2003 में अमरीकी नेतृत्व वाले गठबंधन के हमले के बाद से बसरा में ब्रितानी सैनिक तैनात किए गए थे और उस इलाक़े की ज़िम्मेदारी उन्हीं पर थी। हालांकि पिछले वर्ष के अंत में ब्रितानी सरकार ने बसरा का नियंत्रण इराक़ी सुरक्षाबलों को सौंप दिया था।
तेल के बड़े भंडार वाले स्थान के तौर पर जाने जानेवाला बसरा वर्चस्व और प्रभाव की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
Thursday, March 27, 2008
'चीन निर्वासित तिब्बती सरकार से बातचीत करे'
अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने चीन से अनुरोध किया है कि वो तिब्बत मसले पर निर्वासित तिब्बती सरकार के प्रतिनिधि, दलाई लामा से बातचीत का सिलसिला शुरू करे।
अमरीकी राष्ट्रपति ने बुधवार को चीन के राष्ट्रपति हू जिंताओ से इस संबंध में टेलीफ़ोन के ज़रिए बातचीत की।
बातचीत में अमरीकी राष्ट्रपति ने चीनी राष्ट्रपति से यह भी अनुरोध किया कि तिब्बत में पत्रकारों और राजनायिकों को आने-जाने से न रोका जाए।
इससे पहले बुधवार को ही चीनी प्रशासन की देखरेख और नियंत्रण में विदेशी पत्रकारों का एक प्रतिनिधिमंडल तिब्बत पहुँचा है।
पिछले दिनों तिब्बत में शुरू हुए चीन विरोधी प्रदर्शनों और उसके बाद हुई हिंसा के बाद विदेशी पर्यटकों और ख़ासतौर पर पत्रकारों के आने पर लोग गए थे।
प्रेस के एक पत्रकार ने बताया है कि तिब्बत की राजधानी ल्हासा की स्थिति छावनी जैसी बनी हुई है और चप्पे-चप्पे पर पुलिस की तैनाती है।
एपी के पत्रकार ने बताया कि सरकारी भवनों की सुरक्षा के लिए अभी भी बड़ी तादाद में सुरक्षाकर्मी तैनात कर रखे गए हैं।
चीन का विरोध
इस बीच दुनिया के कुछ अन्य हिस्सों में तिब्बत मूल के लोगों का चीन विरोध जारी है।
तिब्बत
ल्हासा की स्थिति अभी भी छावनी जैसी बनी हुई है।
बुधवार को भारत प्रशासित कश्मीर की राजधानी में भी कुछ तिब्बती मूल के लोगों ने एक शांतिपूर्ण मार्च निकालकर अपना विरोध दर्ज किया था।
हालांकि इस प्रदर्शन में तिब्बत मूल के मुस्लिम लोगों ने हिस्सा नहीं लिया।
ग़ौरतलब है कि भारत में शरण लेकर रह रही तिब्बत की निर्वासित सरकार समय समय पर चीन से तिब्बत को स्वायत्त करने और अपने प्रभाव से मुक्त करने की मांग करती रही है।
इस वर्ष चीन में ओलंपिक खेलों का आयोजन होना है और ऐसे मौके पर स्वायत्त तिब्बत की मांग करने वाले लोग इस मुद्दे को दुनिया के सामने लाने का मौका नहीं खोना चाहते।
तिब्बत की राजधानी ल्हासा में पिछले दिनों इन्हीं मुद्दों पर कुछ उग्र प्रदर्शन हुए जिसके बाद प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग भी हुआ।
निर्वासित तिब्बती सरकार के मुताबिक यहाँ प्रदर्शनों के दौरान भड़की हिंसा में कम से कम 80 लोगों की मौत हो गई थी।
Wednesday, March 26, 2008
टाटा-जगुआर-लैंड रोवर सौदे की घोषणा संभव
भारतीय कंपनी टाटा मोटर्स बुधवार को अमरीकी कंपनी फ़ोर्ड के दो ब्रितानी ब्रांड जगुआर और लैंड रोवर की ख़रीद की घोषणा कर सकती है।
इस संदर्भ में बातचीत और ख़रीद के दाम पर बातचीत का काम पूरा हो चुका है। बताया जा रहा है कि टाटा इन दोनों कंपनियों के लिए दो अरब अमरीकी डॉलर अदा कर रही है।
हालांकि सौदे की रक़म को लेकर भी कोई स्पष्ट जानकारी आधिकारिक तौर पर नहीं दी गई है और बुधवार को जब सौदे की घोषणा होगी तो लोगों की नज़र सौदे के लिए तय रक़म पर होगी।
व्यापार जगत के लोगों की नज़र इस बात पर भी होगी कि किन शर्तों पर टाटा इन ब्रांडों को ख़रीद रहा है।
जगुआर और लैंड रोवर मूल रूप से ब्रितानी कारें हैं जिसे अमरीकी ऑटोमोबाइल कंपनी फ़ोर्ड ने ख़रीद लिया था।
फ़ोर्ड ने अपनी इन दोनों कंपनियों को बेचने की मंशा जाहिर की थी जिसके बाद टाटा के साथ पिछले वर्ष जून से ही इस सौदे के संदर्भ में बातचीत चल रही थी।
टाटा का प्रभाव
टाटा मोटर्स का भारतीय बाज़ार में व्यापक प्रभाव है। टाटा का भारत के ट्रक बाज़ार के आधे से भी बड़े हिस्से पर कब्ज़ा है और साथ ही कार बाज़ार में भी 20 प्रतिशत की हिस्सेदारी है।
रतन टाटा
टाटा की भारतीय कार बाज़ार में 20 फ़ीसदी की हिस्सेदारी है
जगुआर और लैंड रोवर ब्रिटेन में लोकप्रिय और भरोसेमंद कारें मानी जाती हैं।
टाटा ने सबसे पहले अगस्त 2007 में कहा था कि वह इन कंपनियों को ख़रीदने में दिलचस्पी रखती है। हालाँकि इस सौदे में एक और निजी कंपनी- वन इक्विटी ने भी दिलचस्पी दिखाई थी।
एक अन्य भारतीय कंपनी महिंद्रा एंड महिंद्रा ने भी ख़ुद को जगुआर और लैंड रोवर कंपनियों का एक संभावित ख़रीदार बताया था।
ग़ौरतलब है कि टाटा ने इसी वर्ष की शुरुआत में एक लाख की कार भारतीय बाज़ार में उतारने की घोषणा करके दुनियाभर के कार बाज़ार में खलबली मचा दी थी।
अब जगुआर और लैंड रोवर ख़रीदने के साथ ही टाटा की कार बाज़ार पर पकड़ और भी मज़बूत हो जाएगी।
Tuesday, March 25, 2008
राष्ट्रपति बुश से परमाणु समझौते पर चर्चा
विदेश मंत्री के रूप में पहली बार अमरीका गए प्रणव मुखर्जी ने सोमवार को राष्ट्रपति जॉर्ज बुश से मुलाक़ात की।
समाचार एजेंसियों का कहना है कि मुलाक़ात के दौरान परमाणु समझौते का मुद्दा उठा और द्विपक्षीय संबंधों पर भी चर्चा हुई।
लेकिन विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी इस मुलाक़ात का विस्तार से विवरण मंगलवार को एक संवाददाता सम्मेलन में देंगे।
राष्ट्रपति बुश और प्रणब मुखर्जी की मुलाक़ात 35 मिनट तक चली।
बातचीत के दौरान विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी के साथ अमरीका में भारतीय दूत रोनेन सेन और विदेश सचिव शिवशंकर मेनन भी मौजूद थे।
जबकि राष्ट्रपति बुश के साथ विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार स्टीफ़ेन हैडली भी थे।
राष्ट्रपति बुश से मुलाक़ात से पहले प्रणव मुखर्जी ने विदेश मंत्री कोडोंलीज़ा राइस से भी मुलाक़ात की थी।
'राजनीतिक समस्या'
कोंडोलीज़ा राइस के साथ मुलाक़ात के बाद विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा कि दोनों देशों के बीच परमाणु समझौते को लेकर कुछ 'राजनीतिक समस्या' है।
प्रणव मुखर्जी और कोंडोलीज़ा राइस
प्रणव मुखर्जी ने कहा कि समझौते को लेकर कुछ समस्या है
दोनों नेताओं की मुलाक़ात 30 मिनट तक चली। मुलाक़ात के बाद प्रणव मुखर्जी ने पत्रकारों को बताया कि दोनों देश परमाणु समझौते पर काम करना जारी रखेंगे।
उन्होंने कहा, "हम इस ऐतिहासिक परमाणु समझौते को लागू करना चाहते हैं। लेकिन इसे लेकर कुछ राजनीतिक समस्या है। इस समय हम इस समस्या को सुलझाने की कोशिश में लगे हैं।"
विदेश मंत्री के रूप में पहली बार अमरीका गए प्रणव मुखर्जी ने कहा कि केंद्र सरकार इस मुद्दे पर कई राजनीतिक पार्टियों के साथ विचार-विमर्श कर रही है।
कोशिश
दूसरी ओर परमाणु समझौते को आगे ले जाने की इच्छा व्यक्त करते हुए अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने कहा, "यह ऐतिहासिक समझौता है, जो दोनों देशों के लिए अच्छा है। हम इस समझौते पर काम करना जारी रखेंगे।"
समझौते में समस्या
हम इस ऐतिहासिक परमाणु समझौते को लागू करना चाहते हैं. लेकिन इसे लेकर कुछ राजनीतिक समस्या है. इस समय हम इस समस्या को सुलझाने की कोशिश में लगे हैं
प्रणव मुखर्जी
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के साथ परमाणु ठिकाने की सुरक्षा के मुद्दे पर बातचीत के बारे में प्रणब मुखर्जी ने कहा कि विचार-विमर्श ख़त्म हो चुका है और अब आईएईए के बोर्ड ऑफ़ गवर्नर इसे मंज़ूरी देंगे।
परमाणु सप्लायर ग्रुप (एनएसजी) के साथ परमाणु ईंधन के व्यापार के लिए आईएईए के साथ समझौता ज़रूरी होता है।
भारत में सरकार को बाहर से समर्थन दे रही वामपंथी पार्टियाँ मौजूदा स्वरूप में परमाणु समझौते का विरोध कर रही हैं। इन दलों ने धमकी दी है कि अगर सरकार ने समझौते को लागू करने की दिशा में पहल की, तो वे अपना समर्थन वापस ले लेंगे।
Monday, March 24, 2008
राजतंत्र की पहल पर लोकतंत्र के लिए मतदान
सौ साल से ज़्यादा की राजशाही के बाद भूटान में पहली बार सोमवार को लोकतांत्रिक चुनाव हो रहे हैं। इस ऐतिहासिक चुनाव में भूटान की जनता 47 संसदीय सीटों के लिए अपनी प्रतिनिधियों का चुनाव करेगी।
भारत और चीन के बीच स्थित इस छोटे देश के शाही परिवार ने ही लोकतांत्रिक चुनाव की पहल की थी जिसका मानना है कि अब देश की जनता अपने प्रतिनिधियों को चुनने के लिए तैयार हो गई है।
हालाँकि बड़ी संख्या में लोग यह भी मानते हैं कि वे राजशाही से ख़ुश हैं। भूटान के पहले संसदीय चुनाव में सिर्फ़ दो पार्टियाँ ही अपना क़िस्मत आज़मा रही हैं।
दोनों पार्टियों पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी और भूटान हॉर्मनी पार्टी ने जनता से वादा किया है कि चुनाव जीतने पर वे देश की आर्थिक प्रगति पर ध्यान देंगी और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाएँगी।
दोनों पार्टियों का नेतृत्व पूर्व मंत्रियों के हाथ में है। पीपुल्ल डेमोक्रेटिक पार्टी की कमान संभाल रहे हैं संगय नगेडप, जो पूर्व राजा की पत्नी के भाई हैं। जबकि भूटान हॉर्मनी पार्टी का नेतृत्व जिग्मी थिनली कर रहे हैं और शाही परिवार से उनका कोई संबंध नहीं है।
पार्टियाँ
लेकिन उन्होंने अपनी पार्टी को भूटान की आम जनता से जोड़ने की कोशिश की है। भूटान में संसद के ऊपरी सदन के लिए दिसंबर में चुनाव हुए थे।
मतपेटियाँ दूर-दराज़ के इलाक़ों तक पहुँचा दी गई हैं
भूटान में उस समय से लोकतंत्र क&