लगभग सवा महीने के बाद बराक ओबामा और हिलेरी क्लिंटन आज एक बार फिर आमने सामने हैं पेनसिलवैनिया में।
पिछला मुक़ाबला हुआ था मिसिसिपी में और उसके बाद के इस लंबे इंटरवल में ख़ामोशी रहेगी, इसकी तो किसी को उम्मीद नहीं थी लेकिन राजनीतिक तू-तू, मैं-मैं का ऐसा खेल देखने को मिलेगा इसका अंदाज़ा शायद ही किसी को रहा होगा।
पहले, बराक ओबामा बुरी तरह फंसे जब उनके बेहद क़रीबी और उनके चर्च के पादरी पैस्टर राइट के कई ऐसे बयान वेबसाइट यू ट्यूब पर नज़र आए जो किसी भी उम्मीदवार के लिए परेशानी का सबब बन सकते हैं।
पता चला कि उन्होंने काले लोगों के इस चर्च में कई बार अमरीका और अमरीकी नीतियों को भला बुरा कहा था।
इसके बाद ओबामा पर दबाव बढ़ा कि वो ये कहें कि जिस पैस्टर राइट को कल तक वो अपने परिवार का हिस्सा कहते थे, उनसे वो नाता तोड़ रहे हैं।
ओबामा की मुश्किल ये थी कि अगर रिश्ता तोड़ने की बात करें तो काले समुदाय में बुरे बनें, नहीं करें तो देश के गोरे वोटर नाराज़।
उन्होंने बीच का रास्ता निकाला और नस्लभेद की सम्स्या पर एक ज़बरदस्त भाषण दे डाला। मामला कुछ ठंडा हुआ है लेकिन दबा नहीं है।
हिलेरी की समस्या
उधर हिलेरी क्लिंटन 1996 के अपने बोस्निया दौरे के बयान पर फंस गईं।
हिलेरी क्लिंटन
क्लिंटन को ओबामा खेमे से कड़े हमले झेलने पड़े हैं
उन्होंने कहा कि जब वो वहां उतरी थीं तो हवाई अ़ड्डे के आसपास गोलियां चल रही थीं और वो बचते बचाते निकली थीं। एक अख़बार ने खोजबीन की, पता चला ऐसा कुछ नहीं हुआ था।
बस ओबामा कैंप टूट पड़ा और हिलेरी को एक टीवी डिबेट में माफ़ी मांगनी पड़ी।
लेकिन फिर ओबामा ने बयान दे दिया कि देश के कई हिस्सों में लोगों में इतनी कड़वाहट है इसलिए वो धर्म और बंदूक से चिपके रहते हैं।
अमरीका के एक बड़े तबके के लिए धर्म बहुत मायने रखता है और बंदूक रखना भी संस्कृति का हिस्सा है।
हिलेरी क्लिंटन ने कहा कि ओबामा ने ये बयान देकर कुछ लोगों की संस्कृति को छोटा कहा है और ज़मीनी हक़ीकत से वो कटे हुए हैं।
ओबामा फिर बैकफ़ुट पर नज़र आए और जब देखा कि हिलेरी के हमले बंद नहीं हो रहे, तो उन्होंने भी जवाबी हमला शुरू कर दिया।
डाल-डाल, पात-पात
ओबामा
ओबामा अगर डेमोक्रेट उम्मीदवार बनते हैं और राष्ट्रपति चुनाव जीतते हैं तो अमरीका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति बनेंगे
ये आपसी बयानबाज़ी और तीखी होगी इसमें कोई शक नहीं क्योंकि अभी भी फ़ैसला कोसों दूर नज़र आ रहा है।
पेंसिलवेनिया में चुनाव से पहले हुए सर्वे में हिलेरी ओबामा से आगे चल रही हैं लेकिन अब तक जितने चुनाव हो चुके हैं उनमें ओबामा ने ज़्यादा जीत हासिल की है।
हिलेरी क्लिंटन की दलील है कि उन्होंने उन बड़े राज्यों में जीत हासिल की है जिन्हें जीते बिना राष्ट्रपति पद हासिल करने की कोई सोच भी नहीं सकता और पेंसिलवेनिया ऐसा ही एक राज्य है।
विश्लेषकों का कहना कि अगर हिलेरी ने बड़े अंतर से ओबामा को यहां हराया तब वो अपना दावा बरकरार रख सकती हैं।
लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ तो फिर उनपर मैदान से हटने का दबाव और बढ़ेगा क्योंकि ये रेस जितनी लंबी खिंच रही है उससे डेमोक्रेट्स को डर है कि पार्टी आपस में ही बंट रही है और घर की इस लड़ाई का फ़ायदा मिल रहा है रिपबलिकन पार्टी को।
Tuesday, April 22, 2008
ओबामा-हिलेरी फिर आमने-सामने
Monday, April 21, 2008
चरमपंथियों से बातचीत की नीति का समर्थन
ब्रिटेन के विदेश मंत्री डेविड मिलिबैंड ने कहा है कि ब्रितानी सरकार पाकिस्तान सरकार की चरमपंथियों से बातचीत की नीति का समर्थन करती है।
मिलिबैंड ने कहा कि पाकिस्तान की नई सरकार ने अफ़ग़ानिस्तान की सीमा से सटे कबाइली इलाकों के चरमपंथियों के साथ बातचीत का निर्णय लिया है, जो कि एक सही क़दम है।
चरमपंथ से लड़ने के उपायों पर चर्चा के लिए पेशावर पहुंचे मिलिबैंड ने कहा कि जिन्होंने हिंसा का परित्याग कर दिया है, उन्हें राजनीतिक प्रक्रिया में शामिल करना ज़रूरी है।
उन्होंने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान से सटे पाकिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में ब्रिटेन की काफी रूचि है क्योंकि इस इलाके से वो चरमपंथ पनप रहा है जो ब्रिटेन तक फैला हुआ है।
पर पाकिस्तान की नई सरकार अभी अपने नए रास्ते की तलाश में जुटी है और उसके लिए चरमपंथियों से बातचीत के ज़रिए किसी निर्णायक स्थिति तक पहुँचना इतना आसान नहीं होगा।
इससे पहले राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने कट्टरपंथियों का मुक़ाबला सैनिक हमलों से किया। उन्हें अमरीका का समर्थन भी प्राप्त था लेकिन वो पिछले 18 महीनों में आत्मघाती हमलों को बढ़ने से नहीं रोक पाए।
समाधान निकले, इसलिए...
पेशावर में ब्रिटेन के विदेश मंत्री उन लोगों से मिले जिनके परिजन हाल के आत्मघाती हमलों में मारे गए थे।
उन्होंने ध्यानपूर्वक उनकी बातें भी सुनीं। कई लोगों ने उनसे कहा कि वो अल क़ायदा के समर्थकों से बातचीत करें।
इसपर मिलिबैंड ने भी स्पष्ट किया कि पाकिस्तान को अफ़ग़ानिस्तान के साथ बातचीत से जोड़ना ही उचित होगा। जो लोग संविधान के तहत काम करना चाहते हैं उन तक हाथ बढ़ाना ही चाहिए।
ब्रिटेन के विदेश मंत्री ने कहा कि मामले का समाधान केवल सैन्य कार्रवाई या फिर केवल बातचीत नहीं है।
इसका समाधान एक ऐसी लंबी प्रक्रिया है जिसमें लाखों लोगों के दिलोदिमाग में जगह बनानी होगी।
उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि वो लोगों को ये बताना चाहते हैं कि ब्रिटेन लंबे समय तक पाकिस्तान का सहयोगी बना रहेगा।
पाकिस्तान के उत्तरी पश्चिमी इलाक़े में ब्रिटेन का विशेष ध्यान है क्योंकि ब्रिटेन में व्याप्त ज़्यादातर चरमपंथ की जड़ें यहीं से शुरु होती हैं।
उन्होंने कहा कि ब्रिटेन के लोगों के लिए ये ख़ासी चिंता का विषय है कि वहाँ की चरमपंथी कार्रवाइयों की जाँच में 70 प्रतिशत मामले पाकिस्तान से जुड़े पाए गए।
Saturday, April 19, 2008
'नेपाल नरेश जनादेश का सम्मान करें'
'नेपाल नरेश जनादेश का सम्मान करें'
प्रचंड
माओवादी स्पष्ट बहुमत की ओर बढ़ रहे हैं
नेपाल में माओवादी नेता प्रचंड ने कहा है कि वो नेपाल नरेश से मिलना चाहते हैं ताकि उन्हें सत्ता से दूर रहने के लिए राज़ी किया जा सके।
संविधान सभा के चुनावों में पुष्प कमल दहल उर्फ़ प्रचंड की अगुआई वाली नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी है।
प्रचंड ने कहा कि वो नरेश से मिलने के लिए ख़ुद पहल करेंगे। माओवादी लगभग एक दशक तक हिंसक आंदोलन चलाने के बाद वर्ष 2006 में मुख्य धारा में शामिल हो गए थे।
प्रचंड ने नेपाल नरेश के बारे में कहा, "उन्हें जनादेश को समझना चाहिए और उसका सम्मान करना चाहिए और ख़ुद राजभवन को खाली कर देना चाहिए।"
वो कहते हैं, "इतिहास देखें तो राजाओं की हत्या तक कर दी गई है और उन्हें भागना पड़ा है। कृपया उसकी पुनरावृत्ति नेपाल में न होने दें।"
परिणाम
इससे पहले माओवादियों के दूसरे प्रमुख नेता और प्रधानमंत्री पद के दावेदार समझे जा रहे बाबूराम भट्टाराई ने कहा था कि संविधान सभा की पहली बैठक में ही नेपाल को गणतांत्रिक राष्ट्र घोषित कर दिया जाएगा।
उन्हें जनादेश को समझना चाहिए और उसका सम्मान करना चाहिए और ख़ुद राजभवन को खाली कर देना चाहिए
प्रचंड
संविधान सभा के चुनावों के अंतिम परिणाम अगले हफ़्ते तक आने की उम्मीद है।
चुनावों में माओवादियों की जीत से कई विश्लेषक भी आश्चर्यचकित रह गए। प्रत्यक्ष मतदान प्रणाली के तहत 240 सीटों में से आधी सीटें माओवादियों के खाते में जाने के संकेत मिल रहे हैं।
लेकिन 355 सीटों पर समानुपातिक पद्धति से चुनाव होने हैं और विश्लेषकों के मुताबिक इसमें माओवादियों को बहुत ज़्यादा सीटें मिलने की संभावना नहीं है।
इसके बाद 28 सदस्यों को सरकार नामित करेगी।
Friday, April 18, 2008
पूरे तामझाम के साथ शुरू होगी आईपीएल
क्रिकेट को हमेशा के लिए बदल देने की क्षमता रखने वाले इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) का पहला मैच शुक्रवार को बंगलौर में भारी धूम-धड़ाके के बीच फ्लड की रोशनी में खेला जाएगा।
पहला मैच राहुल द्रविड़ के नेतृत्व वाली बंगलौर की टीम और सौरभ गांगुली की कप्तानी वाली कोलकाता के बीच खेला जाएगा।
भारत के दोनों पूर्व कप्तान फ्लड लाइट की रोशनी में चलकर बीच मैदान में आएँगे, पूरे स्टेडियम में अंधेरा होगा, टॉस होते ही स्टेडियम जगमगा उठेगा।
छह सप्ताह तक चलने वाला यह टूर्नामेंट मुंबई में एक जून को ख़त्म होगा।
इस टूर्नामेंट के दौरान लोगों को सचिन तेंदुलकर, रिकी पॉन्टिंग, मैथ्यू हेडन, शेन वॉर्न और ब्रैट ली जैसे खिलाड़ियों का रोमांचक मुक़ाबला देखने को मिलेगा।
पहले मैच की सारी टिकटें बिक चुकी हैं, आईपीएल की वेबसाइट का भी कहना है कि बाक़ी मैचों के टिकटों को 'धड़ाधड़ बिक्री' हो रही है।
तामझाम
बंगलौर की टीम के मालिक और नामी-गिरामी उद्योगपति विजय माल्या ने बेसबॉल की तर्ज़ पर चियर लीडर्स को नाचने-गाने के लिए बुलाया है।
वीरेंदर सहवाग जैसे कई बड़े खिलाड़ी नज़र आएँगे
वाशिंगटन की रेडस्किन्स टीम की चियर लीडर्स बंगलौर पहुँच गई हैं जो छोटे-छोटे कपड़ों में हर चौके-छक्के पर ठुमके लगाएँगी।
रात के मैचों के लिए विशेष प्रकाश व्यवस्था की गई है और पूरे टूर्नामेंट को ग्लैमरस बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई है, ज़ाहिर है यह दर्शकों के लिए एक नया अनुभव होगा।
दर्शक दुनिया के अलग-अलग देशों के खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाएंगे जो पहले कभी नहीं हुआ है।
कई दिलचस्प स्थितियाँ पैदा होंगी, मिसाल के तौर पर पंजाब के हरभजन सिंह मुंबई से खेलेंगे। इसके अलावा जो दर्शक भारतीय टीम के बड़े खिलाड़ियों के प्रशंसक रहे हैं वे उन्हें जब विपक्षी टीम में पाएँगे तो उनका क्या रवैया होगा, यह देखने लायक होगा।
समस्याएँ
तेंदुलकर, कुंबले और नैथन ब्रेकन जैसे कुछ स्टार खिलाड़ी पहले कुछ मैचों में नज़र नहीं आएँगे क्योंकि वे फिट नहीं हैं।
शाहरुख़
कोलकाता नाइट राइडर के मालिक शाहरुख़ थोड़े चिंतित हैं
इस पूरे टूर्नामेंट को उत्सुकता से देखा जा रहा है और कोलकाता नाइट राइडर टीम के मालिक शाहरुख़ ख़ान ने माना कि वे रात-दिन काम कर रहे हैं।
शाहरुख़ ख़ान ने बांग्ला समाचार पत्र आनंद बाज़ार पत्रिका के साथ एक बातचीत में स्वीकार किया था क्रिकेट प्रेमियों के ठंडे रुख़ को लेकर चिंतित हैं, उनका कहना है कि उन्हें जैसे उत्साह की उम्मीद थी वह कहीं नहीं दिख रहा है।
उन्होंने कहा, " मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि टिकट की क़ीमतें इतनी कम होने के बावजूद बिक क्यों नहीं रही हैं, मैंने नहीं सोचा था कि इतनी दिक़्कतें आएँगी।"
इसके अलावा खिलाड़ियों के मेहनताने को लेकर भी काफ़ी भ्रम की स्थिति है, कई खिलाड़ियों का कहना है कि उन्हें पैसा नहीं मिला है।
Thursday, April 17, 2008
मशाल दौड़ के लिए दिल्ली में कड़ी सुरक्षा
ओलंपिक मशाल दौड़ के लिए भारत की राजधानी दिल्ली में कड़े सुरक्षा उपाय किए गए हैं। इस बीच तिब्बती संगठनों ने शांति जुलूस निकालने की योजना बनाई है।
72 सेंटीमीटर लंबी और 985 ग्राम वज़नी यह मशाल इस्लामाबाद से विशेष विमान से दिल्ली पहुंची। मशाल को चीनी दूतावास में रखा गया है।
मशाल दौड़ का आयोजन राजपथ पर गुरुवार दोपहर होगा। लंदन, पेरिस और सैन फ्रांसिस्को में विरोध झेल चुकी ओलंपिक मशाल यहां 47 खिलाडि़यों समेत 70 हस्तियों के हाथों से गुजरेगी।
रिले राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक लगभग दो किलोमीटर की होगी।
तिब्बती संगठनों की ओर से विरोध प्रदर्शन की आशंका को देखते हुए सुरक्षा के कड़े उपाय किए गए हैं।
दिल्ली में हज़ारों सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया हैं।
सुरक्षा
राजपथ और उससे जुड़ी आसपास की सड़कों को दोपहर एक बजे से शाम सात बजे तक के लिए बंद करने के आदेश दिए गए हैं।
साथ ही सरकारी दफ़्तरों में काम करे रहे कर्मचारियों को इन छह घंटों में बाहर निकलने की इजाज़त नहीं होगी।
दिल्ली में तिब्बती प्रदर्शनकारी
ख़बर आ रही है कि कई तिब्बती लोग प्रदर्शन करने के लिए दिल्ली पहुंच रहे हैं
यहां तक कि राजपथ की तरफ खुलने वाली खिड़कियों को भी बंद रखने को कहा गया है।
राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड के जवान दौड़ के रास्ते से लगी ऊंची इमारतों पर तैनात रहेंगे।
इस मौके पर दो हेलिकॉप्टर भी इस पूरे घटनाक्रम पर नज़र रखेंगे।
चौकसी इसलिए भी बढ़ाई गई है क्योंकि बुधवार को तमाम सुरक्षा इंतज़ामों को धता बताते हुए तिब्बती प्रदर्शनकारी चीनी दूतावास के बाहर प्रदर्शन करने में कामयाब रहे।
हालाँकि पुलिस ने बाद में उन्हें हटा दिया और कई प्रदर्शनकारी गिरफ़्तार कर लिए गए।
विरोध प्रदर्शन
कुछ दिनों पहले ही धर्मशाला से दिल्ली पहुँचे तिब्बती प्रदर्शनकारियों ने दो तरह से विरोध प्रदर्शन की रणनीति बनाई है।
एक तरफ जहां तिब्बती यूथ कांग्रेस के सदस्य मशाल रैली के दौरान उग्र विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं, वहीं दूसरी तरफ तिब्बत स्वायत्तता कमेटी ने राजघाट से जंतर-मंतर तक एक समानांतर शांति रैली निकालने की योजना बनाई है।
विरोध जताने के लिए ये लोग भी मशाल लेकर दौड़ेंगे। इस मशाल को शांति मशाल का नाम दिया गया है।
हालाँकि बुधवार शाम पुलिस मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में संयुक्त पुलिस कमिश्नर (ट्रैफिक) एसएन श्रीवास्तव ने बताया कि फिलहाल शांति रैली के रूट को मंज़ूरी नहीं दी गई है।
सितारों की भागीदारी
इस मशाल को लेकर लगभग 70 फ़िल्मी सितारे और खिलाड़ी दौड़ेंगे।
आमिर ख़ान
आमिर ख़ान ओलंपिक मशाल रिले में हिस्सा लेंगे
इनमें आमिर ख़ान, सैफ़ अली ख़ान, पी टी ऊषा, मिल्खा सिंह, लिएंडर पेस और अंजू बॉबी जॉर्ज जैसे नाम शामिल हैं।
क्रिकेट सितारे सचिन तेंदुलकर के भी इस दौड़ में भाग लेने की उम्मीद थी लेकिन बुधवार को उन्होंने कहा कि चोट लग जाने के कारण वे इसमें भाग नहीं ले पाएंगे।
कड़े सुरक्षा इंतज़ाम के बीच लगभग सवा दो किलोमीटर लंबी ये दौड़ राजपथ से होकर गुज़रेगी। ये दौड़ लगभग एक घंटे में पूरी होगी।
भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी ने कहा कि सारी दुनिया भारत में एक सफल ओलंपिक दौड़ की उम्मीद कर रही है और उन्हें भरोसा है कि ये एक बढ़िया कार्यक्रम होगा।
कलमाड़ी का कहना था कि बाइचंग भूटिया, किरन बेदी, सचिन तेंदुलकर औऱ राहुल गांधी के इस दौड़ में भाग नहीं लेने के बावजूद ये दौड़ कामयाब रहेगी।
उधर ख़बरें आ रही है कि कई तिब्बती लोग प्रदर्शन करने के लिए दिल्ली पहुंच रहे हैं।
Wednesday, April 16, 2008
महंगाई पर सरकार को घेरने की तैयारी
भारत में खाद्य पदार्थों की बढ़ती क़ीमतें केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार के लिए के लिए एक बड़ा सरदर्द बनती नज़र आ रही हैं।
बुधवार को संसद में महंगाई पर चर्चा होगी जहाँ इस मुद्दे पर विपक्षी भारतीय जनता पार्टी सरकार को अपने तेवर दिखा सकती है।
दूसरी ओर केंद्र सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे वामपंथी दलों ने संसद के बाहर धरना-प्रदर्शनों का आयोजन करने की योजना बनाई है।
इसके पहले मंगलवार को संसद के बजट सत्र में दूसरे चरण की बैठक शुरू होने के कुछ ही देर बाद दोनों सदनों की कार्यवाही महंगाई पर हंगामे की वजह से स्थगित करना पड़ी थी।
वामपंथी दलों ने भी महंगाई के मुद्दे पर सरकार को आड़े हाथों लेने का फ़ैसला किया है और मंगलवार को एक मार्च भी निकाला।
पिछले दो महीनों में रोज़मर्रा की ज़रूरतों के सामानों में हुई मूल्य-वृद्धि ने सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।
ताज़ा आँकड़ों के मुताबिक महँगाई दर पिछले लगभग साढ़े तीन साल के सर्वोच्च स्तर पर है।
ख़ुद यूपीए सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे वामपंथी दलों ने भी बढ़ती महँगाई को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि सरकार को इसका राजनीतिक ख़ामियाज़ा भुगतना पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि खाद्य सुरक्षा की स्थिति ख़त्म होने जा रही है और अस्थिरता के एक दौर की शुरुआत हो रही है, जिसमें महंगाई की मार लंबे समय तक पड़ने वाली है।
Tuesday, April 15, 2008
संसद में सरकार को घेरने की तैयारी
भारतीय संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण आज से शुरू हो रहा है जिसमें विपक्ष महँगाई और आरक्षण के मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी कर रही है।
जनता पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं डालने वाला बजट पेश होने के बाद अब हालात बदल गए हैं।
पिछले दो महीनों में रोज़-मर्रा की ज़रूरतों के सामानों में हुई मूल्य-वृद्धि ने सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी है।
ताज़ा आँकड़ों के मुताबिक महँगाई दर पिछले लगभग साढ़े तीन साल के सर्वोच्च स्तर पर है।
इस मामले पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की अगुआई में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) पहले ही आंदोलन छेड़ने की घोषणा कर चुका है।
वामपंथी भी नाराज़
ख़ुद यूपीए सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे वामपंथी दलों ने भी बढ़ती महँगाई को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि सरकार को इसका राजनीतिक ख़ामियाज़ा भुगतना पड़ सकता है।
संसद सत्र शुरू होते ही वामपंथी दल न सिर्फ़ सदन के भीतर बल्कि उसके बाहर भी आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं।
वाम दलों ने महँगाई पर रोक लगाने में विफलता के मुद्दे पर संसद तक मार्च करने का आहवान किया है।
आरक्षण
उच्च शिक्षण संस्थानों में ओबीसी आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले की गूँज संसद में भी सुनाई दे सकती है।
अदालत ने क्रीमी लेयर को इसके दायरे से बाहर कर दिया है, जिसका राजनीतिक दल इसका विरोध कर रहे हैं।
दूसरी ओर यूपीए और ख़ास कर कांग्रेस पार्टी क्रीमी लेयर को छोड़ कर अदालत के फ़ैसले को कुल मिलाकर सरकार की जीत की तरह पेश कर रही है और साथ ही निजी संस्थानों में भी आरक्षण लागू करने की बात कर रही है जिसका मुद्दा ज़ोर शोर से उठ सकता है।
Monday, April 14, 2008
भारत-बांग्लादेश मैत्री का नया अध्याय
बांग्लादेश और भारत के बीच चार दशकों के लंबे इंतज़ार के बाद सोमवार, 14 अप्रैल से मैत्री का एक नया अध्याय शुरू हो रहा है।
स्वतंत्र बांग्लादेश बनने के बाद पहली बार दोनों देशों के बीच यात्री रेल सेवा शुरू की जा रही है जिसे काफ़ी महत्वपूर्ण घटना माना जा रहा है।
मैत्री रेलगाड़ी की तैयारियाँ
यह रेलगाड़ी सोमवार को कोलकाता से भारतीय समय के अनुसार सवेरे लगभग सवा सात बजे ढाका के लिए रवाना हुई।
इसी तरह की एक रेलगाड़ी सोमवार को ढाका से कोलकाता के लिए रवाना हुई है।
भारत के विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी और रेल मंत्री लालू प्रसाद ने सोमवार को बंगाली नव वर्ष के दिन ढाका जाने वाली ‘मैत्री एक्सप्रेस’ को कोलकाता से हरी झडी दिखा कर रवाना किया।
कुल 418 यात्रियों को बैठाने की क्षमता वाली मैत्री एक्सप्रेस सप्ताह में एक बार चलेगी। इसमें वातानुकूलित प्रथम श्रेणी (एसी-फ़र्स्ट) का किराया 780 रुपए और सबसे सस्ता किराया 320 रुपए होगा।
भारत और बांग्लादेश के बीच विमान सेवा और बस सेवा तो पहले से ही चल रही हैं लेकिन समझा जा रहा है कि मैत्री रेल सेवा एक सस्ता यातायात साधन साबित होगा।
ऐसा माना जा रहा है कि भारत विभाजन के बाद पूर्वी बंगाल से पश्चिमी बंगाल आकर बसे बहुत से लोग इस रेल सेवा का इस्तेमाल करेंगे।
कोलकाता में इस रेल सेवा को शुरू किए जाते समय बहुत से ऐसे लोग भी थे जो 1946 में पूर्वी बंगाल से पश्चिमी बंगाल आ गए थे और इस रेल में जाकर अब बांग्लादेश बन चुके उस ज़मीन को छूकर देखना चाहते हैं।
वर्ष 1965 तक ढाका और कोलकाता के बीच रेल संपर्क बहाल था लेकिन उसी समय पाकिस्तान के साथ युद्ध शुरु हुआ और ये सेवा बंद कर दी गई थी।
उस समय बांग्लादेश पाकिस्तान का हिस्सा था जिसे पूर्वी पाकिस्तान कहा जाता था लेकिन 1971 में बांग्लादेश बनने के बाद भारत के साथ रेल सेवा बहाल नहीं हो सकी थी।
अहम फ़ैसला
बांग्लादेश के साथ मैत्री रेल सेवा शुरू करने का फ़ैसले को भारत सरकार ने शुक्रवार को कैबिनेट की बैठक में मंज़ूरी दी थी। दोनों देशों में वर्ष 2001 में रेलगाड़ी फिर से चलाने पर सहमति हुई थी।
समझौता एक्सप्रेस
भारत-पाकिस्तान के बीच ये ट्रेन हफ़्ते में दो दिन चलती है
इससे पहले 24 फ़रवरी को कैबिनेट ने दोनों देशों के बीच अस्थाई चार दीवारी बनाने के भारतीय प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी थी ताकि यात्री रेल चलाए जाने का रास्ता सुलभ हो सके।
दोनों देशों के रेलवे अधिकारियों ने पिछले सप्ताह दो दिन चली दोतरफ़ा बैठक में रेल सेवा शुरू करने के लिए इससे संबंधित सभी मुद्दों को अंतिम रूप दिया।
मैत्री एक्सप्रेस में प्रति यात्री 35 किलोग्राम वज़न तक का सामान लेकर जा सकता है। जबकि पाँच साल से कम उम्र के बच्चे के साथ 20 किलोग्राम तक वज़न का सामान बिना किसी शुल्क के लेकर जाया जा सकता है।
कोलकाता से एक ऐसा व्यक्ति मैत्री एक्सप्रेस में सवार हुआ जो 1965 में रेलगाड़ी से ढाका से कोलकाता आया था। वो रेलगाड़ी उसके बाद बंद हो गई थी। उस समय उस व्यक्ति की उम्र नौ साल थी।
अब 54 वर्षीय राखल दास ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "ढाका जाने वाली सीधी बस सेवा का टिकट काफ़ी महंगा है और हवाई यात्रा को मेरे बस के बाहर है लेकिन रेल यात्रा मेरी जेब के दायरे में है।"
समझौता एक्सप्रेस
इससे पहले वर्ष 2004 में पाकिस्तान और भारत के बीच रेल सेवा शुरू की गई थी जिससे दोनों देशों के बीच यातायात संबध बहाल हुए हैं।
इस ट्रेन के ज़रिए यात्री सप्ताह में दो दिन दिल्ली से लाहौर की यात्रा कर रहे हैं।
थार एक्सप्रेस
थार एक्सप्रेस हफ़्ते में एक बार चलती है
भारत में दिसंबर 2001 में संसद परिसर में हुए चरमपंथी हमले के बाद से इस गाड़ी को रोक दिया गया था लेकिन बाद में दोनों देशों के बीच संबध सुधरे और रेल सेवा फिर बहाल कर दी गई।
भारत और पाकिस्तान के बीच आपसी सदभाव के लिए समझौता एक्सप्रेस 1976 से चलनी शुरू हुई थी।
थार एक्सप्रेस
इसी तरह वर्ष 2006 में भारतीय राजस्थान राज्य और पाकिस्तान के सिंध प्रांत को जोड़ने वाली थार एक्सप्रेस की शुरूआत की गई थी।
ये रेल सेवा दोनों देशों के बीच करीब 41 वर्षों के बाद शुरू की गई थी।
इस रेल सेवा का ज़रिए शुरुआती छह महीनों में क़रीब 31 हज़ार यात्रियों ने यात्रा की और अपने परिजनों से मुलाक़ात की थी।
दिसंबर 2007 में पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो की हत्या के बाद इस ट्रेन को रोक दिया गया था लेकिन फिर जल्द ही सेवा बहाल कर दी गई।
Saturday, April 12, 2008
माओवादी नेता प्रचंड जीत के क़रीब
नेपाल में संविधान सभा के गठन के लिए हुए चुनावों की मतगणना में माओवादी लगातार बढ़त बनाए हुए हैं। नेपाली कांग्रेस और अन्य दलों को झटका लगा है।
अभी तक पाँच सीटों के नतीजे घोषित किए गए हैं जिनमें तीन नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के पक्ष में गए हैं।
एक-एक सीटों पर नेपाली कांग्रेस और नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (यूनाइटेड मार्क्सवादी लेनिनवादी) यानी सीपीएन (यूएमएल) के पक्ष में गए हैं।
जिन 70 सीटों के रूझान मिले हैं उनमें से 48 सीटों पर माओवादियों ने बढ़त बनाई हुई है।
मतगणना की रफ़्तार धीमी है क्योंकि कुछ एक सीटों को छोड़ कर शेष सीटों पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों का उपयोग नहीं हुआ है, इसलिए मतपत्रों को गणना में समय लग रहा है।
लेकिन अब तक मिले रुझानों से माओवादी खेमे में जश्न का माहौल है और उनके हज़ारों समर्थक सड़कों पर निकल आए हैं।
समीकरण
पार्टी के चैयरमैन पुष्पकमल दहल यानी प्रचंड ने काठमांडू क्षेत्र नंबर 10 में निर्णायक बढ़त बना ली है और उनकी जीत तय मानी जा रही है।
जबकि सीपीएन (यूएमएल) के नेता माधव नेपाल पिछड़ गए हैं। माओवादियों के बाद नेपाली कांग्रेस दूसरे नंबर पर है।
उनके उम्मीदवार प्रकाशमान सिंह चुनाव जीत गए हैं।
अभी तक के रुझानों को देखा जाए तो सबसे तगड़ा झटका नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (यूएमएल) को लगा है। उनके एक बड़े नेता प्रदीप नेपाल चुनाव हार चुके हैं।
लोगों का कहना है कि चुनाव प्रचार में माओवादियों ने बड़े ही सीधे शब्दों में जनता के सामने अपना एजेंडा रखा जिसका फ़ायदा उन्हें मिल रहा है।
दूसरी ओर अन्य पार्टियाँ कभी न कभी सत्ता का स्वाद चख चुकी हैं। पर्यवेक्षकों की राय में उन्हें अवसरवादी समझा जा रहा है।
राजधानी काठमांडू में एक माओवादी समर्थक का कहना था, "उन्होंने जनता के लिए काम किया है। दस साल से संघर्ष करते आए हैं, न पानी पीया और न ठीक से खाना खाया। इसका फ़ायदा तो मिलेगा ही।"
प्रणाली
इस चुनाव मे 240 सीटों पर प्रत्यक्ष चुनाव और 335 सीटों के लिए समानुपातिक पद्धति से चुनाव हुआ है, जिसमें मतदाता को उम्मीदवार को न चुनकर पार्टी को चुनना था।
ग्रामीण इलाक़ों के रुझान आने शुरू नहीं हुए हैं
अब जिस तरह के रूझान प्रत्यक्ष चुनावों के आ रहे हैं, उनसे ऐसा लग रहा है कि माओवादियों को समानुपातिक चुनाव मे काफ़ी फ़ायदा हो सकता है। इसका कारण बताया जा रहा है कि जहाँ उनका परंपरागत आधार नहीं है वहाँ अगर वो अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं तो उनके गढ़ माने जाने वाले क्षेत्रों मे उन्हें एकतरफ़ा बढ़त मिल सकती है।
हालाँकि अब तक माओवादियों के साथ सरकार में शामिल थे पर उनका कहना है कि संविधानसभा में माओवादियों के बहुमत की स्थिति में देश में लोकतंत्र स्थापित करने के संयुक्त प्रयास को झटका लग सकता है क्योंकि माओवादी मिलजुल कर काम करने के आदी नही हैं।
उधर नेपाली कांग्रेस के नेता भी चुनाव परिणामों को हैरान करने वाला बता रहे हैं। हालाँकि ये नेता अभी हार स्वीकार नही कर रहे हैं, पर दबी ज़ुबान मे मान रहे हैं कि उनके कई धुरधंर भी ख़तरे मे हैं।
हालाँकि चुनाव परिणाम पूरी तरह सामने आने में कई दिन लग सकते हैं क्योंकि नेपाल के कई दुर्गम इलाके़ ऐसे हैं जहाँ मतगणना अभी शुरू ही हुई है वहाँ से तस्वीर साफ़ होने मे समय लगेगा, पर तराई और राजधानी काठमांडू मे कल तक तस्वीर काफ़ी हद तक साफ़ हो जाएगी और कई परिणाम सामने आ सकते हैं।
Friday, April 11, 2008
मून ओलंपिक समारोह में हिस्सा नहीं लेंगे
संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने चीन को बता दिया है कि वो बीजिंग में अगस्त में होने वाले ओलंपिक खेलों के उदघाटन समारोह में हिस्सा नहीं ले पाएंगे।
संयुक्त राष्ट्र की एक प्रवक्ता का कहना है कि बान की मून ने कुछ महीने पहले ही अपनी असमर्थता जता दी थी और कहा था कि समय की कमी के कारण उनका बीजिंग जाना निश्चित नहीं है।
इस बीच ओलंपिक मशाल अर्जेंटीना पहुँच गई है जहाँ इसकी सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए हैं।
तिब्बत पर चीन के शासन के ख़िलाफ़ तिब्बती शरणार्थियों ने कई देशों में ओलंपिक मशाल का विरोध किया है।
जहाँ लंदन में मशाल छीनने की कोशिश की गई, वहीं पेरिस में सुरक्षा कारणों से इसे बुझाना पड़ा।
इस साल के शुरु में तिब्बत में सबसे पहले चीन विरोधी हिंसक प्रदर्शन हुए थे।
चीन को ओलंपिक की मेज़बानी मिली है और तिब्बती शरणार्थियों ने इसे ध्यान में रखते हुए विरोध प्रदर्शन तेज़ किए हैं ताकि पूरी दुनिया का ध्यान इस मुद्दे की ओर खींचा जा सके।
इसका असर भी दिखाई दे रहा है। कई चर्चित खिलाड़ियों ने ओलंपिक मशाल दौड़ के बहिष्कार की घोषणा की है।
इस कड़ी में नया नाम जुड़ा है नोबल शांति पुरस्कार विजेता वंगारी मथाई का। उन्होंने चीन में मानवाधिकारों की बुरी स्थिति का हवाला देते हुए तंज़ानिया में मशाल दौड़ से अपना नाम वापस ले लिया है।
उन्होंने कहा है कि वो तिब्बत की घटनाओं से चिंतित हैं और वहाँ के लोगों के प्रति सहानुभूति रखती हैं।
Thursday, April 10, 2008
ओलंपिक मशाल का अमरीका में भी विरोध
ओलंपिक मशाल रिले को अमरीका में भी विरोध का सामना करना पड़ा है।
अमरीका के सैन फ़्रांसिस्को में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच ओलंपिक मशाल दौड़ आयोजित की गई।
लेकिन हज़ारों की संख्या में जुटे चीन-विरोधी प्रदर्शनकारियों से बचने के लिए आयोजकों ने अंतिम क्षणों में मशाल दौड़ का रास्ता बदल दिया।
अमरीका में विरोध प्रदर्शन
बुधवार को सैन फ़्रांसिस्को में ओलंपिक मशाल दौड़ की दूरी भी आधी कर दी गई। पहले ये रिले दौड़ 10 किलोमीटर की थी।
मशाल के स्वागत में आयोजित समारोह का स्थान भी अंतिम क्षणों में बदलना पड़ा।
सैन फ़्रांसिस्को के मेयर गेविन न्यूसम ने इन बदलावों को ज़रूरी बताते हुए कहा है कि जनसुरक्षा की दृष्टि से ये क़दम उठाने पड़े।
इससे पहले जब ओलंपिक मशाल सैन फ़्रांसिस्को में यात्रा के लिए निकली तो वहाँ नगर के मेयर ने उसका स्वागत किया।
मशाल यात्रा के नियत समय से घंटों पहले ही हज़ारों लोग प्रस्तावित रूट पर जमा हो गए थे।
इनमें तिब्बत समर्थकों की बड़ी संख्या तो थी ही, चीनी मूल के लोग भी अच्छी ख़ासी संख्या में जुटे थे, जो ओलंपिक और मशाल के पक्ष में नारे लगा रहे थे।
आमने-सामने आए समर्थक
ऐसे भी मौक़े आए जब दोनों ही पक्ष के लोग आमने-सामने आ गए। चीन समर्थक और तिब्बत समर