Wednesday, April 30, 2008

गैस पाइपलाइन पर निर्णय जल्द: ईरान

ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने घोषणा की है कि भारत-पाकिस्तान-ईरान गैस पाइप लाइन के बारे में आगामी 45 दिनों में सहमति बना ली जाएगी।

भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से बातचीत के बाद मंगलवार की रात आयोजित पत्रकारवार्ता में राष्ट्रपति अहमदीनेजाद ने कहा कि तीनों देशों के नेताओं की बातचीत हुई है और सभी मुद्दे 45 दिनों में सुलझा लिए जाएंगे।

इस पाइप लाइन को चीन तक बढ़ाने के बारे में उन्होंने कहा,'' हमें एक प्रस्ताव मिला है। हम इसकी समीक्षा करेंगे और इस प्रस्ताव के सभी पक्षों का आकलन करेंगे।''


तीनों देशों के नेताओं की बातचीत हुई है और सभी मुद्दे 45 दिनों में सुलझा लिए जाएंगे।

महमूद अहमदीनेजाद, ईरान के राष्ट्रपति

उन्होंने भारत के साथ ईरान के संबंधों को 'गहरे और ऐतिहासिक' बताया।

इसके पहले भारत ने कहा था कि इस पाइप लाइन के बारे में अभी काफ़ी काम किया जाना बाकी है।

भारत के विदेश सचिव शिवशंकर मेनन ने पत्रकारों से बातचीत में कहा,'' इस परियोजना पर काफ़ी काम बाकी है, साथ ही हमें ये सुनिश्चित करना है कि ये व्यापारिक दृष्टि से लाभप्रद हो।''

भारत आगमन से पहले सोमवार को अहमदीनेजाद पाकिस्तान गए थे। वहाँ से वो श्रीलंका गए और मंगलवार की शाम दिल्ली पहुंचे।

अमरीका का विरोध

दोनों देशों के बीच लंबित पड़ी इस परियोजना का अमरीका लंबे समय से विरोध करता आया है पर दोनों देश इसे लेकर आशान्वित रहे हैं।


अहमदीनेजाद और मनमोहन सिंह
भारत ने कहा था कि इस पाइप लाइन के बारे में अभी काफ़ी काम किया जाना बाकी है

इसी सिलसिले में पिछले सप्ताह बुधवार को भारतीय पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा पाकिस्तान गए और वहाँ ईरान-पाकिस्तान-भारत पाइपलाइन परियोजना पर बातचीत की थी।

ग़ौरतलब है कि भारत पेट्रोलियम पदार्थों का एशिया में तीसरा बड़ा उपभोक्ता है और वह ईरान से गैस ख़रीदने की परियोजना पर पिछले एक दशक से बातचीत कर रहा है।

प्राकृतिक गैसों के भंडार के मामले में दुनिया के दूसरे सबसे संपन्न देश ईरान ने वर्ष 1995 में ही भारत को गैस बेचने पर सहमति जताई थी।

तीनों देशों के संयुक्त कार्यदल की अब तक कई बैठकें हो चुकी हैं लेकिन कोई अंतिम फ़ैसला नहीं हुआ है। ईरान की योजना है कि 2011 तक पाकिस्तान को गैस की आपूर्ति शुरू कर दी जाए।

पाइपलाइन पर 1995 में बनी सहमति के बाद से गैस की क़ीमतें कई गुना बढ़ चुकी हैं और इसकी क़ीमत पर पेंच फंसा हुआ है।

इस तरह की ख़बरें आती रही हैं कि अमरीकी दबाव के कारण ईरान के साथ गैस परियोजना में देरी हो रही है। हालांकि भारत इससे इनकार करता आया है।

ऐसे ख़बरें भी आईं थीं कि इस परियोजना से भारत के बाहर निकलने पर ईरान उसकी जगह पर चीन को शामिल कर सकता है। इसके बाद से भारत और सक्रिय हो गया है।

Tuesday, April 29, 2008

भारत आ रहे हैं अहमदीनेजाद

ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद भारत के अपने दौरे पर मंगलवार को दिल्ली पहुँच रहे हैं।

हालांकि राष्ट्रपति अहमदीनेजाद की ये यात्रा सिर्फ़ चार घंटे की होगी पर इस यात्रा के दौरान संभावना है कि ईरान-पाकिस्तान-भारत गैस पाइप लाइन पर चर्चा होगी।

दोनों देशों के बीच लंबित पड़ी इस परियोजना का अमरीका लंबे समय से विरोध करता आया है पर दोनों देश इसे लेकर आशान्वित रहे हैं।

इसी सिलसिले में पिछले सप्ताह बुधवार को भारतीय पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा पाकिस्तान गए और वहाँ ईरान-पाकिस्तान-भारत पाइपलाइन परियोजना पर बातचीत की।

इसी महीने 16 और 17 तारीख को दोनों देशों के अधिकारियों ने इस परियोजना पर बातचीत की थी।

भारत सरकार की ओर से भी ऐसी कोशिश की जा रही है कि अहमदीनेजाद की भारत यात्रा के दौरान इस दिशा में कुछ सकारात्मक प्रगति हो।

भारत आगमन से पहले सोमवार को अहमदीनेजाद पाकिस्तान गए थे। वहाँ से वो श्रीलंका गए और मंगलवार की शाम दिल्ली पहुंच रहे हैं।

गैस पाइपलाइन परियोजना

ग़ौरतलब है कि भारत पेट्रोलियम पदार्थों का एशिया में तीसरा बड़ा उपभोक्ता है और वह ईरान से गैस ख़रीदने की परियोजना पर पिछले एक दशक से बातचीत कर रहा है।

गैस को पाकिस्तान के रास्ते भारत लाना है और इसके लिए पाकिस्तान को दी जाने वाली रक़म पर सहमति नहीं बन पाने के कारण परियोजना पर काम रुका हुआ है।

प्राकृतिक गैसों के भंडार के मामले में दुनिया के दूसरे सबसे संपन्न देश ईरान ने वर्ष 1995 में ही भारत को गैस बेचने पर सहमति जताई थी।

तीनों देशों के संयुक्त कार्यदल की अब तक कई बैठकें हो चुकी हैं लेकिन कोई अंतिम फ़ैसला नहीं हुआ है। ईरान की योजना है कि 2011 तक पाकिस्तान को गैस की आपूर्ति शुरू कर दी जाए।


भारतीय मंत्री
भारत ने पाइपलाइन परियोजना पर सक्रियता दिखानी शुरू की है

पाइपलाइन पर 1995 में बनी सहमति के बाद से गैस की क़ीमतें कई गुना बढ़ चुकी हैं और इसकी क़ीमत पर पेंच फंसा हुआ है।

इस तरह की ख़बरें आती रही हैं कि अमरीकी दबाव के कारण ईरान के साथ गैस परियोजना में देरी हो रही है। हालांकि भारत इससे इनकार करता आया है।

ऐसे ख़बरें भी आईं थीं कि इस परियोजना से भारत के बाहर निकलने पर ईरान उसकी जगह पर चीन को शामिल कर सकता है। इसके बाद से भारत का रुख़ और सक्रिय हो गया है।

अहम दौरा

अपनी भारत यात्रा के दौरान राष्ट्रपति अहमदीनेजाद राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाक़ात करेंगे।

पिछले दो वर्षों में ये दूसरा मौक़ा होगा जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और राष्ट्रपति अहमदीनेजाद की मुलाक़ात होगी। इस दौरान दोनों देश द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा करेंगे।

ईरानी राष्ट्रपति के साथ एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी आया है जिसमें ईरान के विदेश मंत्री और वाणिज्य मंत्री मीर क़ाज़िमा शामिल हैं।

उल्लेखनीय है कि अमरीका ने अहमदीनेजाद की भारत यात्रा से ठीक पहले कहा था कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की कोशिश में जुटा है और भारत-पाकिस्तान के साथ तेल परियोजना से ईरान को अलग-थलग करने का अभियान कमज़ोर पड़ जाएगा।

पर भारत ने इसपर कड़ा रुख़ अपनाते हुए अमरीका को स्पष्ट तौर पर कहा था कि ईरान परमाणु हथियार बना रहा है या नहीं इसका फ़ैसला अमरीका को नहीं करना चाहिए बल्कि इसे अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) पर छोड़ देना चाहिए।

साथ ही यह भी कहा था कि ईरान और भारत लंबे समय से एक दूसरे के साथ द्विपक्षीय संबंध रखते आए हैं और इन संबंधों को किस तरह से देखा जाए, इसे किसी और देश को समझाने की ज़रूरत नहीं है।

Monday, April 28, 2008

पीएसएलवी- सी9 प्रक्षेपित, भारत ने इतिहास रचा

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (इसरो) ने सोमवार को उपग्रह प्रक्षेपण के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है।

भारत का उपग्रह प्रक्षेपण यान पीएसएलवी-सी9 सोमवार को 10 उपग्रहों के साथ सफलतापूर्वक प्रक्षेपित कर दिया गया।

श्रीहरिकोटा से छोड़ा गया यह प्रक्षेपण यान अपने साथ जो 10 उपग्रह लेकर गया है उसमें से आठ अन्य देशों के हैं और दो भारत के हैं।

इस तरह 10 उपग्रहों को एकसाथ अंतरिक्ष में छोड़ने का काम करते हुए इस प्रक्षेपण ने एक नया इतिहास रच दिया है।

लॉन्च किए जाने वाले दस उपग्रहों में भारत का आधुनिक रिमोट सेसिंग उपग्रह शामिल है। इसका अलावा आठ विदेशी नैनो उपग्रहों को भी छोड़ा गया है।

अपने तय समयानुसार यानी भारत में सुबह के नौ बजकर 23 मिनट पर इस यान को प्रक्षेपित कर दिया।

कुछ ही मिनटों में यान ने अपनी सही ऊंचाई हासिल कर ली और उपग्रह लेकर जाने वाले रॉकेट इससे अलग होकर सफलतापूर्वक स्थापित होने लगे।

इससे पहले पिछले वर्ष अप्रैल में एक रूसी उपग्रह प्रक्षेपण यान से 13 उपग्रहों को छोड़ा गया था लेकिन ये यान अपने अभियान में सफल नहीं हो सका था।

अब भारत का 230 टन वज़न वाला पोलर सेटेलाइट लॉन्च वीहकल (पीएसएलवी-सी9) कुल 824 किलो भार लेकर गया है।

ऐतिहासिक सफलता

क़रीब 70 करोड़ की लागत वाले पीएसएलवी-सी9 की ये 13वीं उड़ान है।

रिमोट सेंसिंग सेटेलाइट कार्टोसेट-2ए का वज़न 690 किलोग्राम है और इसमें आधुनिक पैनक्रोमैटिक कैमरा लगा हुआ है जो उच्च गुणवत्ता की तस्वीरें खींच सकता है।

इसके ज़रिए ऐसे तथ्य मिल सकेंगे जिनका इस्तेमाल शहरी और ग्रमीण इलाक़ों में आधारभूत ढाँचे के प्रबंधन में हो सकता है।

पिछले वर्ष भारत के पीएसएलवी-सी7 से पहली बार चार उपग्रहों को एक साथ प्रक्षेपित किया गया था। इनमें दो उपग्रह अर्जेंटीना और इंडोनेशिया के थे।

साइंस मैगज़ीन के दक्षिण एशिया संवाददाता पल्लव बागला के मुताबिक इस प्रक्षेपण की क़ामयाबी से एक नया विश्व कीर्तिमान क़ायम होगा।

इस प्रक्षेपण यान में सबसे बड़ा कार्टोसैट 2A नाम का एक उपग्रह है जो एक मैपिंग उपग्रह है।

ये उपग्रह एक मीटर से छोटी वस्तु को भी 600 किलोमीटर से नाप सकता है। इसकी क्षमता किसी भेदी उपग्रह की तरह ही होगी, लेकिन इसका ऊपयोग असैनिक कामों के लिए होगा।

Friday, April 25, 2008

तुर्कमेनिस्तान से गैस ख़रीदेंगे भारत-पाक

भारत और पाकिस्तान ने तुर्कमेनिस्तान से गैस ख़रीदने को राज़ी हो गए हैं।

दो दिनों की चर्चा के बाद दक्षिण और मध्य एशिया के चार देशों के पेट्रोलियम मंत्रियों ने गुरुवार को कई अरब डॉलर की एक परियोजना के लिए एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं।

इस सहमति के अनुसार तुर्केमेनिस्तान से अफ़ग़ानिस्तान के रास्ते वर्ष 2015 तक एक गैस पाइप लाइन बिछाई जाएगी जिससे भारत और पाकिस्तान को गैस मिल सकेगी।

प्रस्तावित परियोजना के अनुसार सत्रह सौ किलोमीटर की पाइपलाइन बिछाई जाएगी।

7.6 अरब डॉलर की इस परियोजना पर वर्ष 2010 तक काम शुरु होने की संभावना है।

महत्वाकांक्षी परियोजना

संवाददाताओं का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान में सुरक्षा की स्थिति को देखते हुए यह परियोजना बरसों से एक सपने की तरह दिखाई देती थी लेकिन अब इन देशों के नेताओं ने कहा है कि वे इसे पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।


पेट्रोलियम मंत्री
तुर्कमेनिस्तान गैस पाइप लाइन पर सभी ने प्रतिबद्धता ज़ाहिर की है

इस परियोजना का समर्थन अमरीका भी करता है।

वर्ष 2004 में इस परियोजना की लागत 3.3 अरब डॉलर थी लेकिन अब यह लागत 7.6 अरब डॉलर तक पहुँच चुकी है।

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री ख़्वाजा आसिफ़ ने कहा, "हम इस परियोजना के लिए प्रतिबद्ध हैं और बढ़ी हुई लागत के बावजूद यह परियोजना चारों देशों के लिए आर्थिक रुप से व्यावहारिक है ।"

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार हालांकि तुर्कमेनिस्तान में अभी तक अपने तेल भंडार के विवरण ज़ाहिर नहीं किए हैं लेकिन उसने प्रतिदिन 3.2 अरब क्यूबिक फ़िट गैस प्रतिदिन देना स्वीकार किया है।

यह गैस पाइपलाइन अफ़ग़ानिस्तान में हेरात और कंधार से गुज़रेगी जबकि पाकिस्तान में मुस्तान से।

संभावना है कि शुक्रवार को भारत और पाकिस्तान के प्रतिनिधि ईरान के प्रतिनिधि से मिलेंगे और ईरान-पाकिस्तान-भारत गैस पाइप लाइन पर बातचीत करेंगे।

Thursday, April 24, 2008

सरबजीत को मुक्त कराने की मुहिम

पाकिस्तान में फांसी की सज़ा का सामना कर रहे भारतीय नागरिक सरबजीत सिंह से गुरुवार को उनके परिवार की मुलाक़ात हो सकती है।

सरबजीत से मिलने और उन्हें रिहा करवाने के उद्देश्य से उनका परिवार बुधवार को वाघा सीमा के रास्ते पाकिस्तान पहुँच गया है।

ग़ौरतलब है कि सरबजीत को लाहौर की कोट लखपत जेल में रखा गया है।

पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने कुछ साल पहले सरबजीत सिंह को मौत की सज़ा सुनाई थी और एक मई को उन्हें फाँसी देने की घोषणा की गई है।


मैं अपने भाई की रिहाई के सिलसिले में पूर्व मानवाधिकार मंत्री अंसार बर्नी और सरबजीत के वकील राणा अब्दुल हामिद से भी मिलूंगी।

दलबीर कौर, सरबजीत की बहन

उनकी पत्नी सुखप्रीत कौर और दोनों बेटियों, स्वप्नदीप और पूनम ने फिर दोहराया कि सरबजीत निर्दोष हैं और वो भूलवश पाकिस्तानी सीमा में प्रवेश कर गए थे।

उनका कहना था कि बम धमाकों में उनकी कोई भूमिका नहीं थी।

ग़ौरतलब है कि 1990 में पाकिस्तान के पंजाब सूबे में हुए बम धमाकों में 14 लोग मारे गए थे।

इन धमाकों में सरबजीत की कथित भूमिका के लिए पाकिस्तान की एक अदालत ने उन्हें मौत की सज़ा सुनाई थी।

छुड़ाने की मुहिम

सरबजीत के परिवार को सात दिनों का वीज़ा दिया गया है।

उनकी बहन दलबीर कौर और उनके पति बलदेव सिंह भी परिवार के साथ गए हैं।

दलबीर कौर ने कहा,'' मैं अपने भाई की रिहाई के सिलसिले में पूर्व मानवाधिकार मंत्री अंसार बर्नी और सरबजीत के वकील राणा अब्दुल हामिद से भी मिलूंगी।''


सरबजीत की बेटियाँ
सरबजीत की बेटियों को उम्मीद है कि उनके पिता को रिहा कर दिया जाएगा

इधर पाकिस्तान का कहना है कि सरबजीत ही मंजीत सिंह हैं जिसने बम धमाकों को अंजाम दिया था।

लेकिन सरबजीत का परिवार इस दावे को शुरू से ही नकारता आया है कि वो एक जासूस हैं।

परिवार का कहना है कि वो ग़लती से पाकिस्तानी सीमा में प्रवेश कर गए थे।

वाघा सीमा पर पत्रकारों से बातचीत में सुखप्रीत ने कहा,'' मेरे पति मंजीत सिंह नहीं हैं, वो सरबजीत सिंह हैं...एक सीधा-सादा किसान हैं जो नशे की हालत में ग़लती से पाकिस्तान की सीमा में दाख़िल हो गए थे।''

ग़ौरतलब है कि सरबजीत सिंह को एक मई को फाँसी देने की घोषणा की गई है और पाकिस्तान के मानवाधिकार मामलों के पूर्व मंत्री अंसार बर्नी ने सरबजीत सिंह को बचाने की आख़िरी कोशिशों के तहत राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के पास याचिका भेजी है।

इस याचिका में अंसार बर्नी ने अपील की है कि सरबजीत सिंह की मौत की सज़ा को आजीवन कारावास में बदल दिया जाए या उन्हें रिहा कर दिया जाए।

भारत सरकार ने भी सरबजीत की सज़ा माफ़ करने की अपील की थी और माना जा रहा है कि पाकिस्तान की नई सरकार सरबजीत मामले की समीक्षा कर सकती ।

Wednesday, April 23, 2008

हिलेरी क्लिंटन अहम चुनाव जीतीं

अमरीका में डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से राष्ट्रपति चुनाव की उम्मीदवारी के लिए पेंसिलवेनिया में हुए चुनावों में हिलेरी क्लिंटन जीत गईं हैं और उन्होंने ओबामा को पछाड़ दिया है।

जीत के बाद अपने भाषण मे हिलेरी क्लिंटन ने कहा,'' अमरीका को ऐसे राष्ट्रपति की ज़रूरत है जो मैदान छोड़ के न भागे।''

उन्होंने अपने समर्थकों से कहा कि उनकी वजह से ये नतीजे आए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि हालांकि प्रतिनिधियों के समर्थन के मामले में अब भी हिलेरी क्लिंटन बराक ओबामा से पिछड़ रही हैं। लेकिन इस जीत ने उनके प्रचार अभियान में जान फूंक दी है।


अमरीका को ऐसे राष्ट्रपति की ज़रूरत है जो मैदान छोड़ के न भागे

हिलेरी क्लिंटन

ग़ौरतलब है कि डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से बराक ओबामा और हिलेरी क्लिंटन उम्मीदवार बनने की होड़ में बने हुए हैं।

विभिन्न राज्यों के प्राइमरी चुनावों में दोनों के बीच कड़ा संघर्ष हुआ है।

अब माना जा रहा है कि अगस्त में पार्टी सम्मेलन के दौरान ही उम्मीदवार के चयन पर अंतिम फ़ैसला हो सकता है।

कड़ा मुक़ाबला

इस मतदान से पहले तक बराक ओबामा को 1648 प्रतिनिधियों का और हिलेरी क्लिंटन को 1509 प्रतिनिधियों का समर्थन हासिल था।


ओबामा
बराक ओबामा हिलेरी क्लिंटन को कड़ी टक्कर दे रहे हैं

लेकिन राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवारी हासिल करने के लिए 2024 प्रतिनिधियों का समर्थन चाहिए।

उल्लेखनीय है कि प्रतिद्वंद्वी रिपब्लिकन पार्टी ने काफ़ी पहले जॉन मैक्केन को राष्ट्रपति पद के लिए अपना उम्मीदवार चुन लिया है।

उम्मीदवारी की इस लंबी दौड़ से डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता परेशान हैं।

डेमोक्रेटिक पार्टी की वरिष्ठ नेता नैन्सी पलोसी ने कहा था कि राष्ट्रपति चुनाव के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी का उम्मीदवार जल्दी चुन लिया जाना चाहिए।

पलोसी का कहना था कि यदि नवंबर में होने वाले चुनाव में जीत हासिल करनी है तो ज़रूरी है कि पूरी पार्टी किसी एक उम्मीदवार के पीछे खड़ी हो।

डेमोक्रेटिक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हॉवर्ड डीन ने भी कहा है कि वे चाहते हैं कि उम्मीदवारों की यह दौड़ जुलाई के शुरुआत में ख़त्म हो जाए।

विश्लेषकों का कहना है कि दोनों उम्मीदवारों की यह लड़ाई अगस्त में होने वाले पार्टी के राष्ट्रीय सम्मेलन तक चलती हुई दिख रही है और इसका नुक़सान यह हो सकता है कि रिपब्लिकन पार्टी के जॉन मैक्केन से लड़ाई में पार्टी को दिक्कत हो।

Tuesday, April 22, 2008

ओबामा-हिलेरी फिर आमने-सामने

लगभग सवा महीने के बाद बराक ओबामा और हिलेरी क्लिंटन आज एक बार फिर आमने सामने हैं पेनसिलवैनिया में।

पिछला मुक़ाबला हुआ था मिसिसिपी में और उसके बाद के इस लंबे इंटरवल में ख़ामोशी रहेगी, इसकी तो किसी को उम्मीद नहीं थी लेकिन राजनीतिक तू-तू, मैं-मैं का ऐसा खेल देखने को मिलेगा इसका अंदाज़ा शायद ही किसी को रहा होगा।

पहले, बराक ओबामा बुरी तरह फंसे जब उनके बेहद क़रीबी और उनके चर्च के पादरी पैस्टर राइट के कई ऐसे बयान वेबसाइट यू ट्यूब पर नज़र आए जो किसी भी उम्मीदवार के लिए परेशानी का सबब बन सकते हैं।

पता चला कि उन्होंने काले लोगों के इस चर्च में कई बार अमरीका और अमरीकी नीतियों को भला बुरा कहा था।

इसके बाद ओबामा पर दबाव बढ़ा कि वो ये कहें कि जिस पैस्टर राइट को कल तक वो अपने परिवार का हिस्सा कहते थे, उनसे वो नाता तोड़ रहे हैं।

ओबामा की मुश्किल ये थी कि अगर रिश्ता तोड़ने की बात करें तो काले समुदाय में बुरे बनें, नहीं करें तो देश के गोरे वोटर नाराज़।

उन्होंने बीच का रास्ता निकाला और नस्लभेद की सम्स्या पर एक ज़बरदस्त भाषण दे डाला। मामला कुछ ठंडा हुआ है लेकिन दबा नहीं है।

हिलेरी की समस्या

उधर हिलेरी क्लिंटन 1996 के अपने बोस्निया दौरे के बयान पर फंस गईं।


हिलेरी क्लिंटन
क्लिंटन को ओबामा खेमे से कड़े हमले झेलने पड़े हैं

उन्होंने कहा कि जब वो वहां उतरी थीं तो हवाई अ़ड्डे के आसपास गोलियां चल रही थीं और वो बचते बचाते निकली थीं। एक अख़बार ने खोजबीन की, पता चला ऐसा कुछ नहीं हुआ था।

बस ओबामा कैंप टूट पड़ा और हिलेरी को एक टीवी डिबेट में माफ़ी मांगनी पड़ी।

लेकिन फिर ओबामा ने बयान दे दिया कि देश के कई हिस्सों में लोगों में इतनी कड़वाहट है इसलिए वो धर्म और बंदूक से चिपके रहते हैं।

अमरीका के एक बड़े तबके के लिए धर्म बहुत मायने रखता है और बंदूक रखना भी संस्कृति का हिस्सा है।

हिलेरी क्लिंटन ने कहा कि ओबामा ने ये बयान देकर कुछ लोगों की संस्कृति को छोटा कहा है और ज़मीनी हक़ीकत से वो कटे हुए हैं।

ओबामा फिर बैकफ़ुट पर नज़र आए और जब देखा कि हिलेरी के हमले बंद नहीं हो रहे, तो उन्होंने भी जवाबी हमला शुरू कर दिया।

डाल-डाल, पात-पात


ओबामा
ओबामा अगर डेमोक्रेट उम्मीदवार बनते हैं और राष्ट्रपति चुनाव जीतते हैं तो अमरीका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति बनेंगे

ये आपसी बयानबाज़ी और तीखी होगी इसमें कोई शक नहीं क्योंकि अभी भी फ़ैसला कोसों दूर नज़र आ रहा है।

पेंसिलवेनिया में चुनाव से पहले हुए सर्वे में हिलेरी ओबामा से आगे चल रही हैं लेकिन अब तक जितने चुनाव हो चुके हैं उनमें ओबामा ने ज़्यादा जीत हासिल की है।

हिलेरी क्लिंटन की दलील है कि उन्होंने उन बड़े राज्यों में जीत हासिल की है जिन्हें जीते बिना राष्ट्रपति पद हासिल करने की कोई सोच भी नहीं सकता और पेंसिलवेनिया ऐसा ही एक राज्य है।

विश्लेषकों का कहना कि अगर हिलेरी ने बड़े अंतर से ओबामा को यहां हराया तब वो अपना दावा बरकरार रख सकती हैं।

लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ तो फिर उनपर मैदान से हटने का दबाव और बढ़ेगा क्योंकि ये रेस जितनी लंबी खिंच रही है उससे डेमोक्रेट्स को डर है कि पार्टी आपस में ही बंट रही है और घर की इस लड़ाई का फ़ायदा मिल रहा है रिपबलिकन पार्टी को।

Monday, April 21, 2008

चरमपंथियों से बातचीत की नीति का समर्थन

ब्रिटेन के विदेश मंत्री डेविड मिलिबैंड ने कहा है कि ब्रितानी सरकार पाकिस्तान सरकार की चरमपंथियों से बातचीत की नीति का समर्थन करती है।

मिलिबैंड ने कहा कि पाकिस्तान की नई सरकार ने अफ़ग़ानिस्तान की सीमा से सटे कबाइली इलाकों के चरमपंथियों के साथ बातचीत का निर्णय लिया है, जो कि एक सही क़दम है।

चरमपंथ से लड़ने के उपायों पर चर्चा के लिए पेशावर पहुंचे मिलिबैंड ने कहा कि जिन्होंने हिंसा का परित्याग कर दिया है, उन्हें राजनीतिक प्रक्रिया में शामिल करना ज़रूरी है।

उन्होंने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान से सटे पाकिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में ब्रिटेन की काफी रूचि है क्योंकि इस इलाके से वो चरमपंथ पनप रहा है जो ब्रिटेन तक फैला हुआ है।

पर पाकिस्तान की नई सरकार अभी अपने नए रास्ते की तलाश में जुटी है और उसके लिए चरमपंथियों से बातचीत के ज़रिए किसी निर्णायक स्थिति तक पहुँचना इतना आसान नहीं होगा।

इससे पहले राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने कट्टरपंथियों का मुक़ाबला सैनिक हमलों से किया। उन्हें अमरीका का समर्थन भी प्राप्त था लेकिन वो पिछले 18 महीनों में आत्मघाती हमलों को बढ़ने से नहीं रोक पाए।

समाधान निकले, इसलिए...

पेशावर में ब्रिटेन के विदेश मंत्री उन लोगों से मिले जिनके परिजन हाल के आत्मघाती हमलों में मारे गए थे।

उन्होंने ध्यानपूर्वक उनकी बातें भी सुनीं। कई लोगों ने उनसे कहा कि वो अल क़ायदा के समर्थकों से बातचीत करें।

इसपर मिलिबैंड ने भी स्पष्ट किया कि पाकिस्तान को अफ़ग़ानिस्तान के साथ बातचीत से जोड़ना ही उचित होगा। जो लोग संविधान के तहत काम करना चाहते हैं उन तक हाथ बढ़ाना ही चाहिए।

ब्रिटेन के विदेश मंत्री ने कहा कि मामले का समाधान केवल सैन्य कार्रवाई या फिर केवल बातचीत नहीं है।

इसका समाधान एक ऐसी लंबी प्रक्रिया है जिसमें लाखों लोगों के दिलोदिमाग में जगह बनानी होगी।

उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि वो लोगों को ये बताना चाहते हैं कि ब्रिटेन लंबे समय तक पाकिस्तान का सहयोगी बना रहेगा।

पाकिस्तान के उत्तरी पश्चिमी इलाक़े में ब्रिटेन का विशेष ध्यान है क्योंकि ब्रिटेन में व्याप्त ज़्यादातर चरमपंथ की जड़ें यहीं से शुरु होती हैं।

उन्होंने कहा कि ब्रिटेन के लोगों के लिए ये ख़ासी चिंता का विषय है कि वहाँ की चरमपंथी कार्रवाइयों की जाँच में 70 प्रतिशत मामले पाकिस्तान से जुड़े पाए गए।

Saturday, April 19, 2008

'नेपाल नरेश जनादेश का सम्मान करें'

'नेपाल नरेश जनादेश का सम्मान करें'
प्रचंड
माओवादी स्पष्ट बहुमत की ओर बढ़ रहे हैं
नेपाल में माओवादी नेता प्रचंड ने कहा है कि वो नेपाल नरेश से मिलना चाहते हैं ताकि उन्हें सत्ता से दूर रहने के लिए राज़ी किया जा सके।

संविधान सभा के चुनावों में पुष्प कमल दहल उर्फ़ प्रचंड की अगुआई वाली नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी है।

प्रचंड ने कहा कि वो नरेश से मिलने के लिए ख़ुद पहल करेंगे। माओवादी लगभग एक दशक तक हिंसक आंदोलन चलाने के बाद वर्ष 2006 में मुख्य धारा में शामिल हो गए थे।

प्रचंड ने नेपाल नरेश के बारे में कहा, "उन्हें जनादेश को समझना चाहिए और उसका सम्मान करना चाहिए और ख़ुद राजभवन को खाली कर देना चाहिए।"

वो कहते हैं, "इतिहास देखें तो राजाओं की हत्या तक कर दी गई है और उन्हें भागना पड़ा है। कृपया उसकी पुनरावृत्ति नेपाल में न होने दें।"

परिणाम

इससे पहले माओवादियों के दूसरे प्रमुख नेता और प्रधानमंत्री पद के दावेदार समझे जा रहे बाबूराम भट्टाराई ने कहा था कि संविधान सभा की पहली बैठक में ही नेपाल को गणतांत्रिक राष्ट्र घोषित कर दिया जाएगा।

उन्हें जनादेश को समझना चाहिए और उसका सम्मान करना चाहिए और ख़ुद राजभवन को खाली कर देना चाहिए

प्रचंड

संविधान सभा के चुनावों के अंतिम परिणाम अगले हफ़्ते तक आने की उम्मीद है।

चुनावों में माओवादियों की जीत से कई विश्लेषक भी आश्चर्यचकित रह गए। प्रत्यक्ष मतदान प्रणाली के तहत 240 सीटों में से आधी सीटें माओवादियों के खाते में जाने के संकेत मिल रहे हैं।

लेकिन 355 सीटों पर समानुपातिक पद्धति से चुनाव होने हैं और विश्लेषकों के मुताबिक इसमें माओवादियों को बहुत ज़्यादा सीटें मिलने की संभावना नहीं है।

इसके बाद 28 सदस्यों को सरकार नामित करेगी।

Friday, April 18, 2008

पूरे तामझाम के साथ शुरू होगी आईपीएल

क्रिकेट को हमेशा के लिए बदल देने की क्षमता रखने वाले इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) का पहला मैच शुक्रवार को बंगलौर में भारी धूम-धड़ाके के बीच फ्लड की रोशनी में खेला जाएगा।

पहला मैच राहुल द्रविड़ के नेतृत्व वाली बंगलौर की टीम और सौरभ गांगुली की कप्तानी वाली कोलकाता के बीच खेला जाएगा।

भारत के दोनों पूर्व कप्तान फ्लड लाइट की रोशनी में चलकर बीच मैदान में आएँगे, पूरे स्टेडियम में अंधेरा होगा, टॉस होते ही स्टेडियम जगमगा उठेगा।

छह सप्ताह तक चलने वाला यह टूर्नामेंट मुंबई में एक जून को ख़त्म होगा।

इस टूर्नामेंट के दौरान लोगों को सचिन तेंदुलकर, रिकी पॉन्टिंग, मैथ्यू हेडन, शेन वॉर्न और ब्रैट ली जैसे खिलाड़ियों का रोमांचक मुक़ाबला देखने को मिलेगा।

पहले मैच की सारी टिकटें बिक चुकी हैं, आईपीएल की वेबसाइट का भी कहना है कि बाक़ी मैचों के टिकटों को 'धड़ाधड़ बिक्री' हो रही है।

तामझाम

बंगलौर की टीम के मालिक और नामी-गिरामी उद्योगपति विजय माल्या ने बेसबॉल की तर्ज़ पर चियर लीडर्स को नाचने-गाने के लिए बुलाया है।


वीरेंदर सहवाग जैसे कई बड़े खिलाड़ी नज़र आएँगे

वाशिंगटन की रेडस्किन्स टीम की चियर लीडर्स बंगलौर पहुँच गई हैं जो छोटे-छोटे कपड़ों में हर चौके-छक्के पर ठुमके लगाएँगी।

रात के मैचों के लिए विशेष प्रकाश व्यवस्था की गई है और पूरे टूर्नामेंट को ग्लैमरस बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई है, ज़ाहिर है यह दर्शकों के लिए एक नया अनुभव होगा।

दर्शक दुनिया के अलग-अलग देशों के खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाएंगे जो पहले कभी नहीं हुआ है।

कई दिलचस्प स्थितियाँ पैदा होंगी, मिसाल के तौर पर पंजाब के हरभजन सिंह मुंबई से खेलेंगे। इसके अलावा जो दर्शक भारतीय टीम के बड़े खिलाड़ियों के प्रशंसक रहे हैं वे उन्हें जब विपक्षी टीम में पाएँगे तो उनका क्या रवैया होगा, यह देखने लायक होगा।

समस्याएँ

तेंदुलकर, कुंबले और नैथन ब्रेकन जैसे कुछ स्टार खिलाड़ी पहले कुछ मैचों में नज़र नहीं आएँगे क्योंकि वे फिट नहीं हैं।


शाहरुख़
कोलकाता नाइट राइडर के मालिक शाहरुख़ थोड़े चिंतित हैं

इस पूरे टूर्नामेंट को उत्सुकता से देखा जा रहा है और कोलकाता नाइट राइडर टीम के मालिक शाहरुख़ ख़ान ने माना कि वे रात-दिन काम कर रहे हैं।

शाहरुख़ ख़ान ने बांग्ला समाचार पत्र आनंद बाज़ार पत्रिका के साथ एक बातचीत में स्वीकार किया था क्रिकेट प्रेमियों के ठंडे रुख़ को लेकर चिंतित हैं, उनका कहना है कि उन्हें जैसे उत्साह की उम्मीद थी वह कहीं नहीं दिख रहा है।

उन्होंने कहा, " मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि टिकट की क़ीमतें इतनी कम होने के बावजूद बिक क्यों नहीं रही हैं, मैंने नहीं सोचा था कि इतनी दिक़्कतें आएँगी।"

इसके अलावा खिलाड़ियों के मेहनताने को लेकर भी काफ़ी भ्रम की स्थिति है, कई खिलाड़ियों का कहना है कि उन्हें पैसा नहीं मिला है।

Thursday, April 17, 2008

मशाल दौड़ के लिए दिल्ली में कड़ी सुरक्षा

ओलंपिक मशाल दौड़ के लिए भारत की राजधानी दिल्ली में कड़े सुरक्षा उपाय किए गए हैं। इस बीच तिब्बती संगठनों ने शांति जुलूस निकालने की योजना बनाई है।

72 सेंटीमीटर लंबी और 985 ग्राम वज़नी यह मशाल इस्लामाबाद से विशेष विमान से दिल्ली पहुंची। मशाल को चीनी दूतावास में रखा गया है।

मशाल दौड़ का आयोजन राजपथ पर गुरुवार दोपहर होगा। लंदन, पेरिस और सैन फ्रांसिस्को में विरोध झेल चुकी ओलंपिक मशाल यहां 47 खिलाडि़यों समेत 70 हस्तियों के हाथों से गुजरेगी।

रिले राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक लगभग दो किलोमीटर की होगी।

तिब्बती संगठनों की ओर से विरोध प्रदर्शन की आशंका को देखते हुए सुरक्षा के कड़े उपाय किए गए हैं।

दिल्ली में हज़ारों सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया हैं।

सुरक्षा

राजपथ और उससे जुड़ी आसपास की सड़कों को दोपहर एक बजे से शाम सात बजे तक के लिए बंद करने के आदेश दिए गए हैं।

साथ ही सरकारी दफ़्तरों में काम करे रहे कर्मचारियों को इन छह घंटों में बाहर निकलने की इजाज़त नहीं होगी।


दिल्ली में तिब्बती प्रदर्शनकारी
ख़बर आ रही है कि कई तिब्बती लोग प्रदर्शन करने के लिए दिल्ली पहुंच रहे हैं

यहां तक कि राजपथ की तरफ खुलने वाली खिड़कियों को भी बंद रखने को कहा गया है।

राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड के जवान दौड़ के रास्ते से लगी ऊंची इमारतों पर तैनात रहेंगे।

इस मौके पर दो हेलिकॉप्टर भी इस पूरे घटनाक्रम पर नज़र रखेंगे।

चौकसी इसलिए भी बढ़ाई गई है क्योंकि बुधवार को तमाम सुरक्षा इंतज़ामों को धता बताते हुए तिब्बती प्रदर्शनकारी चीनी दूतावास के बाहर प्रदर्शन करने में कामयाब रहे।

हालाँकि पुलिस ने बाद में उन्हें हटा दिया और कई प्रदर्शनकारी गिरफ़्तार कर लिए गए।

विरोध प्रदर्शन

कुछ दिनों पहले ही धर्मशाला से दिल्ली पहुँचे तिब्बती प्रदर्शनकारियों ने दो तरह से विरोध प्रदर्शन की रणनीति बनाई है।

एक तरफ जहां तिब्बती यूथ कांग्रेस के सदस्य मशाल रैली के दौरान उग्र विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं, वहीं दूसरी तरफ तिब्बत स्वायत्तता कमेटी ने राजघाट से जंतर-मंतर तक एक समानांतर शांति रैली निकालने की योजना बनाई है।

विरोध जताने के लिए ये लोग भी मशाल लेकर दौड़ेंगे। इस मशाल को शांति मशाल का नाम दिया गया है।

हालाँकि बुधवार शाम पुलिस मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में संयुक्त पुलिस कमिश्नर (ट्रैफिक) एसएन श्रीवास्तव ने बताया कि फिलहाल शांति रैली के रूट को मंज़ूरी नहीं दी गई है।

सितारों की भागीदारी

इस मशाल को लेकर लगभग 70 फ़िल्मी सितारे और खिलाड़ी दौड़ेंगे।


आमिर ख़ान
आमिर ख़ान ओलंपिक मशाल रिले में हिस्सा लेंगे

इनमें आमिर ख़ान, सैफ़ अली ख़ान, पी टी ऊषा, मिल्खा सिंह, लिएंडर पेस और अंजू बॉबी जॉर्ज जैसे नाम शामिल हैं।

क्रिकेट सितारे सचिन तेंदुलकर के भी इस दौड़ में भाग लेने की उम्मीद थी लेकिन बुधवार को उन्होंने कहा कि चोट लग जाने के कारण वे इसमें भाग नहीं ले पाएंगे।

कड़े सुरक्षा इंतज़ाम के बीच लगभग सवा दो किलोमीटर लंबी ये दौड़ राजपथ से होकर गुज़रेगी। ये दौड़ लगभग एक घंटे में पूरी होगी।

भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी ने कहा कि सारी दुनिया भारत में एक सफल ओलंपिक दौड़ की उम्मीद कर रही है और उन्हें भरोसा है कि ये एक बढ़िया कार्यक्रम होगा।

कलमाड़ी का कहना था कि बाइचंग भूटिया, किरन बेदी, सचिन तेंदुलकर औऱ राहुल गांधी के इस दौड़ में भाग नहीं लेने के बावजूद ये दौड़ कामयाब रहेगी।

उधर ख़बरें आ रही है कि कई तिब्बती लोग प्रदर्शन करने के लिए दिल्ली पहुंच रहे हैं।

Wednesday, April 16, 2008

महंगाई पर सरकार को घेरने की तैयारी

भारत में खाद्य पदार्थों की बढ़ती क़ीमतें केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार के लिए के लिए एक बड़ा सरदर्द बनती नज़र आ रही हैं।

बुधवार को संसद में महंगाई पर चर्चा होगी जहाँ इस मुद्दे पर विपक्षी भारतीय जनता पार्टी सरकार को अपने तेवर दिखा सकती है।

दूसरी ओर केंद्र सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे वामपंथी दलों ने संसद के बाहर धरना-प्रदर्शनों का आयोजन करने की योजना बनाई है।

इसके पहले मंगलवार को संसद के बजट सत्र में दूसरे चरण की बैठक शुरू होने के कुछ ही देर बाद दोनों सदनों की कार्यवाही महंगाई पर हंगामे की वजह से स्थगित करना पड़ी थी।

वामपंथी दलों ने भी महंगाई के मुद्दे पर सरकार को आड़े हाथों लेने का फ़ैसला किया है और मंगलवार को एक मार्च भी निकाला।

पिछले दो महीनों में रोज़मर्रा की ज़रूरतों के सामानों में हुई मूल्य-वृद्धि ने सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।

ताज़ा आँकड़ों के मुताबिक महँगाई दर पिछले लगभग साढ़े तीन साल के सर्वोच्च स्तर पर है।

ख़ुद यूपीए सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे वामपंथी दलों ने भी बढ़ती महँगाई को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि सरकार को इसका राजनीतिक ख़ामियाज़ा भुगतना पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि खाद्य सुरक्षा की स्थिति ख़त्म होने जा रही है और अस्थिरता के एक दौर की शुरुआत हो रही है, जिसमें महंगाई की मार लंबे समय तक पड़ने वाली है।

Tuesday, April 15, 2008

संसद में सरकार को घेरने की तैयारी

भारतीय संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण आज से शुरू हो रहा है जिसमें विपक्ष महँगाई और आरक्षण के मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी कर रही है।

जनता पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं डालने वाला बजट पेश होने के बाद अब हालात बदल गए हैं।

पिछले दो महीनों में रोज़-मर्रा की ज़रूरतों के सामानों में हुई मूल्य-वृद्धि ने सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी है।

ताज़ा आँकड़ों के मुताबिक महँगाई दर पिछले लगभग साढ़े तीन साल के सर्वोच्च स्तर पर है।

इस मामले पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की अगुआई में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) पहले ही आंदोलन छेड़ने की घोषणा कर चुका है।

वामपंथी भी नाराज़

ख़ुद यूपीए सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे वामपंथी दलों ने भी बढ़ती महँगाई को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि सरकार को इसका राजनीतिक ख़ामियाज़ा भुगतना पड़ सकता है।

संसद सत्र शुरू होते ही वामपंथी दल न सिर्फ़ सदन के भीतर बल्कि उसके बाहर भी आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं।

वाम दलों ने महँगाई पर रोक लगाने में विफलता के मुद्दे पर संसद तक मार्च करने का आहवान किया है।

आरक्षण

उच्च शिक्षण संस्थानों में ओबीसी आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले की गूँज संसद में भी सुनाई दे सकती है।

अदालत ने क्रीमी लेयर को इसके दायरे से बाहर कर दिया है, जिसका राजनीतिक दल इसका विरोध कर रहे हैं।

दूसरी ओर यूपीए और ख़ास कर कांग्रेस पार्टी क्रीमी लेयर को छोड़ कर अदालत के फ़ैसले को कुल मिलाकर सरकार की जीत की तरह पेश कर रही है और साथ ही निजी संस्थानों में भी आरक्षण लागू करने की बात कर रही है जिसका मुद्दा ज़ोर शोर से उठ सकता है।

Monday, April 14, 2008

भारत-बांग्लादेश मैत्री का नया अध्याय

बांग्लादेश और भारत के बीच चार दशकों के लंबे इंतज़ार के बाद सोमवार, 14 अप्रैल से मैत्री का एक नया अध्याय शुरू हो रहा है।

स्वतंत्र बांग्लादेश बनने के बाद पहली बार दोनों देशों के बीच यात्री रेल सेवा शुरू की जा रही है जिसे काफ़ी महत्वपूर्ण घटना माना जा रहा है।

मैत्री रेलगाड़ी की तैयारियाँ

यह रेलगाड़ी सोमवार को कोलकाता से भारतीय समय के अनुसार सवेरे लगभग सवा सात बजे ढाका के लिए रवाना हुई।

इसी तरह की एक रेलगाड़ी सोमवार को ढाका से कोलकाता के लिए रवाना हुई है।

भारत के विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी और रेल मंत्री लालू प्रसाद ने सोमवार को बंगाली नव वर्ष के दिन ढाका जाने वाली ‘मैत्री एक्सप्रेस’ को कोलकाता से हरी झडी दिखा कर रवाना किया।

कुल 418 यात्रियों को बैठाने की क्षमता वाली मैत्री एक्सप्रेस सप्ताह में एक बार चलेगी। इसमें वातानुकूलित प्रथम श्रेणी (एसी-फ़र्स्ट) का किराया 780 रुपए और सबसे सस्ता किराया 320 रुपए होगा।

भारत और बांग्लादेश के बीच विमान सेवा और बस सेवा तो पहले से ही चल रही हैं लेकिन समझा जा रहा है कि मैत्री रेल सेवा एक सस्ता यातायात साधन साबित होगा।

ऐसा माना जा रहा है कि भारत विभाजन के बाद पूर्वी बंगाल से पश्चिमी बंगाल आकर बसे बहुत से लोग इस रेल सेवा का इस्तेमाल करेंगे।

कोलकाता में इस रेल सेवा को शुरू किए जाते समय बहुत से ऐसे लोग भी थे जो 1946 में पूर्वी बंगाल से पश्चिमी बंगाल आ गए थे और इस रेल में जाकर अब बांग्लादेश बन चुके उस ज़मीन को छूकर देखना चाहते हैं।

वर्ष 1965 तक ढाका और कोलकाता के बीच रेल संपर्क बहाल था लेकिन उसी समय पाकिस्तान के साथ युद्ध शुरु हुआ और ये सेवा बंद कर दी गई थी।

उस समय बांग्लादेश पाकिस्तान का हिस्सा था जिसे पूर्वी पाकिस्तान कहा जाता था लेकिन 1971 में बांग्लादेश बनने के बाद भारत के साथ रेल सेवा बहाल नहीं हो सकी थी।

अहम फ़ैसला

बांग्लादेश के साथ मैत्री रेल सेवा शुरू करने का फ़ैसले को भारत सरकार ने शुक्रवार को कैबिनेट की बैठक में मंज़ूरी दी थी। दोनों देशों में वर्ष 2001 में रेलगाड़ी फिर से चलाने पर सहमति हुई थी।


समझौता एक्सप्रेस
भारत-पाकिस्तान के बीच ये ट्रेन हफ़्ते में दो दिन चलती है

इससे पहले 24 फ़रवरी को कैबिनेट ने दोनों देशों के बीच अस्थाई चार दीवारी बनाने के भारतीय प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी थी ताकि यात्री रेल चलाए जाने का रास्ता सुलभ हो सके।

दोनों देशों के रेलवे अधिकारियों ने पिछले सप्ताह दो दिन चली दोतरफ़ा बैठक में रेल सेवा शुरू करने के लिए इससे संबंधित सभी मुद्दों को अंतिम रूप दिया।

मैत्री एक्सप्रेस में प्रति यात्री 35 किलोग्राम वज़न तक का सामान लेकर जा सकता है। जबकि पाँच साल से कम उम्र के बच्चे के साथ 20 किलोग्राम तक वज़न का सामान बिना किसी शुल्क के लेकर जाया जा सकता है।

कोलकाता से एक ऐसा व्यक्ति मैत्री एक्सप्रेस में सवार हुआ जो 1965 में रेलगाड़ी से ढाका से कोलकाता आया था। वो रेलगाड़ी उसके बाद बंद हो गई थी। उस समय उस व्यक्ति की उम्र नौ साल थी।

अब 54 वर्षीय राखल दास ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "ढाका जाने वाली सीधी बस सेवा का टिकट काफ़ी महंगा है और हवाई यात्रा को मेरे बस के बाहर है लेकिन रेल यात्रा मेरी जेब के दायरे में है।"

समझौता एक्सप्रेस

इससे पहले वर्ष 2004 में पाकिस्तान और भारत के बीच रेल सेवा शुरू की गई थी जिससे दोनों देशों के बीच यातायात संबध बहाल हुए हैं।

इस ट्रेन के ज़रिए यात्री सप्ताह में दो दिन दिल्ली से लाहौर की यात्रा कर रहे हैं।


थार एक्सप्रेस
थार एक्सप्रेस हफ़्ते में एक बार चलती है

भारत में दिसंबर 2001 में संसद परिसर में हुए चरमपंथी हमले के बाद से इस गाड़ी को रोक दिया गया था लेकिन बाद में दोनों देशों के बीच संबध सुधरे और रेल सेवा फिर बहाल कर दी गई।

भारत और पाकिस्तान के बीच आपसी सदभाव के लिए समझौता एक्सप्रेस 1976 से चलनी शुरू हुई थी।

थार एक्सप्रेस

इसी तरह वर्ष 2006 में भारतीय राजस्थान राज्य और पाकिस्तान के सिंध प्रांत को जोड़ने वाली थार एक्सप्रेस की शुरूआत की गई थी।

ये रेल सेवा दोनों देशों के बीच करीब 41 वर्षों के बाद शुरू की गई थी।

इस रेल सेवा का ज़रिए शुरुआती छह महीनों में क़रीब 31 हज़ार यात्रियों ने यात्रा की और अपने परिजनों से मुलाक़ात की थी।

दिसंबर 2007 में पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो की हत्या के बाद इस ट्रेन को रोक दिया गया था लेकिन फिर जल्द ही सेवा बहाल कर दी गई।

Saturday, April 12, 2008

माओवादी नेता प्रचंड जीत के क़रीब

नेपाल में संविधान सभा के गठन के लिए हुए चुनावों की मतगणना में माओवादी लगातार बढ़त बनाए हुए हैं। नेपाली कांग्रेस और अन्य दलों को झटका लगा है।

अभी तक पाँच सीटों के नतीजे घोषित किए गए हैं जिनमें तीन नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के पक्ष में गए हैं।

एक-एक सीटों पर नेपाली कांग्रेस और नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (यूनाइटेड मार्क्सवादी लेनिनवादी) यानी सीपीएन (यूएमएल) के पक्ष में गए हैं।

जिन 70 सीटों के रूझान मिले हैं उनमें से 48 सीटों पर माओवादियों ने बढ़त बनाई हुई है।

मतगणना की रफ़्तार धीमी है क्योंकि कुछ एक सीटों को छोड़ कर शेष सीटों पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों का उपयोग नहीं हुआ है, इसलिए मतपत्रों को गणना में समय लग रहा है।

लेकिन अब तक मिले रुझानों से माओवादी खेमे में जश्न का माहौल है और उनके हज़ारों समर्थक सड़कों पर निकल आए हैं।

समीकरण

पार्टी के चैयरमैन पुष्पकमल दहल यानी प्रचंड ने काठमांडू क्षेत्र नंबर 10 में निर्णायक बढ़त बना ली है और उनकी जीत तय मानी जा रही है।

जबकि सीपीएन (यूएमएल) के नेता माधव नेपाल पिछड़ गए हैं। माओवादियों के बाद नेपाली कांग्रेस दूसरे नंबर पर है।

उनके उम्मीदवार प्रकाशमान सिंह चुनाव जीत गए हैं।

अभी तक के रुझानों को देखा जाए तो सबसे तगड़ा झटका नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (यूएमएल) को लगा है। उनके एक बड़े नेता प्रदीप नेपाल चुनाव हार चुके हैं।

लोगों का कहना है कि चुनाव प्रचार में माओवादियों ने बड़े ही सीधे शब्दों में जनता के सामने अपना एजेंडा रखा जिसका फ़ायदा उन्हें मिल रहा है।

दूसरी ओर अन्य पार्टियाँ कभी न कभी सत्ता का स्वाद चख चुकी हैं। पर्यवेक्षकों की राय में उन्हें अवसरवादी समझा जा रहा है।

राजधानी काठमांडू में एक माओवादी समर्थक का कहना था, "उन्होंने जनता के लिए काम किया है। दस साल से संघर्ष करते आए हैं, न पानी पीया और न ठीक से खाना खाया। इसका फ़ायदा तो मिलेगा ही।"

प्रणाली

इस चुनाव मे 240 सीटों पर प्रत्यक्ष चुनाव और 335 सीटों के लिए समानुपातिक पद्धति से चुनाव हुआ है, जिसमें मतदाता को उम्मीदवार को न चुनकर पार्टी को चुनना था।


ग्रामीण इलाक़ों के रुझान आने शुरू नहीं हुए हैं

अब जिस तरह के रूझान प्रत्यक्ष चुनावों के आ रहे हैं, उनसे ऐसा लग रहा है कि माओवादियों को समानुपातिक चुनाव मे काफ़ी फ़ायदा हो सकता है। इसका कारण बताया जा रहा है कि जहाँ उनका परंपरागत आधार नहीं है वहाँ अगर वो अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं तो उनके गढ़ माने जाने वाले क्षेत्रों मे उन्हें एकतरफ़ा बढ़त मिल सकती है।

हालाँकि अब तक माओवादियों के साथ सरकार में शामिल थे पर उनका कहना है कि संविधानसभा में माओवादियों के बहुमत की स्थिति में देश में लोकतंत्र स्थापित करने के संयुक्त प्रयास को झटका लग सकता है क्योंकि माओवादी मिलजुल कर काम करने के आदी नही हैं।

उधर नेपाली कांग्रेस के नेता भी चुनाव परिणामों को हैरान करने वाला बता रहे हैं। हालाँकि ये नेता अभी हार स्वीकार नही कर रहे हैं, पर दबी ज़ुबान मे मान रहे हैं कि उनके कई धुरधंर भी ख़तरे मे हैं।

हालाँकि चुनाव परिणाम पूरी तरह सामने आने में कई दिन लग सकते हैं क्योंकि नेपाल के कई दुर्गम इलाके़ ऐसे हैं जहाँ मतगणना अभी शुरू ही हुई है वहाँ से तस्वीर साफ़ होने मे समय लगेगा, पर तराई और राजधानी काठमांडू मे कल तक तस्वीर काफ़ी हद तक साफ़ हो जाएगी और कई परिणाम सामने आ सकते हैं।

Friday, April 11, 2008

मून ओलंपिक समारोह में हिस्सा नहीं लेंगे

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने चीन को बता दिया है कि वो बीजिंग में अगस्त में होने वाले ओलंपिक खेलों के उदघाटन समारोह में हिस्सा नहीं ले पाएंगे।

संयुक्त राष्ट्र की एक प्रवक्ता का कहना है कि बान की मून ने कुछ महीने पहले ही अपनी असमर्थता जता दी थी और कहा था कि समय की कमी के कारण उनका बीजिंग जाना निश्चित नहीं है।

इस बीच ओलंपिक मशाल अर्जेंटीना पहुँच गई है जहाँ इसकी सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए हैं।

तिब्बत पर चीन के शासन के ख़िलाफ़ तिब्बती शरणार्थियों ने कई देशों में ओलंपिक मशाल का विरोध किया है।

जहाँ लंदन में मशाल छीनने की कोशिश की गई, वहीं पेरिस में सुरक्षा कारणों से इसे बुझाना पड़ा।

इस साल के शुरु में तिब्बत में सबसे पहले चीन विरोधी हिंसक प्रदर्शन हुए थे।

चीन को ओलंपिक की मेज़बानी मिली है और तिब्बती शरणार्थियों ने इसे ध्यान में रखते हुए विरोध प्रदर्शन तेज़ किए हैं ताकि पूरी दुनिया का ध्यान इस मुद्दे की ओर खींचा जा सके।

इसका असर भी दिखाई दे रहा है। कई चर्चित खिलाड़ियों ने ओलंपिक मशाल दौड़ के बहिष्कार की घोषणा की है।
इस कड़ी में नया नाम जुड़ा है नोबल शांति पुरस्कार विजेता वंगारी मथाई का। उन्होंने चीन में मानवाधिकारों की बुरी स्थिति का हवाला देते हुए तंज़ानिया में मशाल दौड़ से अपना नाम वापस ले लिया है।

उन्होंने कहा है कि वो तिब्बत की घटनाओं से चिंतित हैं और वहाँ के लोगों के प्रति सहानुभूति रखती हैं।

Thursday, April 10, 2008

ओलंपिक मशाल का अमरीका में भी विरोध

ओलंपिक मशाल रिले को अमरीका में भी विरोध का सामना करना पड़ा है।

अमरीका के सैन फ़्रांसिस्को में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच ओलंपिक मशाल दौड़ आयोजित की गई।

लेकिन हज़ारों की संख्या में जुटे चीन-विरोधी प्रदर्शनकारियों से बचने के लिए आयोजकों ने अंतिम क्षणों में मशाल दौड़ का रास्ता बदल दिया।

अमरीका में विरोध प्रदर्शन

बुधवार को सैन फ़्रांसिस्को में ओलंपिक मशाल दौड़ की दूरी भी आधी कर दी गई। पहले ये रिले दौड़ 10 किलोमीटर की थी।

मशाल के स्वागत में आयोजित समारोह का स्थान भी अंतिम क्षणों में बदलना पड़ा।

सैन फ़्रांसिस्को के मेयर गेविन न्यूसम ने इन बदलावों को ज़रूरी बताते हुए कहा है कि जनसुरक्षा की दृष्टि से ये क़दम उठाने पड़े।

इससे पहले जब ओलंपिक मशाल सैन फ़्रांसिस्को में यात्रा के लिए निकली तो वहाँ नगर के मेयर ने उसका स्वागत किया।

मशाल यात्रा के नियत समय से घंटों पहले ही हज़ारों लोग प्रस्तावित रूट पर जमा हो गए थे।

इनमें तिब्बत समर्थकों की बड़ी संख्या तो थी ही, चीनी मूल के लोग भी अच्छी ख़ासी संख्या में जुटे थे, जो ओलंपिक और मशाल के पक्ष में नारे लगा रहे थे।

आमने-सामने आए समर्थक

ऐसे भी मौक़े आए जब दोनों ही पक्ष के लोग आमने-सामने आ गए। चीन समर्थक और तिब्बत समर्थक एक दूसरे के ख़िलाफ़ नारे लगा रहे थे।


ओलंपिक मशाल का विरोध
सैन फ़्रांसिस्को में चीन समर्थक और तिब्बत समर्थक आमने सामने आ गए।

दोनों गुटों के बीच हल्की-फुल्की झड़प की भी खबर है।

मशाल यात्रा का विरोध कर रही एक महिला ने बताया, "हम चीन सरकार से जुड़ी सारी समस्याओं को उठा रहे हैं, जिनमें बर्मा, दारफ़ुर और तिब्बत के साथ-साथ चीन के भीतर की समस्याएँ भी हैं। मैं और स्वतंत्रता देखना चाहती हूँ।"

लेकिन अपने-अपनी बात रखने की हरसंभव कोशिश कर रहे इन लोगों का इंतज़ार बेकार गया। क्योंकि अंतिम क्षणों में अधिकारियों ने मशाल यात्रा का तयशुदा रूट लगभग पूरी तरह बदल दिया।


हम चीन सरकार से जुड़ी सारी समस्याओं को उठा रहे हैं, जिनमें बर्मा, दारफ़ुर और तिब्बत के साथ-साथ चीन के भीतर की समस्याएँ भी हैं। मैं और स्वतंत्रता देखना चाहती हूँ।

तिब्बत समर्थक

कड़ी सुरक्षा और सैकड़ों सुरक्षाकर्मियों के बीच इस मशाल को ले जाया गया।

यदि मशाल का रूट नहीं भी बदला गया होता तो चीन समर्थकों और विरोधियों की नज़र मशाल पर शायद ही पड़ती, क्योंकि मशाल के चारों ओर सैकड़ों की संख्या में सुरक्षाकर्मी चल रहे थे।

इनमें चीनी सुरक्षाकर्मी भी थे, जिन्हें मशाल की सुरक्षा के पहले घेरे के रूप में लगा रखा था।

वैसे, दौड़ शुरू होने से पहले विरोध कर रहे एक शख्स को हिरासत में भी लिया गया।

ओबामा ने भी किया विरोध

अमरीकी राष्ट्रपति पद के चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से उम्मीदवारी के दावेदार बराक़ ओबामा ने राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश से अपील की है कि वो बीजिंग ओलंपिक के उदघाटन समारोह में शामिल न हों।

ओबामा ने कहा कि जब तक चीन तिब्बत में मानवाधिकार की स्थिति सुधारने के लिए कोई कदम नहीं उठाता और दारफ़ुर में होने वाले कथित जनसंहार को रोकने में मदद नहीं देता तब तक बीजिंग ओलंपिक का विरोध किया जाना चाहिए।

इससे पहले डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता और राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी की दावेदार हिलेरी क्लिंटन भी राष्ट्रपति बुश से इसी तरह के विरोध की अपील कर चुकी हैं।

हिलेरी क्लिंटन ने ब्रितानिया के प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन के बीजिंग ओलंपिक के उदघाटन समारोह में शामिल न होने के फ़ैसले का भी स्वागत किया है।


ओलंपिक मशाल रिले का विरोध
कई जगहों पर चीन और तिब्बत समर्थक आपस में उलझ भी गए।

अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश पहले ही चीन से अपील कर चुके हैं कि वो तिब्बत के मामले में वहाँ के निर्वासित नेता दलाई लामा से बातचीत करके इस मसले को सुलझाएँ।

इससे पहले पेरिस और लंदन में भी बीजिंग ओलंपिक मशाल का जमकर विरोध किया गया था।

ओलंपिक मशाल ग्रीस के ओलंपिया में 24 मार्च को ज्योति जलाई गई थी और इसे बीजिंग में आठ अगस्त को ओलंपिक खेलों के उदघाटन से पहले 20 देशों से होकर गुज़ारा जाना है।

ओलंपिक मशाल अमरीका के बाद अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस ऑयर्स ले जाई जाएगी। 17 अप्रैल को ये मशाल दिल्ली पहुँचेगी।

Wednesday, April 9, 2008

बराक-हिलेरी ने कहा, इराक़ से सेना हटाएँ

अमरीकी राष्ट्रपति पद के डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों बराक ओबामा और हिलेरी क्लिंटन ने दोहराया है कि इराक़ से सेना की वापसी होना चाहिए।

जबकि रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार जॉन मैक्केन ने पार्टी लाइन पर बने रहकर कहा है कि सेना की वापसी ख़तरनाक हो सकती है और अलक़ायदा फिर से ताक़तवर हो जाएगा।

इराक़ में अमरीका के सबसे वरिष्ठ कमांडर जनरल डेविड पेट्रियस ने वॉशिंगटन में चल रही संसद की सुनवाई में कहा है कि इराक़ में अमरीकी सैनिकों की मौजूदगी अभी ज़रूरी है और जुलाई से सैनिकों की वापसी के कार्यक्रम पर पुरर्विचार किया जाना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि इराक़ पर हमले के पाँच सालों में चार हज़ार से अधिक अमरीकी सैनिकों की मौत हो गई है और अब वहाँ सैनिकों की मौजूदगी एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनी हुई है।

अपना-अपना राग

आमतौर पर सीनेट का कमेटी रुम राजनीतिक प्रहसनों का मंच बना होता है और इराक़ के मामले में हो रही सुनवाई में राष्ट्रपति चुनाव के तीनों भावी उम्मीदवार अपने-अपने नाटकीय अंदाज़ में प्रस्तुत थे।

वे चुनाव प्रचार के लिए उपयोग में आने वाली अपनी सबसे अच्छी पंक्तियों के साथ हाज़िर थे और उन्होंने पूरी तैयारी की थी।

डेमोक्रेटिक उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन ने कहा कि यदि वे राष्ट्रपति बनीं तो इराक़ से अमरीकी सैनिकों की वापसी साठ दिनों के भीतर शुरु हो जाएगी।

हालांकि बराक ओबामा की लाइन इससे कुछ अलग थी और उन्होंने कहा कि सेना की वापसी के लिए एक टाइमटेबल बनना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इराक़ के मामले में ईरान से भी बात करनी चाहिए।

लेकिन रिपब्लिकन पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद के अधिकृत उम्मीदवार होने जा रहे जॉन मैक्केन ने कहा कि इस समय सेना की वापसी ठीक नहीं होगी।

उनका कहना था कि इससे अलक़ायदा फिर मज़बूत हो सकता है।

सुरक्षा

लेकिन इराक़ में अमरीकी सेना की कमान संभाले हुए जनरल पैट्रियस ने कहा कि सरकार को जुलाई से सैनिकों की वापसी के कार्यक्रम पर पुनर्विचार करना चाहिए।

जनरल पैट्रियस
जनरल पैट्रियस को लगता है कि इराक़ सुरक्षा में अभी स्थायित्व नहीं है

उन्होंने कहा कि इराक़ में सुरक्षा के मामले में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है हालांकि यह सभी जगह एक समान नहीं है।

उनका कहना था कि गर्मियों में एक बार इराक़ में सैनिकों की संख्या के बारे में फिर से आकलन करने की ज़रुरत होगी।

उन्होंने माना कि पिछले दिनों बसरा में हुए ऑपरेशन की योजना ठीक तरह से नहीं बनी थी।

उन्होंने सांसदों को बताया कि पिछले सितंबर में उन्होंने इराक़ की जो स्थिति बताई थी अब उसमें काफ़ी सुधार हुआ है।

लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि वहाँ सुधार की वास्तविक स्थिति अभी भी बहुत नाज़ुक है और यह स्थिति पलट भी सकती है।

यानी सब कुछ अभी भी अमरीकी और इराक़ी फ़ौजों के हाथ में नहीं है।

दो दिनों की सुनवाई के पहले दिन इराक़ में अमरीका के राजदूत रायन क्रॉकर ने संसद को इराक़ की स्थिति की ताज़ा स्थिति से अवगत कराया।

Tuesday, April 8, 2008

अपना सोना बेचेगा अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष अपनी माली हालत सुधारने के लिए अपने कोष से 400 टन सोना बेचने की तैयारी कर रहा है।

मुद्रोकोष की इस योजना को वाशिंगटन में हुई बोर्ड की बैठक में मंज़ूरी मिल गई है।

यदि मुद्राकोष यह क़दम नहीं उठाता है तो आने वाले सालों में उसका वित्तीय घाटा 40 करोड़ डॉलर तक हो सकता है।

योजना के अनुसार 400 टन सोना बेच दिया जाएगा, जो मुद्राकोष के पास जमा सोने का 12 प्रतिशत है।

उम्मीद जताई जा रही है कि इतना सोना बेचने से मुद्राकोष को जो राशि मिलेगी उसका निवेश किया जाएगा और इससे हर साल तीस करोड़ डॉलर तक की राशि मिल सकती है।

शेष दस करोड़ डॉलर का घाटा खर्चो में कटौती करके पूरा किया जाएगा।

मुद्राकोष के इस प्रस्ताव पर अमल करने के लिए कई सदस्य देशों को अपने संविधान में संशोधन करना होगा।

सोना बेचने के लिए मुद्राकोष को अमरीकी संसद की मंज़ूरी भी लेनी होगी और माना जा रहा है कि वहाँ इस पर तीखी बहस हो सकती है।

मुद्राकोष की आय में पिछले सालों में इसलिए कमी हुई है क्योंकि अब कम ही बड़े विकासशील देश इस संस्था से कर्ज़ ले रहे हैं और इसलिए वे ब्याज भी अदा नहीं कर रहे हैं।

पिछले दिनों में सबसे बड़ी वित्तीय सहायता की ज़रुरत अर्जेंटीना को पड़ी थी पर उसे भी अब छह साल हो गए।

एशियाई देशों में एक दशक पहले आई मंदी का असर यह हुआ है कि अब हर देश के पास विदेशी मुद्रा का एक बड़ा भंडार है।

शायद इस संग्रह का कारण यही है कि वे देश मुद्राकोष से कर्ज़ नहीं लेना चाहते।

Monday, April 7, 2008

हिलेरी के निकट सहयोगी ने साथ छोड़ा

अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव में डेमोक्रैटिक पार्टी की ओर से उम्मीदवारी हासिल करने की जी-तोड़ कोशिश कर रहीं हिलेरी क्लिंटन को झटका लगा है।

हिलेरी के मुख्य रणनीतिकार मार्क पेन ने इस्तीफ़ा दे दिया है।

मार्क पेन एक जनसंपर्क कंपनी (पीआर एजेंसी) चलाते हैं और इसे देखते हुए हिलेरी के चुनाव अभियान में उनकी भागीदारी पर सवाल उठाए गए थे।

पेन की कंपनी को कोलंबिया की सरकार से ये काम मिला हुआ है कि वो अमरीका के साथ मुक्त व्यापार समझौता कराने में मदद करे।

वहीं दूसरी ओर ख़ुद हिलेरी क्लिंटन कोलंबिया के साथ इस तरह के समझौते का विरोध करती हैं।

हिलेरी की प्रचार प्रबंधक मैगी विलियम्स ने बताया, "पिछले कुछ दिनों में हुई गतिविधियों को देखते हुए मार्क पेन से अपनी भूमिका छोड़ने को कहा गया।"

ग़लती मानी

'वाल स्ट्रीट जर्नल' ने हाल ही में प्रकाशित ख़बर में कहा था कि मार्क पेन ने अपनी कंपनी बर्सन मार्स्टेलर के प्रमुख के तौर पर 31 मार्च को कोलंबियाई राजदूत से मुलाक़ात की।

हालाँकि बाद में मार्क पेन ने एक बयान जारी कर माना कि इस बैठक में शामिल होकर उन्होंने ग़लत किया है और वे इस तरह की ग़लती नहीं दोहराएंगे।

डेमोक्रैटिक पार्टी की ओर से बराक ओबामा और हिलेरी क्लिंटन उम्मीदवार बनने की होड़ में बने हुए हैं।

विभिन्न राज्यों के प्राइमरी चुनावों में दोनों के बीच कड़ा संघर्ष हुआ है।

अब माना जा रहा है कि अगस्त में पार्टी सम्मेलन के दौरान ही उम्मीदवार के चयन पर अंतिम फ़ैसला हो सकता है।

बराक ओबामा के पास अभी 1634 प्रतिनिधि हैं और हिलेरी क्लिंटन के पास 1500 ।

लेकिन राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवारी हासिल करने के लिए 2024 प्रतिनिधियों का समर्थन चाहिए।

Saturday, April 5, 2008

तेल की क़ीमतों में उछाल जारी

अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की क़ीमत फ़िर बढ़ कर 106 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई है। इसके असर से भारत में महँगाई और बढ़ सकती है।

ताज़ा उछाल अमरीका में रोज़गार के आँकड़ों में कमी की रिपोर्ट के बाद आया है।

वायदा बाज़ार में मई माह के लिए 106 डॉलर 23 सेंट प्रति बैरल की दर से कच्चे तेल की बोली लगाई गई।

लंदन के बाज़ार में कच्चा तेल दो डॉलर चढ़ कर लगभग 105 डॉलर प्रति बैरल हो गया।

भारत के लिए ये बुरी ख़बर है जहाँ महँगाई की दर तीन साल के सर्वोच्च स्तर पर पहुँच चुकी है।

भारत अपनी ज़रूरतों का 70 फ़ीसदी कच्चा तेल आयात करता है और क़मीतें बढ़ने से पेट्रोल और डीजल की क़ीमत फिर बढ़ाई जा सकती है।

एक्सॉन मोबिल के अमरीकी रिफ़ाइनरी में आग लगने की ख़बर का असर भी बाज़ार पर पड़ा।

अमरीका में गर्मी के दिनों में पेट्रोल की खपत बढ़ जाती है, इसलिए आपूर्ति में किसी तरह की गड़बड़ी से क़ीमतें बढ़ जाती हैं।

अमरीकी डॉलर के यूरो के मुक़ाबले कमज़ोर पड़ने का असर भी तेल क़ीमतों पर पड़ रहा है और निवेशक मुद्रा बाज़ार में घुसने के बज़ाए कमोडिटी बाज़ार में निवेश कर रहे हैं।

Friday, April 4, 2008

नैटो अफ़ग़ानिस्तान में सहायता बढ़ाएगा

नैटो संगठन के 26 सदस्य देशों ने अफ़ग़ानिस्तान को लंबे समय तक सहायता देने का वादा करते हुए वहाँ सैन्य सहायता बढ़ाने का फ़ैसला किया है।

रोमानिया की राजधानी बुकारेस्ट में नैटो के सम्मेलन में कहा गया कि अफ़ग़ानिस्तान तालेबान के ख़िलाफ़ लड़ाई का नेतृत्व कर रहा है और वहाँ अंतरराष्ट्रीय सहायता में बेहतर तालमेल की ज़रुरत है।

नैटो देशों ने फ़ैसला किया है कि वे 2010 तक अफ़ग़ान सैनिकों की संख्या 80 हज़ार कर दी जाएगी और इसके लिए प्रशिक्षण और हथियारों की व्यवस्था की जाएगी।

इससे पहले फ़्रांस ने अफ़ग़ानिस्तान में अपने सैनिकों की संख्या बढ़ाने की घोषणा की थी।

उल्लेखनीय है कि अमरीका लंबे समय से अफ़ग़ानिस्तान में नैटो का समर्थन बढ़ाने की माँग कर रहा है लेकिन इसके लिए सदस्य देश राज़ी नहीं हो रहे थे।


मैंने तय किया है कि पूर्वी क्षेत्र में फ़ांस के सैनिकों की मौजूदगी को एक अतिरिक्त बटालियन तैनात कर और मज़बूत किया जाए

फ़्रांस के राष्ट्रपति

संवाददाताओं का कहना है कि गुरुवार को लिया गया फ़ैसला नैटो के सदस्य देशों में अफ़ग़ानिस्तान में सैनिकों की उपस्थिति को लेकर घटते समर्थन को उलटने की कोशिश है।

नैटो के सम्मेलन में अफ़ग़ानिस्तान को लेकर जो रणनीति तय की गई है उसमें नया कुछ भी नहीं है।

उनका कहना है कि इसमें यह बात दोहराई गई है कि वहाँ तालेबान और अल-क़ायदा को नहीं लौटने देना है।

फ़्रांस और सैनिक भेजेगा

फ़्रांस के राष्ट्रपति निकोला सार्कोज़ी ने अपने भाषण में कहा, "मैंने तय किया है कि पूर्वी क्षेत्र में फ़ांस के सैनिकों की मौजूदगी को एक अतिरिक्त बटालियन तैनात कर और मज़बूत किया जाए।"

महत्वपूर्ण है कि नैटो के नेतृत्व वाली अंतरराष्ट्रीय सेनाओं के कमांडर जनरल डेनियल मेकनील ने लगभग दस हज़ार अतिरिक्त सैनिक तैनात किए जाने की माँग की है।

इससे पहले कनाडा ने धमकी दी थी कि यदि और नैटो देश अपने सैनिक अफ़ग़ानिस्तान में अपने सैनिक नहीं भेजते तो वह अपने सैनिकों को वापस बुला लेगा।

अमरीका ने वादा किया है कि वह दक्षिणी अफ़ग़ानिस्तान में कनाडा की सेना की मदद के लिए कुछ अतिरिक्त सैनिक भेजेगा।

Thursday, April 3, 2008

ओसामा बिन लादेन स्वस्थ हैं: ज़वाहिरी

अल क़ायदा के दूसरे प्रमुख नेता अयमन अल ज़वाहिरी का कहना है कि ओसामा बिन लादेन स्वस्थ हैं और उनके ख़राब स्वास्थ्य की ख़बरें झूठी हैं।

ज़वाहिरी ने ये बातें एक इस्लामी वेबसाइट पर एक सवाल के जवाब में कहीं।

उनका कहना था,'' शेख ओसामा बिन लादेन का स्वास्थ अच्छा है। ग़लत इरादे से उनके बारे में झूठी ख़बरें फैलाई जाती हैं।''

ग़ौरतलब है कि काफ़ी लंबे अरसे से ओसामा बिन लादेन के बारे में अटकलें लगाईं जा रहीं हैं।

ऐसा माना जाता है कि ज़वाहिरी और ओसामा बिन लादेन अफ़ग़ानिस्तान अथवा पाकिस्तान में छुपे हो सकते हैं।

अयमन अल ज़वाहिरी ने इस वेबसाइट पर संयुक्त राष्ट्र पर निशाना साधा और उसे मुसलमानों की दुश्मन संस्था ठहराया है।

अपने 90 मिनट के ऑडियो संदेश में ज़वाहिरी ने कहा,'' संयुक्त राष्ट्र इस्लाम और मुसलमानों का दुश्मन है।''

एक और संदेश

अपने संदेश में उन्होंने अल क़ायदा की फ़लस्तीन में योजना और महिलाओं के चरमपंथी कार्रवाई में हिस्सा लेने पर भी अपने विचार व्यक्त किए हैं।


शेख ओसामा बिन लादेन का स्वास्थ अच्छा है. ग़लत इरादे से उनके बारे में झूठी ख़बरें फैलाई जाती हैं

अयमन अल ज़वाहिरी

ज़वाहिरी ने इसराइल के अंदर और बाहर यहूदी लोगों पर हमले के बात कही।

पिछले महीने भी ज़वाहिरी के नाम से ऑडियो संदेश जारी किया गया था जिसमें अमरीका और इसराइल पर हमले की बात कही थी।

अयमन अल ज़वाहिरी पेशे से आँखों के डॉक्टर रहे हैं और उन्हें अल क़ायदा का प्रमुख रणनीतिकार माना जाता है।

कुछ विश्लेषक मानते हैं कि 11 सितंबर, 2001 के हमलों के पीछ अयमन अल ज़वाहिरी की ही सोच थी।

2001 में अमरीका ने जो दुनिया के सबसे वांछित 22 आतंकवादियों की जो सूची जारी की थी उसमें ज़वाहिरी का नाम ओसामा बिन लादेन के बाद दूसरे नंबर पर था और उन पर ढाई करोड़ डॉलर का इनाम रखा गया था।

Wednesday, April 2, 2008

एमनेस्टी ने चीन की कड़ी आलोचना की

मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल का कहना है कि चीनी प्रशासन ने दुनिया की नज़र में अपनी छवि स्थिर और शांतिपूर्ण देश की प्रस्तुत करने की कोशिश में विभिन्न गतिविधियों का मुँह बंद करने की कोशिश की है।

एमनेस्टी का कहना है कि तिब्बत की कार्रवाई के बाद यदि विदेशी नेताओं और ओलंपिक समिति के सदस्यों ने चीन के मानवाधिकार उल्लंघन की बात नहीं की, तो इसमें उनकी सहमति नज़र आएगी।

बीजिंग से पत्रकार सैबल दास का कहना है कि चीन पर छवि को लेकर भारी दबाव है।

वो अपनी ‘अत्याचारी’ की छवि पेश नहीं करना चाहता है क्योंकि इससे बहुत से पश्चिमी देशों के एथलीट और नेता ओलंपिक खेलों के दौरान नहीं आएँगे।

इसके पहले चीन ने कहा था कि ओलंपिक खेलों में बाधा डालने के लिए तिब्बती आत्मघाती हमला कर सकते हैं।

हालांकि धर्मशाला स्थित निर्वासित तिब्बती सरकार ने बीजिंग के इन आरोपों का खंडन किया है।

चीन के नागरिक सुरक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को दावा किया कि ल्हासा और तिब्बत के अन्य हिस्सों में हिंसक प्रदर्शन के बाद अब तिब्बती आत्मघाती हमले की साजिश रच रहे हैं।

भारत की सलाह

इधर भारत के विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने भारत में रह रहे निर्वासित शीर्ष तिब्बती धर्मगुरू दलाई लामा को आगाह किया है कि वे ऐसा कोई काम न करें जिससे भारत और चीन के आपसी रिश्तों पर असर पड़े।


यदि विदेशी नेताओं और ओलंपिक समिति के सदस्यों ने चीन के मानवाधिकार उल्लंघन की बात नहीं की, तो इसमें उनकी सहमति नज़र आएगी

एमनेस्टी इंटरनेशनल

प्रणव मुखर्जी ने कहा कि दलाई लामा हमेशा की तरह भारत में सम्मान से रह सकते हैं लेकिन राजनीतिक गतिविधियों से उन्हें दूर रहना चाहिए।

विदेश मंत्री का यह बयान ऐसे समय पर आया है जबकि भारत में लगातार चीन विरोधी प्रदर्शन हो रहे हैं।

एक टीवी चैनल को दिए गए इंटरव्यू में प्रणव मुखर्जी ने कहा, "भारत उनका मेज़बान बना रहेगा लेकिन अपने भारत प्रवास के दौरान उन्हें किसी राजनीतिक गतिविधि में हिस्सा नहीं लेना चाहिए और कुछ भी ऐसा नहीं करना चाहिए जिससे कि भारत और चीन के आपसी संबंधों पर बुरा असर हो।"

भारत के लिए यह एक कठिन चुनौती है क्योंकि वह तिब्बत के शीर्षस्थ नेता और उनके सहयोगियों को अपने यहाँ शरण देता है लेकिन साथ ही चीन से भी अपने रिश्ते ख़राब नहीं करना चाहता।

Tuesday, April 1, 2008

अमरीका ने व्यापक वित्तीय क़दमों की घोषणा की

अमरीकी सरकार ने मंदी की आशंका के कारण वित्तीय बाज़ारों के लिए व्यापक क़दमों की घोषणा की है।

माना जा रहा है कि 1930 की मंदी के बाद ये सबसे व्यापक क़दम हैं।

जानकारों का कहना है कि अमरीका की वित्तीय व्यवस्था में लंबे समय से बदलाव नहीं किया गया था जिसे करने का फ़ैसला अब लिया गया है।

अब वित्तीय ढाँचे की गतिविधियों को अलग अलग राज्यों की बजाए उन्हें अमरीका के केंद्रीय बैंक की निगरानी में रखा जाएगा।


हमारी पहली प्राथमिकता है वित्तीय संकट, घरों की गिरती क़ीमतों से पैदा हुआ संकट, और हम इस समस्या को जल्द से जल्द सुलझाना चाहते हैं

हेनरी पॉलसन, अमरीकी वित्त मंत्री

अमरीका के वित्त मंत्री हेनरी पॉलसन का कहना है कि इससे उन्हें ये आशा तो नहीं है कि वित्तीय बाज़ारों की वर्तमान समस्याएँ सुलझ जाएंगी लेकिन लंबे समय के लिए ये एक अच्छी व्यवस्था बनाने की कोशिश है।

उनका कहना था,'' हमारी पहली प्राथमिकता है वित्तीय संकट, घरों की गिरती क़ीमतों से पैदा हुआ संकट और हम इस समस्या को जल्द से जल्द सुलझाना चाहते हैं।''

व्यापक क़दम

अमरीकी वित्त मंत्री का कहना था,'' हम जो बड़े बदलाव लागू करना चाहते हैं, हम उन्हें तब तक पूरी तरह लागू नहीं कर सकते जब तक कि ये समस्याएँ सुलझा नहीं ली जातीं।''

लेकिन वित्त मंत्री हेनरी पॉलसन को वित्तीय व्यवस्था के बदलाव करने के लिए अपनी योजना को संसद से मंज़ूर करवाना होगा।

इन क़दमों के बाद सोमवार देर शाम अमरीकी शेयर बाज़ारों में मामूली उछाल आया।

डाओ जोन्स का सूचकांक 47 अंक और नैसडैक 17 अंक ऊपर बंद हुआ।

इधर भारत सोमवार को शेयर बाज़ारों में भारी गिरावट दर्ज की गई थी।

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स लगभग 727 अंक गिरकर 15,644 पर बंद हुआ।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी लगभग 207 अंक लुढ़क कर 4,734 रह गया।

इस वर्ष के शुरुआती तीन महीनों में सेंसेक्स में लगभग 23 फ़ीसदी की गिरावट आ चुकी है।