Saturday, May 31, 2008

अंसार बर्नी को भारत ने वापस लौटाया

लंदन से दिल्ली आए पाकिस्तान के मानवाधिकार मामलों के पूर्व मंत्री अंसार बर्नी को शुक्रवार को भारत सरकार के अधिकारियों ने वापस लौटा दिया है।

उनको डिपोर्ट करने या वापस लौटाए जाने के कारणों का पता नहीं चला है लेकिन उनके भाई सारिम बर्नी ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा है कि उन्हें कुछ बहाने बनाकर वापस भेज दिया गया है।

अभी यह भी स्पष्ट नहीं हुआ है कि किसके आदेश पर बर्नी को वापस लौटाया गया है।

अंसार बर्नी पाकिस्तान में अंतरिम सरकार में मानवाधिकार मामलों के मंत्री थे।


मैं अपने कुछ साथियों के साथ हवाई अड्डे पर बर्नी साहब का स्वागत करने पहुँचा लेकिन वो हवाई अड्डे के बाहर भी निकल सके। उन्हें अधिकारियों ने एक पुर्जा थमाया और वापस लौट जाने को कहा

एहसान शम्सी

अंसार बर्नी जामा मस्जिद यूनाइटेड फ़ोरम की ओर से 'अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद' पर दो दिवसीय सम्मेलन में हिस्सा लेने दिल्ली पहुँचे थे।

सम्मेलन के निदेशक सैयद एहसान शम्सी ने बीबीसी को बताया, "मैं अपने कुछ साथियों के साथ हवाई अड्डे पर बर्नी साहब का स्वागत करने पहुँचा लेकिन वो हवाई अड्डे के बाहर भी निकल सके। उन्हें अधिकारियों ने एक पुर्जा थमाया और वापस लौट जाने को कहा।"

शम्सी बताते हैं, "मुझे नहीं पता चल सका कि पुर्जे में क्या लिखा है। वो सम्मेलन में नहीं आ सकेंगे इसको लेकर हम निराश हैं।"

सम्मेलन में पाकिस्तान से आमंत्रित अतिथियों की सूची में मानवाधिकार कार्यकर्ता अस्मा जहाँगीर और अवामी नेशनल पार्टी के महासचिव मोहम्मद हाशिम बाबर का नाम भी शामिल है।

माना जाता है कि अंसार बर्नी के प्रयासों से पाकिस्तान की जेल में 35 साल बिताने के बाद कश्मीर सिंह को रिहा किया गया और वो फांसी की सज़ा पा चुके सरबजीत सिंह की सज़ा माफ़ करवाने के लिए भी प्रयास कर रहे हैं।

वापस दुबई

अंसार बर्नी के भाई ने बताया कि अंसार बर्नी लंदन से रवाना हुए थे और दुबई के रास्ते भारत आ रहे थे।

अंसार बर्नी दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर स्थानीय समय के अनुसार रात साढ़े आठ बजे अमीरात एयरवेज़ के विमान से उतरे थे।

वहाँ भारतीय अधिकारियों ने उन्हें वापस दुबई भेज दिया है।


कश्मीर सिंह के साथ अंसार बर्नी
कश्मीर सिंह की रिहाई में अंसार बर्नी की अहम भूमिका मानी जाती है

जैसा कि सारिम बर्नी ने बताया, अंसार बर्नी शनिवार को सुबह लंदन पहुँच रहे हैं और तभी सही-सही कारणों का पता चल सकेगा।

यह पूछे जाने पर कि क्या उनके पास भारत आने के लिए आवश्यक दस्तावेज़ नहीं थे, उनके भाई ने कहा, "क्या कोई व्यक्ति लंदन के विमानतल से बिना दस्तावेज़ के भारत की उड़ान ले सकता है?"

उनके भाई का कहना है कि वे उन पाकिस्तानी नागरिकों से मिलने पहुँचे थे जिन्हें पासपोर्ट में कथित तौर पर छेड़छाड़ करने के आरोप में हाल ही में गिरफ़्तार किया गया है।

उल्लेखनीय है कि अंसार बर्नी पिछली अप्रैल में ही भारत आए थे और दिल्ली में उनकी मुलाक़ात भारत के गृहमंत्री शिवराज पाटिल और विदेश सचिव शिवशंकर मेनन से हुई थी।

सरबजीत सिंह के परिवारजनों ने भी अमृतसर में उनसे मुलाक़ात की थी और सरबजीत को माफ़ी दिलवाने की अपील की थी।

Friday, May 30, 2008

नितीश हत्याकांड: सज़ा पर फ़ैसला संभव

दिल्ली की स्थानीय अदालत आज नितीश कटारा हत्याकांड के दोषियों को सज़ा सुना सकती है। इस मामले में विकास और विशाल यादव को दोषी पाया गया था।

छह साल पहले नीतिश कटारा की हत्या कर दी गई थी और हत्या का आरोप विकास यादव और उनके चचेरे भाई विशाल यादव पर लगा था।

ये मामला इसलिए सुर्खियों में आया क्योंकि विकास यादव उत्तर प्रदेश के बाहुबली नेता डीपी यादव के बेटे हैं और नितीश कटारा एक आईएएस अधिकारी के बेटे थे।


शुक्रवार को सज़ा सुनाए जाने की संभावना कम है क्योंकि दोपहर बाद दो बज़े ये मामला अदालत के समक्ष आएगा और सज़ा पर बहस भी होगी। इसलिए हो सकता है कि फ़ैसला शनिवार या सोमवार तक के लिए सुरक्षित रख लिया जाए।

नीलम कटारा

डीपी यादव ने अपने बेटे और भतीजे को सज़ा सुनाए जाने के बाद कहा था कि वो इस फ़ैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देंगे।

दूसरी ओर नितीश कटारा की माँ नीलम कटारा का कहना था, "बचाव पक्ष को ऊपरी अदालत में जाने का अधिकार है, इससे मैं इनकार नहीं करती हूँ। लेकिन मैं थोड़े बैठी रहूंगी। वहाँ भी न्याय के लिए मेरी लड़ाई जारी रहेगी।"

हालाँकि बीबीसी संवाददाता सुशीला सिंह से बातचीत में उन्होंने कहा, "शुक्रवार को सज़ा सुनाए जाने की संभावना कम है क्योंकि दोपहर बाद दो बज़े ये मामला अदालत के समक्ष आएगा और सज़ा पर बहस भी होगी। इसलिए हो सकता है कि फ़ैसला शनिवार या सोमवार तक के लिए सुरक्षित रख लिया जाए।"

लंबी सुनवाई

छह साल पुराने इस मामले की सुनवाई के दौरान सैकड़ों तारीखें पड़ीं और मामला मीडिया की सुर्खियों में रहा।

नीलम कटारा
नीलम कटारा ने फ़ैसले के बाद कहा कि न्याय की जीत हुई

इस मामले में अभियोजन पक्ष ने कुल 42 गवाह पेश किए।

शुरुआत में इस मामले की सुनवाई ग़ाज़ियाबाद की अदालत में चल रही थी लेकिन बाद में नितीश कटारा के परिवार के अनुरोध पर ये मामला दिल्ली स्थानांतरित कर दिया गया।

पुलिस का कहना था कि 16-17 फरवरी, 2002 की रात नितीश कटारा का ग़ाज़ियाबाद से अपहरण किया गया था और फिर उनकी हत्या कर दी गई।

इस मामले में विकास यादव और विशाल यादव को अभियुक्त बनाया गया था।

अभियोजन पक्ष का कहना था कि विकास यादव और विशाल यादव ने नितीश कटारा की इसलिए हत्या की थी क्योंकि उन्हें अपनी बहन भारती यादव से उसकी दोस्ती पसंद नहीं थी।

अभियुक्त विकास यादव और विशाल यादव ने अपने आपको बेक़सूर बताया था।

उनका कहना था कि पुलिस ने ग़लत तरीके से उन्हें फंसाया और उन्होंने पुलिस के सामने कोई बयान नहीं दिया था।

विकास यादव का कहना था कि उसे राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के कारण फंसाया गया है।

Thursday, May 29, 2008

दिल्ली के आस-पास गूजरों का चक्का जाम

दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में गुरुवार को गूजरों ने आंदोलन शुरू कर दिया है।

गूजरों ने पूर्वी दिल्ली के गाज़ीपुर इलाक़े में नेशनल हाइवे 24 को जाम कर दिया है।

दिल्ली-हापुर हाइवे और दिल्ली-नोएडा एक्सप्रेस हाइवे को जाम किए जाने की ख़बर है।

दादारी इलाके में सुबह-सुबह गूजरों ने कुछ लोकल ट्रेनों को भी रोका है।

गूजरों के इस एनसीआर रोको आंदोलन की वजह से दिल्ली में दूध और सब्ज़ियों की सप्लाई पर मामूली असर दिखाई पड़ा है।

दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र(एनसीआर) में भी गूजरों ने सभी अहम सड़कों को बंद करने का मन बनाया है।

गूजर आंदोलन को एक साल

गूजरों ने गुरुवार को गूजर आंदोलन की बरसी मनाने की तैयारी पूरी कर ली है। राजस्थान के पाटौली इलाक़े में गूजरों ने तमाम रास्तों को जाम कर दिया है।

गूजरों ने जयपुर बंद का भी आह्वान किया है। जयपुर में बंद को देखते हुए राजस्थान सरकार ने सुरक्षा कड़ी कर दी है।

गुरुवार की सुबह सरकार ने राज्य के गूजर बाहुल्य इलाकों में हेलीकॉप्टर से पर्चे भी गिरवाए हैं।

राज्य के छह ज़िलों के सैकड़ों कस्बों में तकरीबन तीन लाख पर्चे बरसाए गए हैं।

इन पर्चों में लिखा है कि गूजर शांति बनाए रखें। अपना आंदोलन छोड़ दें। सरकार उनके लिए तमाम कोशिशें कर रही है।

राजस्थान की राजधानी जयपुर में वैसे तो गूजरों की आबादी अधिक नहीं है लेकिन फिर भी सरकार ने सुरक्षा चाकचौबंद रखी है।

गूजर बाहुल्य इलाक़ों दौसा, सिकंदरा, भरतपुर,पीलूपुरा में आंदोलन तेज़ हो सकता है।

Wednesday, May 28, 2008

अमरीका ने 'लश्कर नेताओं' को काली सूची में डाला

अमरीका ने चार लोगों को 'आतंकवादी' घोषित किया है और कहा है कि ये पाकिस्तानी चरमपंथी संगठन लश्करे तैयबा के प्रमुख नेता हैं जो भारत को निशाना बनाता रहा है।

अमरीकी सरकार ने चारों लोगों हाफ़िज़ मोहम्मद सईद, ज़कीउर रहमान लखवी, हाजी मुहम्मद अशरफ़ और मोहम्मद अहमद बहाज़िक की संपत्ति ज़ब्त करने का आदेश भी जारी किया है।

अमरीकी सरकार की ओर से जारी एक दस्तावेज़ में हाफ़िज़ मोहम्मद सईद को लश्कर का प्रमुख बताया गया है और इन चारों पर ओसामा बिन लादेन और अल क़ायदा के साथ गहरे संबंध के आरोप हैं।


हाफ़िज़ मोहम्मद सईद
नाम - हाफ़िज़ मोहम्मद सईद उर्फ़ हाफ़िज़ सईद उर्फ़ टाटा जी
पता - मकान नंबर-116ई, मोहल्ला जोहर, लाहौर, पाकिस्तान
पहचान संख्या - 35200255098427
भूमिका - लश्करे तैयबा का सर्वेसर्वा
गतिविधियाँ - चरमपंथी प्रशिक्षण शिविरों का प्रबंधन, हमलों के निर्देश
अमरीकी दस्तावेज़

साथ ही पाकिस्तान में इनका पता, इनकी राष्ट्रीय पहचान संख्या और ये और कौन-कौन सा नाम इस्तेमाल करते हैं सबकुछ इस दस्तावेज़ में शामिल है।

अमरीका ने ये भी कहा है कि इस संगठन पर पाकिस्तान सरकार की ओर से वर्ष 2002 में लगे प्रतिबंध के बावजूद ये कश्मीर के साथ-साथ पूरी दुनिया में आतंकवादी गतिविधियों में सक्रिय हैं।

ख़तरनाक संहगठन

आतंकवाद के लिए धन उगाहने वाली संस्थाओं पर नज़र रखने वाली अमरीकी वित्त मंत्रालय की ख़ुफ़िया शाखा के वरिष्ठ अधिकारी स्टुअर्ट लेवी का कहना है कि पाकिस्तानी संगठन लश्करे तैयबा अल क़ायदा से जुड़ा एक ख़तरनाक गुट है जिसने कई बार निर्दोष लोगों की हत्या की है।

लेवी का कहना है, "इसकी पैठ कई देशों में है और इसलिए ज़रूरी है कि पूरी दुनिया की सरकारें इसकी कार्रवाई और इसे मिलने वाली आर्थिक मदद पर रोक लगाएं।"


इसकी पैठ कई देशों में है और इसलिए ज़रूरी है कि पूरी दुनिया की सरकारें इसकी कार्रवाई और इसे मिलने वाली आर्थिक मदद पर रोक लगाएं

स्टुअर्ट लेवी

वित्त मंत्रालय की और से जारी बयान में अमरीकी नागरिकों से भी कहा गया है कि वो इस संगठन के साथ किसी भी तरह का वास्ता नहीं रखें।

अमरीकी सरकार का कहना है कि लश्कर ने 1993 से ही भारत के कई फ़ौजी और नागरिक ठिकानों पर हमले किए हैं।

इस बयान में भारत सरकार के हवाले से कहा गया है कि 2006 के मुंबई ट्रेन बम हमलों और 2001 में भारतीय संसद पर हुए हमले में भी लश्कर का ही हाथ था।

2005 में दिल्ली और बैंगलोर में हुए हमलों में भी लश्कर पर ही उँगली उठी थी।

चरमपंथी गतिविधियाँ

स्टुअर्ट लेवी ने कहा कि मंगलवार को जारी ये सरकारी दस्तावेज़ उस क़ानून के तहत है जिसमें आतंकवादियों, आतंकवादी संगठनों, उन्हें आर्थिक या किसी और तरह की मदद पहुंचानेवालों पर नज़र रखी जाती है।


ज़की उर रहमान
नाम- ज़की उर रहमान उर्फ़ ज़ाकिर रहमान उर्फ़ अबू वहीद इरशाद अहमद उर्फ़ चाचा जी
पता-चक नंबर-18/1एल, रिनाला खुर्द, ज़िला-ओकारा, इस्लामाबाद, पाकिस्तान
पहचान संख्या- 61101-96182321
भूमिका- अभियान संचालक
गतिविधियाँ- चेचेन्या, बोस्निया, इराक़ और दक्षिण-पूर्वी एशिया में हमलों का निर्देशन, आत्मघाती हमलों की तैयारी करवाना
अमरीकी दस्तावेज़

हाफ़िज़ सईद के बारे में कहा गया है कि 2006 में उन्होंने पाकिस्तान में एक ट्रेनिंग कैंप चलाया और साथ ही उसके लिए पैसा जुटाया और यहां प्रशिक्षित चरमपंथियों को मुख्य रूप से अफ़गानिस्तान में अमरीकी और नैटो सैनिकों पर हमला करने के लिए भेजा गया।

मंगलवार को ही अफ़गानिस्तान और पाकिस्तान के दौरे से लौटे एक वरिष्ठ अमरीकी सेनेटर ने कहा है कि पाकिस्तान में कई चरमपंथी संगठन हैं जो खुलकर पाकिस्तान अफ़गानिस्तान सीमा के आरपार जा रहे हैं।


महमूद मोहम्मद अहमद बहाज़िक
नाम-महमूद बहाज़िक उर्फ़ अबू अब्दुल अज़ीज़ उर्फ़ शेख़ साहब
राष्ट्रीयता- सऊदी अरब
सऊदी पहचान संख्या- 4603200481
भूमिका - लश्कर को वित्तीय समर्थन
अमरीकी दस्तावेज़

उन्होंने यहां तक कहा है कि इसमें उन्हें पाकिस्तानी फ़ौज और ख़ुफ़िया एजेंसियों के कुछ लोगों की भी मदद मिल रही है।

अमरीका ने लश्करे तैयबा को पहली पर 2001 में आतंकवादी संगठन करार किया था और 2005 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने भी ऐसा ही प्रस्ताव पारित किया था।

प्रशिक्षण और धन उगाही

अमरीकी दस्तावेज़ के मुताबिक ज़की उर रहमान लखवी लश्कर के अभियानों का मुख्य संचालक है और उन्होंने चेचेन्या, बोस्निया, इराक़ और दक्षिण-पूर्व एशिया में चरमपंथी गतिविधियों का निर्देशन किया है।


हाजी मोहम्मद अशरफ़
नाम-हाजी मोहम्मद अशरफ़
जन्म तिथि- एक मार्च, 1965
पासपोर्ट नंबर - ए,374184 (पाकिस्तान)
भूमिका- वित्तीय मामलों का प्रभारी
गतिविधियाँ - धन उगाही के लिए मध्य-पूर्व की यात्रा, सऊदी अरब में सक्रिय
अमरीकी दस्तावेज़

दस्तावेज़ के मुताबिक लखवी ने वर्ष 2006 में लश्कर के लोगों को आत्मघाती दस्ते तैयार करने के निर्देश दिए थे और उन्हें भीड़-भाड़ वाले इलाक़ों में हमले के तरीके बताए थे।

बताया गया है कि ज़की उर रहमान लखवी ने वर्ष 2004 में इराक़ में अमरीकी सैनिकों पर हमले के लिए चरमपंथियों को रवाना किया और लश्कर की ओर से अल क़ायदा के लिए धन उगाही में भी उनकी मुख्य भूमिका रही है।

हाजी मोहम्मद अशरफ़ को लश्कर के वित्तीय मामलों का प्रबंधक बताया गया है जो वर्ष 2003 और 2004 में मध्य-पूर्व के देशों के दौरे पर गए और ख़ुद लश्कर के लिए धन जुटाने का काम किया।

अमरीकी दस्तावेज़ों में महमूद मोहम्मद अहमद बहाज़िक उर्फ़ महमूद बहाज़िक उर्फ़ शेख़ साहिब को सऊदी अरब का नागरिक बताया गया है जो निजी तौर पर लश्कर को वित्तीय मदद देता रहा है।

Tuesday, May 27, 2008

गूजर नेता बैंसला के ख़िलाफ़ मामला दर्ज

राजस्थान सरकार ने व्यापक हिंसा और अराजकता के बाद अब गूजर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला के विरुद्ध शिकंजा कसने का संकेत दिया है।

भरतपुर पुलिस ने बैंसला के विरुद्ध राज्य के ख़िलाफ़ अपराध करने का मामला दर्ज किया है। इसके साथ ही पुलिस ने भरतपुर ज़िले में 38 गूजरों को गिरफ्तार भी किया है।

भरतपुर के नए पुलिस अधीक्षक रोहित पुरोहित ने बीबीसी को बताया की बैंसला के ख़िलाफ़ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।

पुलिस ने बैंसला को प्राथमिकी में नामजद किया है। भारतीय दंड संहिता की जिन धाराओं में बैंसला के विरुद्ध मामला दर्ज किया गया है, उनमें अगर अरोप साबित हो जाए तो व्यक्ति को आजीवन कारावास तक की सज़ा मिल सकती है।

बैंसला के अलावा पुलिस ने डकैती के मामलों में अभियुक्त जगन गूजर के विरुद्ध भी मामला दर्ज किया है।

कथित दस्यु सरगना जगन गत दिनों गूजरों के विरोध-प्रदर्शन में हथियारों के साथ दिखाई दिया था। उसके साथ उसकी प्रेमिका भी थी।

गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने कहा है कि आंदोलन पर आपराधिक तत्त्व हावी हो गए है। मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे ने भी ने रविवार को कहा था कि अपराधों मे लिप्त कई चेहरे इस आंदोलन के मंचों पर देखे गए हैं।

इसके बाद पुलिस हरकत में आई। इस बीच सरकार ने गूजर नेताओं के ख़िलाफ़ हाईकोर्ट में भी एक याचिका दाखिल कर कहा है कि गूजर नेताओं ने अदालत की पाबंदी के बावजूद कानून व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश की है।

सख़्त होती सरकार

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर कहा है कि गूजर आंदोलन का मुद्दा अब कई राज्यों को प्रभावित कर रहा है इसलिए वो राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाएँ और समाधान निकालें।


मृतक गूजरों के शव
पिछले एक साल के दौरान गूजर आंदोलन में कम से कम 63 लोगों की मौत हो चुकी है

राजस्थान सरकार ने केंद्र से सिफ़ारिश की है कि गूजरों के लिए जनजाति आरक्षण से अलग चार से छह प्रतिशत गैर अधिसूचित कोटे से आरक्षण की व्यवस्था करे। पहले भी सरकार केंद्र से यह आग्रह कर चुकी है।

राजस्थान की ताज़ा स्थित के बारे में राज्य के गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया ने कहा, “राज्य में कमोबेश 34 स्थानों पर गुजरों ने विरोध प्रदर्शन किए, कुछ वाहनों की तोड़-फोड़ की, रास्ते रोके। लोकिन शांति बनी हुई है।”

सरकार का कहना है कि राजस्थान में चल रहे गूजरों के आंदोलन में मरने वालों की संख्या 37 है जबकि 50 लोग घायल है।

पुलिस के मुताबिक घायलों पर पुलिस के हथियारों के अलावा देसी, अवैध हथियोरों से चोट (छर्रें) के निशान है।

उनका कहना है कि लाश को पोस्टमार्टम के लिए इस वजह से नहीं दिया जा रहा है कि ऐसे में इस सच का खुलासा हो जाएगा कि मौत सिर्फ़ पुलिस की गोली से ही नहीं हुई है।

सरकार का कहना है कि इस आंदोलन में आपराधिक तत्वों का हाथ है और वे आंदोलन पर क़ाबिज़ हैं।

राजस्थान में जनजाति का दर्जा देने की माँग को लेकर गूजरों का आंदोलन राज्य के दूसरे हिस्सों में भी फैल गया है।

आंदोलनकारियों ने सोमवार को जगह-जगह रेल और सड़क मार्ग को जाम किया। गूजरों ने सोमवार को उदयपुर-अहमदाबाद और झालावाड़-इंदौर मार्ग को निशाना बनाया।

दिल्ली-मुंबई रेलमार्ग पहले से ही आंदोलन की चपेट में है। रविवार की रात आगरा-बाँदीकुई रेलमार्ग भी बाधित हुआ।

आंदोलन

इस बीच आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि शुक्रवार से चल रहे इस आंदोलन के दौरान हिंसा में मारे गए लोगों की संख्या 37 तक पहुँच गई है।

राज्य सरकार ने एक बार फिर कहा है कि वह मसले के समाधान के लिए गूजरों से बातचीत के लिए तैयार है लेकिन गूजर नेता बातचीत को तैयार नहीं दिख रहे हैं।

सरकार चला रही भारतीय जनता पार्टी को कुछ महीने बाद ही विधानसभा चुनावों का सामना करना है इसलिए वह चाहती है कि मामला जितनी जल्दी शांत हो जाए, उतना अच्छा है।

यही वजह है कि सरकार ने कहा है कि किरोड़ी सिंह बैंसला बातचीत के लिए अपना दूत भी भेज सकते हैं।

राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे रविवार को भरतपुर ज़िले के बयाना इलाक़े में हालाज का जायज़ा लेने गई थीं लेकिन बैंसला से उनकी भेंट नहीं हुई।

बयाना के लोगों के मुताबिक मुख्यमंत्री ने कहा था कि अगर बैंसला चाहें तो उनसे मिल सकते हैं।

पिछले साल भी गूजरों ने जनजाति का दर्जा देने की माँग को लेकर उग्र आंदोलन किया था और उस समय भी बड़े पैमाने पर हुई हिंसा में 26 लोगों की मौत हुई थी।

तब राज्य सरकार और गूजर नेताओं के बीच समझौते के बाद आरक्षण की माँग पर विचार के लिए चोपड़ा आयोग का गठन किया गया था।
इस आयोग ने रिपोर्ट पेश की लेकिन उसमें आरक्षण के बारे में स्पष्ट तौर पर कोई सुझाव नहीं था।

अब गूजरों का कहना है कि उन्हें चोपड़ा आयोग से कोई मतलब नहीं है और वे चाहते हैं कि वसुंधरा राजे अपने वादे के मुताबिक कार्यकाल ख़त्म होने से पहले आरक्षण देने की सिफ़ारिश केंद्र से करें।

Monday, May 26, 2008

'भाजपा नेता येदियुरप्पा दावा पेश करेंगे'

कर्नाटक में स्पष्ट बहुमत के क़रीब पहुँची भारतीय जनता पार्टी सोमवार को सरकार बनाने का दावा पेश कर सकती है।

भाजपा महासचिव और कर्नाटक के प्रभारी अरुण जेटली ने बताया कि भाजपा विधायक दल की सोमवार को बैठक बुलाई गई है जिसमें औपचारिक रूप से येदियुरप्पा को नेता चुना जाएगा।

इसके बाद वे सरकार बनाने का दावा करने के लिए राज्यपाल से मिलेंगे।

इस बैठक में अरुण जेटली और भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह भी मौजूद रहेंगे।


कर्नाटक चुनाव 2008
भाजपा- 110 सीटें
कांग्रेस- 80 सीटें
जनता दल (सेक्युलर)- 28
अन्य- 6

ख़बरों के अनुसार बीएस येदियुरप्पा के 28 मई को राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने की संभावना है।

पिछली बार वो मात्र सात दिन तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे थे।

नतीजे आने के बाद रविवार को दिल्ली में भाजपा संसदीय बोर्ड की बैठक हुई जिसमें पार्टी के प्रदर्शन पर संतोष व्यक्त किया गया। बैठक में सरकार गठन के बारे में भी चर्चा हुई।

भाजपा में जश्न

कर्नाटक विधानसभा में भाजपा को सरकार बनाने के लिए कम से कम 113 विधायकों का समर्थन चाहिए।


कर्नाटक का जनादेश स्पष्ट रूप से यूपीए के कमज़ोर होने का प्रमाण है

राजनाथ सिंह, भाजपा अध्यक्ष

कर्नाटक सभी 224 सीटों के परिणाम घोषित किए जा चुके हैं।

इसमें से भारतीय जनता पार्टी को 110, कांग्रेस को 80, जनता दल (सेक्युलर) को 28 और निर्दलीय प्रत्याशियों को छह सीटों पर जीत हासिल हुई है।

इन चुनावों में सबसे ज़्यादा नुक़सान देवेगौड़ा की पार्टी को हुआ है।

पिछले चुनावों में 58 सीटों के साथ सत्ता के समीकरण तय करनेवाली यह पार्टी इस बार केवल 28 सीटों पर ही जीत हासिल कर पाई है।

परिणाम आने के बाद से ही भाजपा के खेमे में जश्न का माहौल है।

पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने दिल्ली में पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि कर्नाटक का जनादेश स्पष्ट रूप से यूपीए के कमज़ोर होने का प्रमाण है।

Saturday, May 24, 2008

राजस्थान में तनाव, सेना की तैनाती

राजस्थान में अपनी बिरादरी को जनजाति का दर्जा दिए जाने की माँग को लेकर गूजरों के उग्र आंदोलन को देखते हुए दो जगहों पर सेना की तैनाती की गई है।

शुक्रवार को बयाना में गूजरों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस फ़ायरिंग में 13 से ज़्यादा लोग मारे गए थे और बीस से ज़्यादा घायल हो गए।

राज्य सरकार ने पुलिस फ़ायरिंग की न्यायिक जाँच करवाने की घोषणा की है।

राज्य के कई हिस्सों में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। बयाना में भारी संख्या में गूजर समुदाय के लोग पुलिस फ़ायरिंग में मारे गए आठ लोगों के शव के साथ रेल लाइन पर बैठे हुए हैं।

उनका कहना है कि जब तक अनुसूचिज जनजाति के कोटे के तहत आरक्षण की उनकी माँग पर कोई समझौता नहीं होता है, वे शवों का दाह संस्कार नहीं करेंगे।

गूजरों ने झालावाड़ और कोटा में शनिवार को चक्का जाम करने की घोषणा की है, वहीं भीलवाड़ा में बंद का आह्वान किया गया है।

भारी सुरक्षा

राजस्थान के पुलिस महानिदेशक अमरजीत सिंह गिल ने बताया है कि भरतपुर ज़िले के बयाना और करौली के हिंडोन में सेना के दो कॉलम तैनात कर दिए गए हैं और आठ कॉलम को सतर्क रखा गया है।


गूज़र आंदोलन (फ़ाइनल फ़ोटो)
स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और दो जगहों पर सेना तैनात कर दी गई है

साथ ही पुलिस और अर्धसैनिक बलों की 42 कंपनियाँ तैनात की गई हैं।

राज्य प्रशासन ने किसी भी व्यक्ति के हथियार के साथ चलने पर पाबंदी लगा दी है। राजधानी जयपुर में निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है।

पुलिस महानिदेशक ख़ुद भरतपुर का दौरा कर रहे हैं। वहाँ बयाना में लगभग डेढ़ किलोमीटर लंबी रेल लाइन को आंदोलनकारियों ने क्षतिग्रस्त कर दिया है।

इसके कारण दिल्ली-मुंबई रेलमार्ग पर तीस रेलगाड़ियों के परिचालन में बाधा आई है। साथ ही दिल्ली और अन्य स्थानों के लिए जाने वाली चार सौ बसों का परिचालन भी बाधित हो गया है।

शुक्रवार की रात गूजरों ने बूंदी में राज्य के संसदीय सचिव भवानी सिंह राजावत की गाड़ी रोक कर उनके साथ हाथापाई की लेकिन वो किसी तरह निकलने में सफल रहे।

आरक्षण की माँग

आरक्षण की माँग पर गूजरों ने पिछले साल उग्र आंदोलन किया था। तब 29 मई से चार जून के बीच कई बार आंदोलन ने हिंसक रूप अख़्तियार कर लिया और कुल 26 लोग मारे थे।


पिछले साल आरक्षण की माँग पर चोपड़ा आयोग का गठन हुआ था

राज्य सरकार और गूजर प्रतिनिधियों के बीच समझौते के तहत आरक्षण की माँग पर विचार के लिए चोपड़ा आयोग का गठन किया गया।

इस आयोग ने अपनी रिपोर्ट भी पेश कर दी लेकिन इसमें आरक्षण के बारे में स्पष्ट तौर पर कोई ज़िक्र नहीं किया गया।

अब गूजरों का कहना है कि उन्हें चोपड़ा आयोग से कोई मतलब नहीं है और वे चाहते हैं कि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया अपने वादे के मुताबिक कार्यकाल ख़त्म होने से पहले आरक्षण देने की सिफ़ारिश केंद्र सरकार से करें।

Friday, May 23, 2008

'तबाही से निपटना बर्मा के बूते से बाहर'

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने कहा है कि तूफ़ान से हुई तबाही से अकेले निपटना बर्मा के बूते से बाहर है।

हालाँकि उन्होंने स्थिति को नियंत्रण में बताया है।

तूफ़ान प्रभावित इलाक़ों का दौरा करने के बाद बान की मून शुक्रवार को राजधानी नेपीदॉ में बर्मा के सैन्य शासक जनरल थान श्वे से बातचीत करने वाले हैं जिसमें अंतरराष्ट्रीय सहायताकर्मियों की पहुँच बढ़ाने पर चर्चा होने की संभावना है।

चक्रवातीय तूफ़ान नर्गिस से सबसे बुरी तरह प्रभावित इरावदी क्षेत्र में उन्होंने फ़सलों की बर्बादी और तबाह हुए गाँवों का मुआयना किया।

वो एक राहत शिविर में भी गए। उन्होंने कहा कि उनकी बर्मा यात्रा का मकसद यहाँ की सरकार को ज़्यादा सहायता स्वीकार करने के लिए राजी करना है।

इस तूफ़ान ने 78 हज़ार लोगों की जानें ली है और लगभग 56 हज़ार लोग अभी भी लापता हैं।

संयुक्त राष्ट्र की चिंता

बान की मून ने चिंता जताई है कि संयुक्त राष्ट्र की सहायता लगभग पाँच लाख लोगों तक ही पहुँच पा रही है जबकि बर्मा में लगभग बीस लाख लोगों को तुरंत सहायता की ज़रूरत है।

एक विदेशी डॉक्टर ने बीबीसी से कहा कि अब भी बहुत से लोग छोटे-छोटे तालाबों से पानी पीने के लिए मजबूर हैं। डॉक्टर का कहना है था कि बच्चे और बुज़ुर्ग लोग दस्त, पेट की ख़राबी, डेंगू बुख़ार और अन्य बीमारियों का सामना कर रहे हैं।

इस बीच बान की मून ने इन ख़बरों का खंडन किया है कि उनकी यात्रा के ज़रिए बर्मा के तूफ़ान प्रभावित इलाक़ों की भ्रामक तस्वीर देने की कोशिश की जा रही है।

बान की मून ने अपना बर्मा दौरा शुरू करते हुए कहा था कि लोगों की जान बचाने को प्राथमिकता देनी चाहिए ना कि राजनीति को।

Thursday, May 22, 2008

'राजनीति नहीं जान बचाने पर ध्यान दें'

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून बर्मा पहुँच गए हैं। वो तूफ़ान से बुरी तरह प्रभावित इरावदी डेल्डा का दौरा करेंगे और बर्मा के सैन्य नेता से भी मिलेंगे।

उन्होंने कहा है कि लोगों की जान बचाने को प्राथमिकता देनी चाहिए ना कि राजनीति को।

बर्मा की सैनिक सरकार ने बड़े पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय मदद लेने से इनकार कर दिया था लेकिन दबाव पड़ने के बाद संयुक्त राष्ट्र के कुछ हेलिकॉप्टरों को राहत सामग्री उतारने की अनुमति दी गई।

चक्रवातीय तूफ़ान नर्गिस से हुई तबाही के लगभग बीस दिन बाद भी सहायता एजेंसियों का कहना है कि वो प्रभावित इलाक़ों में अपनी क्षमता का सिर्फ़ तीस फ़ीसदी काम कर पा रहे हैं।

अहम समय

नर्गिस से जान-माल की भारी क्षति हुई है। सरकारी आँकड़ों के मुताबिक मरने वालों की संख्या 78 हज़ार है और 56 हज़ार लोग अभी भी लापता हैं।


हमें बर्मा के लोगों के लिए जहाँ तक संभव हो सके प्रयास करना चाहिए। ये बर्मा के लिए अहम समय है। ख़ुद वहाँ की सरकार मान रही है कि इससे बड़ी विपदा पहले नहीं आई।

बान की मून

लाखों लोगों को तूफ़ान ने बेघर कर दिया। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि 24 लाख लोग इससे प्रभावित हुए हैं जबकि सिर्फ़ एक चौथाई प्रभावितों तक राहत पहुँची है।

ब्रिटेन, फ़्रांस और अमरीका के कई जलपोत खाद्य और अन्य सामानों के साथ लंगर डाले खड़े हैं लेकिन उन्हें बर्मी तटों पर आने की इजाज़त नहीं दी गई है।

बैंकॉक से बर्मा रवाना होने से पहले बान की मून ने कहा, "हमें बर्मा के लोगों के लिए जहाँ तक संभव हो सके प्रयास करना चाहिए। ये बर्मा के लिए अहम समय है। ख़ुद वहाँ की सरकार मान रही है कि इससे बड़ी विपदा पहले नहीं आई।"

संयुक्त राष्ट्र महासचिव गुरुवार को प्रभावित इलाक़ों का दौरा करेंगे और नई राजधानी ने पी तॉ जाएंगे जहाँ वो सैन्य शासक जनरल थान श्वे से मुलाक़ात करेंगे।

Wednesday, May 21, 2008

केंटकी में जीत के बावजूद हिलेरी कमज़ोर

हिलेरी क्लिंटन ने केंटकी से डेमोक्रेटिक पार्टी राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी का चुनाव जीत लिया है। उधर ओरेगॉन में मतदान चल रहा है औऱ वहाँ ओबामा का पलड़ा भारी रहने की उम्मीद है।
मालूम होता है कि हिलेरी क्लिंटन को भरोसा है कि वह पार्टी को अपने पक्ष में करने में सफ़ल होंगी।

डेमोक्रेटिक पार्टी के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के चुनाव के लिए अभी तीन और जगह मोंटाना, दक्षिण डकोटा औऱ पोर्टो रिको में चुनाव होने हैं।

लेकिन अगर ओबामा अच्छा प्रदर्शन करते हैं तो उनके डेलिगेट की संख्या हिलेरी क्लिंटन की संख्या से और ज़्यादा हो जाएगी।

केंटकी में अपनी जीत के बाद बोलते हुए हिलेरी क्लिंटन ने कहा कि जब तक उम्मीदवार का फ़ैसला नहीं हो जाता, वह चुनाव मैदान से नहीं हटेंगी।

उधर बराक ओबामा ने कहा है कि वो डेमोक्रेटिक पार्टी की राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी जीतने के बेहद करीब हैं। उनका कहना था कि राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी के लिए हुए प्राइमरी चुनाव में डेलिगेट संख्या में उन्हें बढ़त हासिल है।

इस चुनावी महासंग्राम में कई सुपर डेलिगेट्स ने अभी यह फ़ैसला नहीं किया है कि वो क्लिंटन की तरफ़ हैं या ओबामा की तरफ़। क्लिंटन ने ऐसे ही सुपरडेलिगेट्स की ओर इशारा करते हुए कहा कि रिपब्लिकन उम्मीदवार जॉन मैक्केन के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ने के लिए वो बेहतर स्थिति में हैं।

केंटकी में क्लिंटन को 65 फ़ीसदी और ओबामा को 30 प्रतिशत वोट मिले। इस जीत के बावजूद हिलेरी क्लिंटन की उम्मीदें तेज़ी से ख़त्म होती जा रही हैं।

कड़ा मुक़ाबला

ग़ौरतलब है कि डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से बराक ओबामा और हिलेरी क्लिंटन उम्मीदवार बनने की होड़ में बने हुए हैं।


ओबामा
क्लिंटन के लिए आगे की राह ख़त्म होती सी दिख रही है

विभिन्न राज्यों के प्राइमरी चुनावों में दोनों के बीच कड़ा संघर्ष हुआ है।
माना जा रहा है कि अगस्त में पार्टी सम्मेलन के दौरान ही उम्मीदवार के चयन पर अंतिम फ़ैसला हो सकता है।

जबकि प्रतिद्वंद्वी रिपब्लिकन पार्टी ने काफ़ी पहले जॉन मैक्केन को राष्ट्रपति पद के लिए अपना उम्मीदवार चुन लिया है।

उम्मीदवारी की इस लंबी दौड़ से डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता परेशान हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि दोनों उम्मीदवारों की यह लड़ाई अगस्त में होने वाले पार्टी के राष्ट्रीय सम्मेलन तक चलती हुई दिख रही है।

इसका नुक़सान यह हो सकता है कि रिपब्लिकन पार्टी के जॉन मैक्केन से लड़ाई में डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार को दिक्कत पेश आ सकती है।

Tuesday, May 20, 2008

भारत-पाक विदेश सचिवों की बातचीत

भारत के विदेश सचिव शिवशंकर मेनन मंगलवार को पाकिस्तान के विदेश सचिव सलमान बशीर के साथ चौथे दौर की बातचीत करेंगे।

इसके अगले दिन दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की बातचीत होगी।

बातचीत के एजेंडे में आतंकवाद, सीमा पर गोलीबारी, जम्मू और कश्मीर, सियाचिन, सरक्रीक, शांति और सुरक्षा, आर्थिक एवं व्यावसायिक संबंध और सांस्कृतिक आदान प्रदान शामिल होने की उम्मीद है।


भारत पाकिस्तान के साथ जम्मू कश्मीर सहित सभी मुद्दों पर बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन बातचीत की प्रक्रिया की सफलता के लिए शांति का माहौल ज़रूरी है।

शिवशंकर मेनन, भारतीय विदेश सचिव

शिवशंकर मेनन ने रविवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा,'' भारत पाकिस्तान के साथ जम्मू कश्मीर सहित सभी मुद्दों पर बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन बातचीत की प्रक्रिया की सफलता के लिए शांति का माहौल ज़रूरी है।''

विदेश मंत्रियों की वार्ता

भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार बातचीत में हुई प्रगति की समीक्षा के लिए बुधवार को विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी से मुलाक़ात करेंगे।


भारत को आतंकवाद को लेकर अपनी बात स्पष्ट रूप से रखने की ज़रूरत है। साथ ही वार्ता को आगे बढ़ाए जाने की आवश्यकता है।

जी पार्थसार्थी, पूर्व भारतीय राजनयिक

पूर्व भारतीय राजनयिक जी पार्थसार्थी नेें कहा,'' भारत को आतंकवाद को लेकर अपनी बात स्पष्ट रूप से रखने की ज़रूरत है। साथ ही वार्ता को आगे बढ़ाए जाने की आवश्यकता है।''

उनका कहना था कि ये भी देखे जाने की ज़रूरत है कि नई सरकार की नीतियाँ क्या हैं।

ग़ौरतलब है कि भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत 2004 में शुरू हुई थी लेकिन पाकिस्तान में राजनीतिक अशांति के कारण ठप्प पड़ी हुई थी।

दोनों पक्षों ने पिछले साल अक्टूबर में समग्र बातचीत के तहत आठ मुद्दों पर बातचीत की थी।

आगामी बैठक में दोनों पक्ष चौथे दौर के तहत सभी आठ मुद्दों पर हुई प्रगति की समीक्षा करेंगे और पांचवें दौर की बातचीत का कार्यक्रम तय करेंगे।

Monday, May 19, 2008

भारत-पाकिस्तान के बीच बातचीत की तैयारी

भारत-पाकिस्तान के बीच मंगवलार से एक बार फिर बातचीत शुरू होने जा रही है।

भारतीय विदेश सचिव शिवशंकर मेनन चौथे दौर की समग्र वार्ता के लिए सोमवार को पाकिस्तान रवाना हो रहे हैं।

मंगलवार को उनकी बातचीत पाकिस्तान के विदेश सचिव सलमान बशीर के साथ होगी। इसके बाद दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की बातचीत होगी।

बातचीत के एजेंडे में आतंकवाद, जम्मू और कश्मीर, सियाचिन, सरक्रीक, शांति और सुरक्षा, तुलबुल परियोजना, आर्थिक एवं व्यावसायिक संबंध और सांस्कृतिक आदान प्रदान शामिल हैं।

शिवशंकर मेनन ने रविवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा,'' भारत पाकिस्तान के साथ जम्मू कश्मीर सहित सभी मुद्दों पर बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन बातचीत की प्रक्रिया की सफलता के लिए शांति का माहौल ज़रूरी है।''

विदेश मंत्रियों की वार्ता

भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार बातचीत में हुई प्रगति की समीक्षा के लिए बुधवार को विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी से मुलाक़ात करेंगे।


भारत पाकिस्तान के साथ जम्मू कश्मीर सहित सभी मुद्दों पर बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन बातचीत की प्रक्रिया की सफलता के लिए शांति का माहौल ज़रूरी है।

शिवशंकर मेनन, भारतीय विदेश सचिव

ये बातचीत 2004 में शुरू हुई थी लेकिन पाकिस्तान में राजनीतिक अशांति के कारण ठप्प पड़ी हुई थी।

दोनों पक्षों ने पिछले साल अक्टूबर में समग्र बातचीत के तहत आठ मुद्दों पर बातचीत की थी।

आगामी बैठक में दोनों पक्ष चौथे दौर के तहत सभी आठ मुद्दों पर हुई प्रगति की समीक्षा करेंगे और पांचवें दौर की बातचीत का कार्यक्रम तय करेंगे।

ग़ौरतलब है कि पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गीलानी के पदभार संभालने के तुंरत बाद मनमोहन सिंह ने उन्हें टेलीफ़ोन कर बधाई दी थी।

भारतीय प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई थी कि प्रधानमंत्री गीलानी द्विपक्षीय संबंधों को और बेहतर बनाने के लिए पूर्व प्रधानमंत्रियों बेनजीर भुट्टो, नवाज शरीफ़ और राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ की पहल को और आगे बढ़ाएंगे।

भारतीय प्रधानमंत्री ने शांति प्रक्रिया को तेज़ करने और द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की बात कही थी।

Saturday, May 17, 2008

भारतीय चिकित्सक दल जा रहा है बर्मा

बर्मा में समुद्री तूफ़ान में हुई भीषण तबाही के बाद भारत 50 लोगों का चिकित्सक दल वहाँ प्रभावित लोगों की मदद के लिए भेज रहा है।

बर्मा की सैन्य सरकार ने इसके लिए अनुरोध किया था।

शनिवार को भारतीय वायुसेना का एक यातायात हेलिकॉप्टर डॉक्टरों और दवाइयों को लेकर रंगून पहुँचेगा।

बर्मा में मरने वालों की संख्या 78 हज़ार हुई

अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद बर्मा की सरकार ने अधिकतर विदेशी राहतकर्मियों को देश में घुसने नहीं दिया है।

भारत-बर्मा के रिश्ते

बर्मा ने भारत के लिए ऐसी सख़्ती नहीं बरती है क्योंकि माना जाता है कि दोनो देशों के बीच काफ़ी क़रीबी संबंध हैं।

माना जाता है कि पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच आर्थिक और सैन्य रिश्ते बेहतर हुए हैं।

भारत उन कुछ देशों में से है जिन्होंने बर्मा पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने का विरोध किया है और यही कारण है कि बर्मा की सरकार को भारत से मदद लेने में उतनी आपत्ति नहीं है जितनी अन्य देशों से आने वाली मदद पर।

भारतीय वायुसेना का एक बड़ा आईएल-76 सैन्य यातायात हेलिकॉप्टर में 50 सदस्यों की टीम, पाँच से छह टन दवाइयाँ और अन्य ज़रूरी सामग्री लेकर रंगून जा रही है।

बर्मा की सरकार की अनुमति के बाद भारत सरकार पहले ही खाद्य सामग्री, कपड़े, तंबू और दवाएँ वहाँ भेज चुकी है।

ये चिकित्सक दल दो फ़ील्ड अस्पताल स्थापित करेगा और भारत सरकार का कहना है कि बर्मा की सरकार के अनुरोध पर ही ऐसा किया जा रहा है।

Friday, May 16, 2008

मनमोहन सिंह दो दिनों की भूटान यात्रा पर

भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह शुक्रवार को दो दिनों की भूटान यात्रा पर जा रहे हैं।

मनमोहन सिंह दुनिया के सबसे नए लोकतंत्र भूटान की यात्रा पर पहुँचने वाले पहले विश्वनेता हैं और वे संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करेंगे।

मनमोहन सिंह भूटान के प्रधानमंत्री जिग्मे थिनली से भी मिलेंगे।

वे एक पनबिजली योजना का लोकार्पण करेंगे और एक नई परियोजना का शिलान्यास करेंगे।

इसके अलावा दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौते होने की संभावना है।

अहम यात्रा

मनमोहन सिंह की भूटान यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब वहाँ वांग्चुक राजवंश के सौ साल पूरे हो रहे हैं और नए राजा जिग्मे खेशर नांग्याल इसी साल गद्दी पर बैठे हैं।

भूटान ने पहली बार लोकतंत्र में क़दम रखे हैं और हाल ही में वहाँ नई संसद के चुनाव हुए हैं।

यही समय है जब भूटान में दसवीं पंचवर्षीय योजना शुरु हो रही है।

जैसा कि भारत के विदेश सचिव शिवशंकर मेनन ने बताया यही वो साल है जब भारत-भूटान संबंधों के पचास साल पूरे हो रहे हैं।

उन्होंने बताया, "पंडित जवाहर लाल नेहरु ने वर्ष 1958 में एक महीने की भूटान की यात्रा पर गए थे। उन्होंने घोड़े और याक से अपनी यात्रा पूरी की थी। अब बदले वक़्त और विकास के फ़र्क को आप ख़ुद देख सकते हैं कि मनमोहन सिंह सीधी उड़ान से वहाँ पहुँच रहे हैं।"

भारत सड़क निर्माण, स्कूल और स्वास्थ्य सभी क्षेत्रों में भूटान की बड़ी मदद करता रहा है लेकिन अब उसकी नज़र भूटान की पनबिजली क्षमता पर है।

पनबिजली

विश्लेषक मानते हैं कि भारत के साथ 700 किलोमीटर की सीमा बाँटने वाले भूटान के साथ संबंध इसलिए भी फ़ायदेमंद है क्योंकि वहाँ पनबिजली पैदा करने की बड़ी क्षमता है।

जैसा कि भारत के विदेश सचिव ने बताया कि भूटान में 30 हज़ार मेगावाट पनबिजली पैदा करने की क्षमता है लेकिन अभी तक दोनों देशों ने मिलकर 1,400 मेगावाट की क्षमता का ही इस्तेमाल किया है।

इस दौरे में मनमोहन सिंह 1020 मेगावाट की क्षमता वाले ताला पनबिजली परियोजना का लोकार्पण करेंगे जिसका निर्माण भारत के सहयोग से हुआ है।

इसके अलावा वे 1095 मेगावाट की क्षमता वाले पुनत्सांग्चू पनबिजली परियोजना का शिलान्यास भी करेंगे।
उल्लेखनीय है कि भूटान अपने यहाँ पैदा होने वाली बिजली का अतिरिक्त हिस्सा भारत को बेचता है।

भारत का लक्ष्य है कि वहाँ वर्ष 2020 तक 5000 मेगावाट पनबिजली पैदा करने की क्षमता विकसित की जा सके।

Thursday, May 15, 2008

जयपुर में फिर कर्फ़्यू, स्केच जारी

जयपुर में सिलसिलेवार बम धमाकों के दूसरे दिन गुरुवार को भी ऐहतियात के तौर पर शहर के 15 थाना क्षेत्रों में सुबह 9 बजे से चार बजे तक का कर्फ़्यू घोषित कर दिया गया है।

जयपुर में रैपिड एक्शन फोर्स, आरएसी व पुलिस की टुकड़ियां संवेदनशील इलाकों में तैनात कर दी गई हैं।

इधर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी जयपुर पहुँच गईं हैं। वो अस्पताल जाकर घायलों का हालचाल जानेंगी।

दूसरी ओर जयपुर में हुए धमाकों के मामले में पुलिस ने एक व्यक्ति का स्केच जारी किया है।

पुलिस महानिरीक्षक पंकज सिंह ने बताया कि जारी स्केच साइकिल दुकानदारों के विवरण के आधार पर तैयार किया गया है।


सरकार को इस बात के सुराग मिल गए हैं कि जयपुर के विस्फोटों में किन तत्वों का हाथ है

शिवराज पाटिल, केंद्रीय गृह मंत्री

पुलिस ने जिस व्यक्ति का स्केच जारी किया है वह करीब 25 वर्ष का है। पुलिस का कहना है कि यह व्यक्ति लगभग छह फ़ीट का है।

माना जा रहा है कि इसी व्यक्ति ने मानक चौक में बम लगाया था।

राजस्थान के गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया ने बताया कि स्केच शहर के प्रमुख हिस्सों में लगा दिए गए हैं।

पुलिस का कहना है कि वह एक महिला की भूमिका की भी जाँच कर रही है।

उधर, सीआईएसएफ के महानिदेशक ने बताया कि विस्फोटों में आरडीएक्स और अमोनियम नाइट्रेट का इस्तेमाल हुआ है।

उल्लेखनीय है कि राजस्थान की राजधानी जयपुर में मंगलवार को हुए सात सिलसिलेवार बम धमाकों में 63 लोगों की मौत हो गई थी और दो सौ से अधिक लोगों के घायल हुए हैं।

'सुराग' और 'पड़ोसी देश'

इसके पहले बुधवार को मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक में धमाकों में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।


कर्फ़्यू
जयपुर के पुराने इलाक़े में ऐहतियात के तौर पर कर्फ़्यू लगा दिया गया है

मुख्यमंत्री ने बाद में बताया कि विस्फोट के सुराग धीरे-धीरे मिल रहे है लेकिन उन्होंने सुरक्षा कारणों से इसकी विस्तृत जानकारी देने से इनकार कर दिया।

भारत के गृहमंत्री शिवराज पाटिल ने कहा है कि सरकार को इस बात के सुराग मिल गए हैं कि जयपुर के विस्फोटों में किन तत्वों का हाथ है।

हालांकि उन्होंने जाँच जारी होने की बात कहकर इसके के बारे में कुछ और बताने से इनकार किया। उनका कहना था कि ये विस्फोट एक ख़ास तरह के हैं।

लेकिन गृह राज्यमंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने शिवराज पाटिल के बयान से कुछ आगे जाकर कहा है कि इन विस्फोटों के तार 'एक पड़ोसी देश' से जुड़े हुए हैं।


जयपुर के विस्फोट देश के सांप्रदायिक सौहार्द्र को बिगाड़ने के लिए रची गई एक सोची समझी साजिश है

श्रीप्रकाश जायसवाल, केंद्रीय गृह राज्यमंत्री

पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने किसी देश का नाम नहीं लिया और कहा, " वह कोई भी पड़ोसी देश हो सकता है, बांग्लादेश, पाकिस्तान, नेपाल और बर्मा। ये सभी देश अंदरूनी समस्याओं का सामना कर रहे हैं।"

उन्होंने कहा, " जिस भी विदेशी शक्ति का हाथ इसके पीछे है, उसे हमारे देश की तरक्की बर्दाश्त नहीं हो रही है।"

उन्होंने कहा, " जयपुर के विस्फोट देश के सांप्रदायिक सौहार्द्र को बिगाड़ने के लिए रची गई एक सोची समझी साजिश है।"

इस बीच केंद्र सरकार ने एनएसजी को जयपुर भेजा है और केंद्रीय एजेंसियाँ भी वहाँ जाँच पड़ताल में मदद कर रही हैं।

Wednesday, May 14, 2008

जयपुर में धमाकों के बाद कर्फ़्यू, देश में अलर्ट

राजस्थान की राजधानी जयपुर में मंगलवार को हुए सात सिलसिलेवार बम धमाकों के बाद शहर के 15 थाना क्षेत्रों में ऐहतियात के तौर पर कर्फ़्यू लगा दिया गया है।

धमाकों के सिलसिले में कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया गया है।

इन धमाकों में 60 लोग मारे गए हैं और सौ से ज़्यादा घायल हुए हैं। इन धमाकों के बाद देश के दूसरे हिस्सों में 'अलर्ट' घोषित किया गया है।

राजस्थान सरकार ने एक दिन के शोक की घोषणा की है।

धमाकों के बाद का मंज़र

राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह समेत सभी राजनीतिक दलों के नेताओं ने इन धमाकों की निंदा की है और मारे गए लोगों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है।

व्यापक निंदा के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी

कुछ हिंदूवादी संगठनों ने धमाकों के विरोध में बुधवार को राजस्थान बंद का आह्वान किया है।

मारे गए लोगों में से 22 शवों की पहचान कर ली गई है। घायलों में से कईयों की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है।

समाचार एजेंसी यूएनआई के मुताबिक केंद्रीय गृह राज्य मंत्री श्रीप्रकाश जायवसवाल जयपुर पहुँच गए हैं। इससे पहले उन्होंने कहा कि ये धमाके किसी बड़ी साजिश का नतीजा है।

उनका कहना था, "हम आतंकवाद का मुँहतोड़ ज़वाब देंगे। अभी हम सबको एकजुट होकर मौजूदा स्थिति से निपटना है।"

दर्दनाक मंज़र

लगभग 15 मिनटों के अंतराल पर पुराने जयपुर शहर के जौहरी बाज़ार, त्रिपोलिया बाज़ार, बड़ी चौपाल, छोटी चौपाल, मानस चौक, चाँद पोल और कोतवाली के पास हुए धमाकों ने इस शांत शहर को दहला कर रख दिया।

ये बम गंभीर किस्म के थे। हो सकता है कि इनमें आरडीएक्स का इस्तेमाल भी हुआ हो। यह एक बहुत बड़ी साज़िश है। इस घटना का मुँह तोड़ जवाब देने में राज्य और केंद्र सरकार सक्षम हैं। दिल्ली समेत सभी मेट्रोपॉलिटन शहरों में हाई एलर्ट जारी कर दिया गया है और सतर्कता बरती जा रही है।

श्रीप्रकाश जयसवाल, गृह राज्यमंत्री

दो किलोमीटर के दायरे में हुए इन विस्फोटों के बाद अफ़रा-तफ़री मच गई। लोग फ़ोन पर एक-दूसरे का हालचाल पूछ रहे थे। शहर की टेलीफ़ोन लाइनें जाम हो गईं।

सवाई मान सिंह अस्पताल में बड़ी संख्या में घायलों के पहुँचने के कारण वहाँ खून की कमी हो गई और अस्पताल कर्मचारी बाहर निकल कर आम लोगों से रक्तदान की अपील करने लगे।

कई लोग तो ये भयावह मंज़र देख कर होश खो बैठे लेकिन कुछ लोगों ने हिम्मत बांधी और घायलों को अस्पताल पहुँचाने में जुट गए।

सवाई मान सिंह अस्पताल के डॉक्टरों के लिए बड़ी अजीब सी स्थिति पैदा हो गई। धमाकों के बाद अस्पताल में लगभग बीस शव लाए गए। उनमें से तीन मृतकों की जेब में रखे मोबाइल फ़ोन लगातार बज रहे थे। उनके परिजन उनका हाल जानना चाह रहे थे।

एक विस्फोट हनुमान मंदिर के पास हुआ है जहाँ मंगलवार होने के कारण लोगों के बड़ी भीड़ जुटी हुई थी।

सतर्कता

इन धमाकों के बाद देश में अलर्ट घोषित किया गया है और सभी महानगरों में हाई एलर्ट जारी किया गया है। राज्य सरकारों से कहा गया है कि अत्यधिक सतर्कता बरती जाए।


घटनास्थल
धमाकों में सौ से ज़्यादा लोग घायल हो गए और कई लोगों की हालत गंभीर है

गृह राज्यमंत्री श्रीप्रकाश जयसवाल का कहना था, "ये बम गंभीर किस्म के थे। हो सकता है कि इनमें आरडीएक्स का इस्तेमाल भी हुआ हो। यह एक बहुत बड़ी साज़िश है। इस घटना का मुँह तोड़ जवाब देने में राज्य और केंद्र सरकार सक्षम हैं। दिल्ली समेत सभी मेट्रोपॉलिटन शहरों में हाई एलर्ट जारी कर दिया गया है और सतर्कता बरती जा रही है।"

अधिकारियों ने आशंका जताई है कि हताहतों की संख्या बढ़ सकती है।

बीबीसी के साथ बात करते हुए राजस्थान के गृह सचिव वीएस सिंह ने बताया, "मृतकों की संख्या बढ़कर 60 हो गई है और सौ से ज़्यादा लोग घायल हैं। छह जगहों पर सात धमाके हुए हैं। राज्य में रेपिड एक्शन फ़ोर्स की दो कंपनियाँ पहुँच गई हैं और राज्य ने केंद्र से चार अतिरिक्त कंपनियों की माँग की है।"

पुलिस महानिदेशक गिल ने इस बात को माना की किसी एक जगह पर एक से ज़्यादा धमाके हुए। उनके अनुसार शहर में कुछ जीवित बम भी मिले हैं जिन्हें बम निरोधक दस्ते निष्क्रिय करने में लगे हुए हैं।

हरकत में आया प्रशासन

धमाकों के फौरन बाद पुलिस ने इन इलाक़ों को घेर लिया और जाँच शुरु कर दी गई। जयपुर के आईजी पंकज सिंह ने बीबीसी को बताया कि ये सभी विस्फोट मध्यम दर्जे के थे।


मृतकों की संख्या बढ़कर 60 हो गई है और सौ से ज़्यादा लोग घायल हैं। छह जगहों पर सात धमाके हुए हैं। राज्य में रेपिड एक्शन फ़ोर्स की दो कंपनियाँ पहुँच गई हैं और राज्य ने केंद्र से चार अतिरिक्त कंपनियों की माँग की है।

गृह सचिव, राजस्थान

टेलीविज़न चैनलों पर दिखाई गई तस्वीरों में विस्फोट से क्षतिग्रस्त रिक्शा और साइकिलें बिखरी हुई दिखाई दी हैं। चारो और ख़ून बिखरा हुआ दिखाया गया है।

राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया विस्फोट के समय जोधपुर की यात्रा पर थीं और ख़बर मिलने के बाद वे जयपुर लौट गईं।

उन्होंने विस्फोट और हालात के संबंध में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और गृहमंत्री शिवराज पाटिल से बात की है। मुख्यमंत्री ने इन विस्फोटों को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है।

जयपुर में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में विस्फोट हुए हैं। इससे पहले पिछले साल अक्तूबर में राजस्थान के अजमेर में विस्फोट हुए थे।

Tuesday, May 13, 2008

चीन: भूकंप में मृतकों की संख्या 10 हज़ार तक पहुँची

चीन में सोमवार को आए भूकंप में लगभग 10 हज़ार लोग मारे गए हैं और कई अन्य घायल हुए हैं। सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक मिंयांज़ु शहर में ही कम से कम दस हज़ार लोग मलबे में दबे हुए हैं।

इसे चीन में पिछले 30 वर्षों आया सबसे भीषण भूकंप बताया जा रहा है। भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 7.8 मापी गई।

माना जा रहा है कि भूकंप के कारण दक्षिण-पश्चिमी चीन में स्थित सिचुआन प्रांत में सैकड़ों लोग अब भी इमारतों के मलबे के नीचे दबे हुए हैं।

उस क्षेत्र में मौजूद बीबीसी संवाददाता का कहना है कि सोमवार की रात वहाँ भीषण वर्षा हुई है और हज़ारों लोगों को आपात स्थिति में बनाए गए अस्थायी शिविरों में रात गुज़ारनी पड़ी है।

भीषण तबाही और दिक्कतें

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए चीन सरकार ने बड़े पैमाने पर राहत कार्य शुरू कर दिए हैं। भूकंप प्रभावित इलाके में सेना भेजी जा रही है।

हालांकि प्रभावित लोगों तक राहत पहुँचा पाने में सरकार को बहुत दिक्कत पेश आ रही है क्योंकि कई जगहों पर सड़कें ध्वस्त हो गई हैं।


बचाव कार्य
हज़ारों की संख्या में या तो लोग घायल हैं या फिर अभी भी फंसे हुए हैं

भूकंप कितना भीषण था इसका अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि दक्षिण-पूर्वी एशिया के कई हिस्सों में इसके झटके महसूस किए गए।

भूकंप के केंद्र रहे क्षेत्र में तो 80 प्रतिशत तक इमारतें ध्वस्त हो गई हैं। इनमें स्कूल, अस्पताल और रासायनिक कारखाने भी हैं।

एक स्कूल की तीन मंज़िला इमारत पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है जिसमें भूकंप के वक्त नौ सौ बच्चे मौजूद थे। बताया जा रहा है कि इन बच्चों में से 50 के मरने की पुष्टि हो गई है।

चीन की सरकारी समाचार एजेंसी के मुताबिक तीन मंज़ली इमारत के मलबे में दबे बच्चे बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे और बच्चों के माता-पिता बेसहारा खड़े देख रहे थे।

दो लड़कियों ने बताया कि वे इसलिए बच पाईं क्योंकि वे बाकी बच्चों से तेज़ भाग रही थीं।

माना जा रहा है कि बेचुआन प्रांत में करीब दस हज़ार लोग घायल हुए हैं। भीषण भूकंप की वजह से दूरसंचार व्यवस्था बुरी तरह बाधित हुई है।

मदद की अपील

चीन के राष्ट्रपति हू जिंताओ ने भूकंप से प्रभावित लोगों की हर संभव मदद करने की अपील की है।

इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 7.8 से अधिक मापी गई और इसके झटके बीजिंग और थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक तक महसूस किए गए।

बीबीसी संवाददाता के मुताबिक भूकंप प्रभावित इलाक़े से काफ़ी तेज़ी से जानकारी मिल रही है और किसी भी आपदा को लेकर चीनी सरकारी मीडिया की ये सबसे तेज़ प्रतिक्रिया थी।

चीन में भूकंप आना आम बात है। मार्च में ही जिंगजियांग प्रांत में 7.2 तीव्रता वाला भूकंप आया था।

Monday, May 12, 2008

जजों की बहाली का मसला नहीं सुलझा

पाकिस्तान के नेताओं के बीच जजों की बहाली पर कोई सहमति नहीं हो पाई है।

पार्टी नेताओं का कहना है कि पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) और मुस्लिम लीग (नवाज़) के नेताओं की लंदन में हुई बातचीत में कोई समझौता नहीं हो पाया।

ग़ौरतलब है कि दुबई में पीपीपी नेता आसिफ़ अली ज़रदारी और नवाज़ शरीफ़ के बीच हुई बातचीत में जजों की बहाली के लिए सोमवार की समयसीमा निर्धारित की गई थी।

जानकारों का कहना है कि इस मुद्दे के न सुलझने से गठबंधन सरकार पर संकट आ सकता है।


हमारी कोशिश होगी कि गठबंधन न टूटे, इसके नुक़सान से हम वाकिफ़ हैं लेकिन जजों को बहाल न करने से होनेवाला नुक़सान कहीं ज्यादा बड़ा है।

नवाज़ शरीफ़

पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) के नेताओं का कहना है कि पार्ची ने सोमवार को बैठक हो बुलाई ही है जिसमें गठबंधन में बने रहने के बारे में फ़ैसला किया जाएगा।

पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की सहयोगी मुस्लिम लीग (नवाज़) के प्रमुख नवाज़ शरीफ जजों की बहाली पर अड़े हुए हैं।

नवाज़ शरीफ़ ने बीबीसी से बातचीत में कहा,'' हमारी कोशिश होगी कि गठबंधन न टूटे, इसके नुक़सान से हम वाकिफ़ हैं लेकिन जजों को बहाल न करने से होनेवाला नुक़सान कहीं ज्यादा बड़ा है।''

उनका कहना था,'' पूरी कौम की निगाहें हमारे ऊपर लगीं हैं और ये हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम उनकी उम्मीदों को पूरा करे।''

सहमति


इफ़्तिख़ार मोहम्मद चौधरी
मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिख़ार चौधरी भी हटा दिए गए थे

नवाज़ शरीफ़ का कहना था कि यदि हम बाक़ी मुद्दों पर तो आगे बढ़ते हैं और इसको छोड़ देते हैं तो जनता में एक बैचेनी रहेगी।

ग़ौरतलब है कि पाकिस्तान में गठबंधन सरकार के गठन के दौरान तय हुआ था कि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने जिन जजों को बर्ख़ास्त किया था, उनको अप्रैल के अंत तक बहाल कर दिया जाएगा।

इसके बाद दुबई में आसिफ़ ज़रदारी और नवाज़ शरीफ़ के बीत इसको लेकर फिर बातचीत हुई थी और 12 मई तक जजों की बहाली पर सहमति हुई थी।

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने नवंबर, 2007 में लगभग 60 जजों को निलंबित कर दिया था। इसमें मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिख़ार चौधरी भी शामिल

Saturday, May 10, 2008

कर्नाटक में पहले चरण का मतदान शुरु

कर्नाटक में विधानसभा चुनाव के लिए पहले चरण का मतदान आज कड़ी सुरक्षा के बीच हो रहा है। मुख्य मुक़ाबला भाजपा, जेडीएस और कांग्रेस के बीच है।

पहले चरण में दक्षिण कर्नाटक के 11 ज़िले की 89 सीटों के लिए लगभग एक करोड़ 73 लाख मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। कर्नाटक में विधानसभा की कुल 224 सीटें हैं।

शांतिपूर्वक मतदान संपन्न कराने के लिए चुनाव आयोग ने लगभग 60 हज़ार सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया है।

इनके अलावा 18 हज़ार मतदान केंद्रों पर अधिकारियों का उड़न दस्ता लगातार निगाह रख रहा है।

पहले चरण में 953 उम्मीदवारों का भाग्य दाँव पर है जिनमें 440 निर्दलीय उम्मीदवार है।

दूसरे और तीसरे चरण का मतदान 16 और 22 मई को होगा। मतगणना 25 मई को होगी।

मैसूर ज़िले में कांग्रेस जनाधार वापस लेने की कोशिश कर रही है। पिछले चुनाव में पार्टी ने यहाँ की 24 सीटों पर सफलता हासिल की थी।

लेकिन जनता दल सेक्युलर (जेडीएस) ने 34 सीटों पर जीत हासिल कर सबको चौंका दिया था।

वोक्कालिगा बहुल इस इलाक़े में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) भी अपना पाँव पसारने की कोशिश कर रही है।

राजधानी बंगलौर की 28 विधानसभा सीटों पर हो रहे चुनाव में शहर की बुनियादी संरचना मुख्य मुद्दा है।

मुद्दा

कांग्रेस और भाजपा राज्य में स्थायी सरकार देने का वादा कर जनता से वोट माँग रही है।


भाजपा ने बीएस येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री का उम्मीदवार बनाया है

इन दोनों दलों के निशाने पर है जेडीएस। कांग्रेस और भाजपा का कहना है कि जिस तरह जेडीएस ने पिछले चुनाव के बाद गठबंधन धर्म का पालन नहीं किया उसे देखते हुए इस पार्टी पर भरोसा करना ठीक नहीं होगा।

जेडीएस के पास कोई स्टार प्रचारक भी नहीं बचा है। उसके नेता एमपी प्रकाश, जीटी देवगौड़ा, बीएन बच्चेगौड़ा और 58 विधायकों में से लगभग आधे ने पार्टी से किनारा कर लिया है।

इन नेताओं का आरोप है कि एचडी देवगौड़ा ने जेडीएस को पारिवारिक पार्टी बना कर रख दिया है।

अधिकतर सीटों पर बहुकोणीय संघर्ष होने की संभावना है लेकिन कई सीटों पर कांग्रेस-भाजपा और कांग्रेस-जेडीएस के बीच सीधा मुक़ाबला है।

मांड्या और हासन में कांग्रेस-जेडीएस के बीच सीधा मुक़ाबला है जबकि भाजपा अन्य क्षेत्रों में कांग्रेस को चुनौती देती नज़र आ रही है।

पहले चरण में जिन नेताओं के भाग्य का फ़ैसला होना है उनमें एचडी देवगौड़ा के दोनों बेटे एचडी कुमारस्वामी और एचडी रेवन्ना शामिल हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री कुमारस्वामी रामनगरम सीटे से पिछला चुनाव जीते थे लेकिन इस बार उनका मुक़ाबला रामकृष्ण हेगड़े की बेटी ममता निचानी से है।

भाजपा ने बीएस येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री के उम्मीदवार के रुप में पेश किया है।

Friday, May 9, 2008

'मदद चाहिए, विदेशी सहायताकर्मी नहीं'

बर्मा ने स्पष्ट किया है कि वह तूफ़ान पीड़ितों के लिए अंतरराष्ट्रीय सहायता चाहता है लेकिन वो किसी भी सूरत में विदेशी सहायताकर्मियों को स्वीकार नहीं करेगा।

बर्मा के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है कि वह तूफ़ान से बुरी तरह प्रभावित इलाक़ों में ख़ुद राहत और सहायता पहुँचाने की कोशिश कर रहा है।

ये बयान संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून की उस टिप्पणी के बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि राहत पहुँचाने की व्यवस्था से वो निराश हैं।

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि सहायता के पीछे उसकी कोई राजनीतिक मंशा नहीं है।

इस बीच एक सरकारी अख़बार ने कहा है कि कतर से आए एक विमान में सवार विदेशी राहतकर्मियों और पत्रकारों को वापस लौटा दिया गया है।

संस्था का अनुमान है कि बर्मा के तूफ़ान पीड़ित इलाक़ो में कोई 15 लाख लोग राहत पहुँचने का इंतज़ार कर रहे हैं।

बर्मा के तूफ़ान प्रभावित इलाक़े

उल्लेखनीय है कि पिछले शनिवार आए भीषण तूफ़ान में 22 हज़ार से अधिक लोग मारे गए थे और 41 हज़ार से अधिक लोग लापता बताए गए थे।

बर्मा में अमरीकी राजनयिकों का कहना है कि इस तूफ़ान में एक लाख से अधिक लोगों के मारे जाने की आशंका है।

निराशा

आमतौर पर सहायता संस्थाओं को यह अंदाज़ा हो जाता है कि नुकसान किस पैमाने पर हुआ है।

संयुक्त राष्ट्र यह काम अब तक कर चुका होता, लेकिन उसके चार विशेषज्ञों को अब जाकर बर्मा में प्रवेश का वीज़ा मिला है। ये लोग रविवार से थाईलैंड में इंतज़ार कर रहे थे।


गोदामों में सामग्री नहीं बची है और मानव संसाधन की भारी कमी है. हमें आशा है कि बर्मा की सरकार समझ जाएगी कि और लोगों को बर्मा जाने की अनुमति देना कितना ज़रूरी है

एलिज़ाबेथ बायर्स, संयुक्त राष्ट्र की प्रवक्ता

संयुक्त राष्ट्र की प्रवक्ता ऐलिज़ाबेथ बायर्स ने इसका स्वागत किया है, " इससे लगता है कि बर्मा अपने दरवाज़े खोल रहा है लेकिन बहुत धीरे धीरे।"

उन्होंने कहा, "गोदामों में सामग्री नहीं बची है और मानव संसाधन की भारी कमी है। हमें आशा है कि बर्मा की सरकार समझ जाएगी कि और लोगों को बर्मा जाने की अनुमति देना कितना ज़रूरी है।"

लेकिन संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के प्रमुख जॉन होम्स राहत सहायता को लेकर बर्मा के रवैये से नाराज़ हैं।

वे कहते हैं, "बर्मा को जितनी सहायता की ज़रुरत है उसकी तुलना में उसका रवैया वैसा नहीं है।"

नवीनतम अनुमान के अनुसार मरने वालों की संख्या एक लाख हो सकती है।

Thursday, May 8, 2008

'तूफ़ान में एक लाख से ज़्यादा मारे गए'

बर्मा यानी म्याँमार में अमरीकी राजनयिकों का कहना है कि तूफ़ान से मारे जाने वालों की संख्या एक लाख से ज़्यादा हो सकती है।

दूसरी ओर संयुक्त राष्ट्र ने राहत पर चिंता जताते हुए कहा है कि सहायता लोगों तक समय पर नहीं पहुँच पा रही है।

बर्मा में इस शनिवार को लगभग 200 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ़्तार से समुद्री तूफ़ान नरगिस आया था जिसने इरावॉडी नदी के मुहाने से जुड़े इलाक़े में भारी तबाही मचाई थी।

सरकार का कहना है कि तूफ़ान से 22 हज़ार से ज़्यादा लोग मारे गए हैं और 41 हज़ार से ज़्यादा लोग लापता हैं।

बर्मा में अमरीका के दूतावास की प्रमुख शारी विलारोसा का कहना है कि प्रभावित इलाक़ों में 95 प्रतिशत इमारतों को नुकसान पहुँचा है और स्थिति बेहद ख़राब है।

संयुक्त राष्ट्र की चिंता

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून ने कहा है कि बर्मा को हर प्रकार की सहायता देश में आने देना चाहिए। लेकिन जानकार कहते हैं कि बर्मा को ये बात पसंद नहीं है कि महीनों तक विदेशी और ख़ासकर अमरीकी उसके इलाक़े में काम करें क्योंकि प्रभावित क्षेत्रों में उसके और चीन के कुछ सैनिक अड्डे भी हैं।


तूफान से प्रभावित लोग
तूफ़ान प्रभावी क्षेत्रों में अभी भी कई वस्तुओं की कमी है

इस बीच, भारत और थायलैंड और कुछ सहायता एजेंसियों की मदद बर्मा तक पहुँचने लगी है लेकिन ये आपदा जितनी बड़ी है उसके मुकाबले सहायता बहुत कम है।

बर्मा के सैन्य शासन ने तूफ़ान प्रभावित लोगों की मदद के लिए संयुक्त राष्ट्र को राहत सामग्री लिए एक विमान को आने की अनुमति दी है।

इस विमान में करीब 25 टन राहत सामग्री है। बर्मा के पड़ोसी और सहयोगी देशों से भी राहत सामग्री आना शुरू हो गई है।

हालांकि ये आशंका अभी भी जताई जा रही है कि बाहरी देशों को बर्मा आने की अनुमति मिलने में हो रही देरी से राहत कार्यों में बाधा आ रही है।

बीबीसी संवाददाता पॉल डानाहर का कहना है कि 1989 में लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनों के बाद से ये बर्मा के सैन्य शासकों के लिए ये सबसे बड़ी चुनौती है।

संयुक्त राष्ट्र आपदा राहत एजेंसी (ओसीएचए) के प्रवक्ता रिचर्ड हॉरसी के मुताबिक सरकार ने बर्मा के विदेश मंत्री को नियुक्त किया है कि वो राहत एजेंसियों के वीज़ा आवेदन पत्रों का कामकाज देखें।

संयुक्त राष्ट्र के विश्व खाद्य कार्यक्रम ने बर्मा के शहर रंगून में खाने-पीने की सामग्री बाँटनी शुरु कर दी है। भारत ने भी दो जहाज़ भेजे हैं।

चीन की सरकारी एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक चीन से 66 टन राहत सामग्री बर्मा पहुँच गई है।

निंदा

अमरीका की विदेशमंत्री कॉन्डोलीसा राइस का कहना है कि बर्मा को ज़रूरतमंदों की सहायता के मामले को राजनीतिक मामला नहीं बनाना चाहिए क्योंकि बर्मा इस समय एक मानवीय त्रासदी को झेल रहा है।


तूफ़ान से प्रभावित लोग
तूफ़ान से प्रभावित लाखों लोगों के घर बरबाद हो गए हैं

कॉन्डोलीसा राइस के बाद फ़्राँस ने भी कहा है कि वह काफ़ी सहायता दे सकता है बशर्ते बर्मा सहयोग करे। लेकिन धीमी प्रगति देखकर फ़्राँस के विदेश मंत्री बर्नार्ड कुश्नेर ने तो यहाँ तक कह डाला है कि संयुक्त राष्ट्र में एक प्रस्ताव पारित कर बर्मा सरकार को ज़बर्दस्ती सहायता लेने पर मजबूर किया जाना चाहिए।

संयुक्त राष्ट्र में फ़्राँस के राजदूत ज़ाँ मारी रिपेर कहते हैं, ‘हमें कुछ करना पड़ेगा। अगर हमने तुरंत क़दम नहीं उठाए तो और लोगों की जानें जाएँगी जिन्हें बचाया जा सकता है और एक बार महामारी फैलने लगी तो उसके भयानक परिणाम हो सकते हैं।’

फ़्राँस का इशारा इस ओर है कि तूफ़ान के बाद यहाँ तहाँ इरावॉडी नदी के मुहाने के कई इलाक़ों में शव पड़े हुए हैं, मवेशियों की पानी में डूबकर मरने के कारण फूली हुई लाशें पड़ी हुई हैं और जैसे जैसे पानी हटेगा, महामारी फैलने की आशंका बढ़ने लगेगी।

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री केविन रुड ने कहा, "राजनीति को भूल जाएँ। सिर्फ़ लोगों तक राहत पहुँचाने की ओर काम करें।"

मानवीय त्रासदी

पुरानी राजधानी रंगून या यंगून के एक निवासी ने बताया कि ‘हमने कई शवों को रंगून में ह्लैंग नदी में तैरते देखा। शव फूले हुए थे, सड़ रहे थे, उनकी तरफ़ देखते तक नहीं बन रहा था। हमने तो नहीं देखा कि किसी ने इस शवों को हटाने की कोशिश की हो।’

कई प्रभावित क्षेत्रों में 95 फ़ीसदी घर टूट चुके हैं, लोग पानी के बीच टूटे-फूटे घरों में या पेड़ों के नीचे रहने को मजबूर हैं, उन्हें खाने को नहीं मिल रहा, पीने को पानी नहीं मिल रहा। कुछ के रिश्तेदार उनके सामने पानी में बह गए तो किसी के घर पर पेड़ गिरने से लोग मारे गए।

मानसिक और शारीरिक रूप से कमज़ोर इन लोगों को महामारी का शिकार बनते देर नहीं लगेगी इसीलिए समय रहते क़दम उठाने की ज़रूरत है।

Wednesday, May 7, 2008

बर्मा की सहायता पर हो रही है राजनीति

बर्मा के सरकारी रेडियो और टीवी पर रहे समाचारों में मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. बर्मा के लिए यह किसी राष्ट्रीय आपदा से कम नहीं है.

बर्मा के सरकारी मीडिया के अनुसार शनिवार को आए तूफ़ान में 22 हज़ार लोग मारे गए हैं और 60 हज़ार अन्य लापता हैं. उधर रंगून में संयुक्त राष्ट्र के राहतकार्य संयोजक ने आरोप लगाया है कि सरकार कुछ प्रभावित इलाक़ो में राहतकर्मियों को जाने देने से हिचकिचा रही है.

एक अनुमान के मुताबिक बर्मा की जनसंख्या पाँच करोड़ के आसपास है और इनमें से आधे इलाके तूफ़ान से प्रभावित हैं.

प्रभावित लोग

समुद्री तट के पास बसे शहर लापुटा शहर के डॉक्टर आये क्यू ने बीबीसी की बर्मीज़ सेवा को बताया कि कम से कम आधा शहर पानी की डूब में गया है

जो लोग इलाज के लिए लाए जा रहे थे मैंने उनसे पूछा कि कितने लोग ज़िंदा बचे हैं. उनका कहना था कि सिर्फ़ दो-तीन सौ लोग जिंदा बच पाए हैं. मैने पूछा, तुम्हारे इलाक़े में कितने लोग थे? पूछने पर उनका कहना था 5,000 लोग.


बर्मी में प्रभावित लोग
एक अनुमान के मुताबिक बर्मा की जनसंख्या पाँच करोड़ के आसपास है और इनमें से आधे इलाके तूफ़ान से प्रभावित हैं

पहले तो तेज़ हवाओं के साथ ऊँची लहरें आईं. कुछ तो 15 से 20 फ़ीट ऊँची थीं. फिर कई घर तेज़ हवाओं से टूटे. जो लोग ज़िंदा बच पाए, उनमें से कई लोग किसी तरह पेड़ों से चिपके रहे. लेकिन एक तरफ़ पानी का तेज़ बहाव था और दूसरी तरफ़ तेज़ आँधी. जो लोग बच पाए, वो काफ़ी बुरी हालत में हमारे पास आए.’

प्रभावित इलाक़ों में से कुछ में सहायता एजेंसियाँ पहुँचने लगी हैं. बर्मा में रेड क्रॉस के 18,000 स्थानीय सहायताकर्मी हैं.

रेडक्रॉस के जेनेवा स्थित मुख्यालय में बर्मा को भेजी जा रही सहायता का काम देख रही हैं क्रिस्टीन साउथ कहती हैं किदक्षिणी बर्मा के शहर लापुता के बारे में जो हमें जानकारी मिल रही है उसके मुताबिक वहाँ 95 फ़ीसदी घरों को नुकसान पहुँचा है. इनमें से 70 फ़ीसदी मकानों को गंभीर नुकसान पहुँचा है. दवाइयाँ, बेंडेज, पीने का पानी, ऐसी चीज़ों की वहाँ सख़्त ज़रूरत है.’

इरावॉडी नदी के मुहाने को बर्मा का धान का कटोरा कहा जाता था लेकिन समुद्री तूफ़ान नर्गिस से सबसे ज़्यादा प्रभावित यही इलाक़ा है.

इससे ये स्पष्ट हो जाता है कि बर्मा में हालात किस कदर ख़राब हैं.

जो लोग बच गए हैं उन्हें सहायता की जल्द ज़रूरत है. ये त्रासदी इतने बड़े स्तर पर है कि बर्मा की सैनिक सरकार को भी मजबूरन संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाओं से सहायता लेना पड़ रहा है. बर्मा की सैनिक सरकार इसकी इजाज़त कतई नहीं देना चाह रही थी.

पहली सहायता संभवत: थायलैंड से पहुँची. भारत की सहायता भी सबसे शुरुआती मदद करने वालों में शामिल है.

सहायता की राजनीति

सहायता की राजनीति भी दिलचस्प है. अमरीका ने पहले ढाई लाख डॉलर की सहायता करने की घोषणा की. इसके मुकाबले चीन की सहायता चार गुना ज़्यादा थी.

अपनी दूसरी घोषणा में अमरीका ने कहा कि वह तीस लाख डॉलर सहायता भेजने को तैयार है बशर्ते कि बर्मा सरकार सहयोग करे.


बर्मा में पहुँचती सहायता
अमरीका ने पहले ढाई लाख डॉलर की सहायता करने की घोषणा की. इसके मुकाबले चीन की सहायता चार गुना ज़्यादा थी

अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश कहते हैं, ‘हम अमरीका की नौसेना को मदद के लिए भेज सकते हैं. नौसेना लापता लोगों को ढूँढ सकती है, वहाँ की स्थिति को सामान्य बनाने में मदद कर सकती है. लेकिन ऐसा करने के लिए बर्मा की सैनिक सरकार को हमारी आपदा सहायता टीमों को वहाँ जाने की इजाज़त देनी होगी.’

लेकिन अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश जो चाहते हैं, बर्मा की सरकार वह नहीं होने देना चाहती. जानकार कहते हैं कि अमरीका ने बर्मा को अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अलग-थलग करने के लगातार प्रयास किये हैं और बर्मा को अमरीका पर थोड़ा भी विश्वास नहीं है.

बीबीसी बर्मीज़ सेवा के संवाददाता थू यीएन कहते हैं, बर्मा सरकार को डर है कि जो अमरीकी दल सहायता का अंदाज़ा लगाने के नाम पर आएँगे, वो बर्मा और चीन के सैनिक अड्डों की गोपनीय जानकारी भी इकट्ठा कर सकते हैं.

थू यीएन कहते हैं, ‘बर्मा की सरकार नहीं चाहती कि विदेशी, ख़ासतौर पर अमरीकी लोग इन इलाक़ों में जाएँ क्योंकि प्रभावित इलाक़ों में हायेन्जी आयलैंड्स जैसे इलाक़े भी शामिल हैं जहाँ बर्मा और चीन के नौसैनिक अड्डे हैं.’

आँग सान सू को सम्मान

अमरीका के राष्ट्रपति ने मंगलवार को आँग सान सू की को कॉन्ग्रेशनल गोल्ड मेडल से सम्मानित किया.


बर्मा में परेशान लोग
बर्मा में खाद्य सामान और पीने के पानी की कमी है

इसका मकसद बर्मा को ये बताना है कि अमरीका वहाँ लोकतांत्रिक शक्तियों को मज़बूत होते देखना चाहता है. लेकिन बर्मा के पत्रकारों का कहना है कि अमरीका के इस कदम पर बर्मा के लोग ज़्यादा ध्यान नहीं दे रहे हैं क्योंकि आधी जनसंख्या की जद्दोजेहद किसी तरह ज़िंदा रहने की है. इस तरह की सांकेतिक राजनीति से उनका दिमाग कोसों दूर है.

बर्मा के पत्रकारों का कहना है कि भारत के मौसम विशेषज्ञों ने शनिवार को आए समुद्री तूफ़ान नर्गिस के बर्मा तक जाने की जानकारी 48 घंटे पहले ही दे दी थी.

बर्मा के रेडियो और टीवी ने इसे जारी भी किया था लेकिन तो सरकार ने इससे निपटने के व्यापक प्रबंध किए और ही लोगों को इन ख़बरों से महसूस हुआ कि ये कोई बड़ी आपदा है जो आधे बर्मा को अपनी चपेट में ले लेगी.

बहरहाल, अब सारा ध्यान तूफ़ान से बचे लोगों को मदद पहुँचाने की ओर लगाने की कोशिश है. लाखों लोग बेघर हैं, कई जगहों पर खाना और पीने का पानी नहीं मिल रहा है, पेट्रोल, डीज़ल और केरोसीन की भारी कमी है और अधिकतर प्रभावित इलाक़ों में बिजली नहीं है.

Tuesday, May 6, 2008

तूफ़ान में मृतकों की संख्या 15 हज़ार हुई

बर्मा में शनिवार को आए तूफ़ान में मरनेवालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। सरकारी टीवी का कहना है कि मरनेवालों की संख्या 15 हज़ार तक पहुँच गई है।

बर्मा के विदेश मंत्री न्यान विन का कहना है कि बर्मा के मुख्य शहर रंगून से लगभग सौ किलोमीटर दूर स्थित शहर बोगाले में ही लगभग 10 हज़ार लोग मारे गए हैं।

उनका कहना है कि अधिकारी अब भी नुक़सान का अनुमान लगा रहे हैं और हताहतों की संख्या और बढ़ सकती है।
इधर अंतरराष्ट्रीय सहायता एजेंसियाँ बर्मा में व्यापक सहायता कार्यक्रम की तैयारी कर रही हैं। ख़बरें हैं कि वहाँ हज़ारों लोग बिना साफ़ पानी और आश्रय के रह हैं।

इधर बर्मा के नेताओं ने घोषणा की है कि वो बाहरी सहायता स्वीकार करने को तैयार है।

अब तक बर्मा के सैन्य शासक सहायता एजेंसियों को लेकर संदेहास्पद रहे हैं और उनकी सीमित गतिविधियों की ही अनुमति दी है।

भारत ने पोर्ट ब्लेयर से दो जहाज़ भेजने का फ़ैसला किया है जिसमें खाना, टेंट, कंबल, कपड़े और दवाइयाँ होंगी।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने कहा है कि वो हर संभव मानवीय सहायता मुहैया कराने की कोशिश करेंगे।

अमरीका, यूरोपीय संघ और जापान ने आपात सहायता देने की पेशकश की है।

तूफ़ान से तबाही

कई आलोचकों का आरोप है कि बर्मा में आपदा को लेकर अधिकारियों की प्रतिक्रिया धीमी रही है और लोगों को तूफ़ान के बारे में आगाह नहीं किया गया था।

सोमवार को शुरुआती रिपोर्ट में कहा गया था कि 351 लोगों की मौत हुई है।

शनिवार को बर्मा में 'नर्गिस' नाम का तूफ़ान आया था जिसकी तीव्रता 190 मीटर प्रति घंटा थी।


बर्मा
तूफ़ान ने तटीय इलाक़ों में व्यापक तबाही मचाई है

'नर्गिस' ने इरावदी, रंगून, बागो, कारेन और मोन क्षेत्र में भीषण तबाही मचाई है।

इस तूफ़ान में हज़ारों घरों को या तो क्षति पहुंची है या फिर वे ध्वस्त हो गए हैं।

बर्मा में पाँच इलाक़ों को आपदाग्रस्त क्षेत्र घोषित कर दिया गया है और राहत और बचाव कार्यों में सेना और पुलिस को लगाया गया है।

रंगून से एक नागरिक ने बीबीसी को बताया कि तूफ़ान के बाद से ही बिजली की आपूर्ति ठप पड़ी है और अभी तक पीने के पानी भी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।

टेलीफ़ोन लाइनें ठप्प हैं। सड़कों पर कई पेड़ गिरे हुए हैं इसलिए यातायात बुरी तरह से प्रभावित हुआ है।

सरकारी टेलीविज़न के मुताबिक़ इरावदी के लबूटा शहर में 75 फ़ीसदी घरों को नुक़सान पहुँचा है। अनेक घरों की छतें उड़ गईं।

संवाददाताओं का कहना है कि इस चक्रवात के कारण जो नुक़सान हुआ है उसका सही अनुमान लगा पाने में अभी कई दिनों का वक्त लग सकता है।

रंगून में इंटरनेट और टेलीफ़ोन सेवा ठप हो जाने के कारण तूफ़ान से हुई तबाही की सही तस्वीर सामने नहीं आ पा रही है।

आधिकारिक मीडिया के अनुसार रंगून बंदरगाह पर चार मालवाहक पोत डूब गए हैं और कई लोग मारे गए हैं।

Monday, May 5, 2008

सोमनाथ के ख़िलाफ़ एनडीए के कड़े तेवर

भारत में विपक्षी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) लोकसभा की कार्यवाही में बाधा डालने के मुद्दे पर 32 सांसदों के नाम विशेषाधिकार समिति को भेजने के ख़िलाफ़ कड़े विकल्पों पर विचार कर रहा है।

पिछले हफ़्ते बढ़ती महँगाई के मुद्दे पर लोकसभा में ज़बर्दस्त हंगामा हुआ था और ये सांसद सरकार के ख़िलाफ़ नारे लगाते हुए लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी के आसन के पास पहुँच गए थे।

इससे आहत होकर लोकसभा अध्यक्ष ने इन सांसदों के आचरण पर कड़ी टिप्पणी की और इनके ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई हो या नहीं ये तय करने के लिए मामला विशेषाधिकार समिति को भेजने का फ़ैसला किया।

सोमनाथ चटर्जी के इस क़दम से एनडीए के नेता नाराज़ हैं और उन्होंने सोमवार सुबह अगली रणनीति बनाने के लिए एक बैठक बुलाई है।


लोकसभा अध्यक्ष अगर इस तरह से सदन चलाने का काम करेंगे तो ये संभव नहीं है। वो रोज़ कुछ न कुछ बोलते रहते हैं। उनकी रनिंग कमेंट्री चालू रहती है। ऐसा नहीं चलेगा।

शरद यादव

संभावना है कि इस मुद्दे की गूँज अब लोकसभा में सुनाई देगी और इस मामले पर फिर हंगामा हो सकता है।

एनडीए के मुख्य घटक दल भाजपा की प्रवक्ता सुषमा स्वराज ने बीबीसी संवाददाता मोहन लाल शर्मा से कहा, "हमनें सोमवार सुबह बैठक बुलाई है जिसमें इस विषय को रखा जाएगा। इसमें विपक्षी गठबंधन के सभी दल शामिल होंगे।"

जनता दल (युनाईटेड) के अध्यक्ष शरद यादव का कहना था, "लोकसभा अध्यक्ष अगर इस तरह से सदन चलाने का काम करेंगे तो ये संभव नहीं है। वो रोज़ कुछ न कुछ बोलते रहते हैं। उनकी रनिंग कमेंट्री चालू रहती है। ऐसा नहीं चलेगा।"

शरद यादव का कहना है कि सोमनाथ चटर्जी पहले भी विवादास्पद टिप्पणी करते रहे हैं।

उनका कहना था, "ये ज़रूर है कि समय के साथ सदन चलाने का काम कठिन हो गया है लेकिन इस तरह किसी समस्या का समाधान करने से बात नहीं बनेगी।"

ग़ौरतलब है कि इन 32 सांसदों में से अधिकतर विपक्षी दलों के हैं और सबसे ज़्यादा सांसद भाजपा के हैं।

हालाँकि सरकार को बाहर से समर्थन दे रही मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के नेता मोहम्मद सलीम कहते हैं, "ये लोकसभा अध्यक्ष का अधिकार है कि वो किसी सदस्य के ख़िलाफ़ कार्रवाई कर सकते हैं। अगर सांसद ख़ुद कार्यवाही में बाधा डालते हैं तो विशेषाधिकार समिति कोई फ़ैसला कर सकती है।"

लोकसभा अध्यक्ष के इस क़दम का समाजवादी पार्टी ने भी विरोध किया है।

Saturday, May 3, 2008

सरबजीत की फाँसी पर रोक लगी

पाकिस्तान सरकार ने भारतीय नागरिक सरबजीत सिंह की फाँसी पर अगले आदेश तक के लिए रोक लगा दी है। लाहौर जेल के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी है।

पिछले दिनों सरबजीत के परिजन उनसे मिलने पाकिस्तान गए थे। दोनों देशों के कई मानवाधिकार संगठन और नेता सरबजीत की फाँसी की सज़ा माफ़ करने की माँग करते आए हैं।

बुधवार को भारतीय विदेश सचिव शिवशंकर मेनन ने दिल्ली में पत्रकारों से कहा था, "हमें उम्मीद है कि पाकिस्तान सरकार सरबजीत सिंह की सज़ा माफ़ करे देगी और वो अपने घर वापस लौट सकेंगे।"

सरबजीत सिंह पर जासूसी और 1990 में कई बम धमाके करवाने का आरोप है जिसमें 14 लोग मारे गए थे।

उन पर लाहौर की एक अदालत में मुक़दमा चला और 1991 में उनको मौत की सज़ा सुना दी गई।

निचली अदालत की ये सज़ा हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी बहाल रखी।

सज़ा पर रोक

लाहौर की कोट लखपत जेल के अधीक्षक मलिक मुबाशिर अहमद ख़ान ने गृह मंत्रालय से मिले आदेश का हवाला देते हुए कहा, "भारतीय नागरिक सरबजीत सिंह की फांसी पर अगले आदेश तक रोक लगाई जाती है।"

इससे पूर्व दिल्ली में पाकिस्तान के सूचना और प्रसारण मंत्री शेरी रहमान ने कहा कि सरबजीत की दया याचिका का मसला विचाराधीन है और वो इस बारे में अपनी ओर से हर संभव कोशिश करेंगी।

शेरी रहमान दिवंगत वरिष्ठ गांधीवादी निर्मला देशपांडे के अंतिम संस्कार में शामिल होने दिल्ली आई थीं।

Friday, May 2, 2008

खाद्यान्न संकट के लिए सहायता की पेशकश

अमरीकी राष्ट्रपति बुश ने दुनियाभर में खाद्य पदार्थों की बढ़ती क़ीमतों के असर को कम करने के लिए 77 करोड़ डॉलर की खाद्य सहायता देने की पेशकश की है।

ग़ौरतलब है कि खाद्य पदार्थों की बढ़ती क़ीमतों के कारण दुनिया के कुछ हिस्सों में भुखमरी का ख़तरा पैदा हो गया है। साथ ही कुछ देशों में तो इसे लेकर दंगे की स्थिति पैदा हो गई थी।

राष्ट्रपति बुश ने कहा कि वो अमरीकी संसद से अनुरोध करेंगे कि वह इसको स्वीकृत कर दे।

दुनिया के कुछ ग़रीब देशों में बढ़ती क़ीमतों का मतलब है कि भोजन से वंचित हो जाना

राष्ट्रपति बुश

राष्ट्रपति बुश ने कहा,'' दुनिया के कुछ ग़रीब देशों में बढ़ती क़ीमतों का मतलब है कि भोजन से वंचित हो जाना।''

राष्ट्रपति बुश ने दो सप्ताह पहले आपातकालीन खाद्य सहायता के रूप में 22 करोड़ डॉलर की राशि जारी की थी और ये सहायता उसके अलावा होगी।

राष्ट्रपति बुश पर खाद्य पदार्थों और पेट्रोल की बढ़ती क़ीमतों के कारण घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर दोनों से दबाव पड़ रहा था कि वो सहायता के लिए आगे आएँ।

गंभीर स्थिति

ग़ौरतलब है कि हाल ही में विश्व खाद्य कार्यक्रम ने कहा था कि दानदाताओं को आगे आना चाहिए और अधिक सहयोग देना चाहिए ताकि लोगों की आवश्यकता भर आपूर्ति तय की जा सके।

खाद्यान्न का संकट
खाद्यान्न की कमी से स्थिति और गंभीर होने की आशंका है

संस्था की ओर से ख़ासतौर पर अफ़ग़ानिस्तान जैसे देशों का जिक्र किया गया था जहाँ बड़ी संख्या में लोग अपने लिए अब भी भोजन जुटा पाने में असमर्थ हैं और वहाँ से खाद्यान्न आपूर्ति की मांग और बढ़ती जा रही है।

इसके पहले संयुक्त राष्ट्र ने दुनिया भर में खाद्य पदार्थों की बढ़ती क़ीमतों की समस्या पर नज़र रखने के लिए एक कार्यदल के गठन करने का फ़ैसला किया था।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून का मानना है कि सबसे पहला काम ये है कि उन लाखों लोगों तक खाद्य सामग्री पहुंचाई जाए जिन्हें महंगाई के कारण भूखे रहना पड़ रहा है।

संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि खाद्य पदार्थों की बढ़ती क़ीमतों की वजह से लगभग दस करोड़ अतिरिक्त लोग भूख का सामना कर रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि खाद्यान्न के दामों में बढ़ती मांग और अन्य कारणों से 40 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी हुई है।

Thursday, May 1, 2008

अमरीका ने सातवीं बार ब्याज घटाया

अमरीकी केंद्रीय बैंक फ़ेडरल रिज़र्व ने ब्याज दरों में 0.25 फ़ीसदी की और कटौती की है और अब ब्याज दर दो फ़ीसदी हो गई है।

अमरीकी अर्थव्यवस्था को संभावित मंदी से बचाने के लिए फ़ेडरल रिज़र्व ने सितंबर से सातवीं बार ब्याज दरों में कटौती की है।

ग़ौरतलब है कि उस दौरान ब्याज दर 5.25 फ़ीसदी थी।

दूसरी ओर सरकारी आँकड़े जारी किए गए हैं जिनके अनुसार अमरीकी अर्थव्यवस्था की रफ़्तार इस साल की पहली तिमाही में 0.6 फ़ीसदी रही।

विशेषज्ञों का मानना है कि अर्थव्यवस्था की रफ़्तार उम्मीद से बेहतर है।

अमरीका के केंद्रीय बैंक की नीति नियामक समिति ने कहा है कि ब्याज की दरों में कटौती इस कारण की गई है ताकि उपभोक्ताओं को ज़्यादा ख़र्च करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।

अमरीकी डॉलर कमज़ोर हो रहा है और बढ़ते निर्यात के कारण अमरीका को ज़्यादा कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।

बचाव के उपाय

आंकड़ों के अनुसार उपभोक्ताओं ने ख़र्च तो किया है लेकिन 2001 के मुक़ाबले काफ़ी कम।

मकानों की गिरती क़ीमतों के कारण लोगों की निजी संपत्ति में कमी आई है।

दुनिया के दूसरे देशों के लिए अमरीका में की गई इस कटौती का सीधे तौर पर कम ही असर पड़ेगा।

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि अमरीकी केंद्रीय बैंक और सरकार को आर्थिक विकास की दर बढ़ाने में कामयाबी मिलनी चाहिए।

ये उन देशों के लिए काफ़ी महत्वपूर्ण है जो अमरीका को निर्यात करते हैं।

इसके अलावा केंद्रीय बैंक को भविष्य में बैंकिंग संबंधी समस्याओं की रोकथाम करनी होगी क्योंकि इससे दुनिया की अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर पड़ सकता है।