मलेशिया में प्रवासी भारतीयों और बहुसंख्यक मलाया समुदाय के बीच छिटपुट हिंसा के बाद नई सरकार के गठन के लिए वोट डाले जा रहे हैं।
प्रधानमंत्री अब्दुल्ला बदवई ने चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में टेलीविज़न के ज़रिए मलेशिया के सभी अल्पसंख्यकों से सत्तारूढ़ नेशनल फ़्रंट गठबंधन को वोट देने की अपील की।
मलेशिया में बहुसंख्यक मलय मुसलमानों के अलावा 35 फ़ीसदी आबादी अल्पसंख्यकों की है जिनमें चीन और भारतीय मूल के लोगों की संख्या काफी अधिक है।
संभावना जताई जा रही है कि इन चुनावों में सत्तारूढ़ गठबंधन ही जीत हासिल करेगी। हालाँकि पहले के मुक़ाबले उसकी सीटें कम हो सकती है।
हाल के दिनों में क़ानून का उल्लंघन करते हुए भारतीय समुदाय के लोगों ने सड़कों पर विरोध प्रदर्शन किया था और स्थानीय लोगों के साथ झड़पें भी हुईं।
प्रवासी भारतीयों के संगठन हिंड्राफ़ का कहना है कि मलेशिया में रह रहे भारतीयों के साथ सरकार भेद-भाव कर रही है।
अब्दुल्ला बदवई ने अल्पसंख्यकों से अपील की, "मैं नहीं चाहता कि ऐसी सरकार का गठन हो जिसमें किसी एक नस्ल या धर्म के लोग हों।"
इस चुनाव में जातीय तनाव और बढ़ती महँगाई बड़े मुद्दे हैं। पूर्व उप प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम की अगुआई वाली विपक्षी पार्टी इन मुद्दों को प्रमुखता से उठा रही है।
Saturday, March 8, 2008
प्रवासी भारतीयों से वोट देने की अपील
Friday, March 7, 2008
इसराइली स्कूल में आठ लोगों की हत्या
एक फ़लस्तीनी बंदूकधारी ने पश्चिमी यरुशलम स्थित एक यहूदी धार्मिक स्कूल में घुसकर कम से कम से आठ लोगों की हत्या कर दी है।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि एक बंदूकधारी रात के खाने के वक्त डाइनिंग हॉल में घुसा और उसने गोलीबारी शुरू कर दी।
उस समय वहाँ खासी भीड़भाड़ थी और लगभग 80 लोग जमा थे।
इस गोलीबारी में कम से कम 30 लोग घायल भी हुए हैं। ख़बरों के अनुसार गोली चलानेवाले को सुरक्षाबलों ने मार दिया है।
ये स्कूल यहूदी धार्मिक अध्ययन के लिए जाना जाता है और यहाँ 18 से 30 साल की उम्र के छात्र अध्ययन करते हैं।
हमले के बाद इसराइली सरकार पर जनता का जवाबी कार्रवाई के लिए भारी दबाव है। लेकिन वह कब और कैसे कार्रवाई करेगा, इसका अंदाज़ नहीं है।
घातक हमला
पिछले कुछ वर्षों में इसराइल पर ये सबसे गंभीर हमला माना जा रहा है। यरुशलम पर सन् 2007 से कोई हमला नहीं हुआ था।
धार्मिक स्कूल पर हमला
पिछले कुछ वर्षों में इसराइल पर ये सबसे गंभीर हमला माना जा रहा है
इस हमले की ख़बर के बाद ग़ज़ा में हवाई फ़ायर कर खुशी मनाई गई।
लेबनान के हिज़बुल्ला नियंत्रित टीवी चैनल ने ख़बर दी है कि इस गोलीबारी के पीछे 'जलील फ्रीडम बटालियंस' नामक संगठन है।
इधर फ़लस्तीनी चरमपंथी संगठन हमास ने इस हमले की प्रशंसा की है लेकिन इसकी ज़िम्मेदारी नहीं ली है।
हमास का कहना था कि ग़ज़ा पर इसराइली हमले के विरोध में ये फ़लस्तीनियों की चेतावनी है।
दूसरी ओर फ़लस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने इस हमले की निंदा की है।
उल्लेखनीय है कि जनवरी के बाद से इसराइल ने ग़ज़ा की घेराबंदी और बढ़ा दी है।
पिछले हफ़्ते इसराइली फ़ौज ने उत्तरी ग़ज़ा पर हमला किया था जिसमें कम से कम 120 लोगों की जानें गई थीं। हताहत होने वालों में कई नागरिक भी थे।
दूसरी ओर फ़लस्तीनी चरमपंथियों ने इसराइल पर रॉकेट हमले जारी रखे हैं। पिछले हफ़्ते दक्षिणी इसराइल के भीतर कर रॉकेट हमले किए गए।
Thursday, March 6, 2008
'गज़ा में मानवीय परिस्थितियाँ बदतर'
ब्रिटेन की सहायता एजेंसियों का कहना है कि गज़ा में 1967 में इसराइली कब्ज़े के बाद से अब तक की सबसे ख़राब मानवीय परिस्थितियाँ हैं।
ब्रिटेन की इन एजेंसियों ने वहाँ रह रहे 15 लाख फ़लस्तिनियों के अनुभवों के आधार पर एक रिपोर्ट तैयार की है।
इस एजेंसियों में एमनेस्टी इंटरनेशनल, सेव द चिल्ड्रन, ऑक्सफ़ैम और क्रिस्चन एड शामिल हैं।
सहायता एजेंसियों ने कहा है कि इसराइल ने गज़ा पर जो प्रतिबंध लगा रखे हैं वह अवैधानिक सामूहिक सज़ा है जो सुरक्षा भी प्रदान नहीं कर पा रही है।
दूसरी ओर इसराइल का कहना है कि उसकी सैन्य कार्रवाई और दूसरे क़दम क़ानूनी और जायज़ हैं और इसराइल पर रॉकेट हमले रोकने के लिए ज़रुरी भी हैं।
त्रासदी
इसराइल ने गज़ा पर लगाए गए प्रतिबंधों को और सख़्त कर दिया था जब पिछले साल जून में हमास गुट ने इलाक़े पर कब्ज़ा कर लिया था।
गज़ा के नागरिकों को मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखकर उन्हें सज़ा देने को जायज़ नहीं ठहराया जा सकता
केट एलन, एमनेस्टी, यूके
संयुक्त राष्ट्र कई बार चेतावनी दी है कि इसराइल ने जो घेरेबंदी कर रखी है उसके चलते गज़ा में आवश्यक सेवाएँ भी ध्वस्त होने की कगार पर हैं।
अब ब्रितानी सहायता एजेंसियों ने अपनी रिपोर्ट में गज़ा की मानवीय परिस्थितियों का ज़िक्र करते हुए यूरोपीय संघ से अनुरोध किया है कि वे हमास गुट से चर्चा करें।
गज़ा के लोग खाद्य सहायता पर निर्भर करते हैं। एक लाख दस हज़ार लोग जो निजी क्षेत्रों में नौकरी कर रहे थे, उनमें से 75 हज़ार अपनी नौकरियाँ गँवा चुके हैं।
केयर इंटरनेशनल, यूके के ज्योफ़्री डेनिस का कहना है, "अब अगर घेरेबंदी ख़त्म नहीं हुई तो गज़ा को इस त्रासदी से वापस निकालना संभव नहीं होगा और वहाँ शांति की संभावना ख़त्म हो जाएगी।"
जनवरी के बाद से इसराइल ने गज़ा की घेरेबंदी और बढ़ा दी है।
पिछले हफ़्ते इसराइली फ़ौज ने उत्तरी गज़ा पर हमला किया था जिसमें कम से कम 120 लोगों की जानें गई थीं। हताहत होने वालों में कई नागरिक भी थे।
दूसरी ओर फ़लस्तीनी चरमपंथियों ने इसराइल पर रॉकेट हमले जारी रखे हैं। पिछले हफ़्ते दक्षिणी इसराइल के भीतर कर रॉकेट हमले किए गए।
गज़ा में इसराइली टैंक
गज़ा पर इसराइल ने पिछले हफ़्ते ही एक बड़ा हमला किया था
ब्रितानी एजेंसियों का कहना है कि इसराइल को यह अधिकार तो है कि वह अपने नागरिकों की रक्षा करे।
एजेंसियों ने दोनों ही पक्षों में अपील की है कि वे नागरिकों पर अवैधानिक हमले रोकें।
उन्होंने इसराइल से कहा है कि गज़ा के लोगों को भोजन, पीने का साफ़ पानी, बिजली और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाने की अपनी ज़िम्मेदारी पूरी करे।
एमनेस्टी, यूके के निदेशक केट एलन का कहना है, "गज़ा के नागरिकों को मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखकर उन्हें सज़ा देने को जायज़ नहीं ठहराया जा सकता।"
उनका कहना है, "यह त्रासदी मानव निर्मित है और इसे बदलना चाहिए।"
एजेंसियों ने हमास और फ़तह दोनों ही गुटों से अपील की है कि वे इस त्रासदी को ख़त्म करने के लिए क़दम उठाएँ।
हमास गुट का गज़ा पर कब्ज़ा है और वह इसराइल को मान्यता देने से इनकार करता है। जबकि फ़तह गुट ने महमूद अब्बास के नेतृत्व में पश्चिमी तट पर नियंत्रण संभाल रखा है।
क्रिस्चन एड के दलीप मुखर्जी का कहना है, "गज़ा में तब तक शांति स्थापना नहीं हो सकती जब तक इसराइल, फ़तह और चौगुट (अमरीका, संयुक्त राष्ट्र, यूरोप और रूस) मिलकर हमास से बात न करें और गज़ा के लोगों के भविष्य के प्रति आश्वस्त करें।"
लेकिन अपीलें काम नहीं आ रहीं हैं क्योंकि इस बीच इसराइली मंत्रिमंडल ने गज़ा की घेरेबंदी जारी रखने की अनुशंसा की है।
Wednesday, March 5, 2008
मैक्केन ने जीती रिपब्लिकन पार्टी की उम्मीदवारी
अमरीका में नवंबर में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के लिए जॉन मैक्केन रिपब्लिकन पार्टी की ओर से अधिकृत उम्मीदवार चुन लिए गए हैं।
चार राज्यों में हुए चुनाव में भारी जीत के बाद उनके प्रतिद्वंद्वी माइक हकबी मैदान से हट गए हैं और उन्होंने जॉन मैक्केन को फ़ोन पर बधाई दी है।
उधर डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवारों में अभी भी टक्कर चल रही है।
अमरीकी मीडिया का कहना है कि ओहायो राज्य का अहम चुनाव हिलेरी क्लिंटन ने जीत लिया है जबकि टेक्सस में काँटे की टक्कर बताई जा रही है।
इससे पहले वेरमोंट प्रांत में वेरमोंट प्रांत में डेमोक्रेट उम्मीदवार बराक ओबामा ने जीत दर्ज की थी और हिलेरी क्लिंटन ने रोड आइलैंड में जीत हासिल कर ली थी।
कहा जा रहा था कि यह अंतिम मुक़ाबला होगा जिसमें बराक ओबामा हिलेरी क्लिंटन को बाहर कर देंगे।
लेकिन हिलेरी क्लिंटन ने घोषणा कर दी है कि चाहे चुनाव परिणाम जो हों वे अंत तक दौड़ से हटने वाली नहीं हैं।
मैक्केन की जीत
चारों राज्यों में जॉन मैक्केन को मिली जीत से उन्हें 1,191 प्रतिनिधियों से अधिक का समर्थन मिल गया है। सितंबर में होने वाले पार्टी के राष्ट्रीय सम्मेलन में पार्टी के औपचारिक उम्मीदवार चुने जाने के लिए कम से कम इतने प्रतिनिधियों का समर्थन हासिल करना ज़रुरी था।
डलास, टेक्सस में अपने समर्थकों से बात करते हुए मैक्केन ने कहा कि डेमोक्रेट उम्मीदवार के सामने उन्हें चुनने के लिए वे अमरीकी जनता का सम्मान करने वाली और उन्हें सहमत करने वाली ठोस बातें रखेंगे।
मैक्केन ने अपने भाषण में उन सभी चुनौतियों का ज़िक्र किया जो अमरीका के सामने हैं, जिनमें इराक़ युद्ध के अलावा अलक़ायदा और तालेबान से लड़ाई भी शामिल है।
उन्होंने एक ऐसे चुनाव प्रचार की बात कही जिसमें झूठे वादे न किए जाएँ। उन्होंने अमरीकी जनता से अपील की है कि वे अमरीका की ताक़त, उसके आदर्शों और उसके भविष्य के लिए लड़ने के लिए सामने आएँ।
इसके बाद वे बुधवार को व्हाइट हाउस जाकर राष्ट्रपति बुश से अपनी उम्मीदवारी के लिए औपचारिक समर्थन हासिल करेंगे।
ओबामा-हिलेरी में टक्कर
डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से उम्मीदवारी की दावेदार हिलेरी क्लिंटन कहती रही हैं कि यदि आप ओहायो राज्य का चुनाव नहीं जीत सकते तो आप डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार नहीं हो सकते।
ओबामा और हिलेरी
डेमोक्रेट उम्मीदवारों के बीच शुरु से ही टक्कर चल रही है
और अब उन्होंने ओहायो राज्य का चुनाव जीत लिया है।
हालांकि टेक्सस के परिणामों के बारे में कहा जा रहा है कि वहाँ अभी भी कांटे की टक्कर है।
वेरमोंट में ओबामा ने जीत हासिल की है तो रोड आइलैंड में हिलेरी ने जीत दर्ज की है।
बराक ओबामा ने चार फ़रवरी को हुए सुपर ट्यूसडे चुनाव से चार मार्च के चुनावों के बीच लगातार 11 राज्यों में जीत हासिल की है और वे हिलेरी क्लिंटन से आगे निकल गए हैं।
इन चार राज्यों के चुनाव के लिए बराक ओबामा ने चुनाव प्रचार पर हिलेरी क्लिंटन की तुलना में दोगुना खर्च किया है।
डेमोक्रेट पार्टी की उम्मीदवारी जीतने के लिए कुल 2, 025 प्रतिनिधियों का समर्थन हासिल करना ज़रूरी होगा।
Tuesday, March 4, 2008
आशा हो, तभी ज़िदा रह सकते हैं: कश्मीर सिंह
पाकिस्तान में क़रीब 35 वर्षों तक जेल में बंद रहने के बाद रिहा हुए भारतीय क़ैदी कश्मीर सिंह का कहना है कि 'इंसान को आशा होता है तभी वह जिंदा रहता है।'
किसी समय अमृतसर पुलिस में रहे कश्मीर सिंह को 35 साल पहले पाकिस्तान में रावलपिंडी में जासूसी के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था और उन्हें मौत की सज़ा सुनाई गई थी।
सोमवार को लाहौर में रिहाई के बाद जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें कोई आशा थी कि वे कभी रिहा होंगे तो उन्होंने बताया, "इंसान को आशा होती है तभी वह ज़िंदा रहता है। कोई न कोई आशा तो लगा ही रखी होती है नहीं तो समय से पहले ही मौत हो जाए।"
उधर उनकी पत्नी परमजीत कौर कुछ दिन पहले कह रही थीं कि रिहाई की कोई पुख़्ता ख़बर आए तब ही उन्हें संतोष होगा। मंगलवार को रिहाई की ख़बर सुनने के बाद उनका कहना था, "मैं ख़ुश हूँ कि वे आज़ाद हो गए हैं।"
साठ वर्षीय कश्मीर सिंह मंगलवार को वाघा-अटारी भारत-पाकिस्तान सीमा के ज़रिए सड़क से होते हुए भारत में पहुँचेंगे। वहाँ उनकी पत्नी परमजीत कौर और दो में से उनके एक पुत्र, उनके गाँववासियों के साथ उनका स्वागत करने के लिए सोमवार से ही मौजूद हैं।
एक मंत्री और एक पत्रकार की भूमिका
इंसान को आशा होती है तभी वह ज़िंदा रहता है। कोई न कोई आशा तो लगा ही रखी होती है नहीं तो समय से पहले ही मौत न हो जाए
रिहाई के बाद कश्मीर सिंह
कश्मीर सिंह लाहौर जेल में बंद थे। कोट लखपत जेल के अधीक्षक जावेद लतीफ़ ने बताया कि राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के आदेश के बाद कश्मीर सिंह को रिहा किया गया।
पाकिस्तान की कार्यवाहक सरकार में मानवाधिकार मामलों के मंत्री अंसार बर्नी ने कश्मीर सिंह का मामला हाथ में लिया और उनकी खोज शुरु कर दी।
लेकिन उन्हें कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा क्योंकि इतने साल पाकिस्तान जेल में रहते हुए कश्मीर सिंह को इब्राहीम के नाम से जाना जाने लगा था।
उधर भारत में कश्मीर सिंह के परिवार के सदस्यों की बात वरिष्ठ पत्रकार जीसी भारद्वाज ने सामने रखी। उन्होंने भारत सरकार के साथ-साथ पाकिस्तानी प्रशासन और अंसार बर्नी से भी संपर्क कायम किया।
कश्मीर सिंह होशियारपुर के नंगलखिलाड़ियाँ गाँव के रहने वाले हैं। संयोग से भारद्वाज का पैतृक गाँव भी नंगलखिलाड़ियाँ है और उन्होंने पिछले दो साल में कश्मीर सिंह की पत्नी परमजीत कौर और उनके दौ बेटों की गुहार सरकार तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभाई है।
अंसार बर्नी को सबसे पहले रेडियो पर प्रसारित एक टॉक शो से कश्मीर सिंह के बारे में पता चला।
परमजीत नेबताया कि उन्होंने बहुत मुश्किलों के साथ अपने बेटों को पाला
उन्होंने मामला राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के समक्ष रखा और उनकी अपील स्वीकार हो गई और कश्मीर सिंह की रिहाई का आदेश दिया गया।
'बच्चों की बहुत याद आई'
कश्मीर सिंह ने रिहा होने के बाद बातचीत में कहा, "मैं बेहतर महसूस कर रहा हूँ। मैं ख़ुश हूँ।"
उनका कहना था कि जेल में उन्हें बच्चों की बहुत याद आई। उनका कहना था कि जब वे गिरफ़्तार हुए थे तो उनके बच्चे बहुत छोटे थे इसलिए वे उन्हें पहचान नहीं पाएँगे, केवल अपनी पत्नी को ही पहचान पाए पाएँगे।
सोमवार को उन्होंने अपनी पत्नी परमजीत कौर से फ़ोन पर बातचीत भी की और उनकी सेहत के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "मेरी सेहत अच्छी है। मैं ख़ुश हूँ। कल पहुँच जाऊँगा।"
उन्होंने रिहाई के बात पत्रकारों के पूछने पर अपनी 'लव मैरेज' का ज़िक्र करते हुए कहा, "मैनें अपनी मर्ज़ी से, प्यार की शादी की थी।" इस बारे में उनकी पत्नी परमजीत कौर का कहना था कि इसीलिए तो उन्होंने इतने साल कश्मीर सिंह का इंतज़ार किया।
रिहाई से पहले परमजीत ने बताया था कि उन्होंने अपने पति की ग़ैरमौजूदगी में बहुत मुश्किलों का सामना किया और छोट-छोटे काम कर अपने दो बेटों को पाल कर बड़ा किया। उनका एक बेट पंजाब में रहता है जबकि दूसरा बेटा विदेश में काम करता है।
Monday, March 3, 2008
रूस में मेदवेदेव की जीत
रूस में राष्ट्रपति पद के लिए हुए चुनावों में मौजूदा राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समर्थित उपप्रधानमंत्री दिमित्री मेदवेदेव को जीत हासिल हुई है। रविवार को हुए मतदान में 68 प्रतिशत मतदाताओं ने भाग लिया और मेदवेदेव को उनमें से लगभग 70 प्रतिशत मत मिले।
रविवार को हुए चुनावों में लगभग 68 प्रतिशत मतदाताओं ने वोट दिया था।
उनके प्रतिद्वंद्वी कम्युनिस्ट पार्टी के गेनादी ज़ुगानोव को लगभग 20 प्रतिशत मत मिले हैं। रूसी समाचार एजेंसी इतर-तास के मुताबिक ज़ुगानोव ने कहा है कि चुनाव में धाँधली हुई है और वे न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाएँगे।
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने मेदवेदेव को अपने उत्तराधिकारी की तौर पर समर्थन दिया था।
'पुतिन की नीतियाँ जारी रहेंगी'
मॉस्को में राष्ट्रपति पुतिन और मेदवेदेव साथ-साथ नज़र आए। मेदवेदेव ने कहा कि वे अपनी नीतियाँ में राष्ट्रपति पुतिन के दिखाए रास्ते का अनुसरण करेंगे।
मेदवेदेव का अब तक का सफ़र....
उन्होंने कहा कि वे अपनी सरकार राष्ट्रपति पुतिन के सहयोग के बनाएँगे और उसमें पुतिन प्रधानमंत्री होंगे।
मेदवेदेव ने कहा कि जब वे राष्ट्रपति बनेंगे तो उनकी विदेश नीति सभी क़ानूनी तरीकों से रूस के हितों की रक्षा करने पर केंद्रित होगी।
मेदवेदेव
रूस के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति मेदवेदेव ने कहा कि पुतिन उनकी सरकार में प्रधानमंत्री होंगे
रूस के स्वतंत्र निरीक्षक दल (गोलोस) ने देश में हुए मतदान की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि कुछ इलाक़ो में जितना ज़्यादा मतदान हुआ है वह असंभव प्रतीत होता है।
नहीं लड़ सकते थे पुतिन
मॉस्को के रेड स्क्वेयर में दोनो नेता साथ-साथ दिखाई दिए और राष्ट्रपति पुतिन ने मेदवेदेव को बधाई दी।
पुतिन पिछले आठ साल से राष्ट्रपति हैं और संविधान के अनुसार वे तीसरी बार राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव नहीं लड़ सकते थे।
लेकिन वे मेदवेदेव के प्रधानमंत्री बनने पर राज़ी हो गए हैं।
संवाददाताओं के मुताबिक चुनाव के दौरान मतदाताओं को लुभाने के लिए कई तरह के प्रलोभन दिए गए जिनमें सस्ते खाद्य पदार्थ, मुफ्त सिनेमा टिकट, खिलौने इत्यादी शामिल थे।
महत्वपूर्ण है कि पश्चिमी देशों के पर्यवेक्षकों की ओर से रूस के राष्ट्रपति चुनावों का ख़ास निरीक्षण नहीं हुआ है और अनेक पर्यवेक्षक चुनावों से दूर ही रहे हैं।
Saturday, March 1, 2008
भाजपा, वाम ने की बजट की आलोचना
भारतीय जनता पार्टी नेता और पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने मीडिया को बताया, "बजट में ऐसा कुछ भी नहीं है जो अर्थव्यवस्था की मूल समस्याओं - महँगाई, ब्याज दर और मूलभूत ढाँचे की कमी को सुलझाने का रास्ता दिखाता हो."
उनका कहना था कि बजट को लोक-लुभावन बनाने की कोशिश की गई है लेकिन देखना होगा कि आम आदमी को इससे क्या मिलेगा. उन्होंने ये भी प्रश्न उठाया कि सरकार को किसानों और अन्य वर्गों का ध्यान कार्यकाल के आख़िरी वर्ष में ही क्यों आया?
बजट में ऐसा कुछ भी नहीं है जो अर्थव्यवस्था की मूल समस्याओं - महँगाई, ब्याज दर और मूलभूत ढाँचे की कमी को सुलझाने का रास्ता दिखाता हो
यशवंत सिन्हा
किसानों के कर्ज़ माफ़ करने के बारे में उनका कहना था कि चाहे वित्त मंत्री ने इसके लिए 30 जून का समय रखा है लेकिन इसके लिए राज्यों का सहयोग चाहिए होगा और क्या ऐसी प्रशासनिक व्यवस्था है कि छोटे किसानों की पहचान की जा सके?
वामदल भी नाराज़
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की वरिष्ठ नेता वृंदा कारत ने कहा कि वे वित्त मंत्री से कुछ हद तक ही सहमत हैं.
उनका कहना था, "इस बजट में किसानों के मुद्दे का समाधान करने की कोशिश की गई है लेकिन देखना है कि कितने लोगों को फ़ायदा होता है. महँगाई और बेरोज़गारी के अहम मुद्दों के बारे में बजट में कुछ नहीं सुझाया गया है."
उधर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने बजट की आलोचना करते हुए कहा है कि बजट में किसानों की समस्याओं के समाधान के बारे में कुछ नहीं है.
इस बजट में किसानों के मुद्दे का समाधान करने की कोशिश की गई है लेकिन देखना है कि कितने लोगों को फ़ायदा होता है. महँगाई और बेरोज़गारी के अहम मुद्दों के बारे में बजट में कुछ नहीं सुझाया गया है
सीपीएम की वृंदा कारत
सीपीआई ने किसानों का कर्ज़ माफ़ करने की तो सराहना की है लेकिन साथ ही कहा है कि सरकार और आगे भी बढ़ सकती थी और राष्ट्रीय ऋण राहत आयोग गठित कर सकती थी.
मीडिया से बात करते हुए सीपीआई नेता डी राजा ने कहा, "कोई नया रास्ता खोजने की जगह बजट केवल नुकसान को रोकने और पहले ही वाले आर्थिक सुधार की दिशा में बढ़ने की बात करता है."
प्रधानमंत्री ख़ुश
कोई नया रास्ता खोजने की जगह बजट केवल नुकसान को रोकने और पहले ही वाले आर्थिक सुधार की दिशा में बढ़ने की बात करता है
सीपीआई के डी राजा
उधर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बजट को 'बेहतरीन' बताया है. उनका कहना था कि बजट 'आम आदमी, मध्य वर्ग और किसानों' के लिए है.
उधर वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने संसद में अपने भाषण के बाद कहा है कि कृषि क्षेत्र बुरी स्थिति में नहीं है और उनका आकलन है कि खाद्य पदार्थों का रिकॉर्द उत्पादन होगा. उन्होंने माना कि कृषि क्षेत्र की विकास दर 2.6 प्रतिशत है जबकि सरकार का लक्ष्य इसे चार प्रतिशत तक पहुँचाना है.
वित्त मंत्री का ये भी कहना था कि किसानों का कर्ज़ माफ़ करना कृषि क्षेत्र की केवल एक समस्या को सुलझाता है लेकिन इस समस्या के और पहलु भी हैं.
Friday, February 29, 2008
चिदंबरम पेश करेंगे यूपीए का अंतिम बजट
भारत के वित्तमंत्री पी चिदंबरम शुक्रवार को लोकसभा में वर्ष 2008-09 का बजट पेश करेंगे।
यह बजट यूपीए सरकार का अंतिम बजट होगा और इसलिए माना जा रहा है कि इस बजट में भी चुनाव की आहट सुनाई देगी और मतदाताओं को लुभाने की कोशिश दिखाई देगी।
गुरुवार को पेश आर्थिक सर्वेक्षण में देश में अर्थव्यवस्था की जो तस्वीर उभर कर सामने आई है उससे लगता है कि वित्तमंत्री के लिए बजट में संतुलन बनाए रखने की ख़ासी चुनौती होगी।
एक ओर उन्हें देश के आर्थिक विकास दर की चिंता करनी होगी और दूसरी ओर महंगाई की शिकायत कर रहे लोगों और आत्महत्या को मजबूर हो रहे किसानों को राहत पहुँचाने की कोशिश करनी होगी।
संसद में सातवीं बार बजट पेश करने जा रहे वित्तमंत्री चिदंबरम से व्यक्तिगत टैक्स देने वालों को भी रियायत की उम्मीद है और कॉर्पोरेट टैक्स देने वालों को भी।
ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार की आस लगाए लोगों को भी आस है तो छठें वेतन आयोग का इंतज़ार कर रहे सरकारी कर्मचारी भी बजट पर नज़र लगाए बैठे हैं।
चुनौतियाँ
गुरुवार को संसद में पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि पिछली तिमाही में विकास दर इससे पहले के दो वर्षों की तुलना में सबसे कम रहा है।
आम लोगों की ज़रूरतों के सामान के दाम बढ़ने पर इसमें चिंता जताई गई है और अगले कुछ समय में महँगाई दर और बढ़ने की आशंका भी जताई गई है। सरकार ने ये भी स्वीकार किया है कि महँगाई बढ़ने से आम आदमी पर बोझ बढ़ रहा है।
इसके अलावा आर्थिक सर्वेक्षण में विकास दर 8.7 फ़ीसदी रहने की संभावना जताई गई है जो यूपीए सरकार के नौ फ़ीसदी के निर्धारित लक्ष्य से कम है।
एक ओर बढ़ते ब्याज़ दरों के चलते उपभोक्ताओं ने बाज़ार में खर्च में कमी कर रखी है तो दूसरी ओर रुपए की मज़बूती के चलते आईटी उद्योग की कमर टूट रही है और निर्यात पर ख़ासा असर पड़ा है।
हालांकि ख़बरें हैं कि किसानों की हालत को लेकर सरकार कोई बड़ा पैकेज देने जा रही है लेकिन बजट के दो दिनों पहले राजनीति तेज़ हो गई है और यूपीए सरकार को बाहर से समर्थन दे वामपंथी किसानों के मुद्दे पर विपक्षियों की रैली में जा खड़े हुए।
एक ओर सीएजी की रिपोर्ट कह रही है कि ग्रामीण रोज़गार गारंटी क़ानून के तहत चल रहा कार्यक्रम ठीक नहीं चल रहा है और दूसरी ओर कांग्रेस के भीतर से इसे पूरे देश में लागू करने का दबाव है।
ऐसी चुनौतियों से निपटने के लिए हॉर्वर्ड में पढ़े वित्तमंत्री पी चिदंबरम अगर आर्थिक क़दम उठाना भी चाहेंगे तो राजनीति उन्हें ऐसा करने से रोकती रहेगी क्योंकि यह चर्चा पहले से ही चल रही है कि यह साल चुनाव का साल हो सकता है।
Thursday, February 28, 2008
आज पेशा होगा भारत का आर्थिक सर्वेक्षण
भारतीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम बजट से पहले आज संसद में आर्थिक सर्वेक्षण पेश करेंगे। इसमें पिछले कुछ महीनों में बढ़ी महँगाई का ज़िक्र होने की संभावना है।
आर्थिक सर्वेक्षण संसद के दोनों सदनों में पेश किया जाएगा..
सर्वेक्षण में अमेरीकी अर्थव्यवस्था में छाए संकट के मद्देनज़र घरेलू अर्थव्यवस्था पर उसके प्रभावों को प्रमुखता से बताए जाने की उम्मीद है।
वित्तमंत्री पी चिदंबरम कई बार ये उम्मीद जता चुके हैं कि नौ फ़ीसदी विकास दर का लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा।
केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (सीएसओ) के संशोधित अनुमान के अनुसार वर्ष 2006-07 में आर्थिक विकास दर 9.6 प्रतिशत थी।
दिसंबर 2007 के मासिक आँकड़ों के मुताबिक मैनुफैक्चरिंग क्षेत्र की विकास दर 13 फ़ीसदी से घट कर लगभग दस फ़ीसदी रह गई है।
आर्थिक सर्वेक्षण में इस तरह की सुस्ती के कारणों के बारे जानकारी दिए जाने की संभावना है। इस वित्त वर्ष के दौरान डॉलर के मुक़ाबले रूपए में आई मज़बूती का भी निर्यातों पर असर पड़ा है।
इसी तरह महंगाई बढ़ने का ख़तरा भी बना हुआ है जो चार फ़ीसदी के पार पहुँच चुका है।
आर्थिक सर्वेक्षण में इन्हीं मुद्दों पर सरकार की तरफ से सफाई और आने वाले साल के बारे में नई तस्वीर पेश की जाएगी।
Wednesday, February 27, 2008
इराक़ युद्ध संबंधी ब्यौरा जारी करने का आदेश
ब्रिटेन सरकार को ये आदेश दिया गया है कि वो कैबिनेट की उस महत्वपूर्ण बैठक का ब्यौरा सार्वजनिक करे जिसमें इराक़ युद्ध की क़ानूनी वैधता पर चर्चा हुई थी।
ब्रिटेन के सूचना आयुक्त यानि इंफ़र्मेशन कमिश्नर रिचर्ड थॉमस ने कहा कि ये मुद्दा 'गंभीर और विवादित है' इसीलिए इन दस्तावेज़ों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
ब्रिटेन सरकार के लिए यह एक बड़ा झटका है क्योंकि वो इस जानकारी को सार्वजनिक करने से कतराती रही है।
इराक़ युद्ध से पहले ब्रिटेन की कैबिनेट की दो अहम बैठकें हुई थीं। अब शायद लोग ये जान पाएं कि इन बैठकों में हुआ क्या था और ये संभव हुआ है ब्रिटेन के सूचना आयुक्त के अभूतपूर्व फ़ैसले की वजह से।
हालांकि ब्रिटेन सरकार ने कहा था कि ये जानकारी सार्वजनिक नहीं की जानी चाहिए और इसके लिए दो कारण बताए थे।
पहला यह कि इससे मंत्रिमंडल की सम्मिलित ज़िम्मेदारी पर असर पड़ेगा और दूसरा यह कि अहम बैठकों में नेता खुलकर किसी मुद्दे पर बात करने से कतराएँगे।
दलील नाकाफ़ी
लेकिन सूचना आयुक्त रिचर्ड थॉमस ने इन कारणों को नाकाफ़ी क़रार देते हुए कहा कि जनता को इराक़ युद्ध के असल कारण जानने का हक़ है।
टोनी ब्लेयर
आदेश टोनी ब्लेयर के कार्यकाल की एक कैबिनेट बैठक से संबंधित है
यह एक एहम फ़ैसला है। जनता शायद अब यह जान पाए कि ब्रिटेन के किस मंत्री ने इराक़ युद्ध पर क्या सवाल उठाए, किसने युद्ध का विरोध किया और इस पूरे मुद्दे पर मंत्रिमंडल ने कितने विस्तार से बहस की।
ब्रिटेन की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी लिबरल डेमोक्रैट्स, ने जानकारी सार्वजनिक करने की घोषणा का स्वागत किया है।
पार्टी के विदेश मामलों के प्रवक्ता एड डेवी कहते हैं, "लेबर पार्टी ने गुपचुप काम करने के लिए जो गोपनीयता की दीवार खड़ी की थी उसकी दीवार ईंट-दर-ईंट टूट रही है। लेबर पार्टी ने बहुत कुछ छिपाया है और सूचना आयुक्त की बदौलत जनता कुछ समय में सच जान सकेगी लेकिन यह शर्म की बात है कि सरकार से दस्तावेज़ एक-एक करके छीनने पड़ रहे हैं।"
उधर डाउनिंग स्ट्रीट के अधिकारियों का कहना है कि वो इस के ख़िलाफ़ अपील करने पर विचार कर रहे हैं।
साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि दस्तावेज के सार्वजनिक होनí