Thursday, January 31, 2008

कश्मीर में चार चरमपंथी मारे गए

सुरक्षाबलों का कहना है कि भारतीय राज्य जम्मू कश्मीर में बुधवार को हुए मुठभेड़ में अलगाववादी गुट हिज़्बुल मुजाहिदीन के चार चरमपंथी मारे गए हैं.

जिन चार चरमपंथियों को मारा गया है उनमें सज्जाद उर्फ़ ताहिर भी शामिल है जो हिज़्बुल मुजाहिदीन के कमांडर थे और सुरक्षाबलों को उनकी तलाश थी.

सेना के प्रवक्ता का कहना है कि सर्दियों में जब चरमपंथी गतिविधियाँ न्यूनतम हैं, चार चरपंथियों का मारा जाना अलगाववादी गुट के लिए बड़ा झटका है.

वैसे भारत और पाकिस्तान के बीच शुरु हुई शांति प्रक्रिया के बाद से जम्मू कश्मीर में चरमपंथी गतिविधियों में कमी आई है.

सर्दियों में इनकी गतिविधियाँ वैसे भी कम हो जाती हैं.

सुरक्षाबलों का कहना है कि श्रीनगर से साठ किलोमीटर दूर बटपोरा में चरमपंथियों के साथ मुठभेड़ बुधवार, 30 जनवरी को सुबह को शुरु हुई और देर शाम तक चलती रही.

सुरक्षाबलों की ओर से किसी के हताहत होने की जानकारी नहीं मिली है.

जम्मू कश्मीर पुलिस के पुलिस उपमहानिरीक्षक एचके लोहिया ने बीबीसी को बताया कि जून 2006 में छह नेपाली मज़दूरों का अपहरण करके उनकी हत्या करने के पीछे सज्जाद का हाथ था.

उल्लेखनीय है कि 1989 में जम्मू कश्मीर पर भारत के शासन के ख़िलाफ़ शुरु हुए हथियारबंद विद्रोह के बाद से अब तक 60 हज़ार लोगों की जानें जा चुकी हैं.

Wednesday, January 30, 2008

हरभजन पर आरोप हटाने का स्वागत

हरभजन सिंह पर नस्लवादी टिप्पणी के आरोप हटाने पर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने राहत की सांस ली है और फ़ैसले का स्वागत किया है।
बीसीसीआई के अध्यक्ष शरद पवार ने ख़ुशी जताते हुए कहा, " जज ने सही फ़ैसला सुनाया है और बीसीसीआई शुरु से कह रहा था कि हरभजन के ख़िलाफ़ नस्लवादी टिप्पणी का आरोप लगाना बोर्ड को स्वीकार नहीं है।"
बीसीसीआई अध्यक्ष शरद पवार ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के अपील कमिश्नर जॉन हेंसन ने सही फ़ैसला सुनाया है।
जज ने सही फ़ैसला सुनाया है और बीसीसीआई शुरु से कह रहा था कि हरभजन के ख़िलाफ़ नस्लवादी टिप्पणी का आरोप लगाना बोर्ड को स्वीकार नहीं है

शरद पवार, बीसीसीआई अध्यक्ष

बीसीसीआई की ओर से हरभजन की पैरवी के लिए नियुक्त वीआर मनोहर के अनुसार हरभजन के ख़िलाफ़ गाली देने का आरोप लगा और नियमों के अनुसार उन्हें आधी मैच फ़ीस का जुर्माना भरना होगा।

इसके पहले बीसीसीआई के उपाध्यक्ष ललित मोदी ने सुनवाई से पहले मुबंई में कहा था, ''यदि हरभजन के ख़िलाफ़ नस्लवादी टिप्पणी का आरोप वापस नहीं लिया गया तो भारतीय टीम त्रिकोणीय वनडे सिरीज़ से हट सकती है।''

ग़ौरतलब है कि ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी एंड्रयू साइमंड्स पर कथित नस्लवादी टिप्पणी करने के मामले में हरभजन सिंह पर तीन टेस्ट मैचों के लिए लगा प्रतिबंध हटा लिया गया है लेकिन उन्हें मैच की आधी फ़ीस का जुर्माना भरना होगा।

इस घटना के बाद मैच रेफ़री माइक प्रॉक्टर ने हरभजन पर तीन मैचों का प्रतिबंध लगा दिया था।

'मैदान की बात मैदान पर'

फ़ैसले के बाद भारतीय टीम के मैनेजर चेतन चौहान का कहना था कि मैदान की बातें मैदान में ही छोड़ देनी चाहिए।
मलय नीरव से बातचीत में चेतन चौहान ने कहा कि मैदान के अंदर की बातें तभी बाहर आनी चाहिए जब बात हाथ से निकल जाए और झगड़ा या हाथापाई हो जाए।

मैदान पर थोड़ी टीका टिप्पणी और गर्मागर्मी गंभीर बात नहीं है जब तक कि मामला टकराव तक न पहुँच जाए

चेतन चौहान, भारतीय टीम के मैनेजर

उनका कहना था कि मैदान पर थोड़ी टीका टिप्पणी और गर्मागर्मी गंभीर बात नहीं है बशर्ते मामला टकराव तक न पहुँच जाए।

चेतन चौहान का मानना है कि कोई भी खेल अब 'जेंटलमैन गेम' नहीं रह गया है, ज्यादातर सभी खेल पेशेवर हो गए हैं। इन पर खिलाड़ियों की जीविका निर्भर है इसलिए खिलाड़ी तरह तरह के हथकंडे अपनाते हैं।

उसका मानना है कि भारतीय टीम को पिछली बातों को भुला कर अब खेल पर ध्यान देना चाहिए।

'नहीं रहा वो खेल'

पूर्व क्रिकेटर मदनलाल का भी मानना है कि क्रिकेट अब 'जेंटलमैन गेम' नहीं रहा है क्योंकि अब हर टीम किसी भी तरह जीतना चाहती है।
हरभजन सिंह
हरभजन पर से पाबंदी हटाने पर खुशी मनाते लोग

मदनलाल का कहना था कि यदि ये मामला नहीं सुलझता तो अंतरराष्ट्रीय खेल परिषद के लिए मुश्किल हो जाती।

उनका मानना था कि ये मामला मैदान पर ही सुलझा लिया जाना चाहिए था।

पूर्व क्रिकेटर सैयद किरमानी का कहना है कि हरभजन पर 50 फ़ीसदी मैच फीस का जुर्माना और ब्रै़ड हॉग को बरी करना, उनकी समझ के परे है।

किरमानी भी मानते हैं कि अब क्रिकेट 'जेंटलमैन गेम' नहीं रहा।

उनका कहना था कि क्रिकेटर जब कचहरी में खड़े नज़र आएँ तो उससे इस बात का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।

वो कहते हैं कि विवाद इतना तूल नहीं पकड़ना चाहिए था, ग़लतियाँ किसी से भी हो सकती है, उसको स्वीकार करना चाहिए।

Tuesday, January 29, 2008

बुश के भाषण में अर्थव्यवस्था, अल क़ायदा की चर्चा

अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने अपने सालाना भाषण में माना है कि 'अमरीकी अर्थव्यवस्था की विकास दर धीमी हो रही है और इस बारे में अनिश्चितता भी है.'

लेकिन राष्ट्रपति बुश ने ये भी कहा है कि देशवासियों को अर्थव्यवस्था के भविष्य के बारे में भरोसा होना चाहिए.

राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के कार्यकाल का ये अंतिम सालाना भाषण था.

राष्ट्रपति बुश ने अमरीकी संसद से अनुरोध किया है कि अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने के लिए उन्होंने जिस 150 अरब डॉलर के पैकेज की घोषणा की है, उसे वह जल्द से जल्द पारित करे.

उन्होंने माना कि अमरीका में हर घर में आर्थिक भविष्य को लेकर चिंता है लेकिन उनका कहना था कि भविष्य में अर्थिक विकास को लेकर अमरीकी आश्वस्त हो सकते हैं.


हमारी सुरक्षा, समृद्धि और पर्यावरण की ज़रूरतें इस बात पर निर्भर करती हैं कि हम तेल पर कितने आश्रित हैं

राष्ट्रपति बुश

उनका कहना था, "हमारी सुरक्षा, समृद्धि और पर्यावरण की ज़रूरतें इस बात पर निर्भर करती हैं कि हम तेल पर कितने आश्रित हैं."

'अल क़ायदा को हराया जाएगा'

उन्होंने अपने संबोधन में इराक़ की चर्चा करते हुए कहा कि वहाँ अमरीकी सैनिकों की संख्या बढ़ाए जाने से सुरक्षा की स्थिति बेहतर हुई है चाहे कुछ लोगों ने ही पहले ऐसी संभावना जताई थी.

उनका घोषणा की कि इराक़ में अल क़ायदा के सदस्य भाग रहे हैं और उसे पराजित कर दिया जाएगा.


इराक़ में अतिरिक्त सैनिक भेजने से सुरक्षा स्थिति बेहतर हुई है. अल क़ायदा के सदस्य भाग रहे हैं और अल क़ायदा को पराजित कर दिया जाएगा

राष्ट्रपति बुश

अफ़ग़ानिस्तान के बारे में बोलते हुए राष्ट्रपति बुश ने कहा है कि वहाँ कार्रवाई में अमरीकी फ़ौजों को मिल रही सफलता जारी रहनी चाहिए.

उनका कहना था कि 3000 अतिरिक्त मरीन सैनिक अफ़ग़ानिस्तान भेजे जाएँगे जो वहाँ तालेबान के ख़िलाफ़ संघर्ष में मदद करेंगे और अफ़ग़ान सेना और पुलिस को प्रशिक्षण देंगे.

राष्ट्रपति बुश ने दोहराया कि वे साल के अंत तक इसराइलियों और फ़लस्तीनियों के बीच शांति समझौता करवा पाएँगे.

ईरान के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि वे ईरान के लोगों का आदर करते हैं लेकिन 'देश के नेताओं को विदेशों में चरमपंथ को समर्थन' बंद करना चाहिए.

Monday, January 28, 2008

कोलकाता के पास पहुँचा बर्ड फ़्लू

भारत के पश्चिम बंगाल में बर्ड फ़्लू तेज़ी से नए इलाक़ों को अपनी गिरफ़्त में ले रहा है. अधिकारियों के मुताबिक राज्य के 13 ज़िले इससे प्रभावित हो गए हैं.

अधिकारियों के अनुसार राजधानी कोलकाता के बाहरी हिस्से बजबज में भी इस बीमारी के फैलने की ख़बर मिली है.

स्वास्थ्य मंत्री अनीसुर्रहमान ने कहा कि हालात काफी ख़तरनाक हैं. राज्य सरकार ने 25 लाख मुर्गियों को मारने का लक्ष्य बनाया है.

बर्ड फ़्लू का एच5एन1 वायरस बेहद ख़तरनाक है. हालाँकि अभी तक कहीं से किसी व्यक्ति के इससे संक्रमित होने की ख़बर नहीं मिली है.

स्वास्थ्य अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि इसके फैलने से स्थिति नियंत्रण के बाहर हो सकती है.

ख़तरनाक स्थिति

सबसे गंभीर बात यह है कि बर्ड फ़्लू अब घनी आबादी वाले राज्य की राजधानी कोलकाता के नज़दीक तक पहुँच गया है.

बृहस्पतिवार को कोलकाता से सिर्फ़ दो घंटे की ड्राइव वाले स्थान बालागढ़ से लिए गए नमूनों में बर्ड फ़्लू के वायरस पाए गए.

और अब बज-बज में मरी पाई गई मुर्गियों में भी संक्रमण पाया गया है.

पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य मंत्री एसके मिश्रा कहते हैं, "स्थिति ख़तरनाक है."

उन्होंने कहा, "हम अपने हिसाब से इसे रोकने के लिए पूरी कोशिश कर रहे हैं लेकिन यह बहुत मुश्किल है."


बर्ड फ़्लू
पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य मंत्री एसके मिश्रा कहते हैं कि स्थिति ख़तरनाक है

ऐसे हज़ारों ग्रामीण परिवार जिनकी आय का मुख्य स्त्रोत मुर्गीपालन ही है, बर्बाद हो जाएंगे.

राज्य के पशुपालन मंत्री अनीसुर्रहमान कहते हैं, "हमें 25 लाख मुर्गियों को मारना है जिनमें से दो-तिहाई काम पूरा हो चुका है."

उन्होंने कहा, "मुर्गियों को मारने के लिए प्रभावित ज़िलों में हमें और टीमों की ज़रूरत है क्योंकि यह काम जल्दी में पूरा नहीं किया जा सकता."

लेकिन पता लगा है कि सरकारी की टीम संक्रमणयुक्त मुर्गियों को पकड़ने और मारने के लिए ग्रामीणों की मदद ले रही हैं जो काफ़ी चिंताजनक है.

पशु चिकित्सक देबजीत ब्रह्म का कहना है, "सरकारी कर्मचारियों के पास तो ऐसे सूट होते हैं जो सुरक्षात्मक होते हैं लेकिन ग्रामीण तो पूरी तरह असुरक्षित होते हैं उनके पास तो दस्ताने तक नहीं होते. इसलिए इस काम में उनकी मदद लेना बेहद ख़तरनाक है.

Friday, January 25, 2008

सार्कोज़ी दो दिन की भारत यात्रा पर दिल्ली पहुँचे

फ़्रांस के राष्ट्रपति निकोला सार्कोज़ी दो दिनों की भारत यात्रा पर शुक्रवार की सुबह राजधानी दिल्ली पहुँच गए हैं.

भारत के विदेश राज्यमंत्री आनंद शर्मा और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने सार्कोज़ी की दिल्ली स्थित पालम हवाईअड्डे पर अगवानी की.

सार्कोज़ी के साथ उनकी उनकी नई महिला मित्र और पूर्व सुपरमॉडल कार्ला ब्रूनी नहीं आई हैं.

संभावना है कि सार्कोज़ी की इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच परमाणु समझौते पर चर्चा होगी और कई सैन्य सौदों के समझौतों पर हस्ताक्षर होंगे.

उनकी इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने के उपायों पर भी विस्तार से चर्चा होने की संभावना है.

माना जा रहा है कि फ़्रांसिसी राष्ट्रपति की इस यात्रा से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों को बल मिलेगा.

सार्कोज़ी इस वर्ष 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि के रुप में भारत आए हैं.

उनके साथ उनके मंत्रिमंडलीय सहयोगियों और फ़्रांस के औद्योगिक व्यावसायिक समूहों के अधिकारियों का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल भी रहा है.

इस बीच सार्कोज़ी को लेकर भारतीय मीडिया में ख़ूब ख़बरें छपी हैं लेकिन ज़्यादातर ख़बरें उनकी नई महिला मित्र और पूर्व सुपरमॉडल कार्ला ब्रूनी को लेकर थीं.

यह उत्सुकता अभी भी बनी हुई है कि ब्रूनी उनके साथ रही हैं या नहीं.

अहम चर्चाएँ

अपनी इस यात्रा के दौरान राष्ट्रपति निकोला सार्कोज़ी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बीच द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और कई अंतरराष्ट्रीय विषयों पर चर्चा होने की संभावना है.

भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार दोनों नेताओं के बीच असैन्य परमाणु सहयोग में फ़्रांस की भूमिका पर चर्चा होगी और यह तय करने का प्रयास होगा कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) और परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों (एनएसजी) से समझौते के बाद इसे किस तरह से लागू किया जाएगा.


मिराज-2000
मिराज विमानों को आधुनिक बनाने के लिए समझौते की संभावना है

दोनों देशों के बीच इस 1.5 अरब यूरो के एक सैन्य सौदे की भी संभावना है जिसके तहत फ़्रांस भारत के 52 लड़ाकू विमानों मिराज-2000 में सुधार करके उन्हें मिराज-2009 में तब्दील करने में सहयोग करेगा.

इसके अलावा दोनों देशों के बीच कई तकनीक और व्यापार समझौतों पर हस्ताक्षर करेंगे और दोनों देशों के बीच व्यावसाय के नए लक्ष्य निर्धारित किए जाएँगे.

उल्लेखनीय है कि भारत और फ़्रांस के बीच व्यापार पिछले तीन सालों में दोगुना होकर 6.23 अरब डॉलर तक पहुँच चुका है.

फ़्रांस भारत में आँठवाँ सबसे बड़ा निवेशक देश है.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नवतेज सरना के अनुसार राष्ट्रपति सार्कोज़ी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कूटनीतिक साझा कार्यक्रम और दोनों देशों के बीच सहयोग की योजनाओं पर एक संयुक्त बयान जारी करेंगे.

संभावना है कि राष्ट्रपति सार्कोज़ी 26 जनवरी को ताज महल देखने जाएँगे और उसी दिन वे वापस फ़्रांस के लिए रवाना हो जाएँगे.

Thursday, January 24, 2008

कटिहार में भी मुर्गियाँ मारने के आदेश

पश्चिम बंगाल राज्य के नौ ज़िलों में बर्ड फ़्लू की पुष्टि होने के बाद राज्य सरकार ने मुर्गियों को मारने का अभियान और तेज़ करने का फ़ैसला लिया है।
अभी तक राज्य के नौ ज़िलों के 30 ब्लाकों और पाँच नगर निकायों में बर्ड फ़्लू की पुष्टि हो चुकी है।

उसके बाद बुधवार को बिहार सरकार ने कटिहार ज़िले के छह पंचायतों में मुर्गियों को मारने के आदेश दिए हैं।
हालांकि उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने स्पष्ट किया है कि कटिहार में बर्ड फ़लू की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है और यह क़दम ऐहतिहातन शुरु किया गया है।
उल्लेखनीय है कि ये सभी छह पंचायत पश्चिम बंगाल के मोहम्मदपुर से सटे हुए हैं।
अधिकारी इस बात की जाँच कर रहे हैं कि कहीं बर्ड फ़्लू के वायरस का मनुष्यों में तो प्रवेश नहीं हो गया है।
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार कटिहार के अधिकारियों से कहा गया है कि वे मालदा के अधिकारियों के साथ मिलकर काम करें।
उपमुख्यमंत्री मोदी ने कहा है कि वे केंद्र सरकार के सतत संपर्क में हैं।

उधर मध्यप्रदेश सरकार ने भी पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाक़ों में ऐहतियात बरतने के आदेश दिए हैं।

Wednesday, January 23, 2008

अमरीका में ब्याज दर में कटौती भी नाकाम

अमरीका के केंद्रीय बैंक फ़ेडरल रिज़र्व ने अर्थव्यवस्था और शेयर बाज़ार में घबराहट को देखते हुए लोगों का भरोसा बढ़ाने की कोशिशों के तहत ब्याज़ दरों में तीन चौथाई प्रतिशत की कमी की है।

फ़ेडरल रिज़र्व ने मंगलवार को एक आपात बैठकर करके ब्याज दरों में कटौती करने का फ़ैसला किया और इस कटौती के बाद अब यह ब्याज़ दर 3।5 प्रतिशत पर आ गई है।

लेकिन इस क़दम का भी कोई ठोस फ़ायदा नहीं हुआ है और मंगलवार को भी न्यूयॉर्क के वाल स्ट्रीट शेयर बाज़ार में गिरावट दर्ज की गई।

इससे पहले दुनिया भर के शेयर बाज़ारों में भारी गिरावट देखने को मिली जिसके बाद अमरीकी अर्थव्यवस्था में लोगों का भरोसा कुछ हिलता नज़र आया।

फ़ेडरल रिज़र्व ने गिरते हुए भरोसे को ऊपर उठाने की कोशिशों के तहत ब्याज़ दर में यह कटौती की है।

फ़ेडरल रिज़र्व ने कहा है कि उसे ऐसी सूचनाएँ मिली थीं कि मकानों की ख़रीद-फ़रोख़्त का बाज़ार गड़बड़ा रहा है और श्रम बाज़ार में भी ठंडापन है।

एक आर्थिक जानकार माइकल मेट्ज़ का कहना था कि फ़ेडरल रिज़र्व दरअसल अमरीकी अर्थव्यवस्था में मंदी की आशंका से डर गया है।

न्यूयॉर्क में एक वित्तीय कंपनी ओपनहीमर के मुख्य निवेश रणनीतिकार माइकल मेट्ज़ का कहना था, "ज़ाहिर सी बात है कि फ़ेडरल रिज़र्व के पास ऐसी कोई ताक़त नहीं है जिससे वे इस बड़ी आर्थिक मंदी को उलट सकें।"

ब्याज दर कम करने का फ़ेडरल रिज़र्व यह फ़ैसला काफ़ी चौकाने वाला है क्योंकि यह फ़ैसला इसके पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों के दायरे से बाहर लिया गया है।

इससे पहले 17 सितंबर 2001 को ब्याज दर कम की गई थी और वह 11 सितंबर 2001 के हमलों के बाद का माहौल था।

उसके भी पहले जब डॉट कॉम जगत में हड़बड़ाहट देखी गई तो उसके बाद तीन जनवरी 2001 को ब्याज दर घटाई गई थी।

अब से पहले जब फ़ेडरल रिज़र्व ने तीन चौथाई प्रतिशत यानी ।75% की कटौती की थी वो अगस्त 1982 में की थी यानी क़रीब 26 साल पहले।

इसमें बहुत बड़ा ख़तरा भी है। अगर यह कारगर साबित नहीं होता है तो लोग कहेंगे कि अब उनकी तिजौरियों में कुछ नहीं बचा है।"

Tuesday, January 22, 2008

ब्राउन ने दिया भारत को पुरज़ोर समर्थन

भारत की यात्रा के अंतिम दिन ब्रितानी प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत को स्थायी सदस्यता दिए जाने की पुरज़ोर वकालत की है।

गॉर्डन ब्राउन ने दिल्ली में आयोजित एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा, "भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और सबसे तेज़ी से दुनिया में अपनी जगह बना रहा है, दुनिया के प्रमुख मंचों पर भारत को उसकी जायज़ जगह मिलनी चाहिए।"

भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा, "भारत और चीन को दरकिनार करके कोई वैश्विक व्यवस्था काम नहीं कर सकती। मेरा मानना है कि संयुक्त राष्ट्र जैसे मंचों पर भारत को उसकी न्यायोचित जगह मिलनी चाहिए।"

भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और सबसे तेज़ी से दुनिया में अपनी जगह बना रहा है, दुनिया के प्रमुख मंचों पर भारत को उसकी जायज़ जगह मिलनी चाहिए।

गॉर्डन ब्राउन

इससे पहले भी गॉर्डन ब्राउन ने कहा था कि दुनिया भर की प्रमुख संस्थाओं में सुधार होना चाहिए ताकि भारत को सही जगह मिल सके।

प्रधानमंत्री ब्राउन का कहना था कि संयुक्त राष्ट्र, विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ऐसी संस्थाएँ हैं जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बनी थीं और अब उनमें व्यापक सुधार करने का समय आ गया है।

उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि इन संस्थाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर हुए बदलावों और एशिया की बढ़ रही भूमिका को प्रतिबिंबित करना होगा।

अड़चनें

मनमोहन सिंह ने स्वीकार किया कि संयुक्त राष्ट्र की स्थायी सदस्यता मिलने में कई अड़चनें हैं लेकिन ऐसे सुधार कभी आसान नहीं होते।

भारत और चीन को दरकिनार करके कोई वैश्विक व्यवस्था काम नहीं कर सकती। मेरा मानना है कि संयुक्त राष्ट्र जैसे मंचों पर भारत को उसकी न्यायोचित जगह मिलनी चाहिए।

मनमोहन सिंह

गॉर्डन ब्राउन ने आशा जताई कि भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता मिल सकेगी क्योंकि "पूरी दुनिया में इस बात पर तो आम सहमति है कि संयुक्त राष्ट्र के ढाँचे में परिवर्तन होना चाहिए मगर उसके तरीक़े को लेकर मतभेद हैं जिन्हें सुलझा लिया जाएगा।"

ब्रितानी प्रधानमंत्री ने कहा, "भारत और ब्रिटेन की साझीदारी सिर्फ़ दोनों देशों के लिए नहीं बल्कि पूरी दुनिया की बेहतरी में है।"

ब्राउन ने आशा जताई कि भारत सिर्फ़ आर्थिक विकास के मामले में ही नहीं बल्कि पर्यावरण को बेहतर बनाने की दिशा में भी विकासशील देशों का नेतृत्व करेगा।

भारतीय प्रधानमंत्री ने बताया कि दोनों देश आतंकवाद के ख़िलाफ़ मिलकर लड़ना जारी रखेंगे।

ब्रितानी प्रधानमंत्री ब्राउन भारत में महिला सशक्तिकरण योजनाओं के लिए 82 लाख 50 हज़ार पाउंड की सहायता राशि देने की भी घोषणा कर चुके हैं।

Monday, January 21, 2008

महमूद अब्बास की अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील

फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास ने अरब देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे ग़ज़ा में ईंधन की आपूर्ति पर लगाए गए इसराइली प्रतिबंध के मामले में हस्तक्षेप करे।
इसराइली प्रतिबंध के कारण ग़ज़ा का एकमात्र बिजली केंद्र बंद हो चुका है और इसी कारण रविवार रात पूरा शहर अंधकार में डूब गया था।

इसके कारण केवल अस्पतालों और कारखानों को ही ऊर्जा नहीं मिल पा रही, बल्कि लाखों लोग भी इससे बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
लेकिन इसराइल की सरकार का कहना है कि वह अपने 'नेशनल ग्रिड' से कुछ ऊर्जा ग़ज़ा के इलाक़े को उपलब्ध करा रहा है।
इसराइल का कहना था कि उसने ग़ज़ा की सीमा से आवाजाही और ग़ज़ा को ईंधन की आपूर्ति इसलिए बंद की थी क्योंकि इसराइल के ख़िलाफ़ वहाँ से लगातार रॉकेट हमले हो रहे थे।
कड़ाके की सर्दी

इससे पहले रविवार रात को हमास के नियंत्रण वाली ग़ज़ा पट्टी के एक मात्र बिजली उत्पादन केंद्र में ईंधन ख़त्म हो जाने के कारण उसे बंद करना पड़ा था।
ग़ज़ा
ग़ज़ा में बिजली के संकट को देखते हुए लोग मोमबत्तियाँ और बैटरियाँ ख़रीदने में जुटे

इसराइल के ग़ज़ा पट्टी की सीमा बंद करने के कारण ईंधन और ज़रूरी साज़ो-सामान की आपूर्ति बाधित हो गई थी।

रविवार को इसराइल ने कहा था कि ग़ज़ा पट्टी में पर्याप्त ईंधन मौजूद है।

जहाँ संयुक्त राष्ट्र ने ग़ज़ा के 15 लाख निवासियों के लिए संकट की घड़ी की चेतावनी दी थी वहीं रिपोर्टों के अनुसार शहर के लोग ज़्यादा से ज़्यादा मोमबत्तियाँ और बैटरियाँ ख़रीदने में जुटे हुए थे।

ग़ज़ा में कड़ाके की सर्दी पड़ रही है और बिजली की माँग अपने चरम पर है।

Saturday, January 19, 2008

अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए पैकेज

राष्ट्रपति बुश ने अमरीका की अर्थव्यवस्था को मज़बूत बनाने और उसमें तेज़ी लाने के लिए लगभग डेढ़ सौ अरब डॉलर के विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा की है।

दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले अमरीका को इन दिनों आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है और इसके लिए सरकार को अब विशेष आर्थिक पैकेज लाना पड़ा है।

उन्होंने कहा कि इस पैकेज को इतना बड़ा बनाना होगा कि जिससे इस विशाल अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थिति में एक बड़ा बदलाव आ सके।

उन्होंने कहा कि ऐसे कुछ बिंदु हैं जिनपर ख़ासतौर पर ध्यान देने की ज़रूरत है, साथ ही व्यापार के लिए राजकोषीय प्रोत्साहन भी होना चाहिए ताकि रोज़गार पैदा हों और निवेश को बढ़ावा मिले।

उन्होंने अमरीकी नागरिकों के लिए तत्काल आयकर राहत की भी बात कही जिसकी मदद से लोगों को महंगाई से निपटने में मदद मिल सके।

व्हाइट हाउस के हवाले से बताया गया है कि यह आर्थिक पैकेज अमरीका के सकल घरेलू उत्पाद का एक प्रतिशत या फिर लगभग 145 अरब अमरीकी डॉलर का हो सकता है।

पैकेज के बारे में घोषणा करते हुए राष्ट्रपति बुश ने कहा कि यह पैकेज बुनियादी तौर पर मज़बूत अमरीकी अर्थव्यवस्था के हाथ में एक इंजेक्शन लगाने की तरह है ताकि उसे स्वस्थ रखा जा सके।

संकट

पिछले दिनों एक सरकारी रिपोर्ट में कहा गया था कि अमरीका में बेरोज़गारी की दर दो साल में सबसे अधिक हो गई है।

अमरीकी राष्ट्रपति बुश
यह पैकेज बुनियादी तौर पर मज़बूत अमरीकी अर्थव्यवस्था के हाथ में एक इंजेक्शन लगाने की तरह है ताकि उसे स्वस्थ रखा जा सके
अमरीकी केंद्रीय बैंक के प्रमुख बेन बरनांके पहले ही यह कह चुके हैं कि वो करों में छूट और निवेशकों को बेहतर ऋण सुविधा देने के पक्ष में हैं। उन्होंने अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए ब्याज़ दरों में और कटौती की ज़रुरत बताई थी।

बेन के बयान को अमरीका में आर्थिक मंदी के संकेत के रुप में देखा जा रहा है और महंगाई बढ़ने की आशंका के रुप में भी।

ग़ौरतलब है कि इस दिशा में राष्ट्रपति बुश, दोनों पार्टियों के संसद सदस्यों और आर्थिक मामलों से जुड़े अधिकारियों के बीच गुरुवार को बातचीत हो चुकी है।

इस बातचीत के बाद इस बात पर सहमति बन गई थी कि अमरीकी अर्थव्यवस्था के सामने पैदा हुए संकट से उबरने के लिए एक पैकेज की ज़रूरत है।

पैकेज क्या होगा और किन बातों पर आधारित होगा, इसके बारे में गुरुवार को कोई घोषणा नहीं की गई थी। शुक्रवार को इस बारे में आगे की जानकारी राष्ट्रपति की ओर से जारी की गई।

Friday, January 18, 2008

अमरीकाः आर्थिक पैकेज पर सहमति

अमरीका में इस बात को लेकर आम सहमति बन गई है कि अमरीकी अर्थव्यवस्था के सामने पैदा हुए संकट से उबरने के लिए एक पैकेज की ज़रूरत है।

इस बारे में अमरीकी राष्ट्रपति, आर्थिक मामलों के वरिष्ठ अधिकारियों और दोनों राजनीतिक दलों के सांसदों की आपस में बातचीत भी हुई।

अभी तक की बातचीत के बाद इस बात पर सहमति बन गई है कि अमरीकी अर्थव्यव्स्था में नई जान फूंकने के लिए एक नया आर्थिक पैकेज तैयार करने की ज़रूरत है।

हालांकि आर्थिक पैकेज क्या होगा और क्या क़दम उठाए जाएंगे, इसके बारे में कोई स्पष्ट विवरण अभी तक जारी नहीं किया गया है।

जानकारी के मुताबिक़ शुक्रवार को इस बारे में राष्ट्रपति बुश अपनी योजना सामने रखेंगे।

गुरुवार की बैठक के बाद व्हाइट हाउस प्रवक्ता, टोनी फ्रैटो ने बताया कि जो भी क़दम उठाए जाएंगे, वो ठोस होंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस दिशा में तत्काल काम किया जाएगा।

डेमोक्रेट पार्टी के नेता डेविड स्कॉट ने भी ऐसा किए जाने की हिमायत की है।

संकट

उधर अमरीकी शेयर बाज़ार में भी कल मंदी देखी गई और न्यूयोर्क शेयर बाज़ार दो प्रतिशत नीचे बंद हुआ।

अमरीकी केंद्रीय बैंक के प्रमुख बेन बरनांके पहले ही यह कह चुके हैं कि वो करों में छूट और निवेशकों को बेहतर ऋण सुविधा देने के पक्ष में हैं। उन्होंने अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए ब्याज़ दरों में और कटौती की ज़रुरत बताई थी।

बेन के बयान को अमरीका में आर्थिक मंदी के संकेत के रुप में देखा जा रहा है और महंगाई बढ़ने की आशंका के रुप में भी।

पिछले दिनों एक सरकारी रिपोर्ट में कहा गया था कि अमरीका में बेरोज़गारी की दर दो साल में सबसे अधिक हो गई है।

Thursday, January 17, 2008

इराक़ के आर्थिक विकास की तारीफ़

अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ़) और संयुक्त राष्ट्र ने इराक़ के आर्थिक और राजनीतिक विकास की तारीफ़ की है।

आईएमएफ़ के मध्यपूर्व और मध्य एशिया विभाग के निदेशक मोहसिन ख़ान का कहना है कि अगले साल इराक़ के विकास में महत्वपूर्ण तेज़ी दिख सकती है।

दूसरी ओर इराक़ में संयुक्त राष्ट्र के दूत स्टैफ़न डेमिस्टूरा ने कहा है कि वे इराक़ में चल रहे राजनीतिक चर्चाओं से उत्साहित हैं और इसके लिए सरकार को बधाई देना चाहते हैं।

दो अहम अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की ये टिप्पणियाँ संयोगवश ऐसे समय पर आई हैं जब इराक़ के पिछले कुछ सप्ताह अपेक्षाकृत अच्छे गुज़रे हैं।

पिछले कुछ हफ़्तों में इराक़ में हिंसा की घटनाओं में काफ़ी कमी दिख रही है।

अर्थव्यवस्था

आईएमएफ़ ने इराक़ की अर्थव्यवस्था की एक चमकदार तस्वीर पेश की है।

संस्था का कहना है कि उसे उम्मीद है कि इस साल इराक़ के आर्थिक विकास की दर सात प्रतिशत तक होगी और यही दर अगले साल भी बनी रहेगी।

आईएमएफ़ ने कहा है कि तेल के निर्यात से भी तेज़ी आने जा रही है और यह दो लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुँच सकता है।

इससे इराक़ को होने वाली आय में भी बढ़ोत्तरी होगी।

लेकिन इसके साथ ही आईएमएफ़ ने स्पष्ट किया है कि इस विकास के बावजूद इराक़ को आर्थिक सहायता की ज़रुरत पड़ती रहेगी, ख़ासकर सुरक्षा के मामले में।

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अमरीकी सैनिकों की संख्या बढ़ने के बाद से तेल ठिकानों पर चरमपंथियों के हमले कम हुए हैं।

लेकिन अभी भी तेल से होने वाली आय के वितरण के क़ानून बनाने की बाधा खड़ी हुई है।

राजनीतिक चर्चाएँ

अर्थव्यवस्था के तेज़ी से बढ़ने की ख़बरों के बीच इराक़ में संयुक्त राष्ट्र के दूत ने राजनीतिक स्थितियों पर भी उत्साहवर्धक टिप्पणियाँ की हैं।


सद्दाम हुसैन
सद्दाम हुसैन की पार्टी के पुराने सदस्यों को नौकरियाँ लौटाई जा रही हैं

शिया और सुन्नियों के बीच चल रही चर्चा को उन्होंने उत्साहजनक बताते हुए कहा है कि इस साल की शुरुआत से उनका दृष्टिकोण लगातार बदला है।

उन्होंने 2008 को इराक़ के लिए महत्वपूर्ण वर्ष बताया है।

पिछले शनिवार को बने नए क़ानून को परिदृष्य बदलने वाला बताया है। इस क़ानून के तहत सद्दाम हुसैन की बाथ पार्टी के पुराने सदस्यों की नौकरी बहाल करने का फ़ैसला किया गया है।

अमरीकी हमले के बाद से उन्हें नौकरियों से हटा दिया गया था और बाथ पार्टी के लोगों को नौकरी पाने का हक़ नहीं था।

इस फ़ैसले के बाद से दोनों गुटों के बीच चल रही हिंसा में कमी देखी जा रही है।

लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस बदलाव का दारोमदार अगले छह से बारह महीनों में होने वाली राजनीतिक सहमतियों में आने वाली तेज़ी पर भी बहुत कुछ निर्भर करेगा।

Wednesday, January 16, 2008

बस धमाके में बीस से ज़्यादा मारे गए

श्रीलंका के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में एक बस में हुए ज़बर्दस्त विस्फोट में कम से कम 20 लोग मारे गए हैं और कई अन्य घायल हुए हैं।

इस तरह की ख़बरें आ रही हैं कि बस में कई बच्चे भी सवार थे।

श्रीलंकाई रक्षा मंत्रालय ने विस्फोट के लिए तमिल विद्रोही संगठन एलटीटीई को ज़िम्मेदार ठहराया है।

ये धमाका ऐसे समय में हुआ है जब श्रीलंका सरकार और तमिल विद्रोहियों के बीच छह वर्ष पहले हुआ संघर्ष विराम समझौता ख़त्म हो रहा है।

अस्पताल के अधिकारियों का कहना है कि विस्फोट के बाद लगभग 50 घायल लोगों को भर्ती कराया गया है।

एलटीटीई की तरफ़ से अभी तक कोई बयान नहीं आया है। हालाँकि इससे पहले हुए धमाकों में हाथ होने से तमिल विद्रोही इनकार करते रहे हैं।

श्रीलंकाई सेना और एलटीटीई के बीच वर्ष 2002 में संघर्ष विराम समझौता हुआ था लेकिन पिछले वर्ष से दोनों पक्षों के बीच झड़पें तेज हो गईं थी।

इसे देखते हुए लगभग 15 दिन पहले श्रीलंका सरकार ने समझौते को रद्द करने का फ़ैसला किया जो बुधवार से लागू होगा।

श्रीलंका में अस्सी के दशक से जारी हिंसा में अब तक 70 हज़ार से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं।

Tuesday, January 15, 2008

सऊदी अरब के दौरे पर राष्ट्रपति बुश

मध्य पूर्व देशों का दौरा कर रहे अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के सऊदी अरब पहुंचने के कुछ ही घंटों में अमरीकी प्रशासन ने सऊदी अरब को बड़े पैमाने पर हथियार बेचने की रज़ामंदी दे दी है।

अमरीकी प्रशासन ने कहा है कि सऊदी अरब को हथियार बेचने की मंशा से कांग्रेस को अवगत कराया गया है।

अमरीका और खाड़ी देशों के बीच हथियारों की बिक्री का अरबों डॉलर का सौदा है जिसके तहत सऊदी अरब को आधुनिकतम हथियार बेचे जाने हैं।

इस सौदे के तहत अमरीका सऊदी अरब को सही निशाने पर बम गिराने की तकनीक भी देने वाला है जिसकी क़ीमत क़रीब 10 करोड़ 23 लाख डॉलर आंकी गई है।

अमरीका ने हथियारों की बिक्री को आगे बढ़ाने का फ़ैसला ऐसे समय मे लिया है जब राष्ट्रपति बुश ने सऊदी अरब से ईरान पर लगाम कसने में मदद मांगी है।

हालांकिे कूटनीतिक मामलों का कहना है कि अमरीका और सऊदी अरब के बीच इस बात को लेकर मतभेद हैं कि ईरान के साथ कैसे निपटा जाए।

जहां अमरीका ईरान के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई करने का पक्ष लेता रहा है वहीं सऊदी अरब का कहना है कि ईरान को साथ मिलाकर चलने की कोशिश करनी चाहिए और देखना चाहिए कि ईरान से कहां तक बात की जा सकती है।

बुश की सऊदी अरब यात्रा के दौरान दोनों देशों के नेताओं के बीच ऊरान के अलावा इस्राइल और फ़लस्तीनी शांति प्रक्रिया के बारे में भी बातचीत होने की उम्मीद है क्योंकि पिछले कुछ समय में बुश शांति प्रक्रिया शुरु कराने की कोशिश में है जिसके लिए उन्हें अरब देशों का समर्थन भी चाहिए।

Monday, January 14, 2008

'चीन के साथ संबंधों को उच्च प्राथमिकता'

भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ के साथ अनौपचारिक बातचीत कर अपने दौरे की शुरुआत की है। इस दौरान दोनों ओर के चुनिंदा लोग ही मौजूद थे।

भारत की ओर से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन, विदेश सचिव शिवशंकर मेनन और चीन में भारत की राजदूत निरुपमा सुब्रमण्यम मौजूद थीं।

रविवार को मनमोहन सिंह ने उन स्थानों का भी दौरा किया जहाँ ओलंपिक खेल होने वाले हैं।

वो सोमवार को चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ और राष्ट्रपति हू जिंताओ से औपचारिक बातचीत करेंगे।

समाचार एजेंसियों का कहना है कि इस दौरान व्यापार को बढ़ावा देने के अलावा सीमा विवाद पर भी चर्चा होगी।

चीन के प्रधानमंत्री से मुलाक़ात से पहले प्रधानमंत्री सिंह ने कहा है कि भारत और चीन के संबंधों का नया दौर शुरू होने जा रहा है।
भारत और चीन के संबंधों का नया दौर शुरू होने जा रहा है और हम चीन के साथ संबंधों को मजबूत करने को उच्च प्राथमिकता देते हैं

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह

उनका कहना था कि हम चीन के साथ संबंधों को मजबूत करने को उच्च प्राथमिकता देते हैं।

प्रधानमंत्री सिंह का कहना था कि चीन भारत का सबसे बड़ा पड़ोसी देश है और वह भारत की पूर्वोन्मुख नीति के केंद्र में है।

प्रधानमंत्री के रूप में मनमोहन सिंह पहली बार चीन के दौरे पर हैं और पाँच साल में यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली चीन यात्रा है।

भारतीय प्रधानमंत्री की चीन यात्रा ऐसे समय पर हो रही है जब दोनों ही देशों की अर्थव्यवस्था तेज़ी से बढ़ रही है।

हालांकि यह भी तथ्य है कि 1962 के युद्ध के बाद से शुरु हुआ सीमा विवाद अब भी दोनों देशों के बीच संदेह का कारण बना हुआ है।

हिंदी के लिए सहायता

हिंदी सीखने के लिए चीन के युवाओं में दिखे उत्साह से प्रभावित प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने प्रतिष्ठित पीकिंग विश्वविद्यालय में इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडियन स्टडीज़ को 75 लाख रुपए देने की घोषणा की।


दोनों देशों के बीच सीमा विवाद पर भी चर्चा होगी

प्रधानमंत्री ने हिंदी में चीन के प्रोफ़ेसरों से उनका हालचाल जाना।
यह संस्थान चीन में भारतीय संस्कृति और हिंदी भाषा के प्रचार के लिए लंबे वक्त से काम कर रहा है।

साथ ही प्रधानमंत्री ने 2008 बीजिंग ओलंपिक खेलों के प्रस्तावित स्थल का दौरा किया। उन्होंने वहां तैयारियों का जायजा भी लिया।

प्रधानमंत्री ने ओलंपिक गाँव में करीब आधा घंटा बिताया और अपने संदेश में भारत की जनता और सरकार की ओर से इस आयोजन की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं।

Saturday, January 12, 2008

'हत्या की जाँच संयुक्त राष्ट्र से नहीं'

पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो की हत्या की जाँच संयुक्त राष्ट्र को सौंपने से इनकार कर दिया है।

बेनज़ीर भुट्टो के बेटे और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के नए प्रमुख बिलावल भुट्टो ज़रदारी बार-बार माँग करते रहे हैं कि हत्या की जाँच संयुक्त राष्ट्र के हाथों करवाई जानी चाहिए।

उन्हें भरोसा नहीं है कि पाकिस्तान सरकार की ओर से की जा रही जाँच पर्याप्त पारदर्शी होगी।

उल्लेखनीय है कि गत 27 दिसंबर को रावलपिंडी में एक राजनीतिक रैली के बाद बेनज़ीर हत्या पर गोलियाँ चलाई गई थीं फिर एक आत्मघाती हमला किया गया था।

पहले तो सरकार ने कहा था कि बेनज़ीर की मौत कार की छत पर लगे लीवर से लगी चोट से हुई थी लेकिन बाद में परवेज़ मुशर्रफ़ ने माना था कि हो सकता है कि बेनज़ीर भुट्टो को गोली मारी गई हो।

पाकिस्तान के विपक्षी दलों का कहना है कि जाँच के प्रति सरकार का रवैया ठीक नहीं है।

'तुलना ठीक नहीं'

इन मांगों पर परवेज़ मुशर्रफ़ ने अपनी चुप्पी फ़्रांसिसी अख़बार 'ला फ़िगारो' को दिए गए एक साक्षात्कार में तोड़ी है।

परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा है कि हत्या की जाँच के लिए पाकिस्तान की अपनी संस्थाएँ हैं और उनकी सहायता के लिए ब्रिटिश पुलिस को भी बुला लिया गया है।

राष्ट्रपति मुशर्रफ़ का कहना था कि पाकिस्तान की तुलना लेबनान से करना ठीक नहीं, जहाँ पूर्व प्रधानमंत्री रफ़ीक हरीरी की हत्या की जाँच का काम संयुक्त राष्ट्र को सौंपा गया है।

उन्होंने उम्मीद जताई है कि बेनज़ीर भुट्टो की हत्या की जाँच के नतीजे अगले महीने होने वाले चुनावों के पहले सार्वजनिक कर दिए जाएँगे।

उल्लेखनीय है कि चुनाव 18 फ़रवरी को करवाने की घोषणा की गई है।

Friday, January 11, 2008

सर एडमंड हिलेरी का निधन

दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर पहली बार चढ़ाई करने में सफल रहे न्यूज़ीलैंड के पर्वतारोही सर एडमंड हिलेरी का निधन हो गया है।

हिलेरी 88 वर्ष के थे। हिलेरी और नेपाल के पर्वतारोही शेरपा तेनज़िंग नोर्गे ने 29 मई 1953 में पहली बार दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने में सफलता प्राप्त की थी।

हिलेरी और नोर्गे का वीडियो देखिए

हिलेरी के निधन की घोषणा करते हुए न्यूज़ीलैंड की प्रधानमंत्री हेलन क्लार्क ने कहा कि वो वो एक हीरो थे और पूरे देश को उनकी मौत पर गहरा दुख है।

पिछले अप्रैल महीने में नेपाल में गिर जाने के बाद से ही हिलेरी की तबीयत ठीक नहीं थी।

एवरेस्ट के बाद हिलेरी ने 50 और 60 के दशक में हिमालय की दस और चोटियों पर भी चढ़ाई की।

न्यूज़ीलैंड की प्रधानमंत्री का कहना था कि सर एडमंड हिलेरी दुनिया में न्यूज़ीलैंड के सबसे लोकप्रिय नागरिक कहे जा सकते हैं।

उन्होंने कहा ' हिलेरी ने न केवल एवरेस्ट फतह किया बल्कि उन्होंने बाद में भी एक ऐसा जीवन जिया जिससे लोग प्रेरणा ले सकते हैं। '

19 जुलाई 1919 को जन्मे हिलेरी द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान पायलट भी रहे लेकिन बाद में उनकी पहचान पर्वतारोही के रुप में बनी।

वो 1980 में भारत में न्यूज़ीलैंड के राज़दूत भी रहे।

हिलेरी 1958 में राष्ट्रकुल के एक दल के साथ दक्षिणी ध्रुव भी गए थे और 1985 में उत्तरी ध्रुव पर पहुंचे थे।
हालांकि वो ऊत्तरी ध्रुव पर अमरीकी अंतरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रांग के साथ एक छोटी स्की प्लेन में पहुंचे थे।

हिलेरी ने अपना सारा जीवन कुंभू ग्लेशियर के पास रहने वाले नेपाली शेरपाओं के लिए कार्य करने में लगा दिया था। उनके इस योगदान को देखते हुए वर्ष 2003 में उन्हें नेपाल की सम्मानित नागरिकता दी गई थी।

Thursday, January 10, 2008

टाटा की लखटकिया कार आज लाँच होगी

दिल्ली में चल रहे ऑटो एक्सपो- 2008 में पहली बार टाटा मोटर्स अपनी लखटकिया कार को पेश करने जा रहा है। ये दुनिया की सबसे सस्ती कार मानी जा रही है।

अभी तक इस कार को लेकर कई अटकलें लगाई जा रही थीं।

टाटा मोटर्स ने अपनी कार से जुड़ी हर बात के लिए बेहत गोपनीयता बरती है।

ये कार कैसी होगी, इसकी कीमत एक लाख कैसे रखी जाएगी, इस संबंध में टाटा ने क्या किया है, ये सब तथ्य पूरी तरह से गोपनीय रखे गए हैं।

कंपनी के चेयरमैन रतन टाटा ने उम्मीद जताई कि इस कार के पेश होने से लोगों को ज़िंदगी सुविधाजनक और सुरक्षित हो जाएगी।

एक लाख रुपए की कार को लेकर न केवल उपभोक्ता बल्कि अन्य कार उत्पादक कंपनियाँ भी बेहद उत्सुक हैं।

कार विशेषज्ञ टूट धवन को इसकी क़ीमत पर संदेह है। हालांकि उनका मानना है कि ये एक नया सेगमेंट तैयार करेगी। मेरी अपेक्षा है कि कार में चार लोगों के बैठने की जगह हो और ये आज के जमाने की दिखे
दिलीप छाबड़िया, कार डिज़ाइनर उनका कहना है कि इसकी शोरूम क़ीमत एक लाख रुपए होगी। इसके बाद इस पर कई तरह के कर लगेंगे, इंश्योरेंस होगा जिसके बाद इसकी क़ीमत बढ़ जाएगी।
इस कार को बेहद कड़ी सुरक्षा के बीच दिल्ली लाया जा रहा है।
टाटा मोटर्स से जुड़े लोगों के अलावा किसी और को इस कार की एक झलक भी देखने को नहीं मिली है।
ऑटो एक्सपो में गुरुवार को होने वाले अनावरण के बाद ही सभी जान पाएँगे कि कार दिखती कैसी है।
जेडी पॉवर एशिया के मोहित अरोड़ा का कहना है कि देखने के बाद ही पता चलेगा कि उत्पाद कैसा है।
उनका कहना था कि ये कार की तरह लगनी भी चाहिए।

जाने माने कार डिज़ाइनर दिलीप छाबड़िया का कहना है कि उनकी अपेक्षा है कि कार में चार लोगों के बैठने की जगह हो और ये आज के जमाने की दिखे।

माना जा रहा है कि अगस्त के आसपास यह कार भारतीय सड़क पर दौड़ती नजर आएगी।

Wednesday, January 9, 2008

हिलेरी क्लिंटन जीतीं, ओबामा पिछड़े

अमरीकी राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी हासिल करने की दौड़ में न्यू हैम्पशायर में हुए मतदान में डेमोक्रेटिक पार्टी की हिलेरी क्लिंटन ने अपने साथी बराक ओबामा को कड़े मुक़ाबले में हरा दिया है।

हिलेरी क्लिंटन को 39 फ़ीसदी मत मिले जबकि बराक ओबामा को 36 फ़ीसदी मत हासिल हुए।

इसके पहले चुनावी सर्वेक्षणों में बराक ओबामा की बढ़त दिखाई गई थी लेकिन नतीजे इसके उल्टे आए।

बराक ओबामा ने अपनी हार स्वीकार कर ली, साथ ही उन्होंने अपने समर्थकों से कहा कि वो अमरीका में बदलाव की मुहिम को जारी रखेंगे।

इस जीत से हिलेरी क्लिंटन की राष्ट्रपति पद की दावेदारी और मज़बूत होगी। हालांकि अभी कई अन्य राज्यों में उम्मीदवारी के लिए मतदान होना है।

हिलेरी क्लिंटन का मुक़ाबला उदारवादी के छवि के ओबामा से है जिन्होंने इराक़ युद्ध का विरोध किया था।

अफ़्रीकी अमरीकी मूल के ओबामा पहले ऐसे नेता हैं जिन्हें डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद का मज़बूत दावेदार माना जा रहा है।

पिछले हफ़्ते ओबामा ने आयोवा में जीत दर्ज की थी जबकि रिपब्लिकन पार्टी की ओर से माइक हकबी मतदाताओं की पहली पसंद रहे थे।

आयोवा के मतदान में हिलेरी तीसरे नंबर पर रही थीं।

जॉन मैक्केन जीते

दूसरी ओर राष्ट्रपति बुश की रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवारों में सीनेटर जॉन मैक्केन ने जीत हासिल कर ली है.


जॉन मैक्केन
रिपब्लिकन पार्टी के जॉन मैक्केन ने जीत हासिल की

उन्होंने अपने साथी उम्मीदवार मिट रोमनी को पीछे छोड़ दिया.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि जॉन मैक्केन ने ज़बरदस्त वापसी की है क्योंकि आयोवा के बाद ऐसा माना जाने लगा था कि वो उम्मीदवारी की दौड़ से बाहर हो गए हैं.

न्यू हैम्पशायर के स्टेट सेक्रेटरी बिल गार्डनर का अनुमान है कि लगभग पाँच लाख लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया.

सभी दावेदार उम्मीदवारों के चयन के लिए पाँच फरवरी को 20 राज्यों में होने वाले चुनाव से पहले अपने-अपने पक्ष में मुहिम तेज करने की कोशिश कर रहे हैं.

हैम्पशायर के बाद अब उत्तरी कैरोलिना में कॉकस चुनाव होने हैं.

Tuesday, January 8, 2008

भारत के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर संकट बरक़रार

ऑस्ट्रेलिया से प्राप्त रिपोर्टों में कहा गया है कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने कहा है कि नस्लभेद के आरोपों के मामले को अगर 24 घंटे के भीतर नहीं सुलझा लिया गया तो भारतीय टीम दौरा रद्द कर सकती है।

बीसीसीआई ने मंगलवार को अपनी कार्यसमिति की भी बैठक दिल्ली में बुलाई है जिसमें आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा।

बीसीसीआई ने हरभजन सिंह पर नस्लभेदी टिप्पणी के कारण तीन टेस्ट मैचों के प्रतिबंध के फ़ैसले के विरूद्ध अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद यानी आईसीसी को अपील भेजी है।

बीसीसीआई को मंगलवार को आईसीसी से जवाब की उम्मीद है।

बोर्ड के अध्यक्ष शरद पवार ने कहा है कि टीम को अगला निर्देश मिलने तक सिडनी में ही रहने के लिए कहा गया है।

बीसीसीआई की मुख्य रुप से दो माँगें हैं। एक तो यह कि कथित नस्लभेदी टिप्पणी के लिए हरभजन सिंह पर की गई कार्रवाई को अंतिम फ़ैसले तक स्थगित रखा जाए।

बीसीसीआई का कहना है कि हरभजन सिंह पर पाबंदी ग़लत ढंग से लगाई गई है और यह फ़ैसला एकतरफ़ा है।

और दूसरा यह कि दूसरे टेस्ट मैच में विवादित फ़ैसले देने वाले अंपायर बकनर को तीसरे टेस्ट मैच से हटा लिया जाए।

दौरा अटका

बीसीसीआई ने एक बयान में कहा है कि हरभजन पर पाबंदी के मामले में अपील की कार्रवाई पूरी होने तक टीम सिडनी में ही रुकी रहेगी।
बकनर और हरभजन सिंह
अंपायर बकनर के फ़ैसलों के लेकर भारी नाराज़गी है

सोमवार की भारतीय क्रिकेट टीम को अगले टेस्ट मैच के लिए कैनबरा रवाना होना था।

हरभजन सिंह पर यह आरोप लगा था कि उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी एंड्रयू साइमंड्स के ख़िलाफ़ नस्लवादी टिप्पणी की है।

इसके बाद हरभजन सिंह पर तीन टेस्ट मैचों के लिए प्रतिबंध लगा दिया गया था।

हालांकि हरभजन सिंह का कहना है कि उनपर लगा यह आरोप ग़लत है और उन्होंने कोई नस्लवादी टिप्पणी नहीं की।

बीसीसीआई अध्यक्ष शरद पवार ने सोमवार को इस संबंध में दिल्ली में एक बैठक बुलाई थी।

बैठक के बाद बीसीसीई उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने कहा था कि बीसीसीआई अंतरराष्ट्रीय खेल परिषद से अनुरोध करेगा कि जब तक इस अपील पर फ़ैसला नहीं हो जाता तब तक हरभजन पर पाबंदी संबंधी आदेश रोक दिया जाए।

साथ ही दोनों अंपायरों स्टीव बकनर और मार्क बेन्सन को भारतीय मैचों के दौरान अंपायरिंग की ज़िम्मेदारी न सौंपी जाए।

सिडनी में आईसीसी के सामने दो ऐसी टीमों का विवाद है जो दो अलग-अलग मामलों में दुनिया की नंबर वन टीमें हैं।

ऑस्ट्रेलियाई टीम के पास उनका अपना अच्छा खेल है तो भारतीय टीम के पास अथाह पैसा है।

आंकड़े बताते हैं कि आईसीसी को होने वाली आय का 70 प्रतिशत भारत में खेले जाने वाले क्रिकेट के कारण आता है और ख़ुद बीसीसीआई दुनिया का सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड है।

Monday, January 7, 2008

हरभजन पर पाबंदी के ख़िलाफ़ अपील

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने हरभजन पर तीन मैचों के लिए पाबंदी लगाने के मैच रेफ़री के फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील करने का निर्णय किया है।
बीसीसीआई के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने कहा कि टीम प्रबंधन इस बारे में प्रक्रिया का पालन करते हुए अपील करेगा।
उनका कहना था कि हरभजन भी अपील करेंगे और बीसीसीआई भी अपील करेगा।
चेतन चौहान, भारतीय टीम के मैनेजर

लेकिन उन्होंने इससे इनकार किया कि हरभजन सिंह पर पाबंदी की घोषणा के बाद भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया दौरे से वापस आने की सोच रही है।

राजीव शुक्ला ने इसे ग़लत बताया और कहा कि भारतीय टीम का ऑस्ट्रेलिया दौरा जारी रहेगा।

ग़ौरतलब है कि ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी एंड्रयू साइमंड्स के ख़िलाफ़ नस्लभेदी टिप्पणी के मामले में भारतीय खिलाड़ी हरभजन सिंह पर तीन टेस्ट मैचों की पाबंदी लगाई गई है।

मैच रेफ़री के माइक प्रॉक्टर ने माना है कि हरभजन ने साइमंड्स के ख़िलाफ़ टिप्पणी की और ये टिप्पणी नस्लभेदी थी।

भारतीय टीम का विरोध

भारतीय क्रिकेट टीम के मैनेजर चेतन चौहान ने हरभजन सिंह पर कथित नस्लभेदी टिप्पणी करने के आरोप में लगाए गए तीन टेस्ट मैचों के प्रतिबंध को अनुचित बताते हुए कहा, '' सुनवाई में हमारे पक्ष की अनदेखी कर दी गई।''


साइमंड्स
साइमंड्स ने पहले भी नस्लभेदी टिप्पणियों के आरोप लगाए थे

चेतन चौहान ने कहा, '' बैठक में हमारे पक्ष को पूरी तरह नकार दिया गया और दो आस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों के बयान को मैच रेफ़री माइक प्रॉक्टर ने प्राथमिकता देते हुए हरभजन पर प्रतिबंध लगाने का फ़ैसला कर डाला।''
उन्होंने बताया, 'साइमंड्स ने हरभजन पर 'मंकी' कहने का आरोप लगाया था जिसका उनके साथी खिलाड़ियों माइकल क्लार्क और मैथ्यू हेडन ने समर्थन किया था।'
हालाँकि हरभजन सिंह ने इससे इनकार किया है।
एंड्रयू साइमंड्स के ख़िलाफ़ नस्लभेदी टिप्पणी का मामला उस समय आया जब टेस्ट के तीसरे दिन हरभजन सिंह और सचिन तेंदुलकर बल्लेबाज़ी कर रहे थे।
बाद में रिकी पोंटिंग और एंड्रयू साइमंड्स ने इसकी शिकायत की कि हरभजन सिंह ने नस्लभेदी टिप्पणी की है।
पिछले साल अक्तूबर में जब ऑस्ट्रेलिया की टीम ने भारत का दौरा किया था, उस समय भी एंड्रयू साइमंड्स के ख़िलाफ़ नस्लभेदी टिप्पणी का मामला आया था। उस समय भारतीय दर्शकों पर ये आरोप लगा था।

Saturday, January 5, 2008

'कीनिया मानवीय आपदा की ओर'

संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों का कहना है कि कीनिया में मानवीय आपदा की स्थिति पैदा हो गई है।

पिछले हफ़्ते हुए विवादास्पद राष्ट्रपति चुनाव के बाद भड़की हिंसा में तीन सौ से ज़्यादा लोग मारे गए और लगभग एक लाख 80 हज़ार लोग बेघर हो गए हैं।
सहायता एजेंसियों का कहना है कि वो इन लोगों को शरण और भोजन मुहैया कराने में असमर्थ हैं।
कीनिया में संयुक्त राष्ट्र के अधिकारी एलिज़ाबेथ लवांगा ने बीबीसी को बताया कि कीनिया के हालात से दूसरे अफ़्रीकी देश भी प्रभावित हो रहे हैं।

हिंसा के कारण सोमालिया, दक्षिणी सूडान और कॉंगो में भी राहत सामग्री नहीं पहुँच पा रही है।

कीनिया के एलडोरेट शहर में हज़ारों लोगों ने एक चर्च में पनाह ली है। इसी शहर में तीस लोगों को ज़िंदा जला दिया गया था।

कूटनियक प्रयास

इस बीच राजनीतिक अस्थिरता को ख़त्म करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने कूटनीतिक प्रयास तेज कर दिए हैं।
अमरीकी दूत जेनदाई फ़्रेज़र कीनिया की राजधानी नैरोबी पहुँच गए हैं।
वो राष्ट्रपति मवाई किबाकी और राष्ट्रपति चुनाव में पराजित विपक्षी नेता राइला ओडिंगा से मुलाक़ात करेंगे।
अमरीका का कहना है कि वो चाहता है कि दोनों नेता आपस में मिलकर कोई राजनीतिक समाधान निकालें।

कीनियाई सरकार का कहना है कि राष्ट्रपति किबाकी दोबारा चुनाव कराने के ख़िलाफ़ नहीं हैं, बशर्ते अदालत ऐसा आदेश दे।
इससे पहले ओडिंगा ने अंतरराष्ट्रीय निगरानी दोबारा राष्ट्रपति चुनाव कराए जाने की माँग की थी।

Friday, January 4, 2008

ओबामा और हकबी लोगों की पसंद

डेमोक्रैटिक पार्टी के बराक ओबामा और रिपब्लिकन माइक हकबी अमरीकी प्रांत आयोवा से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार चुने गए हैं.

राष्ट्रपति चुनाव नवंबर में होने हैं.

डेमोक्रैटिक पार्टी की और से बराक ओबामा ने बड़े अंतर से अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वियों को पछाड़ा है जिनमें पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की पत्नी हिलेरी क्लिंटन और जॉन एडवार्ड्स शामिल हैं.

इस जीत से ओबामा की दावेदारी और मज़बूत होगी. आयोवा के बाद हैम्पशायर और उत्तरी कैरोलिना में कॉकस चुनाव होने हैं.

सीनेट में उदारवादी के छवि के ओबामा ने इराक़ युद्ध का विरोध किया था. अफ़्रीकी अमरीकी मूल के ओबामा पहले ऐसे नेता हैं जिन्हें राष्ट्रपति पद का मज़बूत दावेदार माना जा रहा है.

हकबी की दावेदारी

दूसरी ओर आयोवा के लोगों ने रिपब्लिकन पार्टी के दावेदार माइक हकबी को अपना उम्मीदवार बनाया है.


हिलेरी क्लिंटन पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की पत्नी हैं

रुढिवादी छवि के हकबी गर्भपात और समलैंगिक विवाह को उचित ठहराने के ख़िलाफ़ रहे हैं.

वो इराक़ युद्ध का समर्थन करते रहे हैं और वहाँ सैनिकों की संख्या बढ़ाने के पक्ष में भी रहे हैं.

आयोवा के साथ ही राष्ट्रपति चुनाव प्रक्रिया शुरू हो गई है और इस पद की उम्मीदवारी के दावेदार जनता की राय अपने पक्ष में करने की जीतोड़ कोशिश कर रहे हैं.

आयोवा में अधिकतर जनमत सर्वेक्षणों में कहा जा रहा था कि डेमोक्रैटिक पार्टी में हिलेरी क्लिंटन, बराक ओबामा और जॉन एडवार्ड्स के बीच कड़ी टक्कर होगी लेकिन ओबामा सबसे आगे निकल गए.

रिपब्लिकन पार्टी में माइक हकबी को दूसरे दावेदार मिट रॉमनी से चुनौती मिल रही थी.

आयोवा में रायशुमारी के लिए 1780 केंद्र बनाए गए थे. राष्ट्रपति चुनाव के लिए अमरीका में हर प्रांत के लोगों को दोनों दलों से एक-एक उम्मीदवार तय करने का मौका मिलता है.

रिपब्लिकन पार्टी राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार चुनने के लिए आसान तरीका अपनाती है.

दूसरी ओर डेमोक्रैटिक पार्टी का तरीका अलग है. इसमें मतदाता एक कमरे के अलग-अलग कोनों में खड़े होकर विभिन्न नेताओं के प्रति अपना समर्थन जताते हैं.

लेकिन सभी दावेदारों का ध्यान सिर्फ़ आयोवा पर ही नहीं था. रिपब्लिकन पार्टी के रूडी गिलियानी फ़्लोरिडा में हैं जहाँ के लोग 29 जनवरी को राष्ट्रपति पद के दावेदारों पर अपनी राय ज़ाहिर करेंगे.

गिलियानी का आयोवा में ख़ास समर्थन नहीं था लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर वो आगे चल रहे हैं.

Thursday, January 3, 2008

'चुनाव टालने के अलावा कोई रास्ता नहीं था'

पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा है कि देश में नाज़ुक राजनीतिक स्थिति को देखते हुए चुनाव स्थगित करने के अलावा कोई और चारा नहीं था.

पाकिस्तान चुनाव आयोग ने आठ जनवरी को होने वाले आम चुनावों को स्थगित कर दिया है और अब ये चुनाव 18 फ़रवरी को होंगे.

आयोग के मुताबिक ये फ़ैसला पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) की नेता बेनज़ीर भुट्टो की हत्या के बाद के हालात को देखते हुए लिया गया है.

राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने देश के सभी राजनीतिक दलों से विरोध के रास्ते पर चलने के बजाए सहयोग और शांति कायम करने पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की है.

दूसरी ओर विपक्षी दलों ने चुनाव स्थगित किए जाने का विरोध किया है.

मुशर्रफ़ की दलील

परवेज़ मुशर्रफ़ का कहना था, "मैं सभी राजनीतिक दलों से कहूंगा कि वो समझने की कोशिश करें कि अभी कितनी संवेदनशील स्थिति है. पाकिस्तान के बारे में सोचिए न कि अपने बारे में. हम पहले से ही संकट में हैं. कृपया स्थिति और ख़राब न बनाएं."


मैं सभी राजनीतिक दलों से कहूंगा कि वो समझने की कोशिश करें कि अभी कितनी संवेदनशील स्थिति है. पाकिस्तान के बारे में सोचिए न कि अपने बारे में

परवेज़ मुशर्रफ़

लेकिन विपक्षी पार्टियाँ मुशर्रफ़ के तर्कों से सहमत नहीं हैं और उनका कहना है कि चुनावों को छह हफ़्ते के लिए आगे बढ़ाने का कोई तुक नहीं था.

चुनाव टालने की घोषणा बुधवार को मुख्य चुनाव आयुक्त काज़ी मोहम्मद फ़ारुख ने की.

उनका कहना था कि बेनज़ीर भुट्टो की हत्या के बाद हिंसा को देखते हुए आठ जनवरी को चुनाव कराना संभव नहीं है.

उन्होंने कहा, "अब चुनाव के लिए मतदान आठ जनवरी की बजाय 18 फ़रवरी को होगा. '

पीपीपी और नवाज़ शरीफ़ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) ने घोषणा कर दी थी कि वो चुनाव में हिस्सा लेना चाहते हैं.

Wednesday, January 2, 2008

'बेनज़ीर धांधली पर दस्तावेज़ देने वाली थीं'

अमरीकी मीडिया का कहना है कि बेनज़ीर भुट्टो अपनी हत्या की रात चुनाव में सरकार की तरफ़ से धांधली के कथित मंसूबे पर एक दस्तावेज़ दो अमरीकी सांसदों को देना चाहती थीं.

अमरीकी कॉंग्रेस के ये दोनों सदस्य उस समय पाकिस्तान के दौरे पर थे.

पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो 27 दिसंबर को रावलपिंडी में हुए आत्मघाती हमले में मारी गईं थीं.

160 पन्नों के इस दस्तावेज़ में आरोप लगाया गया है कि मुशर्रफ़ सरकार ने बैलट पेपर में गड़बड़ी, उम्मीदवारों को धमकाने और आतंकवाद के ख़िलाफ़ जंग के लिए अमरीका से मिले संसाधनों का इस्तेमाल कर चुनावी नतीजों को बदलने की साजिश बनाई थी.

पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) ने दावा किया है कि अमरीका की तरफ़ से आतंकवाद के ख़िलाफ़ जंग के लिए पाकिस्तान सरकार को जो संसाधन मिलते हैं उसका 90 फ़ीसदी इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों की जासूसी पर किया जा रहा है.

इस दस्तावेज़ में कहा गया है जहां कहीं भी विपक्षी उम्मीदवार मज़बूत स्थिति में है, उन इलाक़ों में मतदान केंद्रों पर विवाद खड़ा करने और ज़रूरत पड़े तो गोलियाँ चला कर मतदान को तीन-चार घंटे तक रुकवा देने की साजिश रची गई.

पाकिस्तान सरकार ने इन आरोपों का खंडन किया है और इस दस्तावेज़ को बेबुनियाद क़रार दिया है.

राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के प्रवक्ता राशिद क़ुरैशी ने इन आरोपों को हास्यास्पद बताया है. उन्होंने कहा कि चुनाव पारदर्शी, निष्पक्ष और स्वतंत्र तरीके से कराए जाएंगे.

पीपीपी के एक नेता ने बताया है कि ये दस्तावेज़ बेनज़ीर के कहने पर तैयार की गई थी और इसमें वो जानकारियाँ दर्ज की गई हैं जो ख़ुफ़िया विभाग और पुलिस सूत्रों से हासिल हुई थी.

अमरीकी टेलीविज़न चैनल सीएनएन के मुताबिक बेनज़ीर भुट्टो के नज़दीकी रह चुके पीपीपी के नेता लतीफ़ खोसा ने कहा है कि बेनज़ीर भुट्टो अपनी हत्या की रात चुनाव में धांधली की साजिश से संबंधित सबूत जारी करने जा रही थीं.

उनका कहना है कि इस दस्तावेज़ के ऊपर लिखा था 'जम्हूरियत के माथे पर एक और धब्बा'.

Tuesday, January 1, 2008

पाकिस्तान चुनाव आयोग करेगा फ़ैसला

पाकिस्तान चुनाव आयोग आज इस बात का फ़ैसला करेगा कि देश में आगामी आम चुनावों निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आठ जनवरी को ही कराए जाएं या नहीं।

उल्लेखनीय है कि पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो की मौत के बाद चुनावों को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है।

पाकिस्तान से आ रही अपुष्ट ख़बरों में कहा जा रहा है कि सुरक्षा की स्थिति को देखते हुए चुनावों को कुछ समय के लिए टाला जा सकता है।

चुनाव आयोग की सोमवार को बैठक हुई थी लेकिन को फ़ैसला नहीं किया गया।

बैठक के बाद आयोग ने कहा कि उसने पाकिस्तान के चारों प्रातों की सरकारों से रिपोर्ट माँगी है कि वो चुनाव के लिए कितनी तैयार हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो की मौत के बाद हुई हिंसा में कई जगह मतपेटियाँ जल दी गईं। मतपत्रों की छपाई और उनके वितरण के काम में भी बाधा आई है।

हालांकि बेनज़ीर की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी ने चुनावों में हिस्सा लेने का ऐलान कर दिया है।
पीपीपी हिस्सा लेगी

दूसरी तरफ़ बदले हुए हालात में पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग ( नवाज़) ने भी चुनावों में हिस्सा लेने की बात कही है।

पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) के नेता नवाज़ शरीफ़ ने सोमवार को एक संवाददाता सम्मेलन में साफ किया कि उनकी पार्टी चुनावों में हिस्सा लेगी।

नवाज़ शरीफ़ ने इस मौके पर राष्ट्रपति मुशर्रफ़ पर निशाना साधा और कहा कि उन्हें तत्काल अपना पद छोड़ देना चाहिए।

अब तक पीएमएल चुनावों का बहिष्कार कर रहा था।

इसके अलावा राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के समर्थन वाली पाकिस्तान मुस्लिम लीग ( क्यू) ने पहले से ही चुनावों को तय समय पर करवाने की हिमायत करता आ रहा है।