Saturday, August 11, 2007

असम में 12 हिंदीभाषियों की हत्या

भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम में शुक्रवार देर रात संदिग्ध चरमपंथियों ने 12 हिंदीभाषी लोगों की गोली मार कर हत्या कर दी।

इस हफ़्ते हिंदीभाषियों पर हुआ यह दूसरा हमला है। इससे पहले बुधवार की रात कारबी आंगलांग ज़िले में चरमपंथियों ने आठ हिंदी भाषी लोगों की हत्या कर दी थी।

ताज़ा हमला भी कारबी आंगलांग ज़िले में ही हुआ है। अधिकारियों के मुताबिक शुक्रवार देर रात 20 से 25 लोगों का हथियारबंद दस्ता बोकाजाम पुलिस थाने के डाला गाँव पहुँचा।

इन संदिग्ध चरमपंथियों ने गाँव में रहने वाले हिंदीभाषी लोगों के घरों में पहले आग लगा दी और जब लोग घरों से निकल कर भागने लगे तो उन पर ताबड़तोड़ गोलियाँ चलाई।

12 हिंदीभाषी मौके पर ही मारे गए और 15 गंभीर रूप से घायल हैं जिनमें से कइयों की स्थिति गंभीर है। इसलिए आशंका है कि मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है।

हमला स्वतंत्रता दिवस से महज कुछ दिनों पहले हुआ है। हर साल संदिग्ध चरमपंथी स्वतंत्रता दिवस से पहले इस तरह के हमले करते हैं।

इस माह हिंदीभाषियों पर हुए हमले में 23 लोग मारे जा चुके हैं। इनमें से अधिकतर बिहार और उत्तर प्रदेश से आकर बसे मज़दूर हैं।

चरमपंथियों की नई रणनीति

पुलिस का कहना है कि दोनों हमलों में यूनाइटेड लिबरेशन फ़्रंट ऑफ़ असम (अल्फ़ा) की सहयोगी चरमपंथी संगठन काबरी नेशनल लिबरेशन फ़्रंट (केएनएलएफ़) का हाथ हो सकता है।

ग़ौर करने वाली बात ये है कि पिछले कुछ समय में उन जगहों पर हिंदीभाषियों को निशाना बनाया गया है जहाँ उनकी संख्या कम है।

पहले तिनसुकिया और डिब्रूगढ़ जैसे ज़िलों में हमले होते थे जहाँ हिंदीभाषियों की आबादी अधिक है।

लेकिन राज्य सरकार ने इन ज़िलों में सुरक्षा में व्यापक इंतज़ाम किए हैं जिसके कारण चरमपंथियों ने भी रणनीति बदल ली है।

अब वे कारबी जैसे पहाड़ी इलाक़ों में हमले कर रहे हैं जहाँ हिंदीभाषियों की छिटपुट संख्या है।

पिछले साल सितंबर में अल्फ़ा और सरकार के बीच बातचीत टूट जाने के बाद चरमपंथी हमले तेज़ हुए हैं। उसके बाद से लेकर अब तक लगभग 150 हिंदीभाषी मारे गए हैं।



Friday, August 10, 2007

उपराष्ट्रपति पद के लिए मतदान शुरू

भारत में उपराष्ट्रपति पद के लिए आज मतदान हो रहा है। मुक़ाबला त्रिकोणीय है लेकिन यूपीए-वाम मोर्चे के उम्मीदवार हामिद अंसारी की जीत तय मानी जा रही है।

एनडीए की ओर से नज़मा हेपतुल्ला और तीसरे मोर्चे की ओर से रशीद मसूद अन्य उम्मीदवार हैं।

यूपीए-वाम मोर्चे के हामिद अंसारी को बहुजन समाजवादी पार्टी(बसपा) का भी समर्थन मिल रहा है।

तीसरे मोर्चे के नेता सार्वजनिक तौर पर स्वीकार कर चुके हैं कि वे केवल अपनी पहचान दर्ज कराने के लिए चुनाव लड़ रहे हैं। इस बीच जनता दल (सेक्युलर) ने मतदान में भाग नहीं लेने का फ़ैसला किया है।

एनडीए गठबंधन की अगुआई कर रही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की नेता सुषमा स्वराज का कहना है कि हार-जीत अलग बात है लेकिन यूपीए के लिए मैदान खाली नहीं छोड़ा जा सकता।

हालाँकि उपराष्ट्रपति चुनाव से भाजपा और शिवसेना की दूरियाँ कम हुई हैं। राष्ट्रपति चुनाव में शिवसेना ने एनडीए से अलग रूख कायम करते हुए यूपीए-वाम मोर्चे की उम्मीदावर प्रतिभा पाटिल को वोट दिया था।

लेकिन इस बार शिवसेना ने संकते दिए हैं कि उसके सांसद उपराष्ट्रपति चुनाव में एनडीए उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करेंगे।

राष्ट्रपति चुनाव के विपरीत उपराष्ट्रपति चुनाव के निर्वाचक मंडल में केवल सांसद शामिल होते हैं विधायक नहीं।

लोकसभा और राज्यसभा के 788 सदस्यों में बसपा को मिलाकर यूपीए-वाम मोर्चे के उम्मीदवार को 425 सांसदों का समर्थन प्राप्त है जबकि एनडीए को केवल 240 सांसदों समर्थन मिल रहा है।

इस चुनाव की ख़ासियत यह है कि तीनों दावेदार मुस्लिम समुदाय से हैं।

Thursday, August 9, 2007

'पाकिस्तान में आपातकाल की संभावना'

पाकिस्तान के सूचना उपमंत्री तारिक अज़ीम का कहना है कि देश के उत्तर पश्चिमी इलाक़ों में बिगड़ती परिस्थितियों के मद्देनज़र आपातकाल लगाने की संभावना को नकारा नहीं जा सकता है।

हालांकि संसदीय मामलों के मंत्री शेर अफगान नियाज़ी ने अभी आपातकाल लगाए जाने की संभावना से इंकार किया है। उन्होंने कहा कि ये अफवाह मीडिया की फैलाई हुई है।

उल्लेखनीय है कि बुधवार को राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने क़ानून एवं व्यवस्था से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बैठकें की हैं जिसके बाद इस संबंध में कई अफ़वाहें चल रही हैं कि जल्दी ही देश में आपातकाल की घोषणा की जाने वाली है।

इस संबंध में बीबीसी उर्दू सेवा को दिए एक इंटरव्यू में सूचना उपमंत्री तारिक़ अज़ीम ने कहा कि अफ़गानिस्तान से सटे सीमावर्ती इलाक़ों की ख़राब स्थिति को देखते हुए आपातकाल लगाने की संभावना है।

उनका कहना था, "देखिए संविधान में आपातकाल लगाने का प्रावधान है। आतंक के ख़िलाफ युद्ध में सूबा सरहद मे स्थिति ख़राब है। अगर सरकार को लगा कि आपातकाल लगाने से स्थिति बेहतर हो सकती है तो इमरजेंसी लगाई जा सकती है।"

उनका कहना था," देखिए सीमावर्ती इलाक़ों में अभी जैसे हालात हैं,वैसे कभी नहीं रहे हैं। लोग उम्मीद करते हैं कि सरकार इस पर नियंत्रण करने के लिए इमरजेंसी लगाए। इसकी संभावना है। इमरजेंसी एक विकल्प है।"

यह पूछे जाने पर कि अगर इमरजेसीं लगाने का फ़ैसला लिया गया तो कब तक औपचारिक घोषणा होगी, तो उनका कहना था," अभी तो इस पर विचार ही हुआ है। स्थिति ख़राब है। कुछ मंत्री पहले भी कह चुके हैं कि आपातकाल लगना चाहिए। मैं इस संभावना से इंकार नहीं करता कि आपातकाल नहीं लगाया जाएगा। इसकी संभावना है क्योंकि हालात बहुत ख़राब हैं। सरकार इस पर विचार कर रही है।"

उल्लेखनीय है कि सरहदी सूबे में अमरीका के साथ पाकिस्तान ने अल क़ायदा के ख़िलाफ अभियान छेड़ रखा है लेकिन इन इलाक़ों में पाकिस्तानी और अमरीकी सेना को ज़बर्दस्त विरोध का सामना करना पड़ रहा है और आए दिन आत्मघाती हमले भी हो रहे हैं।

इन ख़बरों पर पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो और क्रिकेटर से नेता बने इमरान खान ने भी प्रतिक्रियाएं दी हैं।

जहां बेनज़ीर ने उम्मीद जताई कि मुशर्रफ़ ऐसा कदम नहीं उठाएंगे वहीं इमरान खान ने कहा कि अगर सरकार ऐसा कुछ करती है तो वो सरकार की कमज़ोरी को ही दर्शाएगा।

Wednesday, August 8, 2007

'बाढ़ प्रभावित इलाक़ों में महामारी का खतरा'

संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि दक्षिण एशिया में बाढ़ प्रभावित लोगों को अगर जल्दी राहत सहायता नहीं मिली तो उन्हें महामारी का सामना करना पड़ सकता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनीसेफ का कहना है कि रुका हुआ पानी मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियों का घर है और जल्दी ही ये बीमारियां फैल सकती है।

हालांकि बाढ़ प्रभावित इलाक़ों में भोजन, पानी और दवाईयां बांटी गई हैं लेकिन बाढ़ का प्रकोप इतना अधिक है कि राहत कार्य कम पड़ते जा रहे हैं।

भारत में यूनीसेफ के स्वास्थ्य प्रमुख मार्ज़ियो बाबिले का कहना है कि कई गांव अभी भी स्वास्थ्य सुविधाओं से दूर हैं।

उन्होंने कहा ' बाढ़ का रुका हुआ पानी डायरिया और अन्य बीमारियां पैदा करने का स्त्रोत है जो महामारी बन सकती है। '

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार भारत में बिहार, असम और उत्तर प्रदेश राज्य सबसे बुरी तरह प्रभावित हैं जहां प्रभावितों की संख्या दो करोड़ है।

उधर बांग्लादेश में 80 लाख और नेपाल में तीन लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं।

हालांकि कई इलाक़ों में अब बारिश बंद और पानी घट रहा है लेकिन अभी भी कई इलाक़ों में पानी भरा हुआ है।

गृह मंत्री का दौरा

भारत में गृह मंत्री शिवराज पाटिल और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने बाढ़ प्रभावित असम और बिहार राज्यों का दौरा किया है। बिहार में बाढ़ राहत और मदद न मिल पाने के कारण हज़ारों लोग नाराज़ बताए जाते हैं।

आँकड़ों के अनुसार अब तक 1428 लोग अपनी जानें गवाँ चुके हैं और पूरे देश के 192 ज़िलों से बाढ़ की ख़बरें मिल रहीं हैं।

बिहार के कई शहरों में पीने का पानी बड़ी भारी चुनौती बना हुआ है। शहरों में फिल्ट्रेशन प्लांट डूब गए हैं और गाँवों में कुएँ और हैंडपंप बेकार हो गए हैं।

गंदे पानी की वज़ह से मलेरिया,डेंगी और लेप्टोस्पाईरोसिस जैसी बीमारियों का ख़तरा बहुत ज़्यादा बढ़ गया है।

Tuesday, August 7, 2007

'तालेबान को समाप्त करने पर सहमति'

अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश और अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने तालेबान को समाप्त करने पर वचनबद्धता ज़ाहिर की है।

दोनों नेताओं के बीच अमरीकी राष्ट्रपति के आरामगाह कैंप डेविड में दो दिन तक बातचीत चली।

इसके बाद दोनों नेताओं ने एक साझा पत्रकारवार्ता को संबोधित किया। दोनों नेताओं का कहना था कि अफ़ग़ानिस्तान में काफ़ी प्रगति हुई है।

राष्ट्रपति करज़ई ने तालेबान के ख़तरे को बहुत कम कर आँका। उनका कहना था,'' तालेबान हारी हुई शक्ति हैं और इनसे मेरी सरकार को कोई ख़तरा नहीं है।''

लेकिन साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि सहयोगी देशों की यह ज़िम्मेदारी बनती है कि चरमपंथियों को पहाड़ों से उनके छुपने के स्थानों से निकालें क्योंकि वो आम नागरिकों के लिए गंभीर ख़तरा हैं।

राष्ट्रपति करज़ई ने अमरीकी और नैटो अभियान के दौरान आम नागरिकों के मारे जाने का मामला उठाया।

राष्ट्रपति बुश ने इसकी ज़िम्मेदारी तालेबान पर डाल दी। उनका कहना था कि वो अफ़ग़ान लोगों की पीड़ा समझते हैं लेकिन इसके लिए तालेबान ज़िम्मेदार हैं क्योंकि वे आम लोगों को ढाल की तरह इस्तेमाल करते हैं।

राष्ट्रपति बुश का कहना था कि अफ़ग़ानिस्तान में 50 लाख बच्चे अब स्कूल जाने लगे हैं, इनमें से एक तिहाई लड़कियाँ हैं।

हामिद करज़ई ने कहा कि तालेबान के सत्ता से बेदखल होने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हुआ है जिसकी वजह से पाँच साल से कम उम्र के 85 हज़ार बच्चे जीवित हैं।

राष्ट्रपति करज़ई की अमरीका यात्रा ऐसे समय हुई है जब अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान की सीमा से चरमपंथियों से ख़तरा बढ़ा है।

कोरियाई बंधक

करज़ई ने स्पष्ट किया कि अफ़ग़ानिस्तान में बंधक बनाए गए 21 दक्षिण कोरियाई नागरिकों की रिहाई के लिए तालेबान से कोई सौदेबाजी नहीं की जाएगी।

तालेबान ने दो दक्षिण कोरियाई लोगों की हत्या कर दी थी। उनकी माँग है कि इन बंधकों के बदले उनके नेताओं को रिहा किए जाए।

इसके पहले तालेबान के एक नेता ने बीबीसी से बातचीत में कहा था कि 'बंधकों का भविष्य इन नेताओं के हाथ में है।'

अमरीका ने भी इस सामूहिक अपहरण की कड़ी निंदा की है, उसके एक प्रवक्ता ने कहा कि "तालेबान अपने आतंकवादी तौर-तरीक़ों से बाज़ नहीं आ रहा है।"

ईरान के मामले पर दोनों नेताओं के बीच मतभेद नज़र आए। बुश ने इन्हें स्पष्ट भी कर दिया।

उनका कहना था कि वो राष्ट्रपति करज़ई के उस बयान से सहमत नहीं हैं जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान अफ़गानिस्तान के मामले में बाधा नहीं डाल रहा है बल्कि सहायता कर रहा है।

राष्ट्रपति बुश ने कहा कि ईरान भला देश नहीं है और अमरीका उसे अलग थलग करने की कोशिशें जारी रखेगा।

उल्लेखनीय है कि इस वर्ष अमरीका अफ़ग़ानिस्तान को 10 अरब डॉलर की सहायता दे रहा है जिसका उद्देश्य देश के सुरक्षा तंत्र को मज़बूत बनाना है।

Monday, August 6, 2007

सलमान ख़ान जोधपुर की अदालत में पेश होंगे

फ़िल्म अभिनेता सलमान ख़ान चिंकारा शिकार मामले में सुनवाई के लिए जोधपुर पहुँच गए हैं। जोधपुर के सत्र न्यायालय में सोमवार को इस मामले की सुनवाई होगी।

उल्लेखनीय है कि राजस्थान में जोधपुर की एक अदालत ने 10 अप्रैल, 2006 को सलमान ख़ान को चिंकारा के शिकार के मामले में दोषी क़रार देते हुए पाँच साल की जेल और 25 हज़ार रुपए के जुर्माने की सज़ा सुनाई थी।

फ़ैसले के बाद अदालत ने जोधपुर केंद्रीय कारागार भेज दिया गया था जहाँ उन्होंने तीन रातें गुजारीं थीं। ज़मानत मिलने के बाद वो जेल से बाहर आ पाए थे।

उन्होंने निचली अदालत के फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील की है और कहा है कि वो निर्दोष हैं।

सलमान ख़ान के वकील एचएम सारस्वत का कहना था कि मामले की सोमवार को सुनवाई होगी और हम इस पर बहस के लिए तैयार हैं।

शिकार का मामला

चिंकारा के शिकार का मामला 1998 का है। सलमान पर आरोप है कि उन्होंने 1998 में फ़िल्म 'हम साथ साथ हैं' की शूटिंग के दौरान चिंकारा को मारा था।

इस मामले में जोधपुर के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत ने सलमान ख़ान को वन्य जीव संरक्षण क़ानून के तहत शिकार का दोषी क़रार देते हुए सज़ा सुनाई थी।

वन्य जीवन क़ानून की धारा 51 और 52 के तहत अधिकतम छह साल की सज़ा का प्रावधान है।

इससे पहले काले हिरण के शिकार के लिए एक अन्य मामले में सलमान ख़ान को एक साल की जेल और पाँच हज़ार रुपए जुर्माने की सज़ा सुनाई गई थी।

अदालत ने फ़िलहाल उस सज़ा पर स्थगन आदेश देते हुए कहा है कि सज़ा तब तक स्थगित रखी जाए जब तक अदालत इस मामले में की गई अपील की सुनवाई कर रही है।